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न्यूयॉर्क टाइम्स पर भड़के ट्रंप, 15 अरब डॉलर की मानहानि का दावा ठोकने की चेतावनी

 न्यूयॉर्क  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के नामी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स और उसके चार पत्रकारों के खिलाफ 15 अरब डॉलर का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है. सोमवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "न्यूयॉर्क टाइम्स को बहुत लंबे समय से स्वतंत्र रूप से झूठ बोलने, बदनाम करने और मुझे बदनाम करने की अनुमति दी गई है, और अब यह बंद होगा!”. उन्होंने जानकारी दी कि इस मुकदमे को उन्होंने फ्लोरिडा में दर्ज कराया है. "आज, मुझे देश के इतिहास के सबसे खराब और सबसे पतित अखबारों में से एक, रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट पार्टी के लिए एक वर्चुअल "मुखपत्र" बनने वाले द न्यूयॉर्क टाइम्स के खिलाफ 15 बिलियन डॉलर का मानहानि का मुकदमा लाने का बड़ा सम्मान मिला है. मैं इसे अब तक के सबसे बड़े अवैध कैंपेन चलाने में योगदान देने वाले के रूप में देखता हूं. कमला हैरिस के उनके समर्थन को वास्तव में द न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर केंद्र में रखा गया था, जो पहले कभी नहीं सुना गया था! "टाइम्स" आपके पसंदीदा राष्ट्रपति (यानी मेरे), मेरे परिवार, बिजनेस, अमेरिका फर्स्ट मूवमेंट, MAGA और समग्र रूप से हमारे देश के बारे में झूठ बोलने की एक दशक लंबी पद्धति में लगा हुआ है. मुझे गर्व है कि मैं एक बार सम्मानित "कचरा" को जिम्मेदार ठहराता हूं, जैसा कि हम फेक न्यूज नेटवर्क के साथ कर रहे हैं… न्यूयॉर्क टाइम्स को बहुत लंबे समय से स्वतंत्र रूप से झूठ बोलने, बदनाम करने और मुझे बदनाम करने की अनुमति दी गई है, और अब यह बंद होगा! यह मुकदमा ग्रेट स्टेट ऑफ फ़्लोरिडा में लाया जा रहा है. इस बात की ओर आपका ध्यान के लिए धन्यवाद. अमेरिका को फिर से महान बनाएं!" डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के अनुसार फ्लोरिडा में अमेरिकी जिला न्यायालय में दायर मुकदमे में न्यूयॉर्क टाइम्स के दो पत्रकारों द्वारा लिखे गए और 2024 के चुनाव के पहले छापे गए कई लेखों और एक किताब का नाम दिया गया है. इसमें आरोप लगाया गया है कि कहा गया है कि ये "न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मानहानि के दशकों पुराने पैटर्न का हिस्सा हैं." ट्रंप द्वारा दायर इस मुकदमे में कहा गया है, "बयानों के झूठ की जानकारी के साथ, और/या उनकी सच्चाई या झूठ की लापरवाह उपेक्षा के साथ, प्रतिवादियों (NYT और 4 पत्रकार) ने लापरवाही से ऐसे बयान प्रकाशित किए." AP की रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एजेंसी की तरफ से इस खबर पर प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत जवाब नहीं दिया है. गौरतलब है कि ट्रंप अमेरिका के कई मीडिया आउटलेट्स के पीछे पड़ गए हैं. जुलाई में उन्होंने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और मीडिया के दिग्गज रूपर्ट मर्डोक के खिलाफ 10 बिलियन डॉलर का मानहानि का मुकदमा दायर किया था क्योंकि अखबार ने यौन शोषण के अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ ट्रंप के संबंधों पर एक स्टोरी छाप दी थी.

