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अब फोटो से होगी स्कूलों की हाज़िरी! हर गतिविधि पर शिक्षा विभाग की पैनी नजर

सुबह 9:30 बजे तक स्कूल पहुंचना हुआ अनिवार्य! देर से आने वालों की होगी अगले दिन ही एंट्री   पटना, बिहार के सरकारी स्कूलों में अब अनुशासन और पढ़ाई से समझौता नहीं होगा। शिक्षा विभाग ने स्कूलों की रोज़ाना ऑनलाइन मॉनीटरिंग शुरू कर दी है। खास बात यह है कि अब स्कूलों की गतिविधियों की तस्वीरें खिंचवाकर हर दिन जांच की जा रही है। किस स्कूल में प्रार्थना हुई, कितने बच्चे-शिक्षक मौजूद रहे और पढ़ाई कैसे हुई, सबका फोटो सबूत विभाग तक पहुंच रहा है। इतना ही नहीं स्‍कूल देर से आने वालों की भी अब इंट्री नहीं हो सकेगी। एस सिद्धार्थ की पहल पर हुई ये व्‍यवस्‍था शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ की पहल पर यह पूरी व्यवस्था बनाई गई है। विभाग ने 20, 21 और 22 अगस्त को राज्य के सभी 38 जिलों से तीन-तीन स्कूलों की तस्वीरें रैंडम तरीके से मंगवाकर समीक्षा की। नतीजा ये रहा कि लगभग सभी स्कूलों में तय दिशा-निर्देश के अनुसार गतिविधियां होती पाई गईं। चेतना सत्र से शुरू होती है सुबह सुबह 9:30 बजे तक शिक्षक और छात्र दोनों को स्कूल पहुंचना अनिवार्य है। इसके बाद आधे घंटे का चेतना सत्र होता है, जिसमें प्रार्थना, बिहार राज्य गीत, राष्ट्रगीत, सामान्य ज्ञान, प्रेरक कहानियां और बच्चों के नाखून, बाल व यूनिफॉर्म की जांच शामिल है। स्कूल शुरू होने से 15 मिनट पहले राष्ट्रगान बजाया जाता है और उसके बाद मेन गेट बंद कर दिया जाता है। देर से आने वाले बच्चों को अगले दिन ही प्रवेश मिलता है। पहली तीन घंटियों में सिर्फ पढ़ाई शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि स्कूल की पहली तीन घंटियों में केवल गणित, विज्ञान और हिंदी या अंग्रेजी की पढ़ाई होगी। ताकि बच्चों में गणितीय कौशल, वैज्ञानिक सोच और भाषा पर पकड़ विकसित हो सके।  डॉ. सिद्धार्थ का मानना है कि इस सख्त मॉनीटरिंग से सरकारी स्कूलों का अनुशासन और पढ़ाई दोनों बेहतर होंगे। विभाग के इस कदम ने स्कूलों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है और अब सभी स्कूल अलर्ट मोड में हैं। फोटो सबूत से निगरानी मॉनीटरिंग के लिए हर फोटो में स्कूल का स्थान (आक्षांस-देशांश), समय और अन्य डिटेल दर्ज रहती है। किसी भी समय विभागीय अधिकारी फोटो मांग सकते हैं और संबंधित स्कूल को उपलब्ध कराना होगा। अगर निर्धारित समय पर गतिविधियां नहीं होती हैं तो स्कूल प्रमुख से लिखित जवाब तलब होता है। लापरवाही पर कार्रवाई भी तय की गई है।

