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रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका AI को कर रहा है युद्ध के नए हथियार में तब्दील

नई दिल्ली अमेरिका अब साइबर वॉर को पूरी तरह बदलने जा रहा है। वह AI एजेंट्स बना रहा है जो दुश्मनों के नेटवर्क में अपने आप घुसकर हमला करेंगे। इस साल सरकार ने एक गुप्त स्टार्टअप पर लाखों डॉलर खर्च किए हैं। यह कंपनी दुश्मन देशों पर एक साथ सैकड़ों हमले करने की क्षमता विकसित कर रही है। यह तकनीक इतनी तेज है कि हफ्तों का काम कुछ मिनटों में हो जाएगा। वर्जीनिया की एक छोटी कंपनी है ट्वेंटी। इसे XX भी कहते हैं। US साइबर कमांड ने इसे 12.6 मिलियन डॉलर तक का कॉन्ट्रैक्ट दिया। नेवी से भी 240,000 डॉलर का रिसर्च कॉन्ट्रैक्ट मिला। कंपनी में काम करने वालों का बैकग्राउंड क्या? कंपनी की वेबसाइट कहती है कि वह पुराने काम को आसान बनाएगी। हफ्तों का मैनुअल काम अब ऑटोमेटिक हो जाएगा। सैकड़ों टारगेट पर एक साथ ऑपरेशन चलेगा। यह अमेरिका और उसके दोस्तों के साइबर युद्ध को बदल देगा। ट्वेंटी की टीम में सबके पास सैन्य या खुफिया एजेंसियों का अनुभव है। CEO जो लिन अमेरिकी नेवी रिजर्व में रहे हैं। वह पालो आल्टो नेटवर्क्स में प्रोडक्ट हेड थे। वहां उन्होंने सरकारी ग्राहकों को नेटवर्क की कमजोरियां बताईं। CTO लियो ओल्सन अमेरिकी आर्मी में सिग्नल इंटेलिजेंस ऑफिसर थे। वाइस प्रेसीडेंट इंजीनियरिंग स्काइलर ओनकेन ने साइबर कमांड और आर्मी में 10 साल से ज्यादा काम किया। गवर्नमेंट रिलेशंस हेड एडम हॉवर्ड हाल ही में ट्रंप प्रशासन की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ट्रांजिशन टीम में थे। AI के क्षेत्र में क्या करती है यह कंपनी? फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि यह तो स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्वेंटी कंपनी क्या कर रही है। लेकिन इसके इसके नौकरी के विज्ञापनों से साफ हो गया कि वह क्या बना रही है। 'ऑफेंसिव साइबर रिसर्च का डायरेक्टर' की पोस्ट पर बैठा शख्स साइबर हमले के नए रास्ते ढूंढेगा, AI से चलने वाले ऑटोमेशन टूल्स बनाएगा। 'AI इंजीनियर' के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी क्रू AI जैसे ओपन सोर्स टूल्स इस्तेमाल करेंगे। ये टूल्स कई AI एजेंट्स को एक साथ काम करने देते हैं। 'एनालिस्ट' की नौकरी के लिए ‘पर्सोना डेवलपमेंट’ का जिक्र है। यानी फेक ऑनलाइन अकाउंट बनाना, जो दुश्मन के खेमे में घुसकर जानकारी चुराए या हमला करे। यह तकनीक सोशल इंजीनियरिंग पर बेस्ड है। क्या नामी AI कंपनियों का इस्तेमाल भी कर रहा अमेरिका? रिपोर्ट में यह भी दावा है कि संभव है कि अमेरिका OpenAI, एंथ्रोपिक या एलन मस्क की xAI का भी इस्तेमाल कर रहा हो। रक्षा मंत्रालय ने इन तीनों को 200 मिलियन डॉलर तक के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। यह ‘फ्रंटियर AI’ प्रोजेक्ट के लिए है। लेकिन कोई कंपनी नहीं बता रही कि वह क्या बना रही है। ट्वेंटी का फायदा यह है कि वह एक साथ सैकड़ों टारगेट पर हमला करने की तकनीक बना रही है। यह पुरानी तकनीकों से कहीं आगे है। रक्षा के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल हो रहा AI का इस्तेमाल अभी ज्यादातर रक्षा में होता है। इस हफ्ते फोर्ब्स ने बताया कि इजरायली स्टार्टअप टेंजाई OpenAI और एंथ्रोपिक के मॉडल को बदलकर सॉफ्टवेयर में कमजोरियां ढूंढ रही है। लेकिन उसका मकसद हैकिंग नहीं, बल्कि सुरक्षा जांच है। यानी AI अभी बचाव में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे हमले का हथियार बना रही हैं। अमेरिका बनाम चीन अमेरिका चुपके से AI को साइबर युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बना रहा है। ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे तेज, सस्ता और बड़े पैमाने पर करने जा रही हैं। चीन भी पीछे नहीं है। आने वाले सालों में साइबर हमले इंसानों से नहीं, AI एजेंट्स से होंगे।

मोबाइल फोटोग्राफी अपग्रेड करें: स्मार्टफोन से DSLR जैसी फोटो लेने के बेहतरीन उपाय