SBI में बड़ी लूट: कर्नाटक में 20 किलो सोना और नकदी ले उड़े, मिर्च पाउडर से किया हमला

विजयपुरा कर्नाटक के विजयपुरा जिले के चदचन कस्बे में  स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में हथियारों से लैस डकैतों ने दिनदहाड़े सनसनीखेज डकैती को अंजाम दिया। इस घटना में डकैतों ने लगभग 21.04 करोड़ रुपये की नकदी और सोने के आभूषण लूट लिए। पुलिस के अनुसार, तीन हथियारबंद डकैतों ने बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को बंधक बनाकर इस लूट को अंजाम दिया। शाखा प्रबंधक तारकेश्वर की शिकायत के अनुसार, तीन डकैत बैंक में एक चालू खाता खोलने के बहाने घुसे। उनके पास पिस्तौल और चाकू थे, जिनका इस्तेमाल कर उन्होंने बैंक कर्मचारियों और मौजूद ग्राहकों को धमकाया। डकैतों ने सभी को प्लास्टिक टैग से बांध दिया और बैंक के नकदी और सोने के लॉकर खोलने के लिए मजबूर किया। रिपोर्ट के मुताबिक, लूट के दौरान, डकैतों ने 425 सोने के पैकेटों में से 398 पैकेट चुरा लिए, जिनका कुल वजन लगभग 20 किलोग्राम बताया जा रहा है। इसके अलावा, लगभग 1.04 करोड़ रुपये की नकदी भी लूटी गई। पुलिस ने बताया कि डकैत एक सुजुकी ईवा वाहन में फर्जी नंबर प्लेट के साथ भागे, जो महाराष्ट्र के पंढरपुर की ओर जा रहा था। हालांकि, सोलापुर जिले के हुलजंती गांव में वाहन का दुर्घटना हो गई, जिसके बाद डकैत लूटे गए सामान के साथ फरार हो गए। पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण निंबर्गी ने पुष्टि की कि इस घटना में बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। डकैतों की तलाश के लिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। जिले में दूसरी बड़ी डकैती यह घटना विजयपुरा जिले में कुछ महीनों के भीतर दूसरी बड़ी डकैती है। इससे पहले, 23 से 25 मई के बीच, मंगुली गांव में केनरा बैंक की शाखा से 53.26 करोड़ रुपये की लूट हुई थी, जिसमें लगभग 59 किलोग्राम सोना और 5.3 लाख रुपये की नकदी शामिल थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, पहली डकैती की साजिश बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक विजयकुमार मिरियाल ने महीनों तक रची थी। जून में मिरियाल और उनके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस डकैती में शामिल अपराधियों ने हॉलीवुड और बॉलीवुड की डकैती से प्रेरित फिल्मों का अध्ययन किया था। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों और बिजली लाइनों को निष्क्रिय कर दिया, खिड़की की ग्रिल काटी, और मिरियाल द्वारा बनाई गई लॉकर की डुप्लिकेट चाबी का उपयोग किया। पकड़े जाने से बचने के लिए, अपराधियों ने मास्क और हेलमेट पहने, स्निफर कुत्तों को भटकाने के लिए मिर्च पाउडर छिड़का, और जांच को गुमराह करने के लिए काले जादू से संबंधित सामान छोड़ा। उन्होंने अपनी मूल योजना को एक आईपीएल मैच के कारण स्थगित कर दिया था और मिरियाल के ट्रांसफर के बाद डकैती को अंजाम दिया ताकि संदेह नए कर्मचारियों पर जाए। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने दोनों डकैतियों के बाद जांच तेज कर दी है। चदचन डकैती के मामले में, पुलिस संदिग्धों की तलाश में सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों का विश्लेषण कर रही है। विजयपुरा जिले में बढ़ती डकैतियों ने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है, और पुलिस पर अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने का दबाव है। पुलिस अधीक्षक निंबर्गी ने कहा, "हम सभी संभावित सुरागों पर काम कर रहे हैं और जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा।" इस बीच, बैंक प्रबंधन ने सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का आश्वासन दिया है।

मसूद इलियास का कबूलनामा: मसूद अज़हर था दिल्ली और मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड

नई दिल्ली पाकिस्तान में आतंकवाद पर एक बड़ा खुलासा हुआ है. जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने एक चौंकाने वाला कुबूलनामे किया है, जिसमें उसने दिल्ली और मुंबई हमलों के पीछे जैश प्रमुख मसूद अजहर का हाथ बताया है. कुबूलनामे में पाकिस्तान के बालाकोट और बहावलपुर में जैश के ठिकानों का भी जिक्र किया गया है. कश्मीरी ने कहा कि बालाकोट की मिट्टी ने मसूद अजहर के मिशन को चलाने के लिए ठिकाना दिया. आतंकी इलियास कश्मीरी ने अपने कुबूलनामे में पाकिस्तान की पोल खोल दी है. उसने बताया कि बहावलपुर के जैश कैंप में मारे गए आतंकियों के जनाजे में शामिल होने का आदेश सीधे जीएचक्यू यानी पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने अपने जनरलों को दिया था. यही नहीं, डीजी आईएसपीआर ने भी बहावलपुर और जैश-ए-मोहम्मद के बीच के लिंक को दबाने की कोशिश की थी. कमांडर के कुबूलनामे से एक और बड़ी खबर सामने आई है. ऑपरेशन 'सिंदूर' के बाद आतंकी समूहों में भारी खौफ फैल गया है. कमांडर ने खुले मंच से 'मिशन-ए-मुस्तफा' के लिए अलग-अलग आतंकी समूहों को एकजुट होने की अपील की. उसने कहा कि कुछ लोगों ने जिहाद से इनकार कर दिया है, लेकिन वह बाकी के साथ मिलकर फिर से जिहाद को जिंदा रखना चाहता है. जंग की वजह मसूद अजहर… मसूद इलियास कश्मीरी ने कहा कि आज दुनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर दिल्ली के मोदी और इजरायल के नेतन्याहू तक, अगर कोई शख्सियत जंग की वजह बन रही है, तो वह मसूद अजहर है. उसने कहा कि 'अल-जिहाद' की आवाज नेतन्याहू तक जानी चाहिए. उसने लोगों से जिहाद को जिंदा रखने के लिए हाथ उठाकर नारे लगाने की अपील भी की.

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में दो महिला नक्सली ढेर, सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

गढ़चिरौली  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पुलिस कमांडो और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 2 महिला नक्सली को ढेर कर दिया गया है. साथ ही मौके से एके 47 समेत कई हथियार बरामद किए गए हैं. जानकारी के मुताबिक गढ़चिरौली पुलिस ने एटापल्ली तालुका के जाम्बिया जंगल में एक भीषण मुठभेड़ में दो महिला माओवादियों को मार गिराया है. खुफिया जानकारी के आधार पर, सी-60 टीमों और सीआरपीएफ की 191वीं बटालियन ने इलाके की घेराबंदी की और एक एके-47, एक पिस्तौल, गोला-बारूद और भारी मात्रा में माओवादी साहित्य बरामद किया है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्य साईं कार्तिक के नेतृत्व में चल रहे अभियान के तहत क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ ये कार्रवाई की गई. इसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. मृत्युंजय सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनका पत्रकारिता में 18 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में ABP News में कार्यरत हैं और महाराष्ट्र में डिप्टी ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं. वे अपराध, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी रिपोर्टिंग करते हैं. उनकी डिफेंस में काफी रुचि है. 

मई के आदेश का पालन नहीं हुआ, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को सुनाई खरी-खोटी

