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कॉकरोच क्यों नहीं होते नष्ट? एटम बम से भी बचने वाले इस जीव के बिना धरती पर क्या खतरे?

नई दिल्‍ली. दुनिया की अधिकांश आबादी कॉकरोच को सिर्फ गंदगी और डर से जोड़कर देखती है. रसोई में अचानक भागते हुए दिखाई देना, खाने में घुस जाना या अलमारी में छिपे मिल जाना. ऐसे में अगर कोई कह दे कि धरती से कॉकरोच का नामोनिशान मिट जाए तो जीवन और भी आसान हो जाएगा. ज्यादातर लोग इस विचार से सहमत भी दिखेंगे लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि कॉकरोच का गायब होना सिर्फ घरों की सफाई का सवाल नहीं बल्कि पूरी धरती के इको-सिस्‍टम के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी. जंगलों की उपज, मिट्टी की गुणवत्ता, खाद्य सीरीज का संतुलन, छोटे जीव-जंतुओं का अस्तित्व. सभी पर गहरी चोट पहुंचेगी. PNAS यानी प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि कॉकरोच के अदर मौजूद ब्लाटाबैक्टीरियम नामक बैक्टीरिया नाइट्रोजन को री-साइकिल कर आवश्यक पोषक तत्वों में बदलता है. यही वजह है कि कॉकरोच बेहद कठिन वातावरण में भी जीवित रहते हैं और उन्हीं जगहों पर इको-सिस्‍टम में संतुलन बनाए रखते हैं, जहां अन्य कीट जीवित नहीं रह सकते. अगर यह प्रजाति खत्म हो जाए तो अनेक प्राकृतिक प्रक्रियाएं रुक जाएंगी, जिनका असर इंसानी जीवन तक पहुंचेगा. एटम बम गिरा तो कुछ नहीं बचा, सिवाय एक जीव के जंगलों की क्लीनिंग मशीन कॉकरोच का एक बड़ा हिस्सा घरों में नहीं बल्कि घने जंगलों में बसता है. वे गिरे हुए पेड़ों, पत्तों, सड़े हुए पौधों और लकड़ी को चबाकर छोटे-छोटे कणों में बदलते हैं. यही प्रक्रिया जंगल की मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्व वापस भेजती है. अगर कॉकरोच गायब हो जाएं तो जंगल की जमीन पर जैविक कचरे की परतें जमा हो जाएंगी. डिसोल्यूशन यानी विघटन की गति धीमी पड़ जाएगी और मिट्टी की उर्वरता घटने लगेगी. धीरे-धीरे पेड़ों की वृद्धि कमजोर होगी और पूरी वन-व्यवस्था थकान महसूस करने लगेगी. असंख्य जीवों के आहार का आधार एक छोटा सा कीट गायब हो जाए, तो लगता है फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र इन्हीं छोटे-छोटे हिस्सों से टिके होते हैं. छिपकलियां, मेंढक, पक्षी, छोटे स्तनधारी और कई कीट कॉकरोच पर निर्भर रहते हैं. वे एक भरोसेमंद और एक निरंतर उपलब्ध भोजन है. यदि वे अचानक गायब हो जाएं तो— • शिकारियों को वैकल्पिक भोजन ढूंढना पड़ेगा, • प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, • कई छोटे जीव भूख से मरने लगेंगे, • और खाद्य सीरीज में ‘डोमिनो इफेक्ट’ शुरू हो जाएगा. नाइट्रोजन फैक्ट्री यदि यह प्रजाति खत्म हो जाए, तो कई पारिस्थितिक निच खाली रह जाएंगे और विविधता में भारी गिरावट आएगी. कॉकरोच के शरीर में मौजूद Blattabacterium बैक्टीरिया अपशिष्टों को अमीनो एसिड और विटामिन में बदल देता है. यह प्रकृति का अनोखा सहयोगी तंत्र है. यही वजह है कि वे— • कड़े, न्‍यूट्रीशन की कमी में भी जीवित रहते हैं, • उन जगहों को संतुलन में रखते हैं जहां दूसरे कीट नहीं पहुंच पाते. कृषि पर बड़ा असर कॉकरोच खेतों के आसपास भी सड़ी-गली चीजों को तोड़कर मिट्टी में वापस मिलाते हैं. उनके गायब होने पर— • जैविक