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WiFi राउटर पर एल्युमिनियम फॉयल लगाने का ट्रिक — काम करता है या सिर्फ़ मिथ है?

नई दिल्ली घर में वाई-फाई की स्पीड कम होना आम समस्या है। कभी फिल्म देखते समय बफरिंग होती है, तो कभी मीटिंग में सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में लोग कभी राउटर की पोजीशन बदलते हैं तो कभी राउटर ही चेंज कर देते हैं। हालांकि, आपने कभी न कभी तो सुना ही होगया कि एल्युमिनियम फॉयल वाई -फाई राउटर का सिग्नल बढ़ा देती है। ये सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन यह थ्योरी खूब फ्लोट होती है। लेकिन क्या सचमुच एक एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई का सिग्नल बढ़ा सकती है? चलिए, जान लेते हैं कि इस बारे में रिसर्च और एक्सपर्ट क्या कहते हैं। वैज्ञानिकों ने क्या बताया? रीडर्स डाइजेस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि डार्टमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने टेस्ट किया। उन्होंने फॉयल से कवर किया आकार बनाया। कुछ जगहों पर सिग्नल 55% तक बढ़ गया। जहां जरूरत नहीं, वहां 63% तक कम हो गया। इससे पूरा कवरेज बेहतर हुआ। रिसर्च में साबित हुआ कि एल्युमिनियम फॉयल का सही से इस्तेमाल किया जाए तो वाई-फाई सिग्नल बढ़ सकता है। डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर साइंस टीचर और इस रिसर्च की मुख्य वैज्ञानिक जिया झोउ कहती हैं कि एल्युमिनियम फॉयल वाई-फाई सिग्नल को उछालती है। कैसे काम करती है एल्युमिनियम फॉयल? राउटर में एंटीना होता है जो सिग्नल भेजता है। ये सिग्नल रेडियो Waves की तरह हर तरफ फैलते हैं। जैसे पानी की स्प्रिंकलर चारों ओर छिड़काव करती है। इससे सिग्नल कमजोर हो जाता है। दीवारें, फर्श और खिड़कियां इसे रोकती हैं। कुछ जगहों पर सिग्नल पहुंचता ही नहीं। ऐसे में एल्युमिनियम फॉयल को घुमाकर राउटर के पीछे लगाएं। चमकदार साइड अंदर की ओर रखें। यह सिग्नल को रिफ्लेक्ट करता है। सिग्नल एक दिशा में जाता है जहां जरूरत है। जैसे लिविंग रूम या बेडरूम। खिड़की की तरफ जाने वाला सिग्नल रुक जाता है। इससे स्पीड बढ़ती है। हैकर्स का खतरा भी कम होता है एल्युमिनियम फॉयल सिग्नल को घर के अंदर रखती है, बाहर नहीं जाने देती। इससे हैकर्स का खतरा कम होता है। वे सिग्नल पकड़कर डेटा नहीं चुरा सकते। यह पासवर्ड के साथ एक्स्ट्रा सुरक्षा देता है। घर की प्राइवेसी बनी रहती है। हालांकि बताया दें कि यह हैक सभी के लिए परफेक्ट नहीं। लेकिन सस्ता और आसान तरीका है। वाई-फाई एक्सटेंडर खरीदने से पहले आप इसे भी आजमा सकते हैं।