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने मई में दिए अपने आदेश का पालन नहीं करने पर महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि 2022 से रुके हुए राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों को बिना किसी और समय विस्तार के 31 जनवरी, 2026 तक संपन्न करा लिए जाएं। कोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लंबित स्थानीय निकाय चुनावों को समय पर संपन्न कराने के उसके आदेश का पालन करने में विफल रहने से काफी नाखुश थी। देश के भावी मुख्य न्यायाधीश (Next CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “जिला परिषदों, पंचायत समितियों और सभी नगर पालिकाओं सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक करा लिए जाएं। राज्य और राज्य निर्वाचन आयोग को और समय नहीं दिया जाएगा। अगर किसी अन्य रसद सहायता की जरूरत हो, तो 31 अक्टूबर, 2025 से पहले तुरंत अर्जी दायर की जा सकती है। उसके बाद किसी भी प्रार्थना पर विचार नहीं किया जाएगा।” 'आपकी निष्क्रियता दर्शाती है कि आप अक्षम हैं' इससे पहले पीठ को सूचित किया गया था कि नगर पालिकाओं का परिसीमन कार्य प्रगति पर है और राज्य निर्वाचन आयोग ने बोर्ड परीक्षाओं के कारण स्कूल परिसरों की अनुपलब्धता के अलावा अपर्याप्त ईवीएम सहित अन्य आधारों पर समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “क्या आप ये चुनाव पहली बार करा रहे हैं? यह बात आपको उस समय भी पता थी जब हमने पहला आदेश पारित किया था। आपकी निष्क्रियता दर्शाती है कि आप अक्षम हैं। सबसे पहले, परिसीमन कोई वैध कारण नहीं है कि आपको चुनाव रोकना चाहिए।” कोर्ट ने 6 मई को 4 महीने का समय दिया था जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस कोर्ट ने 6 मई को आपको चार महीने का समय दिया था और अब आप समय सीमा खत्म होने के 10 दिन बाद और समय मांगने के लिए नया बहाने बना रहे हैं। पीठ ने कहा, “हम इस बात पर गौर करने के लिए बाध्य हैं कि राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित समय-सीमा में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहा। हालांकि, एकमुश्त रियायत के रूप में हम निम्नलिखित निर्देश जारी करना उचित समझते हैं।” न्यायालय ने कहा, “लंबित परिसीमन हर हाल में 31 अक्टूबर, 2025 तक पूरे किया जाएं। इसके बाद कोई और समय-सीमा नहीं दी जाएगी। परिसीमन प्रक्रिया चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं होगी।” आयोग की अर्जी खारिज कोर्ट ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं के कारण स्कूल परिसर उपलब्ध न होने के आधार पर चुनाव स्थगित करने की अर्जी खारिज कर दी और कहा कि परीक्षाएं अगले साल मार्च में होंगी। पीठ ने निर्देश दिया, “महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, आवश्यकतानुसार चुनाव अधिकारियों और अन्य सहायक कर्मचारियों के कर्तव्यों का पालन करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों को तुरंत तैनात करें।” पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए आवश्यक कर्मचारियों का विवरण दो सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव को प्रस्तुत करने को भी कहा। ईवीएम पर हलफनामा दें पीठ ने कहा कि अगर आवश्यक हो तो मुख्य सचिव अन्य विभागों के सचिवों के परामर्श से निर्वाचन आयोग द्वारा अनुरोध किए जाने के चार सप्ताह के भीतर आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराएंगे। पीठ ने आदेश दिया, “आवश्यक ईवीएम की अनुपलब्धता के संबंध में, हम राज्य निर्वाचन आयोग को आवश्यक व्यवस्था करने और 30 नवंबर, 2025 तक ईवीएम की उपलब्धता के संबंध में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं।” पीठ, महाराष्ट्र में लंबित निकाय चुनावों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने मई में एक अंतरिम आदेश जारी कर चार महीने यानी सितंबर तक चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस पर जस्टिस कांत भड़क उठे। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को पहले दी गई समय-सीमा की याद दिलाते हुए कहा, “क्या चुनाव हो चुके हैं? आदेश मई में पारित किया गया था, चुनाव चार महीने में होने थे।” परिसीमन प्रक्रिया जारी है महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया जारी है और उन्होंने समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा, “आपकी निष्क्रियता अक्षमता को दर्शाती है। ये मुद्दे आपको तब भी पता थे जब हमने पहला आदेश पारित किया था।” राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने स्वीकार किया कि वर्तमान में 65,000 ईवीएम उपलब्ध हैं, जबकि 50,000 ईवीएम की अभी भी आवश्यकता है और उनका ऑर्डर दे दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित दो सप्ताह के भीतर चुनावों की अधिसूचना जारी करने में विफल रहा और त्योहारों से लेकर कर्मचारियों की कमी तक के बहाने बताते हुए पूरी प्रक्रिया को दोबारा कर रहा है। बता दें कि 6 मई को, जस्टिस कांत की अगुवाई वाली पीठ ने जुलाई 2010 से पहले लागू ओबीसी आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने की अनुमति दे दी थी, क्योंकि राज्य द्वारा बंठिया आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था। राज्य के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2022 की यथास्थिति आदेश के कारण कई स्थानीय निकायों में वर्षों से चुनाव नहीं हुए थे, जिसमें बंठिया आयोग की सिफारिश के आधार पर स्थानीय निकायों में 27% ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

