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अवैध शराब से भरे ट्रक ने थाना प्रभारी को रौंदा, इंदौर-बैतूल हाईवे पर दर्दनाक हादसा

देवास  देवास जिले में अवैध शराब के कारोबार और उसकी तस्करी का मामला अब एक पुलिस अधिकारी की मौत से जुड़ गया है। शराब तस्करी की सूचना पर संदिग्ध वाहन का पीछा कर उसे रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को आयशर वाहन ड्राइवर ने कुचल दिया। वाहन का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल टीआई की मौत हो गई। घटना रविवार देर रात करीब 2 बजे हरदा-नेमावर हाईवे पर हुई। इस घटना ने जिले में सक्रिय अवैध शराब के कारोबार और उसके नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच से अधिक पुलिस टीमों ने संभाला था मोर्चा जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से अवैध शराब से भरा वाहन इंदौर होते हुए गुजरात की तरफ जा रहा है। सूचना के आधार पर देवास एसपी आदित्य मिश्रा ने वाहन को पकड़ने के लिए पांच से अधिक पुलिस टीमें गठित की थीं। इनमें कन्नौद, सतवास और खातेगांव के थाना प्रभारी सहित पुलिसकर्मी शामिल थे। टीमें संदिग्ध वाहन का पीछा कर रही थीं और रास्ते में नाकाबंदी भी की गई थी। वाहन को संदलपुर में छोड़कर ड्राइवर फरार ड्राइवर ट्रक को डिवाइडर पर चढ़ाकर दूसरी ओर ले गया और संदलपुर में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने वाहन को संदलपुर थाने में खड़ा कर दिया है। ड्राइवर की तलाश की जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर देवास एसपी आदित्य मिश्रा सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे खातेगांव पहुंचे। मृतक का परिवार भी खातेगांव पहुंच गया है। पुरी के परिवार में पत्नी कविता और बेटा-बेटी हैं। पुलिस को घटनास्थल पर मिला ट्रक खाली बताया जा रहा इस मामले में सबसे बड़ा सवाल ट्रक में मिली शराब को लेकर है। बताया जा रहा है कि शराब माफिया ने शराब से भरे ट्रक से टीआई दिलीप पुरी को कुचला था, लेकिन पुलिस को घटनास्थल पर मिला ट्रक खाली बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टीआई को कुचलने के बाद ट्रक से शराब अनलोड कराई गई? अगर ऐसा हुआ है, तो शराब कहां गई और इसे किसने हटाया? इसी दौरान हरदा-नेमावर हाईवे पर संदिग्ध आयशर वाहन रुका। खातेगांव टीआई दिलीप पुरी वाहन ड्राइवर को पकड़ने के लिए पहुंचे और उसे नीचे उतरने के लिए कहा। इसी बीच ड्राइवर और टीआई के बीच झूमाझटकी होने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि ड्राइवर ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए वाहन आगे बढ़ा दिया। इस दौरान टीआई नीचे गिर गए और वाहन का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। उन्हें बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। 298 पेटी शराब मिलने की जानकारी, वाहन नंबर भी आया सामने घटना में शामिल आयशर वाहन का नंबर एमपी 43 एच 4786 बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन से करीब 298 पेटी शराब बरामद हुई है। शराब कहां से भरी गई थी, किसके नाम पर थी और इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था, इन सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच कर रही है। वाहन ड्राइवर की गिरफ्तारी और घटना के बाद उसकी गतिविधियों को लेकर भी अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। टिमरनी से शराब भरने की चर्चा, कारोबारियों के नेटवर्क की जांच इस पूरे मामले में टिमरनी क्षेत्र का शराब कारोबार भी जांच के दायरे में आने की चर्चा है। प्रारंभिक सूचनाओं में दावा किया जा रहा है कि जब्त वाहन में शराब टिमरनी क्षेत्र की शराब दुकानों से भरी गई थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने टिमरनी स्थित शराब कारोबार से जुड़े कार्यालय में पूछताछ की है और कुछ लोगों को जानकारी जुटाने के लिए बुलाया गया है। जनविश्वास शिविर में उठी थी अवैध शराब की शिकायत हाल ही में आयोजित जनविश्वास शिविर में क्षेत्र में अवैध शराब की गतिविधियों को लेकर अधिकारियों के समक्ष शिकायत की गई थी। एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा- जांच जारी, जल्द स्पष्ट करेंगे स्थिति घटना के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसपी ने पूरे मामले की जांच जारी होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कुछ देर में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। पुलिस वाहन में मिली शराब के स्रोत, उसके परिवहन, कारोबारियों की भूमिका और तस्करी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। 2007 बैच के उप निरीक्षक थे दिलीप पुरी खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी वर्ष 2007 बैच के उप निरीक्षक थे। टीआई बनने के बाद वे इंदौर के हीरानगर और चंदननगर थानों में भी पदस्थ रहे थे। वे मूल रूप से धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के बरमंडल गांव के निवासी थे। उनके परिवार के इंदौर में होने की जानकारी सामने आई है। उनका अंतिम संस्कार गृह क्षेत्र बरमंडल में किए जाने की बात कही गई है। राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा सूत्रों के अनुसार अवैध शराब टिमरनी ग्रुप की दुकानों से भरी गई थी, जिसके लाइसेंसी बड़वानी निवासी बताए जा रहे। गुजरात, इंदौर और टिमरनी से जुड़े लोगों के नाम अ रहे हैं। शुरुआती जांच में टिमरनी निवासी राहुल नामक व्यक्ति का नाम सामने आया है, लेकिन फिलहाल अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ लोगों को टिमरनी से पूछताछ के लिए उठाया है। राहुल के कांग्रेस से जुड़े होने और कांग्रेस के बड़े नेताओं से संबंध की बात भी सामने आई है। खातेगांव में भाजपा से जुड़े कुछ लोगों से भी संबंध हैं, जिनका शराब ठेकों में दखल होने की बात कही जा रही। चंदाना का मामला चर्चाओं में देवास में हाल ही में बड़ा शराब कांड हुआ था। चंदाना गांव में केमिकलयुक्त शराब पीने से करीब 13 लोगों की मौत हुई थी। अवैध शराब बेचने वालों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। मामले को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार देवास आए थे। कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया था। कलेक्टर एसपी पर गाज गिरी और दोनों को हटाया गया। नए कलेक्टर एसपी ने हाल ही में ज्वाइन किया है। शराब खरगोन की ब्रेवरीज की है आबकारी अधिकारी पूजा गहलोत के अनुसार जांच में गाड़ी के नीचे एक गुप्त कंपार्टमेंट मिला, जिसमें शराब की पेटियां भरी थीं। गाड़ी … Read more

