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मुख्य गवाह की जुबानी: रामपुर तिराहा कांड और केस लड़ते हुए हुई त्रासदी, तीन बार आर्थिक संकट में फंसा

चंपावत आज रामपुर तिराहा गोलीकांड की 31वीं बरसी है। 1994 में आज ही के दिन उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर यूपी पुलिस ने बर्बरता दिखाई थी। 31 साल पहले आंदोलनकारियों पर ऐसा कहर बरपा था, जिसने जलियावाला बाग हत्याकांड की याद ताजा कर दी थी। चंपावत के नवीन भट्ट अपने दम आज भी रामपुर तिराहा कांड की लड़ाई लड़ रहे हैं। सीबीआई ने उन्हें इस हत्याकांड का मुख्य गवाह बनाया है। रामपुर तिराहा कांड पर सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। स्थिति यह है कि वह गवाही देने निजी खर्च पर मुजफ्फरनगर जाते हैं। नवीन लंबे समय से मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। खेतीखान के कानाकोट निवासी नवीन भट्ट 30 साल से अपने खर्चें से मुजफ्फरनगर की अदालत में गवाही देने जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें सरकार से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती है। नवीन रामपुर तिराहा कांड के चश्मदीद गवाह रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलनकारियों को किया याद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहा कांड के आंदोलनकारियों को याद किया। उन्होंने X हैंडल पर लिखा, "रामपुर तिराहा गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर राज्य आंदोलनकारियों को कोटि-कोटि नमन। आपके अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य का गठन संभव हुआ। हमारी सरकार अमर शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।" महिलाओं से दुष्कर्म में दो जवान दोषी मार्च 2024 में मुजफ्फरनगर की अदालत ने 1994 की एक और दो अक्टूबर की रात हुए इस बर्बर कांड में पीएसी के दो जवानों को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। नवीन ने बताया कि मामले में कुल 12 गवाह थे। जिनमें से पांच की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। नवीन वर्तमान में मजदूरी कर रहे हैं। नवीन के तीन बेटे हैं। उनके दो बेटे स्नातक करने के बाद बेरोजगार हैं जबकि सबसे छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है। केस लड़ने के लिए तीन बार लोन लिया नवीन ने बताया कि वह 30 साल से लगातार अपनी जेब से पैसा खर्च कर हर तारीख पर मुजफ्फरनगर की अदालत में उपस्थित होते हैं। बताया कि एक तारीख में जाने में उनकी अच्छी खासी रकम खर्च हो जाती है। नवीन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने खेतीखान के एक बैंक से 60-60 हजार रुपये का तीन बार लोन भी लिया। सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। उन्हें अभी तक राज्य आंदोलनकारी भी घोषित नहीं किया गया है। घटनास्थल से मिले थे महिलाओं के कपड़े नवीन ने बताया कि आंदोलनकारी महिलाओं को गन्ने के खेत और पास के निर्माणाधीन मकानों में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। दो अक्तूबर की सुबह, रामपुर तिराहे से लगभग 200 मीटर दूर हुई फायरिंग में सात लोग मारे गए। इस घटना ने राज्य आंदोलन को और अधिक हिंसक और संवेदनशील बना दिया। पुलिस का लाठीचार्ज और गोलीबारी नवीन भट्ट को एक और दो अक्तूबर 1994 की रात आज भी याद है। नवीन बताते हैं कि वे मुजफ्फरनगर में एक होटल में काम करते थे। उन्होंने काम-धंधा छोड़कर राज्य आंदोलन में कूदने का फैसला किया। एक अक्तूबर को वे दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर पहुंचे। यूपी पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के रामपुर तिराहे पर बेरिकेडिंग की थी। रात करीब आठ बजे पुलिस ने दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। पूरी रात पुलिस की बर्बरता जारी रही।  

मरीजों का अधिकार: प्रिस्क्रिप्शन बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य, HC ने डॉक्टरों को निर्देशित किया