कचरा धीमी गति से टूटेगा, • मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी बढ़ेगी, • किसानों को अधिक केमिकल फर्टिलाइजर डालने पड़ेंगे, • और इससे पानी प्रदूषण सहित पर्यावरणीय खतरे बढ़ जाएंगे. इस तरह, रसोई का ‘अनवांटेड कीड़ा’ खेतों की उपज बढ़ाने में चुपचाप मदद करता है. मिट्टी की सेहत बिगड़ेगी, जैव विविधता घटेगी मिट्टी केवल रेत या कंकड़ का मिश्रण नहीं बल्कि जीवित तंत्र है. कॉकरोच— • मृत पौधों को तोड़ते हैं, • मिट्टी में पोषक तत्व घोलते हैं, • और कई छोटे जीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. उनके गायब होने से कई क्षेत्रों में मिट्टी मृत होने लगेगी, पौधों की वृद्धि रुकेगी और पूरे खाद्य जाल पर असर पड़ेगा. पर्यावरण का अलार्म सिस्टम कई जंगल-निवासी कॉकरोच पर्यावरण में बदलाव का पहला संकेत देते हैं. उनकी संख्या घटे या बढ़े तो वैज्ञानिक अनुमान लगा लेते हैं कि किसी क्षेत्र में क्या गड़बड़ चल रही है. यदि कॉकरोच न रहें, तो वैज्ञानिकों के पास यह जैविक संकेतक ही नहीं बचेगा. कॉकरोच के बिना बीमार पड़ जाएगी पृथ्‍वी सच्‍चाई यह है कि कॉकरोच का गायब होना दुनिया को खत्म नहीं करेगा, लेकिन इसे कमजोर जरूर कर देगा. हम भले ही किचन में कॉकरोच को देखकर उससे नफरत करने लगते हों या फिर उसे मारने के लिए हिट का इस्‍तेमाल करते हों लेकिन सच्‍चाई में यही हमारे जीवन का आधार भी है. यानी जिसे हम एक परेशान करने वाला कीड़ा समझते हैं, वही प्राकृतिक दुनिया की कई अदृश्य मशीनों को चलाए रखता है. धरती पर कई जीव हैं जिनका महत्व हम देखते नहीं, कॉकरोच उनमें सबसे कम आंका जाने वाला नायक है. • जंगलों में विघटन धीमा होगा, • मिट्टी पोषक तत्व खो देगी, • खाद्य सीरीज टूटेंगी, • कृषि पर दबाव बढ़ेगा, • इको-सिस्‍ट का लचीलापन घटेगा. रेडिएशन का असर क्यों नहीं पड़ता? तिलचट्टे रेडिएशन के प्रति इतने सहनशील क्यों हैं, इसका जवाब उनके शरीर की जैविक संरचना में छिपा है. उनका कोशिका विभाजन बहुत धीमा होता है. रेडिएशन का सबसे घातक असर तेजी से विभाजित होने वाली कोशिकाओं पर पड़ता है, जैसे कैंसर सेल्स, आंत की कोशिकाएं, अस्थि मज्जा और बालों की जड़ें. मनुष्य में ये कोशिकाएं हर कुछ घंटे या दिन में विभाजित होती रहती हैं, इसलिए रेडिएशन उन्हें तुरंत नष्ट कर देता है. तिलचट्टे की कोशिकाएं हफ्तों या महीनों में एक बार ही विभाजित होती हैं. वे सिर्फ मोल्टिंग (खाल उतारने) के समय ही तेजी से बढ़ते हैं, जो उनके जीवन में सिर्फ 6-7 बार होता है. जब रेडिएशन आता है, तब उनकी ज्यादातर कोशिकाएं “आराम” की अवस्था में होती हैं. रेडिएशन उन्हें छू भी नहीं पाता. क्यों विकिरण उनके लिए गर्म चाय जैसा LD50 एटम बम विस्फोट की स्थिति में रेडिएशन की वो मात्रा है, जिसमें 50% जीव मर जाते हैं. मनुष्य के लिए 400 -1000 रेड रेडिएशन खतरनाक कुत्ता के लिए 350 रेड रेडिएशन खतरनाक चूहा के लिए 900 रेड में खतरा फल मक्खियों के लिए 64,000 रेड रेडिएशन खतरनाक तिलचट्टा के लिए 90,000 से 1,05,000 रेड खतरनाक हालांकि तिलचट्टे की कुछ प्रजातियां 1,50,000 तक रेडिएशन भी सह लेती हैं. यानी तिलचट्टा इंसान से 100-150 गुना ज्यादा रेडिएशन सह सकता है. हिरोशिमा के केंद्र में लगभग 10,000–20,000 रेड रेडिएशन था. ये इंसान … Read more

