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त्वचा बनेगी दमकती और स्मूद: आज़माएँ ये 5 नेचुरल बॉडी स्क्रब्स

जितना ध्यान हम अपने चेहरे पर देते हैं, उतना ध्यान हम अपने शरीर के बाकी हिस्सों पर नहीं देते। इसके कारण बॉडी पर डेड सेल्स जमा होने लगते हैं और त्वचा रूखी व बेजान नजर आती है। इसलिए हफ्ते में एक बार एक्सफोलिएट करना काफी जरूरी है। बॉडी एक्सफोलिएट करने के लिए आप घर पर भी कुछ नेचुरल चीजों की मदद से बॉडी स्क्रब बना सकते हैं। प्राकृतिक होने की वजह से ये स्किन को नुकसान भी नहीं पहुंचाते और त्वचा मुलायम व चमकदार भी बनती है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 नेचुरल बॉडी स्क्रब्स के बारे में, जो डेड सेल्स को साफ करके आपकी त्वचा में नई जान फूंक देंगे। चीनी और नींबू का स्क्रब चीनी एक नेचुरल एक्सफोलिएंट है। इसके छोटे दाने त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना डेड सेल्स को हटा देते हैं। वहीं, नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड त्वचा की गहराई से सफाई करता है और उसकी रंगत को निखारता है। बनाने की विधि- दो चम्मच चीनी में एक चम्मच नींबू का रस और आधा चम्मच नारियल या बादाम का तेल मिलाएं। इस पेस्ट को शॉवर लेते समय गीली त्वचा पर हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करें। फिर ठंडे पानी से धो लें। यह स्क्रब त्वचा को कोमल और चमकदार बनाएगा। कॉफी स्क्रब कॉफी न सिर्फ आपको सुबह की एनर्जी देती है, बल्कि यह आपकी त्वचा के लिए भी वरदान साबित हो सकती है। कॉफी के दाने डेड सेल्स को हटाने का बेहतरीन काम करते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को टाइट करते हैं और सेल्युलाईट की समस्या को कम करने में मददगार हैं। बनाने की विधि- दो चम्मच कॉफी पाउडर लें। इसमें एक चम्मच दही और एक चम्मच शहद मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इससे पूरे शरीर की मसाज करें और 10 मिनट बाद नहा लें। इससे त्वचा मुलायम और सॉफ्ट हो जाएगी। बेसन और दही का स्क्रब यह नुस्खा सदियों से भारतीय घरों में इस्तेमाल हो रहा है। बेसन त्वचा से गंदगी और डेड सेल्स को साफ करने का काम करता है, वहीं दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को प्राकृतिक रूप से मॉइश्चराइज और एक्सफोलिएट करता है। बनाने की विधि- दो चम्मच बेसन में दो चम्मच दही और एक चुटकी हल्दी मिलाएं। इसे अपने शरीर पर लगाएं और सूखने दें। जब यह हल्का सूख जाए, तो गीले हाथों से हल्के-हल्के रगड़ते हुए स्क्रब करें और फिर पानी से धो लें। यह स्क्रब रंगत निखारने में भी बहुत कारगर है। ओटमील और शहद का स्क्रब अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है और आसानी से इरिटेट हो जाती है, तो ओटमील और शहद का स्क्रब आपके लिए परफेक्ट है। ओटमील में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा को शांत करते हैं, जबकि शहद एक नेचुरल मॉइश्चराइजर और एंटीबैक्टीरियल एजेंट है। बनाने की विधि- दो चम्मच बारीक पिसा ओटमील लें। इसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को नम त्वचा पर लगाएं और 5-7 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करने के बाद धो लें। यह स्क्रब त्वचा को कोमलता और चमक देगा। सी सॉल्ट और ऑलिव ऑयल का स्क्रब सी सॉल्ट में मौजूद मिनरल्स त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। ऑलिव ऑयल गहराई से मॉइश्चराइज करता है। बनाने की विधि- आधा कप सी सॉल्ट में एक चौथाई कप एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल मिलाएं। आप इसमें अपनी पसंद के एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं। इस मिश्रण से पूरे बॉडी की स्क्रबिंग करें और फिर गुनगुने पानी से नहा लें। यह स्क्रब आपकी त्वचा और मन दोनों को तरोताजा कर देगा।  