बिहार के 534 प्रखंडों में बन रहे आउटडोर स्टेडियम, आधे से ज्यादा पूरे

257 प्रखंडों में स्टेडियम पूरे, जल्‍द गांवों में ही मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग 534 में से 257 स्टेडियम पूरे! बाकी का काम तेजी से होगा पूरा, खेल विभाग सख्त निर्देश पटना,  गांव की मिट्टी सोना उगलने के लिए तैयार हो रही है। बिहार सरकार ने 534 प्रखंडों में आउटडोर स्टेडियम बनाने का लक्ष्य रखा था। अब अच्छी खबर ये है कि इनमें से 257 प्रखंडों में स्टेडियम पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। यानी बिहार में भी खेल का ऐसा माहौल तैयार होगा। जिससे बिहार की ताकत मैदान पर दिखेगी और खिलाड़ी देश का नाम रौशन करेंगे। खेल विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 46 प्रखंडों में स्‍टेडियम बनाने का काम तेजी से चल रहा है। जिनमें से ज्‍यादातर स्‍टेडियम का काम अब अपने आखिरी चरण पर है। जहां काम रुका है, तुरंत पूरा कराएं : बी राजेंद्र खेल विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केवल 29 प्रखंडों में आउटडोर स्‍टेडियम बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है लेकिन जल्‍द ही इस पर निर्माण कार्य शुरू होने वाले हैं। बता दें कि 48 प्रखंडों में 10 स्टेडियम अधूरे फिलहाल अधूरे हैं। खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र ने भवन निर्माण निगम और जिलाधिकारियों को साफ निर्देश दिया है। जहां काम रुका है, उसे तुरंत शुरू कराया जाए। खिलाड़ियों के लिए सुनहरा मौका बताते चलें कि इन स्टेडियमों में एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल ग्राउंड, कबड्डी और वॉलीबॉल कोर्ट होंगे। इसके साथ ही इन ग्राउंड में हॉकी खेलने की सुविधा भी होगी। खास बात यह है कि यहां प्रशिक्षकों की तैनाती भी की जाएगी। जिसके लिए बहाली प्रक्रिया जल्‍द शुरू की जाएगी। ताकि खिलाड़ियों को गांव और कस्बों में ही राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिल सके। बदलेगा बिहार का खेल परिदृश्य बिहार सरकार और नीतीश कुमार की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि बिहार की धरती से मेडल जीतने वाले खिलाड़ी निकलें। माना जा रहा है कि बिहार में खेल का माहौल बनने के बाद सीएम नीतीश कुमार का ये सपना पूरा होगा। खेल विभाग के अधिकारियों की माने तो सभी स्टेडियम बनने के बाद बिहार के छोटे-छोटे गांवों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलेंगे। खेल प्रेमियों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अब उन्हें राजधानी या बड़े शहर जाने की मजबूरी नहीं होगी।

बड़े पर्दे पर दिखेगा गोटमार मेले का अनोखा रंग, फिल्म की शूटिंग की तैयारी शुरू

पांढुर्णा मध्यप्रदेश के पांढुर्णा का प्रसिद्ध गोटमार मेला अब जल्द ही बड़े परदे पर दस्तक देने जा रहा है। पांढुर्णा की मिट्टी, जाम नदी के पत्थर और गोटमार की कहानी, जल्द ही बड़े परदे पर गूंजेगी। मुंबई की पल्स मीडिया और क्रेजी बैग्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने गोटमार पर फिल्म बनाने का ऐलान किया है। फिल्म निर्माण से पहले परंपरा और लोक गतिविधियों का गहन अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को मुंबई से एक विशेष दल पांढुर्णा पहुंचा। इस दल में निर्माता सौरभ गौड़, संगीत निर्देशक शैल आर. सैनी, कार्यकारी निर्माता दिव्यांश मिश्रा, अपार जैन, और प्रमुख सहयोगी जितेंद्र परमार, दीपक कुशवाह व उत्कर्ष चौधरी शामिल थे। टीम ने किया स्थल का दौरा पांढुर्णा पहुंचकर दल ने सबसे पहले गोटमार मेले की आराध्या मां चंडिका के दर्शन किए। इसके बाद टीम ने गोटमार स्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर इस अनूठे मेले की परंपराओं और उससे जुड़ी मान्यताओं को समझा। मीडिया से चर्चा में निर्माता सौरभ गौड़ ने बताया- “गोटमार मेला अपनी अलग ही पहचान रखता है। इस परंपरा में आस्था, लोक संस्कृति और जनमानस की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हमारी कोशिश है कि फिल्म के माध्यम से इस मेले की लोकप्रियता केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों तक पहुंचे। प्रेमी युगल की कहानी गोटमार मेले की शुरुआत को लेकर एक किवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि पांढुर्णा का एक युवक सावरगांव की युवती से प्रेम करता था। एक दिन युवक अपनी प्रेमिका को लेकर पांढुर्णा लौट रहा था। जैसे ही वे जाम नदी के बीच पहुंचे, सावरगांव के लोगों को खबर मिल गई। युवती को रोकने सावरगांव के लोग पत्थरों के साथ पहुंचे और युवक पर हमला किया। जवाब में पांढुर्णा के लोग भी पत्थर बरसाने लगे। पत्थरों की इस मारा-मारी में अंततः प्रेमी युगल की जान चली गई। तभी से गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई और यह आयोजन हर साल आस्था, परंपरा और उस प्रेम कहानी की याद में होता आ रहा है। जिस पर अब फ़िल्म बनने जा रही है। फिल्म से बढ़ेगा आकर्षण टीम का मानना है कि गोटमार पर आधारित फिल्म दर्शकों के लिए रोचक और भावनात्मक अनुभव होगी। साथ ही यह परंपरा और संस्कृति का दस्तावेज बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विलेज ऑफ आर्मी: छत्तीसगढ़ का वो गांव, जहां सेना बनना है परंपरा