घर की हवा होगी और भी साफ, AC-कूलर के लिए आया खास प्रोडक्ट; बजट कीमत ₹1399

नई दिल्ली सर्दी के आते ही दिल्ली-NCR और देश के कई दूसरे इलाकों में हवा का स्तर काफी खराब हो गया है. लोगों को इसकी वजह से स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. घर के बाहर ही नहीं अंदर भी एयर पॉल्यूशन का लेवल काफी ज्यादा है. ऐसे में साफ हवा के लिए आपको एक एयर फ्यूरीफायर खरीदना होगा. क्या हो अगर आपका AC एक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करने लगे. एक प्रोडक्ट की मदद से आपका AC एयर प्यूरीफायर में कन्वर्ट हो सकता है.        मार्केट में आपको एक खास कैटेगरी का एयर फिल्टर मिलता है, जो आपके एसी को एयर प्यूरीफायर में बदल सकता है. Airth नाम की कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स बनाती है. इन प्रोडक्ट्स को आप स्प्लिट AC, विंडो AC और यहां तक की कूलर के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं.         इसके लिए आपको उस कैटेगरी का फिल्टर खरीदना होगा. इन फिल्टर्स को इंस्टॉल करना भी बहुत आसान है. कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर आपको गर्मियों के लिए, सर्दियों के लिए अलग-अलग एयर प्यूरीफायर का विकल्प मिलता है.         मान लीजिए आपके पास एक स्प्लिट एयर कंडीशनर है. ऐसे में आपको Airth का एयर प्यूरीफायर वर्जन खरीदना होगा. आपको इसे एसी के इंडोर यूनिट के ऊपर फिट करना होगा. कंपनी की मानें, तो ये प्रोडक्ट HEPA फिल्टर के साथ आता है, जो 99 परसेंट तक PM2.5 को रोकता है. इसे यूज करने के लिए आपको अपना एयर कंडीशनर फैन मोड में चलाना होगा. स्प्लिट AC के लिए Air Purifier की कीमत 3,199 रुपये है. ये डिवाइस एक इंडीकेटर के साथ आता है, जो बताता है कि आपको अपना फिल्टर कब बदलना चाहिए.         ये कम बजट में आपकी एयर प्यूरीफायर जरूरत को पूरा सकता है. विंडो AC के लिए एयर प्यूरीफायर सिर्फ 1399 रुपये में मिल जाएगा, जबकि कूलर के लिए आपको एयर प्यूरीफायर 2099 रुपये में मिल जाएगा. अगर आप एयर प्यूरीफायर नहीं खरीदना चाहते हैं, तो इसे खरीद सकते हैं.

25 साल का गौरव: झारखंड विधानसभा की रजत जयंती पर सम्मान समारोह का आयोजन

रांची झारखंड विधानसभा आज अपनी स्थापना का रजत जयंती समारोह (25 वर्ष) मना रही है। राज्य गठन के बाद से विधानसभा ने 25 वर्षों की एक बड़ी यात्रा पूरी की है। इस विशेष अवसर पर रांची स्थित विधानसभा परिसर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। शहीदों के परिजन और खिलाड़ी होंगे सम्मानित राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित तमाम मंत्रियों और विधायकों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में नक्सल अभियान में शहीद पुलिस कर्मियों और सैनिकों की पत्नी या अन्य आश्रितों तथा सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रसिद्ध गायक रूप कुमार राठौर अपनी प्रस्तुति देंगे। हास्य कवि डॉ. दिनेश बावरा तथा हास्य कलाकार रवींद्र जानी भी उपस्थित लोगों को गुदगुदाएंगे। पूर्व विधायकों को भी दिया जाएगा विशेष सम्मान इस समारोह में राज्य के पदक विजेता खिलाड़ियों, पूर्व विधानसभा अध्यक्षों और पूर्व विधायकों को भी समारोह में विशेष सम्मान दिया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट विधायक के रूप में राज सिन्हा तथा विधानसभा के छह उत्कृष्ट कर्मियों को भी सम्मानित किया जाएगा।  

