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फैटी लिवर बना IT सेक्टर की बड़ी चुनौती, डेस्क जॉब करने वाले भी हाई रिस्क में

इंदौर  भारत में फैटी लिवर का जाल धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है और चौंकने वाली बात ये है कि सबसे ज्यादा इस बीमीरी की चपेट में देश के युवा आए हैं. ऐसा हम नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में हैरान करने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी के अनुसार, हैदराबाद में IT सेक्टर में काम करने वाले 84% से अधिक वर्कर्स फैटी लिवर की परेशानी से जूझ रहे हैं. इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया है क्योंकि आईटी सेक्टर में ज्यादातर 25 से 45 साल की उम्र के लोग काम कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि फैटी लिवर कितनी गंभीर बीमारी है और क्यों ये डेस्क जॉब या युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है. फैटी लिवर क्या होता है? जो लोग फैटी लिवर का नाम पहली बार सुन रहे हैं वो सबसे पहले ये जान लें कि जब हमारी बॉडी में जरूरत से ज्यादा फैट लिवर में जमा हो जाता है तो उसे फैटी लिवर कहते हैं. इस बीमारी की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि शुरुआत में इसका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता, मगर वक्त के साथ ये धीरे-धीरे लिवर को डैमेज कर देता है और सूजन-सिरोसिस जैसी सीरियस बीमारियों की वजह बन सकता है. फैटी लिवर को स्टीटोसिस भी कहते हैं और ये दो प्रकार का होता है. अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD) अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज उन लोगों को ज्यादा होता है जो लिमिट से ज्यादा शराब पीते हैं. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) ऐसा नहीं है कि सिर्फ पीने से ही फैटी लिवर होता है, मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से भी फैटी लिवर होता है जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहते हैं. बता दें कि अब शराब पिए बगैर लिवर से संबंधित जो बीमारियां होती है, वे सब अब एनएएफएलडी के अंदर आती हैं.  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दी चेतावनी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में बताया कि सरकार की तरफ से मेटाबोलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर डिजीज (MAFLD) को लेकर जागरुकता बढ़ाने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए एक ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं. जगत प्रकाश नड्डा की तरफ से सभी राज्यों को जांच के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक चेतावनी भी दी, उन्होंने कहा, ये एक बड़ा स्वास्थ्य खतरे की ओर इशारा करता है और अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले टाइम में देश के युवा जनरेशन की हेल्थ को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है.  फास्ट फूड खाने वाले  76.3% लोग पीड़ित   सिर्फ शराब पीने वाले या डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल ही फैटी लिवर होने का कारण नहीं है. आईसीएमआर ने एक रिसर्च की थी, जिसके मुताबिक, हफ्ते में फास्ट-फूड खाने वाले लोगों में 76.3%  लोगो में फैटी मिला है. जयपुर की तीन तहसीलों में हुई रिसर्च में 37.2 फीसदी लोगों में फैटी लिवर पाया गया और इसमें महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या ज्यादा पाई गई है. IT वर्कर्स में फैटी लिवर होने के कारण  लंबे समय तक बैठकर काम करना: IT सेक्टर में वर्कर्स डेली 8 से 10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, जिससे फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाती है. जंक फूड और खराब डाइट: ऑफिस के बिजी  शेड्यूल में जल्दी-जल्दी में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक रोजाना की डाइट का हिस्सा बन चुकी है. स्ट्रेस और नींद की कमी: काम का दबाव, रात की शिफ्ट और ज्यादा स्ट्रेस से नींद पर असर पड़ता है, जो बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है. शराब और मीठा: कुछ लोग स्ट्रेस कम करने के लिए वीकेंड या रोजाना ही शराब पीते हैं और कुछ लोग स्ट्रेस को मीठी चीजे खाकर स्लो करते हैं. इन दोनों के अधिक सेवन से ही लिवर पर इफेक्ट पड़ता है. IT वर्कर्स में फैटी लिवर होने के कारण क्या हैं?  दिल्ली के वसंत कुंज में फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शुभम वात्स्य ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि शराब ना पीने की वजह से भी लोग फैटी लिवर के शिकार हो रहे हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह अनहेल्दी लाइफस्टाइल और मोटापे की बढ़ती दर है. उन्होंन इसके कारण और इससे सुरक्षित रहने के लिए कुछ सुझाव भी दिए थे. क्यों बढ़ा रहा है फैटी लिवर का खतरा? लंबे समय तक बैठकर काम करना: IT सेक्टर में वर्कर्स डेली 8 से 10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, जिससे फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाती है. जंक फूड और खराब डाइट: ऑफिस के बिजी  शेड्यूल में जल्दी-जल्दी में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक रोजाना की डाइट का हिस्सा बन चुकी है. स्ट्रेस और नींद की कमी: काम का दबाव, रात की शिफ्ट और ज्यादा स्ट्रेस से नींद पर असर पड़ता है, जो बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है. शराब और मीठा: कुछ लोग स्ट्रेस कम करने के लिए वीकेंड या रोजाना ही शराब पीते हैं और कुछ लोग स्ट्रेस को मीठी चीजे खाकर स्लो करते हैं. इन दोनों के अधिक सेवन से ही लिवर पर इफेक्ट पड़ता है. फैटी लिवर के लक्षण-  आमतौर पर फैटी लिवर के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब लक्षण दिखाई देते है तब तक हालत बिगड़ चुकी होती है. फैटी लिवर होने के लक्षण- जैसे भूख में कमी, पीलिया होना, डार्क कलर का पेशाब आना, पेट और पैरों में सूजन होना. फैटी लिवर से कैसे बचें?     हेल्दी लाइफस्टाइल     नींद पूरी करना      लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाएं     हेपेटाइटिस ए और बी का टीका लगवाएं     हाइड्रेटेड रहें और तनाव का प्रबंधन करें     शराब ना पिएं     एक्सरसाइज करें  