ब्लड ग्रुप से जुड़ा बड़ा खुलासा — जानिए कौन-से लोग हैं अधिक जोखिम में

क्या आप जानते हैं कि आपका रक्त समूह न केवल यह तय करता है कि आप किसे रक्तदान कर सकते हैं या किससे रक्त प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि यह आपके समग्र स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा होता है? विशेषज्ञों का कहना है कि हमारा रक्त समूह विभिन्न बीमारियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है। पोषण विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक डॉ. शेल्डन ज़ब्लो बताते हैं कि व्यक्ति का रक्त समूह उसकी कई शारीरिक प्रवृत्तियों और रोगों के खतरे को निर्धारित करता है। उनका कहना है, “रक्त समूह के आधार पर किसी व्यक्ति में अलग-अलग बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।” हृदय रोग का खतरा डॉ. ज़ब्लो के अनुसार, रक्त समूह AB और B वाले लोगों में हृदय रोग की संभावना अधिक होती है। इसका कारण है, शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल और प्रोटीन की अधिक मात्रा, जो रक्त के थक्के बनने से जुड़ी होती है। वहीं, रक्त समूह O वाले व्यक्तियों में हृदय संबंधी समस्याएँ अपेक्षाकृत कम पाई जाती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे लोग प्रदूषित वातावरण से दूर रहें, घर के अंदर व्यायाम करें, हृदय के लिए संतुलित आहार लें, धूम्रपान से बचें और नियमित रूप से हृदय की जांच करवाएँ। पेट के अल्सर का जोखिम हालाँकि O रक्त समूह वाले लोग हृदय के मामले में कुछ हद तक सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इन्हें पेट के अल्सर का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, A रक्त समूह वाले व्यक्तियों में पेट के कैंसर का खतरा ज़्यादा देखा गया है। स्वस्थ रहने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आहार में साबुत अनाज, मछली, फल और सब्ज़ियाँ शामिल करें, नियमित रूप से कम से कम 40 मिनट व्यायाम करें और धूम्रपान से दूरी बनाए रखें। दृष्टि क्षीणता और स्मृति हानि AB रक्त समूह वाले लोगों में उम्र बढ़ने के साथ दृष्टि कमजोर होने की समस्या विकसित हो सकती है। इसके अलावा, रक्त में प्रोटीन असंतुलन के कारण इन लोगों में स्मृति हानि की संभावना भी बढ़ जाती है। रक्त का थक्का जमना और स्ट्रोक का खतरा A और B रक्त समूह वाले व्यक्तियों में रक्त का थक्का जमने की समस्या अधिक देखी जाती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। तनाव और मानसिक स्वास्थ्य यदि आपका रक्त समूह A है, तो तनाव प्रबंधन आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डॉ. ज़ब्लो के अनुसार, इस समूह वाले लोग तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का अधिक स्राव करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। स्वस्थ मानसिक स्थिति बनाए रखने के लिए, नियमित व्यायाम करें और हर रात कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद अवश्य लें।

