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ज्वार और बाजरा खेती पर हरियाणा सरकार देगी सब्सिडी, किसानों के लिए नई योजना शुरू

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत अनुदान योजना शुरू की है। योजना के तहत किसानों को प्रदर्शन प्लांट लगाने, प्रमाणित बीज खरीदने, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन 16 जून से शुरू हो चुके हैं। इसका लाभ लेने के लिए किसान हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस योजना का उद्देश्य ज्वार और बाजरा का उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। इसके साथ ही सरकार बेहतर बीजों के इस्तेमाल और आधुनिक खेती को बढ़ावा देना चाहती है। यह योजना फिलहाल हरियाणा के भिवानी, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, महेंद्रगढ़, मेवात, रेवाड़ी, रोहतक और चरखी दादरी सहित 10 ज़िलों में लागू है। किन कामों पर मिलेगा अनुदान? खरीफ़ सीज़न में ज्वार और बाजरा के समूह प्रदर्शन प्लांट लगाने पर किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी। एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक इसका लाभ ले सकता है। यानी अधिकतम 15000 रुपये का अनुदान ले सकता है। प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा और एक ही किसान को लगातार दो वर्षों तक एक ही क्लस्टर में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। कृषि सामग्री खरीदने के बाद उसकी रसीद पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। योजना के तहत प्रमाणित बीज खरीदने पर भी अनुदान मिलेगा। 10 वर्ष से कम पुरानी किस्मों के बीज पर 3,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो), 10 वर्ष से अधिक पुरानी किस्मों के बीज पर 1,500 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) और संकर बीज पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता मिलेगी। इस मद में एक किसान अधिकतम 2.5 एकड़ तक लाभ ले सकता है। जिस किसान को एक बार सहायता मिल जाएगी, वह अगले दो वर्षों तक इसी मद में दोबारा सहायता नहीं ले सकेगा। पोषक तत्व और पौध संरक्षण पर भी मिलेगी सहायता सूक्ष्म पोषक तत्व, चूना, जिप्सम, सल्फर आधारित उर्वरक, जैव उर्वरक और अन्य मृदा सुधारकों की खरीद पर 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) अनुदान मिलेगा। इसी तरह पौध संरक्षण के लिए आईपीएम, जैव-कीटनाशक, पीपी रसायन और खरपतवारनाशकों की खरीद पर भी 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता दी जाएगी। इन दोनों मदों में एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ ले सकता है और सहायता मिलने के बाद अगले दो वर्षों तक उसी मद में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान 18 जुलाई 2026 तक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वेबसाइट agriharyana. gov. in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कृषि सामग्री हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की सिफ़ारिश के अनुसार सरकारी, अर्द्धसरकारी, सहकारी समिति या अधिकृत विक्रेता से खरीदनी होगी। योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना भी ज़रूरी होगा।

अब पुलिस कर्मियों के अवकाश होंगे पूरी तरह ऑनलाइन स्वीकृत

भोपाल पुलिस कर्मियों की सेवा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, त्वरित एवं सुगम बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों में 01 जुलाई 2026 से eHRMS (Electronic Human Resource Management System) काई-लीव मॉड्यूललागू कर दिया गया है। इसके माध्यम से अब प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन अवकाश आवेदन, स्वीकृति तथा उसकी अद्यतन स्थिति की जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे अवकाश प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध हो जाएगी। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस कर्मियों की पारंपरिक मैनुअल सेवा अभिलेख व्यवस्था को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से जुलाई 2025 से eHRMS ऑनबोर्डिंग का कार्य प्रारंभ किया गया था। इस दौरान सेवा पुस्तिकाओं का स्कैनिंग एवं अनिवार्य सेवा संबंधी विवरणों का डिजिटलीकरण किया गया। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के माध्यम सेएक लाख से अधिक सेवा पुस्तिकाओं का स्कैनिंग कार्यसंपन्न किया गया तथा वर्तमान में लगभगएक लाख पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी eHRMS पर ऑनबोर्डकिए जा चुके हैं। पुलिस विभाग में जारी होने वाले सभी महत्वपूर्ण सेवा संबंधी आदेशों को सुरक्षित एवं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 23 मार्च 2026 से eHRMS काऑर्डर बुक (O.B.) मॉड्यूलभी प्रारंभ किया जा चुका है। इसके माध्यम से सेवा पुस्तिका से संबंधित सभी महत्वपूर्ण आदेश अब eHRMS पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेंगे, जिससे अभिलेखों का संरक्षण एवं उपलब्धता और अधिक सुदृढ़ होगी। ई लीव मॉड्यूल को विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए इसे प्रारंभिक रूप सेएससीआरबी, कार्मिक शाखा, विशेष शाखा, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल तथा 25वीं वाहिनी भोपालमें प्रायोगिक रूप से लागू किया गया था। इन इकाइयों से प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक के आधार पर मॉड्यूल में आवश्यक सुधार एवं परिष्करण किए गए, जिसके बाद इसे प्रदेश की लगभग 120 पुलिस इकाइयोंमें लागू किया गया है। अब पुलिस विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी eHRMS पोर्टल (ehrms.mp.gov.in) अथवा eHRMS मोबाइल एपके माध्यम से ऑनलाइन अवकाश आवेदन कर सकेंगे। यह मोबाइल एप Google Play Store तथा Apple App Store दोनों पर उपलब्ध है। पोर्टल पर प्रत्येक कैडर के अनुसार अवकाश के प्रकार, पात्रता एवं उपलब्धता का विवरण पहले से दर्ज किया जा चुका है। कर्मचारी द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के पश्चात संबंधित लीव क्लर्क उसे सक्षम स्वीकृतकर्ता अधिकारी को अग्रेषित करेगा। अधिकारी ऑनलाइन ही अनुशंसा एवं स्वीकृति प्रदान करेंगे तथा कर्मचारी अपनी लॉगिन आईडी पर अपने अवकाश आवेदन की अद्यतन स्थिति देख सकेगा। इससे अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी बनेगी। उल्लेखनीय है कि eHRMS के ई लीव मॉड्यूल का उपयोग वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के केवल कुछ विभागों द्वारा किया जा रहा है, जिनमें पुलिस विभाग सर्वाधिक उपयोगकर्ता संख्या के साथ अग्रणी है। इसके अंतर्गत लगभग 1,01,928 अधिकारी एवं कर्मचारी इस सुविधा से जुड़े हैं।  

हर बुधवार थानों में जन सुनवाई, रांची में शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था

रांची राजधानी रांची में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से बुधवार को जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलेभर के विभिन्न थानों में कुल 240 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 134 मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष मामलों में जांच शुरू कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर संबंधित थानों पहुंचे। कई मामलों का तत्काल समाधान किया गया, जबकि जटिल मामलों में पुलिस अधिकारियों ने जांच का आश्वासन देते हुए आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी। चुटिया, नगड़ी, पुंदाग, बुढ़मू, डोरंडा, लालपुर, सुखदेवनगर, डेली मार्केट सहित जिले के सभी थाना और ओपी में आयोजित इस कार्यक्रम में थाना प्रभारियों के साथ अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना और यथासंभव मौके पर ही उसका समाधान करने का प्रयास किया। प्राप्त शिकायतों में सबसे अधिक मामले जमीन विवाद और पारिवारिक विवाद से जुड़े रहे, जिन पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की। प्रत्येक बुधवार मिलेगा शिकायतों के समाधान का अवसर रांची पुलिस की इस पहल के तहत अब प्रत्येक बुधवार जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कोषांग लगाया जाएगा। इसमें डीएसपी रैंक के अधिकारियों सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। पुलिस का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करना तथा लोगों को स्थानीय स्तर पर ही न्याय उपलब्ध कराना है। पहले छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए लोगों को वरीय अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही थाना क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। जमीन विवाद से लेकर धोखाधड़ी तक की सुनवाई वरीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में जमीन विवाद, पारिवारिक विवाद, आपसी रंजिश, चोरी, डकैती, धोखाधड़ी समेत अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की जा रही है। अधिक से अधिक मामलों का मौके पर ही निष्पादन करने का प्रयास किया जाता है, जबकि गंभीर मामलों में तत्काल जांच शुरू कर दी जाती है। ग्रामीणों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ रांची पुलिस का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। अब उन्हें अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा स्थानीय स्तर पर शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया और तेज होगी। पुलिस ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे प्रत्येक बुधवार अपने संबंधित थाना या ओपी में आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में पहुंचकर इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। प्रमुख थानों का प्रदर्शन     बरियातू थाना: 7 आवेदन प्राप्त, 5 का निष्पादन।     सदर थाना: 8 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     लालपुर थाना: 9 आवेदन प्राप्त, 7 का निष्पादन।     चुटिया थाना: 10 आवेदन प्राप्त, किसी भी मामले का मौके पर निष्पादन नहीं हो सका।     लोअर बाजार थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 2 का निष्पादन।     कोतवाली थाना: 11 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     धुर्वा थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 1 का निष्पादन।     पंडरा ओपी: 8 आवेदन प्राप्त, 5 मामलों का निष्पादन।  

आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन (एनक्वास) प्रमाणपत्र

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुदूर और नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकासखंड सुकमा के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं। 93.04 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि कलेक्टर  अमित कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य केंद्र ने भारत सरकार के राष्ट्रीय मूल्यांकन में 93.04 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी  मणीन्द्र कुर्रे, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक मती रेणूका सूना तथा  माड़वी हिड़मा सहित पूरी स्वास्थ्य टीम की मेहनत, समर्पण और बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम है। कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला एनक्वास प्रमाणपत्र एनक्वास (National Quality Assurance Standards) प्रमाणपत्र भारत सरकार द्वारा केवल उन स्वास्थ्य संस्थानों को दिया जाता है, जो गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इसमें मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, सुरक्षित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की देखभाल, प्रयोगशाला सेवाएं तथा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाता है। 7,417 ग्रामीणों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 आधुनिक प्रसव कक्ष, सुसज्जित प्रयोगशाला और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों से लैस है। यह केंद्र लगभग 7,417 ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। शासकीय योजनाओं से बदल रही सुकमा की तस्वीर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। अन्य जिलों के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल सुकमा की यह उपलब्धि बताती है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा से दूरस्थ एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। आज सुकमा का यह मॉडल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

सुरक्षित सुशासन और डेटा संरक्षण के मानकों से सुदृढ़ हुई विभाग की डिजिटल विश्वसनीयता : आयुक्त भोंडवे

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि "नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आधुनिक तकनीकों और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा उपायों के समन्वय से सदैव पारदर्शी, सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल नागरिक सेवाओं को सर्वोपरि प्राथमिकता दी है। साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और डेटा संरक्षण के क्षेत्र में अपनाए गए प्रभावी एवं कड़े वैश्विक मानकों का ही प्रतिफल है कि आज हमारी डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ हुई है। विभाग भविष्य में भी नागरिकों को पूरी तरह सुरक्षित, भरोसेमंद और अत्याधुनिक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः कटिबद्ध रहेगा।" मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 'ई-नगर पालिका' पोर्टल को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत साइबर सुरक्षा श्रेणी में प्रतिष्ठित रजत पुरस्कार (Silver Award) प्राप्त हुआ है। जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार समारोह में यह सम्मान मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आयुक्त  संकेत भोंडवे को प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान राज्य की दूरदर्शी नीति और तकनीकी श्रेष्ठता का जीवंत प्रमाण है। मध्यप्रदेश शासन ने न केवल नागरिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सुलभ और सुगम बनाया है, बल्कि उन्हें एक अभेद्य सुरक्षा आवरण भी प्रदान किया है। नगरीय निकायों से जुड़े लाखों नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पारदर्शी प्रशासन को अक्षुण्ण रखना तथा सुरक्षित आईटी अवसंरचना का निर्माण करना पोर्टल की विशेषता रही है। डिजिटल गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन के इन उच्चतम मानकों पर 'ई-नगर पालिका' पोर्टल ने देश के अन्य राज्यों के सम्मुख सुरक्षित डिजिटल सुशासन का एक अनुकरणीय प्रतिमान स्थापित किया है। आयुक्त  भोंडवे ने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय विभाग की संपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी टीम भावना के साथ इस दिशा में और बेहतर प्रयास किए जाएंगे, जिससे मध्यप्रदेश डिजिटल गवर्नेंस के शीर्ष पायदान पर सदैव प्रतिष्ठित रहे।  

GI टैग से चमका हरियाणा का किन्नू, किसानों की आय बढ़ने की नई उम्मीद

सिरसा. हरियाणा के लिए गौरव की बात है क्योंकि सिरसा जिले का किन्नू अब वैश्विक पहचान के साथ बाजार में उतरेगा। सिरसा के किन्नू को GI टैग मिलना हरियाणा के किसानों, बागवानी क्षेत्र और प्रदेश की समृद्ध कृषि विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान सिरसा के किन्नू को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ-साथ हमारे किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानकारी के अनुसार सिरसा हरियाणा का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक क्षेत्र है। यहां करीब 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर किन्नू के बाग लहलहा रहे हैं। जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद के अनुसार, जिले में प्रतिवर्ष 1 लाख 80 हजार 508 मीट्रिक टन किनू का उत्पादन हो रहा है। जिले में सबसे ज्यादा किन्नू के बाग डबवाली खंड में लगे हुए हैं। विशेष नवायु और मिट्टी के कारण यहां का किन्नू चमकदार, रसीला और स्वादिष्ट होता है। क्या होता है GI टैग? यह टैग किसी उत्पाद की उस खास विशेषता, स्वाद या गुणवत्ता के लिए दिया जाता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की बजह से होती है। यह उत्पाद को कानूनी संरक्षण देता है। हरियाणा के लिए गौरव  बता दें कि सिरसा के किन्नू को स्वतंत्र GI टैग मिला है। इससे पहले बासमती चावल के लिए हरियाणा और पंजाब को संयुक्त रूप से और फुलकारी के लिए संयुक्त टैग मिला हुआ है।

तेंदुओं के मानव बस्तियों में प्रवेश पर रोक, कलेसर में तैयार होंगे विशेष घास के मैदान

यमुना नगर. वन महोत्सव के दौरान तीन राज्यों की सीमा से सटे कलेसर नेशनल पार्क में इस बार केवल पौधे नहीं लगाए जाएंगे। जंगल को और बेहतर बनाने के लिए घास के खुले मैदान (ग्रासलैंड), ग्रीन कॉरिडोर और स्थायी जल स्रोत भी विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों को जंगल में ही भोजन और पानी उपलब्ध कराना, उनका प्राकृतिक आवास मजबूत करना। इसके साथ ही उन्हें आबादी की ओर आने से रोकना है। 25 हजार एकड़ के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव विहार कलेसर में 50 तेंदुओं की मौजूदगी मानी जा रही है। उनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए वन्य प्राणी विभाग ने जंगल के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से पांच से सात हेक्टेयर क्षेत्र में घास के मैदान विकसित करने की योजना बनाई है। इन मैदानों में हिरण, जंगली सूअर, खरगोश और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीव बढ़ेंगे, जो तेंदुओं का प्राकृतिक शिकार हैं। इससे तेंदुओं को भोजन के लिए जंगल छोड़कर गांवों या आबादी की ओर जाने की जरूरत कम पड़ेगी। जलस्रोत भी बनेंगे कलेसर नेशनल पार्क उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क की मोहांड रेंज सहारनपुर उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सिम्बलबाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से ग्रीन कॉरिडोर के जरिये जुड़ा है। वन विभाग इन रास्तों से अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती करेगा। गांवों के पास सोलर फेंसिंग और मवेशियों के लिए मजबूत बाड़ लगाने की भी योजना है। जंगल में स्थायी जल स्रोत भी बनाए जाएंगे, ताकि गर्मी और सूखे के समय वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर न जाना पड़े।

CEO ट्रांसफर के बाद भी नहीं थमा विवाद, ग्रामीणों ने जिला पंचायत CEO के तबादले की उठाई मांग

मोहला-मानपुर. निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी, अनावश्यक देरी और अनदेखी का आरोप लगाते हुए मोहला-मानपुर जिले के तीन विकासखंड के 185 सरपंचों ने जिला पंचायत सीईओ के तबादले की मांग की थी। इस बीच मोहला जनपद पंचायत के सीईओ प्रांजल प्रजापति का तबादला बस्तर कर दिया है। इस तबादले को सरपंच और पंचायत विभाग के बीच जारी टकराव के मसले पर शासन की बड़ी प्राथमिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि यह तबादला इसी विवाद की वजह से हुआ है, लेकिन पिछले एक हफ्ते से जिला सरपंच संघ प्रशासन पर ‘कथित वसूली’ और ‘प्रशासनिक आतंकवाद’ जैसे गंभीर आरोप लगाकर पंचायत विभाग को कटघरे में खड़ा कर रहा था। सरपंच संघ का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा रायपुर जिस दिन तबादला आदेश जारी हुआ, उसी दिन सरपंच संघ का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिलने की जुगत में लगा हुआ था। खबर ये भी मिल रही है कि इस प्रतिनिधिमंडल ने शासन के किसी बड़े नेता से मिलकर पंचायत विभाग और प्रशासन के तथाकथित कारनामों से नेताजी को अवगत भी कराया है। ऐसे में इस घटनाक्रम के बाद ये सोचा जाना लाज़मी है कि सीईओ का तबादला सरपंच संघ द्वारा प्रशासन के द्वारा छेड़ी गई मुहिम नतीजा भी हो सकता है। दूसरी ओर जिला सरपंच संघ और प्रशासन के बीच उपजे विरोध के मसले पर कलेक्टर ने भी बारह सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। दो अपर कलेक्टर तथा संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर से युक्त इस जांच कमेटी के सदस्य चार-चार की संख्या में बट कर जिले के तीनों जनपद पंचायतों मसलन मोहला, मानपुर व अंबागढ़ चौकी में अलग-अलग जांच बैठाकर जिला सरपंच संघ की ओर से सामने आये तथ्यों और मांगो को लेकर पड़ताल करेंगे। क्या है पूरा मामला ? निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी, अनावश्यक देरी और अनदेखी का आरोप लगाते हुए तीन विकासखंड के 185 सरपंचों ने जिला पंचायत सीईओ के तबादले की मांग की थी। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर सामूहिक इस्तीफा की चेतावनी भी दी थी। सरपंच संघ उप मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा से भी मीडिया के जरिए गुहार लगा चुके हैं।

हेमंत खंडेलवाल का एक साल बेमिसाल, MP BJP संगठन को मिली नई मजबूती; मुख्यमंत्री ने की प्रशंसा

भोपाल  मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण हो गया है। इस अवसर पर शुभकामनाएं देकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई मजबूती मिली है और कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक आधार उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। संगठन विस्तार और संवाद को मिली नई रफ्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने और संगठन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. नए जिला कार्यालयों के निर्माण, नियमित प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन और सहयोग सेल जैसी पहलों ने संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भावना को भी मजबूत किया है. इन प्रयासों से भाजपा की जमीनी पकड़ और अधिक मजबूत हुई है।  ‘भाजपा सिर्फ राजनीतिक दल नहीं, राष्ट्रसेवा का माध्यम’ डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि राष्ट्रसेवा का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने विश्वास जताया कि हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन आने वाले समय में भी नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा और प्रदेश में जनसेवा के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी. मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक साल के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन की ऊर्जा, कार्यकर्ताओं का समर्पण और नेतृत्व की प्रतिबद्धता ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  प्रदेेश संगठन को मजबूत बनाया डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने, नए जिला कार्यालयों के निर्माण, प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन तथा सहयोग सेल जैसी पहलों से संगठन की कार्यक्षमता और सेवा भाव को नई मजबूती मिली है। इन प्रयासों ने भाजपा को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक वर्ष के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन आगे भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम है। संगठन की ऊर्जा और कार्यकर्ताओं का समर्पण ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।

मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी पदों पर निकली भर्ती, आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई

मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई तक भोपाल राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है। रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले … Read more