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एस. जयशंकर का बड़ा बयानः संयुक्त राष्ट्र आतंकी समूहों पर कार्रवाई से बचता है

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस मौके पर भारत की राजधानी दिल्ली में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपना संबोधन दिया। संबोधन के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्यों पर आतंकी समूहों को बचाने का आरोप लगाया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, "हमें यह मानना होगा कि संयुक्त राष्ट्र में सब कुछ ठीक नहीं है। उसके फैसले लेने का तरीका न तो उसके सभी सदस्य देशों की सही नुमाइंदगी करता है और न ही वह दुनिया की मुख्य जरूरतों पर ध्यान दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र में होने वाली बहसें अब बहुत ज्यादा बंटी हुई हैं और उसका कामकाज साफ तौर पर रुका हुआ दिख रहा है। आतंकवाद के प्रति इसकी प्रतिक्रिया विश्वसनीयता की कमियों को उजागर करती है, और वैश्विक दक्षिण में विकास धीमा पड़ रहा है।" उन्होंने कहा कि इस उल्लेखनीय वर्षगांठ पर हमें आशा नहीं छोड़नी चाहिए। बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता, चाहे कितनी भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, मजबूत बनी रहनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र का समर्थन किया जाना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में हमारे विश्वास को नवीनीकृत किया जाना चाहिए। आज यहां हुई यह बैठक एकता और साझा उद्देश्य का संदेश देती है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "बहुत ही अफसोस की बात है कि आज के दौर में भी हम कई बड़े विवाद देख रहे हैं। यह केवल मानव जीवन पर ही प्रभाव नहीं डाल रहे हैं, बल्कि इसका असर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर भी देखने को मिल रहा है। ग्लोबल साउथ ने इस पीड़ा को महसूस किया है। यूएन में बदलाव आज के समय में बड़ी चुनौती बन गया है।" यूएन सदस्यों पर आतंकी समूहों को बचाने का आरोप लगाते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के प्रति संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया से ज्यादा, कुछ उदाहरण संयुक्त राष्ट्र के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाते हैं। जब सुरक्षा परिषद का एक मौजूदा सदस्य पहलगाम जैसे बर्बर आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठनों का खुलेआम बचाव करता है, तो इससे बहुपक्षीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ता है? इसी तरह, अगर वैश्विक रणनीति के नाम पर आतंकवाद के पीड़ितों को ही बराबर का दर्जा दिया जाए, तो दुनिया और कितनी ज्यादा स्वार्थी हो सकती है?

चक्रवाती तूफान की चेतावनी जारी, इन राज्यों में मौसम होगा बेहद खराब

भुवनेश्वर दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जोकि 27 अक्टूबर को एक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। इसकी वजह से आगामी सोमवार से तीन दिनों तक ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। भुवनेश्वर मौसम विभाग की डायरेक्टर मनोरमा मोहंती ने कहा कि वेदर सिस्टम पिछले तीन घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है और इसके आगे भी उसी दिशा में बढ़ने की संभावना है। मोहंती ने पत्रकारों से कहा, "यह 25 अक्टूबर तक दक्षिण-पूर्व और उससे सटे सेंट्रल बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक डिप्रेशन बन जाएगा, 26 अक्टूबर तक एक डीप डिप्रेशन बन जाएगा, और 27 अक्टूबर की सुबह तक दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे वेस्ट-सेंट्रल बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान बन जाएगा।" यह पूछे जाने पर कि क्या यह सिस्टम ओडिशा के तट पर लैंडफॉल करेगा, उन्होंने कहा, "अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह जहां भी आएगा, ओडिशा में 27 से 29 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। तटीय जिलों के सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की उम्मीद है।" मौसम विभाग ने शुक्रवार को 12 जिलों में, शनिवार और रविवार को 21-21 जिलों में और सोमवार को पूरे राज्य में हल्की से मध्यम बारिश के लिए येलो वॉर्निंग जारी की है। ओडिशा के रेवेन्यू और डिजास्टर मैनेजमेंट मिनिस्टर सुरेश पुजारी ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। पुजारी ने कहा, "अक्टूबर को आम तौर पर साइक्लोन वाला महीना माना जाता है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार हालात को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।" मौसम अधिकारियों ने कहा कि इस सिस्टम से 28 से 30 अक्टूबर के बीच दक्षिण बंगाल के जिलों, जिनमें उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम और हावड़ा शामिल हैं, में भारी बारिश होने की भी संभावना है। 28 अक्टूबर को कोलकाता और आस-पास के हुगली जिले में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिलों में भी 29 से 30 अक्टूबर के बीच भारी बारिश होने की संभावना है।