दशहरे पर KCG जिले में शराब की जमकर बिक्री, शौकीन पी गए 1 करोड़ की मदिरा

खैरागढ़. त्योहार खुशियां बांटने, परिवार के साथ समय बिताने और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का अवसर होते हैं लेकिन जब उत्सवों के साथ शराब की खपत का बढ़ता आंकड़ा चर्चा में आने लगे तो समाज को आत्ममंथन की जरूरत होती है। केसीजी जिले में विजयादशमी के दिन महज 12 घंटे के भीतर एक करोड़ छह लाख रुपये से अधिक की शराब की बिक्री ने इसी सवाल को सामने ला दिया है कि क्या त्योहारों की खुशियां अब नशे से जुड़ती जा रही हैं? गौर करें कि जिले की सीमित आबादी और भौगोलिक क्षेत्रफल को देखते हुए शराब बिक्री का यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। शारदीय नवरात्रि के दौरान शराब दुकानों में अपेक्षाकृत कम भीड़ रही लेकिन दशहरे के दिन सुबह दुकानें खुलते ही खरीदारों की आवाजाही बढ़ गई। खैरागढ़, छुईखदान और गंडई के साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ नजर आई। कुछ दुकानों पर चुनिंदा ब्रांड का स्टॉक कम पड़ने की स्थिति भी बनी रही। शराब की बिक्री से शासन को आबकारी राजस्व मिलता है, लेकिन केवल कमाई के आंकड़े से इस प्रवृत्ति के सामाजिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अत्यधिक शराब सेवन परिवारों की आर्थिक स्थिति, घरेलू शांति, स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। त्योहारों के दौरान नशे में वाहन चलाने और विवाद की आशंका भी बढ़ जाती है। हालांकि, बिक्री के आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इतनी शराब का सेवन उसी दिन हुआ या सभी खरीदारों ने इसका व्यक्तिगत रूप से उपभोग किया। फिर भी इतनी बड़ी बिक्री उत्सवों के दौरान शराब की मांग और उससे जुड़े सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की जरूरत जरूर पैदा करती है। जिला आबकारी अधिकारी के अनुसार दशहरे के दिन अवैध शराब बिक्री अथवा निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने की शिकायत सामने नहीं आई। विभाग के मुताबिक, बिक्री की प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। लेकिन त्योहारों के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी केवल अवैध बिक्री पर नियंत्रण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नशे में वाहन चलाने पर रोक, सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी और शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य खुशियां बांटना और सामाजिक एकता को मजबूत करना है। ऐसे में जरूरी है कि उत्सव का आनंद नशे पर निर्भर न हो। परिवार, समाज और प्रशासन की साझा पहल से ही त्योहारों को सुरक्षित, स्वस्थ और सार्थक बनाया जा सकता है।

