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मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज

वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी वैसे भी कम होने लगती है और एक अवस्था ऐसी आती है एकदम से दिखना बन्द हो जाता है। इस अवस्था में परेशानी का प्रारम्भ होता है। भारत वर्ष में अन्धत्व के प्रमुख कारणों में मोतिया बिन्द प्रमुख है। अस्सी प्रतिशत अन्धत्व का कारण मोतियाबिन्द नामक बीमारी है। मोतियाबिन्द एक रोग है जिसका संबंध हमारी आयु से होता है। वृद्धावस्था में आमतौर से मोतियाबिन्द हो जाता है। हमारी आंख में एक पारदर्शी लेन्स होता है। यह लेन्स धुंधला पड़ जाता है और अपनी पारदर्शिता खो देता है। इसी को मोतियाबिन्द कहते हैं। मोतियाबिन्द पुरूष, स्त्री किसी को भी वृद्धावस्था में हो सकता है। इसका कोई विशेष कारण नहीं है लेकिन अत्यधिक धूम्रपान, मदिरा पान, निरन्तर तेज रोशनी में कार्य करने या आंख में चोट लगने से यह रोग कम उम्र मंछ भी हो सकता है। मधुमेह के रोगियों को भी यह कम उम्र में हो सकता है। इसलिए चालीस वर्ष की उम्र के बाद आंखों की जांच के प्रति सावधानी बरतना नितान्त आवश्यक है। यदि आंखों की जांच उसके बाद होती रहे तो अच्छा है। मोतियाबिन्द एक ऐसा रोग है जिसे रोकने के लिए कोई उपचार, सावधानियां नहीं है इसलिए मोतियाबिन्द को उम्र के साथ रोका नहीं जा सकता। मोतियाबिन्द की पदचाप:- मोतियाबिन्द आपको उम्र के साथ आकर घेरे इसके पूर्व उसकी पदचाप सुन लीजिए। मोतियाबिन्द बिना किसी शोर गुल के धीरे-धीरे बिना दर्द के आता है। इसके आगमन पर कम दिखाई देने लगता है। दूर और पास की वस्तु का भेद करने में दिक्कत आती है। पुतली का रंग बदल कर धुंधला अथवा सफेद हो जाता है। कभी-कभी एक वस्तु दो वस्तु के रूप में दिखाई पड़ती है। रंगों के पहचानने में परेशानी आती है। ये संकेत यदि दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि मोतियाबिन्द रोग का आगमन हो गया है। मोतियाबिन्द को ठीक कैसे करें:- मोतियाबिन्द का दवा के रूप में कोई उपचार नहीं है। इसका एकमात्र इलाज एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। इस आपरेशन में आंख पर आ गई झिल्ली को (लेंस) हटा देने से पूर्ववत दिखाई देने लगता है। यही एक मात्र हल है। हमारे देश में आपरेशन शब्द का ही बड़ा डर है। हम समझते हैं कि आपरेशन में सदा खतरा रहता है। इसलिए इस भय के कारण निरक्षण ग्रामीण जन आपरेशन को टालते रहते हैं। आपरेशन टालने का खतरा:- मोतियाबिन्द आपरेशन एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। लाखों लोग भारत में यह आपरेशन करा चुके हैं। हमारे ग्राम, शहर, मोहल्ले में ऐसे व्यक्ति मिल सकते हैं जो मोतियाबिन्द का आपरेशन कराकर देखने में सक्षम हो गए हैं। अतः मोतियाबिन्द के आपरेशन में कोई खतरा नहीं है, यह हमें समझ लेना चाहिए। लेकिन मोतियाबिन्द का आपरेशन यदि हम नहीं कराएं तो अपारदर्शी लेन्स के न हटाने से व्यक्ति अंधा हो जाता है। इस खतरे से बचने के लिए जैसे ही पता चले कि मोतियाबिन्द है, आपरेशन के लिए स्वयं अस्पताल जाकर जांच करा लेना चाहिए और आपरेशन भी करा लेना सर्वोत्तम होगा। आपरेशन का समय:- उत्तर