5 साल में करोड़ों की दौलत: अफसर के पास मिला 1 करोड़ कैश, 1 करोड़ के गहने

गुवाहटी  यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. असम सिविल सेवा (ACS) की एक युवा अधिकारी, जिन्हें कभी प्रशासनिक जगत का उभरता सितारा माना जा रहा था, अब जेल की सलाखों के पीछे हैं. मुख्यमंत्री की विशेष सतर्कता शाखा (Special Vigilance Cell) की छापेमारी में करोड़ों की काली कमाई उजागर हुई है.  करोड़ों की बरामदगी, सभी हुए हैरान कामरूप जिले के गोरैमरी में तैनात सर्किल ऑफिसर नूपुर बोरा को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों की टीम ने उनके ठिकानों पर दबिश दी तो नतीजे देखकर सभी दंग रह गए. गुवाहाटी स्थित घर से 92 लाख रुपये नकद और लगभग 1 करोड़ रुपये के गहने बरामद हुए. बरपेटा में किराए पर लिए मकान से भी 10 लाख रुपये नकद मिले. यानी पांच साल की सेवा में इस अधिकारी ने जो अकूत संपत्ति इकट्ठा की, उसने सरकार से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया. एक उभरते चेहरे से गिरफ्तारी तक का सफर गोलाघाट जिले की रहने वाली नुपुर बोराह ने 2019 में सिविल सेवा में प्रवेश किया था. उस समय उन्हें मेहनती और उम्मीद जगाने वाली अफसर के तौर पर देखा जाता था. परिवार और समाज के लिए वह गर्व का कारण थीं. लेकिन प्रशासनिक ज़िंदगी का यह सफर अचानक ही भ्रष्टाचार और अवैध सौदों की कहानी बन गया. पिछले छह महीनों से उन पर गुप्त निगरानी रखी जा रही थी. आरोप था कि वह ज़मीन से जुड़े सौदों में गड़बड़ी कर रही हैं और कथित तौर पर मोटी रकम ले रही हैं. आखिरकार आरोपों पर कार्रवाई हुई और उनकी गिरफ़्तारी के साथ ही पूरा मामला सुर्खियों में आ गया. करीबी सहयोगी पर भी शिकंजा सतर्कता विभाग ने सिर्फ बोराह पर ही कार्रवाई नहीं की. टीम ने उनके करीबी माने जाने वाले बरपेटा राजस्व सर्किल ऑफिस के कर्मचारी लाट मंडल सुरजीत डेका के घर पर भी छापा मारा. जांचकर्ताओं का शक है कि बोराह और डेका ने मिलकर बरपेटा में कई ज़मीनें खरीदी हैं. अब इन संपत्तियों की जांच की जा रही है. मुख्यमंत्री का सख्त संदेश असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए साफ कहा कि नुपुर बोराह ने बरपेटा में सर्किल ऑफिसर रहते हुए हिंदुओं की ज़मीन संदिग्ध व्यक्तियों को ट्रांसफर की. इसके बदले उन्होंने मोटी रकम ली. यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राजस्व विभाग में, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में फैले भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. आलीशान जीवनशैली पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा नुपुर बोराह की आलीशान जीवनशैली. उनकी आधिकारिक हैसियत एक सर्किल ऑफिसर की थी, लेकिन छापेमारी में जो संपत्ति और सोना-जवाहरात मिले, उन्होंने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया. सवाल उठ रहे हैं कि सिर्फ पांच साल की नौकरी में इतनी संपत्ति कहां से आई? लोगों ने किए खूब कमेंट सोशल मीडिया पर इस खबर ने तूफान मचा दिया है. कुछ लोगों ने लिखा कि आम नागरिक मामूली काम के लिए राजस्व दफ्तरों के चक्कर काटते हैं और वहीं अफसर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. एक अन्य यूज़र ने कहा कि यही वजह है कि ज़मीन से जुड़े मामले आम जनता के लिए कभी आसान नहीं होते. भ्रष्टाचार की जड़ यही है. अब आगे क्या? फिलहाल नुपुर बोराह जेल में हैं और सतर्कता विभाग उनकी संपत्ति और लेन-देन की गहन जांच कर रहा है. उनके बैंक अकाउंट, संपत्तियों और ज़मीन सौदों की जानकारी खंगाली जा रही है. साथ ही उनके सहयोगियों की भी पूछताछ चल रही है.  

