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सेवा की कहानी: खाली पड़ी जमीन पर बायोफ्लॉक मछली पालन से विप्लब ने बनाई आय की नई राह

रायपुर कभी खाली पड़ी जिस जमीन से कोई आमदनी नहीं होती थी, अब उसी जगह बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर विप्लब हलदर ने आय की नई राह बनाई है। मत्स्य विभाग की योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने बायोफ्लॉक तालाब तैयार कर मछली उत्पादन शुरू किया है। वर्तमान में मछलियां बढ़वार की अवस्था में हैं और करीब तीन माह बाद बिक्री योग्य आकार में आने की उम्मीद है। इसके बाद विप्लब को अपने इस नए व्यवसाय से आमदनी मिलने लगेगी। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए विप्लब बताते हैं कि पहले यह जमीन खाली पड़ी रहती थी और इससे किसी प्रकार का उत्पादन या आमदनी नहीं होती थी। मत्स्य विभाग से बायोफ्लॉक पद्धति की जानकारी और योजना के तहत सहायता मिलने के बाद उन्होंने खाली जमीन का उपयोग मछली पालन के लिए करने का निर्णय लिया। 14 लाख रुपये की इकाई लागत, 40 प्रतिशत मिला अनुदान बायोफ्लॉक तालाब निर्माण के लिए 14 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित है। योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस सहायता से हितग्राहियों को आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन अपनाकर स्वरोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने में सहयोग मिल रहा है। विप्लब ने भी विभागीय सहायता का लाभ लेकर मछली पालन को आजीविका के रूप में अपनाया है। उनका कहना है कि जिस स्थान से पहले कोई उत्पादन नहीं मिल रहा था, अब उसी जगह मछली पालन से आमदनी की संभावना बनी है। तीन माह बाद बिक्री की तैयारी, स्थानीय बाजार में मांग का भरोसा विप्लब के अनुसार वर्तमान में मछलियों को बिक्री योग्य आकार में आने में लगभग तीन माह का समय और लगेगा। इसके बाद तैयार मछलियों को बाजार में बेचा जाएगा। उन्हें स्थानीय बाजार में मछली की मांग को देखते हुए बिक्री में परेशानी नहीं होने की उम्मीद है। उनके अनुसार बाजार में मछली की कीमत लगभग 120 रुपये तक मिलती है। पहली खेप की बिक्री के बाद उत्पादन लागत और आमदनी के आधार पर वास्तविक लाभ का आकलन हो सकेगा। विप्लब को उम्मीद है कि बेहतर परिणाम मिलने पर वे इस गतिविधि को आगे भी जारी रखेंगे। खाली जमीन बनी स्वरोजगार का आधार बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन ने विप्लब के लिए खाली पड़ी जमीन के उपयोग की नई संभावना तैयार की है। मत्स्य विभाग से मिली सहायता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से वे अब इस स्थान को आयमूलक गतिविधि से जोड़ चुके हैं। विप्लब का कहना है कि मछली पालन किसानों और ग्रामीण हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। योजना के तहत मिलने वाली सहायता से इस व्यवसाय को शुरू करने में सहूलियत मिल रही है। उन्होंने योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत विप्लब हलदर की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि शासकीय सहायता और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अनुपयोगी पड़ी जमीन को भी स्वरोजगार और आय के अवसर में बदला जा सकता है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था का हुआ शानदार प्रदर्शन