AI ही भविष्य है: सुंदर पिचाई ने इंजीनियर्स को दिया सख्त अल्टीमेटम

नई दिल्ली गूगल की ओर से अपनी ऑल-हैंड्स मीटिंग में कर्मचारियों को साफ कर दिया गया है कि कंपनी अब पूरी तरह से AI पर फोकस होगी। इसे लेकर खुद सुंदर पिचाई ने कहा है कि जब कंपनियां बड़े निवेश करती हैं, तो ज्यादा हायरिंग होती हैं लेकिन गूगल में ऐसा नहीं होगा। दरअसल गूगल AI के इस दौर में कम कर्मचारियों से ज्यादा और तेज काम करवाना चाहता है। पिचाई ने इस मीटिंग में जानकारी दी है कि इस साल गूगल AI इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉ में लगभग 85 बिलियन डॉलर खर्च करेगी। हालांकि फिर भी नई भर्तियां बहुत सीमित होंगी। कर्मचारियों को मिल रही AI की ट्रेनिंग बता दें कि सुंदर पिचाई ने इस मीटिंग में अपने कर्मचारियों से AI को हाथों-हाथ लेने के लिए कहा है। इसके लिए कंपनी ने AI Savvy Google नाम का प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जिसकी मदद से गूगल के इंजीनियर्स को AI की ट्रेनिंग दी जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि गूगल के कर्मचारी अपनी रोजमर्रा की कोडिंग में AI को शामिल करना सीखें। इसके लिए DeepMind के साथ मिलकर "Building with Gemini" नाम का एक कोर्स भी बनाया गया है ताकि इंजीनियर Gemini AI का ठीक तरीके से इस्तेमाल करना सीख सकें। कर्मचारियों को मिले AI कोडिंग असिस्टेंट गूगल अपने कर्मचारियों को सिर्फ AI की ट्रेनिंग ही नहीं दे रहा बल्कि गूगल ने एक खास AI कोडिंग असिस्टेंट भी पेश किया है। इसका इस्तेमाल अब गूगल के 50% इंजीनियर रोजाना कर रहे हैं। गूगल का मकसद है कि इस AI असिस्टेंट को डेवलपर की दिनचर्या का हिस्सा बनाना है। साथ ही गूगल ने Windsurf नाम के एक AI स्टार्टअप को 2.4 बिलियन डॉलर में खरीदा है। इस कंपनी के सीईओ वरुण मोहन अब गूगल के साथ उन्हें AI के क्षेत्र में मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। गूगल में कर्मचारियों की स्थिति पिछले कुछ समय में गूगल में कर्मचारियों की भर्ती देखने को मिली है लेकिन यह 2023 के मुकाबले में अभी भी काफी कम है। गूगल अपनी वर्कफोर्स का 6% हिस्सा पहले ही घटा चुकी है। इसके अलावा कुछ विभागों में वॉलंटरी बायआउट की पेशकश की गई है। कुल मिलाकर अब कंपनी "छोटी टीम, स्मार्ट टूल्स और तेज आउटपुट" की स्ट्रैटजी पर काम कर रही है और गूगल के साथ अब आगे बढ़ने के लिए AI को अपनाना बेहद जरूरी हो जाएगा। गूगल की मीटिंग से निकल कर आई यह तमाम जानकारी इस बात को साफ करती है कि भविष्य में शायद AI द्वारा नौकरी खाए जाने वाली बात सच साबित हो जाए क्योंकि कुछ ऐसा ही हम फिलहाल होता देख रहे हैं।

पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर

मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है। इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है। गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है। गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है। हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है। मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें। आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है। नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।  

अपने ब्यूटी रूटीन में जरूर शामिल करें ये ऑइल

इन दिनों ऑइल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सबसे पॉप्युलर इंग्रेडिएंट बना हुआ है। फेशियल मॉइस्चराइजर से लेकर हेयर ट्रीटमेंट तक ऑइल ही पसंद किया जा रहा है। लेकिन कई लोग डरते हैं की कहीं ऑइल यूज करने से, खासकर गर्मी या बारिश में गरीजी और ग्रूपी स्किन ना हो जाए। नोट करें कि किसी भी क्रीम बेस्ड प्रोडक्ट को यूज करने से ऑइल बेस्ड प्रोडक्ट ज्यादा फायदेमंद होता है। ये वजन में भी बेहद लाईट होता है। खासकर प्लांट बेस्ड ऑइल आपके स्किन टेक्स्चर के लिए बेहद स्मूद और सूदिंग होते हैं। ये नैचरल ग्लो भी देते हैं। मेकअप रिमूवर के तौर पर ऑइल से बेहतर कुछ नहीं होता। आजकल तो मार्केट में ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलने लगे हैं जो बालों को ज्यादा ड्राय नहीं होने देते। इसके अतिरिक्तआ कई तरह से ब्यूटी ऑइल यूज किए जा सकते हैं…. अपने डेली फेस मॉइस्चराइजर की जगह ऑइल यूज करें। ये चेहरे की ड्राइनेस दूर करने के साथ ही मॉइस्चर को बनाए रखता है। इसके अलावा आप इसे मसाज ऑइल की तरह भी यूज कर सकते हैं। लेमन यूकेलिप्टस या पिंक ग्रेप फ्रूट वाले ऑइल यूज करें। एक्स्ट्रा रिलैक्सेशन के लिए इसे टेन्स मसल पर ज्यादा यूज करें। इन दिनों ऑलिव ऑइल के साथ लाईट वेट फार्मूला वाले फेशियल क्लेंजर मिलते हैं। ये आपके पोर्स भी बंद नहीं करते और मेकअप भी (वॉटरप्रूफ भी) आसानी से पूरी तरह से साफ करते हैं। इसे पूरे चेहरे पर लगाएं। अच्छे से मसाज करके पानी से धो लें। लाईट वेट बॉडी ऑइल्स यूज करें। आर्गन, सोयाबीन और मोरिंगा ऑइल के ब्लेंड वाला बॉडी ऑइल यूज करें। इसमें वॉयलेट, सैंडलवुड और वैनिला एक्सट्रैक्ट भी होता है। ऑइल बेस्ड एसपीएफ स्प्रे यूज किए जा सकते हैं जो बेहतरीन सनस्क्रीन साबित होते हैं। ये आपकी स्किन और बाल को यूवी डैमेज से बचाते हैं। साथ ही ड्राय स्किन पूरी तरह मॉइस्चराइज रखते हैं। क्लैरिन्स का सनस्क्रीन स्प्रे इन दिनों पसंद किया जा रहा है। फेस-क्लेंजिंग ऑइल की ही तरह ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलते हैं। ये बालों की गंदगी साफ करने के अलावा बाल सॉफ्ट बनाए रखते हैं, इन्हें वॉल्यूम देते हैं और मॉइस्चर भी बनाए रखते हैं। अद्भुत नतीजे के लिए एक टी-स्पून शैम्पू को थोड़े से पानी में मिक्स करके झाग बनाकर शैम्पू करें। डैम्प और ड्राय हेयर के लिए थोड़ा-सा नॉन-स्टिकी हेयर ऑइल ऑइल मसाज करें। इससे बाल डी-फ्रिज होते हैं, डीटैंगल होते हैं और स्प्लिट एंड्स से बचते हैं। यूवी रेज और हीट डैमेज से भी बचाव हो जाता है। इस तरह के लिप-ऑइल बेहद खूबसूरत लगते हैं. नैचरल ग्लोइंग लिप्स और लव-एट-फर्स्ट-स्वाइप के लिए ये ऑइल जरूर यूज करें। लाईट वेट ऑइल-बेस्ड कंसिस्टेंसी के कारण ये लगाने में बेहद आसान भी होते हैं।  

