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राज्य शिक्षा केंद्र ने बीएड, डीएलएड सहित विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की प्रवेश तिथियां की जारी

भोपाल  राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए समय-सारणी जारी कर दी गई है। अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन करना होगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार एम.एड., एम.ए. मनोविज्ञान (व्यवहारिक), पी.जी.डी.जी.सी., बी.एड., डी.एल.एड., डी.पी.एस.ई. एवं पी.जी.डी.ई.एल.टी. पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में होगी। प्रवेश प्रक्रिया प्रदेश के प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान, शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आंग्ल भाषा प्रशिक्षण संस्थान, पूर्व प्राथमिक प्रशिक्षण संस्थान, मनोविज्ञान शिक्षा एवं संदर्शन महाविद्यालय जैसी प्रदेश की विभिन्न शासकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं में संचालित पाठ्यक्रमों के लिए होगी। राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के अनुसार राज्य शिक्षा केन्द्र की वेबसाइट rsk.mponline.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। प्रवेश कार्यक्रम की तिथियां     डी.एल.एड. : 15 मई से 14 अगस्त 2026     बी.एड. : 25 मई से 27 जुलाई 2026     एम.एड. : 1 जून से 30 जुलाई 2026     पी.जी.डी.ई.एल.टी. : 3 जून से 22 जून 2026 तक     डी.पी.एस.ई. : 8 जून से 31 जुलाई 2026 तक     एम.ए. मनोविज्ञान एवं पी.जी.डी.जी.सी. : 8 जून से 31 जुलाई 2026 तक

उप मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने आज विभागीय मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर सड़कों एवं पुल-पुलियों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तत्परता से तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए।  साव ने बैठक में कहा कि सभी मुख्य अभियंता कार्यालय कॉर्पोरेट दफ्तरों की तरह पूरी क्षमता और दक्षता से काम करें। उन्होंने विभाग की कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए फील्ड से लेकर कार्यालय तक तेज गति और जवाबदेही से काम करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग करने और इनके खराब होने पर संबंधित ठेकेदारों से त्वरित मरम्मत कराने को कहा, ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़कों की स्थिति खराब पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसी सड़कों का तत्काल ठेकेदारों से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता को भारत सरकार के साथ लगातार समन्वय कर स्वीकृतियों एवं कार्यों में तेजी लाने को कहा।  उप मुख्यमंत्री  साव ने सभी मुख्य अभियंताओं को प्राथमिकता वाले कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने फील्ड पर निकलकर प्राथमिकता वाली सड़कों के कार्यों की प्रगति का हर सप्ताह निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए कलेक्टरों के साथ समन्वय कर भू-अर्जन की कार्यवाहियों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने ब्लैक-स्पॉट्स दूर करने के साथ ही सड़कों व पुलों के निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा के सभी मानकों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने निर्माण कार्यों और निर्माण सामग्रियों में गुणवत्ता पर जोर देते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों तक लंबित काम विभाग की छवि खराब करता है। इस तरह की स्थिति न बने। हर हाल में समय-सीमा में काम पूर्ण करने का प्रयास करें। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, अपर सचिव  एस.एन. वास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं के साथ ही सेतु संभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता भी बैठक में मौजूद थे।