नई दिल्ली  डॉक्टरों की लिखावटें अक्सर सुर्खयों में रहती हैं। तकनीक के इस दौर में भी हाथ से वे ऐसी पर्चियां लिखते हैं कि मरीजों की समझ से बाहर होती है। कई बार तो दवा दुकानदार भी नहीं समझ पाते हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का मानना है कि ऐसी पर्चियां लिखना मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के समान है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने पढ़ने योग्य प्रिस्क्रिप्शन को मरीजों का मौलिक अधिकार करार दिया है। न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने कहा कि अक्सर डॉक्टरों की लिखावट इतनी खराब होती है कि मरीज या उनके परिजन समझ ही नहीं पाते कि कौन सी दवा लिखी गई है। कभी-कभी दवा बेचने वाले के गलत पढ़ने से भी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी डॉक्टर अब बड़े अक्षरों (CAPITAL LETTERS) में स्पष्ट लिखकर ही दवाइयां लिखें। जब तक डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन की व्यवस्था लागू नहीं होती, यह नियम सख्ती से अपनाया जाए। मेडिकल कॉलेजों में दो साल के भीतर हैंडराइटिंग की ट्रेनिंग शुरू की जाए। आपको बता दें कि हाईकोर्ट यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट एक मामले में बलात्कार, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हालांकि मूल मामला अलग था, लेकिन अदालत ने इस दौरान पर्चियों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति पुरी ने कहा, “सरकार और संस्थानों के पास इतनी तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद अगर आज भी डॉक्टर अपठनीय लिखावट में दवाएं लिख रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। यह सीधे-सीधे जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन सकता है।”  

गाजा में सैनिक भेजने पर मंथन, भारत ने बुलाया UN Peacekeeping Meet, चीन-पाक को नहीं बुलाया

