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चेहरे की खूबसूरती बढ़ाएँ: ब्लड सर्कुलेशन सुधारने और डबल चिन हटाने वाले योगासन

शरीर में फैट जमा होने की समस्या काफी आम हो चुकी है। इसके कारण कई लोगों की डबल चिन भी आ जाती है। डबल चिन ठुड्डी के नीचे जमा फैट को कहते हैं। उम्र, वजन बढ़ने या गलत पोस्चर में बैठने की वजह से यह समस्या हो सकती है। ठुड्डी के नीचे फैट बढ़ने की वजह से चेहरे का आकार बदलने लगता है। हालांकि, कुछ आसान योगासनों की मदद से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। जी हां, कुछ योगासनों से मांसपेशियों में खिंचाव आता है और चेहरे के ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे डबल चिन को कम करने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 योगासनों के बारे में। सिंहासन सिंहासन को चेहरे और गर्दन की मांसपेशियों के लिए सबसे अच्छा आसन माना जाता है। इस आसन में चेहरे, गले और जबड़े की मांसपेशियों में जोरदार खिंचाव होता है, जो डबल चिन वाली जगह को टोन करने में मदद करता है। कैसे करें     वज्रासन में बैठ जाएं या फिर पद्मासन लगा लें।     अपने हाथों को घुटनों पर रखें और उंगलियों को फैलाएं।     गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए मुंह को खोलें और जीभ को बाहर निकालकर ठुड्डी की ओर ले जाएं।     आंखों को पूरी तरह खुला रखें और गले से 'हा' की आवाज निकालें, जैसे शेर दहाड़ रहा हो।     इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और फिर नॉर्मल पोजीशन आ जाएं। इसे 3-5 बार दोहराएं। उष्ट्रासन उष्ट्रासन गर्दन और गले के हिस्से में खिंचाव पैदा करता है। यह आसन थायरॉयड ग्लैंड को एक्टिव करने और गर्दन की एक्स्ट्रा चर्बी को कम करने में मददगार साबित होता है। कैसे करें?     घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं, घुटनों और पैरों को हिप्स की चौड़ाई जितना खोल लें।     हाथों को कमर पर रखें और कोहनियों को पीछे की ओर खींचें।     सांस छोड़ते हुए पीछे की ओर झुकें और हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।     गर्दन को रिलैक्स छोड़ दें और सिर को पीछे की ओर लटकने दें, ताकि गले में अच्छा खिंचाव महसूस हो।     30 सेकंड से 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें। जलंधर बंध जलंधर बंध एक बंध या लॉक है, जिसे प्राणायाम के दौरान किया जाता है। यह सीधे तौर पर गले और ठुड्डी के नीचे के हिस्से पर काम करता है, जिससे वहां की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और चर्बी कम होती है। कैसे करें?     सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।     गहरी सांस लें और सांस को रोककर रखें ।     सिर को आगे झुकाएं और ठुड्डी को छाती से सटाने की कोशिश करें।     हाथों को घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बना सकते हैं।     जब तक हो सांस को रोककर रखें, फिर सिर को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ें।     इसे 3-5 बार दोहराएं। सर्वांगासन सर्वांगासन को 'सभी अंगों का आसन' कहा जाता है। यह थायरॉयड ग्लैंड पर दबाव डालकर मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने में मदद करता है, जिससे वजन कंट्रोल रहता है। साथ ही, इस मुद्रा में गर्दन में खिंचाव आता है, जो डबल चिन को कम करने में सहायक है। कैसे करें?     पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के बगल में रखें।     पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और कमर को हाथों का सहारा देकर ऊपर ले जाएं।     शरीर को सीधा ऊपर की ओर खींचे, ठुड्डी छाती से सटी रहे।     शरीर का पूरा भार कंधों पर होना चाहिए।     30 सेकंड से शुरुआत करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। मत्स्यासन मत्स्यासन गर्दन और गले के हिस्से को पूरी तरह से स्ट्रेच करता है। यह आसन थायरॉयड ग्लैंड को एक्टिव करता है और गर्दन की अकड़न को दूर करके उसके आसपास जमा फैट को कम करने में मदद करता है। कैसे करें?     पद्मासन में बैठ जाएं।     पीठ के बल लेट जाएं और हाथों से पैर के अंगूठे को पकड़ें।     कोहनियों को जमीन पर टिका दें। सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और सिर को जमीन पर टिका दें।     गर्दन में गहरा खिंचाव महसूस करें। सांस लेते और छोड़ते रहें।     30 सेकंड से 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।  