बैटरी साइज़ बनाम बैकअप: खरीदने से पहले दूर करें ये बड़ा भ्रम

नया स्मार्टफोन खरीदते समय लोग उसकी बैटरी लाइफ पर बहुत ध्यान देते हैं। फोन कंपन‍ियां भी बैटरी फीचर को खूब प्रमोट करती हैं क‍ि फलां मोबाइल में 7000 एमएएच बैटरी है। तमाम लोगों को लगता है कि जितना ज्यादा mAh वाली बैटरी होगी, उतना लंबा चलेगी। यह एक भ्रम है क्‍योंकि 2025 में स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ सिर्फ बैटरी की क्षमता (mAH) पर निर्भर नहीं करती, बल्कि और कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे- फोन कितनी पावर का इस्तेमाल करता है। उसका डिस्प्ले कैसा है। सॉफ्टवेयर कितना बेहतर है और नेटवर्क कनेक्शन को कैसे मैनेज करता है। नई बैटरी टेक्नोलॉजी जैसे सिलिकॉन-कार्बन की वजह से फोन बनाने वाली लगभग सभी चीनी कंपनियां 5,000mAH की सीमा को पार कर चुकी हैं। Xiaomi 17 Pro Max को 7,500mAH की बड़ी बैटरी के साथ लाया गया है। वहीं, iQOO 15, OnePlus 15 और Realme GT के कई मॉडल लगभग 7,000mAH की बैटरी के साथ आ रहे हैं। अगर आप नया फोन खरीदने वाले हैं तो बैटरी को लेकर अपना भ्रम दूर कर लें। ट‍िकाऊ स्‍मार्टफोन बैटरी में ड‍िस्‍प्‍ले का रोल फोन की बैटरी कितनी देर चलेगी, यह उसके डिस्प्ले पर काफी हद तक निर्भर करती है। 120Hz या 144Hz OLED पैनल ज्यादा पावर इस्तेमाल करते हैं। जो फोन लगातार हाई रिफ्रेश रेट पर चलते हैं, उनकी बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है। स्क्रीन का रेजोल्यूशन भी मायने रखता है। Full HD+ पैनल वाले फोन, QHD+ डिस्प्ले वाले फोन की तुलना में कम पावर इस्तेमाल करते हैं। चाहे ब्राइटनेस और रिफ्रेश रेट एक जैसे हों। बैटरी ज्यादा बड़ी है, लेकिन डिस्प्ले हाई रिफ्रेश रेट पर है तो बैटरी ज्यादा पावर खपत करती है। प्रोसेसर से भी पड़ता है फर्क फोन के प्रोसेसर भी बैटरी लाइफ पर असर डालते हैं। नए प्रोसेसर जैसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 या Dimensity 9500 फोन की बैटरी को बेहतर ढंग से संभालते हैं। किसी भी फोन में हैवी गेमिंग करने या कैमरा का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने पर हीट‍िंग हो सकती है। इससे पावर की खपत बढ़ जाती है। फोन खरीदते समय हमेशा अपग्रेडेड प्रोसेसर को प्राथम‍िकता दें। फास्‍ट चार्जिंग वाला फोन लें फास्ट चार्जिंग का चलन काफी बढ़ गया है। कई फोन में 100W से 120W वायर्ड चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग मिलती है। इससे फोन जल्दी चार्ज हो जाते हैं। यह देखना बहुत जरूरी है कि चार्जिंग के समय फोन हीटिंग को कैसे मैनेज कर रहा है। बाईपास चार्जिंग और शेड्यूल नाइट चार्जिंग जैसी सुविधाओं को भी देखें। सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन से लंबी चलती है बैटरी क‍िसी भी फोन में सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन बहुत जरूरी है। यह बैटरी को बचाता है। iPhone 17 Pro Max और Galaxy S25 Ultra में सबसे बड़ी बैटरी नहीं होती, लेकिन उनका सॉफ्टवेयर ऑप्‍टमाइजेशन बहुत अच्‍छा है। iOS और One UI बैकग्राउंड में चल रही चीजों को मैनेज करने, लोकेशन सेवाओं को कंट्रोल करने और नेटवर्क के बीच स्विच करने में बहुत अच्छे हैं। इन बातों का हमेशा रखें ध्‍यान ज्यादा mAH या वॉट-आवर (Wh) का मतलब है ज्यादा चार्ज स्टोर होना। एक 7,000mAH फोन की बैटरी, 5000mAH फोन की बैटरी से जल्दी खत्म हो सकती है। कभी-कभी बजट फोन की बैटरी प्रीमियम फ्लैगशिप की बैटरी से ज्यादा चलती हैं, क्योंकि उनमें कम पावर खर्च करने वाले फीचर्स शाम‍िल होते हैं।

