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छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट की योजना: गौतम अडानी, कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की अहम जुगलबंदी

छिंदवाड़ा   देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है।  अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है।  अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है।  कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।  थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है।  किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा।  जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था।  40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी।  न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ     स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा     क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी     आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी     शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा     सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

शराब सिंडिकेट की बढ़ती मनमानी पर लगाम, क्यूआर कोड से होगी डिजिटल निगरानी

शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम शराब दुकानों पर क्यूआर कोड का डिजिटल पहरा 10 दिन तक आबकारी विभाग का विशेष सर्च ऑपरेशन क्यूआर कोड चस्पा न करने वाले लायसेंसियों पर गिरेगी गाज भोपाल आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश द्वारा प्रदेश की मदिरा दुकानों पर हो रही मनमानी वसूली और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अब तकनीक और सख्ती करने का निर्णय लिया है। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई जिलों में शराब की दुकानों पर न केवल अधिकतम विक्रय मूल्य एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धा के चलते न्यूनतम विक्रय मूल्य एमएसपी से कम पर भी मदिरा बेची जा रही है। इस गंभीर अनियमितता को विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना मानते हुए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने अब हर मदिरा दुकान पर 'क्यूआर कोड' चस्पा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगी, जिससे वे मौके पर ही अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर ब्रांड की वास्तविक और कानूनी दरों का सत्यापन कर सकेंगे। आयुक्त सक्सेना ने कहा कि अब हर मदिरा दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल द्वारा जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य है। इसे स्कैन करते ही उपभोक्ता के मोबाइल पर संबंधित जिले की रेट लिस्ट खुल जाएगी। कोई दुकान संचालक यदि निर्धारित एमएसपी से कम या एमआरपी से ज्यादा पर बिक्री करता है, तो मध्यप्रदेश राजपत्र की कंडिका 21.2 एवं 21.3 के तहत उसके विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। उपभोक्ता अब सीधे मौके पर ही रेट का मिलान कर सकेंगे। आबकारी आयुक्त सक्सेना ने कहा कि यह कदम उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से जिला अधिकारियों को विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें दुकानों के प्रमुख हिस्सों पर लगाना होगा। कोई लायसेंसी यदि इन नियमों की अनदेखी करता है या निर्धारित दरों से अलग बिक्री करता पाया जाता है, तो उसे भारी दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मदिरा उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी पारदर्शिता को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक एक विशेष 10 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट 11 मई तक अनिवार्य रूप से तलब की गई है। मदिरा दुकानों पर विक्रय मूल्यों के सत्यापन हेतु चस्पा किये जाने वाले क्यूआर कोड सम्बन्धी निर्देश 1. क्यूआर कोड को ए-3 आकार के स्टिकर पेपर पर प्रिंट कराया जाये। 2. पेपर न्यूनतम 250 जीएसएम की गुणवत्ता का होना चाहिए। 3. स्टिकर में ग्लू पर्याप्त गुणवत्ता/मात्रा का होना चाहिए, जिससे इसे एक बार चस्पा होने पर निकाला न जा सके। 4. प्रत्येक मदिरा दुकान हेतु 5 क्यूआर कोड प्रिंट कराये जाएं :- I. 3 क्यूआर कोड को अभी मदिरा दुकान के ऐसे स्थानों पर चस्पा कराये जाएँ जहाँ से अधिकतम उपभोक्ताओं द्वारा इन्हें आसानी से स्कैन किया जा सके। II. शेष 2 क्यूआर कोड को भविष्य में आवश्यकता हेतु सुरक्षित रखा जाए, जिन्हें पूर्व में चस्पा क्यूआर कोड फटने अथवा क्षतिग्रस्त होने पर पुनः चस्पा कराया जाए। 5. क्यूआर कोड विभाग द्वारा प्रिंट कराये जाकर मदिरा दुकानों पर चस्पा कराये जाएँ, जिसका स्टेशनरी हेतु निर्धारित कोषालय शीर्ष से भुगतान किया जाये। 6. सम्बंधित वृत्त प्रभारी द्वारा मदिरा दुकान के क्यूआर कोड को स्कैन किया जाकर यह परिक्षण कर लिया जाए कि इसके माध्यम से मदिरा के विक्रय मूल्य (एमएसपी एवं एमआरपी) की जानकारी प्रदर्शित हो रही है। 7. क्यूआर कोड चस्पा होने पर, सम्बंधित वृत प्रभारी से मदिरा दुकान की फोटो प्राप्त की जाए जिसमे क्यूआर कोड प्रदर्शित हों। समस्त दुकानों पर उक्त कार्यवाही होने पर कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र इस कार्यालय को प्रेषित किया जाए।  