अब Google Maps सड़क पर ऐसे दिखाएगा रास्ता, बदल जाएगा ड्राइविंग एक्सपीरियंस

नई दिल्ली Google Maps के लिए नए फीचर का ऐलान हो गया है,  जिसकी मदद से अब कार चालक को लेन नेविगेशन की भी सुविधा मिलेगी. ये आपके सफर को आसान बनाएगा और गलत रास्तों पर भी जाने से रोकेगा. Google ने इस फीचर की जानकारी ब्लॉग में दी है. यह काफी कुछ आपको एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसा है.  Google ब्लॉग के मुताबिक, गूगल मैप्स में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) पावर्ड लाइव लेन गाइडेंस फीचर को इंट्रोड्यूस्ड किया है. कंपनी ने इस फीचर को बेहतर तरीके से समझाने के लिए एक छोटा का वीडियो भी ब्लॉग में एम्बेड किया है.  ऐसे काम करेगा AI-पावर्ड लाइव लेन फीचर वीडियो में बताया है कि AI-पावर्ड लाइव लेन गाइडेंस फीचर कैसे काम करेगा. वीडियो में दिखाया है कि जब कार रोड पर बनी लेन से बाहर जाएगी को ड्राइवर को संकेत दिए जाएंगे कि गाड़ी की लेफ्ट या राइट कर लें. मोड़ या फ्लाइओवर से पहले कई बार लेन बदलने की जरूरत होती है.  Google Maps का नया फीचर का फायदा  सफर के दौरान जब कोई मोड़ या फ्लाईओवर आता है तो नई लोकेशन पर कार ड्राइवर को वक्त रहते पता नहीं चल पाता है कि कार को किस लेन में लेकर जाना है. ऐसे में वह गलत रोड या गलती से फ्लाईओवर पर चढ़ जाते हैं. अब नया AI-पावर्ड लाइव लेन गाइडेंस फीचर आने के बाद ये गलती नहीं होगी.  आफ्टर मार्केट के डैशकैम का ADAS जैसा फीचर Google Maps का ये नया फीचर आपको आफ्टर मार्केट में सेल होने वाले डैश कैम के ADAS फीचर जैसा लग सकता है. उन डैशकैम में ADAS के नाम पर लेन बदलने पर अलर्ट मिलता है और ड्राइवर को सही लेन में जाने की सलाह दी जाती है.  इन कार को मिलेगा पहले अपडेट  Google Maps ने AI-पावर्ड लाइव लेन गाइडेंस फीचर की शुरुआत Google बिल्ट-इन वाली कारों से होगी. इस फीचर को सबसे पहले आने वाले महीनों में अमेरिका और स्वीडन में Polestar 4 कारों पर उपलब्ध कराया जाएगा. इसके बाद यह फीचर अन्य रोड टाइप्स और ज्यादा कार मॉडलों पर भी रोलआउट किया जाएगा, जिसके लिए गूगल पार्टनरशिप भी कर रहा है. 

यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव – ChatGPT से नहीं मिल पाएगी मेडिकल, वित्तीय या कानूनी सलाह

नई दिल्ली एआई चैटवाट अपने उपयोग कर्ताओं को मेडिकल, वित्तीय और कानून से संबंधित सलाह नहीं देगा।चैट जीपीटी की पेरेंट कंपनी ने मुकदमे बाजी और जिम्मेदारी से बचने के लिए,भारत के प्लेटफार्म पर यह कदम उठाया है। कंपनी का कहना है, यह कदम चैट जीपीटी का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और उनकी कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए यह निर्णय लिया है। वर्तमान निर्णय के पश्चात अब चैटवाट मुकदमे से बचने के लिए कानूनी जानकारी, निवेश इत्यादि से संबंधित  तथा स्वास्थ्य से संबंधित दावों के बारे में सुझाव और सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेगा। कंपनी को डर है,  जिस तरह की जानकारी चैट जीपीटी द्वारा दी जाती है।भारत में उस जानकारी को लेकर मुकदमेबाजी का शिकार होना पड़ सकता है। जिसके कारण कंपनी ने जिम्मेदारी से हटा लिया है। अब उपयोगकर्ता अपने स्तर पर निर्णय करेगा, उसे वह जानकारी सही लगती है, या गलत है। अब क्या बदल जाएगा? नए नियमों के बाद ChatGPT यूजर्स को दवाओं के नाम, उनकी मात्रा, मुकदमे की टेंपलेट, कानूनी रणनीति और निवेश से जुड़ी सलाह नहीं देगा. अब यह केवल जनरल प्रिंसिपल, बेसिक मैकेनिज्म की जानकारी और लोगों को डॉक्टर, वकीलों और वित्तीय सलाहकारों जैसे प्रोफेशनल्स से कंसल्टेशन करने की सलाह देगा.  29 अक्टूबर से ChatGPT ने इलाज, कानूनी मुद्दों और पैसों के बारे में सलाह देना बंद कर दिया है। यह बॉट अब आधिकारिक तौर पर एक एजुकेशनल टूलहै, न कि एक सलाहकार और नई शर्तें इसे स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। नए नियमों के तहत, अब चैटजीपीटी न ही आप लोगों को दवा का नाम या खुराक का सुझाव देगा, न ही कानूनी रणनीति बनाने में मदद करेगा और न ही निवेश संबंधी खरीद और बिक्री की सलाह देगा। क्यों किया जा रहा है यह बदलाव? पिछले कुछ समय से कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब लोग ChatGPT से मिली सलाह का पालन कर खुद को नुकसान पहुंचा चुके हैं. अगस्त में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने ChatGPT से सलाह लेकर नमक की जगह सोडियम ब्रोमाइड खाना शुरू कर दिया था. इससे उसे मानसिक समस्याएं होने लगीं, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी तरह एक और मामले में अमेरिका के एक 37 वर्षीय व्यक्ति को खाना निगलने में समस्या हो रही थी. उसने ChatGPT से इस बारे में पूछा तो चैटबॉट ने बताया कि कैंसर के कारण ऐसा होना बहुत मुश्किल है. वह व्यक्ति इससे संतुष्ट हो गया और उसने समय पर डॉक्टर से संपर्क नहीं किया. बाद में जब कैंसर चौथी स्टेज पर पहुंच गया, तब जाकर वह डॉक्टर के पास पहुंचा.

कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, अब जीन थेरेपी से बदलेगा इलाज का तरीका

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने जीन थेरेपी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी इम्यूनोएक्ट को फंडिंग प्रदान की है, ताकि जीन वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा सके। इससे कैंसर का इलाज सस्ता और सुलभ हो सकेगा। चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थेरेपी कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी सफलता के रूप में सामने आई है, जो मरीज की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करके कुछ प्रकार के कैंसर से लड़ती है। विश्व स्तर पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल्स में अंतिम चरण के मरीजों, विशेष रूप से एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया से पीड़ितों में यह थेरेपी आशाजनक परिणाम दिखा चुकी है। आईआईटी बॉम्बे की स्पिन-ऑफ कंपनी इम्यूनोएक्ट ने दुनिया की पहली मानवीकृत सीएआर-टी थेरेपी 'नेक्सकार19' को बाजार में उतारा है। आधिकारिक बयान में क्या कहा गया? एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि बायोई3 नीति के तहत जैव विनिर्माण पहल के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने उत्पादन बढ़ाने और इस नई चिकित्सीय पद्धति को अधिक किफायती बनाने के लिए इम्यूनोएक्ट को वित्त पोषण दिया है। इसके तहत 200एल जीएमपी लेंटिवायरल वेक्टर और प्लास्मिड प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा। बयान में कहा गया कि लेंटिवायरल वेक्टर और प्लास्मिड प्लेटफॉर्म में उन्नत बायोरिएक्टर प्रौद्योगिकियां शामिल की जाएंगी, जो उच्च घनत्व वाली कोशिका वृद्धि और निरंतर उत्पादन को आसान बनाएंगी। इससे लेंटिवायरल वेक्टरों की उच्च पैदावार और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा। आगे बताया गया कि जीएमपी ग्रेड जीन डिलीवरी वेक्टर प्रति वर्ष कम से कम 1,000 मरीजों को कोशिका और जीन थेरेपी की सुविधा प्रदान कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) में क्यूएसआईपी क्वांटम सुरक्षा चिप और 25-क्यूबिट क्यूपीयू (भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप) के साथ भारत के तीन प्रमुख नवाचारों में सीएआर-टी सेल थेरेपी को शामिल किया। बयान में जोर दिया गया कि भारत की पहली जीवित दवा 'नेक्सकार19' ने वैज्ञानिक कठोरता या मरीज सुरक्षा से समझौता किए बिना जीन थेरेपी को सस्ती और सुलभ बना दिया है।  

WiFi राउटर पर एल्युमिनियम फॉयल लगाने का ट्रिक — काम करता है या सिर्फ़ मिथ है?