लोग बोले- लगता है अब हद हो गई! टैटू का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे दंग

नई दिल्ली फैशन की दुनिया में नए-नए ट्रेंड रोज सामने आते हैं, लेकिन चीन से आया यह ट्रेंड लोगों को चौंका रहा है। यहां युवा अब दांतों पर टैटू बनवाने लगे हैं। यह सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन हकीकत यह है कि टैटू सीधे दांतों पर नहीं बनाए जाते, बल्कि 3D प्रिंटिंग से बने छोटे क्राउन पर डिजाइन बनाकर उसे दांत पर चढ़ा दिया जाता है। इस टैटू को बनवाना न तो दर्दनाक है और न ही जटिल। पहले क्राउन तैयार किया जाता है, फिर उस पर डिजाइन, अक्षर, या कोई चित्र उकेरा जाता है। इसके बाद इसे असली दांत के ऊपर फिट कर दिया जाता है। लोग अपने लकी नंबर, पसंदीदा अक्षर या शुभ शब्द भी इन क्राउन पर बनवाते हैं। कुछ क्लीनिक तो अब क्राउन के साथ मुफ्त टैटू डिज़ाइन देने का ऑफर भी दे रहे हैं। हालांकि, इस ट्रेंड को लेकर डेंटल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी भी दी है। शंघाई के डॉक्टरों का कहना है कि क्राउन पर डिज़ाइन उकेरने से वह कमजोर हो सकता है और जल्दी घिस सकता है। इसलिए दांतों पर टैटू बनवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सोशल मीडिया पर मचा तहलका सोशल मीडिया पर इस फैशन ने तहलका मचा दिया है। किसी को यह आइडिया क्रिएटिव लगा तो किसी ने इसे दांतों की सेहत के लिए खतरनाक बताया। एक यूजर ने मजाक में लिखा, 'ये वही लोग हैं जिनके दांत किसी भी चीज़ को चबा सकते हैं, उन दांतों पर टैटू बनवाना कोई बड़ी बात नहीं।' वहीं दूसरे ने लिखा, 'लगता है अब चमड़ी पर जगह कम पड़ गई थी।'

सावधान! पेन किलर और इनहेलर के सही इस्तेमाल का AIIMS ने दिया खास निर्देश

भोपाल   पेनकिलर या स्टेरॉयड का गलत उपयोग किडनी को प्रभावित कर सकता है। मेडिकल डिवाइस का सही ज्ञान न होने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो व्यक्ति को विचलित या गंभीर स्थिति में ला सकती है। यही नहीं, एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है, जिससे गंभीर बीमारी होने पर एंटीबायोटिक्स असर करना बंद कर देंगी और यह मौत का प्रमुख कारण बन सकता है। एम्स के विशेषज्ञों ने 21 सितंबर को 5वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान ये जानकारी दी। इस्तेमाल करने का सही तरीका सीखें विशेषज्ञों ने कहा कि ब्लड प्रेशर मशीन, ग्लूकोमीटर और इनहेलर जैसे उपकरणों को सही तरीके से उपयोग करना सीखें। गलत तकनीक परिणामों को प्रभावित कर सकती है। गलत परिणाम देखकर कई बार स्वस्थ व्यक्ति भी विचलित हो जाता है। इस स्थिति से बचना चाहिए, क्योंकि भ्रम में कई बार व्यक्ति जल्दबाजी में बड़ी गलती कर बैठता है। इसके अलावा थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि का नियमित केलिब्रेशन और सफाई जरूरी है, ताकि इन्फेक्शन का खतरा न रहे। बिना सलाह न लें पेनकिलर, स्टेरॉयड AIIMS Bhopal के विशेषज्ञों ने कहा कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर और स्टेरॉयड का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके गलत उपयोग से किडनी पर असर पड़ सकता है। इसके साथ-साथ एंटीबायोटिक्स के खिलाफ शरीर में रेजिस्टेंस बनता है, जिससे जब दवा की जरूरत पड़ती है तो शरीर पर उसका असर नहीं होता। टोल-फ्री नंबर पर करें कॉल किसी भी तरह के दुष्प्रभाव दिखने पर रिपोर्टिंग के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180- 3024 और मोबाइल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम का संचालन रिसर्च एसोसिएट दीपिका चौधरी और फैजान ने किया। वहीं, डॉ. फ्लोरेंस जॉय, डॉ. केविन जैन, डॉ. चिराग अग्रवाल और डॉ. सिद्धांत ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया और उपभोक्ताओं एवं स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