हॉस्पिटल में दर्दनाक घटना: डॉक्टर ने अपने हाथ पर नोट लिखा और आत्महत्या की, पुलिस पर गंभीर आरोप

मुंबई  महाराष्ट्र के सतारा में एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। यही नहीं डॉक्टर ने एक अपनी हथेली पर ही एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें बताया कि उसका दो पुलिस वालों ने रेप किया है और उत्पीड़न कर रहे थे। इससे परेशान होकर ही वजह जान दे रही है। सतारा के फालटन में स्थित एक होटल के कमरे में डॉक्टर की लाश फंदे से झूलती पाई गई। इस पर पुलिस को अलर्ट किया गया। महिला डॉक्टर बीड़ जिले की रहने वाली थी और सतारा के फालटन स्थित सरकारी अस्पताल में नौकरी कर रही थी। महिला डॉक्टर ने अपने एक हाथ पर सुसाइड नोट लिखा था। इसमें बताया कि था कि उनका दो पुलिस वाले रेप कर रहे थे और उत्पीड़न जारी था। महिला डॉक्टर ने सुसाइड नोट में 4 बार रेप किए जाने की बात लिखी है। इससे वह मानसिक रूप से बहुत परेशान थी और इसी के चलते उसने यह अतिवादी कदम उठाया है। हथेली पर लिखे सुसाइड नोट में महिला डॉक्टर ने कहा कि दोनों पुलिस वाले बीते 5 महीनों से रेप कर रहे थे। महिला डॉक्टर ने लिखा कि सब-इंस्पेक्टर गोपाल बाडाने ने उसका रेप किया था। इसके अलावा भी कई बार यौन उत्पीड़न किया। वहीं दूसरा पुलिसकर्मी प्रशांत बांकर उसका मानसिक उत्पीड़न कर रहा था। सतारा पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि इस मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि हमने केस दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। हम आरोपों की जांच कर रहे हैं, जो महिला डॉक्टर ने सुसाइड नोट में लगाए हैं। आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बाडाने सस्पेंड पुलिस का कहना है कि हमारी ओर से जांच शुरू हो गई है, जिन दो पुलिस वालों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। महाराष्ट्र के महिला आयोग की चीफ रूपाली चाकनकर का कहना है कि हमने इस मामले का संज्ञान लिया है। हमने सतारा पुलिस को आदेश दिया है कि वह सख्ती से इस केस की जांच करे। आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। इस मामले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना को लेकर कांग्रेस नेता विजय वडेत्तिवार ने सरकार पर निशाना साधा है। फिलहाल इस मामले के आरोपी गोपाल बाडाने को सस्पेंड कर दिया गया है। कांग्रेस नेता ने लिखा- रक्षक के ही भक्षक बन जाने का केस है उन्होंने लिखा, 'यह वह केस है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए! पुलिस का कर्तव्य रक्षा करना है, लेकिन अगर वे खुद एक महिला डॉक्टर का शोषण कर रहे हों तो न्याय कैसे मिलेगा? जब इस लड़की ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, तब कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? महायुति सरकार बार-बार पुलिस को बचाती है, जिससे पुलिसिया अत्याचार बढ़ रहे हैं।'  