भारत में यह अन्ध विश्वास व्याप्त है कि आपरेशन के लिए उचित समय शीत ऋतु है इसलिए अक्तूबर से फरवरी तक अधिकतम मोतियाबिन्द के आपरेशन इस अवधि में होते हैं किन्तु यह एक भ्रम है। यह इतना छोटा और साधारण आपरेशन होता है कि किसी भी समय इसे कराया जा सकता है। सम्पूर्ण दक्षिण भारत में मोतियाबिन्द के आपरेशन साल भर बिना किसी डर के होते हैं। अब उत्तर भारत में भी अन्ध विश्वास टूट रहा है किन्तु अभी व्यापक रूप से ग्रामीण ठंड में आपरेशन को ही उत्तम मान रहे हैं किन्तु वस्तु स्थिति यह है कि मोतियाबिन्द का आपरेशन वर्ष भर में कभी भी कराया जा सकता है। यदि मोतियाबिन्द के आपरेशन में विलम्ब होता है तो लाइलाज अन्धापन अवश्य हो सकता है। जैसे ही कम दिखना प्रारंभ हो, मोतियाबिन्द का आपरेशन कराने के लिए अस्पताल जाना चाहिए। एक समय में एक ही आंख का आपरेशन किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जो आंख ज्यादा प्रभावित होती है उसका आपरेशन सबसे पहले किया जाता है। जब यह आंख पूर्णतया दृष्टि पा जाती है तब ही दूसरी आंख का आपरेशन होता है। मोतियाबिन्द का आपरेशन अत्यन्त साधारण आपरेशन है। इसमें कोई दर्द और कष्ट नहीं है। आपरेशन करते वक्त व्यक्ति को बेहोश नहीं किया जाता। कोई खर्च नहीं:- इस आपरेशन के लिए शासकीय अस्पताल, मेडिकल कालेजों में निःशुल्क व्यवस्था की गई है कुछ सचल इकाइयां भी ग्रामों में जाकर इस आपरेशन की व्यवस्था करते हैं। भारत सरकार ने स्वास्थ्य के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अंधत्व निवारक कार्यक्रम को सम्मिलित कर लिया है। इसलिए इस आपरेशन के लिए हर सरकारी अस्पताल में निःशुल्क सुविधा की गई है। इतना ही नहीं, सम्पूर्ण देश में स्वयं सेवी संगठन नेत्र शिविर भी ग्रामों में आयोजित करते हैं जिसमें अनुभवी डाक्टर ग्राम में ही नेत्रों का आपरेशन कर देते हैं। इन शिविरों में न केवल मोतियाबिन्द का निःशुल्क आपरेशन होता है वरन भोजन, दवा व, चश्मे भी संगठन निःशुल्क वितरण करते हैं। इन शिविरों में रोगी को पांच दिन ठहरना पड़ता है। आपरेशन हो जाने के 4-6 सप्ताह बाद आंख की पुनः जांच करानी चाहिए। रोगी की इस जांच का बड़ा महत्व है। आपरेशन के बाद की सावधानियां:- सफल आपरेशन के बाद भी रोगी को एक माह तक सावधानी रखनी आवश्यक है। नेत्र सर्जन जो दवा देते हैं, उसे नियमित रूप से लेना, आंख को हरी पट्टी से ढक कर रखना, तेज रोशनी, धुंआ, धूल से आंख को बचाना बहुत आवश्यक है। इतना ही नहीं, यदि कोई शिकायत हो तो तत्काल डाक्टर को बताना चाहिए और सलाह अनुसार कार्य करना चाहिए। मोतियाबिन्द के आपरेशन के बाद दो सप्ताह तक सिर न धोने, भारी परिश्रम न करने, अधिक झुकने, मुड़ने के कार्य न करने की सलाह डाक्टर देते हैं। इस आपरेशन वाली आंख को छूना, दबाना, खतरनाक रहता है। आप क्या कर सकते हैं?:- मोतियाबिन्द आपरेशन के इस कार्य में उन व्यक्तियों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है जिन्हें मोतियाबिन्द नहीं हुआ और यही से आपके सेवा कार्य का प्रारम्भ हो जाता है। आप इस सेवा कार्य में निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका को निभा सकते हैं। प्रत्येक जिले … Read more