मुलायम और खूबसूरत पैर चाहिए? बस फॉलो करें ये ज़रूरी टिप्स

ज‍ितनी केयर की जरूरत हमारे स्‍क‍िन को होती है, उतनी ही हाथ-पैरों की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। आमतौर पर लोग चेहरे और हाथों की सफाई कर लेते हैं, लेक‍िन पैरों को अनदेखा कर द‍िया जाता है। पैरों को सुंदर बनाए रखने के लि‍ए आपको कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी होता है। वैसे तो पैरों की देखभाल करने के कई ऑप्‍शंस हैं, लेकिन क्रीम का इस्तेमाल करना सबसे आसान और सस्‍ता व‍िकल्‍पा माना जाता है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि पैरों में क्रीम लगाने के क्‍या फायदे हो सकते हैं। आइए जानते हैं वि‍स्‍तार से – फुट क्रीम लगाने के फायदे     पैरों में ज्यादा पसीना आने या टाइट जूते पहनने से अक्सर एथलीट फुट नाम की समस्या होने लगती है। इसमें पैरों, खासकर उंगलियों के बीच जलन और खुजली होती है। ऐसे में अगर आप रोजाना फुट क्रीम लगाती हैं तो इस परेशानी से बचाव क‍िया जा सकता है।     अक्सर हम चेहरे और हाथों पर मॉइश्चराइजर लगा लेते हैं लेकिन पैरों पर भूल जाते हैं। फुट क्रीम लगाने से पैरों में नमी बरकरार रहती है। साथ ही आपके पैर भी दिनभर मुलायम रहते हैं।     फटी और रूखी एड़ियाें की समस्‍या बहुत आम हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है पैरों को नमी न मिलना। अगर आप रोजाना फुट क्रीम लगाएंगे तो एड़ियां फटने से बचेंगी और पैरों की स्किन मुलायम रहेगी। फुट क्रीम कैसे लगाएं? नहाने के बाद जब पैर हल्के गीले हों तभी फुट क्रीम लगाना चाह‍िए। इससे क्रीम जल्दी और अच्छी तरह एब्‍जॉर्ब हो जाती है। पैरों में क्रीम लगाने के ल‍िए हथेली पर थोड़ी-सी क्रीम लें और पैरों पर हल्के गोल-गोल मसाज करें। आप रात में भी क्रीम लगाकर मोजे पहन सकती हैं। इससे रातभर क्रीम अपना काम करेगी और सुबह पैर मुलायम लगेंगे। ध्यान रखें कि क्रीम लगाने से पहले पैरों को धो जरूर लें। इसके बाद क्रीम लगाएं। मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होता है। इन ट‍िप्‍स को करें फॉलाे     हफ्ते में एक बार पैरों को 15 से 20 मिनट गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे धूल-मिट्टी और गंदगी निकल जाएगी।     पैरों की डेड स्किन हटाने के लिए प्यूमिक स्टोन या कोई फुट स्क्रब इस्तेमाल करें। धीरे-धीरे रगड़ें ताकि चोट न लगे।     जैसे चेहरे के लिए फेस पैक होता है, वैसे ही पैरों पर भी पैक लगाएं। आप मुल्तानी मिट्टी (फुलर अर्थ), दही या कुछ बूंदें एसेंशियल ऑयल की इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे पैरों को ठंडक और नमी दोनों मिलती है।     सारे स्टेप पूरे करने के बाद फुट क्रीम लगाना न भूलें। हल्के हाथों से मसाज करें ताकि पैरों की त्वचा नरम और हेल्‍दी बने।     पैरों को समय-समय पर स्क्रबर से साफ करें।     नाखून हमेशा छोटे और साफ रखें।  