नई दिल्ली  दुनियाभर में मची उथल-पुथल के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों का सम्मेलन बुलाया है। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक देशों (UN TCCs) के आर्मी चीफ्स का सम्मेलन 14 से 16 अक्तूबर तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसमें करीब 30 देशों के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व शामिल होंगे, जो संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान देते हैं। दिलचस्प बात ये है कि भारत ने चीन और पाकिस्तान को इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया है। इसके अलावा, भारत ने गाजा और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अपने सैनिकों की तैनाती पर भी दो टूक जवाब दिया है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत तब तक विदेशी संघर्ष क्षेत्रों जैसे यूक्रेन या गाजा में सैनिकों की तैनाती नहीं करेगा, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) इसकी अनुमति नहीं देता है। भारत का कहना है कि दूसरे देशों में सैनिकों की तैनाती केवल यूएन के झंडे तले ही होगी। इससे पहले 1 अक्टूबर को आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, एवीएसएम, वीएसएम, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (IS&T) ने सेनाध्यक्ष की ओर से सभा को संबोधित किया और सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गौरव की बात है कि वह इस बहुपक्षीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य एक साझा मंच तैयार करना है, जहां विभिन्न देशों और सेनाओं का अनुभव, दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता एकत्रित होकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत शांति स्थापना की जिम्मेदारियों पर विमर्श करेंगे। भारत का योगदान बहुत बड़ा कार्यक्रम में कहा गया कि यह भारत की सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक विदेश नीति और वैश्विक शांति व सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछले 75 वर्षों में भारत ने 50 मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांति सैनिक भेजे हैं, जिनमें से 182 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत ने 2007 में लाइबेरिया में पहली बार ‘ऑल वुमन पुलिस कंटिंजेंट’ तैनात कर इतिहास रचा था। हाल ही में, फरवरी में भारत ने ग्लोबल साउथ के महिला शांति सैनिकों का सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें 35 देशों ने हिस्सा लिया। भारत की पहलकदमियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता के दौरान भारत ने 2021 में "UN शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही" और "शांति स्थापना के लिए तकनीक" जैसे अहम दस्तावेजों को अपनाने में भूमिका निभाई। वहीं जून 2023 में भारत ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शांति सैनिकों की स्मृति में ‘मेमोरियल वॉल’ स्थापित कराने के लिए प्रस्ताव को प्रायोजित किया। भारत लगातार बेहतर जनादेश, शांति सैनिकों की सुरक्षा और योगदान देने वाले देशों के उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है। सम्मेलन के मुख्य बिंदु इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख सत्र होंगे: 1. क्षमता निर्माण और सतत शांति स्थापना अभियानों के लिए संसाधन जुटाना 2. शांति स्थापना अभियानों में तकनीक का उपयोग प्रतिनिधि दल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा पहलों और तकनीकी समाधानों को भी देखेंगे और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। भारत ने इन देशों को किया आमंत्रित     एलजीरिया     आर्मीनिया     बांग्लादेश     भूटान     ब्राजील     बुरुंडी     कंबोडिया     कोटे डी आइवर     इथियोपिया     फिजी     फ्रांस     घाना     इंडोनेशिया     कजाखस्तान     केन्या     किर्गिस्तान     मेडागास्कर     मलेशिया     मंगोलिया     मोरक्को     नेपाल     नाइजीरिया     रवांडा     सेनेगल     श्रीलंका     तंजानिया     युगांडा     उरुग्वे     वियतनाम     इटली  5-S दृष्टिकोण और NORMS यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी के ‘5-S विजन’ — सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि — की भावना में आयोजित किया जाएगा। साथ ही यह भारत के "न्यू ओरिएंटेशन फॉर ए रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरल सिस्टम (NORMS)" के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत संवाद, समझ और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मिलकर हम ऐसा भविष्य बना सकते हैं, जहां हर व्यक्ति शांति, सौहार्द और गरिमा के साथ जीवन जी सके।” सम्मेलन से अपेक्षा है कि यह शांति स्थापना अभियानों की हकीकत पर साझा समझ बनाएगा, परामर्श प्रक्रिया को मजबूत करेगा, शांति सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएगा और मिशन की प्रभावशीलता सुधारने के लिए तकनीकी विकल्पों की खोज करेगा। गाजा-यूक्रेन में तैनाती का सवाल रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) विश्वेश नेगी ने संभावित तैनाती पर सवालों का जवाब देते हुए कहा, "यूएन शांति सैनिक बलों का यूक्रेन या गाजा में तैनात होना अत्यंत असंभव है।" उन्होंने यूएनएससी की संरचना का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी सहमति प्राप्त करना कठिन है। नेगी ने कहा, "भारत केवल यूएन के झंडे तले ही सैनिकों को विदेश भेजता है, और यह हमारी लंबे समय से चली आ रही नीति है।" भारत यूएन शांति सैनिक मिशनों का एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। 1950 के दशक से अब तक, भारत ने 50 से अधिक मिशनों में 3 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं, और 182 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है, जो किसी भी देश में सबसे अधिक है। वर्तमान में, भारत के लगभग 5,000 सैनिक 11 सक्रिय मिशनों में तैनात हैं, जिनमें सूडान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, गोलान हाइट्स, दक्षिण सूडान, माली, लेबनान, अबी जन हाइट्स, साइप्रस, केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य, पश्चिमी सहारा और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्र शामिल हैं। नेपाल और बांग्लादेश के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। पाक-चीन को न्योता नहीं पाकिस्तान और चीन को आमंत्रित न करने का फैसला भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों और भारत-चीन सीमा विवाद को ध्यान में रखते हुए लिया गया लगता है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की कथित संलिप्तता के कारण सभी सैन्य-से-सैन्य संपर्क निलंबित हैं। चीन के मामले में, सीमा तनाव और रणनीतिक चिंताओं ने इस निर्णय को प्रभावित किया है। हालांकि, दोनों देश यूएन शांति सैनिकों के प्रमुख योगदानकर्ता हैं, लेकिन भारत ने इस आयोजन को बहुपक्षीय सहयोग के लिए सीमित रखा है।

मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शनों पर कहा, नीतियां जनता की राय से तय नहीं होती

