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समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री  गुरु खुशवंत साहब, सांसद मती कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मां नर्मदा के जल को निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए नमन मिशन तैयार, 2026 का क्रियान्वयन रोड मैप भी तैयार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा 'नमन मिशन' तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है। एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है। अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं। बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।  

78 कार्यालय सहायक ग्रेड- तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति

भोपाल  मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन के 78 प्रशिक्षुओं की नई भर्ती एवं नियुक्ति की गई है। नवनियुक्त सभी 78 कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं ने 29 मई को पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेंटर (PDTC), भोपाल में कार्यभार ग्रहण कर प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रारंभिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत उन्हें कंपनी के विभिन्न शहर एवं संचालन-संधारण वृत्तों में प्रशिक्षण के शेष मॉड्यूल पूर्ण करने के लिये पदस्थ किया गया है। इससे प्रशिक्षुओं को मैदानी स्तर पर कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा वे भविष्य में अधिक दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे। यह भर्ती कंपनी के मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे प्रदेश के योग्य एवं शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं क्षेत्रीय इकाइयों में मानव संसाधन की आवश्यकता की पूर्ति की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया गया है। कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति से कंपनी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक गति मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त होगी।  

सरकारी कर्मचारियों की वेतन समस्याओं के समाधान के लिए झारखंड सरकार ने समिति बनाई

रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी वेतन विसंगतियों, एमएसीपी (MACP) योजना से जुड़े विवादों और विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस 7 सदस्यीय समिति का गठन राज्य के विभिन्न सेवा संघों (इम्पलॉइज यूनियंस) द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही मांगों के स्थायी समाधान के लिए किया गया है। यह समिति समय-समय पर राज्य सरकार को अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें और सुझाव सौंपेगी। राजस्व पर्षद के अध्यक्ष करेंगे अगुवाई, ये होंगे सदस्य वित्त विभाग द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सदस्य, राजस्व पर्षद करेंगे। निष्पक्ष और अनुभवी फैसले के लिए समिति में विभिन्न सरकारी सेवाओं के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।     अविनाश कुमार सिंह – भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS-सेवानिवृत्त)     ओम प्रकाश साह – राज्य प्रशासनिक सेवा (सेवानिवृत्त)     राज नारायण सिंह – राज्य पुलिस सेवा (सेवानिवृत्त)     जयंत कुमार मिश्रा – राज्य शिक्षा सेवा (सेवानिवृत्त)     उमेश मेहता – राज्य अभियंत्रण सेवा (सेवानिवृत्त) समिति के कार्य राज्य की विभिन्न सेवा संघों द्वारा उठाई गई वेतन विसंगतियों का निराकरण यह समिति करेगी। इसके साथ ही विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने को लेकर प्रयास करेगी। समिति एमएसीपी से संबंधित मामलों का निराकरण करेगी। झारखंड में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियाें से जुड़े मामले लंबे समय से विवादों का केंद्र रहे हैं। इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय ने कई मामलों में कर्मचारियों को एसीपी का लाभ देने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में, पुलिस कर्मियों को एसीपी/एमएसीपी के लिए उच्च योग्यता की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। वहीं, राज्य के कर्मचारी संगठन लंबे समय से 7वें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने और ग्रेड-पे तय करने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) में तीन प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे लगभग तीन लाख कर्मचारी-पेंशनभोगी लाभान्वित हुए हैं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम का हुआ आयोजन