ऐसे करें सैलिसिलिक एसिड का इस्तेमाल, चेहरे से पिंपल्स होंगे गायब

चेहरे पर होने वाले पिंपल्स न सिर्फ स्किन की खूबसूरती को प्रभावित करते हैं, बल्कि सेल्फ कॉन्फिडेंस को भी कम कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप एक ऐसा उपाय ढूंढ़ रहे हैं, जो पिंपल्स को जड़ से खत्म करने में मदद करे, तो सैलिसिलिक एसिड एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह एक बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड (BHA) है, जो स्किन की गहराई में जाकर पोर्स को साफ करता है, साथ में डेड स्किन को तो हटाता ही है और नए पिंपल्स बनने से भी रोकता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके उपयोग का तरीका, फायदे और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां- सैलिसिलिक एसिड का उपयोग कैसे करें     फेस वॉश के रूप में- 1% या 2% सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश से दिन में दो बार चेहरा वॉश करें। यह रोमछिद्रों को खोलने, एक्स्ट्रा ऑयल और डस्ट हटाने में मदद करता है।     टोनर और सीरम- नहाने या चेहरा धोने के बाद सैलिसिलिक एसिड टोनर या सीरम लगाएं। यह धीरे-धीरे स्किन को क्लियर करता है और ब्रेकआउट्स को कंट्रोल करता है।     स्पॉट ट्रीटमेंट- अगर किसी खास जगह पर पिंपल है, तो उस पर सैलिसिलिक एसिड जेल या क्रीम लगाएं। यह पिंपल को सुखाने में मदद करता है।     साप्ताहिक पील या मास्क- हफ्ते में एक बार इसका फेस पील या मास्क का प्रयोग करें, लेकिन स्किन टाइप के अनुसार और एक्सपर्ट की सलाह से ही। फायदे     पिंपल्स को जड़ से सुखाता है और नए पिंपल्स बनने से रोकता है।     रोमछिद्रों को खोलकर डेड स्किन और सीबम हटाता है, जिससे स्किन साफ दिखती है।     ऑयली स्किन पर विशेष रूप से प्रभावी है क्योंकि यह सीबम प्रोडक्शन को कंट्रोल करता है।     ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स को कम करता है।     स्किन की ऊपरी परत को एक्सफोलिएट कर निखार लाता है।     सूजन और लालिमा को कम करता है, जिससे स्किन शांत और हेल्दी दिखती है। सावधानियां     शुरुआत में हफ्ते में 2–3 बार ही प्रयोग करें, ताकि स्किन को इसकी आदत हो सके।     सैलिसिलिक एसिड लगाने के बाद त्वचा को सूरज की रोशनी से बचाएं और सनस्क्रीन जरूर लगाएं।     अगर स्किन बहुत ज्यादा ड्राई, लाल या पील होने लगे तो उपयोग की मात्रा कम करें या कुछ दिन बंद करें।     सेंसिटिव स्किन वालों को पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।     हमेशा सॉफ्ट औरफ़ हाइड्रेटिंग मॉइश्चराइज का इस्तेमाल करें ताकि स्किन बैलेंस बनी रहे। सैलिसिलिक एसिड पिंपल्स और ऑयली स्किन के लिए एक इफेक्टिव उपाय है, लेकिन इसका सही उपयोग और नियमित देखभाल बेहद जरूरी है। अगर स्किन के लिए सही मात्रा और प्रॉडक्ट्स चुना जाए, तो यह आपकी स्किन को क्लियर, स्मूद और ग्लोइंग बना सकता है।  

कैंसर उपचार में क्रांतिकारी खोज: वैज्ञानिकों ने फेफड़ों के ट्यूमर घटाने का नया तरीका विकसित किया

फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए विज्ञान की दुनिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोजा है जिससे फेफड़ों के ट्यूमर को उसकी सबसे बड़ी कमजोरी पर वार करके खत्म किया जा सकता है। जी हां, इस शोध के दौरान, उन्होंने एक बेहद जरूरी प्रोटीन की पहचान की। बता दें, यह प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं को 'मरने' से बचाता है। ऐसे में, शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इस खास प्रोटीन की गतिविधि को रोक दिया जाए, तो कैंसर कोशिकाएं खुद-ब-खुद नष्ट होने लगती हैं और ट्यूमर सिकुड़ जाता है। वैज्ञानिकों ने खोजी सबसे बड़ी कमजोरी हाल ही में शोधकर्ताओं ने फेफड़ों के कैंसर की एक महत्वपूर्ण कमजोरी का पता लगाया है- एक ऐसा प्रोटीन, जिसे रोक दिया जाए तो कैंसर कोशिकाएं खुद को ही नष्ट करने लगती हैं। यह खोज न सिर्फ इलाज के नए रास्ते खोलती है, बल्कि भविष्य में ऐसे कई मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है, जिन्हें अब तक सीमित विकल्प ही उपलब्ध थे। 'सेल्फ-डिस्ट्रक्शन' से बच निकलते थे कैंसर सेल्स अमेरिका के एनवाइसी लैंगोन हेल्थ के वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर क्यों कुछ कैंसर कोशिकाएं शरीर की रक्षा प्रणाली से बचकर बढ़ती चली जाती हैं। इसी खोज के दौरान उन्होंने एक खास प्रोटीन- एफएसपी1 (FSP1) की पहचान की। यह प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं को एक खास तरह की कोशिका मृत्यु, जिसे फेरोप्टोसिस कहा जाता है, से बचाता है। फेरोप्टोसिस वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर अत्यधिक तनाव में आ चुकी कोशिकाओं को खुद-ब-खुद नष्ट कर देता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया शरीर की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है, लेकिन कैंसर कोशिकाएं इसी से बचकर बढ़ती रहती हैं। एफएसपी1 को रोकने से क्या हुआ? शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग करते हुए एफएसपी1 प्रोटीन को रोका। परिणाम इतने चौंकाने वाले थे कि उन्हें वैज्ञानिक ‘ड्रामेटिक’ कह रहे हैं।     चूहों के फेफड़ों में मौजूद ट्यूमर तेजी से सिकुड़ने लगे     कई कैंसर कोशिकाओं ने खुद को नष्ट करना शुरू कर दिया     कुल मिलाकर ट्यूमर का आकार लगभग 80% तक घट गया यह परिणाम बताते हैं कि एफएसपी1 को निष्क्रिय करने से कैंसर कोशिकाओं के पास बचने का कोई रास्ता नहीं रहता और वे फेरोप्टोसिस की प्रक्रिया में फंसकर खत्म होने लगती हैं। क्यों जरूरी है यह खोज? फेफड़ों के एडेनोकार्सिनोमा जैसे कैंसर का इलाज अक्सर मुश्किल हो जाता है क्योंकि ये कोशिकाएं सामान्य उपचार का प्रतिरोध करने लगती हैं। परंतु यदि कैंसर की ऐसी कमजोरी मिल जाए, जिसमें वह खुद को खत्म करने लगे, तो यह उपचार की दिशा पूरी तरह बदल सकता है। इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि एफएसपी1 को लक्ष्य बनाकर बनाई गई दवाएं भविष्य में कैंसर थेरेपी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। खास बात यह है कि यह तरीका कैंसर की प्राकृतिक कमजोरी का उपयोग करता है, यानी शरीर की अपनी सेल-डिस्ट्रक्शन प्रक्रिया को सक्रिय कर दिया जाता है। कैंसर से जंग को मिलेगी नई दिशा? हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और प्रयोग चूहों पर किए गए हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसी सिद्धांत को मानव उपचार में सुरक्षित रूप से लागू किया गया तो फेफड़ों के कैंसर से लड़ाई को एक नई दिशा मिल सकती है। शोधकर्ता अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एफएसपी1 को रोकने वाली दवाइयां इंसानों में कितनी प्रभावी और सुरक्षित होंगी। अगर यह सफल हुआ तो आने वाले वर्षों में कैंसर मरीजों के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।  

रिसर्च का सच: पूरे जीवन में कम सिगरेट पीने से भी बढ़ जाता है बीमारी का जोखिम

नई दिल्ली सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक होता है। सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान के बारे में सभी को पता है। लेकिन अब इसके बारे में एक नई रिसर्च सामने आई है। इस रिसर्च में दावा किया गया है कि पूरे जीवन में सिर्फ 100 सिगरेट पीने से भी दिल की बीमारी और समय से पहले मौत का खतरा काफी बढ़ सकता है। अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टीमोर में स्थित जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की है। रिसर्च में क्या हुआ खुलासा? जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 20 सालों तक 3 लाख से ज़्यादा वयस्कों की आदतों ओर रिसर्च की। उन्होंने पाया कि हर दिन सिर्फ दो सिगरेट पीने वाले पुरुषों और महिलाओं में मौत का खतरा 60% तक बढ़ जाता है। वहीं इन लोगों में दिल की बीमारी का खतरा भी 50% ज़्यादा होता है। सिगरेट पीने से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि सिर्फ सिगरेट कम कर देने से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। जो लोग स्मोकिंग छोड़ चुके हैं, उनमें भी 20 साल बाद तक दिल की बीमारी का खतरा बना रहता है। स्मोकिंग छोड़ने का मिलता है फायदा स्मोकिंग छोड़ने का फायदा तुरंत मिलता है। पहले 10 साल में सबसे ज़्यादा फायदा होता है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि लोगों को स्मोकिंग कम करने के बजाय इसे पूरी तरह छोड़ने की सलाह दी जानी चाहिए। दिन में एक सिगरेट से भी दिल की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।