ग्रेटर नोएडा  यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में उत्तर प्रदेश पुलिस के स्टॉल ने तीसरे वर्ष भी ‘बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड’ हासिल किया। ट्रेड शो के हॉल नंबर-4 में लगाए गए यूपी पुलिस के स्टॉल पर पूरे आयोजन के दौरान लाखों की संख्या में विजिटर्स पहुंचे थे। स्टॉल पर योगी सरकार की यूपी पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली, जनसुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक और विभिन्न पुलिस सेवाओं की जानकारी दी गई। यह अवार्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने प्रदान किया, जिसे पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम, मुख्यालय उत्तर प्रदेश राजेश कुमार यादव तथा प्रभारी मीडिया सेल, यूपी 112 करुणा शंकर सिंह ने ग्रहण किया। वर्ष 2024 और 2025 में भी मिला था सम्मान यूपी पुलिस के स्टॉल को यह सम्मान लगातार तीसरी बार मिला है। इससे पहले वर्ष 2024 और 2025 में भी ट्रेड शो में यूपी पुलिस के स्टॉल को बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इस वर्ष भी स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और पुलिस की तकनीक एवं सेवाओं को लेकर दर्शकों ने रुचि दिखाई। पुलिस के स्टॉल पर साइबर अपराध से बचाव, यूपी 112 की सेवाओं, आधुनिक पुलिसिंग और जनसुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में यूपी पुलिस के स्टॉल को मिला लगातार तीसरा बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली और तकनीक आधारित सेवाओं की प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। स्टॉल के माध्यम से आम लोगों को पुलिस की सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका से परिचित कराया गया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस के गौरवशाली इतिहास और बदलती पुलिस व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। स्टॉल पर युवाओं और बच्चों ने भी पुलिस की तकनीक और सेवाओं को करीब से जाना।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में अब तक 64 हजार 644 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 440 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक कुल 64 हजार 644 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं, जिन्हें 440 करोड़ 40 लाख से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलो वाट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्य घर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चैटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।  

सूरज की रोशनी से रोशन हुआ मनोज का घर, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश के परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के साथ बिजली खर्च में राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित कर परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का है। योजना के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता भी दी जाती है। इस योजना का लाभ लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के ग्राम कुड़कई निवासी  मनोज कुमार कश्यप ने अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन किया है। करीब तीन महीने पहले उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसके बाद उनके परिवार के बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई और वर्तमान में उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। पहले हर महीने 1,300 रुपये आता था बिजली बिल  मनोज कुमार कश्यप बताते हैं कि सोलर पैनल लगवाने से पहले उन्हें हर महीने लगभग 1,300 रुपये बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। घरेलू बजट में बिजली बिल की यह राशि नियमित खर्च का हिस्सा थी। सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद स्थिति बदल गई। अब घर की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा हो रहा है और उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, सोलर पैनल से घर की आवश्यकता से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप उनके बिजली खाते में माइनस बिल की स्थिति भी बनी है। यानी सौर ऊर्जा ने उनके लिए केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन का अवसर भी तैयार किया है। ऋण और सब्सिडी ने सौर ऊर्जा अपनाना बनाया आसान  मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने घर में सोलर पैनल स्थापित कराने के लिए बैंक से ऋण लिया। योजना के तहत केन्द्र एवं राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी उनके बैंक खाते में प्राप्त हो चुकी है। केन्द्र सरकार की योजना में पात्र आवासीय उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर स्थापना के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।  