उपवास के दौरान कैसे रहें एनर्जेटिक: नवरात्रि डाइट टिप्स

शारदीय नवरात्र का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी के नौ रूपों की आराधना होती है। भक्तजन इस दौरान पूजा-पाठ करते हैं और उपवास भी करते हैं। कुछ पूरे नौ दिनों का उपवास करते हैं, कुछ नवरात्र के पहले और आखिरी दिन उपवास करते हैं, तो कुछ नौ दिनों तक दिन में सिर्फ एक ही बार अन्न खाते हैं। आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि के लिए व्रत रखना जरूरी माना जाता है, लेकिन लंबे समय तक उपवास रखने से शरीर में कमजोरी, थकान और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आपकी डाइट (Navratri Diet Tips) ऐसा हो जो आपको भरपूर एनर्जी दे और आपके तन-मन को फिट रखे। आइए जानते हैं कुछ जरूरी डाइट टिप्स जिन्हें अपनाकर आप व्रत के दौरान भी खुद को एनर्जेटिक बनाए रख सकते हैं। हाइड्रेशन है सबसे जरूरी व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है। इसलिए दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी जरूर पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, दही और ताजे फलों के जूस भी पीते रहें। ये न केवल आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करेंगे, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस भी बनाए रखेंगे, जिससे कमजोरी महसूस नहीं होगी। छोटे-छोटे अंतराल में कुछ न कुछ खाएं अगर आप पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं, तो इससे ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है और कमजोरी आ सकती है। इससे बचने के लिए कोशिश करें कि हर 2-3 घंटे में कुछ हल्का-फुल्का जरूर लें। आप फल, मेवे, साबुदाना के चिप्स या एक गिलास दूध ले सकते हैं। इससे शरीर को लगातार एनर्जी मिलती रहेगी। पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें व्रत में केवल फलाहार पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपनी डाइट में पोषक तत्वों को शामिल करें। ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, अखरोट, काजू; सीड्स जैसे कद्दू के बीज; और फल जैसे केला, सेब, नाशपाती खाएं। इनमें मौजूद नेचुरल शुगर, विटामिन और मिनरल्स शरीर को एनर्जी देंगे। सही समय पर सेंधा नमक खाएं अगर आप दिन में एक बार सेंधा नमक वाला खाना खाते हैं, तो उसे सुबह के समय लेना ज्यादा फायदेमंद होगा। दिन के समय शरीर को ज्यादा एनर्जी और सोडियम की जरूरत होती है। सेंधा नमक शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। व्रत खोलते समय रखें सावधानी नौ दिन के व्रत के बाद पेट थोड़ा सेंसिटिव हो जाता है। ऐसे में व्रत खोलते समय हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाना चाहिए। तली-भुनी या भारी चीजों से परहेज करें। व्रत खोलने के लिए सबसे पहले नारियल पानी, छाछ या फलों का जूस लें। कुछ देर बाद हल्का खाना जैसे फल, दही, या सब्जियों का सूप ले सकते हैं। नवमी के प्रसाद में संयम बरतें नवमी के दिन बनने वाले स्वादिष्ट प्रसाद जैसे पूरी, चना, हलवा आदि देखकर अक्सर लोग ज्यादा खा लेते हैं, जिससे पेट खराब हो सकता है। इन चीजों को सीमित मात्रा में ही खाएं, खासकर अगर आपने नौ दिनों का उपवास रखा है। साथ ही, प्रसाद लेने के बाद हल्का खाना करें और अगले दिन ही सामान्य खाना-पीना शुरू करें।  