इन दिनों लॉन्च होने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन्स में बेहतर कैमरा दिया जाता है। कई स्मार्टफोन्स में तो डीएसएलआर की तरह ही प्रोफेशनल मोड्स दिए जाते हैं। लेकिन बेहतर कैमरा होने के बावजूद आपको बेहतर तस्वीरें क्लिक करने में परेशानी आ सकती है। आज हम आपको कुछ ऐसे स्मार्ट तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप भी डीएसएलआर क्वालिटी की तस्वीरें क्लिक कर सकते हैं। कलर एडजस्ट करना तस्वीर क्लिक करने से पहले आप कैमरे के व्हाइट बैलेंस ऑप्शन में जाकर इसका कलर एडजस्ट कर लें। कई बार लो लाइट में तस्वीर लेते समय हमे कलर करेक्शन करना जरूरी होता है नहीं तो हमारे मन के मुताबिक तस्वीरे हम क्लिक नहीं कर पाते हैं। ब्राइटनेस कंट्रोल करना कलर के साथ ही ब्राइटनेस कंट्रोल करना भी उतना ही जरूरी है। ज्यादा रोशनी की वजह से कैमरे से ली गई तस्वीर काफी चमकीला दिखाई देता है जो कि आपकी आखों को अच्छा नहीं लगता है। इसके लिए प्रोफेशनल मोड में कम रोशनी में तस्वीर क्लिक करने के लिए शटर स्पीड और ISO को कम से कम 400 रखना होगा तभी आप बेहतर तस्वीर क्लिक कर सकते हैं। हाथ को स्टेबल रखें डीएसएलआर में स्टेब्लाइजर दिया होता है जो कैमरे को स्थिर रखने में मदद करता है लेकिन स्मार्टफोन में स्टेब्लाइजर नहीं दिया होता है जिसकी वजह से फोन में ली गई तस्वीर के हिलने का डर रहता है। हाथ के हिल जाने की वजह से तस्वीर ब्लर या धूंधली दिखाई देती है। हमेशा मैनुअल या प्रोफेशनल मोड में खींचे तस्वीरें अगर आप बेहतर तस्वीर क्लिक करना चाहते हैं तो कैमरा ऐप को मैनुअल या फिर प्रोफेशनल मोड में ही इस्तेमाल करें। इससे आपके फोन से क्लिक की हुई तस्वीर बेहतर दिखाई देती है। फिल्टर का करें इस्तेमाल कैमरा में अच्छी तस्वीर क्लिक करने के लिए आपको फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी है। बिना फिल्टर के तस्वीर क्लिक करने पर तस्वीरें खराब हो सकती हैं।  

अल्जाइमर का खतरा: शुरुआती संकेतों की पहचान अब संभव नई तकनीक से

नई दिल्ली  क्या कोई बीमारी अपने लक्षण दिखने से कई साल पहले ही पकड़ी जा सकती है। अल्जाइमर के मामले में अब यह संभव होता दिखाई दे रहा है। शोधकर्ताओं ने ऐसा उन्नत मॉडल तैयार किया है, जो बीमारी का जोखिम लक्षण आने से लगभग 10 वर्ष पहले ही बता सकता है। यह खोज मेडिकल साइंस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि समय रहते रोकथाम और उपचार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। क्या है यह नया भविष्यवाणी मॉडल? अमेरिकाके वैज्ञानिकों ने एक प्रेडिक्शन मॉडल विकसित किया है, जो कई प्रमुख कारकों का विश्लेषण कर अल्जाइमर या हल्की संज्ञानात्मक हानि का खतरा बताता है। यह मॉडल व्यक्ति के मस्तिष्क स्वास्थ्य की जाँच कर लंबे समय तक होने वाली संज्ञानात्मक गिरावट का अनुमान लगाता है। इस मॉडल में शामिल प्रमुख कारक उम्र और लिंग आनुवांशिक जोखिम (APOE e4 वेरिएंट) मस्तिष्क में एमिलॉयड प्रोटीन का स्तर PET स्कैन की रिपोर्ट इन सभी संकेतों के आधार पर यह उपकरण किसी व्यक्ति के 10 वर्षों या पूरे जीवनकाल में बीमारी के खतरे का आकलन करता है। 5,858 लोगों के डेटा पर आधारित शोध यह अध्ययन द लैन्सेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कुल 5,858 प्रतिभागियों के लंबे समय से एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण किया, जो Mayo Clinic Study of Aging से लिया गया था। ध्यान रखने योग्य बातें     APOE e4 जीन वाले लोगों में अल्जाइमर का खतरा अधिक पाया गया।     महिलाएं, पुरुषों की तुलना में जीवनभर हल्की संज्ञानात्मक हानि या अल्जाइमर के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।     PET स्कैन में यदि एमिलॉयड स्तर अधिक मिले, तो डिमेंशिया या स्मृति हानि का जोखिम भी बढ़ जाता है। कैसे काम करता है यह उपकरण? PET स्कैन मस्तिष्क में जमा एमिलॉयड प्रोटीन की पहचान करता है, जो अल्जाइमर के शुरुआती बदलावों का मुख्य संकेत है। नया मॉडल इसी जानकारी को उम्र, आनुवांशिक जोखिम और अन्य कारकों के साथ मिलाकर एक स्पष्ट जोखिम प्रोफाइल तैयार करता है। यह मॉडल बताने में सक्षम है कि अगले 10 वर्षों में व्यक्ति को हल्की संज्ञानात्मक हानि होगी या नहीं। उसके पूरे जीवनकाल में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना कितनी है। इससे डॉक्टर समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप, दवाइयां, ब्रेन एक्सरसाइज, शारीरिक सक्रियता या जीवनशैली सुधार की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टरों और रोगियों के लिए बड़ी उपलब्धि शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल को एक नई दिशा दे सकती है। जिस तरह कोलेस्ट्रॉल देखकर हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन किया जाता है, उसी प्रकार यह मॉडल भी मस्तिष्क स्वास्थ्य का व्यक्तिगत पूर्वानुमान देने में सक्षम होगा। हालांकि अभी यह शोध चरण में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्जाइमर की शुरुआती पहचान और रोकथाम में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण? अल्जाइमर का अभी कोई पूर्ण उपचार नहीं है, लेकिन यदि शुरुआती जोखिम समय से पहले पता चल जाए तो बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है, जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं, मरीज और परिवार मानसिक रूप से तैयार हो सकते हैं।  