सरकार का फैसला: 20 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले वीआरएस कर्मचारी पाएंगे पेंशन

नई दिल्ली कार्मिक मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि हाल ही में अधिसूचित नियमों के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारी 20 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी करने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनने पर एक सुनिश्चित भुगतान यानी पेंशन पाने के हकदार हैं। 2 सितंबर को पेंशन व पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने जारी किया राजपत्र पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने 2 सितंबर को आधिकारिक राजपत्र में केंद्रीय सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत एकीकृत पेंशन योजना का कार्यान्वयन) नियम, 2025 को अधिसूचित किया है। इससे एनपीएस के तहत यूपीएस को एक विकल्प के रूप में चुनने वाले केंद्र सरकार के कर्मियों को मिलने वाले लाभ से जुड़े सेवा मामलों को विनियमित किया जा सकेगा। ये नियम अन्य बातों के साथ-साथ यूपीएस उपभोक्ताओं को 20 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प देते हैं। 25 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही मिलेगी सुनिश्चित भुगतान की सुविधा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "एकीकृत पेंशन योजना के तहत पूर्ण सुनिश्चित भुगतान 25 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही उपलब्ध होता है। हालांकि, 20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने के बाद वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) चुनने पर, आनुपातिक आधार पर सुनिश्चित भुगतान अर्थात अर्हक सेवा के वर्ष को सुनिश्चित भुगतान के 25 से विभाजित करके ग्राहक को भुगतान किया जाएगा।" रिटायरमेंट की तारीख से देय होगी राशि मंत्रालय ने कहा है कि यह भुगतान सेवानिवृत्ति की तिथि से देय होगा। बयान में कहा गया है, "अन्य लाभ जैसे व्यक्तिगत कोष का 60 प्रतिशत अंतिम निकासी और प्रत्येक छह माह की सेवा अवधि के लिए मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 1/10वां हिस्सा एकमुश्त लाभ, सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, सीजीईजीआईएस (केंद्र सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना) लाभ सेवानिवृत्ति पर प्राप्त किए जा सकते हैं।" इसके अलावा, वीआरएस लेने के बाद लेकिन सुनिश्चित भुगतान शुरू होने से पहले ग्राहक की मृत्यु होने की स्थिति में, कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी को ग्राहक की मृत्यु की तारीख से पारिवारिक भुगतान दिया जाएगा। इस संशोधन का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि यह सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के लिए बहुत जरूरी कदम है, जो बहुत कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। पटेल ने कहा, "इससे उन सभी कर्मचारियों को मदद मिलेगी जो 20 साल की नियमित सेवा पूरी करने के बाद विभाग में सेवा देने में असमर्थ हैं।"

रक्षा क्षेत्र में भारत का अगला कदम: HAL बनाएगा सुपर अटैक हेलीकॉप्टर ‘महाप्रचंड’