फोन भीग जाए तो फौरन करो ये काम, खराब होने का चांस ही नहीं

अगर आपका फोन भीग जाए, तो घबराने की बजाय कुछ सही और जरूरी कदम उठाकर आप उसे बचा सकते हैं। पानी से भीगे फोन में अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो वह खराब हो सकता है या हमेशा के लिए बंद भी हो सकता है। नीचे बताया गया है कि ऐसे समय में आपको क्या करना चाहिए। फोन को तुरंत बंद करें फोन में पानी घुसते ही सबसे पहले उसे स्विच ऑफ कर दें। अगर वह चालू है तो इंटरनल सर्किट में शॉर्ट सर्किट होने का खतरा रहता है। फोन को ऑन रखने से नुकसान और बढ़ सकता है, इसलिए जल्दी से पावर बंद करना सबसे जरूरी कदम होता है। सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड निकालें फोन को बंद करने के बाद सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड को तुरंत बाहर निकाल लें। इससे दोनों को नमी से बचाया जा सकता है और डाटा लॉस का खतरा कम होता है। इसके साथ ही फोन के कवर, केस या कोई अन्य एक्सेसरी भी निकाल दें। फोन को सूखे कपड़े से पोंछें फोन के बाहरी हिस्से को किसी साफ और सूखे सूती कपड़े से धीरे-धीरे पोंछें। किसी भी हिस्से में दबाव ना डालें और स्क्रीन को रगड़ें नहीं। अगर संभव हो तो फोन को थोड़ा झुकाकर पानी को बाहर निकलने दें। हेयर ड्रायर या गर्म हवा का इस्तेमाल ना करें कई लोग फोन को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर या हीटर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह नुकसानदायक हो सकता है। तेज गर्मी से फोन के अंदर के सेंसिटिव हिस्से जैसे बैटरी, डिस्प्ले या चिप खराब हो सकते हैं। बेहतर है कि फोन को कमरे के तापमान पर ही सूखने दिया जाए। फोन को राइस बैग में रखें फोन को एक एयरटाइट कंटेनर या पॉलीबैग में कच्चे चावल के साथ रख दें। चावल नमी को सोखने में मदद करते हैं। फोन को कम से कम 24 से 48 घंटे तक इसमें रखा जाना चाहिए ताकि वह पूरी तरह से सूख सके। ध्यान रहे कि इससे सारे पोर्ट्स बंद हों, जिससे चावल अंदर जाने या फंसने का डर ना रहे। फोन को ऑन करने की जल्दी ना करें फोन सूख जाने के बाद भी उसे तुरंत ऑन ना करें। एक बार फिर से चेक करें कि कहीं कोई हिस्सा गीला तो नहीं है। अगर पूरा यकीन हो कि फोन पूरी तरह सूख चुका है, तभी उसे ऑन करें। अगर फोन फिर भी चालू नहीं हो रहा हो, तो उसे सर्विस सेंटर पर दिखाएं। प्रोफेशनल मदद लें अगर फोन ज्यादा गीला हो गया हो या स्क्रीन में धुंध, धब्बे, या आवाज में कोई समस्या आ रही हो, तो खुद से रिपेयर करने की कोशिश ना करें। ऐसे मामलों में प्रोफेशनल टेक्नीशियन ही सही सॉल्यूशन दे सकता है।  

डायबिटीज़ मरीजों के लिए सुबह का जादुई नाश्ता: थकान और कमजोरी होगी दूर, ब्लड शुगर रहेगा कंट्रोल