PM मोदी का ऐलान: GST बचत उत्सव बनेगा आम जनता की राहत का पर्व

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि इस बार त्योहारों के इस मौसम में जीएसटी बचत उत्सव ने नए रंग भर दिए हैं। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि देश में जीएसटी रेट कटौती को लेकर बहुत बड़ा सुधार हुआ है। 17वें रोजगार मेले में नवनियुक्त युवाओं को 51 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "जीएसटी सुधार का असर केवल लोगों की बचत तक सीमित नही हैं बल्कि, नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी सुधार से रोजगार के अवसरों का विस्तार हो रहा है।" उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि जब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं सस्ती होती हैं तो मांग भी बढ़ती है। वहीं, जब मांग बढ़ती है तो उत्पादन और सप्लाई चेन को भी गति मिलती है। फैक्ट्रियां ज्यादा उत्पादन करती हैं और नई नौकरियां पैदा होती हैं। पीएम मोदी ने कहा, "जीएसटी बचत उत्सव रोजगार उत्सव में बदल रहा है। धनतेरस, दीपावली पर रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े सामने आए हैं, जो दिखाता है कि जीएसटी सुधार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।" एमएसएमई सेक्टर और रिटेल ट्रेड को लेकर उन्होंने कहा कि हम इस सेक्टर में भी इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव देख रहे हैं। इस वजह से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और डिस्ट्रिब्यूशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और हम देश के युवा सामर्थ्य को भारत की एक बड़ी ताकत मानते हैं। हम हर क्षेत्र में इसी सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।" पीएम मोदी ने बताया कि विदेश नीति भी देश के युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि स्किल इंडिया मिशन अभियानों के जरिए युवाओं को स्किल की ट्रेनिंग दी जा रही है। वहीं साथ ही, नेशनल करियर सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म देश के युवाओं को नए अवसरों से जोड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया है कि इसके माध्यम से अब तक 7 करोड़ से अधिक वैकेंसियों को लेकर युवाओं को जानकारी दी गई है।" उन्होंने कहा कि कई बार उम्मीदवार यूपीएससी की अंतिम लिस्ट तक पहुंचने के बाद भी सेलेक्ट नहीं हो पाते, ऐसे उम्मीदवारों की मेहनत भी अब व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे उम्मीदवारों के लिए सरकार प्रतिभा सेतु पोर्टल की पेशकश रख रही है। इस पोर्टल के माध्यम से निजी और सार्वजनिक संस्थान उन युवाओं को निमंत्रित कर सकती है। उनके इंटरव्यू ले सकते हैं और उन्हें रोजगार का अवसर दे सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा, युवाओं की प्रतिभा का यह सदुपयोग ही युवा सामर्थ्य को दुनिया के सामने लाएगा।

पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश! बॉर्डर के पास चीन की सैन्य तैयारी बढ़ी

बीजिंग  बॉर्डर पर विवाद के चलते पांच सालों तक तनाव रहने के बाद हाल के समय में चीन और भारत के बीच संबंध बेहतर हुए हैं। दोनों देशों के प्रमुख नेताओं की भी मुलाकात हुई, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। एक तरफ जहां वह भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर पीठ पर छूरा घोंपने की भी कोशिश कर रहा है। दरअसल, सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि चीन पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील के पूर्वी किनारों पर एक मिलिट्री से जुड़ा कॉम्प्लेक्स बना रहा है, जोकि जल्द ही पूरा होने वाला है। यह कॉम्प्लेक्स पांच साल पहले हुए सीमा विवाद के एक प्वाइंट से महज 110 किलोमीटर ही दूर है। इससे भविष्य में चीनी सेना को जरूरत लगने पर फायदा मिल सकेगा। सैटेलाइट इमेजेस पर नजर रखने वाले एक्स हैंडल '@detresfa_'ने एक तस्वीर पोस्ट की है। उस पोस्ट में उन्होंने लिखा, ''चीन पैंगोंग झील के पूर्वी किनारे पर मिलिट्री से जुड़ा एक कॉम्प्लेक्स पूरा करने वाला है, जिसमें गैरेज, एक हाईबे और सुरक्षित स्टोरेज हैं। यह साइट एक चीनी रडार कॉम्प्लेक्स के पास है और इसे SAM पोजिशन या हथियारों से जुड़ी दूसरी जगह बनाया जा सकता है।'' इस तस्वीर से साफ पता चल रहा है कि यह एक चीनी एयर डिफेंस कॉम्प्लेक्स है, जिसमें कमांड, कंट्रोल बिल्डिंग, सेना की गाड़ियों को रखने के लिए एक शेड, गोला-बारूद आदि चीजों को रखने की जगह बनाई गई है। वहीं, रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया है कि इन फैसिलिटीज की सबसे दिलचस्प बात ढकी हुई मिसाइल लॉन्च पोजिशन का एक सेट है। इसमें माना जाता है कि इनमें ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर गाड़ियों के लिए पीछे हटने वाली छतें लगी हैं, जो मिसाइलों को ले जा सकती हैं और जरूरत लगने पर उसे ऊपर उठाकर फायर कर सकती हैं। ये शेल्टर चीन की लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम एचक्यू-9 को छिपाने और उसे सुरक्षित रखने में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, तस्वीर से पता चलता है कि इसमें मिसाइल लॉन्च वाले स्थान के ऊपर स्लाइडिंग छते हैं और हर एक में दो गाड़ियां आ सकती हैं। पांच साल तक तनाव के बाद मिले थे मोदी-जिनपिंग पूर्वी लद्दाख की सीमा पर साल 2020 में भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। गलवान घाटी में हुई हिंसा में कई भारतीय जवान शहीद हो गए थे और चीनी सैनिक भी मारे गए थे। लंबे समय तक टकराव वाले प्वाइंट्स पर भारत और चीन के सैनिकों का आमना-सामना हुआ। लेकिन फिर कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर तनाव को कम करने की कोशिश हुई। टकराव वाली जगहों से दोनों देशों के सैनिकों का डिस-एंगेजमेंट हुआ और अगस्त-सितंबर में चीन के तियानजिन में आयोजित हुए एससीओ समिट में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। अमेरिका से तनाव के बीच माना गया कि भारत और चीन शायद फिर से करीब आ सकते हैं। इस दौरे पर पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग की तस्वीर ने भी दुनियाभर में काफी चर्चाएं बंटोरी थीं।