Vivo X300 सीरीज़ जल्द भारत में लॉन्च: कैमरा फीचर्स बनेंगे बड़ी खासियत

नई दिल्ली वीवो की फ्लैगशिप X300 सीरीज का आगाज इंडिया में होने जा रहा है। कंपनी ने बताया है कि 2 दिसंबर को वह भारत में vivo X300 सीरीज के स्‍मार्टफोन पेश करेगी। अभी 2 फोन लाए जाने की बात सामने आ रही है। इनमें vivo X300 और vivo X300 प्रो मॉडल शामिल हैं। प्रो मॉडल को ड्यून ब्राउन और फैंटम ब्‍लैक कलर्स में लाया जाएगा। बेस मॉडल यानी एक्‍स300 को समिट रेड, फैंटम ब्‍लैक और मिस्‍ट ब्‍लू कलर्स में लॉन्‍च किया जाएगा। वीवो एक्‍स सीरीज कंपनी की प्रीमियम सीरीज है। चीन में इसे पहले ही लॉन्‍च किया जा चुका है। ग्‍लोबल लॉन्‍च भी शुरू हो गए हैं। अब भारत की बारी है। दोनों फोन में 200 मेगापिक्‍सल कैमरा अब तक आई जानकारी के अनुसार, Vivo X300 सीरीज के दोनों मॉडलों में 200 मेगापि‍क्‍सल का मेन रियर कैमरा दिया जाएगा। एक्‍स300 मॉडल में मिलने वाला 200 एमपी का मेन कैमरा, सैमसंग एचपीबी सेंसर होगा। उसके साथ 50 मेगापिक्‍सल का अल्‍ट्रा-वाइड कैमरा और 50 मेगापिक्‍सल का LYT602 पेरिस्‍कोप टेलिफोटो कैमरा दिया जाएगा और टेल‍िमैक्रो को भी सपोर्ट करेगा। वहीं, प्रो मॉडल में मेन कैमरा 50 मेगापिक्‍सल का LYT828 सेंसर होगा। उसके अलावा 50 मेगापिक्‍सल का अल्‍ट्रा-वाइड कैमरा दिया जाएगा। तीसरा कैमरा 200 मेगापिक्‍सल का सैमसंग एचपीबी सेंसर होगा। दोनों ही फोन्‍स में कंपनी ने 50 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा देने की तैयारी की है। वनप्‍लस 15 से बड़ा सेल्‍फी कैमरा वीवो एक्‍स 300 सीरीज में हाल में लॉन्‍च हुए वनप्‍लस 15 स्‍मार्टफोन से बड़ा सेल्‍फी कैमरा मिलने वाला है। वनप्‍लस 15 में 32 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा दिया गया है, जबकि वीवो एक्‍स 300 सीरीज में 50 मेगापिक्‍सल सेल्‍फी कैमरा मिलने जा रहा है। मीडियाटेक का डाइमेंसिटी 9500 प्रोसेसर वीवो एक्‍स300 सीरीज को चीन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 9500 प्रोसेसर के साथ लॉन्‍च किया गया था। भारत में भी यह स्‍मार्टफोन इसी चिपसेट के साथ आएंगे। इन दिनों स्‍मार्टफोन कंपनियां फोटोग्राफर किट को काफी प्रमोट कर रही हैं। वीवो ने भी एक्‍स300 सीरीज के साथ प्रो मॉडल के लिए किट उतारी है। यह फोन की कैमरा क्षमता को बेहतर बनाती है। हालांकि अगर भारत में यह किट लाई जाती है तो बाकी देशों की तरह ही इसे अलग से बेचा जाएगा। माना जा रहा है कि दिसंबर से ही वीवो एक्‍स300 सीरीज खरीदारी के लिए उपलब्‍ध हो जाएगी। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन बेचा जाएगा।