डायबिटीज एक ऐसी क्रॉनिक बीमारी है जिसे काबू में नहीं रखा जाए तो ये बॉडी को खोखला कर देती है। डायबिटीज की बीमारी में इम्युनिटी कमजोर हो जाती है और इंसान जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगता है। डायबिटीज मरीज अगर डाइट का ध्यान नहीं रखें तो ब्लड में शुगर का स्तर हाई होने लगता है। डायबिटीज को लम्बे समय तक कंट्रोल नहीं किया जाए तो कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। डायबिटीज मरीज तनाव से दूर रहे, बॉडी को एक्टिव रखें और डाइट का खास तौर पर ध्यान रखें। डायबिटीज मरीज अपने खान-पान को लेकर बहुत चिंता करते हैं। कुछ भी खाने से पहले उनका दिमाग यही कैलकुलेशन करने लगता है कि इसमें कार्बोहाइड्रेट कितना है, वसा की मात्रा कितनी है और इसका ग्लाइसेमिक लोड कितना है। कुछ भी खाने से पहले लोगों के दिमाग में यही रहता है कि कहीं इस फूड को खाने से ब्लड शुगर हाई तो नहीं होगा। डायबिटीज मरीजों में अक्सर देखा गया है कि उन्हें सुबह-सुबह बिस्तर से उठते ही थकान और कमजोरी महसूस होती है। ये थकान और कमजोरी कुछ लोगों को दिन भर बनी रहती है। डायबिटीज स्पेशलिस्ट हेल्थ कोच रंजीत सिंह के मुताबिक अगर डायबिटीज मरीज नाश्ते में कुछ पावरफुल चीजों का सेवन करें तो कमजोरी दूर होगी, थकान मिटेगी और बॉडी भी हेल्दी रहेगी। एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीज नाश्ते में 4 चीजों का सेवन भिगोकर करें तो पूरा दिन ब्लड शुगर को नॉर्मल रख सकते हैं और बॉडी को हेल्दी भी रख सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कौन सी चार चीजों का सेवन सुबह के नाश्ते में करें कि कमजोरी और थकान दूर रहे। बादाम का करें सेवन बादाम पोषक तत्वों से भरपूर हेल्दी फूड है। बादाम में ऑयल की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए ये दिमाग को तेज करता है,आंखों की रोशनी को बढ़ाता है और बॉडी की कमजोरी दूर कर एनर्जी देता है। ज्यादातर लोग अमेरिकन बादाम का सेवन करते हैं जो मेहंगे होते हैं और बेकार भी होते हैं। इन बादाम से सारा तेल निकाल लिया जाता है। अगर डायबिटीज मरीज सुबह के नाश्ते में बादाम का सेवन करना चाहते हैं मामरा बादाम का सेवन करें। अलसी के बीज का करें सेवन अलसी के बीज ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड से भरपूर होता है जिसका सेवन करने से डायबिटीज मरीजों की थकान और कमजोरी दूर होती है। अलसी का सेवन करने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। कब्ज की बीमारी दूर होती है। नसों में होने वाली ब्लॉकेज भी दूर होती है। फाइबर से भरपूर अलसी के बीज पाचन को दुरुस्त करते हैं और ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करते हैं। मेथी दाना का करें भिगोकर सेवन मेथी दाना किचन में मौजूद मसाला और हर्ब है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में असरदार साबित होता है। इसका सेवन करने से बॉडी पेन से निजात मिलती है। घुटनों में दर्द,कमर दर्द और किसी भी तरह के दर्द को दूर करने में ये दवाई की तरह काम करता है। काले चने का करें सेवन डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए बॉडी की कमजोरी और थकान को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट भिगे हुए काले चने का सेवन करें। प्रोटीन से भरपूर चना हड्डियों को मजबूत करता है। इसका सेवन करने से पेट और ब्लड की एसिडिटी कम होती है। फाइबर से भरपूर चना मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और पाचन को दुरुस्त करता है। इन चीजों का सेवन कैसे करें 4-5 बादाम,एक चम्मच अलसी,आधा चम्मच मेथी दाना और चार चम्मच चने एक गिलास पानी में रात में भिगो दें। सुबह आप फ्रेश होने के बाद इन चारों चीजों को अच्छे से वॉश कर लें और फिर इन चारों चीजों का सेवन चबा-चबाकर करें। ये नाश्ता आपकी बॉडी की थकान और कमजोरी को दूर करेगा और आपकी ब्लड शुगर भी कंट्रोल करेगा।  