विष्णु के सुशासन की नई तस्वीर, पुजारी कांकेर में पहली बार हुआ जनसमस्या महाशिविर

रायपुर माओवाद प्रभावित और अत्यंत सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर में पहली बार प्रशासन का ऐसा व्यापक शिविर आयोजित हुआ, जहां कभी जनताना सरकार की जन–अदालत लगती थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगाई। शिविर में पहली बार सभी विभागों का अमला एक साथ गांव पहुंचा, जिसे देखने और योजनाओं का लाभ लेने बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ग्रामीण पूरे समय शिविर में मौजूद रहे और स्थानीय भाषा में योजनाओं की जानकारी लेकर लाभ उठाने के लिए आवेदन भी किए। इस शिविर में पुजारी कांकेर सहित मारुड़बाका, नेलाकांकेर, संकनपल्ली, तिम्मापुर, ईलमिड़ी, सेमलडोडी, लंकापल्ली, एंगपल्ली, गलगम, उसूर, आवापल्ली, चिंताकोंटा, मुरदंडा, चेरकडोडी, नुकनपाल, पुसगुड़ी और मुरकीनार ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। शिविर में प्राप्त आवेदनों में से 29 का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों पर कार्यवाही जारी है। शिविर में क्रेडा, जल जीवन मिशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, कृषि, उद्यानिकी, वन, मत्स्य, विद्युत, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित सभी विभागों ने योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त किए। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्षमती जानकी कोरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प का परिणाम है कि आज पुजारी कांकेर जैसे क्षेत्र में प्रशासनिक अमला पहुंचा है, जहां कभी माओवाद के भय से साप्ताहिक बाजार भी बंद हो जाते थे। अब ग्रामीण खुलकर अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रख रहे हैं। शिविर में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायक उपकरण, बैशाखी, वाकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र, मत्स्य जाल, आईस बॉक्स, मृदा परीक्षण प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोदभराई और नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और स्वास्थ्य सलाह दी, वहीं पशुधन विकास विभाग ने पशुओं के उपचार एवं संक्रमण से बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की। एसडीएम उसूर भूपेन्द्र गावरे के नेतृत्व तथा सीईओ जनपद पंचायत उसूर प्रभाकर चंद्राकर के समन्वय से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

विदिशा पुलिस की अभिनव पहल से पारिवारिक एवं संपत्ति विवादों का संवेदनशील निराकरण

भोपाल  समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, सुरक्षा एवं संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विदिशा पुलिस द्वारा संचालित “सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत” एक प्रभावी एवं जनहितकारी पहल के रूप में सामने आई है। जिले में यह पहल बुजुर्गों के लिए न्याय और विश्वास का ऐसा मंच बन चुकी है, जहाँ उनकी समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना जा रहा है, बल्कि पारिवारिक समन्वय, सामाजिक संवेदनशीलता एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक  रोहित काशवानी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विवादों एवं समस्याओं की नियमित रूप से सुनवाई की जा रही है। पंचायत की बैठकों में कोर कमेटी के सदस्य  आर. कुलश्रेष्ठ,  प्रमोद व्यास, डॉ. सचिन गर्ग,  विनोद शाह,  अतुल शाह एवं  डी.के. वाजपेयी सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की शुरुआत 23 जनवरी 2025 को की गई थी। तब से लेकर 15 अप्रैल 2026 तक कुल 54 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में कुल 187 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 131 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। शेष मामलों में दस्तावेज, साक्ष्य एवं संबंधित पक्षों की उपस्थिति के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही एवं आगामी सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में आयोजित बैठक में कुल 10 प्रकरणों की सुनवाई की गई। पंचायत के माध्यम से कई जटिल पारिवारिक मामलों का आपसी समझाइश एवं संवाद के जरिए समाधान कराया गया। एक प्रकरण में शमशाबाद क्षेत्र के एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की थी कि उनके बेटे द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि निकालकर खर्च कर दी गई तथा उनकी जमीन पर खेती की जा रही है। सुनवाई के दौरान पंचायत ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर सहमति बनाई, जिसके तहत बेटे ने 15 दिनों के भीतर शेष राशि लौटाने पर सहमति व्यक्त की। एक अन्य मामले में विधवा बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे द्वारा डराने-धमकाने एवं घर के बाहर खड़ी बाइक में आग लगाने की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को विधिसम्मत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार पारिवारिक हस्तक्षेप, वैवाहिक तनाव एवं संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में भी दोनों पक्षों को सुनकर समाधान के प्रयास किए गए। कई मामलों में आपसी सहमति से विवाद समाप्त हुए तथा परिवारों में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित हुआ। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की विशेषता यह है कि यहाँ केवल शिकायतों की सुनवाई ही नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों को मानसिक संबल, सामाजिक सुरक्षा एवं पारिवारिक सम्मान दिलाने का प्रयास भी किया जाता है। कई मामलों में पुलिस एवं पंचायत सदस्यों की पहल से टूटते पारिवारिक संबंध पुनः सामान्य हुए हैं तथा बुजुर्गों को अपने ही परिवार में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, संस्कार एवं योगदान समाज की दिशा तय करते हैं। ऐसे में उनका सम्मान, सुरक्षा एवं भरण-पोषण सुनिश्चित करना केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है। विदिशा पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत न केवल वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि समाज में पारिवारिक मूल्यों एवं संवेदनशीलता को भी मजबूत कर रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को यह विश्वास मिल रहा है कि पुलिस उनके अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।  