तेजी से वजन घटाने के लिए अपनाएं ये फूड्स, मिलेंगे जबरदस्त फायदे

मोटापा ना सिर्फ पर्सनैलिटी को खराब करता है, बल्कि यह कई बीमारियों का कारण भी है. ऐसे में हेल्दी और खुशहाल जीवन के लिए वजन कम करना बेहद जरूरी हो जाता है. वजन कम करने में सबसे बड़ा रोल आपकी डाइट और लाइफस्टाइल का होता है. ऐसे में अगर आप भी अपने बढ़े हुए वजन को कम करना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो न सिर्फ हेल्दी हों, बल्कि पेट को भी लंबे समय तक भरा हुआ रखें. आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनमें कैलोरी कम होती है लेकिन फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट ज्यादा होते हैं. अवोकाडो कैलोरी ज्यादा होने के बावजूद, अवोकाडो में हेल्दी फैट और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं. ये हेल्दी फैट लंबे समय तक पेट को भरा रखते हैं जिससे अनहेल्दी चीजें खाने का मन नहीं करता.  बेरीज ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी जैसे फलों में नेचुरल शुगर होती है. इनमें कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है. इन्हें खाने के बाद मीठे की क्रेविंग कम होती है और पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. ओट्स ओट्स में सॉल्युबल फाइबर भरपूर होता है जो पानी सोखकर पेट में जेल जैसा बन जाता है. इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने का मन नहीं करता.  बीन्स और दालें बीन्स, दालें और चने प्रोटीन और फाइबर के बेहतरीन सोर्स हैं. ये धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती. साथ ही यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं, जिससे ज्यादा खाने का मन नहीं करता. अंडे अंडे हाई-क्वालिटी प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते. अगर आप सुबह नाश्ते में अंडे खाते हैं तो लंबे समय तक पेट भरा रहता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है. हरी सब्जियां पालक, केल और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों में कैलोरी बहुत कम होती हैं, लेकिन इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं. इन्हें खाने से पेट भी भरा रहता है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है.

बहन की राखी से जुड़ी अनोखी कहानी, जिसने मरने के बाद भी भाई का दिल छू लिया

नई दिल्ली  रक्षाबंधन के पर्व को भाई और बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। आज जहां पूरे देश में भाई- बहन खुशी- खुशी इस त्यौहार काे मना रहे हैं तो वहीं एक भाई ऐसा है जिसकी आखों से आंसू रूक ही नहीं रहे हैं। इस भाई ने अपनी इकलौती बहन को खो दिया है, हालांकि उसकी बहन ने मरने के बाद भी भाई के हाथों को सूना नहीं रहने दिया। इस कहानी को जिसने भी सुना वह भावुक हो उठा।     9 साल की रिया ने किए थे अंग दान दरअसल पिछले साल गुजरात के रहने वाले 9 साल की रिया मिस्त्री का ब्रेन डेड हो गया था, जिसके बाद उसके अंगों को दान कर दिया गया। रिया का दाहिना हाथ, एक दूसरी लड़की को ट्रांसप्लांट करके लगाया गया था, ऐसे में रिया तो मर गई लेकिन उसका हाथ अभी भी जिंदा है। रिया दुनिया की सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर थीं। उसका हाथ मुंबई की अनमता अहमद को दिया गया, जो  दुनिया की सबसे कम उम्र की ऐसी लड़की हैं जिनके कंधे तक हाथ का ट्रांसप्लांट हुआ है। बेटी का हाथ देख रो पड़े मातर- पिता अब अनमता ने रिया के हाथ से उसके भाई शिवम काे राखी बांधी।  शिवम ने जब अनमता के हाथों से राखी बंधवाई तब उसे यह एहसास हो रहा था कि जैसे वह अपनी प्यारी बहन से ही राखी बंधवा रहा है। रिया के माता-पिता ने अपनी ही बेटी का हाथ अपने हाथों में लिया तो वह अपने आंसू रोक नहीं पाए। यह काफी भावुक भरा पल था। हर किसी के आंखों से आंसू बहते रहे और वे अपनी भावनाओं को छिपाते रहे।    बेटी की याद में भावुक हुआ परिवार रिया की मां तृष्णा ने बहते आंसुओं संग बताया कि जब अनमता ने शिवम को राखी बांधी तो हमें लगा कि रिया राखी बांधने के लिए जिंदा हो उठी है। मैंने उसकी पसंद की मिठाई गुलाब जामुन बनाया। हमने हर साल की तरह ही रक्षाबंधन मनाया। हम अभी भी बेटी के जाने के दुख से उबर नहीं पाए हैं लेकिन अनमता को देखकर खुशी मिलती है। सुकून मिलता है कि वह कितनी खुश है और एक अच्छी जिंदगी जी रही है।

डेली टास्क के लिए बेस्ट AI मॉडल कौन? ChatGPT, Gemini और Claude का तुलनात्मक विश्लेषण