किड्स ईयरबड्स लॉन्च: सेफ्टी और मज़ेदार फीचर्स के साथ आया यह नया गैजेट

नई दिल्ली स्‍मार्टफोन के बाद अगर कोई गैजेट सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया जाता है, तो वो हैं ईयरबड्स। बच्‍चे भी इनके प्रति आकर्षित होते हैं। हालांकि बच्‍चों को ईयरबड्स यूज करने नहीं देने चाहिए, क्‍योंकि उनसे आने वाला साउंड कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस दिक्‍कत को दूर करने की कोशिश की है जेबीएल ने। किड्स ऑडियो कैटिगरी में कदम रखते हुए कंपनी ने JBL Junior Free (जेबीएल जूनियर फ्री) को लॉन्‍च किया है। ये ओपन-ईयर TWS ईयरबड्स हैं, जिन्‍हें बच्‍चों के लिए बनाया गया है। इनमें ऐसी कई खूबियां हैं, जिन्‍हें आपको जानना चाहिए। जेबीएल जूनियर फ्री में 6 बड़ी खूबियां     JBL Junior Free को इस तरह बनाया गया है कि इनसे 85 डेसिबल से ज्‍यादा साउंड नहीं आता।     पैरंटल कंट्राेल की सुविधा मिलती है और पैरंट्स, ऐप की मदद से वॉल्‍यूम कंट्रोल कर सकते हैं।     इनका बैटरी बैकअप 10 घंटे है और सिर्फ 10 मिनट चार्ज करके इन्‍हें 3 घंटे इस्‍तेमाल किया जा सकता है।     इन्‍हें एकसाथ दो डिवाइस से कनेक्‍ट करके यूज किया जा सकता है।     IPX4 रेटिंग मिलती है, जो इन्‍हें पानी की छीटों से होने वाले नुकसान से बचाती है।     ये किड्स फ्रेंडली हैं। इन्‍हें कंट्रोल करने के लिए ईयरबड्स में बटन भी दिए गए हैं। जेबीएल जूनियर फ्री की कीमत जेबीएल जूनियर फ्री को अभी भारत में नहीं लाया गया है। इनकी यूरोप में कीमत 69.99 यूरो है। ये कई कलर ऑप्‍शंस जैसे- पर्पल, टेल और पीच रंग में आए हैं। जेबीएल जूनियर फ्री के प्रमुख फीचर्स जेबीएल जूनियर फ्री को इसलिए बनाया गया है ताकि बच्‍चों को एक सुरक्ष‍ित और कानों के लिए बेहतर लिसनिंग विकल्‍प मिले। जेबीएल के मुताबिक, ईयरबड्स के ओपन डिजाइन की वजह से बच्‍चे ना सिर्फ अच्‍छा साउंड सुन पाते हैं, बल्कि सेफ साउंड उन्‍हें मिलता है। इनका डिजाइन ऐसा है कि बच्‍चा अपने आसपास के माहौल को भी सुन पाता है। पैरंटल कंट्रोल होने से यह फायदा है कि भले ईयरबड बच्‍चे के कान में लगता है कि लेकिन पैरंट्स उसे अपने स्‍मार्टफोन से कंट्रोल कर सकते हैं। किड्स ईयरबड्स की जरूरत क्‍यों? मौजूदा वक्‍त में ईयरबड्स बड़े पैमान पर इस्‍तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन उन्‍हें बड़े लोगों के कानों के लिए डिजाइन किया जाता है, जो मैक्‍स‍िमम वॉल्‍यूम पर काफी लाउड बजते हैं। इन ईयरबड्स को बच्‍चे इस्‍तेमाल करें तो उनके कानों को नुकसान हो सकता है। किड्स ईयरबड्स इसका विकल्‍प बन रहे हैं। यही वजह है कि अब ऑडियो ब्रैंड इस कैटिगरी में अपने प्रोडक्‍ट लॉन्‍च कर रहे हैं। प्रेम त्रिपाठी

सर्दी का असर दांतों पर: सेंसिटिविटी से राहत पाने के आसान घरेलू नुस्खे

ठंड का मौसम भले ही सुकूनभरा लगे, लेकिन यह शरीर के साथ-साथ दांतों की सेहत पर भी असर डालता है। इस मौसम में दांतों की सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ठंडे या गर्म खाने-पीने की चीजें दांतों में झनझनाहट और दर्द का कारण बन रही हैं। जयारोग्य अस्पताल के दंत रोग विभाग में रोजाना 25 से 30 मरीज इस समस्या के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सर्दी में घटता है लार का स्राव दंत रोग विभाग के विभागाध्यक्ष और दंत विशेषज्ञ के अनुसार, सर्दियों में तापमान में उतार-चढ़ाव से मुंह के अंदर के सॉफ्ट टिशू सूखने लगते हैं। इससे लार का स्राव कम हो जाता है, जो मुंह की प्राकृतिक सफाई में मदद करता है। लार की कमी के कारण मुंह में बैक्टीरिया बढ़ते हैं और यही कारण है कि कैविटी, मसूड़ों की सूजन और सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि ठंड में लोग पानी कम पीते हैं, जिससे मुंह की नमी घटती है। यही वजह है कि संक्रमण और दांतों के कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है। खाने-पीने के बाद ब्रश करना जरूरी सर्दियों में लोग चाय, कॉफी और स्नैक्स के साथ मीठी चीजें खाने के शौकीन होते हैं। डॉ. खांडे बताते हैं कि मीठा बैक्टीरिया को आकर्षित करता है, जिससे मसूड़ों में संक्रमण और कैविटी की समस्या बढ़ जाती है। अगर मीठा खाएं तो उसके बाद दांत साफ करें। साथ ही, रात में ब्रश किए बिना न सोएं। सेंसिटिव टूथपेस्ट और सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल अगर आपके दांत ठंड में सेंसिटिव महसूस होते हैं, तो सेंसिटिव टूथपेस्ट और सॉफ्ट ब्रिसल ब्रश का प्रयोग करें। ये दांतों को नुकसान पहुंचाए बिना सफाई करते हैं और सेंसिटिविटी कम करने में मदद करते हैं। ठंडे की जगह गुनगुना पानी पिएं दंत विशेषज्ञ डॉ. आशीष माहेश्वरी सलाह देते हैं कि सर्दियों में ठंडा पानी पीने से दांतों की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है, इसलिए हमेशा गुनगुना पानी पिएं। साथ ही बहुत गर्म भोजन करने से भी बचें, क्योंकि यह मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। घरेलू नुस्खे भी हैं कारगर     नमक और सरसों के तेल से हल्की मालिश करने से मसूड़ों में रक्त संचार बढ़ता है और बैक्टीरिया खत्म होते हैं।     लांग चबाने से दांतों के दर्द और झनझनाहट में राहत मिलती है। लांग में मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व संक्रमण को रोकते हैं। सर्दियों में दांतों की आम समस्याएं     कैविटी (दांतों में कीड़े लगना)     झनझनाहट या सेंसिटिविटी     इंफेक्शन या मुंह की बदबू     जबड़ों में दर्द     मसूड़ों में सूजन और रक्तस्राव