नई दिल्ली घर में वाई-फाई की स्पीड कम होना आम समस्या है। कभी फिल्म देखते समय बफरिंग होती है, तो कभी मीटिंग में सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में लोग कभी राउटर की पोजीशन बदलते हैं तो कभी राउटर ही चेंज कर देते हैं। हालांकि, आपने कभी न कभी तो सुना ही होगया कि एल्युमिनियम फॉयल वाई -फाई राउटर का सिग्नल बढ़ा देती है। ये सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन यह थ्योरी खूब फ्लोट होती है। लेकिन क्या सचमुच एक एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई का सिग्नल बढ़ा सकती है? चलिए, जान लेते हैं कि इस बारे में रिसर्च और एक्सपर्ट क्या कहते हैं। वैज्ञानिकों ने क्या बताया? रीडर्स डाइजेस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि डार्टमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने टेस्ट किया। उन्होंने फॉयल से कवर किया आकार बनाया। कुछ जगहों पर सिग्नल 55% तक बढ़ गया। जहां जरूरत नहीं, वहां 63% तक कम हो गया। इससे पूरा कवरेज बेहतर हुआ। रिसर्च में साबित हुआ कि एल्युमिनियम फॉयल का सही से इस्तेमाल किया जाए तो वाई-फाई सिग्नल बढ़ सकता है। डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर साइंस टीचर और इस रिसर्च की मुख्य वैज्ञानिक जिया झोउ कहती हैं कि एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई सिग्नल को उछालती है। कैसे काम करती है एल्युमिनियम फॉयल? राउटर में एंटीना होता है जो सिग्नल भेजता है। ये सिग्नल रेडियो Waves की तरह हर तरफ फैलते हैं। जैसे पानी की स्प्रिंकलर चारों ओर छिड़काव करती है। इससे सिग्नल कमजोर हो जाता है। दीवारें, फर्श और खिड़कियां इसे रोकती हैं। कुछ जगहों पर सिग्नल पहुंचता ही नहीं। ऐसे में एल्युमिनियम फॉयल को घुमाकर राउटर के पीछे लगाएं। चमकदार साइड अंदर की ओर रखें। यह सिग्नल को रिफ्लेक्ट करता है। सिग्नल एक दिशा में जाता है जहां जरूरत है। जैसे लिविंग रूम या बेडरूम। खिड़की की तरफ जाने वाला सिग्नल रुक जाता है। इससे स्पीड बढ़ती है। हैकर्स का खतरा भी कम होता है एल्युमिनियम फॉयल सिग्नल को घर के अंदर रखती है, बाहर नहीं जाने देती। इससे हैकर्स का खतरा कम होता है। वे सिग्नल पकड़कर डेटा नहीं चुरा सकते। यह पासवर्ड के साथ एक्स्ट्रा सुरक्षा देता है। घर की प्राइवेसी बनी रहती है। हालांकि बताया दें कि यह हैक सभी के लिए परफेक्ट नहीं। लेकिन सस्ता और आसान तरीका है। वाई-फाई एक्सटेंडर खरीदने से पहले आप इसे भी आजमा सकते हैं।