नई दिल्ली AI टेक्नोलॉजी तेजी से हमारे रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन रही है. चैट करने से लेकर पढ़ाई, रिसर्च और कंटेंट बनाने तक, लोग अब ChatGPT, Gemini और Claude जैसे टूल्स पर भरोसा कर रहे हैं. लेकिन इतने ऑप्शन में से सही मॉडल चुनना कई बार मुश्किल हो जाता है. चलिए जानते हैं, डेली यूज के लिए इनमें से कौन-सा AI आपके लिए सबसे बेस्ट हो सकता है. OpenAI का ChatGPT अपनी तेज़ और नेचुरल लैंग्वेज समझने की क्षमता के लिए मशहूर है. कंटेंट राइटिंग, सवाल-जवाब, कोडिंग और आइडिया जनरेशन में ये काफी मददगार है. अगर आपको क्रिएटिव काम या लैंग्वेज बेस्ड टास्क करने हैं, तो ChatGPT बेहतर ऑप्शन है. Gemini Google का Gemini इंटरनेट से डायरेक्ट कनेक्ट होकर लेटेस्ट और रियल-टाइम जानकारी दे सकता है. अगर आपको न्यूज़, डेटा अपडेट या रिसर्च से जुड़े काम करने हैं, तो Gemini आपके लिए सही रहेगा. Claude Anthropic का Claude लंबी और जटिल बातचीत संभालने में माहिर है. ये बड़े डॉक्यूमेंट को समझने, समरी बनाने और स्ट्रक्चर्ड डेटा देने में अच्छा है. अगर आपका काम डिटेल एनालिसिस से जुड़ा है, तो Claude बेहतर साबित हो सकता है. अगर आपको क्रिएटिव और भाषा से जुड़े टास्क चाहिए तो ChatGPT चुनें. लेटेस्ट जानकारी और फैक्ट्स तो Gemini बढ़िया है. गहरे विश्लेषण और लंबे कंटेंट के लिए Claude का इस्तेमाल करें. आखिर में, आपके काम की जरूरत के हिसाब से AI मॉडल चुनना सबसे समझदारी होगी.

सोने से पहले की ये 5 आदतें दिलाएंगी तरक्की और समृद्धि

जीवन में सफल होना हर कोई चाहता है। और हर कोई यह भी जानता है कि सफलता पानी है तो मेहनत से नहीं बचा जा सकता। लेकिन कई बार सिर्फ मेहनत करने से भी कुछ हाथ नहीं लगता। आप खुद भी अपने आस-पास कई लोगों को पाएंगे जो मेहनत तो खूब करते हैं लेकिन उन्हें सफल दूर-दूर तक नहीं कहा जा सकता। दरअसल जीवन में कुछ करना है तो प्रॉपर प्लानिंग की भी जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में इसी सफलता के सूत्र का जिक्र किया है। उन्होंने कुछ छोटी-छोटी आदतों के बारे में लिखा, जिन्हें आज भी यदि जीवन में उतार लिया जाए तो सफलता और धन दोनों आपके हिस्से आ सकते हैं। आचार्य की बताई इन बातों को रात में सोने से पहले फॉलो करें और अपने जीवन में पॉजिटिव बदलाव देखें। दिन कैसा गया, इसपर विचार करें आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने कर्मों का हिसाब रखता है, वो जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता। इसलिए रोजाना आपने दिन भर में क्या किया, इसका ब्यौरा आपके पास जरूर होना चाहिए। रात में जब भी सोने जाएं, तो कुछ देर जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। क्या कुछ गलतियां आपने की, उनसे क्या सीखा और दिन को बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकते थे। ऐसे आप आने वाले दिन की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे। अपने ज्ञान का विस्तार करें सोने से पहले कुछ देर अपना समय किताबों के साथ बिताएं। आधा घंटा या कम से कम बीस मिनट भी मिनट भी, कोई अच्छी किताब पढ़ें। कुछ ऐसा जो आपके ज्ञान में वृद्धि करे। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन होता है। ऐसे में अगर सफल और धनवान बनना है तो ज्ञान के विस्तार की ओर ध्यान दें। अगले दिन की योजना बनाएं अगला दिन बेहतर और प्रोडक्टिव हो, इसके लिए पहले से ही प्रॉपर प्लानिंग करना जरूरी है। इसलिए रात में सोने से पहले ही एक मोटा-मोटा खाका अपने मन में तैयार कर लें कि आने वाला दिन आप कैसे बिताने वाले हैं। दिन के कुछ खास एजेंडा सेट करें। खासतौर से सुबह क्या करना है; पहले से ही डिसाइड कर लें। इस तरह आपका अगला दिन प्रोडक्टिव होगा और अपने गोल समय पर अचीव कर पाएंगे। अपने लक्ष्य के बारे में सोचें आजकल जिसे विजुलाइजेशन कहा जाता है, वो आचार्य चाणक्य ने सालों पहले अपनी नीति में बता दिया था। आचार्य कहते हैं कि व्यक्ति का मन हमेशा इसके लक्ष्य पर सधा हुआ होना चाहिए। जिसके आगे अपना लक्ष्य एकदम तय है, वो भविष्य में कभी भटकता नहीं और सफलता भी उसे जरूर मिलती है। इसलिए रात में सोने से पहले कुछ देर अपने लक्ष्य के बारे में सोचें। सोचकर देखें कि आपने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है तो उस वक्त आप कैसा महसूस करेंगे। ये बातें आपको और मेहनत के मोटिवेट करेंगे और आपके ब्रेन को भी सफलता के लिए रिप्रोग्राम करेंगी। सकारात्मक सोच से करें दिन समाप्त रात में सोते हुए कभी भी नेगेटिव विचार अपने मन में ना लाने दें। रात में जब आप कुछ नेगेटिव सोचते हैं, तो चीजें और भी ज्यादा नकारात्मक होने लगती हैं। इसलिए दिन की एंडिंग हमेशा हैप्पी रखें। सोने से पहले कुछ पॉजिटिव सोचें। आपकी लाइफ में जो भी कुछ अच्छा है, उसे याद करें और हर चीज के लिए शुक्रिया की भावना रखें। इस तरह आपको नींद भी अच्छी आएगी और जीवन को ले कर आपका नजरिया भी सकारात्मक होगा।  

