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सेवा संकल्प यात्रा केवल यात्रा नहीं, सेवा, राष्ट्रभाव और युवा शक्ति को जोड़ने वाला अभियान : मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सेवा संकल्प यात्रा एवं युवा संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गुजरात के वडनगर से लंबी यात्रा तय कर रायपुर पहुंचे बाइक राइडर्स तथा बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे बाइक राइडर्स का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित नए भारत का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर सेवा भाव से राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपनी एक नई पहचान बनाई है और आज पूरा देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा देश की युवा शक्ति को सेवा, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। गुजरात के वडनगर से प्रारंभ हुई यात्रा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि से उनकी कर्मभूमि वाराणसी तक सेवा का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। यात्रा के दौरान युवा स्वच्छता, नशामुक्ति, टीबी मुक्त भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज को जागरूक कर रहे हैं। यह यात्रा युवाओं में राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध और सेवा की भावना को और मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत डेढ़ करोड़ से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए। प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ इसमें सहभागिता की, वह प्रधानमंत्री के प्रति जनता के स्नेह और विश्वास को अभिव्यक्त करता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ से गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने प्रदेश में लंबा समय बिताया है और यहां के जनजीवन को निकटता से देखा और समझा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में उन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के साथ कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली, अनुशासन, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य देश के सामने रखा है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर भविष्य की आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। शासन की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शांति, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है। दूरस्थ अंचलों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। बदलते बस्तर में आज नई पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देख रही है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित युवा संवाद में बस्तर से आकर रायपुर के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों गोविंद कुमार, दृष्टि ध्रुव, दीपक मरकाम और दीना उइके ने अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बस्तर में आए बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है तथा भय का वातावरण समाप्त होने से बच्चों और युवाओं में भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। विद्यार्थियों ने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी अब भारतीय सेना और सिविल सेवाओं में शामिल होने के साथ डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश एवं प्रदेश की सेवा करने के सपने देख रही है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर के बच्चों की आंखों में दिखाई दे रहे ये सपने बदलते छत्तीसगढ़ की सबसे सुखद तस्वीर हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन करते हुए राज्यसभा सांसद  राजीव शुक्ला ने सेवा संकल्प यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा के अंतर्गत 1200 युवा लगभग 2000 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान युवाओं द्वारा स्वच्छता, टीबी मुक्त भारत, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न सामाजिक विषयों पर जनजागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, मती लक्ष्मी वर्मा एवं  वी.डी. शर्मा, विधायक  मोतीलाल साहू,  पुरंदर मिश्रा,  किरण सिंहदेव एवं  अनुज शर्मा, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण,  राहुल टिकरिहा,  नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सेवा संकल्प यात्रा के बाइक राइडर्स तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

भारत का मूल धर्म है सनातन, इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती: मुख्यमंत्री

गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन, भारत का मूल धर्म है। सनातन के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमारी कमी यह रही कि हमने अपने आप को विस्मृत कर दिया। हमारे पास सब कुछ था। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी, तब सबसे सुसभ्य, सुसंस्कृत और सबसे सुदृढ़ परंपरा भारत के पास मौजूद थी। सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में मंगलवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचाना है, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। जिन लोगों ने अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति तथा कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को नहीं जाना, वह उत्तर प्रदेश और भारत को कैसे समझ पाएंगे।  गोमाता में है सनातन धर्म की पहचान मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। हमारे सनातन की परंपरा रही है कि पहला ग्रास गोमाता का होता है। यदि हर सनातनी यह कार्य करता तो गोमाता आज सड़कों पर नहीं विचरतीं। इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि यह कार्य किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते।इसे लेकर हमने अपने ऋषि मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया। धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को बचाना पड़ेगा सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है। हमें यदि धरती माता को बचाना है तो गोमाता को भी बचाना पड़ेगा। गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से सभी प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से प्रदेश में 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है।  भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी। हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं। कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

दंतेवाड़ा के जावंगा से सफलता की उड़ान: जनजातीय बच्चे NEET-IIT-NIT में चयनित, S&P Global जैसी कंपनियों में कर रहे नौकरी