सिर्फ 30 सेकेंड में ECG रिपोर्ट, ब्लड प्रेशर भी ट्रैक करेगी नई स्मार्टवॉच

नई दिल्ली हुवावे ने मार्केट में अपनी नई स्मार्टवॉच को लॉन्च किया है। हुवावे की इस नई वॉच का नाम Huawei Watch D2 Blue Edition है। यह वॉच मेडिकल ग्रेड हेल्थ फीचर्स के साथ आती है। इसे CE-MDR (EU Medical Device Regulation) ने मेडिकल डिवाइस के तौर पर सर्टिफाइ किया है। कंपनी ने इस वॉच को अभी यूरोप में लॉन्च किया है। यूके में इसकी कीमत £349.99 (करीब 41,500 रुपये) है। वॉच ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस है। साथ ही इसमें ECG फंक्शन भी दिया गया है, जो 30 सेकेंड में रिपोर्ट जेनरेट कर देता है। हुवावे वॉच D2 ब्लू एडिशन के फीचर और स्पेसिफिकेशन कंपनी इस वॉच में मेडिकल-ग्रेड हेल्थ और फिटनेस मॉनिटरिंग सिस्टम दे रही है। इसमें ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम भी ऑफर किया जा रहा है, यूजर्स को रेग्युलर चेक के लिए रिमाइंडर भी देता है। वॉच के यूजर मेजरमेंट को शेड्यूल कर सकते हैं और डीटेल्ड रिपोर्ट देख सकते हैं। यह पल्स रेट भी बताता है। वॉच यूरोपियन सोसायटी ऑफ हाइपरटेंशन की गाइडलान्स को पूरी तरह फॉलो करती है। हुवावे की यह वॉच कंपनी की TruSense सिस्टम के साथ आती है। इसके स्ट्रैप में हाई-प्रिसिशन प्रेशर सेंसर, एक मिनी पंप और एक 26.5mm का इन्फ्लेटेबल एयरबैग मौजूद है। वॉच में यूजर्स को Pulse Wave Arrhythmia Analysis के साथ ऑन-रिस्ट ईसीजी फंक्शन भी मिलेगा, जो 30 सेकेंड मेजरमेंट करके रिपोर्ट जेनरेट कर देता है। इन सब शानदार हेल्थ फीचर्स के अलावा वॉच में कंपनी हार्ट रेट मॉनिटर, स्ट्रेस ट्रैकिंग, SpO2 सेंसर, स्किन टेंप्रेचर मॉनिटरिंग और स्लीप ऐनालिसिस भी दे रही है। हुवावे की इस वॉच में आपको 480 x 408 पिक्सल रेजॉलूशन के साथ 1.82 इंच का AMOLED डिस्प्ले मिलेगा। यह डिस्प्ले 1500 निट्स के पीक ब्राइटनेस लेवल के साथ आता है। वॉच का वजन बिना स्ट्रैप 40 ग्राम है। कंपनी ने इस वॉच को ब्लू, ब्लैक और गोल्ड कलर ऑप्शन में लॉन्च किया है।

अब फिजिकल आधार कार्ड की ज़रूरत नहीं, ऐप से ही बनेगा काम

नई दिल्ली भारत सरकार जल्द ही आधार कार्ड को अपडेट करने की सुविधा को आसान बनाने वाली है। सरकार की ओर से एक एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च होने वाला है, जिसके जरिए लोग अपने आधार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी, जैसे- नाम, एड्रेस और जन्मतिथि को आसानी से अपडेट कर सकेंगे। यह ऐप यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UAIDI) बना रहा है। इसका उद्देश्य है लोगों के आधार अपडेट के काम को आसान करना, आकी उन्हें बार-बार आधार सेवा केंद्रों पर जाने की जरूरत न पड़े। आधार केंद्रों पर पहले स्लॉट बुक कराना होता है और फिर लंबी कतार में लगना पड़ता है। लेकिन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह ऐप जल्द ही लॉन्च होने वाला है और इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान होगा। इसका नाम फिलहाल e-Aadhaar App बताया जा रहा है। फिजिकल कार्ड न होने पर भी इससे आपका काम आसान हो सकता है। क्या-क्या अपडेट कर पाएंगे यूजर्स? इस नए आधार ऐप के जरिए यूजर्स अपने स्मार्टफोन से ही अपनी निजी जानकारी अपडेट कर सकेंगे। इसमें नाम, जन्मतिथि, पता और फोन नंबर जैसी जानकारियां शामिल हैं। पहले इसके लिए आधार सेवा केंद्रों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब यह काम घर बैठे हो सकेगा। सरकार का कहना है कि यह ऐप इस साल के अंत तक लॉन्च हो सकता है। यह ऐप एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी सेवाएं देगा, जिससे समय की बचत होगी। आप प्रोसेस को ट्रैक भी कर पाएंगे। AI और फेस आईडी तकनीक का इस्तेमाल भी हुआ इस ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फेस आईडी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे आधार से जुड़ी सेवाएं न केवल सुरक्षित होंगी, बल्कि तेज और आसान भी होंगी। फेस आईडी के जरिए यूजर्स की पहचान को और सिक्योर किया जाएगा, जिससे धोखाधड़ी की आशंका कम होगी। इस ऐप के आने बाद आपको केवल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जैसे फिंगरप्रिंट और आंखों की स्कैनिंग के लिए ही आधार केंद्र जाना होगा। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और प्रक्रिया तेज होगी। खुद ही निकाल लेगा आपके दस्तावेज इस ऐप की एक और खास बात यह है कि यह सरकारी सोर्सेस से खुद ही डेटा ले लेगा। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, पेन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड और मनरेगा योजना के रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज शामिल होंगे। इसके अलावा, बिजली बिल की जानकारी भी ली जा सकती है, जिससे एड्रेस की पुष्टि करना और आसान हो जाएगा। इस यूजर्स को यह फायदा है कि उन्हें ज्यादा ज्यादा दस्तावेज जमा नहीं कराने होंगे।

