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Apple ला रहा है iPhone Fold — 24MP कैमरा और एडवांस फीचर्स के साथ होगा सबसे खास

लॉन्च से पहले ही Apple का आने वाला फोल्डेबल स्मार्टफोन चर्चा में बना हुआ है। इसे आईफोन फोल्ड के नाम से लाया जा सकता है। हालिया लीक से पता चला है कि इस फोन में 24MP का अंडर-डिस्प्ले कैमरा सेंसर मिलेगा। अगर यह रिपोर्ट सही हुई तो यह 24MP अंडर डिस्प्ले कैमरे वाला इंडस्ट्री का पहला फोन होगा। इससे पहले भी कई खबरें आई थीं कि ऐपल अपने फोल्डेबल फोन में डिस्प्ले के अंदर कैमरा देगा। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा तकनीक एंड्रॉयड फोन्स में काफी पहले से मौजूद है, लेकिन उनकी इमेज क्वालिटी अक्सर उतनी अच्छी नहीं होती है। इसका कारण उनके लेंस का रेजोल्यूशन कम होना है, जो आमतौर पर 4 से 8MP तक होता है। हालांकि, इस बार ऐपल आईफोन फोल्ड के फ्रंट कैमरे में छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट होंगे। इससे साफ है कि यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा काफी एडवांस होगा। ऐसा लग रहा है कि ऐपल ने लाइट ट्रांसमिशन और इमेज क्वालिटी को बेहतर बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। आइये, फोन की अन्य डिटेल के लिए आगे पढ़ते हैं। एडवांस फीचर के कारण हो सकती है खामियां ऐपल के फोल्डेबल स्मार्टफोन में कई एडवांस फीचर देखने को मिलेंगे। हालांकि, एडवांस फीचर के कारण फोन में कई चीजों की कमी भी हो सकती है। लीक रिपोर्ट्स की मानें तो फोन को कॉम्पैक्ट रखने के लिए OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) और LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) जैसी सुविधाओं को हटाया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OIS, कैमरे को हिलने-डुलने पर भी स्टेबल फोटोज लेने में मदद करता है, जबकि LiDAR गहराई का पता लगाने में काम आता है। ऐपल एनालिस्ट Ming Chi Kuo ने बताया है कि आईफोन फोल्ड में फोन के मुड़े हुए और खुले हुए दोनों ही स्टेट में डुअल-लेंस कैमरा हो सकता है। वहीं, मार्क गुरमन का कहना है कि इस डिवाइस में कुल चार सेंसर होंगे। एक सामने की तरफ, एक अंदर की तरफ और दो पीछे की तरफ। लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, आईफोन फोल्ड में पीछे की तरफ दो 48MP के कैमरे हो सकते हैं। इसके अलावा, फोन में पावर बटन के साथ टच आईडी (फिंगरप्रिंट सेंसर) भी दिया जा सकता है। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा एक बड़ी बात है, क्योंकि यह फोन के डिजाइन को और भी स्लीक बना देगा। डिस्प्ले के नीचे कैमरा होने से फोन का फ्रंट लुक बिना किसी नॉच या पंच-होल के एकदम साफ दिखेगा। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होगा जो फुल-स्क्रीन का एक्सपीरियंस पसंद करते हैं। एंड्रॉयड फोन में अंडर-डिस्प्ले कैमरे का इस्तेमाल तो हुआ है, लेकिन अक्सर उनकी क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं होती। ऐसा इसलिए है, क्योंकि डिस्प्ले की लेयर्स से होकर लाइट को सेंसर तक पहुंचना पड़ता है, जिससे इमेज क्वालिटी पर असर पड़ता है। ऐपल का 24MP का सेंसर और छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं। आईफोन फोल्ड एक ऐसा डिवाइस होने की उम्मीद है, जो फोल्डेबल फोन की दुनिया में कुछ नए स्टैंडर्ड सेट कर सकता है। हालांकि, इसकी कीमत और अन्य स्पेसिफिकेशन्स के बारे में अभी और जानकारी का इंतजार करना होगा।

सांसों पर संकट: प्रदूषण से बच्चों की सेहत बिगड़ रही, सावधानी ही बचाव

  वायु प्रदूषण केवल वयस्कों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका असर कहीं अधिक गहरा और दीर्घकालिक हो सकता है। जन्म से पहले और बचपन के शुरुआती वर्षों में प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चों के लिए यह गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में माताओं का प्रदूषित वातावरण में रहना और बचपन में दूषित हवा में सांस लेना बच्चों के फेफड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे उनके फेफड़ों की वृद्धि रुक सकती है और सामान्य से कम कार्यशील फेफड़े विकसित होते हैं। इसके अलावा, छोटे बच्चों में अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वे अक्सर निम्न श्वसन संक्रमणका शिकार हो सकते हैं। मानसिक और मोटर विकास पर भी प्रदूषण का नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे व्यवहार संबंधी समस्याएँ और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गर्भवती महिलाओं से होने वाले शिशु पर भी पड़ रहा असर गर्भवती महिलाओं में प्रदूषण के संपर्क से कम वजन के बच्चों का जन्म, असामयिक प्रसव और शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी देखी गई है। लंबी अवधि में, बच्चों में हृदय रोग, मधुमेह और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि प्रदूषण बच्चों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।  प्रदूषण का छोटे बच्चों के फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव विशेष रूप से छोटे बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए वे प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। प्रदूषण से बचाव के लिए बच्चों को साफ और सुरक्षित वातावरण में रखना बेहद जरूरी है। सावधानी और जागरूकता से ही हम बच्चों को इस अदृश्य लेकिन गंभीर खतरे से बचा सकते हैं और उनके स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित कर सकते हैं। प्रदूषण से बच्चों में दिखाई देने वाले पांच प्रमुख लक्षण     लगातार खांसी और गले में खराश – प्रदूषित हवा गले और नलियों को प्रभावित कर बार-बार खांसी और आवाज बैठने का कारण बन सकती है।     सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न – हवा के हानिकारक कण श्वसन मार्ग को संकुचित कर देते हैं, जिससे खेलते समय सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस हो सकता है।     नाक बहना और छींक आना – बच्चों की नाक और आंखें संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे बार-बार नाक बहना, छींक या आंखों में जलन होती है।     नींद में खलल और थकान – ऑक्सीजन की कमी से नींद बाधित होती है और बच्चे दिन में सुस्त या थके हुए महसूस करते हैं।     अस्थमा और एलर्जी की तीव्रता बढ़ना – जिन बच्चों को पहले से अस्थमा या एलर्जी है, उनमें प्रदूषण लक्षणों को और बढ़ा देता है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय     सुबह के समय बच्चों को बाहर खेलने से रोकें, क्योंकि उस समय AQI सबसे खराब होता है।     घर में एयर प्यूरीफायर या गीले कपड़े रखें, ताकि धूल कम हो।     N95 या KN95 मास्क पहनाने की आदत डालें, खासकर स्कूल जाने के समय।     आहार में विटामिन C, E और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करें, जैसे संतरा, पालक और टमाटर।     पर्याप्त पानी पिलाएं ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। डॉक्टर को कब दिखाएं     लगातार तीन-पांच दिनों तक खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न हो।     खेलने के बाद अत्यधिक थकान या सिरदर्द महसूस हो।     अस्थमा के बच्चों को नियमित दवा और जांच कराना आवश्यक।  

New Aadhaar App: बेहतर सिक्योरिटी और आसान एक्सेस के साथ आपके फोन में

 नई दिल्ली  न्यू आधार ऐप लॉन्च हो गया है. इस ऐप की मदद से कई नए फीचर्स मिलेंगे और सिक्योरिटी भी बेहतर होगी. इसकी जानकारी खुद Aadhaar (@UIDAI) अकाउंट ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके दी है. इस ऐप का लंबे समय से इंतजार हो रहा था. न्यू आधार ऐप आने के बाद हर जगह आधार कार्ड की फोटो कॉपी लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी.  पोस्ट के मुताबिक, New Aadhaar App में नए फीचर्स मिलेंगे. इसमें सिक्योरिटी इनहेंस्ड, ईजी एक्सेसस और पूरी तरह से पेपर लेस एक्सपीरियंस होगा. साथ ही पोस्ट में Android और iOS यूजर्स को न्यू आधार ऐप डाउनलोड करने का लिंक भी प्रोवाइड किया गया है.  प्ले स्टोर पर आया न्यू आधार ऐप   प्ले स्टोर पर न्यू आधार ऐप के फीचर्स की जानकारी दी है और फोटो को लिस्टेड किया है. फोटो में दिखाया गया है कि मोबाइल ऐप पर ही आधार कार्ड को दिखाया जा सकेगा. इसमें डेट ऑफ बर्थ और आधार नंबर की सिक्योरिटी को बेहतर किया है. डेट ऑफ बर्थ का सिर्फ ईयर और आधार नंबर के के लास्ट चार डिजिट नजर आएंगे. बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे न्यू आधार ऐप की मदद से मोबाइल से ही आधार नंबर होल्डर्स बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे. इसके लिए सिंपल का प्रोसेस फॉलो करना होगा. मोबाइल ऐप पर आधार कार्ड डाउनलोड करने के भी दो ऑप्शन मिलेंगे, जिसमें एक फुल आईडी डिटेल्स और दूसरा माक्स्ड आईडी डिटेल्स है.  आधार डिटेल्स शेयर करना हुआ आसान और सिक्योर न्यू आधार ऐप की मदद से आधार डिटेल्स शेयर करना आसान बना दिया. ऐप में शेयर का ऑप्शन है, जिसपर क्लिक करनेके बाद आपको कुछ ऑप्शन मिलेंगे. इसमें वह कंप्लीट शेयर, सिलेक्टिव शेयर और डाउनलोड आधार के ऑप्शन पूछता है. इसके बाद जब आप सिलेक्टिव शेयर के ऑप्शन पर क्लिक करते हैं तो कुछ नए ऑप्शन मोबाइल स्क्रीन पर सामने आ जाते हैं. बताना होगा कि आधार की कौन सी डिटेल्स को शेयर किया है, उसके सामने बने बॉक्स पर चेक करना होगा. इसके बाद कंटीन्यू करना होगा. फिर कंफर्मेशन करने के बाद उस फाइल को मैसेजिंग ऐप या ईमेल की मदद से शेयर किया जा सकता है.  फैमिली के लिए भी यूजफुल  न्यू आधार ऐप के अंदर फैमिली मेंबर्स के आधार कार्ड नंबर को भी एक ही डिवाइस में रखा जा सकता है, जिसकी जानकारी ऐप ऐप स्टोर पर दी है. इसके लिए आधार नंबर होल्डर्स को फिजिकल कॉपीज लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी. सेफ्टी के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का यूज किया जाएगा.   आधार कार्ड क्या होता है?  आधार कार्ड भारत सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाला यूनिक आईडी नंबर है.  इस नंबर को  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) तैयार करता है. आधार कार्ड में 12 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है और यही नंबर हर एक भारतीय की अलग-अलग पहचान की जानकारी देता है.   

बाल झड़ने से रोकना है? तो, ये रोज़मर्रा की गलतियाँ तुरंत बदलें

अक्सर हम बालों की समस्या के लिए प्रदूषण या जीन्स को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि सच तो यह है कि हमारे रोजमर्रा की जिंदगी की 5 ऐसी 'छोटी-छोटी' आदतें हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से अनदेखा कर देते हैं और यही गलतियां खामोशी से हमारे स्कैल्प और बालों की जड़ों को कमजोर कर रही हैं। जी हां, यह समस्या बाहरी नहीं, बल्कि आपकी अपनी लाइफस्टाइल की 'अंदरूनी' गड़बड़ी है। आइए, विस्तार से जानते हैं इसके बारे में। स्ट्रेस लेना और खराब नींद आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके बालों का सबसे बड़ा दुश्मन है? जब आप लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर "कोर्टिसोल" नामक हॉर्मोन रिलीज करता है। यह हॉर्मोन बालों को 'विश्राम चरण'में धकेल देता है, जिससे वे समय से पहले झड़ने लगते हैं।     समाधान: रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें ताकि तनाव कम हो सके। पानी कम पीना और पोषण की कमी बालों के विकास के लिए हाइड्रेशन उतना ही जरूरी है जितना कि पौधे के लिए पानी। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो आपके बाल रूखे और कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा, बालों को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन, आयरन और बायोटिन जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। जंक फूड पर निर्भर रहने से ये जरूरी तत्व नहीं मिल पाते।     समाधान: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, अंडे और नट्स को शामिल करें। बालों को कसकर बांधना और हीट स्टाइलिंग महिलाएं अक्सर टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाना पसंद करती हैं, जबकि पुरुष जेल या वैक्स लगाकर बालों को कसकर सेट करते हैं। बालों को बहुत कसकर खींचने से 'ट्रैक्शन एलोपेसिया' नामक समस्या हो सकती है, जिसमें हेयरलाइन के बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। साथ ही, हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लर की अत्यधिक गर्मी बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है।     समाधान: ढीले हेयर स्टाइल चुनें। हीट स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल कम करें, और अगर करें भी तो हमेशा हीट प्रोटेक्टेंट स्प्रे का इस्तेमाल करें। जरूरत से ज्यादा शैंपू और गलत कंघी का यूज कुछ लोग सोचते हैं कि रोजाना शैंपू करने से बाल साफ रहते हैं, लेकिन ज्यादा शैंपू करने से स्कैल्प का नेचुरल ऑयल खत्म हो जाता है, जिससे रूखापन और कमजोरी आती है। इसके अलावा, गीले बालों में जोर से कंघी करना एक आम गलती है। गीले बाल सबसे कमजोर होते हैं।     समाधान: शैंपू जरूरत के हिसाब से करें, हर दिन नहीं। गीले बालों में हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें और हल्के हाथों से सुलझाएं। धूम्रपान और शराब स्मोकिंग और शराब का सेवन केवल फेफड़ों या लिवर को ही नहीं, बल्कि बालों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान करने से सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिससे बालों की जड़ों तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता।     समाधान: अगर आपको हेल्दी और घने बाल चाहिए, तो धूम्रपान की आदत को तुरंत छोड़ दें और शराब का सेवन सीमित करें।  

केला + काली मिर्च: जानिए रोज़ाना खाने से मिलने वाले 6 अनोखे लाभ

  केला और मसालों के डिब्बे में रखी चुटकी भर काली मिर्च- जी हां, यह कॉम्बिनेशन भले ही आपको अजीब लग रहा हो, मगर इसके फायदे जानकर आप भी इसे खाने से पीछे नहीं हटेंगे। दरअसल, जब इन दोनों को सही मात्रा में मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण पाचन से लेकर मूड तक, कई समस्याओं पर जादू की तरह असर करता है। आइए, इस पुराने नुस्खे के पीछे की साइंस को समझते हैं और जानते हैं। पाचन शक्ति में जबरदस्त सुधार केला फाइबर का भंडार है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है। वहीं, काली मिर्च में 'पाइपेरिन' नामक एक तत्व होता है, जो पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। जब आप इन दोनों को साथ खाते हैं, तो यह मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज को दूर करता है और पेट फूलने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है। इंस्टेंट एनर्जी का खजाना केला नेचुरल शुगर जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। काली मिर्च इस एनर्जी को तेजी से अवशोषित करने में मदद करती है। रोजाना सुबह या वर्कआउट से पहले इस कॉम्बिनेशन को लेने से आपको लंबे समय तक ताकत महसूस होगी और थकान कम होगी। वजन कंट्रोल करने में मददगार केला पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बचते हैं। काली मिर्च थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया को बढ़ाती है, यानी यह आपके शरीर के तापमान को थोड़ा बढ़ाती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती हैं। इस प्रकार, यह मिश्रण एक हेल्दी वेट बनाए रखने में काफी मदद कर सकता है। हड्डियों को बनाता है मजबूत केला मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का एक अच्छा सोर्स है, जो बोन डेंसिटी को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। काली मिर्च में भी कुछ मात्रा में मैंगनीज होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा है। इन पोषक तत्वों का सही मिश्रण आपकी हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में मदद करता है। बेहतर मूड और तनाव में कमी केले में ट्रिप्टोफैन नामक एक अमीनो एसिड होता है, जिसे शरीर 'सेरोटोनिन' में बदलता है। सेरोटोनिन को 'फील-गुड' हार्मोन भी कहा जाता है, जो मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद करता है। काली मिर्च इन पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करती है, जिससे आपको मानसिक शांति मिलती है। इम्यून सिस्टम को रखे स्ट्रॉन्ग काली मिर्च एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। केला विटामिन C और B6 जैसे जरूरी विटामिन देता है। यह शक्तिशाली कॉम्बिनेशन आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करता है, जिससे आप मौसमी बीमारियों और इन्फेक्शन्स से बचे रहते हैं। कैसे खाएं? बस एक पका हुआ केला लें और उस पर एक चुटकी ताजी पिसी हुई काली मिर्च डालें और रोजाना खाएं।

नेटवर्क फेल? कोई दिक्कत नहीं! ऐसे करें ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट

नई दिल्ली आज के डिजिटल युग में यूपीआई (UPI) लोगों के रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मोबाइल में इंटरनेट खत्म हो जाता है, नेटवर्क नहीं आता या बैंक सर्वर डाउन हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है। क्या बिना इंटरनेट के भी UPI पेमेंट किया जा सकता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने एक ऐसी सुविधा शुरू की है, जिसके तहत यूजर्स बिना इंटरनेट के भी UPI ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। इस सुविधा का नाम है USSD आधारित सेवा से काम करती है। आइए जानते हैं कि इस ऑफलाइन UPI पेमेंट फीचर का उपयोग कैसे करें। ऑफलाइन UPI पेमेंट करने से पहले ध्यान रखें ➤ आपका मोबाइल नंबर बैंक खाते से लिंक होना चाहिए। ➤ मोबाइल नंबर से UPI आईडी और UPI PIN सेट होना जरूरी है। ➤ यह सुविधा सभी प्रमुख टेलीकॉम नेटवर्क (जैसे Jio, Airtel, Vi, BSNL आदि) पर उपलब्ध है। स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट कैसे करें ➤ स्टेप 1: अपने मोबाइल से *99# डायल करें। ➤ स्टेप 2: स्क्रीन पर एक मेनू खुलेगा, जिसमें कई ऑप्शन दिखेंगे जैसे Send Money, Receive Money, Check Balance, My Profile आदि। ➤ स्टेप 3: अब ‘Send Money’ (पैसे भेजें) का ऑप्शन चुनें। आप पैसे भेजने के लिए तीन तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं: ➤ मोबाइल नंबर से UPI ID से बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड से ➤ स्टेप 4: जिस व्यक्ति को पैसे भेजने हैं, उसकी जानकारी डालें और फिर भेजने की राशि दर्ज करें। ➤  स्टेप 5: अब आपको अपना UPI PIN दर्ज करना होगा। पिन डालते ही ट्रांजेक्शन पूरा हो जाएगा और आपको तुरंत कन्फर्मेशन मिल जाएगा। कितना शुल्क लगेगा? ऑफलाइन UPI पेमेंट के लिए प्रति ट्रांजेक्शन लगभग ₹0.50 का शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क बेहद मामूली है और सेवा, पूरे भारत में उपलब्ध है। फायदे क्या हैं? ➤ इंटरनेट न होने पर भी पेमेंट की सुविधा। ➤ गांव या दूरदराज के इलाकों में भी लेन-देन संभव। ➤ हर तरह के मोबाइल (स्मार्टफोन या बेसिक फोन) पर काम करता है। ➤ सुरक्षित और तेज़ प्रक्रिया।  

आपका फोन हर जगह ट्रैक कर रहा है! ऐसे बंद करें लोकेशन ट्रैकिंग

मोबाइल लोकेशन ट्रैक कर ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) प्रदाता कंपनी अपने उपयोगकर्ता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहती हैं। लेकिन तकनीक के इस युग में उपयोगकर्ता की प्राइवेसी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। इसके लिए एंड्रॉयड और आईओएस में लोकेशन ट्रैकिंग बंद करने का खास विकल्प है, जिसे ऑफ किया जा सकता है। एंड्रॉयड: गूगल के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) एंड्रॉयड पर लोकेशन बंद करने के दो विकल्प हैं। पहला ऊपर की तरफ दिए गए ट्रे बार में जाकर जीपीएस ऑफ कर दें। यह बैटरी सेविंग के साथ-साथ एप को    लोकेशन देना बंद कर देता है। अगर उपयोगकर्ता चाहते हैं कि एंड्रॉयड भी लोकेशन ट्रैक न कर सके तो इसके लिए सेटिंग में एक विकल्प है। स्मार्टफोन की सेटिंग्स की मदद से जब गूगल के अंदर ‘गूगल अकाउंट’ पर जाएंगे  तो उसमें ‘रिव्यू योर प्राइवेसी सेटिंग्स’ का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक कर दें। इसके बाद ‘गेट स्टार्ट’ पर क्लिक कर दें। इसके बाद उपयोगकर्ता खुद देख सकते हैं  कि एंड्रॉयड कौन-कौन सी जानकारी स्टोर कर रहा है। फोन में खुद कर सकते हैं अपनी प्राइवेसी का रिव्यू. स्मार्टफोन की सेटिंग्स की मदद से जब गूगल के अंदर ‘गूगल अकाउंट’ पर जाएंगे  तो उसमें ‘रिव्यू योर प्राइवेसी सेटिंग्स’ का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक कर दें। इसके बाद ‘गेट स्टार्ट’ पर क्लिक कर दें। इसके बाद उपयोगकर्ता खुद देख सकते हैं  कि एंड्रॉयड कौन-कौन सी जानकारी स्टोर कर रहा है। आईफोन : एप्पल के आईओएस को सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक मजबूत ऑपरेटिंग सिस्टम माना जाता है लेकिन यूजर चाहे तो एप्पल को भी अपनी लोकेशन ट्रैक करने से रोक सकता है। पहले अपने आईफोन की सेटिंग्स में जाएं. इसके बाद प्राइवेसी का चुनाव करें. ऐसा करने के बाद लोकेशन सर्विसेस का चुनाव करें. लोकेशन हिस्ट्री को ऑफ कर दें. एप की सूची दिख जाएगी, जो लोकेशन ट्रैक करते हैं. उन एप के लिए लोकेशन ऑफ कर दें जिनके लिए वह गैर जरूरी है.  

प्रदूषित हवा का कहर: अब कैंसर का नया खतरा बन रहा है Air Pollution

हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वही अब हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बनती जा रही है। कभी जीवन का आधार रही यह हवा आज अदृश्य जहर में बदल चुकी है। यह सिर्फ खांसी, सांस की तकलीफ या एलर्जी तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे यह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी जन्म दे रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बाहरी वायु प्रदूषण और उसमें मौजूद बारीक कणों को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन यानी “कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख तत्वों” की सूची में रखा है। इसका मतलब यह है कि हवा में मौजूद ये जहरीले तत्व उतने ही खतरनाक हैं जितना तंबाकू का धुआं या एस्बेस्टस। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के मौके पर आइए डॉ. मीनू वालिया से समझते हैं कि हवा में घुला यह जहर किस तरह हमारे शरीर को अंदर से बीमार बना रहा है और हम इससे कैसे बच सकते हैं। फेफड़ों की गहराई तक घुसने वाला जहर हवा में मौजूद सबसे घातक तत्व हैं PM2.5 कण- ये इतने छोटे होते हैं कि शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली भी इन्हें रोक नहीं पाती। ये कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं और वहां से खून में मिल जाते हैं। इनमें अक्सर भारी धातुएं, हाइड्रोकार्बन और दूसरे रासायनिक जहर चिपके रहते हैं। जब ये शरीर में पहुंचते हैं, तो कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर की शुरुआत होती है। यही कारण है कि आज गैर-धूम्रपान करने वालों में भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन का कनेक्शन लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से शरीर लगातार एक सूक्ष्म सूजन की स्थिति में रहता है। इस दौरान शरीर में Reactive Oxygen Species (ROS) नामक तत्व बनते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। यह स्थिति ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कहलाती है- यानी जब शरीर की प्राकृतिक रक्षा क्षमता टूटने लगती है। इससे कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। यह प्रभाव सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मूत्राशय और स्तन कैंसर जैसे मामलों में भी देखा गया है। खून के रास्ते पूरे शरीर में फैलता है जहर वायु प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। बेहद छोटे प्रदूषक कण खून में घुसकर जिगर, गुर्दे और मस्तिष्क जैसे अन्य अंगों तक पहुंच जाते हैं। हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने वाले लोगों में मस्तिष्क, कोलन और मूत्र तंत्र से जुड़ी कैंसर की आशंका भी बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण है- पूरे शरीर में सूजन और डीएनए मरम्मत प्रणाली का कमजोर होना। जीन्स पर प्रदूषण का असर विज्ञान की नई शाखा एपिजेनेटिक्स बताती है कि प्रदूषण हमारे जीन्स के ढांचे को नहीं, बल्कि उनके व्यवहार को बदल देता है। हवा में मौजूद रासायनिक तत्व DNA methylation की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, जिससे कुछ महत्वपूर्ण जीन्स “खराब” हो जाते हैं जो कैंसर को रोकते हैं, जबकि कुछ जीन्स “एक्टिव” हो जाते हैं जो ट्यूमर को बढ़ावा देते हैं। यह बदलाव अदृश्य होते हैं, लेकिन असर गहरा होता है- यानी हवा हमारे जेनेटिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। शहरों की 'साइलेंट किलर' हवा शहरों में प्रदूषण का असर और भी ज्यादा होता है, क्योंकि यहां हवा के साथ-साथ शोर, तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी जैसे अन्य कारक भी शरीर को कमजोर करते हैं। जो लोग मुख्य सड़कों, फैक्टरियों या औद्योगिक क्षेत्रों के पास रहते हैं, वे लगातार कई पर्यावरणीय जोखिमों का सामना करते हैं। यह सब मिलकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है और कैंसर जैसी बीमारियों का रास्ता आसान बना देता है। छोटी कोशिशों से होगा बड़ा असर बेशक प्रदूषण को पूरी तरह रोकना सरकारों और नीतियों की जिम्मेदारी है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी हम कई कदम उठा सकते हैं जो हमारे जोखिम को कम कर सकते हैं:     घर के अंदर की हवा शुद्ध रखें: एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और पौधे लगाएं।     बाहर निकलते समय सावधानी: स्मॉग या प्रदूषण वाले दिनों में N95 या बेहतर मास्क पहनें।     स्मार्ट ट्रैवल करें: निजी गाड़ियों की बजाय सार्वजनिक परिवहन या कारपूल का उपयोग करें।     खानपान में बदलाव लाएं: हरी सब्जियां, फलों और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार लें ताकि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से शरीर लड़ सके।     हेल्थ चेकअप कराएं: नियमित चेकअप से शुरुआती लक्षणों की पहचान जल्दी हो सकती है।  

नई तकनीक: सिर्फ फोन टच से पता चलेगा ब्लड शुगर, दर्दनाक जांच नहीं

नई दिल्ली डायबिटीज पेशेंट को अक्सर बार-बार शुगर चेक करने की जरूरत होती है. घर से दूर नौकरी करने वाले लोगों को काफी परेशानी भी होती है. मार्केट में कुछ खास प्रोडक्ट लिस्टेड हैं, जिनका इस्तेमाल करके मोबाइल पर ब्लड शुगर देखा जा सकेगा. इनका नाम स्मार्ट ग्लुकोज मॉनिटर हैं, जिसका मेडिकल नाम कॉन्टीन्युअस ग्लोस मॉनिटरिंग सिस्टम (CGM) है.  इन ग्लूकोज मीटर को बांह या पेट पर चिपकाया जाता है. इसके बाद मोबाइल पर आसानी से ब्लड शुगर को देख सकते हैं. इसके लिए बार-बार उंगली में सुई चुभाने की जरूरत नहीं होगी.  स्टिकर जैसी शेप और कई सेंसर  मार्केट में अलग-अलग ब्रांड और कंपनियां Blood Glucose Meter Sticker लिस्टेड हैं. जहां कुछ ब्लूटूथ का सपोर्ट देती हैं वहीं कुछ कंपनियां NFC का भी सपोर्ट प्रोवाइड कराती हैं. बहुत सी कंपनियां दोनों का सपोर्ट देती हैं.  NFC सपोर्ट वाले पैच पर सिर्फ स्मार्टफोन को टच करना होता है, उसके बाद ब्लड शुगर लेवल मोबाइल स्क्रीन पर पॉपअप करने लगता है. हालांकि ब्लूटूथ सपोर्ट वाले पैच का डेटा देखने के लिए मोबाइल ऐप की जरूरत होती है.  स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच ऐसे काम करते हैं     स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच सेंसर को बांह या पेट पर चिपका जाता है.     यह शरीर के अंदर के इंटरस्टिशियल फ्लूइड में ग्लूकोज की लेवल को मांपता है.     Bluetooth या NFC से डेटा स्मार्टफोन में ट्रांसफर किया जाता है.      ऐप में ग्राफ, हाई/लो अलर्ट और रिपोर्ट दिखाई जाती है.  मार्केट में ढेरों ऑप्शन और इतनी है कीमत  ग्लूकोज मीटर स्टिकर के मार्केट में ढेरों ऑप्शन मौजूद हैं. अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग फीचर्स और एक्युरेसी का दावा करते हैं. मार्केट में 3-5 हजार रुपये की कीमत में मिल जाते हैं. एक पैज को करीब 15 दिन तक यूज किया जा सकता है.  ग्लूकोज मीटर स्टिकर किन लोगों के यूजफुल  ग्लूकोज मीटर स्टिकर पैच उन लोगों के लिए यूजफुल हैं, जिनका ब्लड शुगर ज्यादा रहता है और फ्लेक्चुएट करता है. शुगर बढ़ने की वजह से अगर तबियत बिगड़ती है तो पेशेंट आसनी से फोन को पैज पर टैप करके शुगर लेवल जांच सकते हैं. इसके बाद शुगर कंट्रोल करने के लिए काम कर सकते हैं.  ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह रोगियों के लिए एक कम बजट वाला, यूजर फ्रेडली और उपयोग करने में आसान ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण विकसित किया है। शोधकर्ताओं की टीम का मानना है कि इसकी मदद से शुगर लेवल को नियमित रूप से जांचने में बिना दर्द के मदद मिल सकती है। यह पेटेंट उपकरण मरीजों को बिना उंगलियों में सुई चुभने के दर्द के भी ग्लूकोज के स्तर को मापने में मददगार हो सकती है।  भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है, इनमें से अधिकतर लोगों को डॉक्टर नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहने की सलाह देते हैं।  ग्लूकोमीटर से घर पर डायबिटीज की जांच अभी तक घर पर डायबिटीज की जांच के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये एक छोटा-सा डिवाइस होता है जिससे आप घर पर ही अपने ब्लड शुगर की जांच कर सकते हैं। इसके लिए ग्लूकोमीटर में एक नई टेस्ट स्ट्रिप लगाने के बाद, अपनी उंगली में निडिल या सिरिंज की मदद से पिन करके एक ड्रॉप खून को इसी स्ट्रिप पर लगाना होता है।  कुछ सेकंड में डिवाइस आपकी ब्लड शुगर वैल्यू दिखा देती है।   क्या कहते हैं विशेषज्ञ? इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल और थिन फिल्म्स लैब के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर परशुरामन स्वामीनाथन के नेतृत्व में इसे विकसित किया है।  इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे आईआईटी मद्रास के डॉ एल. बालामुरुगन कहते हैं, इस तरह का उपकरण वास्तव में बहुत सहायक है। ग्लूकोज की निगरानी को दर्दरहित बनाने के साथ ये किफायती भी है। यह ग्लूकोज के स्तर की नियमित जांच करने, अपने शरीर के पैटर्न को समझने में जांच के लिए अनावश्यक दौड़ भाग को कम करने में मदद करता है। हालांकि ये डिवाइस किस तरह से काम करती है फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।  

फैंस को फिर निराशा: GTA 6 की लॉन्च डेट आगे बढ़ी, जानें वजह

  रॉकस्‍टार गेम्‍स के मशहूर गेम GTA 6 का इंतजार गेमिंग के दीवाने काफी वक्‍त से कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, GTA 6 की रिलीज डेट को अब 19 नवंबर 2026 तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। पहले इसे 26 मई 2026 को यह गेम रिलीज किया जाना था, लेकिन अब करीब 6 महीने का एक्‍सटेंशन गेम की रिलीज के लिए दिया गया है। रॉकस्‍टार गेम्‍स की तरफ से एक्‍स पर इस बारे में जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि गेम को बेहतरीन बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। जीटीए 6 की रिलीज डेटा लगातार टलती रही है। यह गेम इसी साल लॉन्‍च होना था, लेकिन बार-बार देरी के बाद अब अगले साल नवंबर में आएगा। GTA 6 पर रॉकस्‍टार गेम्‍स का आधि‍कारिक बयान रॉकस्‍टार गेम्‍स ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्‍ट में कहा- हमें इस अतिरिक्त समय के लिए खेद है। हमें पता है इंतजार लंबा है, लेकिन इस दौरान हमें गेम को उस स्तर की पॉलिश के साथ पूरा करने में मदद मिलेगी, जिसकी उम्‍मीद आप लोगों ने लगाई है और जिसके आप हकदार हैं। GTA 6 में क्‍या-क्‍या आएगा GTA 6 जिसका पूरा नाम ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 है, उसे प्‍लेस्‍टेशन 5 और एक्‍सबॉक्‍स सीरीज एक्‍स व एस कंसोल पर लाए जाने की तैयारी है। जीटीए 6 में वाइस सिटी मुख्‍य आकर्षण होगी। इसके गेम प्‍ले की स्‍टोरी लूसिया के चारों तरफ घूमेगी। लूसिया, जीटीए फ्रेंचाइजी की पहली महिला कैरेक्‍टर है। क्‍या GTA 6 को 60 एफपीएस पर खेल पाएंगे ऐसा कहा जा रहा है कि जीटीए 6 को 60 एफपीएस यानी फ्रेम प्रति सेकंड पर खेला जा सकेगा। एक्‍स पर ही डिटेक्‍ट‍िव सीड्स नाम का एक यूजर दावा कर चुका है कि जीटीए 6 को प्‍लेस्‍टेशन 5 प्रो पर 60 फ्रेम प्रति सेकंड पर खेला जा सकेगा। बताया जा रहा है कि रॉकस्‍टार गेम्‍स और सोनी मिलकर कंसोल के लिए इस गेम को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। कहा जाता है कि इन बदलावों की वजह से ग्राफ‍िक्‍स बेहतर होंगे। रिलीज में होती रही है देरी GTA 6 की रिलीज डेट को पहली बार नहीं टाला गया है। पहले कहा गया था कि गेम इसी साल यानी 2025 में आ जाएगा। फ‍िर इसे मई 2026 तक टाला गया और अब 19 नवंबर 2026 डेट सामने आई है। यह फैसला गेम को बेहतर पॉलिश करने के लिए लिया गया है। अगर यह डेट बरकरार रहती है तो गेमर्स के लिए साल 2026 एक ग्रैंड ईयर बन सकता है।