नई दिल्ली भारतीय सेना और वायुसेना की ताकत को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड को बड़ा अपग्रेड करेगी. यह अपग्रेड हेलीकॉप्टर की मारक क्षमता और बचाव की शक्ति को कई गुना बढ़ा देगा. लगभग 62,700 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में HAL 156 हेलीकॉप्टर बनाएगी, जिनमें से 90 सेना के लिए और 66 वायुसेना के लिए होंगे. डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और 2033 तक पूरी हो जाएगी.  प्रचंड LCH का इतिहास: स्वदेशी हेलीकॉप्टर की शुरुआत LCH प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो HAL ने डिजाइन और विकसित किया. इसका विकास 2006 में शुरू हुआ, जब कारगिल युद्ध (1999) में ऊंचाई वाले इलाकों के लिए अटैक हेलीकॉप्टर की जरूरत महसूस हुई. Mi-17 जैसे यूटिलिटी हेलीकॉप्टर को लड़ाई के लिए इस्तेमाल किया गया था, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था. प्रोटोटाइप 2010 में रोल आउट हुआ. 2022 में वायुसेना ने इसे औपचारिक रूप से शामिल किया (143 हेलीकॉप्टर यूनिट 'धनुष' में जोधपुर पर). नाम 'प्रचंड' का मतलब 'तीव्र/उग्र' है. अभी तक 15 लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन (LSP) प्रचंड हेलीकॉप्टर डिलीवर हो चुके हैं- 10 वायुसेना को और 5 सेना को. ये एयर-टू-एयर मिसाइल, रॉकेट्स और टॉरेट गन से लैस हैं. 28 मार्च 2025 को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने 156 प्रचंड LCH के ऑर्डर को मंजूरी दी. HAL के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन हुए. यह FY 2025-26 में सबसे बड़ा डिफेंस डील है. HAL के टुमकुरु फैक्टरी (कर्नाटक) में उत्पादन होगा, जो भारत का सबसे बड़ा हेलीकॉप्टर प्लांट है. यहां सालाना 30 हेलीकॉप्टर बन सकेंगे. जरूरत पर 100 तक बढ़ाया जा सकता है. क्या अपग्रेड… 7 नए सिस्टम्स और 4 बड़े बदलाव नई सीरीज के प्रचंड में 7 नए सिस्टम्स और 4 प्रमुख अपग्रेड्स होंगे, जो इसे दुनिया के सबसे घातक हेलीकॉप्टर्स में बदल देंगे. ये अपग्रेड्स फायरपावर बढ़ाएंगे और दुश्मन के खिलाफ बचे रहने की क्षमता देंगे. 7 नए सिस्टम्स     लेजर-गाइडेड रॉकेट: लेजर से निर्देशित, जो सटीक हमले करेंगे.     न्यूक्लियर डिटेक्शन कैपेबिलिटी: न्यूक्लियर हमलों का पता लगाने के लिए.     डायरेक्टेड इंफ्रारेड काउंटरमेजर्स: इंफ्रारेड मिसाइलों को भटकाने के लिए.     डेटा लिंक: सुरक्षित संचार के लिए, जो अन्य विमानों या ग्राउंड स्टेशनों से जोड़ेगा.     ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस सिस्टम: बाधाओं (जैसे पहाड़ या तारें) से बचने के लिए ऑटोमेटिक सेंसर.     मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: दुश्मन रडार को जाम करेगा और मिसाइलों को चकमा देगा.     स्वदेशी एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल: दुश्मन के ग्राउंड टारगेट्स को सटीक निशाना लगाने के लिए, जैसे टैंक या बंकर. 4 प्रमुख अपग्रेड्स     एडवांस्ड आर्मर: दुश्मन हथियारों से ज्यादा सुरक्षा.     बेहतर इंजन और एवियोनिक्स: ऊंचाई पर ज्यादा पावर और सटीकता.     इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड: बेहतर सेंसर से रात में या खराब मौसम में निगरानी.     हेलमेट-माउंटेड पॉइंटिंग सिस्टम: पायलट हेलमेट से ही हथियार निर्देशित कर सकेगा, जो निशाना लगाना आसान बनाएगा. ये अपग्रेड्स प्रचंड को ऊंचाई (5,000 मीटर से ऊपर) पर उड़ाने के लिए आदर्श बनाएंगे. यह दुश्मन एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने, ड्रोन/धीमी विमानों को मार गिराने, बंकर तोड़ने, काउंटर-टेरर ऑपरेशंस और ग्राउंड फोर्सेस को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन है. उत्पादन और डिलीवरी: HAL का प्लान HAL टुमकुरु फैक्टरी में उत्पादन करेगी. डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी. 2033 तक पूरे 156 हेलीकॉप्टर डिलीवर हो जाएंगी. पहले 3 साल में 30 हेलीकॉप्टर/वर्ष फिर तेजी से. यह प्रोजेक्ट 250 से ज्यादा भारतीय कंपनियों को जोड़ेगा और 8,500 से ज्यादा नौकरियां पैदा करेगा. 92% कॉन्ट्रैक्ट्स घरेलू उद्योग को दिए जाएंगे. अभी 15 LSP प्रचंड तैनात हैं, जो लद्दाख और पूर्वोत्तर में परीक्षण में सफल रहे. जनवरी 2025 में एक HAL ध्रुव क्रैश के बाद प्रचंड फ्लीट को अस्थायी रूप से ग्राउंड किया गया था, लेकिन जून 2025 में सब-कॉम्पोनेंट्स बदलकर फिर से उड़ान भरने को मंजूरी मिली. महत्व: सेना और वायुसेना की ताकत में इजाफा यह डील भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करेगी. प्रचंड ऊंचाई वाले इलाकों (जैसे सियाचिन, लद्दाख) के लिए बेस्ट है. 90 सेना को और 66 वायुसेना को मिलने से हेलीकॉप्टर फ्लीट कई गुना बढ़ेगा. यह 'मेक इन इंडिया' का प्रतीक है, जो रोजगार और अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा. 2020-22 के चीन-भारत संघर्ष में प्रोटोटाइप ने लद्दाख में सशस्त्र गश्त की, जो इसकी क्षमता साबित करता है. नवंबर 2024 में सेना ने पूर्वोत्तर में हाई-ऑल्टिट्यूड फायरिंग की. यह हेलीकॉप्टर दुश्मन पनडुब्बियों, ड्रोन और टैंकों से लड़ने में सक्षम है.