खुश रहने के लिए जानिए जीवन के ये 5 जरूरी कड़वे सच

हर इंसान अपनी लाइफ में खुश रहना चाहता है, लेकिन फिर भी कई बार दुख, परेशानी और तनाव हमें घेर ही लेते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि हम जीवन के कुछ बेहद सरल लेकिन गहरे सच को नजरअंदाज कर देते हैं। जो व्यक्ति इन बातों को समझ लेता है, वो छोटी-छोटी बातों में उलझता नहीं और हर हाल में खुश रहना सीख जाता है। जबकि जो इंसान इन सच्चाइयों को नजरअंदाज करके बेवजह की उम्मीद लगाए बैठा रहता है, उसे दुख और परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलता है। यकीन मानिए खुश रहना इतना भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो कुछ चीजों को जानने की और उन्हें एक्सेप्ट करने की। आइए जानते हैं जीवन से जुड़े इसी सच को। हर चीज पर हमारा कंट्रोल नहीं हो सकता हम अक्सर सोचते हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो, हर परिस्थिति वैसी बने जैसी हम चाहें। लेकिन सच्चाई तो यही है कि जीवन में बहुत सी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं, जैसे-पूरी मेहनत के बाद भी फल ना मिलना, किसी दूसरे का आपके साथ बुरा व्यवहार करना या अचानक कोई मुश्किल खड़ी हो जाना। जब हम ये मान लेते हैं कि हर चीज को नियंत्रित करना नामुमकिन है, तो मन को शांति मिलने लगती है। नियंत्रण की जरूरत कम हो जाती है और हम चीजों को स्वीकार करना सीख जाते हैं। यही बात हमारी चिंता को घटाकर खुश रहने की राह खोलती है। परिवर्तन संसार का नियम है कहने को तो ये बात बेहद छोटी है, लेकिन इसमें एक गहरी सच्चाई छुपी हुई है। लोग ये बात सुन तो लेते हैं लेकिन मानने को तैयार नहीं होते कि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। अच्छे दिन आते हैं और चले भी जाते हैं, वैसे ही बुरे वक्त भी हमेशा के लिए नहीं होते। अगर हम इन बातों को समझ लें कि हर चीज बदलने वाली है, तो हम दुख के समय टूटते नहीं और सुख के समय घमंड नहीं करते। परिवर्तन को जीवन का हिस्सा मानना हमें संतुलित बनाए रखता है और लाइफ के इस बैलेंस में ही सच्चा सुख छिपा हुआ है। तुलना करना दुख की सबसे बड़ी जड़ है इंसान के दुख की सबसे बड़ी वजह है कि वह दूसरों से अपनी तुलना करता है। किसी और की जिंदगी को देखकर, खुद को कम आंकने लगता है। आजकल सोशल मीडिया के दौर में तो ये चीजें और भी बढ़ गई हैं। अगर सुखी जीवन जीना है तो दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा। हर इंसान को यह समझना चाहिए कि हर इंसान की जिंदगी का सफर अलग-अलग होता है। जब दो लोगों के चेहरे एक से नहीं होते तो भला दो इंसानों की जिंदगी एक जैसी कैसे हो सकती है। बस ये छोटी सी बात जो समझ जाता है, उसका जीवन बहुत आसान और सुलझा हुआ हो जाता है। सब कुछ हमेशा परफेक्ट नहीं होता जीवन में सब कुछ ठीक हो, हर काम बिना रुकावट के पूरा हो, ऐसी उम्मीद करना भी दुख का एक कारण है। असल जिंदगी में अधूरे काम, अधूरे सपने और उलझने हमेशा रहेंगी। कई बार परफेक्शन का पीछा करना ही दुख का कारण बन जाता है। जब हम लाइफ की इसी अनसर्टेनिटी को अपनाते हैं, तो हम प्रेजेंट में जीना सीखते हैं और यही प्रेजेंट हमें खुश रहने का रास्ता दिखाता है। हर नया दिन ईश्वर का दिया हुआ एक तोहफा है हम अक्सर भविष्य की चिंता में या बीते कल के पछतावे में खो जाते हैं, जो हमारे दुख का एक बड़ा कारण बन जाता है। लेकिन हर किसी को समझना चाहिए कि हर नया दिन, जीवन की नई शुरुआत है। ईश्वर हमें एक नया दिन जीने का मौका दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए और उसे भगवान का एक खूबसूरत तोहफा समझकर नई एनर्जी के साथ जीना चाहिए। जो इंसान हर नए दिन को नई शुरुआत मानकर जीना शुरु कर देता है, उसके जीवन के दुख खुद ब खुद कम हो जाते हैं।  

