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लुधियाना में बिजली समस्या का समाधान, Powercom ने बदली केबल व्यवस्था; लाइन फाल्ट से मिलेगी राहत

लुधियाना. पिछले करीब 23 महीनो से बिजली की समस्याओं से जूझ रहे शहर वासियों को बड़ी राहत नसीब हुई है। दरअसल, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन की अग्र नगर डिवीजन के अंतर्गत पड़ते विभिन्न इलाकों में अक्सर बिजली का ग्रिड फेल और जमीन के नीचे बिछी तारों के जाल में फॉल्ट की समस्या होती थी.  फॉल्ट पड़ने के कारण अग्र नगर, डी.सी कांप्लेक्स, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, फाउंटेन चौक आदि इलाकों में बसे लाखों परिवारों को कई कई दिनों तक बिजली की सप्लाई नहीं शुरू होने के कारण पीने वाले पानी की बूंद बूंद के लिए तरसने पड़ रहा है लेकिन अब पावर कॉम द्वारा करीब 4 करोड रु. लागत से बिजली के अंडरग्राउंड लाइनों को ओवरहेड कर लोगों की समस्या का समाधान निकल लिया गया है. सभी  इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन की अग्र नगर डिविजन में लगभग आधे शहर को बिजली की सप्लाई दी जा रही है जिनमें शहर के पोश कमर्शियल इलाके रख बाग, कॉलेज रोड सिविल लाइन, मल्हार रोड, फाउंटेन चौक, घुमार मंडी और फिरोजपुर रोड के बाजार मुख्य रूप से शामिल है l जहां पर केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लोग विवाह शादियों के लिए कपड़ों, सोने के गहनों, मेकअप का सामान और मिठाइयां आदि खरीदने के लिए आते हैं त्योहार और विवाह शादियों के सीजन में यहां पर रोजाना करोड़ों रु. का कारोबार होता है लेकिन अग्र नगर डिवीजन में बिजली का फाल्ट पड़ने से उक्त सभी  इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होकर रह जाता है जिससे न केवल औद्योगिक नगरी की कारोबारी कमर टूट कर रह जाती है बल्कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सेवाएं ठप पड़ने से आम जनता की मुसीबतें भी आसमान छूने लगती है. आम जनता में सरकार की जमकर किरकिरी 14 जून 2024 को जब भयानक गर्मी के कारण आसमान से आग बरस रही थी तब सिविल लाइन बिजली का ग्रिड फेल होने के कारण शहर का आधा हिस्सा करीब चार दिनों तक अंधेरे में डूबा रहा जिसके कारण लोगों का जीवन मानो रुक सा गया बिना बिजली के लोगों को पीने वाले पानी, इंटरनेट सेवाओं, मोबाइल फोन चार्ज नहीं होने सहित इनवर्टर और जनरेटर आदि सब कुछ खत्म होकर रह गया और लोग आदिवासियों इलाकों जैसा जीवन जीने को मजबूर हो गए थे l जिसके कारण लोगों का गुस्सा फूट उठा और इलाका निवासियों ने सड़कों पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया और इस गंभीर मुद्दे को लेकर विपक्षीय पार्टियों के नेताओं ने भी सरकार को घेरते हुए सिस्टम को फेल बताया l वही पंजाब केसरी द्वारा आम जनता के हक में उठाई गई आवाज के बाद मौके पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन के डायरेक्टर कई चीफ इंजीनियरो और उच्च अधिकारियों सहित करीब 200 कर्मचारियों की टीम जिसमें दिल्ली से बुलाई गई विशेष टीम भी शामिल रही को बिजली का फाल्ट ढूंढने के लिए कई दिनों तक पसीना बहाना पड़ा और आखिरकार चार दिनों बाद इलाके में बिजली की सेवाएं फिर से बहाल हो पाई थी जिसके कारण आम जनता में सरकार की जमकर किरकिरी हुई. क्या कहते हैं अधिकारी  पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन की अग्र नगर डिवीजन में तैनात एक्सियन राजेश शर्मा ने दावा किया कि इलाके में बिजली की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा बिजली की अंडरग्राउंड केबल को ओवरहेड कर दिया गया है ताकि जब कभी बिजली का फाल्ट पड़े तो आसानी से समस्या का समाधान किया जा सके और आम जनता को किसी तरह की परेशानी ना करनी पड़े उन्होंने बताया 1 मई की देर शाम को सारे सिस्टम को अमली जामा पहनाने संबंधी सारा काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है.