सब्सिडी मिलने से सोलर सिस्टम स्थापित करने में होने वाला वित्तीय भार कम हुआ और  मनोज के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना अधिक सुविधाजनक बना। वे कहते हैं कि सौर ऊर्जा अपनाने का निर्णय उनके परिवार के लिए आर्थिक रूप से राहत देने वाला साबित हुआ है। बिजली खर्च से राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा में योगदान  मनोज कुमार कश्यप के लिए सोलर पैनल केवल बिजली बिल कम करने का साधन नहीं है। घर की छत पर स्थापित संयंत्र के माध्यम से उनका परिवार स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में भी योगदान दे रहा है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का व्यापक उद्देश्य भी घरेलू स्तर पर रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना और परिवारों को अपनी बिजली जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ना है।   मनोज कुमार कहते हैं कि पहले हर महीने बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सोलर पैनल लगने के बाद बिजली खर्च में बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उन्हें यह भी महसूस होता है कि उनके घर की छत अब केवल रहने का हिस्सा नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन का माध्यम भी बन गई है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन का स्थानीय उदाहरण प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को घरेलू रूफटॉप सोलर को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया है। केन्द्र सरकार के अनुसार योजना के लिए 75,021 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसका लक्ष्य एक करोड़ आवासीय परिवारों तक रूफटॉप सोलर का लाभ पहुंचाना है। योजना में अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उससे लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था भी शामिल है।  ग्राम कुड़कई के  मनोज कुमार कश्यप की कहानी इसी व्यापक पहल के स्थानीय प्रभाव को सामने लाती है। जहां पहले उनके परिवार को हर महीने लगभग 1,300 रुपये बिजली बिल के रूप में खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब वही परिवार अपने घर की छत से बिजली पैदा कर रहा है और बिजली बिल शून्य होने का अनुभव कर रहा है। छत्तीसगढ़ में योजना के लाभ को घर-घर पहुंचाने की दिशा में प्रयास छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केन्द्र की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से प्रदेश में भी परिवारों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मनोज कुमार कश्यप का अनुभव बताता है कि जब योजना का लाभ वास्तविक हितग्राही तक पहुंचता है, तो उसका असर सीधे परिवार के मासिक बजट और जीवनशैली में दिखाई देता है।  मनोज कुमार कश्यप ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। उनके लिए सोलर पैनल अब बिजली खर्च से राहत, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता इन तीनों का माध्यम बन गया है। मनोज की छत से दिख रही आत्मनिर्भर ऊर्जा की तस्वीर कुड़कई के  मनोज कुमार कश्यप के घर की छत पर लगे सोलर पैनल बदलते ऊर्जा परिदृश्य की एक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। एक ओर परिवार को बिजली बिल में राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर घर स्वयं बिजली उत्पादन कर रहा है और जरूरत से अधिक ऊर्जा ग्रिड में भेज रहा है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सरकारी योजना का लाभ जब परिवार की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं रहता। वह परिवार को नई तकनीक अपनाने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी देता है।  

