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आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: छांगुर बाबा का भतीजा सब्रोज गिरफ्तार

बलरामपुर  उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में विवादों में घिरे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के नजदीकी लोगों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं। गुरुवार देर रात 1 बजे स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उनके भतीजे मोहम्मद सब्रोज को गिरफ्तार कर लिया। सब्रोज उतरौला थाना क्षेत्र के रेहरा माफी गांव का निवासी है, जहां छांगुर बाबा ने अपनी पत्नी को 2 बार चुनाव लड़वाया था। मिली जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ की टीम गुरुवार रात लगभग 1 बजे उतरौला बस स्टॉप पर पहुंची, जहां सब्रोज मोटरसाइकिल पर खड़ा था। टीम ने उसे रोककर पूछताछ शुरू की और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। मोहम्मद सब्रोज का नाम पहले से ही एटीएस की एफआईआर में दर्ज था। इस गिरफ्तारी के बाद छांगुर बाबा के नेटवर्क के अन्य सहयोगियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एसटीएफ पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एटीएस गवाह पर हमला इससे पहले अवैध धर्मांतरण के मामले में बयान ना बदलने पर छांगुर बाबा के गुर्गों ने एटीएस के गवाह हरजीत कश्यप पर हमला किया था। हरजीत को बुरी तरह से पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हरजीत कश्यप ग्राम रसूलाबाद के निवासी हैं और उन्होंने छांगुर पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। हरजीत के अनुसार, छांगुर के गुर्गों रियाज, कमालुद्दीन और नव्वाब ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि रसूलाबाद गांव पाकिस्तान जैसा है, और यहां रहकर मुसलमानों से बगावत करने पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही धमकी दी कि योगी सरकार के बाद उनकी कार्रवाई की जाएगी। बयान देने के बाद हुई मारपीट हरजीत ने बताया कि उन्होंने 3 जुलाई को लखनऊ में छांगुर बाबा के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में बयान दिया था। इसके बाद 7 जुलाई को वे दवा लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे थे, तभी उतरौला चौराहा के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें रोककर पीटना शुरू कर दिया और 24 घंटे के अंदर लखनऊ जाकर बयान बदलने की धमकी दी। प्रभारी निरीक्षक उतरौला कोतवाली अवधेश राज सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।   छांगुर के करीबी की तलाश एटीएस की टीम बीते मंगलवार रात गोंडा के धानेपुर क्षेत्र के रेतवागाड़ा गांव में छांगुर बाबा के एक करीबी की तलाश में पहुंची। जांच के दौरान रमजान नाम के शख्स का नाम सामने आया। वह कव्वाली कार्यक्रमों में ढोलक बजाता था और इसी सिलसिले में उसकी मुलाकात छांगुर से हुई थी। कहा जाता है कि छांगुर ने रमजान को धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार रमजान की 2024 में मौत हो गई। एटीएस ने रमजान के नाम वाले एक अन्य व्यक्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई है। प्रशासन इस पूरे मामले में सतर्क है और छांगुर बाबा के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहा है।  