नई दिल्ली  विजयादशमी के कार्यक्रम में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को पड़ोसी देशों में हुईं अशांति की घटनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि जब सरकार लोगों और उनकी परेशानियों से दूर रहती है, तो उसके खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया है और कहा है कि इस तरीके से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ। हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन हुआ, जिसमें युवाओं ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। भागवत ने कहा, 'श्रीलंका में, बाद में बांग्लादेश में, बाद में नेपाल में। हमारे पड़ोसी देशों में हमने इसका अनुभव किया है। अब कभी कभी हो जाता है। प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता। उनकी जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनती, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष को इस प्रकार व्यक्त होना, किसी के लाभ की बात नहीं है।' उन्होंने कहा, '…अगर हम अभी तक का इतिहास देखेंगे तो जब से उथल पुथल वाली तथाकथित क्रांतियां आई हैं। किसी क्रांति ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया। राजा के खिलाफ फ्रांस की राज्य क्रांति हुई, उसकी परिणाम क्या हुआ? नेपोलियन बादशाह बन गया। वही राज्यतंत्र कायम है। इतनी सारी तथाकथित साम्यवादी क्रांतियां हुईं, सभी साम्यवादी देश आज पूंजीवादी तंत्र पर चल रहे हैं।' संघ प्रमुख ने कहा कि अगर देश में स्थिति खराब होती है, तो बाहर की ताकतें हावी होने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे हिंसक प्रदर्शनों से उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि अराजकता की स्थिति में देश की बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है। इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल पुथल हो रही है। ये हमारे ही जैसे हैं, ये हमसे दूर नहीं हैं। ये हमारे अपने है। उनमें इस प्रकार की अस्थिरता होना, वह आत्मीयता के संबंध के चलते चिंता का विषय है।' इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।  

पाक अधिकृत कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन, गोलीबारी में दर्जनभर नागरिक ढेर

इस्लामाबाद  पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बीते तीन दिनों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो उठे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे। मारे गए नागरिकों में पांच मुजफ्फराबाद, पांच धीरकोट और दो डडियाल के बताए जा रहे हैं। इस दौरान झड़प में कम से कम तीन पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं। प्रदर्शन की शुरुआत सरकार की मूलभूत मांगें पूरी न करने से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि क्षेत्र में लगातार शोषण और संसाधनों की लूट हो रही है, जबकि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। हिंसा में घायल हुए अधिकांश लोगों को गोलियों से चोटें आई हैं। कई अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनविरोध है, जिसने पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अशांत क्षेत्र में जनजीवन को ठप कर दिया है। इस आंदोलन के केंद्र में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित पीओके की 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग है। 29 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से बाजार, दुकानें और स्थानीय व्यवसाय बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद हैं। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।  

ट्रंप का बयान बना चिंगारी या पहले से था साज़िश का खेल?

नई दिल्ली  रूसी तेल की खरीद को लेकर 7 देशों के समूह जी7 ने बड़े ऐक्शन की तैयारी की है। खबर है कि यह समूह उन देशों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, जो रूस से तेल खरीद को बढ़ा रहे हैं। खास बात है कि भारत और चीन रूसी तेल के बड़े खरीददार हैं। वहीं, भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे अमेरिका और यूरोपीय संघ निशाना बना रहे हैं। बुधवार को जी7 ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए साझा कदम उठाए जाएंगे। समूह के वित्त मंत्री ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के कारण रूस के राजस्व को कम करने की कोशिशें जारी हैं। सदस्य देशों की बैठक के दौरान टैरिफ और इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट बैन जैसे व्यापार संबंधी उपायों पर भी चर्चा की गई थी। साझा बयान के अनुसार, 'हम उनको निशाना बनाएंगे, जो यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल खरीद को बढ़ाना जारी रखे हुए हैं।' ट्रंप ने की थी पहल सितंबर में ही अमेरिका ने जी7 देशों से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने का अनुरोध किया है। अमेरिका ने जोर देकर कहा कि केवल एकीकृत प्रयास से ही मॉस्को की युद्ध मशीन को धन मुहैया कराने वाले स्रोत को बंद किया जा सकता है। अमेरिका ने यह भी कहा कि ऐसा करके ही रूस को 'बेवकूफी भरी हत्या' को रोकने के लिए पर्याप्त दबाव बनाया जा सकता है। जी7, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन सहित समृद्ध, औद्योगिक देशों का एक अंतर-सरकारी समूह है। कनाडा इस वर्ष जी-7 की अध्यक्षता का प्रमुख है। चीन पर नहीं लगाया ज्यादा शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। जबकि, चीन के मामले में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत पर है। ट्रंप ने भारत के खिलाफ पहले 25 फीसदी शुल्क का ऐलान किया था और रूसी तेल की खरीद को लेकर जुर्माना भी लगाया था। बाद में उन्होंने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। वह व्यक्तिगत रूप से भी रूसी तेल को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं।  