DPDP Rule 2025: भारतीय यूजर्स के डेटा प्रोटेक्शन से जुड़ी पूरी जानकारी

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम 2025 को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इसके साथ ही, अब DPDP 2023 एक्ट पूरी तरह से लागू हो गया है। ये नए नियम यूजर्स को कंपनियों द्वारा इक्ट्ठा और संसाधित किए जा रहे उनके व्यक्तिगत डेटा की पूरी जानकारी देगें। साथ ही, इन नियमों से यूजर्स को यह भी पता चलेगा कि कंपनियां उनके डेटा का उपयोग कैसे करेंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 11 अगस्त, 2023 को संसद में DPDP एक्ट पास हुआ था। यह बताता है कि भारत में लोगों का डिजिटल डाटा कैसे सुरक्षित और सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। सरकार नए DPDP 2025 नियमों को चरणबद्ध तरीके से रोलआउट करेगी। इसके लिए सरकार ने एक रूपरेखा तैयार की है। इनका उद्देश्य नागरिकों को उनके डेटा पर अधिक कंट्रोल देना और डिजिटल स्पेस में उनकी प्राइवेसी की सुरक्षित करना है। आइये, इन नियमों के बारे में डिटेल में जानते हैं। डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्यूशियरी का क्या है काम? DPDP नियम 2025, डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्यूशियरी की भूमिकाओं को बताता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डेटा प्रिंसिपल उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसका डेटा इकट्ठा होता है। वहीं, डेटा फिड्यूशियरी कोई भी कंपनी, संगठन या व्यक्ति होता है, जो व्यक्तिगत डेटा को इकट्ठा और संसाधित करता है और साधनों का निर्णय लेता है। नए नियम में यूजर्स को अपने डेटा पर मिलेगा ज्यादा कंट्रोल DPDP नियम 2025 बताते हैं कि सरकार और कोई निजी संस्था को व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा को कैसे इक्ट्ठा किया जाना चाहिए, कैसे संसाधित, संरक्षित और संभालना चाहिए। नए नियमों के तहत यूजर्स का पर्सनल डेटा सेव करने वाली सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सभी कंपनियां को बताना होगा कि वे यूजर्स का कौन-कौन सा डेटा सेव कर रही हैं और वह उनका कैसे इस्तेमाल करेंगी। नए नियम लागू होने से भारतीय यूजर्स को अपने डेटा पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और उनकी प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी। डेटा उल्लंघनों के लिए करने होंगे उपाय नियमों के अनुसार, डेटा को इकट्ठा और संसाधित करने वाली कंपनियों को डेटा उल्लंघनों को रोकने के लिए उचित सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। इसमें व्यक्तिगत डेटा का एन्क्रिप्शन, मास्किंग, ऑबफस्केशन या टोकनाइजेशन शामिल हैं। यूजर्स को तुरंत देनी होगी चेतावनी उल्लंघन की स्थिति में, डेटा फिड्यूशियरी को प्रभावित हुए यूजर्स को तुरंत सूचित करना होगा कि क्या हुआ, संभावित जोखिम क्या हैं, क्या कदम उठाए गए हैं और किससे संपर्क करना है। उन्हें 72 घंटे के भीतर डेटा संरक्षण बोर्ड को भी सूचित करना होगा। बच्चों के डेटा के लिए चाहिए होगी माता-पिता की परमिशन 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के डेटा को संसाधित करने के लिए माता-पिता की सहमति होना जरूरी है। नए DPDP 2025 नियमों के अनुसार, डेटा फिड्यूशियरी को किसी भी बच्चे के डेटा को इकट्ठा करने या संसाधित करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके लिए उनके माता-पिता की परमिशन हो। माता-पिता का होगा वेरिफिकेशन संस्था को यह वेरिफाई करना होगा कि सहमति देने वाला व्यक्ति वास्तव में माता-पिता या अभिभावक हैं। इसके लिए वेरिफाइड वर्चुअल टोकन का उपयोग करना होगा। नए नियम से अब कंपनियां माता-पिता की पहचान और उम्र को कन्फर्म किए बिना बच्चे के डेटा को संसाधित नहीं कर सकती हैं। सभी प्रावधान अभी नहीं होंगे लागू बता दें कि सरकार ने DPDP 2025 नियमों को जारी तो कर दिया है, लेकिन सभी प्रावधान अभी से प्रभावी नहीं होंगे। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अधिनियम की धारा 1 के उप-धारा (2), धारा 2, धारा 18 से 26, धारा 35, 38, 39, 40, 41, 42, 43, और धारा 44 की उप-धारा (1) और (3) तुरंत लागू हो गई हैं। वहीं, धारा 6 की उप-धारा (9) और धारा 27 की उप-धारा (1) का खंड (d) एक साल बाद लागू होंगे। धारा 3 से 5, धारा 6 की उप-धारा (1) से (8) और (10), धारा 7 से 10, धारा 11 से 17, धारा 27 (धारा 27 की उप-धारा (1) के खंड (d) को छोड़कर), धारा 28 से 34, 36, 37 और धारा 44 की उप-धारा (2) 18 महीने बाद लागू होंगे DPDP Rule 2025 (1) यह नया नियम भारतीय नागरिकों को उनके डिजिटल फुटप्रिंट पर अधिक कंट्रोल देता है। अब कंपनियां आपके डेटा का उपयोग कैसे करेंगी, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी जाएगी। बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी होगी।