फिजूल कॉल से हैं परेशान तो मोबाइल से इस तरह कर सकते है उन्हें ब्लॉक

आजकल टेलीमार्केटिंग का चलन जोरों पर है, हालांकि इसके लिए सिर्फ टेलीकॉम कंपनियां ही जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आप और हम भी जिम्मेदार हैं। आपमे से कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना मोबाइल नंबर दे रखा होगा। साथ ही कई बार हम नौकरी की तलाश में सोशल मीडिया पर आए किसी पोस्ट पर कॉमेंट में अपना मोबाइल नंबर दे देते हैं। इसके बाद टेलीमार्केटिंग कंपनियां आपका मोबाइल नंबर इकट्ठा करती हैं और फिर खेल शुरू होता है। तो अब सवाल यह है कि इससे कैसे बचा जाए? जियो, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के किसी भी नंबर पर स्पैम कॉल ब्लॉक करने के दो तरीके हैं जिनमें से पहला एसएमएस का तरीका है और दूसरा कॉलिंग का है। यदि आप अपने मोबाइल नंबर पर आने वाले फालतू के फोन से परेशान हैं तो सबसे पहले अपने फोन के मैसेजिंग ऐप में जाएं। इसके बाद एक मैसेज में स्टार्ट 0 टाइप करके 1909 पर सेंड कर दें। इसके बाद आपके फोन पर किसी प्रकार के फालतू और परेशान करने वाले स्पैम कॉल नहीं आएंगे। फोन करके ब्लॉक कराएं स्पैम कॉल : यदि आप फोन करके अपने नंबर पर आने वाले स्पैम कॉल को ब्लॉक कराना चाहते हैं तो अपने फोन में डायलर ऐप में जाएं और 1909 पर कॉल करें। इसके बाद फोन पर मिलने वाले निर्देशों का पालन करें और डू नॉट डिस्टर्ब (डीएनडी) सेवा को एक्टिव करें।  

स्प्लिट एंड्स से छुटकारा नहीं मिल रहा? शायद ये 7 आदतें हैं वजह

स्पिल्ट एंड्स या दोमुंहे बालों की समस्या किसी को भी हो सकती है। इसका उम्र या जेंडर से कोई लेना-देना नहीं। हालांकि, बालों में मजबूती के बावजूद भी उनके डैमेज होने का खतरा रहता है। यही डैमेज स्पिल्ट एंड्स या दोमुंहे बालों के रूप में जाना जाता है। आइए जानते हैं कि बाल दोमुंहे क्यों हो जाते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है। क्या हैं कारण     ज्यादा हीट स्टाइलिंग करना     तेज ब्रश या कंघी करना     धूप से होने वाला नुकसान     प्रदूषण या धूल-मिट्टी     खराब क्वालिटी के हेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करना     लंबे समय तक बालों को न कटवाना     गीले बालों को रगड़-रगड़ कर तौलिए से पोंछना क्या होता है नुकसान   इन सभी कारणों की वजह से बालों की ग्रोथ रुक सकती है। साथ ही यह कारण उन्हें बेजान बना देता है। इन वजहों से बाल डैमेज, कमजोर और अनहेल्दी हो जाते हैं। ऐसे बालों को दोमुंहे होने से बचा सकते हैं     हर दिन न करें वॉश: अगर आप हर दिन ही अपने बालों को धोते हैं, तो अनजाने में उनमें मौजूद नेचुरल ऑयल को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बालों की नमी कम हो जाती है। इसकी जगह दो से तीन दिनों में अपने बाल धोएं।     हेयरब्रश के टाइप पर दें ध्यान: बालों को दोमुंहे होने से बचाने के लिए इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप कौन-सी कंघी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा हेयरब्रश लें, जिसके दांत लचीले और चौड़े हों। बालों को कंघी करने से पहले आखिरी छोर को सुलझाने की कोशिश करें। तेज-तेज कंघी करने से बचें। हीटिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कंघी करने के बाद ही करें और गीले बालों पर हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी ही करें।     शैम्पू को बालों पर न रगड़ें: सिर पर शैम्पू लगाने और रगड़ने के बाद जैसे ही आप बालों को धोएंगे वह आपके बालों के बाकी हिस्सों में भी पहुंच जाएगा। आपको अलग से और शैम्पू लगाने की जरूरत नहीं।     सबसे पहले एंड में लगाएं: बालों के किसी भी हिस्से में कंडीशनर लगाने से पहले आखिरी छोर पर लगाएं।     हीट ड्राई करने से बचें: खासकर बालों के आखिरी छोर पर हीट ड्राई ना करें। ब्लो ड्रायर जैसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल बालों के बीच वाले हिस्से के लिए होता है न कि एंड के लिए।     स्टाइलिंग का बदलें तरीका: अगर आप कर्लिंग आयरन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बालों के एंड पर बहुत ज्यादा हीट ना दें। बालों को रूट से लेकर टिप तक कर्लिंग आयरन में घुमाने की बजाय, आयरन को रूट पर रखें और फिर बालों को धीरे-धीरे इसके आस-पास घुमाते जाएं।     ट्रिम कराते रहें: बालों को सेहतमंद रखने और दोमुंहे होने से बचाने के लिए इन्हें नियमित रूप से ट्रिम करवाते रहें। आप दो से तीन महीने के अंतराल पर ऐसा करा सकते हैं।  