2027 में आने वाली है तबाही? AI की भविष्यवाणी ने बढ़ाई दहशत, रहस्यमयी शख्स की चेतावनी

नई दिल्ली जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारे कई कामों को आसान बना दिया है वहीं इसके खतरनाक पहलुओं को लेकर बड़ी चेतावनियां भी दी जाने लगी हैं। गूगल के पूर्व एग्जीक्यूटिव मो गावदत ने AI के भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले 15 साल इंसानियत के लिए नरक जैसे साबित होंगे और इसका बुरा दौर साल 2027 से शुरू होगा। AI खत्म करेगा नौकरियां, बढ़ेगी असमानता मो गावदत ने 'The Diary of a CEO' पॉडकास्ट में कहा कि AI सबसे पहले उन नौकरियों को खत्म करेगा जो पढ़ाई, स्किल और डिग्री पर आधारित हैं (व्हाइट कॉलर जॉब्स)। उन्होंने अपनी खुद की कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी AI आधारित कंपनी जो पहले 350 लोगों से चलती थी अब सिर्फ 3 लोगों से चल रही है। उनके अनुसार AI का फायदा सिर्फ अमीर और ताकतवर लोग ही उठा पाएंगे। आम लोगों की नौकरियां छिन जाएंगी जिससे मिडिल क्लास खत्म हो जाएगा और समाज में एक बड़ा विभाजन पैदा होगा। लोग खो देंगे जीवन का उद्देश्य गावदत ने चेतावनी दी कि जब लोगों की नौकरियां जाएंगी तो वे न सिर्फ अपनी आजीविका बल्कि जीवन का उद्देश्य भी खो देंगे। इससे लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा, अकेलापन बढ़ेगा और समाज में तनाव पैदा होगा। उनका कहना है कि अगर आज सरकारें और समाज AI को लेकर ज़रूरी कदम नहीं उठाते हैं तो आने वाले सालों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। हालांकि गावदत ने उम्मीद की किरण भी दिखाई। उन्होंने कहा कि यह बुरा दौर 2040 तक चलेगा उसके बाद AI के ज़रिए एक नया युग शुरू होगा। इस युग में लोग बोरिंग कामों से मुक्त होकर प्यार, सहयोग और रचनात्मकता से भरे जीवन की ओर बढ़ेंगे लेकिन यह तभी मुमकिन होगा जब आज से ही सही कदम उठाए जाएं।

