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नर्मदापुरम में 3.0 गीगावॉट सोलर सेल यूनिट की तैयारी, 700 से अधिक रोजगार सृजन की संभावना- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  दुबई यात्रा के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ग्रियू एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं निदेशक विनय ठडानी और प्रतिनिधियों ने मुलाक़ात की। बैठक में नर्मदापुरम जिले में प्रस्तावित 3.0 गीगावॉट क्षमता की सोलर सेल परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुकूल औद्योगिक सहायता पर विस्तार से चर्चा हुई। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश की भागीदारी को सशक्त करेगी, बल्कि इससे 700 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावनाएं भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को आवश्यक प्रोत्साहन देने और उद्योगों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह परियोजना राज्य के पर्यावरणीय लक्ष्यों को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करेगी। बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि मध्यप्रदेश सतत ऊर्जा नवाचार का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है।  

जैन समाज ने की मुख्यमंत्री साय से मुलाकात, सामाजिक विषयों पर हुई चर्चा

विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।

अत्यंत दुर्लभ घड़ियाल के 30 बच्चे और 36 बटागुर कछुए किये जप्त

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की बड़ी कार्रवाई भोपाल प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव के निर्देश पर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा सूचना तंत्र विकसित कर क्षेत्रीय इकाई भोपाल, शिवपुरी के साथ संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए सबलगढ़-मुरैना मार्ग पर घेराबंदी कर जौरा शहर थाने के पास 12 जुलाई को 3 व्यक्तियों से अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के घड़ियाल के 30 बच्चे और 36 बटागुर कछुए जप्त करने में सफलता प्राप्त की है। विवरण में बताया गया कि फोर्स द्वारा वाहन रोककर तलाशी ली गयी, जिसमें सवार 3 व्यक्ति विजय पिता शाशिकांत गोंड निवासी थाटीपुर ग्वालियर, राजू आदिवासी पिता जगदीश निवासी मउरानीपुर जिला झांसी और रामवीर सिंह पिता शिव सिंह निवासी सूर्य बिहार कॉलोनी ग्वालियर के पास से अत्यंत दुर्लभ 30 घड़ियाल के बच्चे और 14 बटागुर कछुए की जप्ती की गयी। स्टेट टाइगर फोर्स द्वारा आरोपियों से पूछताछ के बाद आरोपी विजय गोंड के ग्वालियर स्थित निवास से 22 बटागुर कछुए जप्त किये गये। इन आरोपियों पर वन एक्ट के तहत कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया है इसमें स्थानीय पुलिस एवं वन मण्डल मुरैना द्वारा भी सहयोग किया गया। इन तीनों आरोपियों को शिवपुरी न्यायालय में प्रस्तुत कर फारेस्ट रिमाण्ड पर लेकर पूछताछ की जायेगी। इन आरोपियों पर पूर्व में भी इस प्रकार के प्रकरण दर्ज हैं, जिस पर इन्हें सजा भी हो चुकी है। पूछताछ के दौरान बताया गया कि यह जलीय जीव कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश भेजे जा रहे थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव ने बताया किजलीय जीव ग्वालियर की चंबल नदी में मुख्यत: पाये जाते हैं, जो अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के हैं। केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा इन्हें बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इन संकटप्रद प्रजातियों का जलीय पारिस्थितिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। अन्य देशों के अलावा मुख्यत: पश्चिमी यूरोपीय देश में इनकी भारी डिमाण्ड होने के कारण इनकी तस्करी की जाती है।  

राज्य में 1,79,000 बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी

रायपुर,  राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए  उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है। चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से आया राजधानी भोपाल में निवेश, केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स स्थापित करेगी भोपाल में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई

352 करोड़ के निवेश से सृजित होंगे 1000 से अधिक रोजगार के अवसर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अग्रणी बनाने के प्रयास लगातार किये जा रहे है। इसी क्रम में केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (KEMPL) द्वारा भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई की स्थापना की जा रही है। केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड (KTIL) की इस अनुषांगिक कंपनी की यह इकाई लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। इसमें 352 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और इससे 1000 से अधिक कुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इकाई में 2026 से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में उद्योग संवर्धन के लिए बनाई गई नीतियों में मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025 भी शामिल है। यह नीति वैश्विक और देशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। राज्य सरकार की इंडस्ट्री-फ्रैंडली नीतियों, उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरर्स प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने कहा कि केन्स टेक्नोलॉजी की इकाई भोपाल में स्थापना होने से यह स्पष्ट है कि आईटी और संबंधित क्षेत्रों के लिये बनाई गई नीतियां उद्योग जगत को राज्य में निवेश के लिये आकर्षित कर रही है। केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड के सीईओ श्री रघु पनिक्कर ने कहा कि मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई की स्थापना करना कंपनी के लिए अत्यंत उत्साहजनक है। प्रदेश की सेमीकंडक्टर पॉलिसी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सक्रिय सहयोग इकाई की स्थापना सुगम हो सकी है। नई इकाई से कंपनी वैश्विक मांग पूरा कर भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पॉवर को अधिक सशक्त करेगी। देश में आठ उन्नत निर्माण इकाइयों का संचालन कर रही केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड की भोपाल में स्थापित होने जा रही यह इकाई कंपनी का मध्य भारत में पहला बड़ा निवेश है। कंपनी ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, औद्योगिक, चिकित्सा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और अंतरिक्ष क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाती है। इस परियोजना में सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी (SMT) लाइनों की स्थापना की जाएगी, जो विभिन्न उद्योगों के लिए हाई-प्रेसीजन इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और उत्पादों का निर्माण करेंगी। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों से सीसीआईपी (Collaborative Centre for Innovation and Policy) के माध्यम से इस इकाई की स्थापना हो रही है।  

रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के सुदृढ़ीकरण से विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास को मिलेगी गति : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

समय की मांग अनुसार नवीन कोर्स करें संचालित दीर्घकालिक विकास योजना पर विस्तृत चर्चा कर दिए निर्देश रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज विंध्य क्षेत्र का एक प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थान है, जिसकी सुदृढ़ता न केवल क्षेत्रीय तकनीकी शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति देगी। उन्होंने कहा कि रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के तकनीकी सशक्तिकरण से आने वाले समय में विंध्य अंचल उच्च शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होगा। यह संस्थान स्थानीय युवाओं की आकांक्षाओं को साकार करने के साथ-साथ प्रदेश की तकनीकी क्षमताओं को भी विस्तार देगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज की दीर्घकालिक विकास योजना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री विवेक पोरवाल एवं रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.पी. तिवारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने हेतु दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि शिक्षण गुणवत्ता के लिए योग्य शिक्षकों की भर्ती अहम है। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान पाठ्यक्रम के विधिवत संचालन के लिए स्वीकृत पदों की पूर्ति के साथ नवीन पाठ्यक्रम के लिए विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार उत्कृष्ट शिक्षण संकाय होता है। सभी विभागों में योग्य, अनुभवी एवं नवाचारोन्मुख फैकल्टी की शीघ्र भर्ती की जाए ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा मिल सके। इसके लिए रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज को विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करे। समय की मांग अनुसार नवीन कोर्स का संचालन करें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित योजनाओं को शीघ्र अनुमोदन की प्रक्रिया में लाया जाए। प्राचार्य डॉ. तिवारी ने कॉलेज की 5 वर्षीय एवं 20 वर्षीय सुदृढ़ीकरण योजना प्रस्तुत की। उन्होंने 88.30 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, अधोसंरचना विकास और अन्य सुविधाओं के विस्तार का रोडमैप प्रस्तुत किया। प्रस्तावित योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल व्हीकल टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन एवं फायर टेक एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग जैसे समसामयिक विषयों में 5 नवीन यूजी प्रोग्राम तथा साइबर सिक्योरिटी, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, डिजिटल कम्युनिकेशन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन डिजाइन, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, एडवांस प्रोडक्शन सिस्टम सहित 9 पीजी प्रोग्राम प्रारंभ किए जाने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही 17.53 करोड़ रुपये की लागत से सेंट्रल लाइब्रेरी, 12.33 करोड़ रुपए लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 1.45 करोड़ रुपए लागत से इन्क्यूबेशन सेंटर के निर्माण कार्य विकास योजना में शामिल है।  