करोड़ों की सैलरी देने वाले Meta ने 600 कर्मचारियों को किया बाहर, कंपनी का कारण हैरान कर देगा

पिछले दिनों बड़े-बड़े सैलरी पैकेज पर हायर करने के लिए सुर्खियों में रही Meta अब छंटनी की वजह से चर्चा में है। खबर है कि कंपनी ने अपने सुपर इंटेलिजेंस लैब डिवीजन से 600 कर्मचारियों को निकाल दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार मेटा के चीफ AI ऑफिसर अलेक्ज़ेंडर वांग ने इसे लेकर एक मेमो जारी किया है। इसमें बताया गया है कि टीम को तेज और प्रभावी बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। कंपनी का कहना है कि छोटे आकार की टीम में फैसले जल्दी लिए जा सकते हैं और हर सदस्य को ज्यादा जिम्मेदारी और असरदार भूमिका दी जा सकती है। हालांकि, इस कदम से कर्मचारियों और सोशल मीडिया पर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। वांग के मेमो में क्या था? Meta के चीफ AI ऑफिसर वांग ने अपने मेमो में छंटनी का कारण बताते हुए लिखा कि छोटी टीमों में बातचीत और मंजूरी का प्रोसेस तेज हो जाएगा और इससे फैसले लेना आसान होगा। Meta चाहती है कि उनकी AI टीम इंडस्ट्री की सबसे चुस्त और टैलेंटेड टीम बने। गौरतलब है कि मेटा ने हाल के महीनों में OpenAI, Google DeepMind और Apple जैसी कंपनियों से करोड़ों डॉलर खर्च करके AI विशेषज्ञों को भर्ती किया था। वहीं अब कंपनी पुराने AI रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट्स से कर्मचारियों को हटाकर नई योजना पर काम कर रही है। इस बड़ी छंटनी के बाद भी वांग का कहना है कि कंपनी AI प्रोजेक्ट्स में निवेश कम नहीं करने वाली। कौन प्रभावित हुए और क्या मिलेगी मदद मेटा की इस छटनी के चलते उसके पुराने AI रिसर्च, प्रोडक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट्स प्रभावित हुए हैं। बता दें कि नई और हाई-प्रोफाइल TBS लैब को छंटनी से बाहर रखा गया है। बता दें कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया है उन्हें 16 हफ्तों का वेतन दिया जाएगा। इसके अलाव नौकरी में पूरे हुए सालों के मुताबिक हर साल के लिए 2 हफ्ते की ज्यादा सैलरी दी जाएगी। निकाले गए कर्मचारियों को नवंबर 21 तक का “नॉन-वर्किंग नोटिस पीरियड” दिया गया है, ताकि वे मेटा में किसी और रोल के लिए आवेदन कर सकें। कंपनी की रिक्रूटमेंट टीम भी उनकी मदद कर रही है। नाराजगी जता रहे कर्मचारी Meta के छंटनी के फैसले के बाद से सोशल मीडिया पर लोग गुस्से में है। इसे लेकर Blind ऐप पर एक कर्मचारी ने लिखा है कि कुछ महीनों पहले आए कर्मचारियों के चलते सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। किसी ने इंटरनेट पर यह तक लिखा है कि अमीर लोग भूल जाते हैं कि नौकरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि किसी की पूरी जिंदगी होती है। लोगों ने यह भी अंदेशा जताया है कि Meta अपने काम को आउटसोर्स करने की तैयारी में है। इससे पता चलता है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी हाई-टेक नौकरियां भी सुरक्षित नहीं हैं।

रोजगार मेले में बंटी खुशियां, युवाओं ने कहा– पीएम मोदी ने दी नई उड़ान, अब देश सेवा का वक्त