किरीत ये गांव है वीर जवानों का,अलबेलों का,मस्तानों का… इस गांव का यारों क्या कहना… जी हां!छत्तीसगढ़ में एक गांव है किरीत,जहां की माटी वीर सपूतों को जन्म देती है। यहां ऐसा कोई घर नहीं है जहां के युवा फौज में न हो। यहां के युवाओं में देशप्रेम की भावना कूटकूट कर भरी हुई है। इस गांव के 100 से अधिक युवा थल सेना में अलग-अलग पदों पर रहते हुए सीमा पर तैनात हैं। इसके अलावा पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ जैसे विंगों में भी गांव के युवक सेवा दे रहे हैं। देश सेवा का जुनून और फौज में भर्ती होने का यह सिलसिला चार दशक पहले शुरू हुआ था, जो अब तक चल रहा है। किरीत गांव के ग्राम पटेल लक्ष्मण प्रसाद चंद्रा बताते हैं कि 6 जून 1985 को सबसे पहले गांव के युवा ध्यानचंद्र चंद्रा की थल सेना में भर्ती हुई थी। ध्यानचंद्र को तब इस बात का जरा भी अंदाज नहीं था कि युवाओं में देशप्रेम का उनके द्वारा जगाया जज्बा इतना प्रभावी होगा कि किरीत का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में अदब से लिया जाएगा। प्रदेश का यह पहला गांव है… जहां इतनी बड़ी संख्या में युवा देश की सेवा कर रहे हैं। देशसेवा की दीवानगी यहां के युवाओं में कुछ ऐसी है कि दिन रात हाड़तोड़ मेहनत करते हैं। सुबह से लेकर शाम तक युवाओं को दौड़ लगाते देख सकते हैं। हर साल 6 से 7 युवाओं की भर्ती सेना में हो रही है। प्रवेशद्वार पर लिखा ‘सैनिक नगर’ गांव के रजनीश कुमार खुंटे ने बताया कि देश सेवा के प्रति गांव के लोगों में इस कदर का जुनून आपने कहीं नहीं देखा होगा। देश और प्रदेश में गांव को सैनिक नगर के नाम से जाना जाता है। गांव की मिट्टी के कण-कण में देश सेवा का जज्बा है, जिसके चलते सौ से ज्यादा सेना के जवान देश सेवा में लगे हुए हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर सैनिक नगर लिखा हुआ है। हमारे गांव के हर युवा का सपना है कि वह आर्मी में भर्ती हो और गांव के इस ख्याति को बनाए रखें। हमारे गांव किरीत को सैनिक का गांव भी कहते हैं। हमारे गांव ने पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी और जांजगीर-चांपा जिले की अलग पहचान बनाई है। आर्मी में हर साल 6 से 7 युवा जाते हैं ग्रामीण सीताराम साहू बताते हैं कि गांव की आबादी लगभग 4 हजार के आसपास है। गांव के बच्चों में बचपन से ही देश प्रेम और देशभक्ति का जुनून देखने को मिलता है। देश सेवा करने का सपना… सपने को साकार करने का जुनून युवाओं में आपको दिखेगा। गांव के ग्राउंड में ही युवा अपने सपनों को पंख लगाने मेहनत करते दिख जाएंगे। आर्मी की नौकरी से रिटायर होने वाले युवा अब दूसरी जगहों पर नौकरी कर रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर जैसे पद पर सेवा दे रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 साल से हर साल 6 से 7 सैनिक गांव से चयनित होते हैं। सेना के अलावा पुलिस, सीआरपीएफ में भी गांव के युवा नौकरी कर रहे हैं।  

नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़, पंजाब में बरामद हुए लाखों रुपये

दीनानगर  पुलिस को आज एक बड़ी सफलता मिली है। सूचना के आधार पर पुलिस ने दो व्यक्तियों के पास से लाखों रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएसपी दिनानगर, रजिंदर सिंह मिन्हास ने बताया कि पुलिस को सुनील कुमार, निवासी तालाबपुर पंडोरी, ने शिकायत दी कि उनके इलाके में ठेकेदार कमलदीप सिंह, पुत्र मोहन सिंह, निवासी संतनगर, थाना सिटी गुरदासपुर, नकली भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल कर रहा है। इस पर कार्रवाई करते हुए थाना दौरागला पुलिस टीम ने आरोपी कमलदीप सिंह को पकड़कर उसके पास से 7 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 3,500 रुपये) बरामद किए। कड़ी पूछताछ के बाद उसके पीछे के लिंक की जांच की गई। इसके बाद आरोपी निर्मल सिंह, पुत्र दियाल सिंह, निवासी बसंतकोट, थाना कोटली सूरत मल्लियां, को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 400 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 2 लाख रुपये) बरामद हुए।   डीएसपी ने बताया कि दोनों का पुलिस रिमांड लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। इनके खिलाफ थाना दौरागला में अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

चिराग को शादी की सलाह, तेजस्वी यादव बोले – हम तो जनता के हनुमान हैं

अररिया  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। कांग्रेस समेत महागठबँधन में शामिल कई दल और उनके नेता इस वक्त राज्य में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। वोटर अधिकार यात्रा के तहत राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, दीपांकर भट्टाचार्य और मुकेश सहनी समेत महागठबंधन के कई दिग्गज नेता रविवार को अररिया में थे। यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इन नेताओं ने बारी-बारी से चुनाव आय़ोग को घेरा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में एलजेपी (आर) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को शादी कर लेने की सलाह दे दी। इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि चिराग पासवान एक व्यक्ति विशेष के हनुमान हैंं और हम जनता के हनुमान हैं। दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से पूछा कि चिराग पासवान बोल रहे हैं कि तेजस्वी यादव अब कांग्रेस के पिछलग्गू बनकर घूम रहे हैं? इसपर राहुल गांधी ने माइक तेजस्वी यादव को थमाया। तेजस्वी यादव ने माइक पकड़ने के बाद कहा, 'भाई वो तो किनके हनुमान हैं आपको तो पता ही है, उसपर हम ज्यादा नहीं बोलेंगे। हमलोग तो जनता के हनुमान हैं। वो व्यक्ति विशेष के हनुमान हो सकते हैं। तेजस्वी यादव ने आगे कहा, 'हम चाहेंगे कि मुद्दे पर बात हो। चिराग पासवान आज का मुद्दा नहीं है और ना ही जनता उनको पूछती है। आज लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। संविधान को मिटाया जा रहा है। इसके बाद तेजस्वी यादव ने मुस्कुराते हुए कहा कि तो अगर आप चिराग पासवान पर सवाल पूछ रहे हैं तो हम उसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन उनको सलाह जरूर देंगे कि हमारे बड़े भाई हैं जल्द से जल्द शादी कर लें। इसके बाद राहुल गांधी को जैसे ही तेजस्वी ने माइक थमाया तो राहुल गांधी ने खिलखिलाते हुए कहा कि मेरे लिए भी एप्लिकेबल है। इसके बाद प्रेस वार्ता में मौजूद अन्य नेता भी हंसने लगे  