दशहरा मेले से पहले बस्तर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 75 पेटी शराब पकड़ी

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस ने छापेमारी कर 5 लाख से ज्यादा की अंग्रेजी शराब बरामद की है, जिसे दशहरा मेले में बेचने की तैयारी थी। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी में पकड़ाया 5.6 लाख का शराब यह पूरा मामला कोड़ेनार थाना क्षेत्र का है। सूचना पर पुलिस ने ग्राम मावलीभाटा के जहाजभाटा पारा में छापेमारी की। इस दौरान 75 पेटी मध्यप्रदेश की अंग्रेजी शराब बरामद की गई है। जब्त शराब में गोवा व्हिस्की की 3 हजार 750 बोतलें शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 5 लाख 6 हजार 250 रुपये बताई गई है। दशहरा मेले में बेचने की थी तैयारी पुलिस के अनुसार, आरोपी दुलगो कवासी शराब को दशहरा मेले में बेचने के लिए घर में जमा करके रखा था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी को न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ बस्तर पुलिस सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भी तलाश कर रही है।

डुप्लीकेट शराब कांड में बड़ा खुलासा, GST ऑफिस बना था डिस्ट्रीब्यूशन का अड्डा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले में जांच एजेंसी ने अवैध शराब की सप्लाई से लेकर कमीशन वसूली, कैश कलेक्शन और हवाला के जरिए रकम दुबई तक पहुंचाने का आरोप लगाया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने बुधवार को 42 आरोपियों के खिलाफ करीब 27 हजार पन्नों का 10वां पूरक चालान पेश किया। इनमें 20 व्यक्ति और 22 कंपनियां शामिल हैं। आरोपियों में यश टुटेजा, अख्तर ढेबर, प्रिंस भाटिया, नवीन केडिया, विधु गुप्ता और आबकारी अधिकारी आशीष श्रीवास्तव समेत कारोबारी और कंपनियां शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शराब घोटाले में वैध शराब की सप्लाई पर कथित कमीशन वसूली के साथ पार्ट-B नाम से बिना आबकारी शुल्क चुकाए शराब तैयार कर बेचने की अलग व्यवस्था बनाई गई थी। डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों में बेचते थे शराब इसके लिए अतिरिक्त बोतलों, डुप्लीकेट होलोग्राम, निजी कर्मचारियों और चुनिंदा परिवहन वाहनों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस शराब को सरकारी दुकानों के जरिए बेचा जाता था, लेकिन बिक्री का पूरा हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता था। ढेबर के गोदाम और जीएसीटी ऑफिस में रखे जाते थे होलोग्राम जांच दस्तावेजों के मुताबिक, अनवर ढेबर से जुड़े गोदाम और जीएसटी ऑफिस में डुप्लीकेट होलोग्राम रखे जाते थे। सिंडिकेट के सदस्य जरूरत के हिसाब से इन्हें डिस्टिलरियों तक पहुंचाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि डुप्लीकेट होलोग्राम की छपाई के लिए नोएडा और रायपुर के कार्यालयों का इस्तेमाल किया जाता था। इन होलोग्राम की सप्लाई में प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के विधु गुप्ता की भूमिका बताई गई है। आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, कंपनी की रायपुर यूनिट के प्रभारी दिलीप पाण्डे और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की गई। आरोप है कि इन होलोग्राम को पार्ट-B शराब की बोतलों पर लगाया जाता था, ताकि वे सरकारी सप्लाई की वैध शराब जैसी दिखें। बोतल, बॉटलिंग और परिवहन का अलग नेटवर्क जांच के अनुसार, अवैध शराब की सप्लाई के लिए खाली बोतलों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की जाती थी। अमित सिंह, अनुराग द्विवेदी, सत्येन्द्र गर्ग और नवनीत गुप्ता के नाम बोतलों की सप्लाई के संबंध में दर्ज हैं। आरोप है कि कई बार बोतलें ओवर बिलिंग या बिना बिल के नकद लेन-देन के जरिए उपलब्ध कराई गईं। डिस्टिलरी में शराब की बॉटलिंग, होलोग्राम लगाने, पैकिंग और वाहनों में लोडिंग के बाद इसे सरकारी दुकानों तक पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, पार्ट-B शराब की बिक्री से प्राप्त रकम को नियमित सरकारी खाते में जमा करने के बजाय कथित सिंडिकेट तक पहुंचाने की व्यवस्था थी। इस कारण आबकारी शुल्क की चोरी और शासन को राजस्व नुकसान होने का आरोप है। 