UN में पाकिस्तान की मानवता पर ‘ज्ञानबाजी’, भारत ने किया करारा जवाब

वाशिंगटन  भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान को सख्त लहजे में आड़े हाथों लिया और जमकर फटकार लगाई है। भारतीय राजदूत मोहम्मद हुसैन ने बुधवार को जिनेवा में हुई 60वें सत्र की 34वीं बैठक में कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान जैसे देश को मानवाधिकारों पर दूसरों को भाषण देने का साहस होता है, जबकि खुद उसके यहां अल्पसंख्यकों का लगातार दमन हो रहा है। हुसैन ने साफ कहा कि पाकिस्तान को प्रचार फैलाने की बजाय अपने घर के हालात सुधारने चाहिए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करना चाहिए। बैठक के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी पाकिस्तान के मानवाधिकार हनन पर सवाल उठाए। भू-राजनीतिक शोधकर्ता जॉश बोव्स ने बलूचिस्तान में कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और बताया कि पाकिस्तान नाजुक समुदायों को दबाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता का ढोंग करता है। उन्होंने बताया कि यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2025 के अनुसार पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के तहत 700 से अधिक लोग जेल में हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 300% अधिक है। बलूच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार इकाई पांक के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में ही 785 जबरन गुमशुदगियां और 121 हत्याएं दर्ज की गईं। वहीं पश्तून राष्ट्रीय जिरगा का कहना है कि इस साल तकरीबन 4,000 पश्तून अब भी लापता हैं। पीओके में बिगड़ता हालात यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने परिषद से अपील की कि पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दमन की बढ़ती घटनाओं पर हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। कान ने कहा कि पाकिस्तान ने रेंजर्स की तैनाती कर दी है और फोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि संसाधनों के स्वामित्व और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे अहिंसक आंदोलन को दबाया जा सके। इससे पहले जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार को आगाह किया था कि वह अल्पसंख्यकों (विशेषकर अहमदी समुदाय) के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां और पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।  

नोबेल रेस में डोनाल्ड ट्रंप: मिल सकता है सम्मान या लगेगा बड़ा झटका?, 8 दिनों में होगा ऐलान

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति खुलकर जाहिर कर चुके हैं कि वह नोबेल पुरस्कार चाहते हैं। हालांकि, इसकी संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि उन लोगों के पुरस्कार जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं, जो सुर्खियों से दूर हैं और भुला दिए गए मुद्दों पर काम कर रहे हैं। खास बात है कि ट्रंप ने उन्हें नोबेल पुरस्कार दिए जाने के तार अमेरिका के सम्मान से जोड़े हैं। 10 अक्तूबर शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा की जानी है। एएफपी के अनुसार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के कुछ जानकार बताते हैं कि अमेरिका फर्स्ट की नीति और विभाजनकारी तरीकों के चलते उन्हें पुरस्कार मिलने की संभावनाएं नहीं हैं। इतिहासकार ओविंद स्टीनर्सन ने कहा कि ट्रंप कई मायनों में उन आदर्शों के खिलाफ काम करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व नोबेल प्राइज करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने 6 या 7 युद्ध खत्म कराए हैं। जबकि, जानकारों की राय इससे अलग है। SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख करीम हैगाग ने कहा, 'नोबेल कमेटी आकलन करेगी कि शांति स्थापित करने में सफलता हासिल करने के स्पष्ट उदाहरण हैं या नहीं।' कहा जा रहा है कि नोबेल पीस प्राइज के लिए उम्मीदवारी जताने के लिए हजारों पात्र लोग हैं। ट्रंप ने अमेरिका के सम्मान से जोड़े तार ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, 'यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?’ बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है… जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन देखते हैं क्या होता है।' उन्होंने कहा, 'यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।'  