अपने ब्यूटी रूटीन में जरूर शामिल करें ये ऑइल

इन दिनों ऑइल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सबसे पॉप्युलर इंग्रेडिएंट बना हुआ है। फेशियल मॉइस्चराइजर से लेकर हेयर ट्रीटमेंट तक ऑइल ही पसंद किया जा रहा है। लेकिन कई लोग डरते हैं की कहीं ऑइल यूज करने से, खासकर गर्मी या बारिश में गरीजी और ग्रूपी स्किन ना हो जाए। नोट करें कि किसी भी क्रीम बेस्ड प्रोडक्ट को यूज करने से ऑइल बेस्ड प्रोडक्ट ज्यादा फायदेमंद होता है। ये वजन में भी बेहद लाईट होता है। खासकर प्लांट बेस्ड ऑइल आपके स्किन टेक्स्चर के लिए बेहद स्मूद और सूदिंग होते हैं। ये नैचरल ग्लो भी देते हैं। मेकअप रिमूवर के तौर पर ऑइल से बेहतर कुछ नहीं होता। आजकल तो मार्केट में ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलने लगे हैं जो बालों को ज्यादा ड्राय नहीं होने देते। इसके अतिरिक्तआ कई तरह से ब्यूटी ऑइल यूज किए जा सकते हैं…. अपने डेली फेस मॉइस्चराइजर की जगह ऑइल यूज करें। ये चेहरे की ड्राइनेस दूर करने के साथ ही मॉइस्चर को बनाए रखता है। इसके अलावा आप इसे मसाज ऑइल की तरह भी यूज कर सकते हैं। लेमन यूकेलिप्टस या पिंक ग्रेप फ्रूट वाले ऑइल यूज करें। एक्स्ट्रा रिलैक्सेशन के लिए इसे टेन्स मसल पर ज्यादा यूज करें। इन दिनों ऑलिव ऑइल के साथ लाईट वेट फार्मूला वाले फेशियल क्लेंजर मिलते हैं। ये आपके पोर्स भी बंद नहीं करते और मेकअप भी (वॉटरप्रूफ भी) आसानी से पूरी तरह से साफ करते हैं। इसे पूरे चेहरे पर लगाएं। अच्छे से मसाज करके पानी से धो लें। लाईट वेट बॉडी ऑइल्स यूज करें। आर्गन, सोयाबीन और मोरिंगा ऑइल के ब्लेंड वाला बॉडी ऑइल यूज करें। इसमें वॉयलेट, सैंडलवुड और वैनिला एक्सट्रैक्ट भी होता है। ऑइल बेस्ड एसपीएफ स्प्रे यूज किए जा सकते हैं जो बेहतरीन सनस्क्रीन साबित होते हैं। ये आपकी स्किन और बाल को यूवी डैमेज से बचाते हैं। साथ ही ड्राय स्किन पूरी तरह मॉइस्चराइज रखते हैं। क्लैरिन्स का सनस्क्रीन स्प्रे इन दिनों पसंद किया जा रहा है। फेस-क्लेंजिंग ऑइल की ही तरह ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलते हैं। ये बालों की गंदगी साफ करने के अलावा बाल सॉफ्ट बनाए रखते हैं, इन्हें वॉल्यूम देते हैं और मॉइस्चर भी बनाए रखते हैं। अद्भुत नतीजे के लिए एक टी-स्पून शैम्पू को थोड़े से पानी में मिक्स करके झाग बनाकर शैम्पू करें। डैम्प और ड्राय हेयर के लिए थोड़ा-सा नॉन-स्टिकी हेयर ऑइल ऑइल मसाज करें। इससे बाल डी-फ्रिज होते हैं, डीटैंगल होते हैं और स्प्लिट एंड्स से बचते हैं। यूवी रेज और हीट डैमेज से भी बचाव हो जाता है। इस तरह के लिप-ऑइल बेहद खूबसूरत लगते हैं. नैचरल ग्लोइंग लिप्स और लव-एट-फर्स्ट-स्वाइप के लिए ये ऑइल जरूर यूज करें। लाईट वेट ऑइल-बेस्ड कंसिस्टेंसी के कारण ये लगाने में बेहद आसान भी होते हैं।  

डायबिटीज से कमजोर हो जाती है प्रतिरक्षा शक्ति

डायबिटीज से शरीर पर कई अन्य दुष्प्रभाव होने की बात सामने आती रही है। एक ताजा शोध में पाया गया कि डायबिटीज पीड़ितों की प्रतिरक्षा शक्ति भी कमजोर हो जाती है, जिस कारण उन्हें संक्रमणों से लड़ने में परेशानी आती है। शोध के अनुसार, खून में शुगर की बढ़ी हुई मात्रा कुछ ऐसे अणुओं को प्रोत्साहित कर देती है जो संक्रमण से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं। क्लीवलैंड के केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख शोधकर्ता जेना किसलर ने कहा, इस शोध के परिणाम अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों के लिए अधिक कारगर दवा बनाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस शोध से शुगर के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने की जरूरत को बल मिला है। ज्यादा डायबिटीज की स्थिति में ग्लूकोज के टूटने से डाईकार्बोनिल अणु बनते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए हानिकारक हैं। डायबिटीज से प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे कमजोर होती है: उच्च रक्त शर्करा: रक्त में अतिरिक्त शर्करा, जिसे हाइपरग्लेसेमिया भी कहा जाता है, प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कार्य को बाधित करता है, जिससे संक्रमण से लड़ना मुश्किल हो जाता है. सूजन: मधुमेह से पुरानी सूजन हो सकती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है और संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाती है. घाव भरने में देरी: उच्च रक्त शर्करा के कारण, रक्त गाढ़ा हो जाता है, जिससे श्वेत रक्त कोशिकाएं (जो संक्रमण से लड़ती हैं) घाव वाली जगह तक पहुंचने और संक्रमण से लड़ने में अधिक समय लेती हैं. न्यूरोपैथी: मधुमेह से तंत्रिका क्षति (न्यूरोपैथी) हो सकती है, जो संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है, खासकर पैरों और त्वचा में. कमजोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया: मधुमेह से पीड़ित लोगों में, प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया कमजोर हो सकती है, जिससे वे संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. निष्कर्ष: डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह रोगियों को अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने के लिए उचित आहार, व्यायाम और दवाओं का पालन करना चाहिए.  