15 जिलों में 60.50 लाख पेटियों की बिक्री का आरोप EOW के आकलन के मुताबिक, शराब घोटाले में अवैध कमाई और राजस्व नुकसान का आंकड़ा 3,076 करोड़ रुपए से अधिक है। इसमें देशी शराब के पार्ट-A, पार्ट-B और पार्ट-C से जुड़े 2,545.94 करोड़ रुपए तथा विदेशी शराब की सप्लाई में 281.89 करोड़ रुपए के कथित कमीशन का उल्लेख है। एजेंसी ने 15 जिलों में बिना आबकारी शुल्क चुकाए 60.50 लाख पेटियों की बिक्री का आरोप लगाया है। मैनपावर एजेंसियों को किए गए भुगतान में भी गड़बड़ी का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, पांच एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त दिनों के काम और सेवा शुल्क के नाम पर 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें से 62.99 करोड़ रुपए कमीशन के रूप में लौटाए जाने का आरोप है। इस मामले में तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और ईगल हंटर सॉल्यूशन के संचालक बीआर लोहिया की भूमिका का भी उल्लेख है। 208 करोड़ रुपए दुबई पहुंचाने का दावा जांच एजेंसी ने शराब घोटाले की कथित अवैध कमाई को दुबई तक पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल का भी दावा किया है। जब्त मोबाइल की एक्सेल शीट में 27 मई से 21 जून 2022 के बीच 27 लेन-देन का हिसाब मिलने की बात कही गई है। इसमें सिंडिकेट के सदस्य विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू को दुबई में 208.46 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का उल्लेख है। एजेंसी के अनुसार, रायपुर से नकदी मुंबई भेजी जाती थी और वहां जमा रकम के बदले दुबई में स्थानीय नेटवर्क के जरिए बराबर राशि उपलब्ध कराई जाती थी। खंजन ठक्कर के नेटवर्क और दुबई स्थित नोवा स्कोटिया गोल्ड ट्रेडिंग एलएलसी का भी जांच में उल्लेख है। आरोप है कि शेल कंपनियों और रियल एस्टेट कारोबार के जरिए अवैध कमाई को निवेश के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। यश टुटेजा, अख्तर ढेबर और प्रिंस भाटिया पर अलग-अलग आरोप पूरक चालान में यश टुटेजा पर अपने पिता अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के बीच संपर्क का माध्यम बनने तथा कथित अवैध रकम को पारिवारिक खातों, जमीन, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट में निवेश करने का आरोप है। अख्तर ढेबर पर शेल कंपनियों और रियल एस्टेट फर्मों के जरिए रकम खपाने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है। प्रिंस भाटिया पर डिस्टिलरी में बिना आबकारी शुल्क वाली शराब के उत्पादन, डुप्लीकेट होलोग्राम और अवैध सप्लाई से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभाने का आरोप है। वहीं, आशीष श्रीवास्तव पर आबकारी व्यवस्था की निगरानी कमजोर करने और कथित अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप हैं। जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज, वेलकम डिस्टिलरी, भाटिया वाइन्स मर्चेंट्स, प्रिज्म होलोग्राफी समेत 22 कंपनियों को भी आरोपी बनाया है। चालान में दर्ज आरोपों और साक्ष्यों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में होगा। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा।