रायपुर  दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस एजुकेशन सिटी ने हिंसा और गरीबी से जूझते जनजातीय बच्चों की किस्मत ही बदल दी। कभी दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर की बड़ी चुनौती थी। आज यहां की बेटियां नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं, युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं और खिलाड़ी मैदान परअपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। यह उन बच्चों की कहानी है, जिन्होंने हर चुनौती को मात देकर खुद को साबित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा (एजुकेशन सिटी) में 9 मई 2015 को आए थे, जहाँ उन्होंने एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और छात्रों से बातचीत की थी। 150 एकड़ में फैला सपनों का शहर             अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है।यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थान संचालित हैं। यह एजुकेशन सिटीशैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, यहएक पूरी दुनिया है। करीब 150 एकड़ में फैले इस परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं चल रही हैं। यहां 7,436 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें से 5,370 बच्चे यहीं छात्रावासो में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आए इन बच्चों को सुरक्षित घर, खाना, पढ़ाई और मार्गदर्शन सब कुछ एक ही छत के नीचे मिल रहा है।इसकी वजह से स्कूल ड्रॉप-आउट की दर 50% से घटकर महज 13% रह गई है।             वो बेटियां जिनके गांवों में कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं था, आज उन्हीं इलाकों की बेटियां नीट-यूजी पास कर डॉक्टर बनने की कतार में खड़ी हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस साल नीट-यूजी में सफलता पाई है। इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा में दाखिला मिला है। परीक्षा पास करने के साथ ही यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी 'डॉक्टर बेटी' कहलाएगी। डिजिटल क्रांति की नई कहानी    डिजिटल शिक्षा की दिशा में यहां के नवगुरुकुल का प्रयास भी प्रेरक है। यहां युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस केंद्र से प्रशिक्षित लगभग 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर की प्रतिभा अब देश की बड़ी कंपनियों तक पहुंच रही है। आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले 95 फीसदी छात्र जनजातीय समुदाय से हैं। मैदान में निखर रही खेल प्रतिभाएं        एजुकेशन सिटीमें पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा जा रहा है। यहां के 'एकलव्य खेल परिसर' में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।'खेलो इंडिया' से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख रहे, बल्किइनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीतने का जज्बा पैदा हो रहा है। बेटियों की पढ़ाई को पहली प्राथमिकता    जावंगा एजुकेशन सिटी की सबसे बड़ी खूबी बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान है। यहां कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के जरिए ग्रामीण बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ रही हैं।'स्वामी आत्मानंद स्कूल' में लगभग 1200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यहां बेहतरीन आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा जीता है। इससे दूरस्थ गांवों की उन बेटियों के सपने सच हो रहे हैं, जिन्हें पहले पढ़ाई के अवसर नहीं मिलते थे।          दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे इलाके जो कभी नक्सल प्रभावित थे, वहां के अनाथ और हिंसा पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने नया घर दिया है। यहां दाखिला मेरिट से नहीं, बच्चे की जरूरत और हालात देखकर होता है। इन बच्चों को सुरक्षित छत, पढ़ाई, खेल, संगीत और खुशहाल बचपन मिल रहा है। बंदूकों की गूंज के बीच पले-बढ़े ये बच्चे अब किताबों की दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। इस मॉडल को सबने सराहा     जावंगा एजुकेशन सिटी की कामयाबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। प्रतिष्ठित संस्था केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 सबसे बेहतरीन (नवोन्मेषी) परियोजनाओं में शामिल किया है, जिसमें पूरे भारत से मात्र 6 प्रोजेक्ट चुने गए हैं। इस अनूठी पहल के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन को 'प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस शिक्षा मॉडल की सफलता से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जावंगा का दौरा कर इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।जावंगा एजुकेशन सिटी आज आदिवासी बच्चों के सपनों का परिसर बन गया है।

100 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलेगा पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क