AI Mode के साथ Google हुआ और स्मार्ट, आपकी जरूरत समझकर खुद करेगा शॉपिंग आसान

नई दिल्ली Google ने लोगों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग को और भी आसान और मजेदार बनाने के लिए अपने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मोड में एक नया अपडेट जारी किया है। जल्द ही Black Friday जैसी बड़ी सेल और छुट्टियां आने वाली हैं। शादियों का सीजन भी शुरू हो गया है। ऐसे में यह बड़ा अपग्रेड लोगों को उनकी पसंद की चीजें खरीदने में मदद करेगा। अब आप एआई मोड से शॉपिंग के लिए सजेशन मांग सकते हैं। आपको बस बताना होगा कि आप कहां के लिए, किस तरह का प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं। आपको अपनी पसंद और जरूरत बतानी है और एआई मोड आपकी शॉपिंग को आसान बना देगा। इसके लिए आपको बार-बार फिल्टर लगाने या फिर सही कीवर्ड सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Google के ब्लॉग पोस्ट के अनुसार यह सब गूगल के नए AI और एजेंटिक टेक्नोलॉजी की मदद से हो जाएगा। पूरी खबर जानने के लिए नीचे पढ़ें। अब एआई मोड इन सर्च से शॉपिंग करना हुआ आसा ​Google के AI Mode in Search में अब शॉपिंग से जुड़े सवालों के जवाब 'इंटेलिजेंट' तरीके से मिलेंगे। इन जवाबों में प्रोडक्ट की तस्वीरें, कीमत, रिव्यू और स्टॉक की जानकारी भी दी जाएगी। यह सब जानकारी गूगल के शॉपिंग ग्राफ से ली जाएगी, जिसमें 50 अरब से ज्यादा प्रोडक्ट की लिस्टिंग हैं। बस देना होगा एक प्रॉम्प्ट और हो जाएगा काम आप बिना फिल्टर या फिर कीबोर्ड डाले ही बस एक प्रॉम्प्ट देकर गूगल को अपनी पसंद और जरूरत बता सकते हैं। उदाहरण के लिए गूगल के एआई सर्च मोड में जाकर आपको लिखना है कि मुझे अटलांटा की अपनी यात्रा के लिए एक हल्का स्वेटर चाहिए, जो सदाबहार हो और जींस व ड्रेस के साथ पहनने लायक हो। इसके बाद आपके द्वारा दी गई डिटेल के अनुसार प्रोडक्ट और उनकी डिटेल आपके सामने आ जाएगी। प्रोडक्ट्स की कर पाएंगे तुलना इतना ही नहीं, गूगल ने यह भी बताया है कि AI प्रोडक्ट्स की तुलना करने के लिए टेबल भी बना सकता है। इन टेबलों में रिव्यू से मिली जानकारी भी होगी। उदाहरण के लिए आपको पता चल जाएगा कि मॉइस्चराइजर का त्वचा पर कैसा है। इससे खरीदारों को कई ऑप्शन में से चुनने में आसानी होगी। Gemini ऐप में मिल रही सुविधा आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह नई सुविधा अब US के यूजर्स के लिए Gemini ऐप में भी उपलब्ध है। इससे वे गिफ्ट आइडिया सोचने से लेकर सीधे ऐप में प्रोडक्ट ब्राउज कर सकेंगे। एजेंटिक AI करेगा ये काम एजेंटिक AI का इस्तेमाल करके लोकल स्टॉक चेक कर सकते हैं। अपने आस-पास के प्रोडक्ट के बारे में सर्च करने पर Let Google Call का ऑप्शन दिखेगा। यह जानकारी आपको ईमेल या टेक्स्ट मैसेज के जरिए भेजी जाएगी। एजेंटिक चेकआउट फीचर भी आ रहा इतना ही नहीं, खरीदारी को और आसान बनाने के लिए गूगल एक एजेंटिक चेकआउट फीचर भी ला रहा है। खरीदार किसी खास प्रोडक्ट को ट्रैक कर सकते हैं, जिसमें साइज और कलर भी शामिल होगा। वे एक बजट भी सेट कर सकते हैं। प्रोडक्ट की कीमत तय रेंज में आएगी तो गूगल आपके फाइनल कन्फर्मेशन के बाद Google Pay का इस्तेमाल करके ऑटोमेटिकली खरीदारी पूरी करने का ऑफर दे सकता है। फायदे अब लोग बिना किसी झंझट के अपनी पसंद की चीजें ढूंढ पाएंगे और खरीद पाएंगे। ये छुट्टियों के मौसम में और जल्द शॉपिंग करने के लिए काफी आसान और अच्छा तरीका है।