फ्रूट होराइजन 2026’ में कृषि मंत्री का फोकस, भारतीय फलों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर

लखनऊ गुरुवार को लखनऊ पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आमदनी बढ़ाए जाने की तरीके बताए। चौहान ने लखनऊ में दो दिवसीय 'फ्रूट होराइजन 2026' कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन फलों का उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और प्रसंस्करण के मूलभूत ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा, 'लखनऊ में दो दिवसीय 'फ्रूट होराइजन 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फलों का उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और खाद्य प्रसंस्करण की गतिविधियों को मजबूत करना है।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और विदेशी मुद्रा कमाने के लिए भारत को फल और सब्जियों का निर्यात बढ़ाना होगा। मंत्री ने कहा कि भारत कई तरह के फलों, खासकर आम का एक प्रमुख उत्पादक है। उन्होंने कहा, 'हम जिस मात्रा और गुणवत्ता के आम पैदा करते हैं उसकी दुनिया में कोई बराबरी नहीं है। चाहे आम हों, अंगूर हों, केले हों या लीची, हम इनके प्रमुख उत्पादकों में शामिल हैं। हालांकि हमारा निर्यात अब भी काफी कम है।' केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि भारतीय फल और सब्जियां बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचें। फल और सब्जियों के निर्यात से बढ़ेगा रोजगार उन्होंने कहा, अगर हमारे फलों और सब्जियों का निर्यात बढ़ता है तो किसानों की आय बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चौहान ने कहा कि सरकार किसानों, निर्यातकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) जैसी संस्थाओं को एक साझा मंच पर साथ लायी है, ताकि इस क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की जा सके। चौहान ने कहा कि सरकार किसानों और निर्यातकों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान खोजने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां कुछ मुद्दों को तुरंत हल किया जा सकता है, वहीं कुछ मुद्दों के लिए लंबे समय तक शोध की जरूरत होगी।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद, सामान्य शव वाहन में ले जाए गए मोर पर सवाल

रतलाम  सैलाना नगर के कुमावतपुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीव नियमों के अनुसार मोर की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही मोर का अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग की ओर से मोर के शव का क्षत–विक्षत होने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए उनमें मोर का शव सामान्य देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार कुमावतपुरा के मुख्य मार्ग पर एक मोर उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहा था। इसी दौरान वह विद्युत तारों में उलझ गया और करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर मृत अवस्था में पड़े मोर को देखा तो वन विभाग को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद वन विभाग का कर्मचारी मौके पर पहुंचा और मोर को वहां से उठाकर ले गया। बाद में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी, वनपाल नारायण कटारा, कार्यवाहक वनपाल रघुवीर सिंह चुंडावत एवं सुरक्षा चौकीदार कालू मौजूद रहे। दरअसल वन्यजीव कानून के तहत राष्ट्रीय पक्षी की मौत होने पर अंतिम संस्कार से पहले पोस्टमार्टम कराना आवश्यक होता है, ताकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके। इसके बावजूद विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी ने बताया कि मोर का शव क्षत–विक्षत हो चुका था, इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। वहीं पशु चिकित्सक बीएल पाटीदार ने कहा कि मोर की मौत के 24 घंटे के भीतर किसी भी स्थिति में पोस्टमार्टम किया जा सकता है। वन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम कराने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।  

बिहार में बड़ा ट्रैफिक संकट, टूटे विक्रमशिला सेतु पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की तैनाती