प्रदेश में 43 लाख से ज्यादा 1 किलोवाट घरेलू कनेक्शन के उपभोक्ता

लखनऊ  योगी सरकार ने बीते दिनों बिजली उपभोक्ताओं, खासकर लोवर और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में अहम बदलाव किए थे। योगी सरकार ने 1 किलोवाट तक के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं का बैलेंस समाप्त होने के बाद भी उनकी बिजली आपूर्ति 30 दिनों तक जारी रखने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले से कम लोड वाले करीब 67 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है। इसमें 43 लाख से ज्यादा  1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा राहत मिली है। 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दरअसल प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद सभी उपभोक्ताओं को केवल 3 दिन का ही समय मिलता था, जिसके बाद बिजली स्वतः कट जाती थी। इससे खासकर 1 और 2 किलोवाट के घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही थी। इसी को देखते हुए योगी सरकार ने बीते दिनों 1 किलोवाट और 2 किलोवाट वाले घरेलू उपभोक्तओं को राहत देने का फैसला लिया था। सरकार के फैसले के बाद अब 1 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले घरेलू उपभोक्ताओं का बैलेंस खत्म होने के बाद भी उनकी बिजली तुरंत नहीं कटेगी। 30 दिन तक नहीं कटेगी बिजली नए प्रावधान के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को 30 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी जाएगी। इस अवधि के दौरान घरेलू उपभोक्ता अपना बैलेंस रिचार्ज कर सकते हैं और बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। हालांकि अगर उपभोक्ता 30 दिनों के भीतर भी अपना बैलेंस ठीक नहीं करते हैं, तो इसके बाद बिजली आपूर्ति स्वतः बंद कर दी जाएगी। इसी तरह 1 किलोवाट से अधिक और 2 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को भी इमरजेंसी क्रेडिट की सुविधा दी गई है। ऐसे उपभोक्ताओं को कम से कम 3 दिन या 200 रुपए तक के नेगेटिव बैलेंस (जो बाद में हो) तक बिजली मिलती रहेगी।  2 किलोवॉट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 रुपए तक निगेटिव बैलेंस पर भी कनेक्शन चालू उदाहरण के तौर पर अगर बैलेंस खत्म होने के 3 दिन बाद तक उपभोक्ता का बैलेंस माइनस 100 रुपए है, तो बिजली जारी रहेगी। लेकिन जैसे ही बैलेंस माइनस 200 रुपए तक पहुंच जाएगा और रिचार्ज नहीं कराया गया, तो ऐसा कनेक्शन स्वतः कट जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 67 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है। विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अभी तक लगभग 83 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिसमें 43 लाख 17 हजार के लगभग 1 किलोवाट घरेलू कनेक्शन के उपभोक्ता हैं और 24 लाख 51 हजार के लगभग 2 किलोवॉट घरेलू कनेक्शन के बिजली उपभोक्ता हैं।  इस्तेमाल की गई बिजली का बिल अगले रिचार्ज में होगा समायोजित नई व्यवस्था के तहत इमरजेंसी क्रेडिट अवधि के दौरान उपभोग की गई बिजली की राशि अगले रिचार्ज से स्वतः कट जाएगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे UPPCL Smart ऐप के माध्यम से अपना मौजूदा बैलेंस और अनुमानित खपत देखते हुए समय पर रिचार्ज कराएं। साथ ही सरकार ने उपभोक्ता सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए एक और अहम प्रावधान किया है। अब किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन काटने से पहले 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। ताकि उन्हें समय रहते रिचार्ज करने का अवसर मिल सके। इस तरह उपभोक्ताओं को समय-समय पर लो बैलेंस की सूचना दी जाती रहेगी। रविवार, दूसरे शनिवार और छुट्टियों में नहीं कटेगी बिजली नई व्यवस्था में कुछ विशेष समय भी निर्धारित किए गए हैं, जिनमें बिजली नहीं काटी जाएगी। शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक बिजली नहीं काटी जाएगी। इसके अलावा रविवार, दूसरे शनिवार और सभी सार्वजनिक अवकाश पर बिजली सप्लाई जारी रहेगी। भले ही बैलेंस समाप्त या नेगेटिव ही क्यों न हो। हालांकि इस दौरान इस्तेमाल की गई बिजली का भुगतान अगले रिचार्ज में स्वतः कट जाएगा। गौरतलब है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर एक आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रणाली है, जो मोबाइल के प्रीपेड सिस्टम की तरह काम करती है पहले रिचार्ज करें, फिर उपयोग करें।

889 ऑफलाइन शिकायतों का भी किया गया समाधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। समाज कल्याण विभाग की योजनाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था आम जनता के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी हैं। खासकर आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल के जरिए शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण ने प्रशासनिक कार्यशैली में एक सकारात्मक बदलाव लाया है। इससे न केवल लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो रहा है, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर विभाग सक्रिय समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज 9604 शिकायतों में से 8896 यानी 92.6 प्रतिशत मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। यह उपलब्धि विभाग की कार्यकुशलता और जवाबदेही को दर्शाती है। वहीं, ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में भी विभाग ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में आई 1035 शिकायतों में से 889 का समाधान कर 85.9 प्रतिशत की सफलता दर हासिल की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति पर विशेष फोकस सरकार द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा रहा है। इससे बुजुर्गों और छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है, जो उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए ये योजनाएं काफी सहायक साबित हो रही हैं। विभाग की कोशिश है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ पाने में देरी या परेशानी का सामना न करना पड़े। जरूरतमंदों तक सीधे पहुंच रही मदद समाज कल्याण विभाग की सक्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में 3168 जरूरतमंदों तक सीधी सहायता पहुंचाई गई है। वहीं, केवल पिछले चार महीनों में ही 991 लोगों का समाधान कर विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक रूप से लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता और जवाबदेही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग ने शिकायत दर्ज करने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। आईजीआरएस पोर्टल के जरिए लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी प्रगति की निगरानी भी कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हुई है। वहीं ऑफलाइन प्रक्रिया के चलते ग्रामीण इलाकों से जुड़ाव रखने वाले लोग लिखित शिकायत कर अपनी समस्याओं का समाधान करवा रहे हैं।

जीएसटी विभाग का बड़ा एक्शन: माइंस ठेकेदार के ठिकानों पर छापा, महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में

भानुप्रतापपुर. छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर में मांइस ठेकेदार अरविंद साहू के घर और दफ्तर पर जीएसटी टीम ने शुक्रवार देर रात दबीश दी. दिल्ली और रायपुर से अधिकारियों की संयुक्त टीम दो गाड़ियों में पहुंची. ठेकेदार के ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी में वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रोनिक डिवाइसेस की जांच की गई. यह कार्रवाई लगभग रात 11 बजे से 1 बजे तक यानी 2 घंटे चली. जानकारी के मुताबिक, माइंस ठेकेदार अरविंद साहू के बाजारपार स्थित निवास और दल्लीरोड स्थित कार्यालय में एक साथ GST की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. बताया जा रहा है कि ठेकेदार अरविन्द साहू नीको जायसवाल ग्रुप की खदानों में ठेका लेता है. जांच के बाद कार्यालय से प्रिंटर सहित कुछ महत्वपूर्ण सामान अपने साथ ले जाने की खबर है. पूरी कार्रवाई इतनी गोपनिय थी कि स्थानीय पुलिस को भी इसकी जानकारी नहीं थी.  रायपुर कार्यालय में पहले भी पड़ा था छापा हालांकि टीम द्वारा कौन-कौन से दस्तावेज या उपकरण जब्त किए गए, इसकी आधिकारिक जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है. गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी अरविंद साहू के रायपुर स्थित कार्यालय में जीएसटी विभाग द्वारा दबिश दी गई थी. कार्रवाई के संबंध में जब ठेकेदार अरविंद साहू को संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.

गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 दिनों तक टोल फ्री, जिलों के लोगों में खुशी की लहर

गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल फ्री रखने पर कई जिलों के लोगों ने जताई खुशी श्रद्धालुओं, व्यापारियों, हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों और वादकारियों को होगी सुगमता  लखनऊ/प्रयागराज/बरेली  गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने के योगी सरकार के निर्णय पर कई जिलों के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना है कि इस फैसले से श्रद्धालुओं के अलावा हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों, वादकारियों, गवाहों के साथ-साथ व्यापारियों को इस सुविधा का लाभ निशुल्क मिलेगा। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह हाईवे 12 जिलों को जोड़ता है। प्रयागराज के पर्यटक, व्यापारी, अधिवक्ता और वादकारियों ने जताई खुशी  गंगा एक्सप्रेस वे पूर्वी और पश्चिमी यूपी के आवागमन का सेतुबंध साबित होने वाला है। इसका अंतिम बिंदु प्रयागराज है। यहां के रहने वाले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल कहते हैं कि इससे व्यापारियों को काफी सुविधा होगी। पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद हाईकोर्ट आने वाले हजारों वादकारियों और वकीलों को निशुल्क यात्रा का लाभ मिलेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे का कहना है कि वादकारी और वकीलों को दो हफ्ते गंगा एक्सप्रेसवे की यात्रा को समझने के लिए काफी हैं। बरेली और आसपास के जिलों से हाईकोर्ट और संगम पहुंचना हुआ आसान   बरेली से प्रयागराज जाने वालों की संख्या काफी बड़ी है। इस एक्सप्रेसवे से उन लोगों को काफी लाभ मिलेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं आदि जिलों के लोगों का हाईकोर्ट जाना, त्रिवेणी पर गंगा स्नान करना बहुत आसान हो गया है। दो दिनों में पांच हजार से ज्यादा लोगों ने निशुल्क हाईस्पीड सफर का आनंद लिया है। बरेली के सीबीगंज के रहने वाले सर्वेश सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए यह एक्सप्रेसवे बेहद अहम है। 15 दिन की टोल छूट से लागत और समय दोनों कम होंगे, जिससे कारोबार को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। कारोबारियों को मेरठ से प्रयागराज के बीच के 12 जिलों में व्यापार बढ़ाने में काफी सहूलियत हो जाएगी। माडल टाउन के रहने वाले इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि टोल फ्री शुरुआत से लोगों में सकारात्मक माहौल बनेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मिथिलापुरी के रहने वाले अशोक सक्सेना ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिन टोल फ्री रखने का फैसला दूरदर्शी कदम है। स्टेट बैंक कालोनी के रहने वाले अमित आनंद ने बताया कि लंबी दूरी का सफर अब आसान और सस्ता हो गया है। टोल फ्री से बड़ी राहत मिलेगी।

निर्माण गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दाढ़ी (बेमेतरा) सीसी रोड प्रकरण पर सख्त रुख: कलेक्टर को मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है। मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने  निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है – जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।

जल संकट से निपटने की तैयारी, सभी जलघर और तालाब भरने के निर्देश

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गर्मी के मौसम के मद्देनजर प्रदेश के सभी हिस्सों में पीने के पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। सभी तालाब, जलघर और अन्य जलाशय भरकर रखे जाएं। यह निर्देश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को सचिवालय में जन स्वास्थ्य विभाग व सिंचाई विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ पेयजल व कृषि सिंचाई के लिए पानी की स्थिति की समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश से संबंधित किशाऊ सहित अन्य जल परियोजनाओं के संबंध में जल्द ही जल शक्ति मंत्रालय के साथ बैठक की जाएगी जिसमें इन राज्यों के अधिकारी भी शामिल होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई के पानी की कमी न रहने दी जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल के लिए नहरों से जुड़े सभी जलघरों व तालाबों को भरकर रखा जाए। जहां ट्यूबवेल आधारित जलापूर्ति होती है वहां यदि कोई ट्यूबवेल खराब हो जाता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जरूरत पड़े तो लोगों को टैंकर से भी पानी उपलब्ध करवाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस बार भाखड़ा बांध में पानी की स्थिति काफी अच्छी है। इस समय भाखड़ा बांध में पानी का लेवल 36 फुट अधिक है। हरियाणा ने भाखड़ा बांध से अपने कोटे का अभी तक केवल 75-76 प्रतिशत पानी ही इस्तेमाल किया है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में जलघरों में पानी की उपलब्धता की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 4000 एकल गांव आधारित जलघर हैं जबकि 2500 जलघर एक से अधिक गांवों के लिए हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी जलघर नहरों से जुड़े हैं और फिलहाल इनमें पर्याप्त पेयजल उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने नहरों की सफाई, मरम्मत व पुननिर्माण कार्यों की भी समीक्षा की और यह सभी कार्य त्वरित गति से करवाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में स्ट्रीट लाइटें और फिरनी से संबंधित कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर करवाए जाएं। मानसून सीजन के मद्देनजर गांवों को जाने वाले रास्तों तथा गांव की फिरनियों पर पौधे लगवाए जाएं। गांवों में सरपंचों से भी ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाए जहां पौधे लगाए जा सकें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार तथा जनस्वास्थ्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे.गणेशन सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर

 लखनऊ प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है। जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में पिछले 16 माह से जौनपुर टॉप फाइव जिलों में बना हुआ है।    लखनऊ में सबसे अधिक कुल 18,861 मामले निस्तारित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत सभी जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में पूरे प्रदेश में कुल 3,37,708 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 18,861 मामले निस्तारित किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज कुल 12,036 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरे, बाराबंकी 9,139 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है।  आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर प्रदेश में चौथा स्थान किया प्राप्त आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। आजमगढ़ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जनशिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रहीं हैं। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अभियान चलाकर निपटाया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि आजमगढ़ ने अप्रैल में राजस्व मामलों के निस्तारण में चौथा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह बरेली ने 8,483 मामले निस्तारित कर पांचवां और जौनपुर ने 8,274 मामलों का निस्तारण कर छठवां स्थान प्राप्त किया है।     जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने मारी बाजी, 535 मामले किए निस्तारित  जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की अप्रैल माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक के निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 535 मामलों का निस्तारण किया है। इसका अनुपात 214.00 प्रतिशत है। इसी के साथ जनपदीय न्यायालय में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि मानक 350 के सापेक्ष 370 मामलों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर सुल्तानपुर और मानक 190 के सापेक्ष 199 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर गाजीपुर है। जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित मामलों में भी जौनपुर ने मारी बाजी वहीं अप्रैल में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 70 मामलों का निस्तारण कर 233.33 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश भर में सबसे अधिक है और जौनपुर प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 70 मामले निस्तारित किए गये। वहीं, मैनपुरी के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 58 मामले निस्तारित किए गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किए गये मामलों में मऊ दूसरे और मैनपुरी तीसरे स्थान पर हैं।

हरियाणा में पराली जलाने के मामले बढ़े, हजारों जगह खेतों में लगी आग

चंडीगढ़  हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

सेंसर आधारित स्कैनिंग और एआई कैमरों से सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का नया दौर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जहां एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है।  निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन प्रायः निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।