सेवा संकल्प यात्रा केवल यात्रा नहीं, सेवा, राष्ट्रभाव और युवा शक्ति को जोड़ने वाला अभियान : मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सेवा संकल्प यात्रा एवं युवा संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गुजरात के वडनगर से लंबी यात्रा तय कर रायपुर पहुंचे बाइक राइडर्स तथा बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे बाइक राइडर्स का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित नए भारत का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर सेवा भाव से राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपनी एक नई पहचान बनाई है और आज पूरा देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा देश की युवा शक्ति को सेवा, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। गुजरात के वडनगर से प्रारंभ हुई यात्रा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि से उनकी कर्मभूमि वाराणसी तक सेवा का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। यात्रा के दौरान युवा स्वच्छता, नशामुक्ति, टीबी मुक्त भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज को जागरूक कर रहे हैं। यह यात्रा युवाओं में राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध और सेवा की भावना को और मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत डेढ़ करोड़ से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए। प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ इसमें सहभागिता की, वह प्रधानमंत्री के प्रति जनता के स्नेह और विश्वास को अभिव्यक्त करता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ से गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने प्रदेश में लंबा समय बिताया है और यहां के जनजीवन को निकटता से देखा और समझा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में उन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के साथ कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली, अनुशासन, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य देश के सामने रखा है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर भविष्य की आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। शासन की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शांति, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है। दूरस्थ अंचलों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। बदलते बस्तर में आज नई पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देख रही है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित युवा संवाद में बस्तर से आकर रायपुर के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों गोविंद कुमार, दृष्टि ध्रुव, दीपक मरकाम और दीना उइके ने अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बस्तर में आए बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है तथा भय का वातावरण समाप्त होने से बच्चों और युवाओं में भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। विद्यार्थियों ने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी अब भारतीय सेना और सिविल सेवाओं में शामिल होने के साथ डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश एवं प्रदेश की सेवा करने के सपने देख रही है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर के बच्चों की आंखों में दिखाई दे रहे ये सपने बदलते छत्तीसगढ़ की सबसे सुखद तस्वीर हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन करते हुए राज्यसभा सांसद  राजीव शुक्ला ने सेवा संकल्प यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा के अंतर्गत 1200 युवा लगभग 2000 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान युवाओं द्वारा स्वच्छता, टीबी मुक्त भारत, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न सामाजिक विषयों पर जनजागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, मती लक्ष्मी वर्मा एवं  वी.डी. शर्मा, विधायक  मोतीलाल साहू,  पुरंदर मिश्रा,  किरण सिंहदेव एवं  अनुज शर्मा, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण,  राहुल टिकरिहा,  नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सेवा संकल्प यात्रा के बाइक राइडर्स तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