  भागलपुर बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर की लाइफ लाइन कहलाने वाली विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप हो जाने से कई जिलों में परेशानी बड़ गई है। इस सेतु को फिर से दुरुस्त करने और इस पर आवागमन चालू करने को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कहा जा रहा है कि पुल से यातायात सुचारु होने में तीन माह का वक्त लगेगा। आम जनों की पेशानी को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को तैनात किया गया। बीआरओ उत्तर बिहार को भागलपुर समेत अन्य कई जिलों से जोड़ने वाले इस पुल से आंशिक आवागमन की व्यवस्था बहाल करने के लिए काम शुरू हो ह गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की मदद से बेली ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की सहायता से शीघ्र ही एक बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आंशिक रूप से यातायात को तुरंत बहाल करना, ताकि जनता को हो रही असुविधा कम हो सके। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन है। इसलिए बेली ब्रिज का निर्माण कर आंशिक रूप से यातायात शुरू किया जाएगा। क्या है बेली ब्रिज? बेली ब्रिज एक इमरजेंसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के समय किया गया था। बेली ब्रिज एक प्रकार का पोर्टेबल, प्री कास्टेड स्टील ट्रस ब्रिज है। इसे युद्ध या आपदा के समय तेजी से और आसानी से ट्रस को एक दूसरे को जोड़कर बनाया जाता है। यह मॉड्यूलर डिज़ाइन पर आधारित है। सका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940-41 में ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड कोलमैन बेली ने किया था। इसमें भारी उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती और यह अस्थायी या स्थायी दोनों तरह से काम आ सकता है। सेना और सीमा सड़क संगठन इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों या बाढ़, भूस्खलन अन्य आपदा की स्थिति में संपर्क बहाल करने के लिए करते हैं। यह ट्रस नामक त्रिकोणीय स्टील स्ट्रक्चर से बनता है, जिन्हें पिन और बेल्ट की सहायता से आसानी से जोड़ा जा सकता है। रविवार आधी रात को टूटा था पुल यह घटना रविवार रात लगभग 12.30 बजे की है। पहले सेतु पर 133 नंबर पोल के पास कुछ हिस्सा धंस गया। उसी वक्त आवागमन रोक दिया गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह हिस्सा टूट गया। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने रात 1.15 बजे इसकी सूचना दी और लोगों से विक्रमशिला सेतु की ओर न जाने की अपील की है। पुलिस की सतर्कता से जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के समय सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली में थे। हालांकि उन्होंने पटना पहुंचते ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर जल्द से जल्द आवागमन सुचारु कराने के आदेश अधिकारियों को दिया। इस मामले में लापरवाही के आरोप कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: भोपाल नगर निगम का नया भवन सुशासन का प्रतीक बनेगा