रीढ़ को स्वस्थ और लचीला रखने के लिए 5 योगासन: नियमित अभ्यास से कमर दर्द में सुधार

 नई दिल्ली आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लगातार घंटों तक बैठना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुके रहना और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी के कारण आजकल कमर दर्द और कमजोर कोर मसल्स की समस्या आम हो गई है। कोर मसल्स शरीर का केंद्र होती हैं, जो बैलेंस, पॉस्चर और मूवमेंट को कंट्रोल करती हैं। अगर ये कमजोर हों तो पीठ दर्द, थकान और लो एनर्जी की शिकायतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में योग के कुछ विशेष आसनों का नियमित अभ्यास न सिर्फ कोर को मजबूत बनाता है, बल्कि पीठ को भी फ्लेक्सिबल और मजबूती देता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ असरदार योगासन, जो आपकी कोर स्ट्रेंथ और बैक हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को आराम देने के साथ कोर को भी रिलैक्स करता है। इस आसन में वज्रासन में बैठकर शरीर को आगे झुकाकर माथा जमीन से टच करते हैं और हाथों को आगे की ओर फैलाते हैं। यह पोज पीठ के निचले हिस्से में जमी टेंशन को कम करता है और मेंटली भी सुकून देता है। बालासन खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो स्ट्रेस या थकान से जूझ रहे हैं। भुजंगासन यह आसन पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाता है।इससे रीढ़ लचीली होती है और पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं। पेट के बल लेटकर, हाथों को कंधों के नीचे रखकर धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाएं। इस पोज से पीठ की जकड़न कम होती है और शरीर में एनर्जी का संचार होता है। नौकासन नौकासन को कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए सबसे असरदार योगासनों में गिना जाता है। इस पोज में शरीर एक नाव के आकार में आता है जिससे पेट, पीठ और जांघों पर एक साथ असर होता है। पीठ के बल लेटकर धीरे-धीरे पैरों, सिर और हाथों को ऊपर उठाएं और बैलेंस बनाए। शलभासन शलभासन पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और रीढ़ में फ्लेक्सिबिलिटी लाता है। इसे करते समय पेट के बल लेटकर दोनों पैरों और छाती को ऊपर उठाया जाता है। यह आसन स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से राहत देने में भी कारगर माना जाता है। बिटिलासन इसे अक्सर मार्जरासन (कैट पोज) के साथ किया जाता है। बिटिलासन में घुटनों और हथेलियों के सहारे जमीन पर आकर कमर को नीचे की ओर झुकाया जाता है और सिर को ऊपर उठाया जाता है। यह पोज कोर को हल्का खिंचाव देता है और पीठ की अकड़न को कम करता है। सेतुबंधासन यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने के साथ-साथ कोर मसल्स को भी टोन करता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर टिकाएं। अब धीरे-धीरे कमर और हिप्स को ऊपर उठाएं, जबकि कंधे जमीन से लगे रहें।