भारत का मूल धर्म है सनातन, इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती: मुख्यमंत्री

गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन, भारत का मूल धर्म है। सनातन के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमारी कमी यह रही कि हमने अपने आप को विस्मृत कर दिया। हमारे पास सब कुछ था। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी, तब सबसे सुसभ्य, सुसंस्कृत और सबसे सुदृढ़ परंपरा भारत के पास मौजूद थी। सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में मंगलवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचाना है, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। जिन लोगों ने अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति तथा कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को नहीं जाना, वह उत्तर प्रदेश और भारत को कैसे समझ पाएंगे।  गोमाता में है सनातन धर्म की पहचान मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। हमारे सनातन की परंपरा रही है कि पहला ग्रास गोमाता का होता है। यदि हर सनातनी यह कार्य करता तो गोमाता आज सड़कों पर नहीं विचरतीं। इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि यह कार्य किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते।इसे लेकर हमने अपने ऋषि मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया। धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को बचाना पड़ेगा सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है। हमें यदि धरती माता को बचाना है तो गोमाता को भी बचाना पड़ेगा। गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से सभी प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से प्रदेश में 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है।  भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी। हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं। कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

दंतेवाड़ा के जावंगा से सफलता की उड़ान: जनजातीय बच्चे NEET-IIT-NIT में चयनित, S&P Global जैसी कंपनियों में कर रहे नौकरी

रायपुर  दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस एजुकेशन सिटी ने हिंसा और गरीबी से जूझते जनजातीय बच्चों की किस्मत ही बदल दी। कभी दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर की बड़ी चुनौती थी। आज यहां की बेटियां नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं, युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं और खिलाड़ी मैदान परअपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। यह उन बच्चों की कहानी है, जिन्होंने हर चुनौती को मात देकर खुद को साबित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा (एजुकेशन सिटी) में 9 मई 2015 को आए थे, जहाँ उन्होंने एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और छात्रों से बातचीत की थी। 150 एकड़ में फैला सपनों का शहर             अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है।यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थान संचालित हैं। यह एजुकेशन सिटीशैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, यहएक पूरी दुनिया है। करीब 150 एकड़ में फैले इस परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं चल रही हैं। यहां 7,436 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें से 5,370 बच्चे यहीं छात्रावासो में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आए इन बच्चों को सुरक्षित घर, खाना, पढ़ाई और मार्गदर्शन सब कुछ एक ही छत के नीचे मिल रहा है।इसकी वजह से स्कूल ड्रॉप-आउट की दर 50% से घटकर महज 13% रह गई है।             वो बेटियां जिनके गांवों में कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं था, आज उन्हीं इलाकों की बेटियां नीट-यूजी पास कर डॉक्टर बनने की कतार में खड़ी हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस साल नीट-यूजी में सफलता पाई है। इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा में दाखिला मिला है। परीक्षा पास करने के साथ ही यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी 'डॉक्टर बेटी' कहलाएगी। डिजिटल क्रांति की नई कहानी    डिजिटल शिक्षा की दिशा में यहां के नवगुरुकुल का प्रयास भी प्रेरक है। यहां युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस केंद्र से प्रशिक्षित लगभग 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर की प्रतिभा अब देश की बड़ी कंपनियों तक पहुंच रही है। आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले 95 फीसदी छात्र जनजातीय समुदाय से हैं। मैदान में निखर रही खेल प्रतिभाएं        एजुकेशन सिटीमें पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा जा रहा है। यहां के 'एकलव्य खेल परिसर' में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।'खेलो इंडिया' से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख रहे, बल्किइनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीतने का जज्बा पैदा हो रहा है। बेटियों की पढ़ाई को पहली प्राथमिकता    जावंगा एजुकेशन सिटी की सबसे बड़ी खूबी बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान है। यहां कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के जरिए ग्रामीण बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ रही हैं।'स्वामी आत्मानंद स्कूल' में लगभग 1200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यहां बेहतरीन आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा जीता है। इससे दूरस्थ गांवों की उन बेटियों के सपने सच हो रहे हैं, जिन्हें पहले पढ़ाई के अवसर नहीं मिलते थे।          दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे इलाके जो कभी नक्सल प्रभावित थे, वहां के अनाथ और हिंसा पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने नया घर दिया है। यहां दाखिला मेरिट से नहीं, बच्चे की जरूरत और हालात देखकर होता है। इन बच्चों को सुरक्षित छत, पढ़ाई, खेल, संगीत और खुशहाल बचपन मिल रहा है। बंदूकों की गूंज के बीच पले-बढ़े ये बच्चे अब किताबों की दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। इस मॉडल को सबने सराहा     जावंगा एजुकेशन सिटी की कामयाबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। प्रतिष्ठित संस्था केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 सबसे बेहतरीन (नवोन्मेषी) परियोजनाओं में शामिल किया है, जिसमें पूरे भारत से मात्र 6 प्रोजेक्ट चुने गए हैं। इस अनूठी पहल के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन को 'प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस शिक्षा मॉडल की सफलता से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जावंगा का दौरा कर इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।जावंगा एजुकेशन सिटी आज आदिवासी बच्चों के सपनों का परिसर बन गया है।