भोपाल नगर निगम का नवीन भवन बनेगा सुशासन का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भवन से नागरिकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर होंगी उपलब्ध ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित है नवीन भवन ऊर्जा में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है नगर निगम का नवीन भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर पालिक निगम भोपाल के नवीन मुख्यालय भवन का किया लोकार्पण नीमच के सौर ऊर्जा प्लांट का भी रिमोट से किया लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपालवासियों को भोपाल नगर निगम के नवीन मुख्यालय भवन की बधाई देते हुए कहा कि देश की क्लीन और ग्रीन कैपिटल, झीलों की नगरी भोपाल के नगर निगम का यह भवन सुशासन का प्रतीक बनेगा। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने जन सेवा को शासन का आधार माना था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के नाम पर स्थापित अटल भवन सुलभ, सुव्यवस्थित और पारदर्शी सेवाओं का केंद्र होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल नगर पालिक निगम के नवनिर्मित मुख्यालय "अटल भवन" के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक भवन शहर में सुशासन, बेहतर नागरिक सुविधाओं और विकास के नए संकल्प का प्रतीक बनेगा। स्वच्छता शपथ पटल पर लिखा संदेश- 'भोपाल रहेगा स्वच्छता में नंबर-वन' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर पालिक निगम भोपाल के नवनिर्मित भवन में फीता खोलकर भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने भवन की शिलापट्टिका का अनावरण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनिर्मित भवन का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वच्छता शपथ पटल पर लिखा कि 'भोपाल स्वच्छता में रहेगा नंबर-वन'। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल नगर पालिक निगम द्वारा नीमच जिले के देवरी में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से पीपीपी मोड पर विकसित की गई सौर ऊर्जा परियोजना का भी रिमोट का बटन दबाकर लोकार्पण किया। लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम् तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भवन लोकार्पण अवसर पर शहनाई वादन कर रहे कल्लू भाई और उनके साथियों को प्रोत्साहन स्वरूप 5-5 हजार रूपए प्रदान करने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर भोपाल के प्रभारी तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायकगण रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, विष्णु खत्री तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। भोपाल को मेट्रोपॉलिटिन सिटी के रूप में किया जा रहा है विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल नगर पालिक निगम का यह भवन ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित है। इस भवन का आकल्पन नागरिकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। भवन में सूर्य के प्रकाश और वेंटीलेशन की पर्याप्त व्यवस्था है, जो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित भारतीय वास्तुकला के सिद्धांतों के अनुरूप है। यह भवन अपनी ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज नगर पालिक निगम भोपाल द्वारा नीमच के ग्राम देवरी में स्थापित 10.5 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का लोकार्पण भी किया है। इस भवन की बिजली आपूर्ति ओपन एक्सेस से नीमच के संयंत्र से की जाएगी। परिसर की पार्किंग में भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह भवन ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है। प्रदेश की राजधानी भोपाल का गौरव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। भोपाल को मेट्रोपॉलिटिन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ को भोपाल से जोड़ते हुए यह क्षेत्र विकास के नए सोपान तय करेगा। नगरीय निकाय जनता के लिए शासन प्रणाली का महत्वपूर्ण स्तंभ है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और नगरीय निकाय नागरिकों की भावनाओं की अभिव्यक्ति और जनता का-जनता द्वारा-जनता के लिए शासन प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश, प्रदेश के साथ-साथ नगरीय और ग्राम स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं। राज्य सरकार विकास और जनकल्याणकारी गतिविधियों से प्रदेशवासियों की बेहतरी के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‍विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत विश्व के समक्ष आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। कई अन्य देशों में उनके अस्तित्व को लेकर ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां विद्यमान हैं। इन विषम परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी द्वारा आरंभ की गई विकास की गतिविधियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णयों से आम भारतीय का विश्वास बढ़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में धर्म-संस्कृति के गौरव का काल चल रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम के धाम की स्थापना हो या नारी शक्ति वंदन अधिनियम या फिर पड़ोसी देशों के कुत्सित इरादों के विरूद्ध की गई कार्यवाही, प्रधानमंत्री मोदी के निर्णयों से आम भारतीय का विश्वास बढ़ा है। धारा 370 के बाद कश्मीर में बदलाव आया है और अब कश्मीर के लोग भी भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर देश के दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की बेहतरी के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। सफाई मित्रों को पीपीई किट प्रदान किए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में सफाई मित्रों को पीपीई किट प्रदान किए। पीपीई किट में रेनकोट, फुल बॉडी ड्रेस, हेलमेट, ग्लव्स, मास्क और रिफ्लेक्शन जैकेट शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत श्रीमती लक्ष्मी बाई एवं काजल सटोरिया को आवंटन आदेश पत्र और मकान की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत दिनेश मौर्य को 50 हजार रूपए की ऋण राशि का चैक प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत सुपूजा गिरी गोस्वामी को स्व-सहायता समूह के लिए 2 लाख रूपए से अधिक की ऋण राशि का चैक प्रदान किया। नगर निगम से संबंधित सभी विभाग एक ही छत के नीचे एक साथ कार्य करेंगे प्रभारी मंत्री चेतन काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों में नए … Read more

देवघर एयरपोर्ट से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत के लिए नई उड़ानें जल्द