पोरा तिहार उत्सव: उपमुख्यमंत्री, मंत्री-विधायक और राज्यपाल रमेन डेका संग झूमे लोग

रायपुर छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार ‘‘पोरा तिहार’’ आज कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निवास में धूमधाम और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया. पोरा तिहार के इस पावन पर्व पर राज्यपाल रमेन डेका शामिल हुए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ वासियों को पोरा तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी. उन्होंने इस मौके पर कहा कि पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और कृषि जीवन की महत्वपूर्ण परंपरा है. कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि मंत्री नेताम अपनी धर्मपत्नी मती पुष्पा नेताम के साथ भगवान शिव-पार्वती और भगवान स्वरूप नांदिया-बैला का पूजा-आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की. उन्होंने उपस्थित जनसमूह को पोरा तिहार की शुभकामनाएं दी. कृषि मंत्री नेताम ने कहा आज पोरा तिहार है, जो छत्तीसगढ़ की परम्परा में किसानों और पशु प्रेम को समर्पित है. इसके साथ ही तीन दिन बाद तीजा है, जो सुहागिनों के लिए सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर के लिए तीजा का कठिन व्रत किया था. हमारी सरकार हर माह के पहले हफ्ते में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत एक-एक हजार रूपए उनके खातों में अंतरण कर महिलाओं का सम्मान बढ़ा रही है. कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के रास्ते पर चलते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार छत्तीसगढ़ के चंहुमुखी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है. इस अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मंत्री गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, विधायक पुरंदर मिश्रा, रोहित साहू, मोतीलाल साहू, इन्द्र कुमार साहू, सहित मंडल-निगम आयोग के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने में कहा कि आज हमारे साथी मंत्री रामविचार भैया ने त्यौता देकर हमें पोरा मनाने अपने घर पर बुलाया है. पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा और सामाजिक सद्भाव का पर्व हैं. हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य कर रही है. महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने भी पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश में हमारी सरकार द्वारा पारंपरिक पर्वों को सम्मान एवं नए उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. कृषि मंत्री निवास को परंपरागत ग्रामीण परिवेश में विशेष रूप से सजाया गया था. पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बैला और मिट्टी के खिलौने व बर्तन से सुसज्जित वातावरण ने ग्रामीण अंचल की झलक प्रस्तुत की. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिससे पोरा तिहार का उत्सव और अधिक जीवंत हो गया. वहीं इस मौके पर आगंतुकों ने छत्तीसगढ़ के ठेठरी, खुरमी, अइरसा, गुलगुला भजिया, चीला, फरा सहित विविध प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुप्त उठाया.

प्लास्टिक मुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: इंदौर को मिली बायोप्लास्टिक तकनीक की सौगात

इंदौर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन को साकार करते हुए, बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) ने देश का पहला बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड-पीएलए) प्लांट स्थापित किया है। यह एक ऐसा कदम है जो सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ा हथियार साबित होगा। मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में ‘बायो युग ऑन द व्हील्स’ नामक एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बलरामपुर चीनी मिल्स के बनाए गए बायोप्लास्टिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष, सचिन बंसल ने बताया कि गन्ने से प्राप्त होने वाली चीनी को पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) में बदला जाता है, जिससे कई तरह के उत्पाद बनाए जा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये उत्पाद पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल हैं। इन्हें इस्तेमाल के बाद मिट्टी में दबाकर आसानी से डिस्पोज किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। क्यों है यह प्लांट इतना महत्वपूर्ण ? अभी तक पीएलए बनाने के लिए कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता था, जो काफी महंगा पड़ता था। भारत में इसके उत्पादन से न सिर्फ कीमतें कम होंगी, बल्कि आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।बलरामपुर चीनी मिल्स की प्रतिनिधि, श्वेता सूर्यवंशी ने बताया कि यह नया उद्यम भारत के पहले औद्योगिक-स्तरीय बायो-पॉलीमर प्लांट की स्थापना में सहायक होगा, जो भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। इस बायोप्लास्टिक से कटलरी, कप, बोतलें, स्ट्रॉ, खिलौने, फ्लेक्स बैनर और यहां तक कि पीपीई किट भी बनाई जा सकती हैं। यह पारंपरिक प्लास्टिक का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है। इस कार्यक्रम में उद्योगपतियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी हिस्सा लिया, जिससे इस पहल की गंभीरता और भविष्य की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह प्लांट भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो न सिर्फ प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि एक आत्मनिर्भर और हरित भविष्य की नींव भी रखेगा।