किड्स ईयरबड्स लॉन्च: सेफ्टी और मज़ेदार फीचर्स के साथ आया यह नया गैजेट

नई दिल्ली स्‍मार्टफोन के बाद अगर कोई गैजेट सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया जाता है, तो वो हैं ईयरबड्स। बच्‍चे भी इनके प्रति आकर्षित होते हैं। हालांकि बच्‍चों को ईयरबड्स यूज करने नहीं देने चाहिए, क्‍योंकि उनसे आने वाला साउंड कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस दिक्‍कत को दूर करने की कोशिश की है जेबीएल ने। किड्स ऑडियो कैटिगरी में कदम रखते हुए कंपनी ने JBL Junior Free (जेबीएल जूनियर फ्री) को लॉन्‍च किया है। ये ओपन-ईयर TWS ईयरबड्स हैं, जिन्‍हें बच्‍चों के लिए बनाया गया है। इनमें ऐसी कई खूबियां हैं, जिन्‍हें आपको जानना चाहिए। जेबीएल जूनियर फ्री में 6 बड़ी खूबियां     JBL Junior Free को इस तरह बनाया गया है कि इनसे 85 डेसिबल से ज्‍यादा साउंड नहीं आता।     पैरंटल कंट्राेल की सुविधा मिलती है और पैरंट्स, ऐप की मदद से वॉल्‍यूम कंट्रोल कर सकते हैं।     इनका बैटरी बैकअप 10 घंटे है और सिर्फ 10 मिनट चार्ज करके इन्‍हें 3 घंटे इस्‍तेमाल किया जा सकता है।     इन्‍हें एकसाथ दो डिवाइस से कनेक्‍ट करके यूज किया जा सकता है।     IPX4 रेटिंग मिलती है, जो इन्‍हें पानी की छीटों से होने वाले नुकसान से बचाती है।     ये किड्स फ्रेंडली हैं। इन्‍हें कंट्रोल करने के लिए ईयरबड्स में बटन भी दिए गए हैं। जेबीएल जूनियर फ्री की कीमत जेबीएल जूनियर फ्री को अभी भारत में नहीं लाया गया है। इनकी यूरोप में कीमत 69.99 यूरो है। ये कई कलर ऑप्‍शंस जैसे- पर्पल, टेल और पीच रंग में आए हैं। जेबीएल जूनियर फ्री के प्रमुख फीचर्स जेबीएल जूनियर फ्री को इसलिए बनाया गया है ताकि बच्‍चों को एक सुरक्ष‍ित और कानों के लिए बेहतर लिसनिंग विकल्‍प मिले। जेबीएल के मुताबिक, ईयरबड्स के ओपन डिजाइन की वजह से बच्‍चे ना सिर्फ अच्‍छा साउंड सुन पाते हैं, बल्कि सेफ साउंड उन्‍हें मिलता है। इनका डिजाइन ऐसा है कि बच्‍चा अपने आसपास के माहौल को भी सुन पाता है। पैरंटल कंट्रोल होने से यह फायदा है कि भले ईयरबड बच्‍चे के कान में लगता है कि लेकिन पैरंट्स उसे अपने स्‍मार्टफोन से कंट्रोल कर सकते हैं। किड्स ईयरबड्स की जरूरत क्‍यों? मौजूदा वक्‍त में ईयरबड्स बड़े पैमान पर इस्‍तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन उन्‍हें बड़े लोगों के कानों के लिए डिजाइन किया जाता है, जो मैक्‍स‍िमम वॉल्‍यूम पर काफी लाउड बजते हैं। इन ईयरबड्स को बच्‍चे इस्‍तेमाल करें तो उनके कानों को नुकसान हो सकता है। किड्स ईयरबड्स इसका विकल्‍प बन रहे हैं। यही वजह है कि अब ऑडियो ब्रैंड इस कैटिगरी में अपने प्रोडक्‍ट लॉन्‍च कर रहे हैं। प्रेम त्रिपाठी

सर्दी का असर दांतों पर: सेंसिटिविटी से राहत पाने के आसान घरेलू नुस्खे

ठंड का मौसम भले ही सुकूनभरा लगे, लेकिन यह शरीर के साथ-साथ दांतों की सेहत पर भी असर डालता है। इस मौसम में दांतों की सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ठंडे या गर्म खाने-पीने की चीजें दांतों में झनझनाहट और दर्द का कारण बन रही हैं। जयारोग्य अस्पताल के दंत रोग विभाग में रोजाना 25 से 30 मरीज इस समस्या के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सर्दी में घटता है लार का स्राव दंत रोग विभाग के विभागाध्यक्ष और दंत विशेषज्ञ के अनुसार, सर्दियों में तापमान में उतार-चढ़ाव से मुंह के अंदर के सॉफ्ट टिशू सूखने लगते हैं। इससे लार का स्राव कम हो जाता है, जो मुंह की प्राकृतिक सफाई में मदद करता है। लार की कमी के कारण मुंह में बैक्टीरिया बढ़ते हैं और यही कारण है कि कैविटी, मसूड़ों की सूजन और सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि ठंड में लोग पानी कम पीते हैं, जिससे मुंह की नमी घटती है। यही वजह है कि संक्रमण और दांतों के कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है। खाने-पीने के बाद ब्रश करना जरूरी सर्दियों में लोग चाय, कॉफी और स्नैक्स के साथ मीठी चीजें खाने के शौकीन होते हैं। डॉ. खांडे बताते हैं कि मीठा बैक्टीरिया को आकर्षित करता है, जिससे मसूड़ों में संक्रमण और कैविटी की समस्या बढ़ जाती है। अगर मीठा खाएं तो उसके बाद दांत साफ करें। साथ ही, रात में ब्रश किए बिना न सोएं। सेंसिटिव टूथपेस्ट और सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल अगर आपके दांत ठंड में सेंसिटिव महसूस होते हैं, तो सेंसिटिव टूथपेस्ट और सॉफ्ट ब्रिसल ब्रश का प्रयोग करें। ये दांतों को नुकसान पहुंचाए बिना सफाई करते हैं और सेंसिटिविटी कम करने में मदद करते हैं। ठंडे की जगह गुनगुना पानी पिएं दंत विशेषज्ञ डॉ. आशीष माहेश्वरी सलाह देते हैं कि सर्दियों में ठंडा पानी पीने से दांतों की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है, इसलिए हमेशा गुनगुना पानी पिएं। साथ ही बहुत गर्म भोजन करने से भी बचें, क्योंकि यह मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। घरेलू नुस्खे भी हैं कारगर     नमक और सरसों के तेल से हल्की मालिश करने से मसूड़ों में रक्त संचार बढ़ता है और बैक्टीरिया खत्म होते हैं।     लांग चबाने से दांतों के दर्द और झनझनाहट में राहत मिलती है। लांग में मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व संक्रमण को रोकते हैं। सर्दियों में दांतों की आम समस्याएं     कैविटी (दांतों में कीड़े लगना)     झनझनाहट या सेंसिटिविटी     इंफेक्शन या मुंह की बदबू     जबड़ों में दर्द     मसूड़ों में सूजन और रक्तस्राव