 देवघर  गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को देवघर में कहा कि अक्टूबर-नवंबर में देवघर में बिहार-झारखंड का पहला वीजा फेसिलटी सेंटर शुरू होगा। अभी तक लोग वीजा बनवाने दिल्ली या कोलकाता जाते थे। अब यह सुविधा देवघर में मिलेगी। जानकारी हो कि मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में भी यह सुविधा नहीं है। अभी छोटे देश जाने के लिए वीजा बनना शुरू होगा। पर्यटन या पढ़ाई के लिए सिंगापुर, दुबई, थाइलैंड, मलेशिया, बैंकॉक जाने वालों को देवघर वीजा केंद्र से वह सुविधा मिलने लगेगी। देवघर एक बड़ा केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि दो न्यूक्लियर प्लांट भी इस क्षेत्र को मिल रहा है। एक देवघर के पुनासी डैम और दूसरा बिहार के बांका में होगा। देवघर से हैदराबाद, गुवाहाटी, सूरत की चलेगी फ्लाइट सांसद ने बताया किया कि देवघर एयरपोर्ट का विस्तार होगा। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र ही निविदा होगी। जल्द ही देवघर एयरपोर्ट से नई उड़ान शुरू होगी। देवघर से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत की विमान सेवा शुरू होगी। वहीं, मुंबई और कोलकाता के लिए अब प्रतिदिन फ्लाइट हो जाएगी। जानकारी हो कि अभी दिल्ली, बेंगलुर की प्रतिदिन यात्री विमान है। मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन है। जो प्रतिदिन हो जाएगी। गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन देवघर और गोड्डा से लगातार नई ट्रेन नए गंतव्य के लिए चल रही है। एक नहीं कई ट्रेनें हो गई हैं। इस बीच सांसद ने एलान किया कि जल्द ही गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन चलेगी। दिसंबर 2027 तक गोड्डा-महगामा रेल लाइन का काम पूरा हो जाएगा और महगामा तक ट्रेन चलने लगेगी। वहीं, 28 जून 2028 तक देवघर से पीरपैंती रेल लाइन पूरी हो जाएगी। उसके बाद सीधी ट्रेन चलेगी। गोड्डा-पाकुड़ के बीच भी रेल लाइन बिछेगी। यह पीपीपी मोड पर होगा। साहिबगंज-पाकुड़ को मिलेगी वंदे भारत डॉ. निशिकांत ने कहा कि भागलपुर से कोलकाता के बीच एक वंदे भारत जल्द शुरू होगी। इससे साहिबगंज और पाकुड़ के लोगों को फायदा होगा। साहिबगंज और पाकुड़ में इसका ठहराव होगा। वंदे भारत सुबह भागलपुर से चलेगी और शाम में कोलकाता से भागलपुर के लिए वापस होगी। यह वाया साहिबगंज और पाकुड़ होगी। बता दें कि पाकुड़ सबसे अधिक राजस्व देने वाला इलाका है।  

2819 अभ्यर्थियों को राहत नहीं, 8 और 9 मई को होगी पेपर-2 की परीक्षा

 रांची झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद में महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रार्थी और अन्य सभी 2819 अभ्यर्थी अगर चाहें तो 8 और 9 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने फिलहाल पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रार्थियों ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने का आग्रह किया था। लेकिन अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत ने कहा कि परीक्षार्थी चाहें तो उक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रार्थियों सहित सभी 2819 अभ्यर्थी आठ और नौ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होना होगा। सुनवाई के दौरान सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा में 24 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए, यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी। 2819 अभ्यर्थी के आइपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी, जिसके कारण जेएसएससी ने इनकी पुनर्परीक्षा आठ व नौ मई को लिए जाने का निर्देश दिया। इन सभी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया। अदालत ने प्रार्थियों के पुनर्परीक्षा पर रोक से संबंधित मांग को अस्वीकार करते हुए प्रार्थियों को निर्देश दिया कि वह चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को इस वर्ष जून माह तक परिणाम जारी करने का निर्देश भी दिया है। इस संबंध में अर्चना कुमारी और अन्य की ओर से मामले में याचिका दायर की है। जिसमें जेएसएससी को माडल आंसर दिखाने का आदेश देने का मूल आग्रह किया है ताकि वह माडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें। लेकिन संशोधन याचिका के माध्यम से प्रार्थियों ने जेएसएससी द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है। नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों, जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं, को आठ मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए