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दो माह में भारत सरकार के अधिकारियों का तीसरा दौरा, सचिव ने की सराहना

रायपुर छत्तीसगढ़ का स्मार्ट रजिस्ट्री मॉडल अब देशभर के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources) के सचिवनरेंद्र भूषण ने राज्य के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों और नागरिक-केंद्रित सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी है। भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा पिछले दो माह में यह तीसरा दौरा है, जो राज्य में लागू स्मार्ट रजिस्ट्री प्रणाली, ऑटो म्यूटेशन और डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ती राष्ट्रीय रुचि को दर्शाता है। दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सचिवनरेंद्र भूषण ने मंत्रालय महानदी भवन में पंजीयन विभाग की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिवनितिन खाडे तथा निदेशकश्याम कुमार भी उपस्थित थे। समीक्षा बैठक में सचिव पंजीयन भुवनेश यादव तथा महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए प्रमुख सुधारों और नवाचारों का प्रस्तुतीकरण दिया। प्रस्तुतीकरण में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, पंजीयन प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार से संबंधित पहलों की जानकारी दी गई। साथ ही विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे “नेक्स्ट जनरेशन रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म” की रूपरेखा और भावी कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया। सचिवनरेंद्र भूषण ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा राज्य के नागरिकों को सर्वोत्तम सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की विशेष सराहना की। इसके पश्चात उन्होंने सीबीडी, नवा रायपुर अटल नगर स्थित स्मार्ट उप पंजीयक कार्यालय का निरीक्षण किया और ऑटो म्यूटेशन से एकीकृत एंड-टू-एंड डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया का अवलोकन किया। अधिकारियों ने उन्हें संपूर्ण पंजीयन प्रक्रिया, डिजिटल व्यवस्थाओं और नागरिक सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सचिवभूषण ने कहा कि पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ की यह पहल अत्यंत प्रभावी है। उन्होंने कहा कि राज्य का स्मार्ट ऑफिस मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की नीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कार्यालय में नागरिकों के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-अनुकूल वातावरण की भी विशेष सराहना की। भारत सरकार के सचिव ने विश्वास व्यक्त किया कि तकनीक आधारित रजिस्ट्री सेवाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश का मार्गदर्शन करेगा।

जनजातीय गांवों तक पहुंचेगी योजनाओं की सुविधा 18 से 25 मई तक चलेगा “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 18 से 25 मई 2026 तक “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के 1544 तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान  के 6691 गांवों में संचालित होगा। मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश के अनुसार रायपुर को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में अभियान के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पोषण और पेयजल जैसी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारी गांवों में पहुंचकर जन सुनवाई करेंगे तथा “आदि सेवा केन्द्रों” में शिकायतों का निराकरण किया जाएगा। अभियान में सिकल सेल और टीबी जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत प्रतिदिन फोटो, वीडियो और लाभार्थियों के बयान “आदि प्रसारण” पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। शासन ने जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, एनएसएस, एनसीसी और स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान का समन्वय “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” से भी किया जाएगा।

विधिसम्मत ढंग से विदेश से वाग्देवी की प्रतिमा लाने की होगी पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले की भोजशाला के संबंध में बरसों पुराने प्रकरण में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोजशाला के संबंध में न्यायालय ने माना है कि यह स्थान भोजशाला का ही था, जहां राजा भोज ने मां वाग्देवी के माध्यम से इस स्थान की महत्ता को स्थापित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे स्थान के गौरव को पुन: स्थापित करने के उद्देश्य से विधिसम्मत तरीके से विदेश से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रबंधन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को इस निर्णय के लिए बधाई देते हुए अपील की कि न्यायालयीन निर्णय को शिरोधार्य करें। अयोध्या के देवस्थान के संबंध में न्यायालय के निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द्रता की उत्कृष्ट मिसाल कायम की गई थी। उसी परंपरा का निर्वहन करने वाला मध्यप्रदेश ऐसा दूसरा स्थान बन सकता है, जब हम इस समाधान और न्यायालय के निर्णय के आधार पर हम निर्णय को स्वीकार कर आपसी भाईचारे का परिचय देते हुए इसे स्थायी समाधान बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त की कि भविष्य में ऐसे स्थान को अधिक गौरवमयी बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।  

कुटीर और ग्रामोद्योग को नए आयाम देने की तैयारी में मध्यप्रदेश हथकरघा, खादी, रेशम और महिला रोजगार पर विशेष फोकस

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को रोजगार, नवाचार और बाजार से जोड़कर नया स्वरूप देने जा रही है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की पहचान महेश्वरी, चंदेरी, खादी और रेशम जैसे उत्पादों को सिर्फ संरक्षित ही नहीं, बल्कि विस्तारित और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश हथकरघा क्लस्टर का विस्तार : महेश्वरी और चंदेरी की सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य जिलों में भी नए हथकरघा क्लस्टर चिन्हित कर विकसित किए जाएंगे। खादी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा: पुराने कॉटन मिल क्षेत्रों और पारंपरिक बुनाई वाले इलाकों को जोड़कर खादी उत्पादन की नई योजना बनेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है। महिला सशक्तिकरण पर जोर: लूम और चरखा प्रदाय योजना को महिला एवं बाल विकास तथा कृषि विभाग के साथ जोड़कर रोजगारपरक बनाया जाएगा। रेशम उत्पादन को लखपति दीदियों से जोड़ने का लक्ष्य है। ब्रांड आउटलेट का विस्तार : मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावैली जैसे ब्रांड के एम्पोरियम अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर अन्य जिलों में खुलेंगे। पर्यटन निगम के साथ मिलकर प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। धार्मिक और सांस्कृतिक उत्पादों को बढ़ावा: धार्मिक स्थानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूजन सामग्री के उत्पादन और विक्रय को अनुदान और बैंक ऋण आधारित योजना से जोड़ा जाएगा। नवाचार और युवा जुड़ाव: इंदौर की साड़ी वॉकथॉन की तर्ज पर उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर में आयोजन होंगे। साड़ी पहनावे को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना भी शुरू होगी। रेशम और सिल्क टेक पार्क का विस्तार: ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में "प्राकृत" रेशम शोरूम खुलेंगे। पचमढ़ी के सिल्क टेक पार्क की तर्ज पर रातापानी और अमरकंटक में भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी। ग्रामोद्योग इकाइयों को एमएसएमई से जोड़ना: ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए एमएसएमई विभाग की उद्यम क्रांति योजना के तहत लक्ष्य और आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार कुटीर और ग्रामोद्योग सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का आधार है।

दहेज हत्या मामला: पूर्व जज गिरीबाला सिंह व बेटे पर FIR, कोर्ट से जल्द मिली राहत

भोपाल   कटाराहिल्स क्षेत्र स्थित बागमुगालिया में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने पूर्व जज गिरीबाला सिंह और उनके बेटे वकील समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज किया है। पुलिस ने गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब एक बजे मृतका के पति और सास के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। केस दर्ज होने के 18 घंटे के भीतर भोपाल कोर्ट से गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई। वहीं जज ने समर्थ सिंह की जमानत की याचिका सुरक्षित रखी है, जिस पर 18 मई को सुनवाई की जाएगी। उधर केस दर्ज होने के बावजूद तीसरे दिन भी ट्विशा का शव एम्स की मर्चूरी में रखा है। स्वजनों ने शव नहीं लिया, जिससे अंतिम संस्कार नहीं हो सका। शनिवार को सुबह वे शव लेकर नोएडा जाएंगे। अग्रिम जमानत के लिए उम्र का हवाला दिया केस दर्ज होने के बाद पूर्व जज जिला उपभोक्ता फोरम बैंच-2 गिरीबाला सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए जिला कोर्ट में आवेदन किया था। अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने सुनवाई की। न्यायालय ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपित को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गिरीबाला सिंह उच्च न्यायिक सेवा में लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। साथ ही उनकी उम्र 63 वर्ष होने का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की गई। वहीं अभियोजन की ओर से जमानत आवेदन का विरोध किया। अभियोजन ने न्यायालय को बताया कि मृतिका का गर्भपात कराए जाने की बात सामने आई है तथा भ्रूण की एफएसएल जांच कराई जानी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। यह भी पढ़ें- अजब एमपी की गजब पुलिस… हवालात में बंद कर दिया मुर्गा, वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप सेना के जवान भी रहे कोर्ट में मौजूद शुक्रवार शाम जमानत पर सुनवाई के लिए ट्विशा के स्वजन भी कोर्ट में पहुंचे थे। आरोप है कि कोर्ट में उनसे वकीलों द्वारा धक्का-मुक्की की गई थी। स्वजनों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी, जिसके बाद कोर्ट में अतिरिक्त बल तैनात किया गया था। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से कोर्ट परिसर में सेना के जवान भी तैनात रहे। शाम करीब चार बजे से जवान परिसर में मौजूद थे, जो शाम करीब सात बजे तक मौजूद रहे। यह था प्रकरण 12 मई की रात 32 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि ट्विशा ने अपने छत पर फांसी लगाई थी। वहीं घटना के बाद मायके पक्ष के लोगों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर हत्या के आरोप लगाए थे। भाई हर्षित शर्मा का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। उसका गर्भपात भी करवाया गया था। कटाराहिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे का कहना है कि केस दर्ज कर लिया है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 

कोसमी में सफल बोर खनन से दूर हुआ जल संकट, ग्रामीणों के चेहरे खिले!

​रायपुर  प्रदेश की प्यास बुझाने वाले गंगरेल बांध के डूबान क्षेत्र में आने वाले गांवों के लिए राहत भरी बड़ी खबर है। जल जीवन मिशन के तहत शासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की सजगता के चलते ग्राम कोसमी में किया गया नया बोर खनन पूरी तरह सफल रहा है। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां भूजल स्तर गिरने से कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं, वहीं शासन के त्वरित एक्शन ने ग्रामीणों की इस बड़ी चिंता को दूर कर दिया है। ​त्वरित एक्शन से मिली बड़ी राहत    ​ हाल ही में भूजल स्तर में आई गिरावट को देखते हुए पीएचई विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाई। कोसमी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए विभाग द्वारा युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया। इसी कड़ी में कोसमी में किया गया नया बोर खनन पूरी तरह सफल रहा, जिससे अब गांव में प्रचुर मात्रा में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। ​'जल जीवन मिशन' के दावों को मिला बल      ​ डूबान क्षेत्र के ग्राम कोसमी, कोड़ेगांव-आर और तिर्रा जैसे गांवों में आ रही आंशिक दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। कोसमी में सफल बोर खनन के बाद अब पाइपलाइन के जरिए घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। ​अधिकारियों का कहना है कि डूबान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और गिरते वॉटर लेवल को देखते हुए शासन स्तर पर विशेष योजना बनाई गई है। कोसमी की सफलता के बाद अब तिर्रा और कोड़ेगांव में भी बंद पड़े हैंडपंपों को सुधारने और नए विकल्पों पर तेजी से काम चल रहा है। किसी भी ग्रामीण को पानी के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। ​ग्रामीणों ने जताया आभार       कोसमी में पानी की सफल सुगबुगाहट और नए बोर से पानी निकलते देख ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी तकलीफ को समझा और गर्मी के चरम पर होने से पहले ही पानी की पुख्ता व्यवस्था कर दी। इस सफल प्रयास से अब आने वाले दिनों में क्षेत्र के अन्य गांवों में भी पानी की किल्लत पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद जाग गई है।

हजारों पंचायतों की बदली तस्वीर

रायपुर छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।  31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।  कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके। पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।

प्रदेशभर में जल-संवर्धन के कार्यों को मिल रही गति, मंत्री सिलावट ने अभियान की सराहना

भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत गांव-गांव, नगर-नगर में जल-संरक्षण एवं जल-संवर्धन के कार्य व्यापक रूप से कराए जा रहे हैं। प्रदेश में गत तीन वर्षों से यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य वर्षा काल के पूर्व जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, जीणोद्धार एवं आवश्यक मरम्मत कराए जाना है, जिससे वर्षा काल में इनमें पर्याप्त मात्रा में जल संग्रहण हो सके। इस अभियान में समाज के हर वर्ग का सहयोग लिया जा रहा है तथा इसे जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। इस वर्ष जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत 19 मार्च को इंदौर से की गई थी, तब से यह अनवरत जारी है और 30 जून तक चलाया जाएगा। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रमुख रूप से जल संसाधन विभाग द्वारा विभागीय जल स्तोत्रों के समीप की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना, नहरों की साफ-सफाई, सुदृढ़ीकरण एवं सोंदर्यीकरण, जल संरचनाओं के किनारे फैंसिंग एवं वृक्षारोपण, तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो, घाट मरम्मत, लघु सिंचाई परियाजनाओं के फ्लशबार एवं स्लूस मरम्मत, स्टॉपडैम, बैराज, वियर, गेट मरम्मत, जलाशयों में रिसाव रोकने के लिए आवश्यक मरम्मत आदि कार्य कराए जा रहे हैं। विभाग द्वारा अभियान के अंतर्गत इस प्रकार के 1040 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। इसी के साथ विभाग के सभी 9 कछारों में लघु सिंचाई परियोजनाओं में 102 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए महत्वपूर्ण कार्य मंत्री  सिलावट ने बताया कि अभियान के अंतर्गत भोपाल ज़िले में केरवा नदी के उद्गम स्थल की साफ-सफाई, उज्जैन में काजी खेड़ी, कृष्ण सुदामा तालाब स्‍लूस वैल की सफाई एवं उण्डासा तालाब व घाटों की साफ-सफाई, शाजापुर में रनायरा केलवा तालाब स्‍लूस वैल की सफाई, रतलाम में हसन पालिया एवं इंद्रपुरी बैराज गेट की मरम्मत, मुरैना में कोटा तालाब पर जंगल सफाई, लालोर स्टॉप डैम पर जंगल सफाई एवं मोधना स्टॉप डैम व अंबा शाखा नहर की साफ-सफाई, दतिया में दतिया नहर की सफाई, नर्मदापुरम में उपनहर पर जंगल सफाई एवं तवा बांध के डाउनस्ट्रीम में सफाई, सिवनी में अटारी जलाशय के स्लूस अप्रोच चैनल की साफ-सफाई, सीहोर में दोराहा जलाशय की सफाई, कोलार बांध के रोस्टम पर वृक्षारोपण व बुराड़ी लघु सिंचाई परियोजना एवं झालपिपली लघु सिंचाई परियोजना की पाल की सफाई, सागर में तिनसिमरपनी जलाशय के पाल की सफाई, दमोह में बंदरकोला लघु स्लूस वैल मरम्मत, छतरपुर में बैनी सागर मध्यम बांध की साफ-सफाई, पन्ना में देवी बैराज लघु गेट इंस्टॉलेशन एवं बृजपुर बैराज निर्माण, झाबुआ में काला पीपल तालाब की पाल की साफ-सफाई, सतना में बाणसागर वृहद परियोजना के अंतर्गत पुरवा नहर दुआरी सब माइनर को अतिक्रमण मुक्त करना, निवाड़ी में बेतवा नदी के घाट की साफ-सफाई, भिंड में राजघाट नहर परियोजना के अंतर्गत वी.आर.बी. मरम्मत एवं बेसली डैम पर सफाई, राजगढ़ में कुशलपुरा बांध के आसपास वृक्षारोपण, अशोक नगर में बरखेड़ा छज्जू तालाब की सफाई, गुना में नरेन मध्यम परियोजना के पाल की सफाई, विदिशा में सगड़ परियोजना के पाल की सफाई, रायसेन में ऊंचाखेड़ा जलाशय एवं लोअर पलकमती जलाशय के डाउनस्ट्रीम बंड पर साफ-सफाई, हरदा में तवा परियोजना माचक उपनहर में पुलिया निर्माण, बैतूल में सुनद्रा जलाशय मुख्य नहर साफ-सफाई एवं पारसडोह मध्यम परियोजना की पाइपलाइन मरम्मत, टीकमगढ़ में महेंद्र सागर जंगल सफाई एवं चतुरकारी तालाब कैनाल सफाई, देवास में दतुनी मध्यम परियोजना अंतर्गत गहरीकरण, मंदसौर में काका साहब गाडगिल सागर जलाशय में वृक्षारोपण और छिंदवाड़ा में पेंच व्यपवर्तन परियोजना हरदुआ नहर की साफ सफाई आदि के कार्य किए गए हैं।  

विगत 05 दिनों में प्रदेशभर में लगभग 1 करोड़ 43 लाख रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्‍त

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, भंडारण एवं बिक्री के विरुद्ध लगातार कार्यवाहियां की जा रही हैं। इसी कार्यवाही के दौरान विभिन्‍न जिलों की पुलिस टीमों ने विगत 5 दिनों में 1 करोड़ 43 लाख रूपए से अधिक के मादक पदार्थ, तस्करी में प्रयुक्त वाहन, मोबाइल फोन एवं अन्य सामग्री जब्त करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शहडोल पुलिस द्वारा अवैध गांजा तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करते हुए लगभग 04 क्विंटल अवैध गांजा, 03 चारपहिया वाहन एवं 07 मोबाइल फोन सहित 75 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त कर 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मंदसौर जिले में पुलिस द्वारा अलग–अलग कार्यवाही करते हुए मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध बड़ी सफलता प्राप्त की है। थाना नाहरगढ़ पुलिस ने एक कार से 01 किलो अवैध एमडी ड्रग्स जब्‍त कर 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्यवाही में लगभग 30 लाख रुपये की संपत्ति जप्‍त की गई। वहीं थाना अफजलपुर पुलिस ने अवैध डोडाचूरा की तस्करी करने वाले आरोपी को वाहन सहित गिरफ्तार कर लगभग 8 लाख 24 हजार रुपये की संपत्ति जप्‍त की है। दोनों कार्यवाहियों में लगभग 38 लाख 24 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति जप्‍त की है। रतलाम जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई करते हुए थाना रिंगनोद पुलिस ने एमडी ड्रग्स सहित एक आरोपी को गिरफ्तार कर 5 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं थाना बरखेड़ा पुलिस ने 735 ग्राम अवैध अफीम के साथ एक आरोपी एवं एक विधि विरूद्ध बालक को पकड़ा। दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने लगभग 7 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जप्‍त की है। राजगढ़ जिले में “ऑपरेशन शुद्धि” के तहत कार्यवाही करते हुए थाना छापीहेड़ा पुलिस ने स्मैक एवं एक्टिवा स्कूटी सहित 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर 1 लाख 20 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं बोडा थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्‍जे से 40.30 ग्राम अवैध स्मैक ( 5 लाख रूपए) जब्‍त किया। गुना जिले के मृगवास थाना पुलिस ने राजस्थान से स्मैक तस्करी कर रहे अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से स्मैक एवं तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 06 लाख रुपये की संपत्ति जब्‍त की है। भोपाल थाना हनुमानगंज पुलिस ने अवैध नशे के कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए आरोपी के कब्जे से 37 ग्राम एमडी ड्रग्स (लगभग 04 लाख रुपये) जब्‍त कर आरोपी को गिरफ्तार किया। रीवा रीवा के थाना सिविल लाइन पुलिस ने मुखबिर सूचना पर कार्रवाई करते हुए 608 शीशी कोडीन युक्त नशीली कफ सिरप जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया। जप्त कफ सिरप की अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 22 हजार रुपये है। जबलपुर थाना संजीवनीनगर पुलिस ने गांजा तस्करी में लिप्त आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 03 किलो 110 ग्राम गांजा, मोबाइल फोन, एवं अन्य सामग्री सहित लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की है। सीहोर जिले के थाना शाहगंज पुलिस ने मुखबिर सूचना पर कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्‍जे से 8 किलो 459 ग्राम अवैध गांजा जब्‍त कर लगभग 90 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की है। बैतूल जिले के सारणी थाना पुलिस ने अवैध गांजा तस्करी करने वाले 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 4.783 किलोग्राम गांजा जब्‍त किया। जब्‍त गांजे की कीमत लगभग 80 हजार रुपये है। उज्जैन थाना चिमनगंज मंडी पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान 09 किलो 142 ग्राम अवैध गांजा जप्त कर 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में प्रयुक्त मोटरसाइकिल एवं मोबाइल फोन भी जप्त किए गए। जब्‍त संपत्ति की कीमत लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, भंडारण एवं वितरण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर एवं निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी। आमजन से अपील है कि नशे से दूर रहें एवं किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

लिपि और दस्तावेजों से खुली इतिहास की परतें, मस्जिद स्थल पर पहले मंदिर होने के दावे को मिला आधार

 इंदौर  98 दिन चले एएसआई सर्वे में भोजशाला परिसर में कई मूर्तियां, सिक्के, स्तंभ और पत्थरों पर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अयोध्या फैसले का आधार देते हुए तर्क रखा कि किसी एक समुदाय द्वारा उपयोग करने से दूसरे समुदाय के धार्मिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। ऐतिहासिक सर्वे और प्राचीन साक्ष्य वकीलों ने कोर्ट को बताया कि लगभग सवा सौ साल पहले हुए सर्वे में सिद्ध हो चुका है कि धार भोजशाला सरस्वती मंदिर ही है। उस वक्त सर्वे में मिले साक्ष्य इसकी पुष्टि भी करते हैं। यह सर्वे वर्ष 1902 में एएसआई ने किया था। सर्वे से यह बात भी सिद्ध हुई कि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। भोजशाला के पत्थरों को ही मस्जिद बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। लिपि विश्लेषण और निर्माण काल का प्रमाण उज्जैन के जूना महाकालेश्वर मंदिर में लगे पत्थर पर लिखी लिपि और भोजशाला के पत्थरों पर लिखी लिपि एक ही समय की है। इससे यह सिद्ध हुआ कि भोजशाला मंदिर है और इसका निर्माण मस्जिद से बहुत पहले हो चुका था। वकीलों ने हदीस का हवाला दिया और कहा कि इस्लाम के अनुसार जबरन जमीन लेकर मस्जिद बनाई ही नहीं जा सकती। यह भी पढ़ें- भोपाल में भोजशाला फैसले के बीच 1000 जवानों के साये में जुमे की नमाज, चप्पे-चप्पे पर रही पुलिस की नजर मस्जिद पक्ष की दलीलें जो निरस्त हो गई  पूजा स्थल अधिनियम 1991 को लेकर रखे गए तर्क कोर्ट ने अस्वीकार कर दिए। कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व महत्व की संरक्षित धरोहरों पर यह लागू नहीं होता।      मस्जिद पक्ष ने तर्क रखा कि विवाद 2003 के आदेश को लेकर है। याचिका आदेश के 19 वर्ष बाद दायर हुई है, समय सीमा के बाहर है, लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को अस्वीकार कर दिया।      मस्जिद पक्ष ने तर्क रखा था कि स्वामित्व का निर्धारण आस्था और विश्वास से नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया से किया जा सकता है। अयोध्या मामले में रामलला विराजमान पक्षकार थे, लेकिन भोजशाला मामले में ऐसा नहीं है, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। मस्जिद पक्ष की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कहा कि राजा भोज की मृत्यु के बाद कई बार धार को लूटा गया, हिंदू राजाओं ने ही मंदिरों में की तोड़फोड़ की थी, लेकिन साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने इसे नहीं माना। मस्जिद पक्ष का कहना था कि धार दरबार ने वर्ष 1935 में ही स्पष्ट कर दिया था कि भोजशाला में नमाज की अनुमति देते हुए इसे मस्जिद मान लिया था, लेकिन तर्क अस्वीकार कर दिया गया।