इंटरनेट पॉलिसी में बड़ा बदलाव: वाई-फाई पर रोक, मोबाइल डेटा को मिली हरी झंडी

काबुल अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के आदेश पर उत्तरी बल्ख प्रांत में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट (वाई-फाई) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध 'अनैतिकता को रोकने' के उद्देश्य से लागू किया गया है। अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा सत्ता हासिल करने के बाद यह पहली बार है जब इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले के कारण उत्तरी बल्ख प्रांत में सरकारी कार्यालय, निजी क्षेत्र, सार्वजनिक संस्थान और घर वाई-फाई इंटरनेट से वंचित हो गए हैं। फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट पर प्रतिबंध प्रशासन के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि तालिबान नेता ने 'अनैतिकता को रोकने' के लिए एक अफगान प्रांत में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, मोबाइल इंटरनेट अभी भी सक्रिय है। प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता हाजी अताउल्लाह जैद ने कहा कि नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के 'पूर्ण प्रतिबंध' के आदेश के चलते बल्ख में अब केबल इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। तैयार की जाएगी वैकल्पिक व्यवस्था जैद ने आगे बताया कि यह कदम अनैतिकता को रोकने के लिए उठाया गया है, और जरूरतों के लिए देश के भीतर ही एक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी कि बल्ख को प्रतिबंध के लिए क्यों चुना गया या क्या यह प्रतिबंध अन्य प्रांतों में भी लागू होगा। अफगान अधिकारी कभी-कभी सुरक्षा कारणों से, विशेष रूप से धार्मिक त्योहारों के दौरान, विस्फोटक उपकरणों के विस्फोट को रोकने के लिए मोबाइल फोन नेटवर्क को निलंबित कर देते हैं।  

भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का दावा फेल, पाक मंत्री बोले- भारत ने नहीं मांगी मध्यस्थता

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत ने कभी भी तीसरे पक्ष की तरफ से मध्यस्थता स्वीकार नहीं की है। खास बात है कि पाकिस्तान की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान में संघर्ष विराम कराया था। हालांकि, भारत ने साफ किया था कि सीजफायर को लेकर बातचीत द्विपक्षीय हुई थी। अल जजीरा से बातचीत में डार से जब तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, 'हमें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है। हमें भी द्विपक्षीय में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वार्ता व्यापक होनी चाहिए। इसमें आतंकवाद, व्यापार, अर्थव्यवस्था, जम्मू और कश्मीर इन सभी विषयों पर वार्ता होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'जब 10 मई को सेक्रेटरी रूबियो की तरफ से सीजफायर का ऑफर मेरे पास आया, तो मुझे बताया गया कि जल्द ही भारत और आपके बीच स्वतंत्र मंच पर बातचीत होगी। जब हम 25 जुलाई को मैं और सेक्रेटरी रूबियो वॉशिंगटन में मिले तो मैंने पूछा कि वार्ता का क्या हुआ। इसपर उन्होंने कहा भारत का कहना है कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है।' डार ने कहा, 'हमने कहा ठीक है। हम किसी चीज के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं। अगर कोई देश बातचीत करना चाहता है, तो हम खुश हैं और स्वागत करते हैं। हम शांति पसंद मुल्क हैं। हमारा मानना है कि बातचीत ही आगे बढ़ने का तरीका है, लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती। तो जब तक भारत बातचीत नहीं करना चाहता, तब तक हम जबरन वार्ता नहीं कर सकते। हम वार्ता थोपना नहीं चाहते।' ऑपरेशन सिंदूर जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने 7 मई को जवाबी कार्रवाई की थी। तब ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के क्षेत्र में जाकर आतंकवादी ठिकाने तबाह किए थे। पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी। ट्रंप के दावे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि उन्होंने व्यापार के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया था। जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेता साफ कर चुके हैं कि समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय था और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। भारत ने कहा था कि पाकिस्तान डीजीएमओ की तरफ से अनुरोध किए जाने के बाद संघर्ष विराम हुआ था।