ट्रेन हादसे से टली बड़ी दुर्घटना, डॉक्टर की मां को RPF ने सुरक्षित निकाला

कानपुर  यूपी के फर्रुखाबाद की एक 60 वर्षीय महिला महिमा गंगवार के लिए कहावत 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' सच साबित हुई, जब वह शनिवार देर रात कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन से गिर गईं। आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) के जवानों की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से उनकी जान बच गई। महिला का बेटा कानपुर के हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। महिमा अपने पति राजवीर सिंह के साथ कानपुर से भोपाल जाने के लिए 12593 गरीब रथ एक्सप्रेस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। ट्रेन आधी रात 12:35 बजे स्टेशन पर आई और उन्हें अपना कोच ढूंढने में देर हो गई। जब तक वे कोच तक पहुंचे, ट्रेन चल पड़ी थी। जल्दबाजी में चढ़ने की कोशिश में महिमा का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच की जगह में गिर गईं। आसपास के लोग शोर मचाने लगे। यह देखकर, वहां मौजूद आरपीएफ के एएसआई सीपी सिंह तुरंत हरकत में आए। उन्होंने महिमा को प्लेटफॉर्म की तरफ खिसकने की हिदायत दी और अपने साथी सिपाहियों अनिल कुमार और श्रवण कुमार को तुरंत ट्रेन की चेन खींचने का आदेश दिया। सिपाहियों ने बिना एक पल की भी देरी किए चेन खींची और ट्रेन रुक गई। इसके बाद, आरपीएफ टीम ने महिमा को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए स्टेशन पर ही बनी मोटर कार से प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ले गए। शुरुआती इलाज के बाद, उन्हें आगे के उपचार के लिए हैलट अस्पताल रेफर किया गया। आरपीएफ ने बताया कि महिमा का बेटा हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। इस घटना के कारण ट्रेन को 15 मिनट की देरी हुई, लेकिन महिमा की जान बच गई। इस घटना प्रत्यक्षदर्शी आरपीएफ की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह घटना आरपीएफ कर्मियों की तत्परता और उनके सेवाभाव का शानदार उदाहरण है। थोड़ी देर तक स्तब्ध रहे लोग चलती ट्रेन से महिमा गंगवार के फिसलने और प्लेटफार्म-सीढ़ियों के बीच उनके फंस जाने की घटना जिसने भी देखी वो कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। आरपीएफ की चुस्ती और त्वरित ऐक्शन से ट्रेन रोक दी गई और महिमा गंगवार की जान बच गई। इसके बाद ही लोगों की जान में जान आई।  

टोक्यो में सीएम विष्णुदेव साय से मिले बस्तर के अविनाश तिवारी, उद्योग निवेश पर हुई सार्थक बातचीत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो में BOYES & MOORES INTERNATIONAL COMPANY जापान के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एवं बस्तर के गौरव अविनाश तिवारी से सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश और उद्योग स्थापना की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्रीसाय ने राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, औद्योगिक आधारभूत ढांचे और निवेशकों को मिलने वाले सहयोग की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि अविनाश तिवारी, जो मूलतः बस्तर जिले के तोकापाल क्षेत्र के निवासी हैं और नवोदय विद्यालय, बारसूर (दंतेवाड़ा) के पूर्व छात्र रहे हैं, आज जापान की प्रतिष्ठित कंपनी में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता डॉ. सुरेश तिवारी सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। मुख्यमंत्री साय ने भरोसा जताया कि श्री तिवारी जैसे युवा, जो बस्तर की धरती से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं, की सहभागिता से प्रदेश में उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह गर्व की बात है कि बस्तर की धरती से निकलकर वैश्विक मंच पर पहचान बनाने वाले प्रतिभाशाली युवा अब छत्तीसगढ़ के विकास में योगदान दे रहे हैं।