शोध में खुलासा: दुबलापन हो सकता है मोटापे से भी ज्यादा घातक

नई दिल्ली अधिक वजन-मोटापा मौजूदा समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े के मुताबिक देश में 15-49 वर्ष की आयु के 23% से ज्यादा पुरुष और 24% महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। ये साल 2000 के दशक की शुरुआत से वयस्कों में क्रमशः 91% और 146% की वृद्धि है। वसा और चीनी वाली चीजों के अधिक सेवन, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों, शहरीकरण के कारण गतिहीन होती जीवनशैली और बदलते सामाजिक-आर्थिक मानकों को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। बढ़ते वजन को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और यहां तक कि कुछ कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने वाला माना जाता रहा है। अधिक वजन और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर तो अक्सर चर्चा होती रहती है। लेकिन अब यहां ट्विस्ट ये है कि हाल के अध्ययनों में एक चौंकाने वाली बात बताई है। विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि अधिक वजन तो खतरनाक है ही पर बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना उससे भी गंभीर समस्या है। मसलन शरीर को स्वस्थ रखना है कि वजन को सामान्य रखने पर ध्यान देना जरूरी है। बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना भी खतरनाक एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि बहुत ज्यादा दुबला-पतला होना, अधिक वजन या मोटापे से ज्यादा घातक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पांच वर्षों में 85,761 व्यक्तियों का अध्ययन किया, जिसके दौरान आठ प्रतिशत प्रतिभागियों (7,555) की मृत्यु हो गई। प्रतिभागियों में से 81.4 प्रतिशत महिलाएं थीं और अध्ययन की शुरुआत में उनकी औसत आयु 66.4 वर्ष थी। डेनिश वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग बहुत कम बीएमआई वाले थे उनमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण असमय मृत्यु का खतरा, मोटे लोगों की तुलना में अधिक देखी गई। अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बातें साइंसडेली में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अंडरवेट कैटेगरी (18.5 और उससे कम बीएमआई) वाले लोगों में गंभीर रोगों के खतरे और असमय मृत्यु का जोखिम, अधिक वजन (25-30 बीएमआई) वालों की तुलना में 2.7 गुना अधिक थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, ये मानते रहना कि सिर्फ अधिक वजन वाले लोगों में गंभीर रोगों का खतरा होता है, ये सही नहीं है। हमने अध्ययन में पाया है कि सामान्य से कम वजन होना आपके लिए अधिक खतरनाक हो सकता है। डेनमार्क स्थित आरहूस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में प्रोफेसर डॉ. सिग्रिड बर्ज ग्रिबशोल्ट ने बताया कि इन डेटा को देखते समय कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। कुछ लोगों का वजन किसी अंतर्निहित बीमारी के कारण कम हो सकता है। हमने पाया कि दुबले-पतले लोगों को भी घातक हार्ट अटैक होने का खतरा हो सकता है क्योंकि उनके शरीर में छिपी हुई वसा हृदय की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती है। ये खतरनाक फैट जिसे विसरल फैट कहा जाता है, शरीर के अंदर गहराई तक जमा हो जाती है। इसके लिवर, पेट और आंतों के चारों ओर जमा होने का खतरा अधिक रहता है।   वजन को लेकर बरतें सावधानी आमतौर पर दुबले-पतले दिखने वाले लोगों में माना जाता है कि इनके शरीर में फैट कम है, हालांकि ये अंदर ही अंदर हानिकारक मात्रा में फैट जमा कर रहे होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में इसका स्तर अधिक था, उनके हृदय और रक्त वाहिकाएं तेजी से बूढ़ी हो रही थीं। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि हृदय स्वास्थ्य के मामले में, शरीर का आकार केवल वजन से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जब भी बात की जाए तो अब सिर्फ बढ़ते वजन को खतरा मानना ठीक नहीं है, कम वजन या दुबले-पतले लोगों को भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