100 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलेगा पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क

भोपाल नवम्बर 2025 के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के 100 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क (DG's Commendation Roll & Disc) प्रदान किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सम्मान के लिए चयनित अधिकारियों में— पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         01.  अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण जोन, इंदौर।         02.  संजय कुमार, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस, भोपाल।         03. मती रूचिवर्धन मिश्र, पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण जोन, भोपाल।         04.  अंशुमान सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल (हाल-सेवानिवृत्त)।         05.  शियाष ए., पुलिस महानिरीक्षक, राज्य सायबर मुख्यालय, भोपाल (हाल-प्रतिनियुक्ति पुलिस महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल, नई दिल्ली)। पुलिस उप महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         06.  सत्येन्द्र कुमार शुक्ल, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         07.  बीरेन्द्र कुमार सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक, नर्मदापुरम जोन।         08.  विनीत कपूर, पी.एस.ओ. टू डीजीपी, पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         09.  मनोज कुमार सिंह, उप पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण रेंज, इंदौर।         10.  रियाज इकबाल, उप पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         11.  मंयक अवस्थी, उप पुलिस महानिरीक्षक, जिला धार (हाल-अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था, नगरीय पुलिस इंदौर)। पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपायुक्त/सेनानी/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी         12.  अखिल पटेल, पुलिस उपायुक्त, नगरीय पुलिस, भोपाल।         13.  षियाज के.एम., सेनानी, हॉक फोर्स, बालाघाट (हाल-पुलिस अधीक्षक, जिला सिंगरौली)।         14.  आदर्शकांत शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बैहर, जिला बालाघाट (हाल-पुलिस उपायुक्त, जोन-4, नगरीय पुलिस भोपाल)।         15.  मलय जैन, स्टॉफ ऑफिसर टू पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश, पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         16.  अमित सक्सेना, सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         17.  प्रणय नागवंशी, पुलिस अधीक्षक, राज्य सायबर मुख्यालय, भोपाल।         18.  राकेश कुमार पेन्द्रो, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला बालाघाट (हाल-अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, रतलाम)।         19. मती शालिनी दीक्षित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपायुक्त जोन-3, जिला भोपाल।         20.  गोपाल सिंह धाकड, सहायक पुलिस महानिरीक्षक, चयन/भर्ती शाखा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल। पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी         21. मती अंकिता खातरकर, सहायक पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त जोन-3, जिला भोपाल।         22.  सत्येन्द्र घनघोरिया, नगर पुलिस अधीक्षक, जिला रतलाम।         23. सु नीलम बघेल, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग सैलाना, जिला रतलाम।         24.  रवि प्रकाश सिंह भदौरिया, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग अम्बाह, जिला मुरैना।         25.  आकाश अमलकर, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), अनुभाग आष्टा, जिला सीहोर।         26.  उदित मिश्रा, उप पुलिस अधीक्षक, अजाक, जिला रीवा।         27.  नीतेश पटेल, उप पुलिस अधीक्षक (प्रशासन), पुलिस मुख्यालय, भोपाल।         28.  योगेश सिंह तोमर, कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक, क्राईम, जिला उज्जैन। इसके अतिरिक्त 14 निरीक्षक, 26 उप निरीक्षक, 7 सहायक उप निरीक्षक, 12 प्रधान आरक्षक तथा 13 आरक्षक को भी पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क के लिए चयनित किया गया है। इस प्रकार पुलिस राजपत्र में निहित प्रावधानों के अंतर्गत कुल 100 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया जाता है सम्मान वर्ष 2002 से पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क अवॉर्ड विभाग के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 8 श्रेणियों में प्रदान किया जाता है— दस्यु विरोधी अभियान, नक्सल विरोधी अभियान एवं अन्य अभियानों के दौरान प्रशंसनीय उपलब्धि प्राप्त करने पर, प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशंसनीय कार्य करने पर, क्रीड़ा क्षेत्र में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने पर, पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार लाने वाले नए प्रयोग करने पर, 15 वर्ष तक लगातार उत्कृष्ट एवं स्वच्छ अभिलेख होने पर, वाहन चालकों द्वारा 15 वर्ष तक लगातार उत्कृष्ट एवं दुर्घटनारहित वाहन चालन करने पर, अनसुलझे प्रकरणों को सुलझाने पर, अन्य प्रशंसनीय कार्य करने पर ये सम्मान दिया जाता है।  