स्ट्रीट डॉग्स का बढ़ता आतंक, गर्मी में होते हैं आक्रामक; सतना में 3 घंटे में 40 लोगों को काटा

भोपाल  मध्य प्रदेश में स्ट्रीट डॉग्स यानी आवारा कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। हाल ही में कई मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला सतना का है। यहां सिर्फ 3 घंटे में ही 40 लोगों को कुत्तों ने काटा था। भोपाल में कुत्तों के काटने के हर रोज 50 केस पहुंच रहे हैं। सतना में कुत्तों के हमले के बाद लोगों में हड़कंप मच गया था। जान बचाने के लिए वे दुकानों और घरों में छिपते नजर आए, जबकि जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। भोपाल के अस्पतालों में रोजना 40 नए केस राजधानी भोपाल में डॉग बाइट के मामलों ने फिर से बढ़ने लगे हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल में रोजाना 50 से 60 नए मरीज आ रहे हैं, जबकि हर रोज दोनों अस्पतालों में 200 से ज्यादा लोग वैक्सीनेशन के लगवाने आते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि गर्मी शुरू होते ही फिर से केस बढ़ रहे हैं। जनरल ओपीडी में 92 प्रतिशत रैबीज के वैक्सीनेशन के केस आ रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टर ने डॉग बाइट की कैटेगरी बना ली है इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे। बुजुर्ग को बगल के कुत्ते ने काटा जेपी अस्पताल में वैक्सीन लगवाने आए एक मरीज ने बताया कि उनके पड़ोसी एक कुत्ते को खाना देते हैं। एक दिन जब वे अपने घर से निकल रहे थे, तभी उस कुत्ते ने उन्हें काट लिया। वहीं खड़ी एक महिला ने भी बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही हुआ—बगल के कुत्ते ने उनके पैर में नाखून मार दिया था। एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं। 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है। देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई। गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक, गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना जरूरी है, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।

छतरपुर के डायल-112 हीरोज पिकअप पलटने से घायल 08 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  छतरपुर जिले के थाना भगवां क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से पिकअप वाहन के अनियंत्रित होकर पलटने से घायल 08 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित राहत कार्य से सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। 28 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना भगवां क्षेत्र अंतर्गत टिगरी गाँव के पास एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया है, जिसमें 08 व्यक्ति घायल हो गए हैं। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही भगवां थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक  उमेश पाठक एवं पायलट  रामगोपाल विश्वकर्मा ने पाया कि पिकअप पलटने से 08 व्यक्ति घायल हो गए थे। डायल-112 जवानों ने एफआरव्ही वाहन एवं निजी वाहनों की सहायता से सभी घायलों को तत्काल शासकीय अस्पताल, बड़ामलहरा पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से सभी घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं सहायता प्रदान करने हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

मैं’ से ’हम’ की यात्रा ही कामयाबी की कुंजी- राज्यपाल डेका

रायपुर मैं’ से ’हम’ की यात्रा ही कामयाबी की कुंजी- राज्यपाल  डेका प्रदेश़ के राज्यपाल  रमेन डेका आज दुर्ग और भिलाई के एक दिवसीय प्रवास पर रहे। इस दौरान राज्यपाल ने रूंगटा इंटरनेशनल स्किल यूनिवर्सिटी, भिलाई में आयोजित भव्य कार्यक्रम ’सच हुए सपने’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यह कार्यक्रम युवाओं के लिए आयोजित किए गए विशाल रोजगार मेले ’प्लेसमेंटनामा’ के गौरवशाली समापन का प्रतीक था। इस दौरान राज्यपाल  डेका ने प्लेसमेंट के द्वारा चयनित युवाओं को जॉब लेटर प्रदान किया। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सपने वे नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते। उन्होंने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि ’सच हुए सपने’ के माध्यम से 1,702 मेधावी युवाओं को सम्मानजनक रोजगार प्राप्त हुआ है, जो राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। राज्यपाल ने अपने संबोधन में ’प्लेसमेंटनामा’ की सफलता के आंकड़ों की सराहना करते हुए बताया कि इस पांच दिवसीय आयोजन में 10,842 युवाओं ने पंजीयन कराया और लगभग 7,000 साक्षात्कार हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का युग केवल डिग्री का नहीं, बल्कि दक्षता, आत्मविश्वास और व्यावहारिक सोच का है। युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए राज्यपाल ने तीन महत्वपूर्ण बातें साझा कीं- निरंतर सीखने की जिज्ञासा बनाए रखना, ईमानदारी व स्पष्टता को अपनाना और ’मैं’ से ’हम’ की टीम भावना को विकसित करना। उन्होंने कहा कि जब संस्थान, उद्योग और सरकार मिलकर काम करते हैं, तो ऐसे ही असाधारण परिणाम प्राप्त होते हैं। राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि इस आयोजन में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों का उत्साहजनक सहयोग रहा। आईटी सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोर इंडस्ट्री की समान भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ का युवा हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में एचआर प्रतिनिधियों की उम्मीदें बदल चुकी हैं। अब केवल हाँ में हा मिलाने से नौकरी नहीं मिलती, बल्कि विषय का गहन ज्ञान और व्यक्तित्व में झलकने वाला आत्मविश्वास ही आपकी असली पहचान है। युवाओं को भविष्य के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रिक्रूटर्स बेहद स्मार्ट होते हैं जो चंद मिनटों में आपकी क्षमता को परख लेते हैं। इसलिए आपकी आंखों का आत्मविश्वास और भाषा की स्पष्टता ही आपका भविष्य तय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिग्री केवल एक शुरुआत है, असली शिक्षा जीवन के अनुभवों से आती है। जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, उसके विकास के द्वार बंद हो जाते हैं। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि ईमानदारी और स्पष्टता सबसे बड़ी ताकत है; जो नहीं आता उसे स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि एक मजबूत व्यक्तित्व की निशानी है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि "प्लेसमेंटनामा" का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है, जहाँ शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर सीधे रोजगार और राष्ट्र निर्माण से जुड़ती है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आपकी सफलता ही ’नए छत्तीसगढ़’ और ’नए भारत’ की नींव है। स्वयं पर अटूट भरोसा रखें, क्योंकि आज का आपका सपना ही कल के भारत का गौरव बनेगा। इस अवसर पर विधायक रिसाली  रिकेश सेन, विधायक भिलाई नगर  देवेन्द्र यादव, कलेक्टर  अभिजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल, चांसलर  संतोष रूंगटा एवं  संजय रूंगटा, वाइस चांसलर  जवाहर सुनील सेट्ठी, रूंगटा यूनिवर्सिटी के फेकल्टी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक व युवा उपस्थित थे।

निस्तारी संकट से मिली राहत

​रायपुर नहरों के पानी से लबालब हुए 450 तालाब भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रशासन ने ग्रीष्म ऋतु में होने वाली जल किल्लत और दैनिक उपयोग की समस्याओं को दूर करने के लिए महानदी जलाशय परियोजना के जल का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों को भरने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया है। ग्रामीणों को मिल रहा योजना का दोहरा लाभ ​लक्ष्य के करीब प्रशासन,​निस्तारी की समस्या का समाधान और भू-जल स्तर में होगा सुधार जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के 384 गांवों में स्थित कुल 683 तालाबों को भरने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक प्रशासन ने 450 तालाबों को पूरी तरह से भर दिया है, जबकि 128 तालाबों में पानी भरने का काम तेजी से चल रहा है। शेष तालाबों को भी बहुत जल्द पानी से भर दिया जाएगा। तालाबों में पर्याप्त पानी होने से ग्रामीण निस्तारी कार्यों को आसानी से कर पा रहे हैं।तालाबों के लबालब होने से आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर (वाटर रिचार्ज) के बढने में भी सुविधा होगा। प्रशासन द्वारा सख्त निगरानी कर पानी की बर्बादी पर लगाम लगाया जा रहा है। ​इस जल संरक्षण अभियान की मॉनिटरिंग खुद कलेक्टर कुलदीप शर्मा कर रहे हैं। पिछले सप्ताह बलौदाबाजार विकासखंड के दौरे के दौरान उन्होंने कई तालाबों और नहरों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नहरों का पानी व्यर्थ न बहे और इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि पानी का हर बूंद का शत प्रतिशत सही जगह उपयोग हो सके। ​जिला प्रशासन की इस तत्परता से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, वहीं गर्मी के सीजन में जल संरक्षण की दिशा में यह एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है।

स्थानीय मंच से राष्ट्रीय पहचान: छात्र का चयन आईटी कंपनी में

रायपुर धमतरी   में 24-25 अप्रैल को आयोजित युवा फेस्ट 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। यह आयोजन युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हो रहा है। इसी क्रम में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्कशॉप से एक प्रेरणादायक सफलता कहानी सामने आई है। अभनपुर निवासी कक्षा 12वीं के छात्र प्रतीक ताम्रकार का चयन बेंगलुरु स्थित TEKNIKOZ Software Private Limited में समर इंटर्नशिप हेतु किया गया है। यह अवसर उन्हें युवा फेस्ट के दौरान आयोजित AI वर्कशॉप में सक्रिय सहभागिता, तकनीकी समझ और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्राप्त हुआ है। वे आगामी दो माह (अप्रैल से जून 2026) तक कंपनी के साथ कार्य करते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम के दौरान बेंगलुरु से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किल्स, स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं आधुनिक तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी दी गई। वर्कशॉप में प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट आधारित सीखने और करियर मार्गदर्शन का भी अवसर मिला। प्रतीक ने अपनी जिज्ञासा, नवाचार की सोच और सीखने की प्रतिबद्धता से प्रशिक्षकों को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें यह महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ। कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने प्रतीक ताम्रकार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवा फेस्ट का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें सही दिशा और मंच उपलब्ध कराना है। प्रतीक की सफलता इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण एवं छोटे शहरों के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। कलेक्टर ने जिले के अन्य युवाओं से भी इस प्रकार के नवाचार एवं कौशल आधारित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की, ताकि वे आधुनिक तकनीकों से जुड़कर अपने करियर को नई दिशा दे सकें।   समग्र रूप से “युवा फेस्ट-2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। इसने शिक्षा, संस्कृति, खेल और तकनीक के समन्वय के माध्यम से युवाओं को आत्मविश्वास, नवाचार और नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सीमित समय और चुनौतियों के बावजूद उत्कृष्ट टीम वर्क, समर्पण और योजनाबद्ध प्रयासों के चलते यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा। यह फेस्ट इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि युवाओं को उचित मंच, मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। “युवा फेस्ट-2026” ने न केवल प्रतिभाओं को मंच दिया, बल्कि सीख, प्रेरणा और आत्मविकास का ऐसा वातावरण भी निर्मित किया, जिसकी स्मृतियाँ लंबे समय तक युवाओं के मन में जीवित रहेंगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहेंगी। प्रतीक ताम्रकार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने चाचाजी पवन कुमार ताम्रकार, प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय कुरूद को दिया, जिनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से उन्होंने युवा फेस्ट में भाग लिया और इस अवसर तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि युवा फेस्ट जैसे मंच युवाओं के लिए सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम हैं।   उल्लेखनीय है कि युवा फेस्ट 2026 के अंतर्गत जिले में विभिन्न क्षेत्रों—तकनीक, खेल, कला, नवाचार एवं उद्यमिता—से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य युवाओं की प्रतिभा को निखारना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है। जिले में इस प्रकार के आयोजन न केवल कौशल विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अवसरों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

केन्द्रीय अतिरिक्त सचिव केरोलिन खोंगवार ने की समीक्षा, किया आंगनवाड़ी, वन स्टाप सेंटर का दौरा

भोपाल  केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास की अतिरिक्त सचिव कैरोलिन खोंगवार देशमुख ने कहा कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ लाभार्थियों तक सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करना प्रशासनिक तंत्र की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मंगलवार को भोपाल प्रवास के दौरान उन्होंने यह बात महिला एवं बाल विकास संचालनालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कही, जहाँ उन्होंने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य की प्रगति का विश्लेषण किया। खोंगवार ने विभागीय नवाचारों की सराहना करते हुए निर्देश दिए कि सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और गतिशीलता को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। देशमुख ने मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं को परखने के लिए भोपाल जिले के विभिन्न केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने ईंटखेड़ी परियोजना के जेपी नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र का अवलोकन किया, जहाँ बच्चों के साथ सीधा संवाद कर उनकी शिक्षा और पोषण के स्तर को समझा। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शगुफ्ता खान ने उन्हें अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ECCE) के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और SRF फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) के उपयोग से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं और केंद्र में बच्चों की उपस्थिति में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। निरीक्षण के दौरान देशमुख ने आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित 'बाल चौपाल' में हिस्सा लेकर पाँच बच्चों का जन्मदिवस मनाया और उन्हें उपहार वितरित किए। केंद्र में स्थापित उदिता कॉर्नर और न्यूट्री कॉर्नर के साथ-साथ उन्होंने वहां विकसित की गई पोषण वाटिका की भी प्रशंसा की, जहाँ सहजन, टमाटर, बैंगन और लौकी जैसी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाडली लक्ष्मी योजना और पोषण ट्रैकर ऐप के प्रभावी उपयोग पर कार्यकर्ताओं से चर्चा की और उनके समर्पण भाव की सराहना की। देशमुख ने जेपी अस्पताल परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर और जवाहर बाल भवन स्थित सखी निवास का निरीक्षण कर महिलाओं को दी जाने वाली सुरक्षा और आश्रय सुविधाओं का जायजा लिया।  

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना: ईश्वरी प्रसाद ने टमाटर उत्पादन से कमाए 02 लाख 90 हजार रूपए

रायपुर आधुनिक कृषि पद्धति अपनाकर एक किसान अपनी आमदनी में बढ़ोत्तरी कर रहा है।मुंगेली जिले के ग्राम कलारजेवरा (विकासखंड पथरिया) के कृषक ईश्वरी प्रसाद ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। ईश्वरी प्रसाद के पास कुल 1.20 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से 01 एकड़ क्षेत्र में उन्होंने उन्नत किस्म के टमाटर (साहो) की खेती की। यह कार्य उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2025-26 के तहत प्राप्त मार्गदर्शन और सहयोग से शुरू किया। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 150 क्विंटल टमाटर का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के थोक भाव से बिक्री कर उन्होंने कुल 03 लाख 75 हजार रुपये की आय अर्जित की। वहीं, खेती में कुल लागत 85 हजार रुपये आई, जिससे उन्हें लगभग 02 लाख 90 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। उद्यानिकी विभाग से 30 हजार रुपये का अनुदान मिलने से लागत कम करने में भी सहायता मिली। इस पहल ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाया। ईश्वरी प्रसाद ने बताया कि आधुनिक तकनीकों और शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर किसान कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। उनकी यह सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

महासंघ की कार्यप्रणाली को बनाये गतिशील एवं परिणामोन्मुख : राज्यमंत्री पंवार

भोपाल  मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ (सह.) मर्यादित की 114वीं कार्यकारिणी समिति की बैठक मंगलवार को मछुआ एवं मत्स्य कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में महासंघ की कार्य प्रणाली को अधिक प्रभावी, गतिशील एवं परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया गया। राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि कार्यों में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि मत्स्य क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। प्रमुख सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी, डायरेक्टर  मनोज कुमार पथरोलिया सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।