भोपाल नवम्बर 2025 के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के 100 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क (DG's Commendation Roll & Disc) प्रदान किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सम्मान के लिए चयनित अधिकारियों में— पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         01.  अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण जोन, इंदौर।         02.  संजय कुमार, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस, भोपाल।         03. मती रूचिवर्धन मिश्र, पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण जोन, भोपाल।         04.  अंशुमान सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल (हाल-सेवानिवृत्त)।         05.  शियाष ए., पुलिस महानिरीक्षक, राज्य सायबर मुख्यालय, भोपाल (हाल-प्रतिनियुक्ति पुलिस महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल, नई दिल्ली)। पुलिस उप महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         06.  सत्येन्द्र कुमार शुक्ल, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         07.  बीरेन्द्र कुमार सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक, नर्मदापुरम जोन।         08.  विनीत कपूर, पी.एस.ओ. टू डीजीपी, पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         09.  मनोज कुमार सिंह, उप पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण रेंज, इंदौर।         10.  रियाज इकबाल, उप पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         11.  मंयक अवस्थी, उप पुलिस महानिरीक्षक, जिला धार (हाल-अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था, नगरीय पुलिस इंदौर)। पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपायुक्त/सेनानी/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         12.  अखिल पटेल, पुलिस उपायुक्त, नगरीय पुलिस, भोपाल।         13.  षियाज के.एम., सेनानी, हॉक फोर्स, बालाघाट (हाल-पुलिस अधीक्षक, जिला सिंगरौली)।         14.  आदर्शकांत शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बैहर, जिला बालाघाट (हाल-पुलिस उपायुक्त, जोन-4, नगरीय पुलिस भोपाल)।         15.  मलय जैन, स्टॉफ ऑफिसर टू पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश, पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         16.  अमित सक्सेना, सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         17.  प्रणय नागवंशी, पुलिस अधीक्षक, राज्य सायबर मुख्यालय, भोपाल।         18.  राकेश कुमार पेन्द्रो, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला बालाघाट (हाल-अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, रतलाम)।         19. मती शालिनी दीक्षित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपायुक्त जोन-3, जिला भोपाल।         20.  गोपाल सिंह धाकड, सहायक पुलिस महानिरीक्षक, चयन/भर्ती शाखा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल। पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी         21. मती अंकिता खातरकर, सहायक पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त जोन-3, जिला भोपाल।         22.  सत्येन्द्र घनघोरिया, नगर पुलिस अधीक्षक, जिला रतलाम।         23. सु नीलम बघेल, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग सैलाना, जिला रतलाम।         24.  रवि प्रकाश सिंह भदौरिया, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग अम्बाह, जिला मुरैना।         25.  आकाश अमलकर, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग आष्टा, जिला सीहोर।         26.  उदित मिश्रा, उप पुलिस अधीक्षक, अजाक, जिला रीवा।         27.  नीतेश पटेल, उप पुलिस अधीक्षक (प्रशासन), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         28.  योगेश सिंह तोमर, कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक, क्राईम, जिला उज्जैन। इसके अतिरिक्त 14 निरीक्षक, 26 उप निरीक्षक, 7 सहायक उप निरीक्षक, 12 प्रधान आरक्षक तथा 13 आरक्षक को भी पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क के लिए चयनित किया गया है। इस प्रकार पुलिस राजपत्र में निहित प्रावधानों के अंतर्गत कुल 100 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया जाता है सम्मान वर्ष 2002 से पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क अवॉर्ड विभाग के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 8 श्रेणियों में प्रदान किया जाता है— दस्यु विरोधी अभियान, नक्सल विरोधी अभियान एवं अन्य अभियानों के दौरान प्रशंसनीय उपलब्धि प्राप्त करने पर, प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशंसनीय कार्य करने पर, क्रीड़ा क्षेत्र में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने पर, पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार लाने वाले नए प्रयोग करने पर, 15 वर्ष तक लगातार उत्कृष्ट एवं स्वच्छ अभिलेख होने पर, वाहन चालकों द्वारा 15 वर्ष तक लगातार उत्कृष्ट एवं दुर्घटनारहित वाहन चालन करने पर, अनसुलझे प्रकरणों को सुलझाने पर, अन्य प्रशंसनीय कार्य करने पर ये सम्मान दिया जाता है।  