सावन का पहला सोमवार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के चरणों में नमन किया

पहली सवारी में शामिल श्रद्धालुओं का किया स्वागत भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सावन का पहला सोमवार, बाबा महाकाल की सवारी, हम सबका सौभाग्य है। सावन सोमवार की सवारी में बाबा महाकाल अपने भक्तों के हालचाल जानने के लिए साल में एक बार नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर बाबा महाकाल के श्री चरणों में नमन और वंदन कर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा की सवारी में लघु मध्यप्रदेश के दर्शन हों, इसके लिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि बाबा महाकाल प्रदेश के मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, धार, झाबुआ एवं छिंदवाड़ा जिले के जनजातीय भाई-बहनों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले पुरा वाद्य-यंत्रों के साथ ही अपनी यात्रा पर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रीगण भी हर सावन सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होकर प्रदेश की खुशहाली के लिए बाबा का आशीर्वाद पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सोमवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहृलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल सहित अन्य मंत्रीगण भी बाबा की सवारी में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चूंकि वे दुबई प्रवास पर हैं, इसलिए बाबा की सवारी के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बाबा की सवारी उज्जैन की गरिमा को और बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री ने बाबा की सवारी में शामिल होने वाले सभी मंत्रीगण को अपनी ओर से शुभकामनाएं भी दी हैं।  

दुबई में एक वार्षिक ‘MP-JITO निवेश फोरम’ की स्थापना करने पर भी विचार

दुबई यात्रा का दूसरा दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में JITO प्रतिनिधियों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्किलिंग, नवकरणीय ऊर्जा, टेक्नोलॉजी व संयुक्त निवेश फोरम की संभावनाओं पर चर्चा   दुबई में एक वार्षिक 'MP-JITO निवेश फोरम' की स्थापना करने पर भी विचार  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दूसरे दिन जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) के प्रतिनिधियों के साथ निवेश और सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा की। उन्होंने मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश, स्किलिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के सरकार के विजन को साझा किया और JITO समुदाय को प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, स्थायित्व, दक्ष मानव संसाधन और अनुकूल औद्योगिक नीतियों के कारण निवेश के लिए देश का सर्वाधिक उपयुक्त राज्य बन चुका है। सरकार निवेशकों को न केवल आकर्षित कर रही है, बल्कि ज़मीन आवंटन से लेकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन तक सक्रिय सहयोगी की भूमिका भी निभा रही है। बैठक के दौरान मध्यप्रदेश और JITO के बीच संभावित सहयोग के अनेक बिंदु पर चर्चा हुई जिनमें दुबई में एक वार्षिक 'MP-JITO निवेश फोरम' की स्थापना करने पर भी विचार किया गया। इस फोरम के माध्यम से मध्यप्रदेश की लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रिक वाहन, फूड प्रोसेसिंग और सेमीकंडक्टर जैसी प्रमुख परियोजनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर JITO प्रतिनिधियों को आगामी निवेश फोरम के आयोजन का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य की नवीन लॉजिस्टिक्स नीति न केवल निर्यातकों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि अधोसंरचना डेवलपर्स के लिए भी अनेक प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने JITO से जुड़े टेक्सटाइल और फूड सेक्टर के कॉरपोरेट्स को उज्जैन, मंदसौर और बसई जैसे क्षेत्रों में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुझाव दिया कि दुबई स्थित कौशल विकास संस्थान मध्यप्रदेश के ग्लोबल स्किल पार्क के साथ मिलकर संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करे, जिससे उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ODOP यानि वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत दालें, तिलहन और प्रोसेस्ड फूड जैसे कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने के लिए JITO उद्यमियों के साथ समन्वय को प्राथमिकता दे रही है। बैठक के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा और ड्रोन जैसे भविष्य के उद्योगों पर भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने JITO से जुड़ी क्लीनटेक कंपनियों को प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिये आमंत्रित किया और बताया कि राज्य की नवकरणीय ऊर्जा नीति इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मध्यप्रदेश को मिले ऐतिहासिक निवेश प्रस्तावों के बाद अब सरकार प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश केवल आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है, जहां नए उद्यम, रोजगार और नवाचार को साकार रूप मिलेगा। बैठक में JITO के पदाधिकारी, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और प्रमुख उद्यमी उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे मध्यप्रदेश में स्किलिंग, टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन और सामाजिक परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। JITO प्रतिनिधियों ने प्रदेश के साथ दीर्घकालिक औद्योगिक संबंधों में रुचि जताई और एक विस्तृत निवेश संवाद आयोजित करने का प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री को सौंपा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लुलु समूह के निदेशक सलीम से वन-टू-वन चर्चा