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी में Google, तकनीकी दुनिया में मची हलचल

नई दिल्ली दुनियाभर में AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर्स को लेकर काम कर रही हैं. कोई धरती पर या फिर कोई समंदर के अंदर डेटा सेंटर बना रहा है. इस दिशा में Google एक कदम आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. अब गूगल अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम को बनाने जा रहा है, जिसको आगे डेटा सेंटर के रूप में भी यूज किया जा सकेगा. इसको लेकर Google ने एक सफल परीक्षण किया है और सीईओ सुंदर पिचाई ने पोस्ट करके इसकी जानकारी भी दी है.  सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल ने लो अर्थ ऑर्बिट में पाई जाने वाले रेडिएशन की कंडिशन को फॉलो करते हुए एक सफल टेस्टिंग की है. इसमें ट्रिलियम-जनरेशन टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) को टेस्ट किया है.   प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए यह एक बड़ी सफलता है. इस प्रोजेक्ट की मदद से गूगल अपने सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक को पूरा करना चाहते है. कंपनी इसकी मदद से अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम का सेटअप लगाना चाहता है, जिसको सूरज की रोशनी से पावर मिलेगी.   सुंदर पिचाई ने समझाया, TPU क्या है?  गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि TPU असल में खास तरह की चिप्स हैं, जिनको आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के काम को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है. इन चिप्स की टेस्टिंग रेडिएशन एक्सपोजर के दौरान की गई और इन चिप्स पर डैमेज का कोई भी निशान नहीं दिखा है.     सफल टेस्टिंग से इस बात के पॉजिटिव साइन मिलते हैं कि गूगल का एडवांस्ड हार्डवेयर सिस्टम, आउटर स्पेस के खतरनाक एनवायरमेंट का भी सामना करना सकेगा. बताते चलें कि आउटर स्पेस में हाई रेडिशन और तापमान तेजी से बदलता है.  इस प्रोजेक्ट का मकसद सूर्य से आने वाली ऊर्जा को पावर में बदलने का है. इसके लिए सोलर पावर पैनल्स का यूज किया जा सकता है. इस पावर को पृथ्वी के लो ओर्बिट में स्थापित लार्ज स्केल AI कंप्यूटर सिस्टम में ट्रांसफर किया जाएगा.  इस प्रोजेक्ट की जरूरत क्यों पड़ी?  दरअसल, AI मॉडल जैसे ChatGPT, Gemini, Claude आदि को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. बिजली की इस जरूरत को पूरा करने के लिए अगर कोयला, गैस या डीजल का यूज होता है तो काफी ज्यादा प्रदूषण होगा. ऐसे में कंपनी इसको सोलर पावर से चलाना चाहती है, जिसके लिए लो अर्थ ऑर्बिट में पूरा सेटअप लगाने का प्लान बनाया है.   कहां से मिली है प्रेरणा  गूगल को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा मूनशूट प्रोजेक्ट से मिली है, जिसे अब अल्फाबेट की X डिविजन के रूप में जाना जाता है. इस डिविजन का काम अनोखी टेक्नोलॉजी तैयार करना है, जो अधिकतर लोगों की सोच से परे होती हैं. 2027 की दी है डेडलाइन  सुंदर पिचाई ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक चला तो 2027 की शुरुआत तक Planet कंपनी के साथ मिलकर अपने दो प्रोटोटाइप सेटेलाइट लॉन्च करेगी. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे भी लेकर जाएंगे. 