शराबबंदी के बीच नागालैंड में हड़कंप, संदिग्ध जहरीली शराब से 19 की मौत

कोहिमा नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई है. पिछले दो दिनों में अलग-अलग इलाकों से मौत के मामले सामने आए हैं. पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई है।  पुलिस के मुताबिक, मौतें मोकोकचुंग और तुएनसांग जिलों में हुई हैं. मोकोकचुंग में 8 लोगों की मौत हुई है. वहीं, तुएनसांग में 11 लोगों की जान गई है. आशंका है कि इन लोगों ने मिलावटी या अवैध शराब का सेवन किया था।   शराब की सप्लाई का पता लगाएगी SIT वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आई बंगलांग चांग को टीम का प्रमुख बनाया गया है. SIT मौतों की वजह का पता लगाएगी. इसके साथ ही संदिग्ध मिलावटी शराब के स्रोत और उसकी सप्लाई चेन की भी जांच होगी।  पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ सुराग मिले हैं. हालांकि, अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. पुलिस ने संदिग्ध शराब के सैंपल जांच के लिए गुवाहाटी भेजे हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी. इससे मौतों की असली वजह का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने मामले में कई जगह छापेमारी भी की है. कार्रवाई के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया. करीब 3 हजार शराब की बोतलें भी जब्त की गई हैं।  जांच में जुटी पुलिस वहीं घटना के बाद से पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है और जांच में जुट गई है। जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले पर सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि इन मौतों की जांच करने और मिलावटी शराब के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) आई. बुंगलांग चांग की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इस घटना में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  फोरेंसिंक जांच के लिए भेजे गए सैंपल पुलिस ने बताया कि मौतों की वजह का पता लगाने के लिए सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए गुवाहाटी भेजे गए हैं। पुलिस ने कहा, "हमें कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन अभी उनके बारे में जानकारी देना जल्दबाजी होगी।" इन मौतों के बाद, पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की, 19 लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग 3,000 शराब की बोतलें ज़ब्त कीं। सावधानी बरतने की अपील इस मामले में, पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे ऐसी शराब न पिएं जिसकी पहचान न हो, जिस पर कोई लेबल न हो या जिस पर अवैध होने का शक हो। साथ ही, पुलिस ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बता दें कि नागालैंड में 1990 से ही शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना प्रशासन के रवैये पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। शराबबंदी के बावजूद इलाके में जहरीली शराब किस तरह से बेंची या पहुंचाई जा रही थी, यह जांच का विषय है। 19 लोग गिरफ्तार, करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त मौतों के बाद पुलिस ने प्रभावित इलाकों में कई जगह छापेमारी की. इस कार्रवाई के तहत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया और शराब की करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त की गईं।  नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. पुलिस ने लोगों को बिना पहचान, बिना लेबल या संदिग्ध अवैध शराब न पीने की सलाह दी है. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत मेडिकल मदद लें।  लोगों से सावधान रहने की सलाह दरअसल, नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई की आशंका सामने आई है. पुलिस अब इस नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है. पुलिस ने लोगों से अज्ञात या बिना लेबल वाली शराब नहीं पीने की अपील की है. संदिग्ध अवैध शराब से भी दूर रहने को कहा गया है।  पुलिस ने बताया कि शराब पीने के बाद चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है। जहरीली शराब त्रासदियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सख्त इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शुक्रवार को कई उपाय सुझाए। शीर्ष अदालत ने जहरीली शराब के गैर-कानूनी उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए कई सुझाव दिए। ये नियम 2011 में मुंबई में जहरीली शराब से हुई एक बड़ी घटना के बाद एक अधिसूचना के जरिए लागू किए गए थे। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपने फैसले में लिखा, ''इतिहास इस बात का गवाह है कि शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से अक्सर शराब का कारोबार गैर-कानूनी तरीके से होने लगता है, जिससे बिना नियमन वाली और जानलेवा शराब का चलन बढ़ जाता है।'' न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कई सुझाव भी दिए। इन सुझावों में अवैध शराब की आपूर्ति और मांग शृंखला तोड़ने, राज्य की सीमाओं पर सख्ती बढ़ाने और मेथनॉल के नियमन को कड़ा करने पर जोर दिया गया है। मेथनॉल एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल नकली शराब बनाने में किया जा सकता है। फैसले में कहा गया, ''चूंकि शराब राज्य में बनती भी है और बाहर से भी लाई जाती है, इसलिए इसे लागू करने के कदमों में राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी शामिल होनी चाहिए। इस संबंध में, राज्य परिवहन विभाग का सीमाओं पर सतर्क रहना राज्य में शराब की अवैध ढुलाई को नियंत्रित करने … Read more

जहरीली शराब कांड के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई, शराब-हथियार लाइसेंस रद्द; सरपंच के अधिकार भी सीज

सागर  सागर जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और जनसुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक के बाद एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने जिले में शिकंजा कसते हुए कई ताबड़तोड़ कदम उठाए हैं। विनायका और बंडा थाना क्षेत्रों में आपराधिक मामलों में संलिप्तता पाए जाने पर प्रशासन ने म.प्र. आबकारी अधिनियम 1915 के तहत दो शराब दुकानों मगरधा समूह के लाइसेंसधारी सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और बरेठी दुकान के लाइसेंसधारी यशवंत सिंह ठाकुर के कंपोजिट लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही बंडा प्रकरण से जुड़े आरोपी सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा की ग्राम मसवासी स्थित पत्थर क्रशर की खनिज लीज भी नियमों के लगातार उल्लंघन और समयसीमा का पालन न करने पर निरस्त कर दी गई है। लोक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आयुध अधिनियम, 1959 के तहत तीन हथियार लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं। इनमें सोहन राजपूत, जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी की पत्नी हेमलता राजपूत और सिद्धार्थ कुशवाहा शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी को अपने हथियार संबंधित थानों में तुरंत जमा कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।  महिला सरपंच के वित्तीय अधिकार सीज वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए, जिला पंचायत सागर ने जनपद पंचायत शाहगढ़ की ग्राम पंचायत नौराज की सरपंच श्रीमती राजकुमारी राजपूत के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। निर्माण कार्यों के दौरान प्रथम दृष्टया 7 लाख 49 हजार 079 रुपये के गबन और दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद, म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत सरपंच के वित्तीय आहरण एवं संवितरण अधिकारों को सीज कर दिया गया है। प्रशासन की इस दोतरफा और त्वरित कार्रवाई से जिले के अन्य लापरवाह और संदिग्ध तत्वों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध गतिविधियों, वित्तीय गबन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध ऐसे कड़े कदम आगे भी जारी रहेंगे।   

संकुल समन्वयक और शिक्षक निकले शराब तस्कर, 7 गिरफ्तार; 40 पेटियां बरामद

आरंग/रायपुर. सरकारी तंत्र को चूना लगाकर शराब तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का आरंग पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। हैरान कर देने वाले इस मामले में शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन और मल्टी-वर्कर के साथ ही अमोदी में पदस्थ शासकीय शिक्षक व संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे भी तस्करी के इस काले कारोबार में संलिप्त पाया गया है। एसएसपी रायपुर, एएसपी एवं डीएसपी माना के निर्देश पर थाना प्रभारी आरंग निरीक्षक नरेश साहू के नेतृत्व में गश्त पर निकली पुलिस टीम को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि सफेद रंग की लग्जरी आर्टिका कार (CG 04 QB 5200) में ग्राम गुल्लू शराब भट्ठी से भारी मात्रा में अवैध शराब भरकर रानीसागर की ओर ले जाई जा रही है। मंदिर के पास घेराबंदी कर दबोचा सूचना मिलते ही सउनि अनिल चंद्रवंशी, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुरेश बंधन, आरक्षक नियाज खान और सैनिक दुर्गेश चंद्राकर की टीम ने रानीसागर हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर कार को रोका। कार की तलाशी लेने पर 160 नग पाव देशी मसाला शराब (कुल 28.800 बल्क लीटर, कीमत ₹16,000) बरामद हुई। पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त 8 लाख की कार सहित कुल ₹8,16,000 का सामान जब्त किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल गिरफ्तार आरोपियों में परसवानी, ग्राम अमोदी निवासी शिक्षक एवं संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे (45 वर्ष) गुल्लू निवासी , शराब दुकान सुपरवाइजर उबारन दास पुरेना (34 वर्ष), कोडापार निवासी शराब दुकान सेल्समैन राजेश काटले (31 वर्ष), शराब दुकान मल्टी वर्कर परसवानी निवासी सुरेश बांधे (36 वर्ष), परसवानी निवासी वाहन चालक भरत रात्रे (38 वर्ष), अमोदी निवासी दिलीप कुमार कुर्रे (50 वर्ष), अमोदी निवासी भागवत बारले (38 वर्ष) शामिल हैं। आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज थाना प्रभारी नरेश साहू ने बताया कि सरकारी शराब दुकान के कर्मचारी खुद कोचियों की भूमिका निभा रहे थे, जिसमें संकुल समन्वयक शिक्षक की संलिप्तता ने शिक्षा विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सभी 7 आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों का पता लगाने जांच जारी है।

मौतों के बाद भी सागर में खुलेंगी शराब दुकानें! 28 लोगों की जान गई, 100+ गांवों में चलेगा नशामुक्ति अभियान

 सागर  मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हुई। इनको मिलाकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है।इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश हो जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। हालांकि आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल संदिग्ध बाम्बे व्हिस्की और सागर गोल्ड ब्रांड की देसी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। मामले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई है। अब प्रशासन ने तीन स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। इसमें घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई शामिल है। बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के आने का सिलसिला अब थमने लगा है। हालांकि, मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शासन-प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को छापरी, घूरमार और रिछवार सानौधा गांव के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। करीब 13 लोग बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की आइसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग भर्ती हैं। हालांकि कुछ लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। इस बीच, प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शराब किसी अधिकृत डिस्टिलरी से तैयार होकर बाजार में आने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिस्टिलरी स्तर पर तैयार शराब में गड़बड़ी होती तो उसका असर संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता। फिलहाल जांच का फोकस शराब की पैकेजिंग और उसमें मिलावट के स्तर पर है। शराब की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। पिछले दो दिनों में शराब दुकानों, आरोपितों के कब्जे, फैक्ट्री सहित अन्य स्थानों से शराब के करीब 80 नमूने लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नकली शराब की बोतल का ढक्कन ढीला होने और शराब का रंग सामान्य से अलग होता है। मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पर जताया संदेह जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने कहा कि सरकार अभी भी जहरीली शराब से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। प्रशासन द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है। पहले मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी हुई, पोस्टमार्टम में देरी हुई और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होगी या नहीं। कांग्रेस की मांग है कि सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे। भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार मध्यप्रदेश में-राहुल गांधी राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है। उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है। शिकायतों पर क्लीनचिट भारी पड़ी, वेयर हाउस प्रभारी को हटाया सागर में लंबे समय से आबकारी वेयर हाउस की प्रभारी मंजूषा सोनी को मंगलवार देर शाम हटा दिया गया। उनके स्थान पर राम चित्रकार को नया प्रभारी बनाया गया है। दरअसल, पिछले महीने एक शराब ठेकेदार ने बाम्बे व्हिस्की की नकली बोतल देकर उसके मिलावटी होने की आशंका जताई थी। 10-12 दिन उसे रखे रहने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने उसे जांच के लिए वेयर हाउस भेजा। बताया गया है कि एडीओ मंजूषा सोनी ने करीब एक घंटे में केवल बैच नंबर का मिलान कर शराब को पीने योग्य बताते हुए रिपोर्ट भेज दी। अब इसी ब्रांड की शराब से बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में मौतों के बाद क्लीनचिट पर सवाल है। शराब ठेकेदारों का कहना है मंजूषा सोनी 20-22 साल से सागर में ही कार्यरत हैं। राहुल गांधी ने कहा- सरकार जवाब दे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष्य राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर की पोस्ट में लिखा है कि भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्य प्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर जिले में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्य प्रदेश को पता है आगे क्या होगा- कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि यह पहली बार नहीं है। कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। पिछले साल जहरीली कफ सीरप से छोटे बच्चों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। 20 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन जवाबदेही कहां है? उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं, जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो। शिवपुरी में महिलाओं ने शराब की दुकान पर लगाई आग सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद शिवपुरी जिले के अमोला गांव की शराब की दुकान पर महिलाओं ने धावा बोल दिया। उन्होंने बोतलें फेंक जमकर तोड़फोड़ की और दुकान में आग लगा दी। पूरी दुकान जलकर राख हो गई। कर्मचारियों ने भागकर खुद को महिलाओं के आक्रोश से बचाया। सभी महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर पहुंचीं थीं। दरअसल, शराब ठेकेदारों ने जगह-जगह शराब बिक्री के ठिकाने बना दिए हैं। आमोला में ऐसी ही दुकान खोली गई है। इससे गांव में शराब पीकर रोज हंगामा … Read more

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हड़कंप, 12 की मौत और कई लोग अस्पताल में भर्ती

सागर मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में शनिवार रात जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार रात में करीब दर्जनभर लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 12 लोगों की मौत हो गई। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम बंडा अस्पताल में कराया जा रहा है। गंभीर हालत वाले पांच मरीजों को उपचार के लिए बीएमसी सागर भेजा गया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बंडा पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और मामले की जांच शुरू कराई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंडा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जिलाधिकारी ने दी जांच की सलाह जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि पिछले 24 से 48 घंटे के दौरान किसी भी प्रकार की शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि किसी तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो वह तुरंत चिकित्सक से जांच कराए। उन्होंने कहा, ”प्रशासन ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बंडा के पूर्व विधायक की अपील बंडा के पूर्व विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि 9 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि बंडा विकासखंड के बराज, घूघर, नौराज और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोगों ने शनिवार रात शराब का सेवन किया था, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि परिजन उन्हें इलाज के लिए बंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि चार-पांच लोग बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि चार-पांच लोगों को सागर भेजा गया है। तरवर लोधी ने लोगों से अपील की कि जिन लोगों ने पिछले दो-तीन दिनों में बंडा क्षेत्र की किसी दुकान या अवैध रूप से शराब बेचने वालों से शराब खरीदकर पी है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी भी परेशानी महसूस हो रही है, वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से जांच कराएं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस का दल मौके पर मौजूद है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। इनकी हुई मौत पुलिस के अनुसार मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), निवासी गूगरा खुर्द, दिग्विजय लोधी (28), निवासी नौराज, करतार सिंह लोधी (30), निवासी नौराज, उजियार सिंह लोधी (56), निवासी गूगरा खुर्द, रोशन लोधी (30), निवासी पाटन थाना विनायका और राजेंद्र लोधी (32), निवासी नौराज-गूगरा शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन को पहले से कैंसर की शिकायत होने की जानकारी भी सामने आई है। पांच मरीज बीएमसी रेफर हरनाम राय (42), निवासी चौका, उत्तम नत्थू नायक (42), निवासी दलपतपुर, मंगल रजक (40), निवासी गूगरा खुर्द, परम आदिवासी, निवासी हिनौता और धनसिंह आदिवासी (30), निवासी हिनौता को गंभीर हालत में बीएमसी सागर रेफर किया गया है। प्रशासन और पुलिस द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जहरीली शराब की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।

जहरीली शराब पीने से महाराष्ट्र में 15 की मौत, कई गंभीर; प्रशासन में मचा हड़कंप

 पुणे  महाराष्‍ट्र में चौंकाने वाली घटना सामने आई है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्‍य की हालत गंभीर बताई जा रही है. पिंपरी-चिंचवाड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी इलाके में आठ लोगों ने दम तोड़ा, जबकि पुणे के काले पड़ल इलाके में तीन और हडपसर इलाके में दो लोगों की मौत हुई. घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और प्रभावित इलाकों में जांच तेज कर दी गई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब आरोपी योगेश वानखेडे ने तैयार की थी, जो कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार से जुड़ा हुआ है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।  जानकारी के अनुसार, यह जहरीली और स्पिरिट युक्त शराब योगेश वानखेडे नाम के व्यक्ति ने तैयार की थी. इस शराब को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के अलग-अलग इलाकों में बेची गई थी. दापोडी, फुगेवाड़ी, हडपसर और काले पड़ल इलाके में लोगों ने यह शराब पी. कुछ समय बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और मुंह से झाग निकलने लगा. इसके कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई. इलाज के लिए ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया. योगेश वानखेडे एक अवैध शराब विक्रेता बताया जा रहा है. उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।  पुलिस का अलग राग फुगेवाड़ी इलाके में अवैध हाथभट्टी और देसी शराब के अड्डे धड़ल्ले से चलने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और दबी जुबान में चर्चा है कि ये मौतें जहरीली शराब के कारण हुई हैं, लेकिन दापोडी पुलिस ने इसे अफवाह बताया है. शुरुआती जांच के बाद दावा किया है कि ये सभी मौतें अलग-अलग और स्वतंत्र कारणों से हुई हैं।  पुलिस की नजर में मौत की वजह क्‍या? पुलिस के अनुसार, पांडुरंग फुगे (57) की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है. विजय राठौड़ (31) और राजेंद्र राठौड़ (34) दो सगे भाइयों की मौत दिल का दौरा पड़ने से होने की आशंका है. राजेंद्र राजपूत (51) की मौत बाथरूम में चक्कर खाकर गिरने की वजह से हुई. अकबर पठान (52) पिछले 15 वर्षों से अत्यधिक शराब पीने के आदी थे।