Grok के Spicy Mode से जुड़ा नया खतरा, साइबर अपराधियों की नई चाल

नई दिल्ली Elon Musk की AI कंपनी के एक फीचर के बाद से सोशल मीडिया पर बवाल मचा है. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इससे देश में एडल्ट कंटेंट बढ़ेंगे और Sextortion जैसे क्राइम को भी हवा मिलेगी. सिर्फ एक फोटो से xAI का ये फीचर किसी की भी अश्लील फोटो तैयार कर देगा.  Grok AI पर इस फीचर को Spicy Mode नाम दिया है, जिसने आते ही कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हैरानी की बात ये है कि ये फीचर एवेलेबल करा दिया गया है और 700 रुपये की मंथली सब्सक्रिप्शन भी है. 700 रुपये में GrokAI का पेड सब्सक्रिप्शन मिलता है. Spicy Mode असल में Grok Imagine फीचर का हिस्सा है और यह एक AI-पावर्ड इमेज और वीडियो जनरेशन टूल है. यह फीचर SuperGrok या X Premium+ सब्सक्रिप्शन के साथ iOS ऐप पर दिया गया है.   Grok के Spicy Mode फीचर को लेकर उठने वाली चिंताएं लाज़मी हैं. असल में इस फीचर की मदद से यूजर्स ना सिर्फ प्रॉम्प्ट देकर एडल्ट कंटेंट बनाने की सुविधा मिलेगी बल्कि किसी पुरानी फोटो या किसी दूसरे शख्स की फोटो का भी गलत इस्तेमाल कर सकेंगे.  Deepfake जैसा खतरनाक Spicy Mode दरअसल, बीते साल Deepfake फोटो और वीडियो की वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था. यहां तक कि ये मामले सेलिब्रिटी तक पहुंच गए थे, जहां रश्मिका मंदाना का एक फेक वीडियो काफी सुर्खियों में रहा था.  क्या Grok Spicy Mode भारत में उपलब्ध है? हां, भारत में Grok Spicy Mode मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल शर्तों के साथ करना होगा. अब अगर कोई शख्स Spicy Mode की मदद से किसी लड़की का फोटो अपलोड करता है और उसको Spicy Mode में कंवर्ट करने को कहता है तो यह पूरी तरह से गैर कानूनी काम है.  प्राइवेसी का उल्लंघन  जानकारी के लिए बता देते हैं कि इस एडल्ट कंटेंट जनरेट करना उस व्यक्ति की प्राइवेसी का उल्लंघन है और गैर कानूनी भी है. विक्टिम चाहे तो फोटो या वीडियो बनाने वाले के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज करा सकते हैं. xAI ने क्लियर कर दिया है कि Spicy Mode का मिसयूज कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है.  xAI की पॉलिसी लेकिन बहुत सीमित  xAI ने Spicy Mode में कुछ मॉडरेशन लगाए हैं, जैसे पब्लिक फिगर्स यानी सेलिब्रिटी आदि का एक्सप्लिसिट कंटेंट जनरेट नहीं होता. हालांकि प्राइवेट इंडिविजुअल्स के फोटो अपलोड किए जा सकते हैं, जिससे इस फीचर के मिसयूज होने का खतरा है. प्राइवेसी को सेफ रखने का क्या है तरीका?  xAI में फेस रिकग्निशन और आईडेंटिटी वेरिफिकेशन टूल्स का यूज किया जा रहा है. इससे पब्लिक फिगर्स की फोटो को एडल्ट कंटेंट में कंवर्ट नहीं कर पाएंगे. यहां यूजर्स चाहें तो कंटेंट की रिपोर्ट भी कर सकते हैं. इसके लिए xAI ने एक टीम तैयार की है, जो इन शिकायतों को सुनेगी और सॉल्व करेगी.  ग्लोबल पॉलिसी होने की वजह से परेशानी  xAI दुनिया के कई देशों में काम करता है और सभी देशों के अपने अलग-अलग नियम और कानून है. ऐसे में xAI के लिए ग्लोबल लेवल पर पॉलिसी लागू करना मुश्किल हो जाता है. हालांकि अगर कोई देश या स्थानीय अथॉरिटी कंप्लेंट करती हैं तो X उस पर एक्शन लेता है. Spicy Mode बड़े खतरे में डाल सकता है भारत में किसी की मर्जी के खिलाफ जाकर उसकी फोटो को एडल्ट तस्वीर में बदलना गैरकानूनी है. भारत में इसके लिए कई नियम-कानून भी हैं. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत धारा 354C और धारा 509 के तहत केस दर्ज किया जा सकता है. साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 66E, धारा 67, धारा 67A के तहत केस दर्ज कराया जा सकता है. 