कमाल की इनोवेशन! दिल्ली के युवक ने बनाया AlterEgo, बोले बिना होगी बातचीत

नई दिल्ली साइंस फिक्शन फिल्मों में आपने देखा होगा कि किस तरह से लोग बिना बोले एक दूसरे से मन ही मन बात कर पाते हैं। अब ऐसा असल दुनिया में भी हो पाएगा। दरअसल दिल्ली में जन्मे और अमेरिका की MIT से पढ़े अर्णव कपूर ने एक हैरतअंगेज डिवाइस बनाया है, जिसकी मदद से लोग बिना एक शब्द भी बोले आपस में बात कर पाएंगे। इतना ही नहीं इस डिवाइस का इस्तेमाल करके इंसान मशीनों के साथ भी बात-चीत कर सकेंगे। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस डिवाइस की मदद से बातचीत करते हुए बात करने वालों को न तो हाथ-पैर हिलाने पड़ेंगे और न ही किसी तरह का भाव चहरे पर दिखाना होगा। अर्णव का यह डिवाइस बनाने का मकसद यही है कि जिन लोगों को बात करने में किसी भी वजह से तकलीफ होती है, वह इस डिवाइस को इस्तेमाल कर पाएं। हालांकि इसे इस्तेमाल हर कोई कर सकता है। चलिए अर्णव के AlterEgo नाम के इस डिवाइस के बारे में डिटेल में बात करते हैं। AlterEgo क्या है? AlterEgo एक डिवाइस का नाम है जिसे कि सिर पर पहन कर किसी शख्स से बिना बोले बात की जा सकती है। इसका इस्तेमाल मशीनों के साथ बातचीत करने में भी किया जा सकता है। यह मशीन इंसान के दिमाग में चलने वाले विचारों को पकड़कर उन्हें शब्दों में बदल देता है। MIT के अनुसार, यह डिवाइस 'इंटरनल आर्टिक्यूलेशन ऑफ वर्ड्स' के सिद्धांत पर काम करता है। इसका मतलब है कि जब आप अपने मन में कुछ सोचते हैं, तो यह दिमाग में उठने वाली ऊर्जा या करंट को पकड़ पाता है। जिसे कि यह शब्दों में बदल सकता है। इस तकनीक खासियत है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए शरीर में किसी तरह का कोई डिवाइस इम्पलांट नहीं करना पड़ता। इस डिवाइस की मदद से इंसान बिना एक भी शब्द बोले AI, कंप्यूटर और दूसरे लोगों से प्राकृतिक भाषा में बात कर सकता है। कौन हैं अर्णव कपूर? अर्णव कपूर भारतीय मूल के शोधकर्ता हैं और उन्होंने AlterEgo प्रोजेक्ट को शुरू किया है। वह MIT यानी कि Massachusetts Institute of Technology से पढ़ाई कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल अर्णव कैम्ब्रिज में AlterEgo प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं और इस टेक्नोलॉजी को प्रोटोटाइप से इस्तेमाल के लायक एक कमर्शिलय प्रोजेक्ट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कैसे काम करता है AlterEgo? AlterEgo की वेबसाइट के मुताबिक जब भी कोई शख्स कुछ सोचता है, तो उसके चेहरे और गले की मांसपेशियां हल्की सी हरकत करती हैं। इन बारीक हरकतों को हमारी आंखें नहीं देख सकती हैं। AlterEgo इन्हीं छोटे-छोटे न्यूरल सिग्नल्स को पकड़ता है और उन्हें कंप्यूटर की भाषा में बदल देता है। इससे जुड़ी एक वीडियो भी इंटरनेट पर मौजूद है जहां अर्णव कपूर से सवाल पूछे जा रहे हैं और वे बिना कुछ बोले तुरंत जवाब दे रहे हैं। इस टेक्नोलॉजी की खासियत है कि यह सिर्फ जानकारी भेजता नहीं है बल्कि उसे रिसीव भी कर सकता है। यही वजह है कि इस डिवाइस को पहने दो शख्स आपस में बिना बोले लंबी बातचीत कर सकते हैं। किस काम आएगा AlterEgo? AlterEgo की वेबसाइट के मुताबिक AlterEgo का मकसद उन लोगों की मदद करना है जिन्हें बोलने में समस्या होती है। ALS यानी कि एमियोट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस और MS यानी कि मल्टिपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग इसका सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। हालांकि इसके और भी यूज केस हैं। आम लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों में कंप्यूटिंग को आसान बनाने के लिए कर सकते हैं। अर्णव कपूर का यह आविष्कार न सिर्फ दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो सकता है बल्कि टेक्नोलॉजी की दुनिया का नया अध्याय भी शुरू कर सकता है। अगर अर्णव इसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करवा पाने में कामियाब होते हैं, तो इंसानों की बात करने का तरीका भी पूरी तरह से बदल सकता है।

अल्ज़ाइमर का दुर्लभ रूप: सिर्फ़ याददाश्त ही नहीं, नज़र और समझ भी छीन लेता है

जब कोई बुजुर्ग अचानक अखबार पढ़ते हुए शब्द पहचान न पाए या घर की जानी-पहचानी चीजों को देखकर उलझन में पड़ जाए, तो अक्सर परिवार को लगता है कि समस्या आंखों में है। लोग तुरंत आई स्पेशलिस्ट के पास पहुंच जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमेशा आंखों की कमजोरी नहीं होती है? जी हां, कई बार इसके पीछे दिमाग से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी होती है, जिसे पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी कहते हैं। आइए, 21 सितंबर को मनाए जा रहे World Alzheimer's Day के मौके पर डॉ. संजय पांडे (हेड ऑफ न्यूरोलॉजी एंड स्ट्रोक मेडिसिन, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद) से इस विषय के बारे में समझते हैं। आंखें ठीक, मगर दिमाग नहीं PCA दरअसल अल्जाइमर का एक असामान्य रूप है। इसमें दिमाग का पिछला हिस्सा प्रभावित होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति की देखने और पहचानने की क्षमता कमजोर होने लगती है। हैरानी की बात यह है कि आंखें पूरी तरह से हेल्दी रहती हैं, लेकिन दिमाग उन्हें सही तरह से काम करने नहीं देता। स्टडी से मिली चौंकाने वाली जानकारी Neurology जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन बताता है कि ऐसे मरीजों को सही निदान मिलने में औसतन तीन से चार साल लग जाते हैं। ज्यादातर लोग शुरुआत में नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि परेशानी आंखों में है, लेकिन असल में यह समस्या मस्तिष्क की होती है। एक दिलचस्प केस स्टडी में सामने आया कि 82 वर्षीय महिला, जिन्हें अल्जाइमर की शुरुआती समस्या थी, अचानक पेंटिंग करने लगीं। जीवनभर कभी कला से न जुड़ी इस महिला की यह “नई शुरुआत” वैज्ञानिकों के लिए हैरान करने वाली थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि कभी-कभी दिमाग में होने वाले बदलाव छिपी हुई रचनात्मक क्षमताओं को भी सामने ला देते हैं। लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें     अचानक पढ़ने या लिखने में कठिनाई होना     परिचित वस्तुओं को पहचानने में समस्या     आंखों की जांच सामान्य आने के बावजूद दृष्टि संबंधी दिक्कत बने रहना     रोजमर्रा के काम करते समय दृश्य भ्रम महसूस होना अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो इसे केवल “बुढ़ापे की निशानी” मानकर न टालें। डॉक्टरों की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल आंखों की जांच तक सीमित न रहें। तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। जितनी जल्दी सही कारण सामने आएगा, उतनी जल्दी इलाज की दिशा तय हो पाएगी। परिवार की भूमिका भी है अहम मरीज को पॉजिटिव एक्टिविटीज में शामिल करें। अगर उन्हें अचानक पेंटिंग, संगीत या लेखन में रुचि हो तो उन्हें प्रोत्साहित करें। इससे न केवल मानसिक सुकून मिलेगा बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है।