उम्र बढ़ने पर लगेगी ‘ब्रेक’? शोध में सामने आई संभावित एंटी-एजिंग दवा

सोचिए, अगर इंसान की उम्र 70–80 नहीं बल्कि 150 साल तक हो जाए! यह साइंस फिक्शन जैसा लगता है, लेकिन चीन के वैज्ञानिक इसे हकीकत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। Shenzhen की Lonvi Biosciences लैब एक ऐसी एंटी-एजिंग दवा पर काम कर रही है, जो दावा करती है कि यह बढ़ती उम्र को धीमा करने के साथ-साथ कई उम्र-संबंधी बीमारियों को भी रोक सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ता PCC1 (Procyanidin C1) नाम के एक नैचुरल कंपाउंड पर आधारित दवा विकसित कर रहे हैं—जो सीधे अंगूर के बीज से निकाला जाता है। क्या है PCC1 कंपाउंड? PCC1 यानी Procyanidin C1 एक पॉलीफेनोल कंपाउंड है, जिसे वैज्ञानिक senolytic compound कहते हैं। इसका काम शरीर में जमा Senescent cells को हटाना है—यानी वे कोशिकाएं जो बूढ़ी हो चुकी हैं और शरीर के लिए सिर्फ जंक बन जाती हैं। यही कोशिकाएं उम्र बढ़ने, सूजन, कमजोरी और कई आयु-संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह होती हैं। PCC1 शरीर की ‘जंक सेल्स’ को साफ करके नई कोशिकाओं को बेहतर काम करने में मदद करता है। अब तक की रिसर्च क्या कहती है? Lonvi Biosciences ने PCC1 दवा को अभी इंसानों पर टेस्ट नहीं किया है, लेकिन चूहों पर किए गए प्रयोगों में इसके उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले हैं। रिसर्च में पाया गया कि इस कंपाउंड के इस्तेमाल से चूहों में बूढ़ी और बेकार कोशिकाओं की संख्या कम हुई, जिससे शरीर में होने वाली लगातार सूजन में भी कमी आई। इसके साथ ही उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर हुआ और एजिंग प्रोसेस की रफ्तार धीमी पाई गई। दिलचस्प बात यह रही कि जिन चूहों को PCC1 दिया गया, उनकी मांसपेशियों की ताकत उम्र बढ़ने के बाद भी बनी रही, यानी उम्र बढ़ने के बावजूद कमजोरी कम दिखी। कुछ प्रयोगों में तो चूहों की आयु 30% से अधिक बढ़ने के संकेत मिले—जो वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खोज है। क्या इंसानों पर भी असर होगा? फिलहाल ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि PCC1 इंसानों पर भी वैसा ही असर दिखाएगा जैसा चूहों पर देखा गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि जानवरों पर मिले परिणाम इंसानों में बिल्कुल वैसे दोहराए जाएं, यह ज़रूरी नहीं है, क्योंकि मानव शरीर कहीं ज्यादा जटिल होता है। इसके अलावा, दवा मानव शरीर में सुरक्षित होगी या नहीं, कितनी प्रभावी होगी, क्या साइड इफेक्ट होंगे। इन सभी सवालों के जवाब के लिए लंबे क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत पड़ती है। इसलिए यह कहना कि इंसान 150 साल तक जी सकेंगे, अभी सिर्फ थ्योरी और लैब-लेवल का उत्साह है। क्यों लग सकता है इस दवा को अभी कई साल? इस दवा के बाजार में आने में अभी कई साल इसलिए लग सकते हैं क्योंकि इसके सामने कई बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी चुनौतियां हैं। सबसे पहले, इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल बेहद लंबे, महंगे और जटिल होते हैं, जिसमें किसी भी दवा की सुरक्षा और उसके प्रभाव को साबित करने में वर्षों लग जाते हैं। इसके बाद दवा को मंजूरी दिलाने के लिए FDA और WHO जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की कठोर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो अपने आप में काफी समय लेने वाला चरण है। इसके अलावा वैज्ञानिक बताते हैं कि उम्र बढ़ना एक अकेला कारण नहीं, बल्कि हजारों जैविक प्रक्रियाओं का परिणाम है। इसलिए सिर्फ जंक सेल्स हटाने से बुढ़ापा पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। साथ ही, PCC1 के लंबे समय तक इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स के बारे में भी कोई डेटा मौजूद नहीं है, जिसे समझने और टेस्ट करने में बहुत समय लगेगा। PCC1 क्यों है चर्चा में? इसके बावजूद PCC1 चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह उन शुरुआती दवाओं में से एक है जिसका सीधा लक्ष्य शरीर से बूढ़ी और खराब कोशिकाओं को हटाना है।यानी उम्र बढ़ने की जड़ पर काम करना। यह न सिर्फ इन जंक कोशिकाओं को कम करती है बल्कि शरीर की नई कोशिकाओं के कामकाज को भी बेहतर बनाती है, जिससे एजिंग प्रोसेस पर सकारात्मक असर देखने की उम्मीद बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह कंपाउंड इंसानों में भी असर दिखाता है, तो यह Future of Longevity Science यानी लंबी उम्र की विज्ञान यात्रा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। चीन का बड़ा प्लान चीन एंटी-एजिंग और Life-Extension Technology में भारी निवेश कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां “Immortality Islands” जैसे बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जहां- बायोटेक, जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंटी-एजिंग रिसर्च और लंबी उम्र की दवाएं सब पर तेज़ी से काम हो रहा है। PCC1 उसी बड़े “Longevity Mission” का हिस्सा है। क्या 150 साल जीना संभव होगा? वर्तमान वैज्ञानिक स्थिति में 150 साल तक जी पाना संभव नहीं है। अभी तक कोई भी दवा या तकनीक इंसानों की उम्र को इतनी बड़ी मात्रा में बढ़ाने में सफल नहीं हुई है। लेकिन भविष्य में क्या हो सकता है: अगर PCC1 जैसे कंपाउंड इंसानों पर भी उतना ही प्रभाव दिखाते हैं जितना चूहों पर दिखा है, तो एंटी-एजिंग दवाओं का एक नया दौर शुरू हो सकता है। इससे उम्र बढ़ने की रफ्तार कम करना या जीवनकाल कुछ हद तक बढ़ाना संभव हो सकता है। फिलहाल यह रिसर्च उत्साह और उम्मीद तो जगाती है, लेकिन हकीकत बनने में अभी समय है।

AI इनसाइक्लोपीडिया Grokipedia का नया नाम जल्द, एलन मस्क ने पुष्टि की

मुंबई  टेक दिग्गज एलन मस्क ने इस बात की जानकारी दी है कि AI-संचालित इनसाइक्लोपीडिया Grokipedia का नाम अस्थायी है, जिसे उनकी कंपनी आगे बदल सकती है. गौरतलब है कि xAI ने पिछले महीने 'सच, संपूर्ण सच और केवल सच' प्राप्त करने के उद्देश्य से AI-जनित  इनसाइक्लोपीडिया लॉन्च किया था. Grokipedia के शुरुआती लॉन्च के कुछ ही हफ़्तों बाद, एलन मस्क ने इस बात की पुष्टि की है कि भविष्य में इस प्लेटफ़ॉर्म का नाम बदल दिया जाएगा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि, "जब Grokipedia काफ़ी अच्छा हो जाएगा (अभी काफ़ी समय बाकी है), तो हम इसका नाम बदलकर एनसाइक्लोपीडिया Galactica कर देंगे. उन्होंने आगे बताया कि, "यह ऑडियो, इमेज और वीडियो सहित सभी ज्ञान का एक ओपन-सोर्स संग्रह होगा. अलेक्जेंड्रिया लाइब्रेरी का विज्ञान-कथा संस्करण बनाने में मदद के लिए @xAI से जुड़ें!" एलन मस्क ने Grokipedia के साथ मिलकर मानव जाति को मंगल और उससे भी आगे ले जाने के अपने मिशन में भी हिस्सा लिया. उन्होंने आगे कहा कि, "इसकी प्रतियां पत्थर पर उकेरी जाएंगी और चांद, मंगल और उससे भी आगे भेजी जाएंगी. इस बार, यह खोई नहीं जाएगी." नाम बदलने के प्रयास के साथ, एलन मस्क एक बार फिर विज्ञान कथा के प्रति अपने प्रेम को दिखा रहे हैं. द इनसाइक्लोपीडिया Glactica एक काल्पनिक, आकाशगंगा-व्यापी संदर्भ पुस्तक है, जिसे आइज़ैक असिमोव की फाउंडेशन सीरीज में प्रस्तुत किया गया है. बता दें कि एलन मस्क पहले भी कई बार असिमोव की प्रशंसा कर चुके हैं और सभ्यता, तकनीक और मानवता के दीर्घकालिक अस्तित्व के बारे में अपनी सोच को आकार देने का श्रेय लेखक को दे चुके हैं. यहां तक कि एलन मस्क का Grok AI चैटबॉट भी 'द हिचहाइकर गाइड टू द गैलेक्सी' से अपना व्यक्तित्व संदर्भ लेता है. कंपनी ने Grok के लिए अपनी घोषणा पोस्ट में कहा कि चैटबॉट का उद्देश्य 'कुछ हद तक बुद्धिमता और विद्रोही स्वभाव के साथ सवालों के जवाब देना' है, जैसा कि इस उपन्यास में काल्पनिक गाइड में है. क्या है Grokipedia? यह AI-संचालित इनसाइक्लोमीडिया, एलन मस्क के xAI द्वारा विकसित चैटबॉट, Grok की पावर पर चलता है. विकिपीडिया के विपरीत, Grokipedia के लेख मानव संपादकों द्वारा नहीं लिखे जाते हैं. इसके बजाय, ग्रोक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) इन पृष्ठों पर दी गई जानकारी की 'फैक्ट चेक' करता है, और यूजर इनमें कोई सीधा एडिट नहीं कर सकते हैं. हालांकि, Grokipedia के लॉन्च के तुरंत बाद, कई यूजर्स ने बताया कि प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद अधिकांश सामग्री लगभग Wikipedia से हूबहू कॉपी की गई थी.

बिना क्लीनर ऐप के खाली करें स्मार्टफोन का स्टोरेज, जानें तरीका

नई दिल्ली स्मार्टफोन यूजर्स को अक्सर फोन के स्टोरेज फुल होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वे फोन में मौजूद फालतू फोटोज और विडियोज को डिलीट कर स्पेस बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह समस्या फिर से सामने आ जाती है। वहीं, कुछ यूजर ऐसे भी हैं जो थर्ड पार्टी स्टोरेज क्लीनर ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कुछ दिन पहले तक इन ऐप्स का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं थी, लेकिन हाल में आई एक रिपोर्ट में इन्हें खतरनाक बता दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐसे क्लीनर ऐप हैं जो यूजर डेटा की चोरी करने के साथ ही डिवाइस को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसी ट्रिक्स के बारे में बता रहे हैं जिनसे आप बिना क्लीनर ऐप्स की मदद लिए अपने फोन के स्टोरेज को खाली कर सकते हैं। कैश क्लियर करें ज्यादातर ऐंड्रॉयड ऐप्स यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए कैश डेटा का इस्तेमाल करते हैं। कैश डेटा समय की बचत तो करता है, लेकिन यह फोन के इंटरनल स्टोरेज में काफी जगह ले लेता है। अगर इसे समय-समय पर क्लियर न किया जाए तो यह स्टोरेज कम करने के साथ ही फोन की स्पीड को भी धीमा कर देता है। बता दें कि किसी ऐप के सही ढंग से काम करने के लिए कैश डेटा की जरूरत नहीं पड़ती। यह केवल यूजर की सहूलियत के लिए होता है। ऐसे में बेहतर होगा कि जब भी आपको अपने फोन के स्टोरेज को खाली करने का ख्याल आए तो सबसे पहले आप कैश डेटा को डिलीट करें। यह तुरंत आपके फोन में स्टोरेज को बढ़ा देगा। हर ऐप यूजर को बेस्ट एक्सपीरियंस देने के लिए अपना कैश बनाता है। आप अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में दिए गए स्टोरेज ऑप्शन में जाकर हर ऐप के कैश डेटा को क्लियर कर सकते हैं। बैकअप हुए गूगल फोटोज को करें डिलीट फोन में क्लिक की गई सभी फोटोज का गूगल फोटो ऑटोमैटिकली बैकअप ले लेता है। यह अच्छा भी है क्योंकि इससे यह पक्का हो जाता है कि आपके फोटो हमेशा सेफ रहेंगे और फोन खोने या बदलने की स्थिती में भी आप उन्हें ऐक्सेस कर सकेंगे। हालांकि, कई यूजर यह गलती करते हैं कि वे फोटो के बैकअप होने के बाद भी उसे डिवाइस पर सेव रखते हैं। ऐसा करने से फोन के स्टोरेज में कमी आती है। बेहतर होगा कि आप गूगल पर स्टोर हुए फोटोज को सिस्टम मेमरी से डिलीट कर दें। अगर आपको किसी कॉन्टेंट को तुरंत ऐक्सेस नहीं करना है तो आप गूगल फोटोज में दिए गए 'Free up space' ऑप्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से सारे फोटो फोन से तो डिलीट हो जाएंगे लेकिन क्लाउड पर सेव रहेंगे। फालतू ऐप्स को करें डिलीट हम में कई ऐसे यूजर हैं जिन्हें फोन में ढेरों ऐप रखने की आदत होती है। इन ऐप्स की संख्या 100 तक भी हो सकती है। मजेदार बात यह है कि इनमें से आधे ऐप ऐसे होते हैं जिनकी जरूरत केवल इंस्टॉल किए जाने के वक्त होती है। वहीं, कुछ ऐप्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम महीनों से इस्तेमाल नहीं कर रहे। फोन के स्टोरेज के लिए अच्छा रहेगा कि इन फालतू ऐप्स की पहचान कर उसे डिलीट कर दिया जाए। डाउनलोड फाइल्स को करें डिलीट सभी स्मार्टफोन एक डाउनलोड फोल्डर के साथ आते हैं। इस फोल्डर को आमतौर पर 'My Files' में जाकर देखा जा सकता है। समय बीतने के साथ ही इसमें कई सारी डाउनलोड की हुई फाइलें सेव हो जाती है। इनमें से कुछ ही ऐसी होती होंगी जिनकी जरूरत डाउनलोड किए जाने के कुछ दिन बाद होती होगी। फोन के स्टोरेज का खाली करने के लिए बेहतर होगा कि उन फाइल्स को डिलीट कर दिया जाए जिसकी जरूरत न हो। जंक फाइल्स को हटाएं अगर ऊपर बताए गए तरीकों के बाद भी आपके फोन का स्टोरेज पूरा तरह फ्री नहीं हो रहा तो बेहतर होगा कि आप डिवाइस के जंक फाइल्स को डिलीट करें। जंक फाइल्स को डिलीट करने के लिए आप गूगल फाइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। जंक फाइल्स वे फाइलें होती हैं जो न तो कैश में दिखती हैं और ना हीं डाउनलोड्स में। नजर न आने के बावजूद भी ये स्मार्टफोन के स्टोरेज को कम करने का काम करती हैं। गूगल फाइल्स फोन में मौजूद ड्यूप्लिकेट फाइल्स को डिटेक्ट कर लेता है और यूजर को बताता है कि कौन से ऐप ज्यादा स्टोरेज ले रहे हैं। एसडी कार्ड का करें इस्तेमाल अगर आपके स्मार्टफोन का इंटरनल स्टोरेज आपकी जरूरत के हिसाब से कम है, तो बेहतर होगा कि आप एक एसडी कार्ड का इस्तेमाल करें। आजकल लगभग सभी फोन माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट के साथ आते हैं।  

