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बच्चों की नाजुक त्वचा की देखभाल: अपनाएँ ये ज़रूरी टिप्स

आपके लिए अपनी स्किन का ध्यान रखना जितना जरूरी है उतना ही या फिर शायद उससे भी ज्यादा जरूरी है बच्चे की स्किन का ध्यान रखना। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों की स्किन बेहद कोमल और मुलायम होती है और उन्हें अधिक देखभाल की जरूरत होती है। बचपन में ही अगर उनकी स्किन को सही देखभाल मिलेगी तो बड़े होते-होते उनकी स्किन और भी बेहतर हो जाएगी। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप बच्चे की स्किन पर केमिकल वाले प्रॉडक्ट्स लगाना शुरू कर दें। बच्चे के लिए भी बनाएं स्किनकेयर रुटीन बच्चे के लिए भी एक प्रॉपर स्किनकेयर रुटीन बनाएं ताकि आगे चलकर भविष्य में उन्हें स्किन से जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या न हो। वैसे भी बच्चों को घर के बाहर रहना ज्यादा पसंद होता है इसलिए बच्चों की स्किन सनलाइट, धूल, गंदगी, पलूशन से ज्यादा एक्सपोज होती है। यही वजह है कि बच्चों की स्किन का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ बेहद आसान टिप्स जिन्हें फॉलो कर आप भी अपने बच्चे की स्किन को हमेशा सॉफ्ट बनाए रख पाएंगी… हर दिन नहाना है जरूरी बेसिक हाइजीन का ध्यान रखना भी जरूरी है। लिहाजा बच्चे में हर दिन नहाने की आदत जरूर विकसित करें। माइल्ड साबुन या बॉडी क्लेन्जर और माइल्ड शैंपू लगाकर बच्चे का हर दिन नहाना जरूरी है। यह आदत हाइजीन और स्किन दोनों के लिहाज से बेस्ट है। फेस वॉश करना हर तरह का साबुन बच्चे की स्किन के लिए सही नहीं होता। लिहाजा बच्चे के लिए ऐसा फेसवॉश खरीदें जो माइल्ड हो और उनकी स्किन को सूट करे। हर रात सोने से पहले गुनगुने पानी से फेस वॉश करने की आदत बच्चे में डिवेलप करें। इससे बच्चे के चेहरे पर जमा धूल-मिट्टी और गंदगी पूरी तरह से साफ हो जाएगी। मॉइश्चराइजिंग नहाने के बाद स्किन को हाइड्रेट करने यानी स्किन की नमी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है मॉइश्चराइजेशन। लिहाजा स्किन को ड्राई और पपड़ीदार होने से बचाने के लिए दिनभर में एक बार बच्चे की स्किन पर मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। खूब पानी पिएं बच्चे दिन भर उछल कूद करते रहते हैं। घर के अंदर भी और बाहर भी इसलिए बच्चों में खूब सारा पानी पीने की आदत विकसित करें ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो और स्किन भी ड्राई होने से बच जाए।  

प्रेग्नेंसी में ज्यादा मोबाइल यूज़ से बचें: विशेषज्ञों ने बताई ये वजहें

इसमें कोई शक नहीं कि मोबाइल फोन जो अब स्मार्टफोन बन चुका है हमारी जिंदगी का ऐसा अहम हिस्सा बन चुका है जिसे हम अपनी जिंदगी से अब अलग नहीं कर सकते। मोबाइल के बिना अपनी लाइफ की कल्पना करना भी शायद मुश्किल ही लगे। टॉडलर्स यानी छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स और बुजुर्गों तक… हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन रहता है और बड़ी संख्या में लोगों की इसकी लत भी लग चुकी है। इस लिस्ट में गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन मोबाइल के एक्सेस यूज का न सिर्फ आप पर बल्कि गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है। कैसे, यहां जानें… बच्चे में बिहेवियर से जुड़ी दिक्कतें मोबाइल फोन की स्क्रीन और उससे निकल रही ब्राइट ब्लू लाइट को लंबे समय तक देखते रहने से न सिर्फ आपकी आंखों को नुकसान होता है। बल्कि हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो अगर प्रेग्नेंट महिला लंबे समय तक मोबाइल फोन यूज करे तो होने वाले बच्चे में बिहेवियर से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने डेनमार्क में इसको लेकर एक स्टडी की जिसमें प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद मोबाइल फोन यूज करने का बच्चे के व्यवहार और इससे जुड़ी समस्याओं के बीच क्या लिंक ये जानने की कोशिश की गई। हाइपरऐक्टिविटी और बिहेवियरल इशू का शिकार इस स्टडी में ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया जिनके बच्चे 7 साल के थे। स्टडी के दौरान महिलाओं को एक क्वेश्चेनेयर दिया गया था जिसमें उनके बच्चे की हेल्थ और बिहेवियर के साथ-साथ वे खुद फोन का कितना इस्तेमाल करती हैं, इससे जुड़े सवालों के जवाब देने थे। स्टडी के आखिर में यह बात सामने आयी कि जिन महिलाओं के बच्चे प्रसव से पूर्व और प्रसव के बाद स्मार्टफोन के प्रति एक्सपोज थे यानी जिन मांओं ने प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलिवरी के बाद भी मोबाइल यूज ज्यादा किया उनके बच्चे हाइपरऐक्टिविटी और बिहेवियरल इशूज का शिकार थे। प्रेग्नेंट महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान – मोबाइल फोन पर बहुत ज्यादा बात करने की बजाए टेक्स्ट भेजें या लैंडलाइन का उपयोग करें – प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत ज्यादा सोशल मीडिया को स्क्रॉल न करें – जहां तक संभव हो हैंड्स फ्री किट यूज करें ताकरि सिर और शरीर के नजदीक रेडिएशन को कम किया जा सके।  