वस्त्र उद्योग में नया युग: मध्यप्रदेश बनेगा वैश्विक विनिर्माण का हब – CM डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पेन यात्रा के दूसरे दिन का फोकस वैश्विक कपड़ा एवं फैशन क्षेत्र के दिग्गजों से निवेश संवाद का रहा। स्पेन के गैलिसिया स्थित इंडिटेक्स मुख्यालय में हुई बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को “हरित, लागत-प्रतिस्पर्धी और ट्रेसिबल उत्पादन हब” के रूप में प्रस्तुत किया। बैठक में इंडीटेक्स समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापारिक साझेदारी और सतत निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार टेक्सटाइल क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इंडिटेक्स जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की उपस्थिति से राज्य में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और हरित उत्पादन को गति मिलेगी। हम इस साझेदारी को सभी स्तरों पर समर्थन देने को तत्पर हैं। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल सेक्टर के लिए आदर्श स्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश के शीर्ष कच्चा कपास उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ सालाना लगभग 18 लाख बेल्स (3 लाख मीट्रिक टन) का उत्पादन होता है। राज्य में 15 से अधिक टेक्सटाइल क्लस्टर हैं इसमें इंदौर, मंदसौर, बुरहानपुर, उज्जैन, नीमच जैसे केंद्र टेक्सटाइल उत्पादन में अग्रणी हैं। पीएम मित्रा पार्क: इंडिटेक्स के लिए सुनहरा अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धार जिले में भारत सरकार की पीएम मित्रा योजना के अंतर्गत विकसित हो रहा टेक्सटाइल मेगा पार्क इंडिटेक्स जैसे वैश्विक ब्रांडों के लिए सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग का आदर्श केंद्र बन सकता है।मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इस पार्क में गारमेंटिंग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। ऑर्गेनिक कॉटन में भागीदारी का आह्वान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश भारत का अग्रणी ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादक है। राज्य में यहां विशेषकर निमाड़ और मालवा क्षेत्रों में बहुतायत में कॉटन का उत्पादन होता है। यहाँ GOTS-सर्टिफाइड किसान समूह सक्रिय हैं, जो इंडिटेक्स की सस्टेनेबिलिटी और ट्रेसिबिलिटी नीतियों के लिए आदर्श साझेदार हो सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फार्मर-टू-फैब्रिक वैल्यू चेन पर इंडिटेक्स के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया। ESG फ्रेमवर्क में मेल-जोल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार (ईएसजी) (Environment, Social, Governance) मूल्यों को बढ़ावा देती है। वॉटर रिसायक्लिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और डीसेंट वर्क स्टैंडर्ड्स राज्य में लागू हैं। इंडिटेक्स की जिम्मेदार सोर्सिंग नीति के साथ मध्यप्रदेश की दृष्टि पूरी तरह से मेल खाती है। निर्यात और वैश्विक संभावनाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य से टेक्सटाइल और गारमेंट का वार्षिक निर्यात 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक है, जिसमें यूरोपीय संघ प्रमुख है। उन्होंने बताया कि इंडिटेक्स जैसे ब्रांड की साझेदारी से यह आंकड़ा 10 हजार करोड़ रूपये तक पहुँच सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। नीतिगत समर्थन और लॉजिस्टिक सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नवीन औद्योगिक एवं निर्यात नीति – 2025 की विशेषताओं को साझा किया, जिसमें भूमि पर 90% सब्सिडी, मशीनरी पर 40% पूंजी सहायता, ग्रीन टेक्नोलॉजी पर 50% सहायता और ऋण पर ब्याज सब्सिडी आदि शामिल हैं। इंडीटेक्स को साझेदारी का निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडिटेक्स को आमंत्रण दिया कि वह पीएम मित्रा पार्क में सप्लाई चेन एंकर के रूप में भागीदारी बने। उन्होंने एक ऑर्गेनिक कॉटन ट्रेसिंग प्लेटफॉर्म और ई एस जी सर्टिफाइड एमएसएमई के साथ वेंडर डेवेलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ करने का सुझाव भी दिया। उल्लेखनीय है किस्पेन की Inditex (Industria de Diseño Textil S.A.) दुनिया की बड़ी फैशन रिटेल कंपनियों में से एक है। इसके अंतर्गत ज़ारा, मैसिमो दुत्ती, बेरशका, बुल एंड बीयर जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स हैं। कंपनी का मुख्यालय गैलिसिया के आर्तेइशो में है। यह अपने फास्ट फैशन मॉडल, ट्रेसिबल सप्लाई चेन और टिकाऊ प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध है। भारत में इंडिटेक्स, टाटा समूह के साथ ज़ारा और मैसिमो दुत्ती ब्रांड्स के माध्यम से कार्यरत है।  

इंदौर सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़ श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित

मध्यप्रदेश अब स्वच्छता में देश का बना अग्रदूत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में मध्य प्रदेश फिर अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़ श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में भोपाल दूसरे, जबलपुर 5वें और ग्वालियर 14वें स्थान पर 3 से 10 लाख जनसंख्या श्रेणी में उज्जैन, देश के शीर्ष शहरों में शामिल ग्वालियर को मिला प्रॉमिसिंग शहर का स्टेट अवार्ड 50 हजार से 3 लाख जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में देवास प्रथम स्थान पर मुख्यमंत्री ने दी प्रदेशवासियों और नगरीय निकायों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के सम्मान समारोह में इंदौर को 'सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़' श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया जाना प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उल्लेखनीय है कि विगत 7 वर्षों से स्वच्छ शहरों की श्रेणी में इंदौर ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। इंदौर के साथ भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं बुधनी को भी विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि पूरा मध्यप्रदेश अब स्वच्छता में देश का अग्रदूत बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सफलता के लिए प्रदेश के समस्त स्थानीय निकायों के नागरिकों, विशेषकर स्वच्छताकर्मियों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्पेन यात्रा के दूसरे दिन जारी संदेश में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने हमेशा की तरह एक बार फिर टॉप किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सभी राज्यों को स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता की विभिन्न श्रेणियों में अग्रणी शहरों की एक लीग बनाई गई, जिसमें इंदौर को शीर्ष स्थान मिला। इंदौर स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार-2024 में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की नवीन श्रेणी "स्वच्छ लीग अवार्ड" में सर्वश्रेष्ठ शहर बना है। धार्मिक नगरी उज्जैन को स्वच्छ लीग अवार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छ लीग अवार्ड में धार्मिक नगरी उज्जैन को 3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शीर्ष स्थान मिला है। इसी प्रकार 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में बुदनी सर्वश्रेष्ठ शहर बना है। जबकि 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में भोपाल दूसरे, जबलपुर पांचवें और ग्वालियर 14वें स्थान पर रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में स्वच्छता में प्रॉमिसिंग शहर का स्टेट अवार्ड ग्वालियर को मिला। पचास हजार से तीन लाख जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में देवास प्रथम स्थान पर रहा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी पहले ही बन चुका है।  

MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 29वें मुख्य न्यायाधिपति की शपथ लेने पर न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका अनुभव, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि और अनुशासन निश्चित ही भारतीय न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि सचदेवा अपने कार्यकाल में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, मौलिक अधिकारों की प्रतिष्ठा और शीघ्र एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें तथा न्याय एवं संविधान की गरिमा को नई दिशा दें, यही शुभकामनाएं हैं। 

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लंबित कार्यों और सत्र तैयारियों की समीक्षा

भोपाल  मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारी और लंबित कार्यों की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में शून्यकाल, अपूर्ण उत्तर, आश्वासन, लोकलेखा समिति की सिफारिशें, विधानसभा में विभागों के प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर चर्चा की गयी। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग प्रमुख अपने काम समय-सीमा में करें। कार्य की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाये। मुख्य सचिव जैन ने बैठक में 5 वीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव कांफ्रेंस की तैयारियों के भी निर्देश दिये। उन्होंने अतिरिक्त कोर्ट केस, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग के प्रकरणों में राज्य शासन की ओर से समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, जे.एन. कंसोटिया, अशोक वर्णवाल, संजय शुक्ल, मनु श्रीवास्तव, श्रीमती रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल, संदीप यादव सहित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं उप सचिव उपस्थित थे।  

सरकारी स्कूल में शिक्षक पर धर्मांतरण का आरोप, धार्मिक भावना आहत करने को लेकर FIR दर्ज

 उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के झारडा थाना क्षेत्र के ग्राम नागपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक शकील मोहम्मद पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर भारत माता की तस्वीर जलाने, देवी-देवताओं की तस्वीरें तोड़ने और छात्रों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप है।  कुरान पढ़ने और नमाज सीखने के लिए डाला दबाव  छात्र अनुराग राठौर और अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि 11 जुलाई को छुट्टी के बाद शकील मोहम्मद ने कक्षा में धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया। उन्होंने भारत माता और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरों को जलाया और तोड़ा। छात्रों का कहना है कि शिक्षक ने उन्हें कुरान पढ़ने और नमाज सीखने के लिए दबाव डाला। साथ ही, उन्होंने धमकी दी कि यदि किसी ने इस बारे में बताया तो उनकी जान ले लेंगे। ग्रामवासी रोहित राठौर की शिकायत के आधार पर झारडा थाना पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने) और 351(3) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।  हिंदू संगठनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश  एसडीओपी सुनील कुमार वरकडे ने बताया कि मामला संवेदनशील है, और सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने थाने का घेराव कर शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।