Honor का नया स्मार्टफोन हुआ तैयार: मिलेगा 200MP कैमरा और विशाल 8000mAh बैटरी

नई दिल्ली Honor अपनी नई 500 सीरीज को लेकर काफी समय से चर्चा में है. इस सीरीज के दो स्मार्टफोन Honor 500 और Honor 500 Pro जल्द ही बाजार में आने वाले हैं. लॉन्च से पहले ही Honor 500 Pro की कई अहम जानकारियां सामने आ गई हैं, जिनसे साफ पता चलता है कि यह फोन अपने दमदार कैमरा, बेजोड़ बैटरी और हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट के साथ मार्केट में काफी हलचल मचाने वाला है. एक मशहूर चाइनीज टिप्सटर Digital Chat Station ने इस फोन के लगभग सभी मुख्य फीचर्स सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं. उनके अनुसार, फोन में एक मजबूत R-angle मेटल फ्रेम दिया जाएगा, जो इसे प्रीमियम फील देगा. डिस्प्ले Honor 500 Pro में 6.55-इंच का फ्लैट OLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है.     रिज़ॉल्यूशन: 1,264 × 2,736 पिक्सल     रिफ्रेश रेट: 120Hz     ये स्क्रीन गेमिंग और स्क्रॉलिंग दोनों को काफी स्मूद बनाएगी. परफॉर्मेंस और पावर: Snapdragon 8 Elite के साथ जबरदस्त स्पीड फोन में Honor कंपनी Qualcomm Snapdragon 8 Elite चिपसेट दे सकती है, जो फ्लैगशिप लेवल परफॉर्मेंस देता है. इसके साथ:     16GB तक RAM     1TB तक स्टोरेज जैसे ऑप्शन मिलेंगे. यानी भारी गेम, बड़े फाइल्स और मल्टीटास्किंग सब कुछ बिना किसी लैग के चलेगा. Tipster ने ये भी बताया है कि इसमें बेहतर एनर्जी मैनेजमेंट के लिए C1, RF और E2 चिप्स का इस्तेमाल किया जाएगा. कैमरा: 200MP का सुपर प्राइमरी सेंसर Honor 500 Pro का सबसे बड़ा हाइलाइट इसका कैमरा है. फोन में: 200MP का मुख्य कैमरा सेंसर मिलने वाला है, जिससे हाई-डेफिनिशन फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव काफी शानदार होगा. हालांकि टिपस्टर का कहना है कि प्रोटोटाइप के मुकाबले कैमरा परफॉर्मेंस थोड़ा कम रह सकता है, क्योंकि इसमें स्टैकिंग तकनीक का अभाव है. लेकिन फिर भी 200MP सेंसर अपने आप में एक बड़ी ताकत है. बताया जा रहा है कि कैमरा डिज़ाइन (डेको) को Apple की तरह कोल्ड-कार्विंग प्रोसेस से बनाया जाएगा, जिससे इसका लुक प्रीमियम और आकर्षक होगा. सिक्योरिटी और बैटरी: दोनों ही टॉप-क्लास फोन में 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर दिया जा सकता है, जो सामान्य सेंसर की तुलना में तेज़ और ज्यादा सटीक होता है. अब बात करते हैं बैटरी की, जो इस फोन को बाकी सभी से अलग करती है:     8000mAh की बड़ी बैटरी (सिलिकन टेक्नोलॉजी के साथ)     80W फास्ट वायर्ड चार्जिंग     50W वायरलेस चार्जिंग इतनी बड़ी बैटरी के साथ फोन दिनभर की हेवी यूज़ में भी आराम से चल सकता है. और फास्ट चार्जिंग के साथ बैकअप की टेंशन भी नहीं. Honor 500 Pro बनेगा नया पावरफुल फोन? स्पेसिफिकेशन देखकर साफ है कि Honor 500 Pro एक प्रीमियम फीचर वाली, पावरफुल परफॉर्मेंस देने वाली डिवाइस होगी.     बड़ा डिस्प्ले     200MP कैमरा     8000mAh बैटरी     Snapdragon 8 Elite इन सभी को एक फोन में मिलना इसे अपने सेगमेंट में बड़ा गेम-चेंजर बना सकता है.