रायपुर  विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी के लिए जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को अंबिकापुर जिला पंचायत सभाकक्ष में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आंध्रप्रदेश राज्य के तिरुपति जिले से केन्द्रीय  ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना का राष्ट्रीय स्तर पर किया गया। कार्यक्रम में मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन है। इसका उद्देश्य गांव को समृद्ध बनाना, श्रम को सम्मान देना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य की मजबूत नींव हमारे गांव में रखी जाएगी, जब गांव सशक्त होंगे, तभी भारत विकसित होगा। पहले 100 दिन का रोजगार था, अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार ने श्रमिकों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई 2026 से मनरेगा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 से 300 रूपए कर दी है। यह केवल मजदूरी में वृद्धि नहीं, बल्कि हमारे श्रमिक भाई-बहनों के परिश्रम, समर्पण और आत्म सम्मान का सम्मान है। अब हमारा लक्ष्य केवल अस्थायी कार्य नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी एवं उपयोगी परियोजनाओं का निर्माण करना है, जो आने वाले हमारे पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी हो। व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण, खेत तालाब और सिंचाई सुविधा का विस्तार करना, ग्रामीण अधोसंरचना के निर्माण काम को प्राथमिकता देना है। इन कार्यों से रोजगार भी मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा। उन्होंने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, स्वयं सहायता समूहों के दीदियों, युवाओं तथा ग्रामीण नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि इसे केवल योजना न समझें, बल्कि अपने गांव के विकास का जन अभियान बनाएं। जब समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे, तभी विकसित गांव और विकसित भारत का सपना साकार होगा। प्रत्येक कार्य पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ किया जाए, प्रत्येक कार्य का भौगोलिक चिन्हांकन तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। गांव सशक्त होगा तो प्रदेश सशक्त होगा और प्रदेश सशक्त होगा तो हमारा देश सशक्त होगा। आप सभी इस मिशन से जुड़ें, अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें और अपने गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। जिला पंचायत अध्यक्ष मती निरुपा सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने दिशा में वीबी जी राम जी योजना मील का पत्थर साबित होगी। योजना के तहत वे काम होंगे जिनकी उस गांव में आवश्यकता होगी। कलेक्टर  अजीत वसंत ने कहा कि योजना के माध्यम से हम ग्रामीण विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जिले स्तर पर इसकी बेहतर मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि लोगों को योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  विनय कुमार अग्रवाल द्वारा पीपीटी के माध्यम से योजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। जिसमें योजना के संबंध में बिंदुवार जानकारी तथा कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई। इस अवसर पर जिले में पूर्व में क्रियान्वित किए गए कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई , जिसे अतिथियों एवं आमजनों द्वारा सराहा गया। साथ ही योजना के हितग्राहियों ने मंच से पूर्व की योजना से प्राप्त लाभ एवं जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में अपने अनुभव साझा किए ।कार्यक्रम के अंत में नवाबांध की मुस्कान महिला समूह को नवा तरिया में मक्का की खेती हेतु बीज वितरण किया गया तथा 15 कृषकों को कृषि विभाग के सहयोग से अरहर के बीज वितरण किया गया। सम्मेलन में शामिल सभी को कटहल,मुनगा,जामुन,आम आदि के पौधें वितरित किये गये। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष  देवनारायण यादव, जिला पंचायत सदस्य  विजय अग्रवाल, मती पायल सिंह तोमर,मती राधा रवि, मती नानमणि पैकरा सहित जनपद सदस्य , सरपंच, सचिव एवं समूह की महिलाएं तथा ग्रामीणजन उपस्थित थे । बता दें विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम-जी, अधिनियम 2025 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हो गई है। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार, आजीविका सुरक्षा और गांवों के सतत विकास को नई मजबूती देगा। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत मजदूरों को 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

सीमेंट ब्रिक्स निर्माण इकाई स्थापित कर बने आत्मनिर्भर, दूसरों के लिए भी बने प्रेरणा

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शासकीय योजनाएं प्रभावी साबित हो रही हैं। इन्हीं योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने बीजापुर जिले के निवासी रमेश नाग के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। इस योजना की मदद से उन्होंने सीमेंट ब्रिक्स निर्माण इकाई स्थापित कर अपना सफल व्यवसाय शुरू किया है। पूंजी की कमी बनी थी सबसे बड़ी चुनौती रमेश नाग लंबे समय से अपना सीमेंट ब्रिक्स निर्माण व्यवसाय शुरू करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर से संपर्क किया, जहां उन्हें पीएमईजीपी योजना की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन मिला। 10 लाख रुपये का ऋण और 3.50 लाख रुपये का अनुदान मिला योजना के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बीजापुर के सहयोग से रमेश नाग को 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें लगभग 3.50 लाख रुपये का मार्जिन मनी (अनुदान) भी प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनों के साथ सीमेंट ब्रिक्स निर्माण इकाई स्थापित की। स्वरोजगार के साथ दूसरों को भी मिला रोजगार आज रमेश नाग की इकाई में गुणवत्तापूर्ण सीमेंट ब्रिक्स का उत्पादन हो रहा है। इससे स्थानीय निर्माण कार्यों की जरूरतें पूरी हो रही हैं और आसपास के लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है। सरकारी योजना ने पूरा किया आत्मनिर्भर बनने का सपना रमेश नाग बताते हैं कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) का लाभ नहीं मिलता, तो अपना उद्योग शुरू करना संभव नहीं था। आज वे सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बना यह प्रयास रमेश नाग की सफलता यह साबित करती है कि यदि शासकीय योजनाओं का सही समय पर लाभ लिया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भर बनना संभव है। उनकी सफलता आज बीजापुर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे रही है।