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को रोजगार मेले में 51,000 से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। नियुक्ति पत्र मिलने पर युवाओं ने खुशी जताई। खान मंत्रालय में जियोसाइंटिस्ट के रूप में शामिल हुए भीम चंद गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नियुक्ति पत्र मिलना गर्व का विषय है। किसी भी देश को अपना डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना बहुत जरूरी है। भारत की वर्किंग आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। ऐसे रोजगार मेले इसका फायदा उठाने में मदद करते हैं। इससे विकसित भारत विजन को साकार करने में मदद मिलेगी। दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (स्टेनोग्राफर) का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले विनय फलवारिया ने कहा कि आज मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है। प्रधानमंत्री ने हमें यह मौका दिया है। इससे आने वाली युवा पीढ़ी भी प्रोत्साहित होगी। सभी परिवार, गुरुजन और अन्य सभी काफी खुश हैं। वहीं, एनटीआरटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पत्र करने वाले मनीष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से रोजगार मेलों का आयोजन करना एक बहुत अच्छा निर्णय है। इससे युवाओं को विकसित भारत विजन में योगदान देने का मौका मिल रहा है। खान मंत्रालय के तहत केमिस्ट पोस्ट पर नियुक्त होने वाले हितेश मौर्या ने कहा कि मेरे लिए यह काफी खुशी का मौका है। रोजगार मेले एक बहुत अच्छा कार्यक्रम है। इतने बड़े मंच पर आना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। इससे आने वाली पीढ़ी को प्रोत्साहन मिलेगा। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक अन्य प्रतिभागी आदित्य सिंह ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी थी और इस तरह के कार्यक्रम काफी अच्छे हैं। 17 वां रोजगार मेल देशभर में 40 लोकेशन पर आयोजति किया गया था। इसमें करीब 51,000 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए। पीएम मोदी इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। 

J&K राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस का दबदबा, सत शर्मा बने BJP के इकलौते विजेता

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में चार सीटों पर राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हुआ। सभी 86 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना वोट डाला। वोटिंग के बाद मतगणना भी शुरू हो गई है। तीन सीटों पर चुनाव परिणाम सामने आ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान, शम्मी ओबराय और सज्जाद किचलू ने जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा की सीटों पर जीत दर्ज की है। बता दें कि वोट डालने का समय शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया था। पांच बजे से वोटिंग की गिनती शुरू हो गई थी। चारों सीटों का परिणाम सामने आ गया है। तीन सीटों पर एनसी और एक सीट पर बीजेपी ने बाजी मारी है।     सज्जाद गनी लोन ने दी प्रतिक्रिया पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक फिक्सड मैच था। अच्छा हुआ, मैंने मतदान में भाग नहीं लिया, अन्यथा मेरे पर भी आरोप लगता। मतदान का जो पैटर्न है, उसे देखते हुए सत्ताधारी दल पर पर ही सवाल पैदा होता है। वह अपने तीसरे उम्मीदवार शम्मी ओबेराय के पक्ष में 28 या 29 वोट ही डलवाती। तीन अतिरिक्त वोट क्यों? भाजपा चौथी सीट के लिए चुनाव लड़ रही थी। लोन ने क्रॉस-वोटिंग, रिजेक्टेड बैलेट और दोनों पक्षों के बीच संभावित मिलीभगत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरी वोटिंग प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।  