RSS कार्यक्रम में मोहन भागवत का संदेश: पहलगाम सिखा गया असली पहचानना

नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 100 साल का हो चुका है। अपने स्थापना दिवस (विजयादशमी) पर आज नागपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें यह सिखा गई कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन। आपको बता दें कि शस्त्र पूजा के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई। मोहन भागवत ने कहा, ''22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीय नागरिक पर्यटकों की हिंदू धर्म के बारे में पूछकर हत्या कर दी। इस हमले से पूरे भारत में शोक, उदासी और आक्रोश की लहर दौड़ गई। भारत सरकार ने एक सुनियोजित योजना के तहत मई माह में इस हमले का माकूल जवाब दिया। इस पूरी अवधि के दौरान, हमने देश के नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सशस्त्र सेनाओं की वीरता और युद्ध-तत्परता तथा हमारे समाज के दृढ़ संकल्प और एकता के हृदयस्पर्शी दृश्य देखे।'' मोहन भागवत ने आगे कहा, 'यह घटना हमें यह भी सिखा गई कि हम भले ही सबके प्रति मित्र भाव रखें, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना होगा। इस पूरी घटना के बाद हमने दुनिया के कई देशों का स्टैंड देखा। इस घटना ने हमें यह भी सीख दी कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन।'' आरएसएस मुख्यालय के रेशमबाग मैदान में शस्त्र पूजा के दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा ‘पिनाक एमके-1’, ‘पिनाक एन्हांस’ और ‘पिनाक’ सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए। इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है।  

बापू की समाधि पर पीएम और राष्ट्रपति का श्रद्धांजलि अर्पण, कहा- उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक

नई दिल्ली। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम नेता राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रतिमा को नमन किया और पुष्प अर्पित किए। बापू का रास्ता अपनाकर कर विकसित भारत का निर्माण करेंगे: पीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता के आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा को बदल दिया और आज भी भारत के विकास की दिशा तय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि गांधीजी ने दिखाया कि साहस और सादगी बड़े बदलाव के उपकरण बन सकते हैं। उन्होंने सेवा और करुणा की शक्ति में विश्वास रखा, जो लोगों को सशक्त बनाने का मूल आधार है। उन्होंने कहा, गांधी जयंती प्यारे बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास का मार्ग बदल दिया। उन्होंने दिखाया कि साहस और सादगी कैसे बड़े बदलाव ला सकते हैं। वह सेवा और करुणा को लोगों को सशक्त बनाने के जरूरी माध्यम मानते थे। हम उनका रास्ता अपनाकर विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ेंगे। दो अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा और सत्याग्रह के प्रवर्तक थे। उनके विचारों ने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति स्थल पर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। भारत की स्वतंत्रता के कुछ महीने बाद यह घटना हुई। उनका जीवन और बलिदान दुनियाभर में शांति और मानव गरिमा का प्रतीक बना हुआ है। सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण कर गांधी के सपनों को साकार करेंगे: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।  इससे पहले गांधी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, गांधी जयंती हम सभी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और जीवन मूल्यों के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करने का अवसर है। गांधीजी ने विश्व को शांति, सहिष्णुता और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है। वह आजीवन अस्पृश्यता, निरक्षरता, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से समाज के कमजोर से कमजोर व्यक्ति को संबल और शक्ति प्रदान की। राष्ट्रपति ने कहा, नैतिकता और सदाचार में उनका अटूट विश्वास था जिसका उन्होंने आजीवन पालन किया और जन समुदाय को भी उस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। एक स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और शिक्षित भारत के निर्माण के लिए उन्होंने चरखा चलाकर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। अपने आचरण एवं उपदेशों के माध्यम से वे सदैव श्रम की गरिमा को प्रतिष्ठित करते रहे। उनके जीवन-मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे। आइए, गांधी जयंती के इस शुभ अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि हम सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र के कल्याण और प्रगति के लिए समर्पित रहेंगे और एक स्वच्छ, समर्थ, सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण करके गांधी जी के सपनों को साकार करेंगे।