मुख्यमंत्री साय ने पारस पोर्टल के माध्यम से की प्रमुख योजनाओं एवं विकास कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल के माध्यम से योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित निगरानी के साथ विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री  साय आज मंत्रालय महानदी भवन में पारस पोर्टल के माध्यम से आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनसेवाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में प्राप्त करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन की कार्यप्रणाली में अंतर्विभागीय समन्वय की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अनेक विकास परियोजनाओं में एक से अधिक विभागों की अनुमति, सहभागिता अथवा सहयोग आवश्यक होता है। ऐसे में विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्य करने के बजाय समन्वित दृष्टिकोण अपनाएं। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, अनावश्यक विलंब दूर होगा तथा समय और लागत दोनों की बचत होगी। उन्होंने कहा कि पारस पोर्टल का उद्देश्य केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन कारणों की पहचान कर समाधान सुनिश्चित करना भी है, जिनके कारण कोई परियोजना या योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। राज्य स्तर से लेकर जिलों तक सभी अधिकारी इसे परिणाम आधारित प्रशासन के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग करें। एग्रीस्टैक में कोई भी पात्र किसान पंजीयन से न रहे वंचित मुख्यमंत्री  साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को केवल धान खरीदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ अधिक सरलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण आधारभूत व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिलों में विशेष अभियान चलाकर एग्रीस्टैक तथा डीसीएस से संबंधित लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। प्रत्येक वास्तविक किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो और किसी पात्र किसान को धान विक्रय अथवा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में सामने आई व्यावहारिक कठिनाइयों से सीख लेते हुए इस वर्ष पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही के कारण यदि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित होता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जिलेवार प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अपेक्षाकृत पीछे चल रहे जिलों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य में लापरवाही अथवा अपेक्षित सहयोग नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों तक शीघ्र पहुंचे राहत और सहायता मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में विगत दिनों हुई भारी बारिश और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति तथा संचालित राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि भारी बारिश से प्रदेश के 17 जिलों के 500 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और बस्तर संभाग के जिलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को जनहानि, मकानों, पशुधन, अनाज तथा अन्य संपत्तियों को हुई क्षति का सर्वेक्षण शीघ्र पूरा करने और पात्र प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि यथाशीघ्र पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि प्रदान करने तक की प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी की जाए। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों एवं स्वास्थ्य शिविरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने हैंडपंपों का क्लोरीनीकरण कराने तथा नागरिकों को पानी उबालकर पीने के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को यह भरोसा होना चाहिए कि सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। राहत और पुनर्वास के प्रत्येक कार्य में मानवीय संवेदना सर्वोपरि होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देने वाले स्व-सहायता समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना की और कलेक्टरों को ऐसे समूहों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों तथा अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का आकलन कर जानकारी तत्काल शासन को भेजने को कहा, ताकि उनकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ की जा सके। उन्होंने पात्र प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को मिले अपेक्षित गति मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके क्रियान्वयन में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह योजना परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने योजना के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वेंडर्स की संख्या बढ़ाने, सोलर दीदियों को प्रोत्साहित करने तथा हितग्राहियों के लिए ऋण की उपलब्धता को और सुगम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा योजना में उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी का अधिक से अधिक पात्र परिवार लाभ उठा सकें, इसके लिए जिलों में व्यापक जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कलेक्टरों को योजना में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए बैंकिंग सुविधा, वेंडर चयन से लेकर सोलर संयंत्र की स्थापना तक पूरी प्रक्रिया को हितग्राही के लिए सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए। सड़क और पुल-पुलियों के लंबित कार्यों की बाधाएं तत्काल दूर करें मुख्यमंत्री  साय ने लोक … Read more

खेल सुविधाओं के साथ फिटनेस सेंटर, चेंजिंग रूम, उपकरण कक्ष और दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष सुविधाएं होंगी

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने मंत्रालय स्थित समिति कक्ष में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश में निर्माणाधीन सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण, उपलब्ध कराई जाने वाली खेल सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना को लेकर तैयारी का जायजा लिया । मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की अवधारणा का उद्देश्य प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों को उनके अपने क्षेत्र में आधुनिक एवं बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एक ही परिसर में अनेक खेलों की सुविधा सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में विभिन्न खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। परिसर में बैडमिंटन, एथलेटिक्स ट्रैक, मार्शल आर्ट, टेबल टेनिस, खो-खो, कबड्डी, वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से बच्चों, युवाओं और स्थानीय खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास एवं प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को भी बढ़ावा मिलेगा। फिटनेस सेंटर से लेकर उपकरण कक्ष तक सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में केवल खेल मैदान ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सहायक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। परिसर में फिटनेस सेंटर, एडमिन ब्लॉक, उपकरण कक्ष, चेंजिंग रूम, इलेक्ट्रिकल रूम और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के दौरान आवश्यक सभी मूलभूत सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है। स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और खिलाड़ियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इन परिसरों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि उन्हें बेहतर मैदान, प्रशिक्षण, उपकरण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। विधानसभा स्तर पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित होने से स्थानीय प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से ही बेहतर वातावरण मिलेगा और उन्हें जिला, संभाग, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। हर विधानसभा में बनेगा हेलीपैड सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेल सुविधाओं के साथ आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड का भी प्रावधान किया जा रहा है। प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध होगी, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन एवं त्वरित राहत सेवाओं के संचालन के लिए किया जा सकेगा। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण एवं आगामी कार्ययोजना से संबंधित प्रगति की जानकारी मंत्री  सारंग को दी।  