शाकाहारी भी पा सकते हैं पूरा पोषण

मांसाहारियों को काफी हद तक उनके भोजन से पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती हैं। लेकिन इस मामले में कई बार शाकाहारी पीछे छूट जाते हैं। कई ऐसे पोषक तत्वों की इनमें कमी पाई जाती है। ऐसा नहीं है कि शाकाहारी भोजन से पूर्ण पोषण नहीं पा सकते, बस जरूरत होती है अपने भोजन को सही अनुपात और तरीके से लेने की। प्रोटीन का पोषण महिलाओं को प्रतिदिन 46 ग्राम और पुरुषों को 56 ग्राम प्रोटीन हर दिन आवश्यक होता है। वैसे यह मात्रा व्यक्ति की उम्र, हाइट और वजन पर निर्भर करती है। ये हैं प्रोटीन के स्रोतः एक कप साबुत अनाज जैसे ज्वार या बार्ली जैसे अनाज में 18 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है, एक कप टोफू में 18 से 20 ग्राम प्रोटीन, काबुली मटर, मटर और सोयाबीन में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, एक कप बीन्स में लगभग 15 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है साथ ही दालों में भी बड़ी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, दही पचाने में काफी आसान होता है और यह शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है। विटामिन डी का पोषण कमजोर मांसपेशियां और खराब बोन डेंसिटी विटामिन डी की डिफिशिएंसी के प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। लेकिन इस विटामिन की कमी से बच्चों में अस्थमा, वृद्धावस्था में कॉग्नेटिव इम्पेयरमेंट, इंटोलरेंस और मल्टीपल स्केलरोसिस की समस्या भी हो सकती है। वैसे इन समस्याओं को समय रहते सुधारा जा सकता है। कितनी मात्रा में चाहिए 1-70 साल के बीच की उम्र वालों को 15 माइक्रोग्राम प्रतिदिन की आवश्यकता होती है। इससे अधिक उम्र वालों को प्रतिदिन 20 माइक्रोग्राम की जरूरत होती है। ये हैं विटामिन डी के स्रोतः सोया से तैयार उत्पाद जैसे टोफू और सोया बड़ी, ओट्स, मशरूम, सूरज की रोशनी, ऑरेंज जूस, फोर्टिफाइड अनाज विटामिन डी के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। विटामिन बी12 का पोषण इस विटामिन की कमी से एनीमिया, नर्व डैमेज, थकान और खराब स्मरणशक्ति की परेशानियां हो सकती हैं। विटामिन बी12 से रक्त के निर्माण और कोशिकाओं के डिविजन में मदद मिलती है। कितनी मात्रा में चाहिए वयस्कों को 1.9-2.4 माइक्रोग्राम की जरूरत होती है। वहीं गर्भवतियों को 2.6 माइक्रोग्राम, स्तनपान करा रही महिलाओं को 2.8 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 की आवश्यकता प्रतिदिन होती है। ये हैं विटामिन बी 12 के स्रोतः चीज, अंडे, दही, व्हे पावडर, फोर्टिफाइड अनाज, लो फैट दही, ड्राय फ्रूट्स एवं नट्स इसके कुछ प्रमुख स्रोत हैं।  