ChatGPT 5.1 आया नए अपडेट के साथ: जवाब होंगे और सटीक, फ्री यूजर्स को भी मिलेगा फायदा

नई दिल्ली OpenAI ने नए ChatGPT 5.1 को लॉन्च कर दिया है और कंपनी इसे रोलआउट करना भी शुरू कर चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नया अपडेट अभी तक सबसे नैचुरल लगने वाला वर्जन माना जा रहा है। वहीं कंपनी की मानें तो GPT 5.1 न सिर्फ ज्यादा समझदार है बल्कि पहले से ज्यादा मानवीय, गर्मजोशी से भरा और आपकी बातों के टोन के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है। GPT 5.1 अब आसान सवालों के बेहद तेजी से जवाब दे सकता है और मुश्किल सवालों के जवाब सोचकर और बेहतर जानकारी के साथ उपलब्ध कराता है। इसके अलावा इस अपडेट में ChatGPT में पर्सनैसलिटी स्टाइल्स को भी जोड़ा गया है। इसकी मदद से यूजर अपनी पसंद के मुताबिक ChatGPT की आवाज, अंदाज और बातचीत करने के तरीके को चुन पाएंगे। क्या कुछ मिलेगा नया? ChatGPT 5.1 में सबसे बड़ा बलवा उसकी समझने की क्षमता में किया गया है। अब यह आपके सवाल, मूड और बात करने के तरीके को बेहतर तरीके से पहचान सकतेा है। इसका इंस्टेंट मॉडल ज्यादा बातचीत करने वाला गर्मजोशी से भरा और नैचुरल महसूस होता है। ChatGPT 5.1 नॉर्मल बातचीत और आसान सवालों के जवाब तुरंत देता है और जरूरत पड़ने पर ही Thinking मॉडल का इस्तेमाल करता है। क्या है पर्सनैसलिटी स्टाइल फीचर? इस अपडेट में ChatGPT में नए पर्सनैसलिटी स्टाइल को शामिल किया गया है। इसकी मदद से अब आप चुन सकते हैं कि ChatGPT आपको कैसा सुनाई दे? उदाहरण के लिए आप ChatGTP 5.1 की सेटिंग्स में जाकर अपनी पसंद के मुताबिक तय कर सकते हैं कि उसके बात करने का तरीका दोस्ताना, प्रोफेशनल, सीधा या मजाकिया हो? इसके लिए कुल 8 पर्सनैसलिटी स्टाइल को जोड़ा गया है। इतना ही नहीं OpenAI ने पुराने स्टाइल्स को भी और बेहतर बनाया है। अब ChatGPT बातचीत के दौरान खुद ही सुझाव भी दे सकता है कि क्या वह अपना टोन बदल दे। क्या फ्री यूजर्स को भी मिलेगा? 4 नवंबर से OpenAI ने ChatGPT Go को भारत में फ्री में उपलब्ध कराया था। इसके बाद आपके मन में सवाल उठ सकता है कि किया ChatGPT का 5.1 वर्जन इन फ्री यूजर्स को भी इस्तेमाल करने को मिलेगा? दरअसल इसे गुरुवार से सभी Pro, Plus, Go और Business यूजर्स के लिए उपलब्ध करवा दिया गया है। OpenAI ने बताया कि यह एक धीरे-धीरे होने वाला रोलआउट प्रोसेस है, ताकि सर्वर पर लोड नियंत्रित रहे। कंपनी का कहना है कि पुरानी GPT-5 मॉडल्स को तीन महीने तक “legacy models” के रूप में रखा जाएगा, ताकि यूजर्स नए और पुराने मॉडल के बीच तुलना कर सकें और आसानी से बदलाव को अपनाएं।

सोशल मीडिया पर बड़ा बदलाव: 16 से कम उम्र के यूज़र्स के अकाउंट होंगे डिलीट

नई दिल्ली सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में 10 दिसंबर से 16 साल से कम उम्र के बच्चे फेसबुक , इंस्टाग्राम , स्नैपचैट, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह फैसला देश के नए ऑनलाइन सेफ्टी नियम के तहत हुआ है। हालांकि, 16 साल के कम आयु वाले बच्चे माता-पिता की सहमति के साथ ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह दुनिया का पहला ऐसा कानून है, जो बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए बनाया गया है। इस नियम का पालन नहीं करने वाली कंपनियों को 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 270 करोड़ रुपये) का जुर्माना लग सकता है। आइये, पूरा मामला जानते हैं। 10 दिसंबर से बंद हो जाएंगे अकाउंट ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के तहत आए इस नियम के अंतर्गत 10 दिसंबर से माता-पिता की सहमति के बिना 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया जाएगा। यह दुनिया का पहला राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध है। इसका मकसद बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से बचाना है। जिन बच्चों के अकाउंट बंद होने वाले हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म पहले एक मैसेज भेज देगा। मैसेज में बच्चों को तीन ऑप्शन दिए जाएंगे। इसमें अपना डेटा डाउनलोड करना, अपनी प्रोफाइल को फ्रीज करना या फिर अकाउंट पूरी तरह से बंद होने देना शामिल होगा। AI की मदद से होगी जांच कंपनियां बच्चों की उम्र का पता लगाने के लिए सीधे आईडी डॉक्यूमेंट मांगने के बजाय AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करेंगी। AI यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार जैसे कि वे क्या लाइक करते हैं, क्या कमेंट करते हैं और कैसे एंगेज करते हैं के आधार पर उनकी उम्र का अनुमान लगाएगा। अगर किसी यूजर को लगता है कि उसकी उम्र गलत तरीके से कम बताई गई है, तो वह एक सेल्फी के जरिए अपनी उम्र वेरिफाई करवा सकता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक के लिए एज-एश्योरेंस टेक्नोलॉजी देने वाली Yoti कंपनी का कहना है कि इस नई प्रक्रिया को समझने में यूजर्स को कुछ हफ्ते लग सकते हैं। अन्य देशों में भी आ सकता है नियम ऑस्ट्रेलिया का यह कानून सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह जरूरी बनाता है कि वे 16 साल से कम उम्र के उन यूजर्स के अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड कर दें, जिनके पास माता-पिता की मंजूरी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून दुनिया भर के लिए एक मिसाल बनेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 तक दूसरे देश भी इसी तरह के कानून अपना सकते हैं।

Sam Altman का बड़ा कदम: OpenAI रोबोटिक्स में ऐपल के Ex-इंप्लॉइज और ATLAS के साथ

नई दिल्ली OpenAI ने हाल ही में अपना पहला Agentic AI ब्राउजर ATLAS लॉन्च किया. इसके तुरंत बाद गूगल के शेयर गिरे और बताया गया कि 150 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हो गया. लेकिन असली कहानी सिर्फ ब्राउजर की नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे की है. OpenAI एक ऐसा मार्केट कैप्चर करने की तैयारी में है जो फिलहाल एग्जिस्ट ही नहीं करता है. Agentic AI अभी भी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन सैम ऑल्टमैन अगले कुछ सालों में इस स्पेस को कैप्चर कर लेंगे और गूगल फिर से पिछड़ सकता है.  लगभग 4 साल पहले जब ChatGPT शुरू हुआ था तब हमने आपको बताया था कि कैसे ये कंपनी गूगल को टक्कर देगी और मोनॉपली तोड़ेगी. अभी कमोबेश वैसा हो चुका है. गूगल सर्च में लगाार गिरावट देखी जा रही है और कंपनी को भारी नुकसान भी हो रहा है. लोगों की डिपेंडेंसी गूगल पर कम हो चुकी है,  Agentic AI – कंप्यूटर खुद से करेगा सबकुछ ATLAS ब्राउजर Google Chrome वाले तमाम फीचर्स देता है, लेकिन साथ ही इसमें दिया गया ऐसिस्टेंट आपके कमांड पर खुद से काम करता है. निश्चित तौर पर ये ब्राउजर गूगल क्रोम को टक्कर देगा.  ATLAS लॉन्च के दूसरे दिन ही OpenAI ने ऐलान किया कि उन्होंने Apple Shortcut बनाने वाली टीम को खरीद लिया यानी उनका अधिग्रहण कर लिया. दरअसल जिस टीम ने ऐपल का बड़ा ऑटोमेशन ऐप Shortcut बनाया था अब वो OpenAI के पास है. इस टीम ने सबसे पहले Workflow बनाया था जिसके बाद ऐपल ने इस टीम को खरीदा और उनसे Shortcut ऑटोमेशन बनवाया था.  मैकबुक में ऑटोमेशन का डीप इंटीग्रेशन करती है Sky टीम  ऐपल की वो टीम जिन्होंने 'शॉर्टकट' बनाया था उन्होंने पहले ही ऐपल छोड़ दिया था. यही टीम SKY AI चला रही थी. Sky की टीम AI पावर्ड नैचुरल लैंगवेज इंटरफेस पर काम कर रही थी. दरअसल ये इंटरफेस भी ऐपल के मैक कंप्यूटर्स के लिए है जो डेस्कटॉप पर आपके एजेंट की तरह काम करता है और यूजर्स इसके जरिए कोडिंग से प्लानिंग तक कर सकते हैं.  जैसे ChatGPT जैसा टूल वेब पर काम करता है उसी तरह Sky मैकबुक में नेटिव लेवल पर काम करता है और बिना यूजर के इंटरवेंशन के खुद से टास्क कंपलीट करता है. उदाहरण के तौर पर आप मैकबुक से सिर्फ Sky के जरिए कोई भी टास्क परफॉर्म करा सकते हैं.  खुद से काम करेगा कंप्यूटर  ये पूरा खेल ऑटोमेशन का है. यानी अब तक कंप्यूटर को आप चलाते हैं, लेकिन फ्यूचर में कंप्यूटर खुद से सबकुछ करेगा आपको बस कमांड देना है. क्या कम्प्यूटिंग का मॉडल वाकई बदलने वाला है? तीन दशक तक हमारा रिश्ता कंप्यूटर से एक ही तरह का रहा. हम क्लिक करते हैं, टाइप करते हैं, और सिस्टम उसका जवाब देता है. Open AI उस व्यवस्था को उलटने की कोशिश कर रहा है. जहां इंसान सिर्फ बताता है कि उसे क्या चाहिए, और सिस्टम खुद सबकुछ संभालता है. यह बदलाव जितना तकनीकी है, उतना ही प्रैक्टिकल भी, क्योंकि डिजिटल दुनिया में समय, ध्यान और नेविगेशन से जुड़ी थकान एक प्रॉब्लम बन चुकी है.  ATLAS और SKY मिल करेंगे धमाल  ATLAS ब्राउजर लॉन्च हो ही चुका है और अब SKY की टीम यानी 12 पूर्व ऐपल इंप्लॉइज भी अब OpenAI के पास है. ओपनएआई ने SKY को इसलिए एक्वायर किया है ताकि ChatGPT जैसे टूल्स सिर्फ चैटबॉट न रहें, बल्कि आपका कंप्यूटर एजेंट की तरह सारे काम खुद कर सके. ओपनएआई का मकसद है, AI को आपके OS, ऐप्स, ब्राउज़र और फाइल्स के अंदर गहराई से इंटीग्रेट करना ताकि आप कोई भी टास्क कहें और AI उसे अंजाम दे दे. Sky टीम, जो ऑटोमेशन में एक्सपर्ट है, अब OpenAI के साथ मिलकर अगले जनरेशन का कंप्यूटिंग मॉडल तैयार कर रही है.  रेस में OpenAI के पीछे क्यों दिख रहा Google? AI रेस में कुछ समय तक के लिए गूगल पिछड़ जरूर गया था, लेकिन अब तेजी से कैचअप कर रहा है. हालांकि अब भी देखें तो ऐसा लगता है कि गूगल लगतार दूसरी AI कंपनियां को टक्कर दे रही हैं जिनमे से एक बड़ा नाम Perplexity का भी है. हाल ही में Perplexity ने Comet एजेंटिक ब्राउजर लॉन्च किया था और तुरंत बाद गूगल ने भी क्रोम ब्राउजर में ऐसिस्टेंट दे दिया. अब मार्केट में OpenAI का ATLAS आ गया है और इसका पूरा नुकसान Google Chrome को होगा. क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट ने भी एजेंटिक AI ब्राउजर लॉन्च किया है जो सीधी टक्कर गूगल को ही देगा.  Open AI में माइक्रोसॉफ्ट ने भी काफी निवेश किया है, इसलिए गूगल के लिए ये पूरा डेवेलपमेंट परेशानी का सबब बन सकता है. इसलिए अगर आपका ऐसा लगता है कि गूगल की मोनोपली कोई तोड़ नहीं सकता तो गलत हैं. गूगल की मोनॉपली ऑलरेडी कई टेक कंपनियां तोड़ रही हैं.  दो साल पहले तक कोई ये नहीं सोच रहा था कि गूगल सर्च को कोई टक्कर दे ही नहीं सकता. लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है और गूगल सर्च का ट्रैफिक हर दिन गिर रहा है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि एजेंटिक AI की रेस में गूगल दूसरों से आगे निकलने के लिए क्या बड़ा करता है. 

स्मार्टवॉच बनी जीवनरक्षक: हादसे के बाद खुद बुलाई एंबुलेंस, पिता की बची जान

इस बात में तो दोराय नहीं कि टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को आसान बनाती है लेकिन कभी-कभी यह जीवनरक्षक का काम भी कर सकती है। दरअसल ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया साइट X पर किया गया है, जिसमें बताया गया है कि ऐपल वॉच ने एक्सीडेंट में बुरी तरह से घायल एक शख्स की जान बचा ली। X पर किए गए पोस्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल जब वह शख्स बेहोश पड़ा था, तो उसकी कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच ने संजीवनी की तरह उसकी जान बचा ली। चलिए डिटेल में जानते हैं कि क्या रहा पूरा मामला? स्मार्चवॉच बनी संजीवनी X पर किए गए पोस्ट के अनुसार एक शख्स को एक्सीडेंट के बाद उसकी स्मार्टवॉच के खास फीचर्स की मदद से बचा लिया गया। जिस समय सड़क पर घायल पड़े उस शख्स के पास कोई नहीं था, तो ऐपल वॉच के फॉल डिटेक्शन फीचर ने दुर्घटना की सूचना घायल शख्स के परिवार वालों और इमरजेंसी सर्विस तक पहुंचाई। इसके बाद वॉच ने ही इमरजेंसी सर्विस को दुर्घटना की सटीक लोकेशन भी शेयर की। इसके बाद स्मार्टवॉच ने इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल शख्स के बेटे को भी अलर्ट मैसेज भेजा। पोस्ट के अनुसार इस मैसेज में लिखा था कि “आपके पिता को एक्सीडेंट हुआ है, मैंने एंबुलेंस बुलाई है।" इसके बाद जब लड़का एक्सीडेंट की लोकेशन पर पहुंचा, तो उसके पिता को पहले ही अस्पतासल पहुंचाया जा चुका था। समय पर इलाज मिल जाने की वजह से उस शख्स की जान बच गई। Apple वॉच के खास फीचर्स दुनिया की टॉप स्मार्टवॉच में से एक ऐपल वॉच में इस तरह के कई इमरजेंसी फीचर्स आते हैं जो मुसीबत के समय में जान बचा सकते हैं। फॉल डिटेक्शन और क्रैश डिटेक्शन जैसे फीचर इन्हीं में से एक है। यह फीचर इस बात का पता लगा सकता है कि कब आप दुर्घटना के शिकार हुए हैं या गिरे हैं। इसके बाद ऐपल वॉच इस चीज को मॉनिटर करती है कि आपने किसी तरह की मूवमेंट की है या नहीं। साथ ही वह आपके दिल की धड़कन और ब्लड ऑक्सीजन आदि के जरिए शरीर के वाइटल साइन चेक करती है। इन तमाम फैक्टर्स के आधार पर वॉच आपको खतरे में पाती है, तो Emergency SOS फीचर एक्टिवेट होता है। इसके बाद लोकल अथॉरिटीज और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को अलर्ट भेजा जाता है। इसके लिए यूजर को वॉच और फोन में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को सेव करना पड़ता है। पहले भी फरिश्ता बनी है ऐपल वॉच यह पहला ऐसा मामसला नहीं है जब ऐपल वॉच ने किसी की जान बचाई हो। हाल ही में भारत में ही ऐसे दो मामले सामने आए थे जहां दिल की धड़कन में किसी तरह की अनियमितता होन के चलते वॉच ने यूजर को अलर्ट किया और समय रहते डॉक्टर की मदद लेने की सलाह दी। इसी तरह विदेशों में भी ऐपल वॉच द्वारा जान बचाने के कई मामले सामने आए हैं और कुछ को ऐपल अपने लॉन्च इवेंट में दुनिया भर के सामने रख भी चुका है।

उच्च रक्तचाप वालों के लिए डाइट अलर्ट: क्या न खाएँ और क्यों?

दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार करीब हर 4 में से 1 व्यक्ति हाई बीपी की समस्या से जूझ रहा है. ब्लड प्रेशर बढ़ने पर हार्ट पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ सकता है. यह समस्या सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं है, कम उम्र में भी हाई बीपी के केस बढ़ रहे हैं. खासकर गलत डाइट, तनाव, कम नींद, मोटापा और एक्सरसाइज की कमी इसके प्रमुख कारण बनते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के खास कारणों में खानपान बहुत बड़ा फैक्टर है. ऐसे में हाई बीपी वालों के लिए डाइट कंट्रोल करना सबसे जरूरी कदम है. सही खानपान से दवा की जरूरत भी कम हो सकती है और ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में आसानी होती है. खाना अगर बार-बार बाहर का, जंक बेस्ड और इंस्टेंट फूड वाला हो तो शरीर में सोडियम और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे बीपी तेजी से ऊपर जाता है. इसलिए हाई बीपी वाले मरीजों को खानपान का ध्यान रखना चाहिए हाई बीपी के मरीजों को कौन सी चीजें नहीं खानी चाहिए? दिल्ली एमसीडी में डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि हाई बीपी वाले लोगों को सबसे पहले ज्यादा नमकीन चीजों से दूरी बनाने की जरूरत होती है. चिप्स, नमकीन स्नैक्स, अचार, पापड़, प्रोसेस्ड मीट, इंस्टेंट नूडल्स, और पैक्ड सूप जैसे आइटम्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. ऐसे फूड ब्लड वेसल्स को सख्त करते हैं और बीपी को तेजी से ऊपर ले जाते हैं. साथ ही, ज्यादा तली-भुनी चीजें, बेकरी प्रोडक्ट्स, मैदा बेस्ड स्नैक्स और हाई शुगर वाली मिठाइयां भी हार्ट पर भार बढ़ाती हैं. रेड मीट और ट्रांस फैट्स वाले फास्ट फूड का नियमित सेवन भी नुकसानदायक है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज जैसे फूड भी हाई बीपी वालों के लिए गलत विकल्प हैं. ऐसे में जितना हो सके, फ्रेश और लो-सोडियम भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है. हाई बीपी वाले क्या खाएं? कम नमक वाला खाना लें. ताजे फल और सब्जियां रोज खाएं. ओट्स, दलिया, मल्टीग्रेन रोटी जैसे फाइबर वाले अनाज लें. लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें. ऑलिव ऑयल, सरसों तेल जैसे हेल्दी ऑयल का इस्तेमाल करें. पानी ज्यादा पीएं, पर्याप्त नींद लें.  

ठंड के मौसम में गर्म पानी से बाल धोने के फायदे और नुकसान

सर्दी के मौसम में कई लोग बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाते हैं. इससे भले ही शरीर को आराम मिलता है, लेकिन यह स्किन और बालों के लिए सही नहीं होता है. एक्सपर्ट से जाने बहुत ज्यादा गर्म पानी से हेयर वॉश के कारण बालों को क्या नुकसान पहुंचता है और सही हेयर केयर के बारे में, जो सर्दी में हमारे लिए मददगार हो सकता है. सर्दी के मौसम में खानपान और कपड़ों से लेकर रहन-सहन हर चीज में बदलाव हो जाता है. इस दौरान नहाने और हेयर वॉश के लिए गर्म पानी का उपयोग किया जाता है. लेकिन कई लोग गर्म पानी से नहाते हैं, इससे शरीर को राहत मिलती है, ठंड से बचाव होता है और थकान कम होती हैं. लेकिन ज्यादा गर्म पानी से नहाना या बाल धोना हमारी स्किन और बालों के लिए कई तरह से नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट हमेसा गुनगुने पानी से नहाने की सलाह देते हैं. गर्म पानी से नहाना से भले ही आपके शरीर को आराम मिलता है. लेकिन इससे बालों को नुकसान पहुंच सकता है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट से कि ज्यादा गर्म पानी से बालों को क्या नुकसान हो सकता है और इसे किस तरह से बचाव किया जा सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? एक्सपर्ट ने बताया कि बाल धोते समय ज्यादा गर्म पानी का उपयोग लंबे समय तक करना बालों और स्कैल्प दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. क्योंकि गर्म पानी बालों में मौजूद नेचुरल ऑयल यानी की सेबम को हटाकर उन्हें ड्राई और कमजोर बना देता है, इसके कारण हेयर फॉल भी हो सकता है. इसके अलावा स्कैल्प पर नमी कम हो जाने के कारण सिर में खुजली, ड्राइनेस और डैंड्रफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.जो लोग बालों को कलर करते हैं, उनके लिए यह और भी ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि गर्म पानी बालों का रंग जल्दी फीका कर सकता है. हेयर केयर टिप्स इन सभी समस्याओं से बचने और बालों को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. सबसे पहले तो सर्दी में बाल धोते समय गर्म पानी की जगह पर हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करना सही रहेगा. माइल्ड शैंपू और कंडीशनर का नियमित रूप से उपयोग करें. तौलिये बालों को रगड़ने की बजाय धीरे-धीरे सुखाएं. इसके साथ ही हफ्ते में 1 से 2 बार बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोने से बचें, ताकि बालों की नमी और नेचुरल चमक बनी रहे. बाल धोने के कुछ घंटे पहले आप तेल लगा सकते हैं. इससे बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है. बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोने सही नहीं माना जाता है. लेकिन उसके तापमान को मैनेज रखना जरूरी है. बहुत गर्म पानी बालों में नेचुरल ऑयल और नमी को छीन लेता है. जिससे बाल ड्राई हो जाते हैं. ऐसे में मॉइस्चराइजिंग के लिए माइड शैंपू और कंडीशनर का उपयोग जरूर करें. बाल पहले से ही फ्रिजी या ड्राई हैं, तो हेयर वॉश से पहले ऑयलिंग करें. अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो सर्दी में भी आपके बाल मजबूत और सॉफ्ट बने रहेंगे. अगर बालों में खुजली, जलन और ड्राइनेस की समस्या ज्यादा हो रही है, तो एक्सपर्ट से इसका बारे में सलाह करें. इसके अलावा अपनी हेयर टाइप के मुताबिक ही प्रोडक्ट्स का उपयोग करना ज्यादा सही रहेगा.

Apple का नया कारनामा: अब iPhone भी पहनेगा मोजे, कीमत ₹20,300

नई दिल्ली ऐपल अपने महंगे प्रोडक्ट्स के लिए काफी मशहूर है। अपनी इस पहचान को कायम रखते हुए ऐपल ने एक खास किस्म का मोजा यानी कि सॉक्स को लॉन्च किया है। कमाल की बात ये है कि इसकी कीमत 13 हजार रुपये से शुरू होकर 20 हजार रुपये तक जाती है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती। इस मोजे या मोजे जैसी एक्सेसरी को आपके लिए नहीं बल्कि आपके iPhone के लिए लॉन्च किया गया है। चलिए इस अजीबो-गरीब एक्सेसरी आईफोन पॉकेट के बारे में डिटेल में जानते हैं। क्या है आईफोन पॉकेट? आईफोन का मोजा या फिर जिसे ऐपल iPhone Pocket बता रहा है एक 3D-निटेड स्ट्रेचेबल फैब्रिक से बनी हुई लग्जरी एक्सेसरी है। यह iPhone को अच्छे से कवर कर लेती है और यह दिखने में ही नहीं अपने काम में भी बेहद खास है। इस एक्सेसरी का फैब्रिक इतना लचीला है कि अपने फोन को इसमें से निकाले बिना ही आप उसकी स्क्रीन की झलक देख सकते हैं। ऐपल ने इसे वियरेबल पॉकेट कहा है, जिसमें अपने iphone को रखकरआप पहनकर इसे कैरी भी कर सकते हैं। कीमत और डिजाइन इससे पहले भी ऐपल ने 2004 में अपने iPod के लिए 29 डॉलर यानी कि 2,400 रुपये का iPod Socks नाम से एक एक्सेसरी लॉन्च की थी। वहीं इसके मुकाबले iPhone Pocket एक लग्जरी प्रोडक्ट है। इसके शॉर्ट-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 149.95 डॉलर या फिर 12,900 रुपये से होती है। वहीं इसके लॉन्ग-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 229.95 डॉलर यानी कि करीब 20,300 रुपये है। बता दें कि ऐपल की इस लेटेस्ट एक्सेसरी को Issey Miyake Studio ने डिजाइन किया है। यह वही टीम है जिसने स्टीव जॉब्स के लिए मशहूर ब्लैक टर्टलनेक बनाया था। iPhone Pocket को बेहद मिनिमल डिजाइन के साथ फ्लेक्सिबल फैब्रिक का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है। इसे आप कंधे, कलाई या हैंडबैग से अटैच करके पहन सकते हैं। किन देशों में मिलेगा ऐपल की ओर से यह साफ किया गया है कि iPhone Pocket एक लिमिटेड एडिशन प्रोडक्ट है। इसे कुछ ही देशों में उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, चीन, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं। iPhone Pocket के रंगों की बात करें, तो इसका शॉर्ट स्ट्रैप वाला मॉडल lemon, mandarin, purple, pink, peacock, sapphire, cinnamon और black जैसे रंगों में खरीदा जा सकेगा। वहीं इसका लॉन्ग स्ट्रैप वाला वेरिएंट सिर्फ sapphire, cinnamon और black कलर में मिलेगा।

Apple ला रहा है iPhone Fold — 24MP कैमरा और एडवांस फीचर्स के साथ होगा सबसे खास

लॉन्च से पहले ही Apple का आने वाला फोल्डेबल स्मार्टफोन चर्चा में बना हुआ है। इसे आईफोन फोल्ड के नाम से लाया जा सकता है। हालिया लीक से पता चला है कि इस फोन में 24MP का अंडर-डिस्प्ले कैमरा सेंसर मिलेगा। अगर यह रिपोर्ट सही हुई तो यह 24MP अंडर डिस्प्ले कैमरे वाला इंडस्ट्री का पहला फोन होगा। इससे पहले भी कई खबरें आई थीं कि ऐपल अपने फोल्डेबल फोन में डिस्प्ले के अंदर कैमरा देगा। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा तकनीक एंड्रॉयड फोन्स में काफी पहले से मौजूद है, लेकिन उनकी इमेज क्वालिटी अक्सर उतनी अच्छी नहीं होती है। इसका कारण उनके लेंस का रेजोल्यूशन कम होना है, जो आमतौर पर 4 से 8MP तक होता है। हालांकि, इस बार ऐपल आईफोन फोल्ड के फ्रंट कैमरे में छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट होंगे। इससे साफ है कि यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा काफी एडवांस होगा। ऐसा लग रहा है कि ऐपल ने लाइट ट्रांसमिशन और इमेज क्वालिटी को बेहतर बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। आइये, फोन की अन्य डिटेल के लिए आगे पढ़ते हैं। एडवांस फीचर के कारण हो सकती है खामियां ऐपल के फोल्डेबल स्मार्टफोन में कई एडवांस फीचर देखने को मिलेंगे। हालांकि, एडवांस फीचर के कारण फोन में कई चीजों की कमी भी हो सकती है। लीक रिपोर्ट्स की मानें तो फोन को कॉम्पैक्ट रखने के लिए OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) और LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) जैसी सुविधाओं को हटाया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OIS, कैमरे को हिलने-डुलने पर भी स्टेबल फोटोज लेने में मदद करता है, जबकि LiDAR गहराई का पता लगाने में काम आता है। ऐपल एनालिस्ट Ming Chi Kuo ने बताया है कि आईफोन फोल्ड में फोन के मुड़े हुए और खुले हुए दोनों ही स्टेट में डुअल-लेंस कैमरा हो सकता है। वहीं, मार्क गुरमन का कहना है कि इस डिवाइस में कुल चार सेंसर होंगे। एक सामने की तरफ, एक अंदर की तरफ और दो पीछे की तरफ। लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, आईफोन फोल्ड में पीछे की तरफ दो 48MP के कैमरे हो सकते हैं। इसके अलावा, फोन में पावर बटन के साथ टच आईडी (फिंगरप्रिंट सेंसर) भी दिया जा सकता है। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा एक बड़ी बात है, क्योंकि यह फोन के डिजाइन को और भी स्लीक बना देगा। डिस्प्ले के नीचे कैमरा होने से फोन का फ्रंट लुक बिना किसी नॉच या पंच-होल के एकदम साफ दिखेगा। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होगा जो फुल-स्क्रीन का एक्सपीरियंस पसंद करते हैं। एंड्रॉयड फोन में अंडर-डिस्प्ले कैमरे का इस्तेमाल तो हुआ है, लेकिन अक्सर उनकी क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं होती। ऐसा इसलिए है, क्योंकि डिस्प्ले की लेयर्स से होकर लाइट को सेंसर तक पहुंचना पड़ता है, जिससे इमेज क्वालिटी पर असर पड़ता है। ऐपल का 24MP का सेंसर और छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं। आईफोन फोल्ड एक ऐसा डिवाइस होने की उम्मीद है, जो फोल्डेबल फोन की दुनिया में कुछ नए स्टैंडर्ड सेट कर सकता है। हालांकि, इसकी कीमत और अन्य स्पेसिफिकेशन्स के बारे में अभी और जानकारी का इंतजार करना होगा।