मुख्यमंत्री साय ने पारस पोर्टल के माध्यम से की प्रमुख योजनाओं एवं विकास कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल के माध्यम से योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित निगरानी के साथ विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री  साय आज मंत्रालय महानदी भवन में पारस पोर्टल के माध्यम से आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनसेवाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में प्राप्त करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन की कार्यप्रणाली में अंतर्विभागीय समन्वय की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अनेक विकास परियोजनाओं में एक से अधिक विभागों की अनुमति, सहभागिता अथवा सहयोग आवश्यक होता है। ऐसे में विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्य करने के बजाय समन्वित दृष्टिकोण अपनाएं। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, अनावश्यक विलंब दूर होगा तथा समय और लागत दोनों की बचत होगी। उन्होंने कहा कि पारस पोर्टल का उद्देश्य केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन कारणों की पहचान कर समाधान सुनिश्चित करना भी है, जिनके कारण कोई परियोजना या योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। राज्य स्तर से लेकर जिलों तक सभी अधिकारी इसे परिणाम आधारित प्रशासन के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग करें। एग्रीस्टैक में कोई भी पात्र किसान पंजीयन से न रहे वंचित मुख्यमंत्री  साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को केवल धान खरीदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ अधिक सरलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण आधारभूत व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिलों में विशेष अभियान चलाकर एग्रीस्टैक तथा डीसीएस से संबंधित लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। प्रत्येक वास्तविक किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो और किसी पात्र किसान को धान विक्रय अथवा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में सामने आई व्यावहारिक कठिनाइयों से सीख लेते हुए इस वर्ष पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही के कारण यदि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित होता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की जिलेवार प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अपेक्षाकृत पीछे चल रहे जिलों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस कार्य में लापरवाही अथवा अपेक्षित सहयोग नहीं करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों तक शीघ्र पहुंचे राहत और सहायता मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में विगत दिनों हुई भारी बारिश और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति तथा संचालित राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि भारी बारिश से प्रदेश के 17 जिलों के 500 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और बस्तर संभाग के जिलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को जनहानि, मकानों, पशुधन, अनाज तथा अन्य संपत्तियों को हुई क्षति का सर्वेक्षण शीघ्र पूरा करने और पात्र प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि यथाशीघ्र पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि प्रदान करने तक की प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी की जाए। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों एवं स्वास्थ्य शिविरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने हैंडपंपों का क्लोरीनीकरण कराने तथा नागरिकों को पानी उबालकर पीने के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को यह भरोसा होना चाहिए कि सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। राहत और पुनर्वास के प्रत्येक कार्य में मानवीय संवेदना सर्वोपरि होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देने वाले स्व-सहायता समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना की और कलेक्टरों को ऐसे समूहों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों तथा अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का आकलन कर जानकारी तत्काल शासन को भेजने को कहा, ताकि उनकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ की जा सके। उन्होंने पात्र प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को मिले अपेक्षित गति मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसके क्रियान्वयन में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह योजना परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने योजना के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वेंडर्स की संख्या बढ़ाने, सोलर दीदियों को प्रोत्साहित करने तथा हितग्राहियों के लिए ऋण की उपलब्धता को और सुगम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा योजना में उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी का अधिक से अधिक पात्र परिवार लाभ उठा सकें, इसके लिए जिलों में व्यापक जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कलेक्टरों को योजना में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए बैंकिंग सुविधा, वेंडर चयन से लेकर सोलर संयंत्र की स्थापना तक पूरी प्रक्रिया को हितग्राही के लिए सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए। सड़क और पुल-पुलियों के लंबित कार्यों की बाधाएं तत्काल दूर करें मुख्यमंत्री  साय ने लोक … Read more

खेल सुविधाओं के साथ फिटनेस सेंटर, चेंजिंग रूम, उपकरण कक्ष और दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष सुविधाएं होंगी

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने मंत्रालय स्थित समिति कक्ष में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश में निर्माणाधीन सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण, उपलब्ध कराई जाने वाली खेल सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना को लेकर तैयारी का जायजा लिया । मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की अवधारणा का उद्देश्य प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों को उनके अपने क्षेत्र में आधुनिक एवं बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एक ही परिसर में अनेक खेलों की सुविधा सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में विभिन्न खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। परिसर में बैडमिंटन, एथलेटिक्स ट्रैक, मार्शल आर्ट, टेबल टेनिस, खो-खो, कबड्डी, वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से बच्चों, युवाओं और स्थानीय खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास एवं प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को भी बढ़ावा मिलेगा। फिटनेस सेंटर से लेकर उपकरण कक्ष तक सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में केवल खेल मैदान ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सहायक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। परिसर में फिटनेस सेंटर, एडमिन ब्लॉक, उपकरण कक्ष, चेंजिंग रूम, इलेक्ट्रिकल रूम और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के दौरान आवश्यक सभी मूलभूत सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है। स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और खिलाड़ियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इन परिसरों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि उन्हें बेहतर मैदान, प्रशिक्षण, उपकरण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। विधानसभा स्तर पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित होने से स्थानीय प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से ही बेहतर वातावरण मिलेगा और उन्हें जिला, संभाग, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। हर विधानसभा में बनेगा हेलीपैड सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेल सुविधाओं के साथ आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड का भी प्रावधान किया जा रहा है। प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध होगी, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन एवं त्वरित राहत सेवाओं के संचालन के लिए किया जा सकेगा। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सीएम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण एवं आगामी कार्ययोजना से संबंधित प्रगति की जानकारी मंत्री  सारंग को दी।