विंडोज के लिए बेस्टी हैं ये फ्री एंटीवायरस प्रोग्राम

अगर आप विंडोज कम्प्यूटर यूजर हैं तो आपको एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ेगी। विंडोज के तमाम सुरक्षा दावों के बावजूद अपडेशन के दौरान कोई न कोई वायरस आपके कम्प्यूटर में आ ही जाता है। यदि आपके कम्प्यूटर में एक अच्छाद एंटी वायरस प्रोग्राम हो तो यह उस सुरक्षित रखता है। एक अच्छा एंटी वायरस न केवल वायरस वाली फाइलो को रोकता है बल्कि नए-नए वायरसों से निपटने के लिए अपडेशन भी इंस्टॉशल करता रहता है। जब भी आप नया कम्प्यूटर खरीदते हैं तो डीलर आपको एंटी वायरस प्रोग्राम खरीदने के लिए भी कहता है। हालांकि अधिकांश यूजर फ्री एंटी वायरस प्रोग्राम डाउनलोड करना पसंद करते हैं। जिसके साथ एंटी मालवेयर प्रोग्राम भी मिल जाता है। यूजर्स से मिले फीडबैक और एंटी वायरस की क्षमताओं के आधार पर हम आपको कुछ ऐसे प्रोग्राम्सि की जानकारी दे रहे हैं, जो विंडोज की सुरक्षा के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं: एवेस्टी 2015 फ्री एंटीवायरस एवेस्टी एक आसान एंटीवायरस प्रोग्राम है। जो काफी आसान तरीके से यूजर को समस्याओं की जानकारी देता है। यह वायरस काफी आसान है और वायरस लिस्ट के अनुसार अपनी डेफिनेशन को अपडेट करता रहता है। इसमें अनाउंसमेंट को साइलेंट भी किया जा सकता है। पांडा फ्री एंटीवायरस 2015 एवेस्टम की ही तरह पांडा भी वायरस प्रोटेक्शान के मामले में काफी अच्छार एंटी वायरस प्रोग्राम माना जाता है। इसका इंटरफेस देखने में तो आकर्षक है, एवेस्टं की तरह लेकिन यूजर फ्रेंडली नहीं है। इसमें एक अच्छा फीचर है और वो है यूएसबी वैक्सीइन। इस फंक्शैन पेन ड्राइव से आने वाले इंफेक्शीन और वायरस से आपके कम्यूाना टर को बचाता है। बिटडिफेंडर एंटी वायरस फ्री एडिशन बिटडिफेंडर की खासियत है कि यह प्रोग्राम डिफॉल्टस तरीके से बैकग्राउंड में चलता रहता है। यह यूजर को तब तक किसी भी तरह से परेशान नहीं करता है, जब तक कि उसे कोई इंफेक्शंन या दूसरा एंटी वायरस प्रोग्राम न मिले। यदि आपका पीसी वायरस इंफेक्टेड हो ऊपर बताए गए वायरस तभी कारगर साबित होंगे, जब उन्हेंह बिना किसी इंफेक्शेन के इंस्टॉसल किया गया हो। यदि इंफेक्शंन के बाद इंस्टॉिल किया जाएगा तब भी ये कारगर तो होंगे, लेकिन उस समय एंटीवायरस के बजाय मालवेयर ज्याकदा उपयोगी होता है।  

फेस वॉश करते हुए ना करें ये गलतियां

अगर आप बिना सोचे-समझे लापरवाही के साथ जब तब अपना चेहरा धोते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान। ज्यादा चेहरा धोने से भी आपकी स्किन जल्दी एज करेगी। दिनभर में दो बार से ज्यादा चेहरा ना धोएं। हां! अगर वर्कआउट करते हैं तो पोस्ट-वर्कआउट एक बार धोना ठीक है। साबुन हटा दें। यह आपकी स्किन के नैचरल ऑइल खींच लेता है और इरिटेशन भी पैदा करता है। अगर स्किन सेंसिटिव है तो नॉन-सोप क्लेंजर यूज करें। ऐसे क्लेंजर चुनें जिनमें ग्रीन-टी जैसे इंग्रेडिएंट्स हों जिससे आपकी स्किन सॉफ्ट और स्मूद बनी रहेगी। अगर आपकी स्किन ऑइली है तो सैलिसैलिक एसिड वाला फेस वॉश यूज करें। एक्सफोलीएटर यूज करने से आपकी स्किन का टेक्स्चर और टोन सुधरता है। जैसे-जैसे उम्र ढलती जाती है हमारे स्किन के वो एन्जाइम्स जो नैचरल एक्सफोलीएटर होते हैं, वो कम होते जाते हैं। इसलिए कॉम्प्लेक्शन रफ और डल हो जाता है। रात में सोने से पहले एक्सफोलिएट करें। उस वक्त स्किन रिन्युअल मोड में होती है और नए स्किन सेल्स बनाती है। ध्यान रखें कि हफ्ते में दो बार से ज्यादा एक्सफोलिएट नहीं करें। मेकअप लगाने के बाद रात में देर हो जाने पर बिना चेहरा धोए नहीं सोना चाहिए। इससे आपका कॉम्प्लेक्शन हमेशा के लिए बिगड़ सकता है। मेकअप पोर्स पूरी तरह से बंद कर देता है। आंखों का मेकअप उतारना भी बेहद जरूरी है वरना इन्फेक्शन का रिस्क रहता है। सर्दियों में इस बात का ज्यादा ख्याल रखें क्योंकि तब स्किन सबसे ज्यादा ड्राय होती है। गर्म पानी आपकी स्किन और ज्यादा ड्राय कर देता है। चेहरा सिंक में धोएं शॉवर में नहीं। ऐसे में आप गुनगुना या ठंडा पानी यूज कर सकते हैं। मेकअप हटाने के लिए या जब आप जल्दी में हों तो क्विक क्लेंजिंग के लिए फेशियल वाइप्स अच्छे हैं, लेकिन इन्हें अपने रेग्युलर क्लेंजर की जगह यूज नहीं करें। पोर्स की अंदर तक सफाई के लिए घर पर स्क्रब और क्लेंजर ही यूज करें।