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी में Google, तकनीकी दुनिया में मची हलचल

नई दिल्ली दुनियाभर में AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर्स को लेकर काम कर रही हैं. कोई धरती पर या फिर कोई समंदर के अंदर डेटा सेंटर बना रहा है. इस दिशा में Google एक कदम आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. अब गूगल अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम को बनाने जा रहा है, जिसको आगे डेटा सेंटर के रूप में भी यूज किया जा सकेगा. इसको लेकर Google ने एक सफल परीक्षण किया है और सीईओ सुंदर पिचाई ने पोस्ट करके इसकी जानकारी भी दी है.  सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल ने लो अर्थ ऑर्बिट में पाई जाने वाले रेडिएशन की कंडिशन को फॉलो करते हुए एक सफल टेस्टिंग की है. इसमें ट्रिलियम-जनरेशन टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) को टेस्ट किया है.   प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए यह एक बड़ी सफलता है. इस प्रोजेक्ट की मदद से गूगल अपने सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक को पूरा करना चाहते है. कंपनी इसकी मदद से अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम का सेटअप लगाना चाहता है, जिसको सूरज की रोशनी से पावर मिलेगी.   सुंदर पिचाई ने समझाया, TPU क्या है?  गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि TPU असल में खास तरह की चिप्स हैं, जिनको आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के काम को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है. इन चिप्स की टेस्टिंग रेडिएशन एक्सपोजर के दौरान की गई और इन चिप्स पर डैमेज का कोई भी निशान नहीं दिखा है.     सफल टेस्टिंग से इस बात के पॉजिटिव साइन मिलते हैं कि गूगल का एडवांस्ड हार्डवेयर सिस्टम, आउटर स्पेस के खतरनाक एनवायरमेंट का भी सामना करना सकेगा. बताते चलें कि आउटर स्पेस में हाई रेडिशन और तापमान तेजी से बदलता है.  इस प्रोजेक्ट का मकसद सूर्य से आने वाली ऊर्जा को पावर में बदलने का है. इसके लिए सोलर पावर पैनल्स का यूज किया जा सकता है. इस पावर को पृथ्वी के लो ओर्बिट में स्थापित लार्ज स्केल AI कंप्यूटर सिस्टम में ट्रांसफर किया जाएगा.  इस प्रोजेक्ट की जरूरत क्यों पड़ी?  दरअसल, AI मॉडल जैसे ChatGPT, Gemini, Claude आदि को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. बिजली की इस जरूरत को पूरा करने के लिए अगर कोयला, गैस या डीजल का यूज होता है तो काफी ज्यादा प्रदूषण होगा. ऐसे में कंपनी इसको सोलर पावर से चलाना चाहती है, जिसके लिए लो अर्थ ऑर्बिट में पूरा सेटअप लगाने का प्लान बनाया है.   कहां से मिली है प्रेरणा  गूगल को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा मूनशूट प्रोजेक्ट से मिली है, जिसे अब अल्फाबेट की X डिविजन के रूप में जाना जाता है. इस डिविजन का काम अनोखी टेक्नोलॉजी तैयार करना है, जो अधिकतर लोगों की सोच से परे होती हैं. 2027 की दी है डेडलाइन  सुंदर पिचाई ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक चला तो 2027 की शुरुआत तक Planet कंपनी के साथ मिलकर अपने दो प्रोटोटाइप सेटेलाइट लॉन्च करेगी. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे भी लेकर जाएंगे. 

iQOO 15 लाएगा एंड्रॉयड दुनिया में क्रांति — पहली बार मिलेगा ये खास फीचर!

नई दिल्ली 26 नवंबर को पहली बार किसी एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन में एक ऐसा फीचर आने वाला है, जो फ्लैगश‍िप स्‍मार्टफोन कैटिगरी को नई द‍िशा में लेकर जाएगा। वीवो का सब ब्रैंड आईकू अपना नया फ्लैगशिप आईकू 15 लॉन्‍च करने जा रहा है। दावा है कि इस फोन के साथ यूजर्स को प्रीमियम परफॉर्मेंस, एडवांस कैमरा, बेहतरीन सॉफ्टवेयर और स्‍मार्टफोन में दमदार एआई फीचर्स दिए जाएंगे। बैटरी लाइफ और डिस्‍प्‍ले के मामले में ब्रैंड बहुत कुछ नया करने जा रहा है, जिनमें से एक है आईकू 15 का डिस्‍प्‍ले। इस फोन में Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले मिलने जा रहा है। दावा है कि किसी भी एंड्रॉयड फोन में पहली बार यह डिस्‍प्‍ले इस्‍तेमाल हो रहा है। क्‍या है Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले? Samsung 2K M14 LEAD ओलेड डिस्‍प्‍ले को सैमसंग ने बनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस नाम में लीड का अर्थ है- लो पावर, इको फ्रेंडली, ऑगमेंटेड ब्राइटनैस, डिजाइंड टु बी स्‍ल‍िम एंड लाइट। डिस्‍प्‍ले को इस तरह बनाया है कि यह ज्‍यादा ब्राइट होता है और बैटरी कम खर्च करता है। यह डिस्‍प्‍ले 2K रेजॉलूशन ऑफर करता है। 144 हर्त्‍ज तक रिफ्रेश रेट देता है। ऐसे डिस्‍प्‍ले को गेमिंग के लिए बेहतरीन माना जाता है। सैमसंग के अनुसार, इस डिस्‍प्‍ले की बदौलत उतनी ही बैटरी खर्च होने पर ज्‍यादा ब्राइटैनस मिलती है। iQOO 15 में क्‍या डिस्‍प्‍ले होगा iQOO 15 में भी Samsung 2K M14 LEAD™ OLED डिस्‍प्‍ले दिया जा रहा है। यह 2K रेजॉलूशन और 144 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट देगा। डिस्‍प्‍ले में 6 हजार निट्स की पीक्र ब्राइटनैस दी जाएगी। दावा है कि भारत का सबसे ब्राइट डिस्‍प्‍ले स्‍मार्टफोन होगा। इसके अलावा, फोन में डॉल्‍बी विजन और‍ ट्रिपल एंब‍िएंट लाइट सेंसर दिया जाएगा, जिससे ब्राइटनैस एडजस्‍ट करना आसान होगा। iQOO 15 में अबतक का सबसे तेज प्रोसेसर स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 मिलने वाला है। यह ओरिजनओएस6 पर बेस्‍ड एंड्रॉयड 16 पर रन करेगा। इस फोन में 50 मेगापिक्‍सल का ट्र‍िपल कैमरा सिस्‍टम मिलने वाला है। मेन सेंसर सोनी आईएमएक्‍स921 होगा। उसके साथ 50 मेगापिक्‍सल का सोनी आईएमएक्‍स882 पेरिस्‍कोप कैमरा दिया जाएगा। तीसरा कैमरा अल्‍ट्रा वाइड कैमरा होने वाला है। फोन में 32 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा दिया जाएगा। यह फोन 7 हजार एमएएच बैटरी के साथ लाया जा रहा है, जो 100 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग और 40 वॉट की वायरलैस चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।

अविवाहित युवतियों में भी समस्या, भारी ब्रेस्ट से पीठ दर्द बढ़ा; एम्स में 246 सर्जरी

नई दिल्ली कई लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी पीठ दर्द का अनुभव होता है। कुछ लोगों के लिए, यह तनाव, गलत मुद्रा, अत्यधिक परिश्रम, अधिक वजन और कई अन्य कारकों के कारण हो सकता है। कई महिलाओं में पीठ दर्द का एक प्रमुख कारण बड़े स्तन हैं। बड़े स्तन पीठ दर्द का कारण कैसे बनते हैं? डी-कप स्तनों का वज़न 16 से 24 पाउंड के बीच हो सकता है। इस आकार के स्तन छाती पर अनावश्यक दबाव डाल सकते हैं, जिसके लिए गर्दन, कंधों और पीठ पर संतुलन बनाए रखना ज़रूरी होता है। इन सभी कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव और लगातार दर्द हो सकता है। अतिरिक्त वज़न मुद्रा संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे सकता है, क्योंकि मांसपेशियां सीधी रहने के लिए संघर्ष करते-करते थकने लगती हैं और पीठ का ऊपरी हिस्सा आगे की ओर झुकने लगता है। पीठ और गर्दन का दर्द, बार-बार थकान और भारीपन का एहसास को कई महिलाएं सामान्य समझकर सालों तक नजरअंदाज करती हैं। लेकिन अब डॉक्टर बता रहे हैं कि इसके पीछे की वजह ब्रेस्ट हाइपर ट्रॉफी यानी ब्रेस्ट का असामान्य रूप से बड़ा होना भी है। एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पिछले एक साल में 246 महिलाओं ने ब्रेस्ट से जुड़ी सर्जरी कराई हैं, जिनमें से 23.5% यानी 57 महिलाओं की ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी हुई। जिसमें सबसे ज्यादा मरीज 20 से 30 साल की युवतियां हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ता हार्मोनल इम्बैलेंस, बदलती जीवनशैली और तनाव इस समस्या की बड़ी वजह हैं। यही कारण है कि ब्रेस्ट सर्जरी अब सिर्फ कॉस्मेटिक नहीं, बल्कि मेडिकल जरूरत बन गई है। शरीर को लेकर जागरूक हो रही महिलाएं एम्स भोपाल की रिपोर्ट बताती है कि बीते 4 से 5 सालों में भोपाल समेत मध्यप्रदेश में महिलाएं अपने शरीर को लेकर अधिक जागरूक हुई हैं। दर्द झेलने या पेनकिलर लेने की बजाय अब वे स्थायी समाधान चुन रही हैं। साल 2019 में एम्स भोपाल में 100 के करीब ही ब्रेस्ट से जुड़ी सर्जरी हुई थीं, जो अब बढ़कर 250 के करीब पहुंच गई हैं। ब्रेस्ट हाइपर ट्रॉफी एक गंभीर समस्या एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनाल खान बताते हैं कि ब्रेस्ट का असामान्य रूप से बड़ा होना ब्रेस्ट हाइपर-ट्रॉफी कहलाता है। यह स्थिति न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी प्रभावित करती है। इन मरीजों को अक्सर कंधे और गर्दन में दर्द, थकान और स्किन इन्फेक्शन होता है। ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी से हम उनका साइज बॉडी स्ट्रक्चर के अनुसार करते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली सहज हो जाती है। डॉ. खान ने बताया कि एम्स एक सेंट्रल गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट है, इसलिए यहां सर्जरी का खर्च बहुत कम है। ओटी चार्ज, बेड चार्ज और सर्जिकल फीस सभी सरकारी दरों पर हैं। यदि मरीज आयुष्मान कार्डधारक नहीं भी है, तब भी उसे न्यूनतम खर्च में इलाज मिल जाता है। हर सर्जरी से पहले काउंसलिंग अनिवार्य डॉ. खान ने कहा कि हर सर्जरी में कुछ रिस्क होता है, इसलिए मरीज को पहले ही बताया जाता है। हम पहले उसकी मेडिकल कंडीशन, मानसिक स्थिति और फिजिकल पैरामीटर्स का आकलन करते हैं। सर्जरी के बाद रेगुलर फॉलो-अप जरूरी होता है ताकि किसी तरह का इन्फेक्शन या निशान न बने। सर्जरी के बाद मरीजों को एंटीबायोटिक्स और पेन रिलीफ मेडिसिन दी जाती हैं। इसके अलावा ब्रेस्ट सपोर्ट गारमेंट्स पहनने के निर्देश दिए जाते हैं। ब्रेस्ट सर्जरी ने ऐसे बदली जिंदगी एम्स में एक सरकारी महिला कर्मचारी का केस डॉक्टरों के लिए यादगार रहा। उन्हें पोलैंड सिंड्रोम नामक स्थिति थी, जिसमें जन्म से एक साइड का ब्रेस्ट विकसित नहीं होता। डॉ. खान बताते हैं कि इस वजह से उन्हें आत्मग्लानि और सामाजिक परेशानी झेलनी पड़ी। हमने उनका ब्रेस्ट इंप्लांट किया, जिससे वे सामान्य जीवन जीने लगीं। हाल ही में उन्होंने शादी की और धन्यवाद देने एम्स लौटीं। ब्रेस्ट साइज असमानता के मामले बढ़े विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह के अनुसार, कई महिलाओं में दोनों ब्रेस्ट का आकार एक जैसा नहीं होता। इसे Amastia कहा जाता है। एम्स में ऐसे मरीजों को इंप्लांट या ब्रेस्ट एक्सपैंडर की मदद से दोनों ओर समान आकार दिया जाता है। सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी है। मरीज को एक या दो सप्ताह बाद जांच करानी होती है, फिर दो महीने बाद अंतिम समीक्षा की जाती है। ब्रेस्ट सर्जरी के बाद यह सावधानी जरूरी     ब्रेस्ट पर अत्यधिक दबाव न डालें     सही फिटिंग वाला सपोर्ट गारमेंट पहनें     धूल, पसीना और संक्रमण से बचें नई तकनीक- 3डी प्रिंटर से तैयार होगा कैंसर ग्रसित स्तन एम्स में अब 3डी प्रिंटर से कैंसर ग्रसित ब्रेस्ट मॉडल तैयार किया जाएगा, जो हर मरीज की डिटेल के अनुसार बनेगा। डॉक्टर उस पर प्रयोग कर यह जान सकेंगे कि मरीज के लिए सबसे बेहतर उपचार तकनीक क्या होगी, जिससे मरीज को उसके अनुसार सर्वोत्तम इलाज मिल सके। एम्स में पॉलीजेट डिजिटल एनाटमी प्रिंटर मौजूद है। यह प्रिंटर शरीर के अंग जैसे नकली अंग तैयार करता है, जिनमें नसों, मांसपेशियों और आकार को असली शरीर जैसा बनाया जाता है। शुरुआती चरण में 10 ब्रेस्ट कैंसर पीड़ितों के नकली स्तन तैयार किए जाएंगे, जिन पर अलग-अलग दवाओं का परीक्षण होगा और जो उपचार सबसे बेहतर होगा, वही मरीज को दिया जाएगा। सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट कैंसर के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के मामले 2.3% बढ़े हैं। महिलाओं में कुल कैंसर मामलों में सबसे अधिक 33.9% ब्रेस्ट कैंसर हैं।इसके बाद 12.1% सर्विक्स कैंसर और 7.9% ओवरी कैंसर के केस दर्ज किए गए हैं।

UPI यूजर्स के लिए खुशखबरी: अब गलती से भेजे पैसे भी नहीं जाएंगे डूब, जानिए कैसे

नई दिल्ली  डिजिटल पेमेंट के जमाने में हर मिनट किसी नए फ्रॉड का नया तरीका सामने आ रहा है। PhonePe ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए एक नया फीचर लॉन्च किया है PhonePe Protect। इस नए टूल का उद्देश्य है यूर्स को गलत नंबर पर पैसे भेजने से पहले चेतावनी देना या ट्रांसफर रोकना, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाएं कम हों। PhonePe Protect को Department of Telecommunications (DoT) के ‘Financial Fraud Risk Indicator (FRI)’ डेटा के आधार पर विकसित किया गया है, जिससे ऐप प्लेटफॉर्म पर “बहुत उच्च जोखिम” (Very High FRI) और “मध्यम जोखिम” (Medium FRI) वाले नंबरों को ट्रैक किया जा सकेगा। अगर आपने हाल-ही में कोई “सस्पेक्ट नंबर” खोला है या UPI/QR कोड से पेमेंट करने की सोची है, तो यह फीचर आपके लिए खास मायने रखता है। PhonePe Protect कैसे काम करता है ट्रांसफर शुरू करते ही PhonePe की तकनीक नंबर को DoT के FRI डेटाबेस से चेक करती है। अगर वह नंबर “Very High FRI” श्रेणी में आता है ऐप अपने आप पेमेंट ब्लॉक कर देती है और स्क्रीन पर “PhonePe Protect Transaction Blocked” का मैसेज दिखाती है। यदि नंबर “Medium FRI” लेवल पर हो, तो ऐप यूजर को चेतावनी देता है “यह नंबर पहले धोखाधड़ी में देखा गया है, क्या आप आगे बढ़ना चाहते हैं?” यूजर फिर अपने विवेक से आगे बढ़ सकता है। स्क्रीन अलर्ट के साथ-साथ, ऐप ट्रांसफर के बंद होने का कारण भी बताती है जिससे यूर को समझ आए कि “क्यों पेमेंट रोकी गई”। क्यों यह फीचर अहम है भारत में UPI ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़े हैं, लेकिन फ्रॉड का खतरा भी उठा है। अब तक यूजर गलती से किसी धोखेबाज नंबर पर पैसा भेज देते थे क्योंकि उन्हें पता नहीं होता था कि नंबर पहले ट्रैक किया गया है। PhonePe Protect इस कमी को पूरा करता है। यह फीचर सिर्फ टेक-फोरेंस नहीं, बल्कि यूजर-एजुकेशन का रोल भी निभाता है जब यूजर को “रिस्क” समझ में आता है, तो वह सोच-समझ कर ट्रांसफर करता है। कंपनी ने कहा है कि 61 करोड़ से अधिक यूजर्स के नेटवर्क में यह फीचर सुरक्षा की एक नई परत है। यूजर्स के लिए टिप्स पेमेंट से पहले Receiver’s नंबर और नाम को एक बार जांच लें। अगर स्क्रीन पर “PhonePe Protect” अलर्ट दिखे उसे हल्के में न लें, आगे बढ़ने से पहले विचार करें। QR कोड से पेमेंट कर रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि QR स्कैन किए जाने वाला डॉक्युमेंट/साइन वास्तविक है नकली QR फ्रॉड का एक तरीका है। UPI-पेमेंट के लिए strong PIN + ऐप ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें और ऐप अपडेट रखें ताकि नया सिक्योरिटी फीचर एक्टिव हो सके। यदि गलती से पैसे भेज दिए हैं, तो तुरंत बैंक या ऐप कस्टमर-केयर से संपर्क करें हालांकि ब्लॉक करने से पहले ही भेजे गए पैसे वापस नहीं हो सकते।  

Vivo Y19s 5G अब भारत में, दमदार बैटरी और फीचर्स, इतनी है कीमत

मुंबई  Vivo ने भारत में नया अफोर्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है. इसका नाम Vivo Y19s 5G है. इसमें 6000mAh की बैटरी, डुअल रियर कैमरा और साइड माउटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर मिलता है. इसके अंदर मीडियाटेक डाइमेंसिटी का चिपसेट दिया है.  Vivo Y19s 5G को तीन वेरिएंट में लॉन्च किया है. वीवो के इस हैंडसेट की शुरुआती कीमत 10,999 रुपये है, इसमें 4GB Ram + 64GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. वहीं अन्य दो वेरिएंट  11,999 और 13,499 रुपये में आते हैं. इनमें  4GB + 128GB स्टोरेज और 6GB + 128GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. यह स्मार्टफोन मजेस्टिक ग्रीन और टाइटेनियम सिल्वर कलर में आता है.  Vivo Y19s 5G के स्पेसिफिकेशन्स  Vivo Y19s 5G में 6.74-inch का HD+ LCD स्क्रीन दिया है. इसमें 90Hz का रिफ्रेश रेट्स और 1600 × 720 पिक्सल रेजुल्यूशन मिलता है. यह हैंडसेट ऑक्टाकोर म MediaTek Dimensity 6300 6nm के साथ आता है. इसके साथ ARM Mali-G57 MC2 GPU का यूज किया है.  Vivo Y19s 5G की रैम और स्टोरेज  Vivo Y19s 5G में यूजर्स को 4GB और 6GB LPDDR4X RAM के ऑप्शन मिलते हैं. इसके अलावा स्टोरेज के भी दो ऑप्शन मिलते हैं, जो 64GB और 128GB हैं. इसमें 2TB तक का माइक्रोएसडी कार्ड यूज कर सकते हैं. यह स्मार्टफोन Android 15 बेस्ड Funtouch OS 15 पर काम करता है.   Vivo Y19s 5G का डुअल रियर कैमरा सेटअप  Vivo Y19s 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया है. इसमें प्राइमरी कैमरा 13MP का है, जो  f/2.2 aperture के साथ आता है. इसमें 0.08MP का सेकेंडरी कैमरा भी दिया है. 5MP का फ्रंट कैमरा भी दिया है.  Vivo Y19s 5G की बैटरी  Vivo Y19s 5G में 6000mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 15W का फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. इस हैंडसेट में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है. कंपनी ने बताया है कि इसमें बेहतर ड्युरेबिलिटी देने के लिए Military-grade durability का यूज किया है. डस्ट और वॉटर रेसिस्टेंस के लिए IP64 रेटिंग दी है. 

मोबाइल यूज़र्स के लिए खुशखबरी — Google ला रहा है ऐसी स्क्रीन जो बचाएगी ज्यादा बैटरी

Google का नया इनोवेशन! अब बदलेगी मोबाइल स्क्रीन और बढ़ेगी बैटरी लाइफ मोबाइल यूज़र्स के लिए खुशखबरी — Google ला रहा है ऐसी स्क्रीन जो बचाएगी ज्यादा बैटरी Google की नई टेक्नोलॉजी से मोबाइल स्क्रीन होगी स्मार्ट, फोन की बैटरी चलेगी घंटों ज्यादा नईदिल्ली  Google एक नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से स्मार्टफोन यूजर्स को बेहतरीन बैटरी बैकअप मिलेगा. यह फीचर सभी एंड्रॉयड यूजर्स को मिलेगा. Google Maps का नया फीचर अभी बीटा वर्जन सामने आया है, जिसमें स्मार्टफोन यूजर्स के लिए सबसे एडवांस्ड पावर सेविंग मोड तैयार हो रहा है.  अधिकतर स्मार्टफोन यूजर्स लंबे सफर के दौरान नेविगेशन का यूज करते हैं, जिसकी वजह से स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है. एंड्रॉयड अथॉरिटी की रिपोर्ट्स में बताया है कि गूगल न्यू पावर सेविंग मोड पर काम कर रहा है, जो इस समस्या को दूर कर देगा.  बीटा वर्जन में हुआ खुलासा, आ रहा है नया पावर सेविंग मोड  रिपोर्ट्स में बताया कि Android के लिए Google Maps के 25.44.03.824313610 beta वर्जन को ओपेन किया. वहां पर पावर सेविंग मोड के बारे में पता चला. यह अपने आप में बेहद खास है.  नए मोड के तहत स्क्रीन में होगा बड़ा बदलाव  गूगल मैप्स पर यूजर्स को एक नया बटन मिलेगा, उस पर क्लिक करने के बाद स्क्रीन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल नेविगेशन यूजर इंटरफेस से सभी कलर को रिमूव कर देगा. इसमें यूजर्स को ब्लैंक एंड व्हाइट स्क्रीन का एक्सपीरियंस मिलेगा.  मोबाइल स्क्रीन पर नजर आएंगे ये खास ऑप्शन  ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन के ऊपर यूजर को संभावित पहुंचने का समय (ETA), दूरी आदि दिखाई देगी. ऐसे करने से मोबाइल की बैटरी को लंबे समय तक सेव किया जा सकेगा. यह फीचर उन लोगों के लिए यूजफुल होगा, जो लंबी दूरी के लिए गूगल मैप्स पर नेविगेशन देखते हैं. ऐसे में मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है.   नेविगेशन के लिए यूज होने वाले ऐप्स की लिस्ट में Google Maps टॉप पर है. रियल टाइम ट्रैफिक अपडेट, स्पीड और अन्य डिटेल्स को यह मोबाइल स्क्रीन पर दिखाते हैं. इसमें कई अच्छे फीचर्स और टोल रेट्स की डिटेल्स तक देते हैं. साथ ही आप टोल बचाने के लिए नो टोल रोड्स का चुनाव कर सकते हैं.  

सुंदरता के लिए कैसे करें बेबी वाइप्स का उपयोग

बेबी वाइप्स बच्चों के लिए लाभकारी होता है क्योंकि उनमें किसी प्रकार का हानिकारक केमिकल नहीं होता है और वो उनकी त्वचा पर इसका बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा ये उन्हें इंफेक्शन से भी बचाता है। बेबी वाइप्स ना कि सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि युवाओं के लिए बहुत लाभकारी होता है। लोग इन्हें कई प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं- जैसे- त्वचा को साफ करने के लिए, टेबल साफ करने के लिए, कारपेट से गंदगी हटाने के लिए या फिर हाथ पोछनें के लिए। सबसे बेहतरीन उपयोग इनका सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। जैसे बच्चों की त्वचा पर इसका बुरा प्रभाव नहीं होता है वैसे ही युवाओं के लिए भी यह नुकसानदायक नहीं होता है। बेबी वाइप्स के लाभ… नाखून स्वस्थ रखता है : बेबी वीइप्स का इस्तेमाल आपके नाखूनों की गंदगी को हटाने में मदद करता है और आपके आपके क्यूटिकल्स को मॉइश्चराइज रखने में मदद करता है। इसके अलावा आपके नाखूनों की सुंदरता भी बनाए रखता है। मेकअप हटाना : बेबी वाइप्स त्वचा से मेकअप हटाने के लिए बहुत लाभकारी होता है और आसानी से मेकअप हटा देता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है और ना ही त्वचा पर इसका कोई साइड इफेक्ट होता है। अंडरआर्म्स को साफ करना : बेबी वाइप्स में एल्कोहल होता है जो अंडरआर्म्स में होने वाले एन्जाइम और बैक्टीरिया को नष्ट करता है जिससे बदबू और गंदगी दोनों कम हो जाती है। इसके अलावा बेबी वाइप्स में पानी की मात्रा अधिक होती है जो बैक्टीरिया और कीटाणुओं को अवशोषित कर लेती है। हेयर डाई के दाग को हटाना : बेबी वाइप्स माथे और गर्दन पर लगे हेयर डाई को साफ करता है क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में एलोवेरा मौजूद होता है और त्वचा को हेयर डाई से होने वाले नुकसान से भी बचाता है। टैनिंग दूर करने के लिए : बेबी वाइप्स में एलोवेरा और विटामिन-ई मौजूद होता है जो आपकी त्वचा के लिए लाभकारी होता है और सूरज की हानिकारक किरणों के कारण होने वाली टैनिंग को दूर करता है।