इन तरीकों को अपनाकर बचा सकते हैं ई-मनी

भारत सरकार और रिजर्व बैंक अगले दो वर्षों के भीतर देश में ई-भुगतान (इलेक्ट्रॉ निक पेमेंट) प्रणाली को बढ़ाना चाहते हैं। ई-भुगतान यानी बिना नगदी के होने वाले लेनदेन। इन तरीकों में कार्ड, इंटरनेट अथवा मोबाइल से रकम का भुगतान किया जाता है। हालांकि इस तरीके में भी धोखाधड़ी तथा हैकिंग का खतरा बना रहता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे तरीकों को, जिनसे ई-ट्रांसेक्शरन के दौरान सुरक्षा बनी रहे। सार्वजनिक कम्यूीान टर्स का इस्तेगमाल न करें ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन के लिए सार्वजनिक कम्यूरटर्स का प्रयोग न करें। अगर ऐसा करना भी पड़े तो यथा संभव अपने कंप्यूटर पर पहुंचने के साथ ही पासवर्ड को बदल दें। बैंकिंग जानकारी चाहने वाले ईमेल्स से बचें यदि आपके कोई ऐसा ईमेल्स। प्राप्त हों, जिनमें आपके बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी जाए, तो उन्हेंभ डिलीट कर दें या फिर नजरअंदाज करें। यह धोखाधड़ी के तरीकों में से एक है। इससे आपका कम्यूहता टर भी हैक हो सकता है। ईमेल की लिंक्स पर क्लिक करते समय रहें सावधान अंजान अथवा संदेहास्पाद प्रकार के ईमेल्स को खोलने से बचें। यदि खोलें भी तो, उसमें दिए गए किसी लिंक पर क्लिक न करें। यदि आपको किसी वेबसाइट पर जाना है तो मैनुअल तरीके से उसका एड्रेड टाइप करिए। कई बार धोखेबाज, नकली वेबसाइट बनाकर उसका लिंक भेज देते हैं। कंप्यूटर का एंटी वायरस अपडेट रखें अपने कंप्यूटर के एंटी-वायरस को हमेशा अपडेट रखें। अच्छी कंपनी का एंटी वायरस इस्तेमाल करें। मजबूत पासवर्ड बनाएं बैंक खातों के लिए पासवर्ड बनाते समय सतर्क रहें। पासवर्ड बनाते समय लोअर केस, अपर केस, अंकों तथा स्पे शल कैरेक्टिर्स का इस्तेपमाल करें। पासवर्ड के रूप में जन्मेतिथि, वर्षगांठ, परिजनो के नाम या ऐसा कुछ भी न बनाएं जिसके बारे में आसानी से पता लगाया जा सके। हमेशा एचटीटीपीएस का ध्यासन रखें यदि आप बैंकिंग अथवा भुगतान वेबसाइट्स का उपयोग करते हैं तो हमेशा ध्यान रखें कि उसके एड्रेस के पहले एचटीटीपीएस जरूर लिखा हो। सामान्य एचटीटीपी का अर्थ होता है कि यह वेबसाइट सुरक्षित नहीं है। मोबाइल कनेक्शून को चेक करते रहें इस बात का हमेशा ध्याचन रखें कि आपका मोबाइल फोन कनेक्शिन ज्या दा दिनों तक बंद न रहे। यदि आपका मोबाइल काम नहीं कर रहा है तो संभव है कि उसके सिम की क्लो निंग कर ली गई हो। या फिर किसी धोखेबाज ने आपके नाम से नई सिम जारी करवा ली हो।