ALERT: भारत में तीन कफ सिरप और 112 दवाओं पर WHO का चेतावनी जाल

नई दिल्ली केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सितंबर रिपोर्ट ने एक बार फिर दवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 112 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें तीन कफ सिरप भी शामिल हैं, जिनमें से एक नकली पाया गया। ये दवाएं गंभीर बीमारियों जैसे दिल, कैंसर, मधुमेह, हाई बीपी, दमा, संक्रमण, दर्द, सूजन, अनीमिया और मिर्गी के इलाज में उपयोग की जाती हैं। केंद्रीय दवा प्रयोगशाला की जांच में 52 सैंपल फेल हुए, वहीं राज्य स्तर पर 60 दवाओं के घटिया पाए जाने की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने कहा कि यह गुणवत्ता विफलता केवल जांच किए गए बैच तक सीमित है और अन्य बैच प्रभावित नहीं हैं। राज्यों में फैली समस्या सबसे अधिक 49 दवाएं हिमाचल प्रदेश में बनीं। इसके अलावा गुजरात में 16, उत्तराखंड में 12, पंजाब में 11 और मध्य प्रदेश में छह दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। सिक्किम, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की तीन-तीन, कर्नाटक और महाराष्ट्र की दो-दो दवाएं असफल रहीं। बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में एक-एक दवा का सैंपल फेल हुआ। दो कफ सिरप हरिद्वार और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में बने हैं। तीसरा कफ सिरप “बेस्टो-कफ ड्राई कफ फार्मूला” है, जो सूखी खांसी में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ से भी एक नकली दवा का मामला सामने आया है, जिसमें एक अनधिकृत निर्माता ने अन्य कंपनी का ब्रांड नाम इस्तेमाल किया।   स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रतिक्रिया स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सभी राज्य नियामकों के सहयोग से बाजार से इन दवाओं को हटाने की कार्रवाई जारी है। हिमाचल प्रदेश के राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि अधिकांश दवाओं में मामूली खामियां पाई गईं, जिन्हें तुरंत ठीक करवाया जाएगा। कुछ में बड़ी खामियां पाई गई हैं, जिनके लिए उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी होंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अलर्ट WHO ने भारत में निर्मित तीन मिलावटी कफ सिरप की पहचान की है, जिनमें 'कोल्ड्रिफ कफ सिरप' भी शामिल है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ये दवाएं बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती हैं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए। मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 23 बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं और कहा कि यह नियमित जांच प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि घटिया और नकली दवाओं को समय पर बाजार से हटाकर जनस्वास्थ्य सुरक्षित किया जा सके।  

रिलायंस का मिडिल ईस्ट मोड़: रूस प्रतिबंधों के बाद नए साझेदार बने ये देश

वाशिंगटन  अमेरिका द्वारा दो प्रमुख रूसी तेल उत्पादकों पर प्रतिबंध लगाने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने मिडिल ईस्ट और अमेरिका से लाखों बैरल कच्चा तेल खरीद लिया है। ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि रिलायंस ने सऊदी अरब के खफजी, इराक के बसरा मीडियम, कतर के अल-शाहीन जैसे कई ग्रेड के कच्चे तेल के साथ-साथ अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल की खरीदारी की है। ये माल दिसंबर या जनवरी में पहुंचने की उम्मीद है। रिलायंस इस साल मात्रा के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा रूसी तेल आयातक रहा है। कंपनी ब्लैक लिस्ट में शामिल रोसनेफ्ट पीजेएससी के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए कच्चा तेल ले रही है। व्यापारियों के अनुसार, हालांकि रिलायंस सामान्यतः मध्य पूर्वी ग्रेड के कच्चे तेल की खरीदारी करता है, लेकिन हाल की ये डीलें जिनमें अमेरिकी प्रतिबंधों से ठीक पहले इस हफ्ते की शुरुआत में हुईं कुछ लेन-देन भी शामिल हैं, सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रहीं। इस महीने 1 करोड़ बैरल से ज्यादा खरीदा तेल कुल मिलाकर, रिलायंस ने इस महीने हाजिर बाजार से कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है, जिसमें मिडिल ईस्ट का तेल सबसे अधिक है। ज्यादातर खरीदारी अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद हुई। कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। व्यापारियों ने बताया कि अन्य भारतीय रिफाइनर भी बाजार में सक्रिय हैं और मिडिल ईस्ट, अमेरिका तथा ब्राजील से खरीदारी कर रहे हैं। गुरुवार को ओमान जैसे ग्रेड के तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई। रूसी तेल आयात पर पड़ा असर खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाड़ी देशों का कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 5% से ज्यादा का इजाफा हो चुका है। रोसनेफ्ट और लुकोइल पीजेएससी पर प्रतिबंध लगने के बाद, रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी लिमिटेड को छोड़कर, प्रमुख भारतीय रिफाइनर्स को रूसी तेल का प्रवाह तेजी से गिरने की उम्मीद है। कुछ चीनी कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव का आकलन कर रही हैं और खरीदारी रोक चुकी हैं।   4 दिनों में ब्रेंट कीमतों में 8% उछाल 20 अक्टूबर के बाद से खाड़ी देशों के कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8% का इजाफा हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, 20 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 61.01 डॉलर प्रति बैरल पर थीं, जो बढ़कर 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इसका मतलब है कि मात्र 4 दिनों में ब्रेंट ऑयल की कीमतों में करीब 6 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ है। इसका प्रमुख कारण दुनिया के बड़े आयातकों द्वारा खाड़ी देशों के कच्चे तेल की बढ़ती मांग है। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा रहा है, जिससे भारतीय रिफाइनर्स को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव बने रह सकता है।