मध्यप्रदेश में खाद्य एवं प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना के लिए किया आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दुबई निवेश यात्रा के दूसरे दिन दौरान लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के निदेशक श्री सलीम एम.ए. से वन-टू-वन मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुलु समूह के वैश्विक अनुभव और नेटवर्क की सराहना करते हुए प्रदेश में अत्याधुनिक “खाद्य एवं कृषि-प्रसंस्करण केंद्र” की स्थापना के लिए आमंत्रित किया, जिसमें फल, सब्ज़ियां, मसाले और अनाज का वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ाव सुनिश्चित हो सके। बैठक में मध्यप्रदेश में खुदरा व्यापार, कृषि प्रसंस्करण और खाद्य उद्योग में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुलु समूह के निदेशक श्री सलीम को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे प्रथम और द्वितीय श्रेणी के शहरों में आधुनिक खुदरा विक्रय केंद्र तथा विशाल विपणन केंद्र (हाइपरमार्केट) की स्थापना के लिये आमंत्रित किया। बैठक में इंदौर-निमाड़ क्षेत्र में ताजे उद्यानिकी एवं कृषि उत्पाद एकत्रीकरण और वितरण केंद्र की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) और एमपी एग्रो के सहयोग से लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में लुलु समूह की भागीदारी को लेकर चर्चा हुई जिससे प्रदेश में रोजगार और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लुलु जैसे वैश्विक निवेशकों की भागीदारी से मध्यप्रदेश को खाद्य एवं कृषि क्षेत्र में वैश्विक बाजार से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा। वहीं लुलु समूह ने राज्य सरकार की नीतियों और दूरदर्शिता की सराहना करते हुए सहयोग और निवेश की प्रबल इच्छा जताई।  

खाद संकट पर विपक्ष का वार, मानसून सत्र में गूंजा हंगामा

रायपुर विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में खाद-बीज संकट का मुद्दा उठाया. विपक्ष की ओर से खाद-बीज की कमी के मुद्दे पर स्थगन लाया गया, लेकिन मंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष के स्थगन को अग्राह्य करने पर वेल में आकर कांग्रेस के विधायकों की जमकर नारेबाजी की. विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित की गई. स्थगन की सूचना देते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि पूरे राज्य में खाद की भारी किल्लत है. किसान इससे दुःखी हैं, आक्रोशित हैं. इस पर स्थगन स्वीकार कर चर्चा कराई जाए. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खाद संकट से किसान हलाकान है. सरकार खाद उपलब्ध कराने में नाकाम है. किसान बाहर बाजार से दोगुने भाव मे खाद खरीदने में मजबूर हैं. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक कर रहे हैं, वैकल्पिक खाद के उपयोग की भी जानकारी प्रशिक्षण के जरिए दी गई. फास्फेटिक खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई, इसलिए हमने बहुत पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की. नैनो उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा की गई है. बड़ी तादाद में इसका भंडारण भी किया जा चुका है. मंत्री ने बताया कि वैश्विक कारणों से रासायनिक खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई. एनपीके उर्वरक का भंडारण लक्ष्य से ज्यादा हुआ है. पोटाश सहित अन्य खाद का भी भंडारण हुआ है. 28 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोअनी हो चुका है, जो पहले से ज्यादा है. मंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष का स्थगन अग्राह्य किया, स्थगन अग्राह्य होने और मंत्री के वक्तव्य से असंतुष्ट कांग्रेस के विधायकों ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी. विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई.