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Green Tea पर कानून की चाय! अब ‘चाय’ कहना होगा गलत

नई दिल्ली  FSSAI ने ग्रीनटी को लेकर नई परिभाषा दी है। नए नियमों के मुताबिक अब हर उस पेय पदार्थ को चाय कहना गलत और गैरकानूनी माना जाएगा, जो असली चाय के पौधे से नहीं बना है। आइए जानते हैं कि क्या है FASSI द्वारा दी गई नई परिभाषा क्या है असली चाय की परिभाषा? FSSAI ने स्पष्ट किया है कि केवल वही उत्पाद 'चाय' कहलाने के हकदार हैं, जो Camellia sinensis (कैमेलिया साइनेंसिस) नामक पौधे की पत्तियों या कलियों से तैयार किए गए हों। इसमें ग्रीन टी, कांगड़ा टी और इंस्टेंट टी शामिल हैं, क्योंकि ये इसी पौधे से बनती हैं। इनके अलावा जड़ी-बूटियों, फूलों या अन्य पौधों से तैयार किए गए किसी भी पेय को 'चाय' के नाम से बेचना अब 'मिसब्रांडिंग' (गलत लेबलिंग) माना जाएगा। हर्बल और फ्लावर टी का क्या होगा? बाजार में बिकने वाली हर्बल टी, रूइबोस टी, डिटॉक्स टी और फ्लावर टी वास्तव में 'चाय' नहीं बल्कि 'इन्फ्यूजन' हैं। FSSAI ने निर्माताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इन उत्पादों के पैकेट पर से 'Tea/चाय' शब्द तुरंत हटाएं। अब इन पेयों को 'प्रोप्राइटरी फूड' या उनके वास्तविक अवयवों के नाम से बेचना होगा। भ्रामक विज्ञापनों पर गिरेगी गाज प्राधिकरण ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को भ्रम में रखना कानूनन अपराध है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और विक्रेताओं पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ई-कॉमर्स साइट्स और रिटेल स्टोर्स पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए गए हैं।

ये टिप्स रखेंगे आपको टेंशन फ्री

यदि आप अपने कार्यस्थल पर टेंशनमुक्त रहना चाहती हैं तो समय पर काम को पूरा करने की आदत डालें। साथ ही स्वयं की थोड़ी सी देखभाल भी करें। ऐसा करके न केवल आप अन्य लोगों के लिए मिसाल बन सकती हैं, बल्कि स्वयं को हमेशा प्रसन्न रख सकती हैं… तनाव आज इंसान के जीवन का हिस्सा बन चुका है और इसका सीधा असर पड़ता है उसके काम पर। तनावग्रस्त होने पर आप नाखुश तो रहती ही हैं साथ ही हताशा भी चेहरे पर साफ नजर आती है। इसका असर यहीं पर खत्म नहीं होता यह काम करने की क्षमता के साथ ही कंपनी के साथ आपके रिश्ते को भी प्रभावित करता है। यदि आप ऐसी समस्या से ग्रसित हैं तो ध्यान दें इन बातों का। तनाव की पहचान सबसे पहले तो इस बात को समझने की कोशिश करें कि आप तनावग्रस्त हैं कि नहीं। फिर उसके लक्षणों की पहचान करने की कोशिश करें। उदाहरण स्वरूप चिड़चिड़ाहट होना, अत्यधिक धूम्रपान या चाय, कॉफी लेना, नींद में अनियमितता आना ये तनाव के लक्षण हैं। यदि इनमें से एक या कई लक्षण नजर आते हैं तो निश्चित रूप से आप तनावग्रस्त हैं। तनाव का कारण शांति से बैठकर इस बात पर गौर करें कि तनाव का मुख्य कारण क्या है? यह आपके काम का तरीका है या काम की अधिकता ने आपको तनावग्रस्त कर दिया है? इस बारे में आराम से सोचें। क्या यह समस्या सिर्फ किसी खास प्रोजेक्ट में हो रही है या डेडलाइन पर काम खत्म न होने की टेंशन है या ऐसी स्थिति में खुद को कमजोर महसूस करना आपकी परेशानी को बढ़ा रहा है। काम का माहौल सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप जिस ऑफिस में काम करती हैं वहां का माहौल कर्मचारियों के अनुकूल है या नहीं? कई बार तनाव का कारण कार्यस्थल में होने वाली परेशानियां ही होती हैं। इसके लिए देखें कि आप जिस संस्थान से जुड़ी हैं वहां पर कर्मचारियों के लिए अच्छी सुविधाएं जैसे सुविधाजनक टाइम, पार्ट-टाइम काम करने की सुविधा, घर में काम करने का विकल्प, आकस्मिक छुट्टी आदि हैं कि नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो ऐसे संस्थान को जितनी जल्दी संभव हो छोड़ दें और तनाव से मुक्ति पाएं। कारण, तनाव वाली जगह पर काम करने पर न केवल आपकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि आप तनावग्रस्त भी होती जाएंगी। इसका नतीजा यह होगा कि आप हमेशा अस्वस्थ बनी रहेंगी। जाहिर है, अस्वस्थ रहकर कोई भी काम सपलतापूर्वक अंजाम नहीं दिया जा सकता। काम की लिस्ट तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि काम को उसकी प्राथमिकता के हिसाब से बांट लिया जाए। इसके लिए दिन में किए जाने वाले कामों की उनकी प्राथमिकता के हिसाब से लिस्ट बना लें। उदाहरणस्वरूप सबसे पहले काम से संबंधित जरूरी मीटिंग अटेंड करना। फिर जरूरी मेल भेजना। फिर अपने काम से संबंधित जरूरी चीजों को क्रमानुसार करते जाना। एक बार जब लिस्ट तैयार हो जाए तो हर काम के लिए समय सीमा तय कर लें। ब्रेक लेती रहें खुद को तनाव से बचाने के लिए काम के दौरान थोड़े-थोड़े अंतराल पर ब्रेक लेती रहें। हर दो घंटे के आसपास अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहल लें पानी, चाय या कॉफी पिएं। आप चाहें तो अन्य सहयोगियों से कुछ देर बातचीत भी कर सकती हैं। कुछ जगहों पर आराम करने के लिए कैैंटीन, रेस्ट रूम, रीडिंग रूम या जिम आदि की व्यवस्था भी होती है। अगर आपके कार्यस्थल में ऐसी सुविधाएं हैं तो वहां जाकर दिमाग को हल्का करें। खुद की देखभाल स्वास्थ्य के लिहाज से यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपनी पर्याप्त देखभाल करें। शरीर को पोषण पहुंचाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक चीजों का सेवन करें। यदि आप उन लोगों में से हैं, जो काम के चक्कर में लंच को इग्नोर कर देते हैं तो सबसे पहले इस आदत को सुधारने की जरूरत है। लंच बॉक्स अपने साथ ऑफिस जरूर ले जाएं और रोजाना टाइम पर उसका सेवन करें। अगले दिन काम के दौरान तरोताजा रहने के लिए पर्याप्त नींद जरूर लें। मसल्स टोनिंग और बॉडी स्ट्रेंथनिंग जैसी एक्सरसाइज को भी अपने रुटीन का हिस्सा बनाएं। साथ ही सुबह या शाम के समय कुछ देर अवश्य टहलें। आप मेडिटेशन और योगा भी कर सकती हैं। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी और आपका सारा काम खुशी-खुशी और आसानी से होगा।  

पुरुषों को दीवाना बना देती है हाई हील

अगर आप भी पुरुषों को अपना दीवाना बनाना चाहती हैं तो हाई हील पहनना शुरु कर दीजिए क्योंकि हाई हील पहनने वाली महिलाओं की मदद के लिए पुरुष अधिक आतुर रहते हैं। एक नए शोध से पता चला है कि महिलाओं की हाई हील महिलाओं के प्रति होने वाले पुरुषों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है। इस शोध से बात सिद्ध हुई है कि जैसे-जैसे महिलाओं की हील में वृद्धि होती गयी वैसे ही पुरुष भी उनकी सहायता करने के लिए अधिक उत्साहित थे। फ्रांस के रिसर्चर निकोलस गुइगुइन के अनुसार पुरुषों की तरह अन्य महिलायें इससे प्रभावित नही होती। शोध के अनुसार महिलाओं के विभिन्न प्रकार के जूतों की तरह उनके प्रति पुरुषों का व्यवहार भी अलग-अलग होता है। सर्वे के अनुसार फ्लैट जूते की जगह जब महिलाओं ने हाई हील पहनी हुई थी तो पुरुषों ने उनकी बातों का बहुत आसानी से और अच्छी तरह पालन किया। एक अन्य प्रयोग में शोधकर्ता ने पाया कि एक बार में जब एक महिला फ्लैट जूतों की जगह हाई हील पहन कर आ गयी तो पुरुष उससे चैटिंग करने लग गये। इस शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि महिलाओं की हाई हील से पुरुष महिलाओं के प्रति आकर्षित होते हैं।  

टैबलेट मार्केट में धमाका! Redmi ला रहा है 12000mAh बैटरी वाला नया Pad 2 Pro

नई दिल्ली नए साल की शुरुआत के साथ ही शाओमी चौंकाने वाली है। शाओमी का सब ब्रैंड ‘रेडमी’ भारत में 6 जनवरी को अपना नया स्‍मार्टफोन Redmi Note 15 लॉन्‍च करने जा रहा है। अब जानकारी आई है कि कंपनी Redmi Pad 2 Pro नाम से नया टैबलेट भी उसी दिन पेश करेगी। इस टैबलेट की सबसे बड़ी खूबी होने वाली है बैटरी। रेडमी पैड 2 को सबसे बड़ी बैटरी वाले टैबलेट के तौर पर लॉन्‍च किया जाएगा। यह 12 हजार एमएएच कैपिसिटी होगी। दुनिया में इतनी बड़ी बैटरी क्षमता वाला टैब अबतक पेश नहीं किया गया है। Redmi Pad 2 Pro की प्रमुख खूबियां Redmi Pad 2 Pro टैबलेट के भारतीय मॉडल के स्‍पेसिफ‍िकेशंस अभी सामने नहीं आए हैं। हालांकि ग्‍लोबल मार्केट में यह टैब पहले से उपलब्‍ध है। वहां मौजूद फीचर्स की बात की जाए तो इसमें 12.1 इंच का 2.1K डिस्‍प्‍ले दिया गया है, जो 120 हर्त्‍ज के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसकी 12 हजार एमएएच की बैटरी 27 वॉट की चार्जिंग काे सपोर्ट करती है। भारतीय मॉडल में कितने वॉट की चार्जिंग मिलेगी, अभी कन्‍फर्म नहीं है। ग्‍लोबल वेरिएंट में 7एस जेन4 चिपसेट को इस्‍तेमाल किया गया है। डिस्‍प्‍ले में डॉल्‍बी विजन का सपोर्ट भी है। 4 स्‍पीकर्स का सपोर्ट ऐसा कहा जाता है कि Redmi Pad 2 Pro को क्‍वॉड स्‍पीकर सेटअप के साथ लाया जा सकता है, जिसमें डॉल्‍बी एटमॉस का सपोर्ट होगा। टैब के ग्‍लोबल मॉडल में भी यही सुविधा मिलती है। इससे यह टैबलेट काफी लाउड और क्र‍िस्‍प साउंट जनरेट कर सकता है। कहा जा रहा है कि यह टैबलेट फ्रंट और बैक साइड में 8 मेगापिक्‍सल का कैमरा ऑफर कर सकता है, जिससे ऑनलाइन क्‍लास आद‍ि में इसे इस्‍तेमाल करना सुविधाजनक हो जाएगा। लॉन्‍च हो सकता है सिम मॉडल सूत्रों की मानें तो Redmi Pad 2 Pro को वाईफाई मॉडल के अलावा, सिम सपोर्ट करने वाले मॉडल के साथ भी लाया जा सकता है। यह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी को सपोर्ट कर सकता है, जिससे उन यूजर्स के लिए टैबलेट इस्‍तेमाल करना सुविधाजनक हो जाएगा, जिनके यहां ब्रॉडबैंड सर्विस नहीं है। कहा जा रहा है कि टैब में मिलने वाला सिम सपोर्ट सिर्फ इंटरनेट तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसे कॉलिंग के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

फास्ट फूड से स्वास्थ्य का खतरा, 16 साल की लड़की की मौत ने उठाए गंभीर सवाल, AIIMS पूर्व डायरेक्टर ने आगाह किया

नई दिल्ली हाल के दिनों में फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से एक छात्रा की मौत की खबर ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में फास्ट फूड बच्चों और युवाओं की डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा बनता जा रहा है, लेकिन इसके गंभीर स्वास्थ्य नतीजों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. AIIMS के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एम मिश्रा ने सेहत को लेकर बड़ा और गंभीर बयान दिया है. फास्ट फूड खाने से 12 साल तक उम्र कम हो सकती है उन्होंने कहा कि फास्ट फूड सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसका असर एकदम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है. लंबे समय तक फास्ट फूड खाने से इंसान की उम्र करीब 12 साल तक कम हो सकती है. अगर इसे ज्यादा मात्रा में और लगातार खाया जाए, तो यह धीरे-धीरे मौत की वजह भी बन सकता है. डॉ. मिश्रा ने साफ कहा कि फास्ट फूड का नुकसान समय के साथ सामने आता है, लेकिन प्रदूषित खाना या गंदा पानी शरीर पर तुरंत असर डालता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. अमरोहा के मामले अमरोहा के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस केस में आशंका है कि बच्ची ने प्रदूषित खाना या पानी लिया था, जिससे उसे टायफायड हो गया. शुरुआत में इलाज सही तरीके से नहीं हो पाया. बाद में पेट में अल्सर बना, तेज दर्द हुआ और हालात इतने बिगड़े कि आंत फट गई. इसके बाद शरीर में ज़हर फैल गया, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई. डॉ. मिश्रा ने बताया कि AIIMS में बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि जब बच्ची को AIIMS लाया गया, तब उसकी हालत पहले से ही बहुत खराब थी. शुरुआती स्तर पर टायफायड का सही इलाज न हो पाने की वजह से बीमारी जानलेवा बन गई. लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज कराएं फिलहाल डॉक्टरों का अनुमान यही है कि प्रदूषित खाना खाने से बच्ची को टायफायड हुआ, जिसने आगे चलकर गंभीर रूप ले लिया. डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि साफ-सफाई का ध्यान रखें, बाहर का गंदा खाना-पानी न लें और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत सही इलाज कराएं.

फोन को टैबलेट में बदलने का आसान तरीका, बस ऑन करनी है ये छुपी हुई सेटिंग

नई दिल्ली लोग एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को उसके कस्टमाइज होने की काबिलियत के चलते पसंद करते हैं। एक एंड्रॉयड ओएस में ऐसे कई छिपे हुए फीचर्स मिल जाते हैं, जिनके बारे में एक आम यूजर को दूर-दूर तक कोई अंदाजा नहीं होता। इनमें से एक खास फीचर है फोन को टैबलेट में बदल देने का फीचर। दरअसरल अगर आप अपने फोन की एक सीक्रेट सेटिंग को ऑन कर दें, तो आपके फोन टैबलेट की तरह दिखने और इस्तेमाल किए जाने लायक बन जाता है। दरअसल हम बात कर रहे हैं फोन के यूआई और सॉफ्टवेयर की जिसे आप एक टैबलेट के यूआई या सॉफ्टवेयर जैसा बना सकते हैं। इसके लिए हर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में एक छिपी हुई सेटिंग दी जाती है। इस सेटिंग तक पहुंचने के लिए आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना पड़ता है। इसके बाद आप भी अपने फोन को टैबलेट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। चलिए इस खास फीचर के बारे में डिटेल में जानते हैं। आसान है फोन में टैबलेट मोड ऑन करना अगर आप अपने फोन में टैबलेट मोड को ऑन करना चाहते हैं, तो ऐसा करना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने फोन में छिपी हुई डेवलपर्स सेटिंग्स को ऑन करना होगा। डेवलपर्स सेटिंग्स को ऑन करने के लिए अपने फोन की सेटिंग में जाकर आपको About Phone में Build Number या 7 से 10 बार टैप करना होगा। इसके बाद आपके फोन में डेवलपर्स सेटिंग्स ऑन हो जाएंगी। डेवलपर्स सेटिंग्स में आपको Minimum width या Smallest width नाम का ऑप्शन मिलेगा। यह सेटिंग आमतौर पर 360 के आसपास सेट होती है। इस नंबर को बढ़ाकर आप डिस्प्ले का साइज बढ़ा या घटा सकते हैं। ऐसे में अगर आप इसे काफी बढ़ा दें, तो आपके फोन का UI टैबलेट के UI जैसा दिखने लगता है। चलिए अब समझते हैं इस सेटिंग को ऑन करने का फायदा क्या है? ऐप्स चलाने में आएगा मजा फोन में टैबलेट स्टाइल UI चलाने का सबसे बड़ा फायदा ऐप्स में देखने को मिलता है। इससे फोन की सेटिंग्स भी टैब की तरह बाईं और दाईं ओर दो हिस्सों में दिखने लगती है। इसके अलावा अगर आप फाइल मैनेजर ऐप में जाएं, तो फोल्डर और प्रीव्यू साइड-बाय-साइड नजर आते हैं। इसी तरह मैसेजिंग ऐप भी फोन में टैबलेट के लुक्स के साथ खुलती है, जिसमें चैट लिस्ट और बातचीत एक साथ खुली रहती है। इसके इस सेटिंग को ऑन करके वेब ब्राउज करने में भी काफी सहूलियत होती है। इसमें क्रोम ब्राउजर में आपको डेस्कटॉप जैसा इंटरफेस देखने को मिलता है। कहने का मतलब है कि आजकल के बड़े स्क्रीन वाले स्मार्टफोन्स की स्क्रीन का आप और फायदा उठाना चाहें, तो इस सेटिंग को ऑन करके अपने UI को थोड़ा बड़ा और खुला-खुला बना सकते हैं। ट्यूनिंग से बेहतर हो सकता है एक्सपीरियंस इस मोड को ऑन करने के बाद अपने फोन के हिसाब से आपको थोड़ी ट्यूनिंग जरूर करनी पड़ेगी। दरअसल हर स्मार्टफोन की स्क्रीन का साइज अलग होता है, ऐसे में आप Minimum width या Smallest width नाम के ऑप्शन पर नंबर्स को बढ़ा-घटा कर देख सकते हैं कि आपके फोन की स्क्रीन के साइज के लिहाज से क्या बेहतर है। सही साइज मिल जाए, तो फॉन्ट के साइज को थोड़ा घटा-बढ़ा कर आप फोन में टैबलेट के UI को इस्तेमाल के लायक बना सकते हैं। इसके अलावा आप क्विक सेटिंग्स पैनल को री-अरेंज करके और विजेट्स का साइज बदल कर इसे अपने अनुसार ज्यादा बेहतर बना सकते हैं। इन छोटे-छोटे बदलावों से टैबलेट-स्टाइल UI ज्यादा संतुलित और आरामदायक लगता है, खासकर अगर आप इसे रोज इस्तेमाल करने वाले हों। इस मोड की कमियों को जान लें हर फोन की तरह इस सेटिंग में भी कुछ कमियां देखने को मिल सकती हैं। दरअसल क्योंकि हर ऐप टैबलेट के हिसाब से ऑप्टिमाइज नहीं होता इसलिए कई ऐप्स इस मोड में आपको छोटे दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके पास बड़े स्क्रीन साइज का फोन है, तो इस मोड को इस्तेमाल करने में आपको मजा आएगा। हालांकि अगर आप कॉम्पैक्ट फोन इस्तेमाल करते हैं, तो इस मोड को इस्तेमाल करने में शायद आपको मजा न आए।

आंवले का जादू: सेहत के लिए क्यों है यह जरूरी

आंवले का सेवन सेहत के लिए बहुत जरूरी है। इसके नियमित सेवन से न केवल स्वास्थ्य सही रहता है, बल्कि सुंदरता भी बढ़ती है… आवला को यदि गुणों की खान कहा जाए तो गलत न होगा। सर्दी के मौसम में मिलने वाला आंवला बहुत सारे गुणों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है। वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सतीश चंद्र शुक्ला का कहना है कि अगर जाड़े के मौसम में प्रतिदिन आंवले का सेवन किया जाए तो शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहेगा। -आंवला बहुत सारे रोगों से राहत दिलाता है। इसमें कई सारे विटामिन्स और मिनरल्स जैसे विटामिन ए, बी-6, थियामिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, कैरोटीन, कॉपर, पोटैशियम, मैंग्नीज आदि पाए जाते हैं। इसमें कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। -आंवले को कई प्रकार से खाया जा सकता है। आप चाहें तो इसे कच्चे रूप में खा सकते हैं। इसका जूस भी निकाला जा सकता है। इसकी चटनी बनाने के साथ ही इसका हलुआ भी बनाया जा सकता है। आंवले के लच्छों को मीठा या नमकीन बनाकर खाया जा सकता है। इसका मुरब्बा तो हर मौसम में खाया जाता है। आंवला के रस को शहद या एलोवेरा में मिलाकर लिया जा सकता है। -आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी के कारण आंवला बालों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से न केवल बालों की ग्रोथ अच्छी होती, बल्कि उनमें चमक भी आती है और बालों का गिरना भी कम हो जाता है। इसके रस को बालों की जड़ों में लगाने से भी लाभ मिलता है। -विटामिन ए और कैरोटीन से भरपूर होने के कारण आंवला आंखों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से न केवल आंखों की रोशनी सही रहती है, बल्कि वे कई सारी समस्याओं से भी बची रहती हैं। -आंवले में मौजूद कैल्शियम दांतों, नाखूनों, त्वचा और हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे त्वचा में निखार भी आता है। इसमें मिलने वाला प्रोटीन शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रखता है। -डाइबिटीज वाले लोग भी आंवले का सेवन कर सकते हैं। इसमें मिलने वाला क्रोमियम ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखता है। हां, यह ध्यान रखें कि बगैर शक्कर वाले आंवले का ही सेवन करें। -आंवले में पानी भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इसके सेवन करने पर पेशाब के साथ शरीर के हानिकारक तत्व जैसे अतिरिक्त पानी, नमक और यूरिक एसिड बाहर हो जाते हैं। यही कारण है कि यह किडनी को स्वस्थ रखने में भी सहायक है। -इसमें फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। फाइबर हमारे पाचन तंत्र अर्थात पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसके सेवन से कब्ज की शिकायत दूर होती है। साथ ही डायरिया होने का भी खतरा नहीं रहता है। -आंवले में मिलने वाले पोषक तत्व जैसे आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय को दुरुस्त रखने में बहुत सहायक हैं। आंवले के नियमित सेवन से हृदय में रक्तसंचार सही रूप से होता है। यह कोलेस्ट्राल के स्तर को भी सही रखता है। -पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण आंवला एंटी एजिंग का भी काम करता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के संक्रमण से बचाव करता है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है। सर्दी-जुकाम से बचाव करने के साथ ही यह एनीमिया होने से भी बचाता है। एक्ने और पिंपल्स से भी बचाव करने में भी यह सहायक है।  

शिफू एप के साथ सब कुछ याद रखें

कई बार आप परिवार, मित्रों और सहयोगियों को बर्थडे, एनिवर्सरी या अन्य महत्वपूर्ण दिनों पर शुभकामना देना भूल जाते हैं और बाद में सॉरी के साथ विश करना पड़ता है। अब शिफू एप के जरिए आपको इस परेशानी का हल मिल जाएगा। यह एक इंटेलीजेंट टास्क मैनेजर और रिमाइंडर एप है, जो आपके फोन के तमाम डाटा को परख कर आपको अच्छे सुझाव देगा। लॉग इन करने के लिए आप फेसबुक अकाउंट का प्रयोग कर सकते हैं, जिससे शिफू अपने आप सारे जन्मदिन याद कर लेता है और आपको शुभकामनाएं देने का रिमाइंडर दे देता है। शिफू में आप चार तरह के रिमाइंडर या टास्क सेट कर सकते हैं। सबसे पहला है इंटरनेट कनेक्शन पर आधारित टास्क, आप किसी भी नेटवर्क पर शिफू का रिमाइंडर प्रोग्राम सेट कर सकते हैं। दूसरा टास्क है लोकेशन बेस्ड, जिसमें यह आपको किसी जगह पहुंचने पर वहां से जुड़ा टास्क याद दिला देता है। तीसरा टास्क है किसी व्यक्ति को कॉल करते समय एप आपको उससे खास बात करने के लिए रिमाइंडर देता है। चैथे में यह एप आपके फ्री टाइम और लोकेशन के आधार पर इंटेलीजेंट सजेशन भी देता है, जिससे आप अपना समय ज्यादा अच्छी तरह बिता सकें।  

बिना फ्रिज के भोजन को लंबे समय तक ताजा रखने के आसान तरीके

अगर आप अपने घर से दूर रहते हैं जहां आप के पास फ्रिज की व्यवस्था नहीं है, तो उस दौरान फल और सब्जियों को सुरक्षित रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यही नहीं अगर रात का बचा हुआ भोजन सुबह तक चलाना हो तो भी बड़ी कठिनाई आती है। बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो बिजली का खर्चा बचाने के लिये भी फ्रिज का इस्तमाल नहीं करते। मगर दूध या मीट आदि अगर ठंडे स्थान पर ना रखा जाए तो वह जल्दी खराब हो जाता है। हांलाकि ऐसा नहीं है कि अगर आपके पास फ्रिज नहीं है तो कोई खाद्य पदार्थ सुरक्षित नहीं रह सकता। आप अपने खाने को बड़ी ही आराम से सुरक्षित रख सकते हैं, हमारे ये टिप्स पढ़ कर। हम आपको ऐसे आसान से उपाय बताएंगे जिनकी मदद से आप रसोई में बचे हुए भोजन या फिर साग-सब्जियों को बिल्कुल सुरक्षित रा सकते हैं। आइये जानते हैं वह उपाय… पानी का भरा कटोरा सब्जियों को अगर सुरक्षित रखना हो तो उसे ठंडे पानी के कटोरे में रखें। इससे पानी में रखी हुई सब्जी जल्दी खराब नहीं होगी। लेकिन कोशिश करें कि इन्हें कुछ ही दिनों में खा कर खतम कर दें नहीं तो यह लंबे समय नहीं चलेंगी। ठंडी हवा में अगर रात में खाना बच जाए तो उसे कटोरे में रख कर किसी खुली हुई खिड़की के सामने रख दें, जिससे ठंडी हवा के बहाव से वह खराब ना हो। यदि आपके घर पर कूलर या एसी की व्यवस्था तो भी यह काम आसानी से किया जा सकता है। बर्फ का कटोरा भोजन को किसी बर्फ से भरे कटोरे में रख कर लंबे समय तक आराम से चलाया जा सकता है। बस आपको कहीं से बर्फ का इंतजाम अपने आप करना होगा। वैसे मार्केट में आइस क्यूब्स कम दामों में उपलब्ध हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि आप बर्फ में केवल सब्जियां और फलों को ही सुरक्षित रख सकती हैं बल्कि कई और भी खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं। सुखा कर कुछ खाद्य पदार्थ को आप सूरज की धूप में सुखा कर भी कई दिनों तक चला सकती हैं।  

AI की दुनिया में भारत सबसे आगे, जानें टॉप पर पहुंचने के कारण

नई दिल्ली भारत ने 'वर्ल्ड एआई एडवांटेज' स्कोर में 53 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यह स्कोर दुनिया के औसत 34 अंकों से काफी ज्यादा है। यह स्कोर दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से काम करने वाले लोगों को कितना समय बच रहा है। यह जानकारी ईवाई कंपनी की 2025 वर्क रीइमेजिंड सर्वे से आई है। इस सर्वे में पता चला है कि भारत में एआई का असली फायदा काम की जगह पर साफ दिख रहा है। हाल ही स्टैनफोर्ड की ओर से जारी हुए AI इंडेक्स में भारत ने तीसरी रैंक हासिल की थी। AI से काम आसान और अच्छा होता है रिपोर्ट बताती है कि भारत जेनरेटिव एआई को अपनाने में सबसे तेज देशों में शामिल है। यहां के कई कर्मचारी कहते हैं कि इस तकनीक से उनका काम ज्यादा अच्छा और जल्दी हो जाता है। करीब 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी काम पर नियमित रूप से इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। बॉस और कर्मचारी दोनों मानते हैं कि एआई से फैसले लेना आसान होता है और काम की क्वालिटी भी अच्छी है। टैलेंट हेल्थ स्कोर रहा सबसे अच्छा भारत का टैलेंट हेल्थ स्कोर 82 अंक है, जो सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे ज्यादा है। यह स्कोर देखता है कि कर्मचारी अपनी कंपनी के कल्चर, मिलने वाले इनाम और सीखने के मौकों के बारे में कैसा महसूस करते हैं। दुनिया का औसत स्कोर सिर्फ 65 है। भारत में ज्यादातर कर्मचारी कहते हैं कि उनके मैनेजर उन्हें भरोसा देते हैं और ज्यादा अधिकार देते हैं। इससे वे खुद को मजबूत महसूस करते हैं। तेजी से अपनाया गया है AI ईवाई इंडिया के पार्टनर अनुराग मलिक ने कहा कि भारत ने AI अपनाने में बड़ी प्रगति की है। कंपनियां अब सोच-समझकर प्रोडक्शन, कर्मचारियों की स्किल्स और उनके अनुभव को बैलेंस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि असली फायदा तब मिलता है जब कंपनियां तकनीक का इस्तेमाल कर्मचारियों की सेहत और काम करने की ताकत बढ़ाने के लिए करती हैं। कंपनियां एआई सिखाने के काम पर ध्यान दे रही हैं रिपोर्ट के अनुसार, रिवॉर्ड टैलेंट हेल्थ स्कोर में करीब 32 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। भारत में कर्मचारी बोनस (40 प्रतिशत), फ्लेक्सिबल वर्क के समय (33 प्रतिशत), रहन-सहन के हिसाब से वेतन (32 प्रतिशत) और हेल्थ बेनेफिट्स (31 प्रतिशत) को सबसे जरूरी मानते हैं। लेकिन कंपनियां बोनस के साथ-साथ एआई स्किल्स सिखाने पर भी बराबर ध्यान दे रही हैं (34 प्रतिशत)। इससे कर्मचारी ज्यादा खुश रहते हैं।