iQOO 15 लाएगा एंड्रॉयड दुनिया में क्रांति — पहली बार मिलेगा ये खास फीचर!

नई दिल्ली 26 नवंबर को पहली बार किसी एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन में एक ऐसा फीचर आने वाला है, जो फ्लैगश‍िप स्‍मार्टफोन कैटिगरी को नई द‍िशा में लेकर जाएगा। वीवो का सब ब्रैंड आईकू अपना नया फ्लैगशिप आईकू 15 लॉन्‍च करने जा रहा है। दावा है कि इस फोन के साथ यूजर्स को प्रीमियम परफॉर्मेंस, एडवांस कैमरा, बेहतरीन सॉफ्टवेयर और स्‍मार्टफोन में दमदार एआई फीचर्स दिए जाएंगे। बैटरी लाइफ और डिस्‍प्‍ले के मामले में ब्रैंड बहुत कुछ नया करने जा रहा है, जिनमें से एक है आईकू 15 का डिस्‍प्‍ले। इस फोन में Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले मिलने जा रहा है। दावा है कि किसी भी एंड्रॉयड फोन में पहली बार यह डिस्‍प्‍ले इस्‍तेमाल हो रहा है। क्‍या है Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले? Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले को सैमसंग ने बनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस नाम में लीड का अर्थ है- लो पावर, इको फ्रेंडली, ऑगमेंटेड ब्राइटनैस, डिजाइंड टु बी स्‍ल‍िम एंड लाइट। डिस्‍प्‍ले को इस तरह बनाया है कि यह ज्‍यादा ब्राइट होता है और बैटरी कम खर्च करता है। यह डिस्‍प्‍ले 2K रेजॉलूशन ऑफर करता है। 144 हर्त्‍ज तक रिफ्रेश रेट देता है। ऐसे डिस्‍प्‍ले को गेमिंग के लिए बेहतरीन माना जाता है। सैमसंग के अनुसार, इस डिस्‍प्‍ले की बदौलत उतनी ही बैटरी खर्च होने पर ज्‍यादा ब्राइटैनस मिलती है। iQOO 15 में क्‍या डिस्‍प्‍ले होगा iQOO 15 में भी Samsung 2K M14 LEAD™ OLED डिस्‍प्‍ले दिया जा रहा है। यह 2K रेजॉलूशन और 144 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट देगा। डिस्‍प्‍ले में 6 हजार निट्स की पीक्र ब्राइटनैस दी जाएगी। दावा है कि भारत का सबसे ब्राइट डिस्‍प्‍ले स्‍मार्टफोन होगा। इसके अलावा, फोन में डॉल्‍बी विजन और‍ ट्रिपल एंब‍िएंट लाइट सेंसर दिया जाएगा, जिससे ब्राइटनैस एडजस्‍ट करना आसान होगा। iQOO 15 में अबतक का सबसे तेज प्रोसेसर स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 मिलने वाला है। यह ओरिजनओएस6 पर बेस्‍ड एंड्रॉयड 16 पर रन करेगा। इस फोन में 50 मेगापिक्‍सल का ट्र‍िपल कैमरा सिस्‍टम मिलने वाला है। मेन सेंसर सोनी आईएमएक्‍स921 होगा। उसके साथ 50 मेगापिक्‍सल का सोनी आईएमएक्‍स882 पेरिस्‍कोप कैमरा दिया जाएगा। तीसरा कैमरा अल्‍ट्रा वाइड कैमरा होने वाला है। फोन में 32 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा दिया जाएगा। यह फोन 7 हजार एमएएच बैटरी के साथ लाया जा रहा है, जो 100 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग और 40 वॉट की वायरलैस चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।