नवीन परिसर बनेगा आईएएस, पीसीएस समेत विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सुशासन को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में योगी सरकार शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 जुलाई को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करेंगे।  लगभग ₹464 करोड़ से अधिक की लागत से 22.5 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित यह परिसर प्रदेश की सात दशक से अधिक पुरानी प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक अधोसंरचना, उन्नत तकनीक और वैश्विक प्रशिक्षण मानकों से जोड़ते हुए नई दिशा देगा। आईएएस, पीसीएस समेत विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा नेतृत्व विकास का यह केंद्र भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 75 वर्षों की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा आधुनिक स्वरूप उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 1951 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल (ओटीएस) से हुई थी। पिछले सात दशकों से अधिक समय में इस संस्थान ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस), न्यायिक सेवा, राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित ग्रुप 'ए' एवं ग्रुप 'बी' अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय में शासन की चुनौतियों और प्रशासनिक दायित्वों के विस्तार को देखते हुए इस ऐतिहासिक संस्था को अत्याधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना से सशक्त किया गया है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक नेतृत्व तैयार किया जा सके। प्रशिक्षण और प्रशासनिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा नया परिसर नई प्रशिक्षण अधोसंरचना का उद्देश्य अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य-संस्कृति को अधिक दक्ष, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाना है। यहां आईएएस, पीसीएस, न्यायिक सेवा, राज्य सेवाओं तथा विभिन्न विभागों में चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के फाउंडेशन, इंडक्शन और मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही नेतृत्व विकास, नीति क्रियान्वयन, डिजिटल गवर्नेंस, परियोजना प्रबंधन, नवाचार, आपदा प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन और जनसेवा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों की निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को नई मजबूती मिलेगी। प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मिलेगी नई ऊर्जा यह परिसर केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी के सतत क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा। राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारियों के अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पुनर्प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और विषय-विशेष प्रशिक्षण की भी यहां व्यापक व्यवस्था होगी। मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण, सतत अधिगम और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को भी इससे नई गति मिलेगी। इससे शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र तैयार करने में सहायता मिलेगी। विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर नवीन परिसर में एक साथ 300 आवासीय तथा 900 गैर-आवासीय, यानी कुल 1,200 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की गई है। परिसर में 13 अत्याधुनिक प्रशिक्षण कक्ष, 300 सीटों का प्रेक्षागृह, दो बहुउद्देशीय हॉल, 300 क्षमता का छात्रावास, डिजिटल लर्निंग सेंटर, डिजिटल स्टूडियो, डिजिटल लैब, आधुनिक पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस रूम, बोर्ड रूम, शोध एवं अध्ययन सुविधाएं, क्रिकेट मैदान, बैडमिंटन कोर्ट तथा लॉन टेनिस कोर्ट जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा होगी। सुशासन को मिलेगा स्थायी संस्थागत आधार उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका भी लगातार विस्तृत हुई है। ऐसे में आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था समय की आवश्यकता बन गई थी। नया परिसर अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलती प्रशासनिक अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने के साथ नीति क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रशासनिक क्षमता निर्माण को संस्थागत मजबूती देने की दिशा में यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सुशासन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी का नया परिसर राज्य में प्रशासनिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई दिशा देगा। आधुनिक संसाधनों और वैश्विक मानकों से युक्त यह संस्थान सुशासन, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध, दक्ष एवं संवेदनशील प्रशासनिक नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एम. देवराज, महानिदेशक (डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी)

आदपुर–बेहटा संपर्क होगा मजबूत, पीलाखार नदी पर 181 मीटर पुल का शिलान्यास

बिलासपुर  बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है. मिलक तहसील के अंतर्गत ग्राम आदपुर पर बहने वाली पीलाखार नदी पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जा रहा है. रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने आदपुर गांव में बनने वाले इस पुल का भूमि पूजन और शिलान्यास किया है. इस पुल के बनने से आसपास के कई गांवों की राह आसान हो जाएगी और बरसात के दिनों में होने वाली आवागमन की परेशानी भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. आदपुर और बेहटा को जोड़ेगा पुल मिलक तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम आदपुर में पीलाखार नदी पर पुल बनाया जा रहा है. रविवार को कृषि राज्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया है. इस पुल को बनाने के लिए करीब 22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. पुल की लंबाई करीब 181 मीटर होगी. पुल के बनने से आदपुर, बेहटा समेत आसपास के कई गांवों के बीच संपर्क मजबूत होगा. इलाके के लोग लंबे समय से इस पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे. शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंचेगी राह राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि यह पुल इलाके के विकास में अहम भूमिका निभाएगा. इसके बनने से व्यापार, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बहुत आसान हो जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. सड़कों और पुलों का निर्माण प्रदेश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं.  तय समय पर पूरा होगा काम राज्यमंत्री ने पुल निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि पुल निर्माण को गुणवत्तापूर्ण तरीके से तय समय पर पूरा किया जाना चाहिए, जिससे जनता को इसका शीघ्र लाभ मिल सके. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

मंत्री सारंग से की सौजन्य भेंट, मंत्री ने अनिमेष दी शुभकामनाएं

भोपाल विश्वास सारंग क्रिकेट अकादमी के उभरते तेज गेदबाज  अनिमेष सिंह का चयन एमपीसीए इमर्जिंग टीम में चयन हुआ है।  सिंह 7 से 21 जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रणजी ट्राफी विजेता जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के साथ चार अभ्यास मैच खेलेंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग से  अनिमेष सिंह ने उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मंत्री  सारंग ने शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पूरी निष्ठा एवं आत्मविश्वास के साथ प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया। मंत्री  सारंग ने कहा कि “मध्यप्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण लगातार मजबूत हो रहा है। राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर खेल अधोसंरचना, आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं और लगातार निखरकर सामने आ रही हैं। हमें विश्वास है कि हमारे युवा खिलाड़ी आने वाले समय में देश और प्रदेश का नाम और ऊंचा करेंगे।” एमपीसीए इमर्जिंग टीम में भोपाल के चार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को स्थान मिला है। इनमें अनिमेष सिंह, पृथ्वीराज सिंह तोमर, तनिष्क यादव और तनमय पांडे शामिल हैं। इन खिलाड़ियों का चयन हाल के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। पहले दो अभ्यास मैचों के लिए चयनित खिलाड़ियों को 3 जुलाई को होलकर स्टेडियम, इंदौर में रिपोर्ट करना होगा, जबकि अंतिम दो मैचों के लिए चयनित खिलाड़ियों को 12 जुलाई को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर जैसी मजबूत टीम के खिलाफ होने वाले ये अभ्यास मैच युवा खिलाड़ियों के लिए उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होंगे और आगामी घरेलू क्रिकेट सत्र की तैयारियों में भी अहम भूमिका निभाएंगे।  

‘शॉर्टकट से कमाई की तो बेऊर जेल भेजेंगे’, CM सम्राट चौधरी का अपराधियों को खुला संदेश

पटना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में शॉर्टकट से अमीर बनने वालों के लिए बेऊर जेल में जगह तय है। जो भी गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करेगा या भ्रष्टाचार करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि नेता, मंत्री, विधायक या अधिकारी, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वे गुरुवार को बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य में पहली बार बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे राज्य में एक सप्ताह तक चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के करीब 80 वर्ष बाद पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जन तक जागरूकता पहुंचाने का व्यापक अभियान शुरू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है। ट्रिपल-टी बनेगा सुशासन का आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट (Tripple-T) के सिद्धांत पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सतर्कता विभाग के कार्यों की सराहना की। कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने की आवश्यकता है। राज्य की एजेंसियों को होना होगा और प्रभावी उन्होंने कहा कि बिहार में विजिलेंस, स्पेशल यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई जैसी सक्षम एजेंसियां हैं। इन एजेंसियों को इतना प्रभावी बनना होगा कि बाहरी एजेंसियों के हस्तक्षेप की जरूरत ही न पड़े। जहां भी भ्रष्टाचार की शिकायत मिले, वहां बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 30 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है। किसी भी शिकायत के निपटारे के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई अधिकारी गलत आदेश देता है तो उसकी शिकायत उनके वरिष्ठ से की जा सकती है, हरहाल में तय अवधि में उसका निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक कार्यालयों और थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित वरीय अधिकारियों को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर न्याय मिल सके।