यूपीआईटीएस 2026 में ₹6,500 करोड़ के 4,400 एमओयू, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का बना नया रिकॉर्ड

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश की कला, उद्यमिता, कौशल और कारोबारी सामर्थ्य को वैश्विक मंच प्रदान करने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 के चौथे संस्करण का मंगलवार को निवेश, कारोबार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के नए आयामों के साथ भव्य समापन हुआ। 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित पांच दिवसीय मेगा आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों, एमएसएमई, निर्यातकों, कारीगरों और उद्यमियों को देश-दुनिया के खरीदारों से सीधे जुड़ने का सशक्त मंच उपलब्ध कराया। आयोजन के दौरान लगभग 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹6,500 करोड़ मूल्य के 4,400 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त, ट्रेड शो के दौरान प्राप्त कारोबारी पूछताछ के आधार पर लगभग ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का अनुमान है। ये आंकड़े प्रदेश में निवेश, निर्यात और कारोबारी गतिविधियों के बढ़ते विस्तार को प्रदर्शित करते हैं। 41,500 बी2बी बैठकें, 5.99 लाख से अधिक विजिटर्स की मौजूदगी फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष यूपीआईटीएस में कुल 41,500 बी2बी बैठकें दर्ज की गईं। इनमें 13,500 बैठकें रिवर्स बायर-सेलर मीट (आरबीएसएम) क्षेत्र में हुईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में लगभग 28,000 कारोबारी संवाद दर्ज किए गए। इन बैठकों के माध्यम से देश-विदेश से आए खरीदारों ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों के साथ सीधे संवाद करते हुए कारोबारी साझेदारियों और संभावित ऑर्डरों की दिशा में कदम बढ़ाए। पांच दिनों में ट्रेड शो में कुल 5,98,693 विजिटर्स और बिजनेस बायर्स की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें 1,74,990 घरेलू बिजनेस बायर्स तथा 4,23,703 सामान्य विजिटर्स शामिल रहे। पिछले संस्करण से कारोबार के प्रमुख मानकों में उल्लेखनीय उछाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप आयोजित यूपीआईटीएस 2026 ने पिछले संस्करण की तुलना में कारोबार और भागीदारी के लगभग सभी प्रमुख मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। वर्ष 2025 में दर्ज 31,650 बी2बी बैठकों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 41,500 हो गई, जो 31.12 प्रतिशत की वृद्धि है। आरबीएसएम क्षेत्र में विदेशी खरीदारों के साथ बैठकों में 123.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई और यह संख्या 6,050 से बढ़कर 13,500 हो गई। मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में भी बी2बी बैठकों में 9.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हस्ताक्षरित एमओयू की संख्या 3,900 से बढ़कर 4,400 हो गई, जो 12.82 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं एमओयू के अनुमानित मूल्य में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। यह ₹2,680 करोड़ (425 मिलियन डॉलर) से बढ़कर ₹6,500 करोड़ (680 मिलियन डॉलर) हो गया, जो 142.54 प्रतिशत की वृद्धि है। कारोबारी पूछताछ में भी 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और संभावित कारोबार का अनुमान ₹12,500 करोड़ से बढ़कर ₹15,500 करोड़ पहुंच गया। छह देशों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय आयाम हुआ और व्यापक यूपीआईटीएस 2026 की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी पिछले संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक रही। पिछले संस्करण में रूस एकमात्र पार्टनर देश था, जबकि इस वर्ष रूस, ऑस्ट्रिया, जापान, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम सहित छह देशों ने पार्टनर कंट्री के रूप में भागीदारी की। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और खरीदारों ने प्रदेश के मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और एग्री-फूड प्रोसेसिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई। इससे उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को समझने और संभावित साझेदारों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। ओडीओसी ने दिखाई उत्तर प्रदेश की पाक विरासत की समृद्ध तस्वीर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुज़ीन’ (ओडीओसी) पहल यूपीआईटीएस 2026 के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। प्रदेश के सभी 75 जिलों की विशिष्ट पाक परंपराओं और स्थानीय स्वाद को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए ओडीओसी ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को कारोबारी संभावनाओं से जोड़ा। पांचों दिनों ओडीओसी हॉल में विशेष चहल-पहल रही। आगंतुकों और खरीदारों ने क्षेत्रीय व्यंजनों, पारंपरिक रेसिपी और स्थानीय खाद्य उद्यमों को नजदीक से जाना। सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी सहित अन्य प्रसिद्ध शेफ की मास्टर क्लासेज ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। पाक-कौशल, लाइव डेमॉस्ट्रेशन और मनोरंजन के इस संगम ने ओडीओसी को दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय बनाया। ओडीओसी ने यह भी रेखांकित किया कि किसी जिले की पाक विरासत केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फूड एंटरप्रेन्योरशिप, फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, ब्रांडिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं कारोबार की नई संभावनाओं का आधार बन सकती है। 75 जिलों के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मंच यूपीआईटीएस में प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, पीतल उत्पाद, कालीन, चमड़ा उद्योग और विशिष्ट कृषि उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हुआ। एमएसएमई, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को देश-विदेश से आए खरीदारों के साथ सीधे संवाद और संभावित ऑर्डर हासिल करने का अवसर मिला। इससे यूपीआईटीएस का स्वरूप महज प्रदर्शनी तक सीमित न रहकर व्यावसायिक संपर्क, बाजार विस्तार और वास्तविक कारोबारी अवसरों के सृजन के मंच के रूप में और मजबूत हुआ। नीति एवं उद्योग से जुड़े लगभग 20 नॉलेज सेशंस ने भी उद्यमियों को बदलते कारोबारी परिदृश्य, बाजार की संभावनाओं और नीतिगत विषयों पर विशेषज्ञ संवाद का अवसर दिया। कारोबार के साथ संस्कृति और परंपरा का भी संगम दिनभर कारोबार और निवेश के संवादों से गुलजार रहने वाला यूपीआईटीएस 2026 हर शाम उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रंगों से भी सराबोर रहा। पांच दिवसीय आयोजन में शास्त्रीय, लोक, भक्ति और समकालीन प्रस्तुतियों की विविध श्रृंखला ने देश-विदेश से आए आगंतुकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। लोक संगीत, कथक, मथुरा के लोकनृत्य, ढेठिया, राई और थारू जनजातीय नृत्य, पखावज एवं सितार वादन, सुगम संगीत, आल्हा गायन, भजन और सूफी संगीत के साथ सेलिब्रिटी कलाकारों और म्यूजिकल बैंड की प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। समापन दिवस पर ओम प्रकाश दुबे के भजन गायन, गोरखपुर के राकेश उपाध्याय के लोकगीत गायन और गाजियाबाद की सुश्री मिताली सैनी की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद श्रीराम सांखला द्वारा कोरियोग्राफ किए गए ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ ने पांच दिवसीय सांस्कृतिक यात्रा को यादगार समापन प्रदान किया। युवा सहभागिता ने बढ़ाई आयोजन की जीवंतता यूपीआईटीएस 2026 में छात्र और युवा भागीदारी भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। युवाओं ने क्विज, मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन), माइम, कला एवं संस्कृति गतिविधियों, साइबर सुरक्षा एवं सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों और बैटल ऑफ … Read more

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों को सुविधा, सुबह-शाम आसान हुआ सफर

रायपुर गांव से काम पर जाना हो, बच्चों को स्कूल-कॉलेज पहुंचना हो या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना हो, नियमित परिवहन सुविधा ग्रामीण जीवन की महत्वपूर्ण जरूरत है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने राजपुर तहसील के ग्राम सिधमा के ग्रामीणों की इसी जरूरत को पूरा किया है। गांव तक बस पहुंचने से अब रोजगार के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ विद्यार्थियों का सफर भी आसान हुआ है। पहले बस पकड़ने के लिए दूसरे गांव काकना तक जाना पड़ता था, लेकिन अब सुबह और शाम गांव से ही बस की सुविधा मिल रही है। ग्राम सिधमा निवासी ज्ञानेश्वर बर्तनों में पॉलिश करने का काम करते हैं। रोजगार के सिलसिले में उन्हें लगभग रोज ही आना-जाना पड़ता है। गांव में बस सुविधा नहीं होने के कारण पहले उन्हें बस पकड़ने के लिए काकना जाना पड़ता था। वहां तक पहुंचने के लिए बाइक या अन्य साधन की व्यवस्था करनी होती थी। इससे अतिरिक्त समय लगता था और रोजमर्रा के सफर में परेशानी भी होती थी। अब गांव से ही मिल रही बस, काकना जाने की परेशानी हुई कम मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने के बाद ज्ञानेश्वर की रोजमर्रा की आवाजाही आसान हुई है। वे बताते हैं कि अब गांव से ही सुबह और शाम बस मिल रही है। इससे काम के लिए नियमित आने-जाने में सहूलियत हुई है और बस पकड़ने के लिए पहले दूसरे गांव तक जाने की जरूरत कम हुई है। बस सेवा का लाभ केवल कामकाजी ग्रामीणों तक सीमित नहीं है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी भी इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। गांव तक नियमित परिवहन साधन पहुंचने से शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन अधिक सुविधाजनक हुआ है। रोजगार के लिए रोजाना सफर करने वाले ज्ञानेश्वर को मिली राहत ज्ञानेश्वर जैसे ग्रामीणों के लिए यह बस सेवा विशेष रूप से उपयोगी है, जिनका रोजगार नियमित आवाजाही पर निर्भर है। पहले काम पर निकलने से पहले काकना तक पहुंचने के लिए अलग साधन की व्यवस्था करनी पड़ती थी। अब गांव से ही बस मिलने से उनके सफर की एक बड़ी परेशानी कम हुई है। सुबह और शाम बस की उपलब्धता से ग्रामीण अपनी दिनचर्या के अनुसार आवागमन कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों को भी स्कूल-कॉलेज आने-जाने के लिए परिवहन का साधन मिला है। गांव तक बस पहुंचने से शिक्षा और रोजगार की राह हुई आसान ज्ञानेश्वर ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि गांव तक बस पहुंचने से लोगों के लिए काम, शिक्षा और जरूरी कार्यों से आने-जाने की राह आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सिधमा की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि गांव तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी उपयोगी हो सकती है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सिधमा के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ रोजगार और पढ़ाई के लिए नियमित सफर भी आसान हुआ है।

बढ़ेगी दिव्यांगजन की जीवन सुगमता, सीएम योगी करेंगे उपकरण वितरण

गोरखपुर समान अवसर और पूरा सम्मान देकर दिव्यांगजन के सशक्तीकरण और कल्याण के लिए क्रियाशील योगी सरकार बड़े पैमाने पर दिव्यांगजन के लिए आवश्यक कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों का वितरण करती है। इसी क्रम में दिव्यांगजन की जीवन सुगमता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार (30 सितंबर) को गोरखपुर में कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण वितरण समारोह में सम्मिलित होंगे। समारोह में 509 दिव्यांगजन को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया जाएगा। उपकरण वितरण का यह समारोह सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दोपहर बाद होगा। इसमें दिव्यांगजन को उनकी दिव्यांगता के अनुकूल करीब सवा करोड़ रुपये के उपकरण वितरित किए जाएंगे। समारोह में 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 को ई-ट्राईसाइकिल, 70 को ट्राईसाइकिल, 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड, 5 को स्मार्टफोन, 1 को ब्रेल लिपि की गीता, 1 को ब्रेल लिपि की रामायण, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ, और 5 को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाएगा।

रसोइयों के मानदेय भुगतान की मुश्किल होगी दूर, 117 करोड़ के पुनर्विनियोजन को वित्त विभाग की मंजूरी

रायपुर  राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत रसोइयों के मानदेय की टॉपअप राशि के लिए 117 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन को प्रशासकीय स्वीकृति दी है। विभागीय आदेश के अनुसार, केंद्र प्रवर्तित योजनाओं का संचालन जुलाई 2026 से एसएनए-स्पर्श के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत रसोइयों के मानदेय भुगतान के लिए टॉपअप राशि के लिए पृथक से राज्य आयोजना मद  में प्रावधान है। राज्य आयोजना मद में प्रावधानित राशि को केंद्र प्रवर्तित योजना के राज्यांश मद में पुनर्विनियोजित किया गया है। आदेश में संबंधित बजट शीर्षों के बीच 102 करोड़, 10 करोड़ और 5 करोड़ रुपये के पुनर्विनियोजन का विवरण दिया गया है। यह पहले से प्रावधानित राशि का पुनर्विनियोजन है। विभाग ने राशि का मदवार व्यय विवरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।