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एनसीआर में बड़ी महापंचायत, किसानों और गुर्जरों ने 13 जुलाई को राष्ट्रीय बैठक बुलाने का किया ऐलान

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के फरीदाबाद जिला स्थित अरावली क्षेत्र में वन विभाग के बुलडोजर एक्‍शन के खिलाफ लामबंदी तेज हो गई है। शनिवार को महापंचायत में हजारों की संख्या में जुटे किसानों और गुर्जर नेताओं ने तोड़फोड़ के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई। इस महापंचायत में पूरे एनसीआर से किसान और गुर्जर नेताओं ने भाग लिया। यह पंचायत फरीदाबाद जिले के अनंगपुर गांव में आयोजित की गई। इसे भारतीय किसान यूनियन समेत कई किसान संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को भी पंचायत होगी। इसके साथ ही 13 जुलाई को किसानों की राष्ट्रीय पंचायत बुलाई गई है। जो बुलडोजर एक्‍शन के खिलाफ ग्रामीणों की आवाज बुलंद करेगी। वन विभाग के बुलडोजर एक्‍शन पर भड़का गुस्सा दरअसल, फरीदाबाद जिले के अरावली क्षेत्र स्थित अनंगपुर गांव में वन विभाग ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसका बड़े स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। शनिवार को आयोजित पंचायत में ग्रामीणों और किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि अरावली क्षेत्र में अनंगपुर गांव सदियों पुराना है। यहां कई लोग पीढ़ियों से निवास करते आए हैं। किसान और गुर्जर नेताओं ने कहा कि वन कानून बहुत बाद में बना। जबकि यह गांव सैकड़ों साल पुराना है। ऐसे में गांवों पर वन कानून जबरन लागू करना गलत है।   गांवों को उजाड़ रही भाजपा सरकार पंचायत में जुटे किसान और गुर्जर नेताओं ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला। किसानों और गुर्जरों ने कहा कि भाजपा सरकार पूरे देश में बुलडोजर चला रही है। इसके साथ ही अब वह पुराने गांवों को भी उजाड़ने में जुटी है। ग्रामीणों ने कहा कि सदियों पुराने अनंगपुर गांव को बचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा, लेकिन वन विभाग को यहां तोड़फोड़ नहीं करने दी जाएगी। लोगों ने पंचायत में कहा कि आबादी वाले पुराने गांवों को नुकसान पहुंचाना जनता के साथ बड़ा अन्याय है। घर टूटने के डर से अनंगपुर में चल रहा धरना प्रदर्शन दरअसल, वन विभाग ने फरीदाबाद के गांव अनंगपुर को अरावली क्षेत्र में अवैध कब्जा बताया है। इसके साथ ही स्‍थानीय निवासियों को घर खाली करने को कहा गया है। इसी के बाद से ग्रामीण अनंगपुर में अपना घर बचाने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों के धरने को कांग्रेसी नेता विजय प्रताप और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि अपना समर्थन देने पहुंचे थे। इस दौरान 13 जुलाई को गांव बचाने के लिए राष्ट्रीय पंचायत बुलाने ऐलान किया गया था। धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अनंगपुर को ग्रामीणों की संपत्ति बताते हुए वन विभाग की कार्रवाई को गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई गौरतलब है कि फरीदाबाद अरावली क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि अरावली पर्वत माला क्षेत्र में जितने भी अवैध कब्जे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर पर्यावरण को सुरक्षित किया जाए। इसके बाद पहले फेज में वन विभाग ने अब तक 420 अवैध ढांचों को ध्वस्त किया है। इस कार्रवाई की जद में अनंगपुर समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा गांव शामिल हैं। अनंगपुर गांव में आबादी ज्यादा होने के चलते ग्रामीण तोड़फोड़ के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5, दुनिया का चौथा सबसे समान देश बना

नई दिल्ली पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अब वर्ल्ड बैंक ने भारत की ताकत का लोहा माना है। भारत सरकार ने एक खास मुकाम हासिल करते हुए चीन-अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सफलता का प्रमुख आधार बनीं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5 है। इसके साथ ही भारत दुनिया का चौथा सबसे समान देश बन गया है। इस लिस्ट में स्लोवाक रिपब्लिक, स्लोवेनिया और बेलारूस पहले तीन स्थान पर हैं। दरअसल गिनी इंडेक्स एक तरीका है, जिससे पता चलता है कि किसी देश में आय, संपत्ति या उपभोग लोगों के बीच कितनी बराबरी से बंटा हुआ है। इसका स्कोर 0 से 100 तक होता है। 0 का मतलब है कि सब कुछ बराबर है। 100 का मतलब है कि सब कुछ सिर्फ एक व्यक्ति के पास है। भारत का स्कोर चीन (35.7) और अमेरिका (41.8) से बहुत कम है। यह कई विकसित देशों से भी बेहतर है। गरीबी कम करने से मिली सफलता भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ समान समाज में से एक है। सरकार के अनुसार, गिनी इंडेक्स में भारत की अच्छी रैंकिंग कोई संयोग नहीं है। यह गरीबी कम करने में मिली सफलता का नतीजा है। World Bank की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस सालों में 17.1 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 2011-12 में 16.2% थी। 2022-23 में यह घटकर 2.3% हो गई। यह आंकड़ा 2.15 डॉलर प्रति दिन से कम कमाने वाले लोगों का है। वर्ल्ड बैंक ने गरीबी की नई सीमा 3 डॉलर प्रति दिन तय की है। इसके अनुसार, 2022-23 में गरीबी दर 5.3% होगी। सरकारी योजनाओं ने कर दिया कमाल भारत की इस सफलता के पीछे सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं हैं। इन्हीं योजनाओं के दम पर भारत ने आय में समानता लाने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाया है। इन योजनाओं में पीएम जन धन योजना, DBT, आयुष्मान भारत, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और पीएम विश्वकर्मा योजना शामिल हैं। जन धन योजना और डीबीटी जैसी योजनाओं से देश के आम नागरिक बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं। वहीं आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने गरीब लोगों को मुफ्त इलाज, पक्के घर जैसी आधारभूत सुविधाएं दी हैं। इसके अलावा स्टैंड अप इंडिया, पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं से लोग अपना खुद का बिजनेस शुरू करने में कामयाबी हासिल कर रहे हैं। किसानों के लिए भी पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम जैसी योजनाएं चलाकर उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर की जा रही है। ILO ने भी बांधे तारीफों के पुल अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके अनुसार पिछले 11 साल में भारत की सामाजिक सुरक्षा काफी बेहतर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में जहां सिर्फ 19 फीसदी कवरेज था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 64.3% हो गया है। भारत ने दुनिया में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि को हासिल करने में भी केंद्र द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है।  

21 दिन से ‘बीमार’ लड़ाकू विमान को ले जाने के लिए ब्रिटेन ने कर ली तैयारी, टूटकर वापस जाएगा F-35 फाइटर जेट

तिरुवनंतपुरम  ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एफ-35 फाइटर जेट जो पिछले 21 दिनों से तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर खड़ा है, अब वहां से हटाया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, एक ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर आज  रविवार को तिरुवनंतपुरम पहुंचेगा. इसमें करीब 25 तकनीकी विशेषज्ञ आएंगे, जो इस लड़ाकू विमान की खराबी का आकलन करेंगे.  जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश तकनीशियन तय करेंगे कि इस एफ-35 जेट की मरम्मत भारत में की जा सकती है या फिर इसे वापस ब्रिटेन ले जाना होगा. भारत ने इसे पास की MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) सुविधा में ठीक करने का प्रस्ताव भी दिया था. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यदि जरूरत पड़ी तो एफ-35 को आंशिक रूप से खोलकर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए ब्रिटेन भेजा जा सकता है. ये विशेषज्ञों की टीम विशेष उपकरणों के साथ पहुंच रही है और तय करेगी कि क्या विमान की मरम्मत भारत में की जा सकती है या इसे आंशिक रूप से खोलकर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए यूके भेजना पड़ेगा. प्लेन ने 14 जून को इमरजेंसी लैंडिंग की थी दरअसल, ब्रिटिश रॉयल नेवी का यह फाइटर जेट, जो HMS Prince of Wales कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है, जो कि 14 जून को एक तकनीकी खराबी के कारण तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करने को मजबूर हुआ था. इसके बाद से यह विमान एक सुरक्षित बेज में खड़ा है, जिसकी छह सदस्यीय सुरक्षा टीम निगरानी कर रही है. ब्रिटिश हाई कमीशन के अनुसार, भारत सरकार की ओर से विमान को एयरपोर्ट स्थित MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) फैसिलिटी में शिफ्ट करने की पेशकश स्वीकार कर ली गई है. ब्रिटिश इंजीनियरों के पहुंचने के बाद विमान को हेंगर में ले जाया जाएगा ताकि अन्य विमानों के शेड्यूल में कोई बाधा न आए. “मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान को पुनः सक्रिय सेवा में शामिल किया जाएगा. ग्राउंड टीमें भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो. हम भारतीय अधिकारियों और तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को उनके सतत सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं.” ब्रिटिश लड़ाकू विमान के आपातकालीन स्थिति में उतरने के कुछ दिन बाद,  भारतीय वायुसेना ने कहा था कि वह विमान की ‘‘मरम्मत और वापसी'' के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रही है. बता दें कि यह कोई आम विमान नहीं है, बल्कि पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. जिसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है. इसे दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इटली, नॉर्वे, नीदरलैंड और इजरायल जैसे देश इसका इस्तेमाल करते हैं. इस प्लेन की कीमत 915 करोड़ रुपये गौरतलब है कि F-35B लाइटनिंग दुनिया का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है, जिसकी कीमत करीब 110 मिलियन डॉलर (करीब 915 करोड़ रुपये) है. यह STOVL (Short Take-Off and Vertical Landing) क्षमता से लैस है और छोटे डेक या सीमित क्षेत्र वाले बेस से उड़ान भरने में सक्षम है. आपात लैंडिंग के कुछ दिन बाद ही भारतीय वायुसेना ने ब्रिटिश दल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी, ताकि विमान को ठीक किया जा सके और उसकी वापसी सुनिश्चित की जा सके.

एक और बोइंग विमान में आई खराबी, फ्लाइट रद्द होने से यात्रियों ने किया हंगामा

कोलकाता एक के बाद एक विमानों के रद होने की सूचना से हवाई यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली एक फ्लाइट, जो बैंकाक जाने वाली थी, तकनीकी खराबी के चलते वापस पार्किंग स्टैंड पर लौट आई। अधिकारियों ने बताया कि 130 यात्रियों और सात क्रू मेंबर्स के साथ थाई लायन एयर की फ्लाइट शनिवार को तकनीकी खराबी की वजह से वापस लौटी और बाद में पार्किंग बे में उसे खड़ा किया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट को दिनभर के लिए रद कर दिया गया है। विमान में फ्लैप से संबंधित समस्या आई भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, विमान की शुक्रवार देर रात 1:35 बजे कोलकाता में लैंडिंग हुई और उसे कोलकाता से बैंकाक डॉन मुआंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए तड़के 2:35 बजे टेकऑफ करना था। बोइंग 737 नई पीढ़ी के विमान में फ्लैप से संबंधित समस्या आ गई और इसलिए विमान को वापस पार्किंग वे में लाया गया जिसके बाद उड़ान रद हो गई। एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने कहा कि विमान में 'फ्लैप' उड़ान भरने और उतरने दोनों के दौरान बहुत अहम होते हैं। एयरपोर्ट सूत्रों ने बताया कि विमान के रद होने से यात्री नाखुश थे और कई यात्रियों ने तो एयरलाइन कर्मचारियों पर अपना गुस्सा निकाला। एयरलाइन के एक अधिकारी के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए उड़ान को दिनभर के लिए रद कर दिया गया।  

पाकिस्तान का बड़ा यू-टर्न! हाफिज और मसूद को भारत को सौंपने पर बोले बिलावल भुट्टो

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि उनके देश को विश्वास बहाली के उपाय के रूप में 'जांच के दायरे में आए व्यक्तियों' को भारत को प्रत्यर्पित करने में कोई आपत्ति नहीं है बशर्ते नई दिल्ली इस प्रक्रिया में सहयोग करने की इच्छा दिखाए। 'डॉन अखबार' की खबर के अनुसार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल ने शुक्रवार को अल जजीरा के साथ एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की। खबर में कहा गया कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर को संभावित समझौते और सद्भावनापूर्ण रुख के तहत भारत को प्रत्यर्पित करने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बिलावल ने यह टिप्पणी की। बिलावल ने कहा, ''पाकिस्तान के साथ एक व्यापक वार्ता के हिस्से के रूप में, जहां आतंकवाद उन मुद्दों में से एक है जिन पर हम चर्चा करते हैं, मुझे यकीन है कि पाकिस्तान इनमें से किसी भी चीज का विरोध नहीं करेगा।'' राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (नैक्टा) के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों को पाकिस्तान ने प्रतिबंधित कर रखा है, जबकि 26/11 मुंबई आतंकी हमले का मुख्य षड्यंत्रकारी हाफिज सईद वर्तमान में आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए 33 साल की सजा काट रहा है। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित अजहर को भी नैक्टा ने प्रतिबंधित कर रखा है। बिलावल ने कहा कि इन 'व्यक्तियों' के खिलाफ मुकदमे वाले मामले पाकिस्तान से संबंधित थे, जैसे कि आतंकवादी गतिविधियों का वित्तपोषण। हालांकि, उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के लिए उन पर मुकदमा चलाना मुश्किल था क्योंकि दिल्ली की ओर से बुनियादी चीजों का 'अनुपालन' नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ''भारत कुछ बुनियादी चीजों का पालन करने से इनकार कर रहा है जिसकी दोषसिद्धि के लिए आवश्यकता होती है। यह महत्वपूर्ण है … इन अदालतों में सबूत पेश करना, लोगों को भारत से गवाही देने के लिए आना, जो भी जवाबी आरोप लगेंगे उन्हें सहन करना।'' बिलावल ने कहा, ''अगर भारत इस प्रक्रिया में सहयोग करने को तैयार है, तो मुझे यकीन है कि किसी भी 'जांच के दायरे में आए व्यक्ति' को प्रत्यर्पित करने में कोई बाधा नहीं आएगी।'' उन्होंने आतंकवादियों को पकड़ने के भारत के संकल्प पर भी चिंता व्यक्त की और इसे 'नई असामान्यता' करार दिया। उन्होंने कहा, ''यह पाकिस्तान के हितों की पूर्ति नहीं करता है, और यह भारत के हितों की भी पूर्ति नहीं करता है।'' सईद और अजहर के ठिकानों के बारे में पूछे जाने पर बिलावल ने कहा कि सईद जेल में है, जबकि इस्लामाबाद का मानना है कि अजहर अफगानिस्तान में है।  

इस्राइल-गाजा संघर्ष जारी, 47 की जान गई; हमास 60 दिन के युद्धविराम को तैयार

गाजा  गाजा की सड़कों पर आज फिर मातम पसरा है। भूख मिटाने के लिए कतार में खड़े फलस्तीनियों पर इस्राइल ने एक बार फिर हवाई हमला किया। इस हमले में 47 जानें चली गईं। मीडिया रिपोर्ट की माने तो इस हमले के साथ ही अस्पतालों में चीख-पूकार मची हुई है और दवाएं कम पड़ रही हैं। हालांकि, इसी बीच हमास ने 60 दिन के युद्धविराम पर सहमति जताकर एक उम्मीद की किरण जगाई है। इस्राइल और हमास के बीच लगभग दो साल से चल रहे संघर्ष में गाजा के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को भी हुए इस्राइली हवाई हमलों में कम से कम 47 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हमले उस समय हुए जब लोग खाना पाने के लिए कतार में खड़े थे। अस्पतालों में घायलों की भरमार है और इलाज के संसाधन कम पड़ रहे हैं। बता दें कि इस्राइल की ओर से ये हमला उस समय हुआ जब हमास ने एक 60 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर बातचीत शुरू करने की सहमति दी है। इसका मकसद गाजा में राहत सामग्री पहुंचाना और आगे चलकर स्थायी संघर्षविराम की दिशा में कदम बढ़ाना है। हमास के सहयोगी संगठन इस्लामिक जिहाद ने भी इस प्रस्ताव को समर्थन दिया है। साथ ही स्थायी शांति के लिए गारंटी की मांग की है। युद्धविराम को लेकर वार्ता में लगातार प्रगति मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने 60 दिन की सीजफायर योजना पर सकारात्मक जवाब दिया है। हमास की ओर से जारी बयान में बताया गया कि वे तुरंत बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि इस बीच इस्राइल पहले ही अमेरिका द्वारा प्रस्तावित इस योजना को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर चुका है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या बोला? वहीं इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह तक युद्धविराम का समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें इसे अब खत्म करना होगा। साथ ही ट्रंप ने हमास को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर उन्होंने इस प्रस्ताव को नहीं माना, तो हालात और बिगड़ेंगे। युद्धविराम प्रस्ताव में क्या-क्या है? प्रस्ताव के तहत हमास पहले चरण में 10 इस्राइली बंधकों को रिहा करेगा, जिनमें से 8 जीवित और 18 मृत घोषित किए गए हैं। इसके बदले में कुछ फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई होगी और इस्राइली सेना उत्तरी गाजा के कुछ हिस्सों से हटेगी। इसके बाद दोनों पक्ष स्थायी संघर्षविराम पर बातचीत शुरू करेंगे। इस्राइल की रणनीति में बदलाव अब तक इस्राइल प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू हमास के सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करने की बात कहते रहे हैं। लेकिन हाल ही में ईरान के साथ हुए 12 दिन के संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद उन्होंने अपना रुख नरम किया है। शनिवार रात वे अपने कैबिनेट के साथ इस युद्धविराम प्रस्ताव पर बैठक करने जा रहे हैं, फिर सोमवार को वे वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात करेंगे। बड़े मानवीय संकट के बीच मध्यस्थता पर जोर वहीं कतर, मिस्र और अमेरिका युद्धविराम के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। नई योजना के तहत अमेरिका ने भरोसा दिलाया है कि वह इस्राइल को बातचीत के लिए मजबूती से जोड़े रखेगा। साथ ही गाजा में मानवीय राहत भेजने के लिए पारंपरिक रास्तों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। अगर प्रस्ताव पर सहमति बनती है, तो यह 21 महीने से चल रहे इस भयानक युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। अब तक का सबसे बड़ा मानवीय संकट गौरतलब है कि सात अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर हमास के हमले के साथ शुरू हुआ संघर्ष ने गाजा में की स्थिति डमाडोल कर दी। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 57,338 लोगों की मौत हो चुकी है और 1.35 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस्राइल में 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के हमलों में 1,139 लोगों की जान गई थी और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया था। 

लोकतंत्र को लेकर भारत की मजबूत आस्था, संतुष्टि में दुनिया में दूसरे नंबर पर भारतीय

नई दिल्ली  भारतीय लोगों का अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली के मामले में भरोसा लगातार बढ़ रहा है। भारत ने हाल ही में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति की है, जो भारतीय नागरिकों की अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बढ़ते विश्वास के अनुरूप है। इस सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय लोग दुनिया में अपने लोकतंत्र से संतुष्टि के मामले में दूसरे नंबर पर हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, भारत अपने लोकतंत्र से संतुष्टि के मामले में दुनिया भर में दूसरे स्थान पर है, जो स्वीडन (75 प्रतिशत) के ठीक पीछे 74 प्रतिशत के साथ खड़ा है। यह उपलब्धि 23 देशों के सर्वेक्षण में हासिल की गई है, जहां औसतन 58 प्रतिशत लोग अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। यह आंकड़ा भारत की प्रगति और जनता के विश्वास को दर्शाता है जो देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है। इस सर्वे के अनुसार 15 देशों में आधे से अधिक लोग अपने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। 2017 से लगातार किए जा रहे प्यू रिसर्च के सर्वेक्षणों में यह स्पष्ट हुआ है कि उच्च आय वाले देशों जैसे कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकतंत्र के प्रति असंतोष 64 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि संतुष्टि महज 35 प्रतिशत है। इसके विपरीत, भारत में 74 प्रतिशत लोग अपने लोकतंत्र के कामकाज से खुश हैं, जो यह दर्शाता है कि देश की जनता अपनी सरकार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास रखती है। यह विश्वास आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा है, क्योंकि सर्वेक्षण बताते हैं कि जहां अर्थव्यवस्था मजबूत है, वहां लोकतंत्र के प्रति संतुष्टि भी अधिक है। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। कई चीजें इस बात को प्रभावित कर सकती हैं कि लोग अपने लोकतंत्र के काम करने के तरीके से कितने संतुष्ट हैं, लेकिन आर्थिक धारणाएं एक महत्वपूर्ण कारक हैं। जिन देशों में जनता का एक बड़ा हिस्सा कहता है कि अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है, वहां आम तौर पर ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने लोकतंत्र से संतुष्ट होते हैं। सर्वेक्षण में यह भी उभरकर सामने आया है कि कोविड-19 महामारी के बाद कई देशों में लोकतंत्र के प्रति संतुष्टि में गिरावट आई है, लेकिन भारत में यह स्तर बरकरार रहा। 2017 में जहां दुनिया के बड़े देशों में 49 प्रतिशत लोग अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली से संतुष्ट थे, वहीं आज 74 प्रतिशत का आंकड़ा भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में सुधार और जनता की भागीदारी को दर्शाता है। यह संतुष्टि देश के युवाओं, जो आबादी का बड़ा हिस्सा हैं, और आर्थिक विकास में उनकी भूमिका से भी प्रेरित है। इस मामले में इंडोनेशिया (66 प्रतिशत) और ऑस्ट्रेलिया (61 प्रतिशत) जैसे देशों के साथ तुलना में, भारत का प्रदर्शन उल्लेखनीय है, जबकि ग्रीस (19 प्रतिशत) और जापान (24 प्रतिशत) जैसे देश लोकतंत्र के प्रति असंतोष से जूझ रहे हैं। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि लोग लोकतांत्रिक मूल्यों से दूर हो रहे हैं। शोध बताता है कि दुनिया भर के लोग लोकतंत्र को अच्छा मानते हैं। हालांकि, कई लोग राजनीतिक अभिजात वर्ग से निराश हैं या उन्हें लगता है कि सरकार में उनके विचारों का सही प्रतिनिधित्व नहीं किया जाता है। वहीं, दुनिया में अपने लोकतंत्र से सर्वाधिक संतुष्ट लोगों में स्वीडन और भारत के बाद इंडोनेशिया (66 प्रतिशत), ऑस्ट्रेलिया (61 प्रतिशत) और जर्मनी (61 प्रतिशत) के नाम आते है। एशिया-प्रशांत के पांच देशों (ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंडोनेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया) में भी लोगों की राय काफी अलग-अलग है। भारत इस क्षेत्र में भी टॉप पर है।

ग्लोबल टेक्नोलॉजी रेस में भारत का जलवा, पीयूष गोयल बोले- इनोवेशन में सबसे आगे

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत अपनी युवा आबादी, लागत प्रभावी आरएंडडी इकोसिस्टम और दूरदर्शी नीतियों के कारण टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में ग्लोबल लीडर के रूप में उभर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत द्वारा एआई, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को अपनाने से देश को ग्लोबल विकास चार्ट में ऊपर जाने में मदद मिल रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में केंद्रीय मंत्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की इनोवेशन लागत पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा, "जब हम भारत में नई तकनीकों पर काम करते हैं, तो हमारी लागत स्विट्जरलैंड या यूरोप या अमेरिका की लागत का लगभग छठा या सातवां हिस्सा होती है।" उन्होंने बताया कि इनोवेशन में 12 बिलियन डॉलर के निवेश से भारत प्रभावी रूप से 100 बिलियन डॉलर के परिणाम उत्पन्न कर सकता है, जो विकसित देशों में लागत के बराबर है। आईआईटी मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के संगम 2025 कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा, "और जब हम उस पैसे को तीन या चार साइकल में आगे बढ़ाएंगे, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि यह फंड हमारे इनोवेशन इकोसिस्टम को कितना बड़ा समर्थन दे सकता है।" केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपने बढ़ते स्टार्टअप और रिसर्च लैंडस्केप की बदौलत नौकरी चाहने वाले देश से नौकरी देने वाले देश में बदल रहा है। उन्होंने कहा, "हमारी साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हमारे स्टार्टअप इकोसिस्टम और आरएंडडी प्रयासों के साथ मिलकर भविष्य के भारत की विकास कहानी लिख रहे हैं।" केंद्रीय मंत्री गोयल ने इस बदलाव को आगे बढ़ाने का श्रेय देश के युवाओं को दिया और कहा कि भारत की युवा आबादी सभी क्षेत्रों और सरकारी कार्यक्रमों में इनोवेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी अपनाने में अग्रणी है। उन्होंने आगे जोर दिया कि भारत नई तकनीकों को अपनाने से पीछे नहीं हटता है और इसके बजाय उन्हें आर्थिक विकास के लिए आवश्यक मानता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "वे हमारे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और व्यापार क्षेत्रों में समाहित हो रहे हैं, जिससे भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद मिल रही है।" केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह तकनीक-संचालित दृष्टिकोण भारत को ग्लोबल स्लोडाउन की प्रवृत्ति को रोकने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और इनोवेशन लीडरशिप में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने में मदद कर रहा है।"

ट्रंप का बड़ा कदम: 12 देशों को 7 जुलाई को जाएंगे टैरिफ पत्र

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 देशों से होने वाले निर्यात पर टैरिफ लगाने से जुड़े पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिन्हें सोमवार को भेजे जाने की उम्मीद है। मीडिया से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जिन देशों को पत्र भेजे जाएंगे, उनके नाम सोमवार को ही बताए जाएंगे। उन्होंने कहा, "मैंने कुछ लेटर्स पर हस्ताक्षर किए हैं। वह सोमवार को भेजे जाएंगे, संभवतः 12 पत्र। अलग-अलग रकम, अलग-अलग टैरिफ। पत्र भेजना बेहतर होता है। एक पत्र भेजना कहीं आसान है।” ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि 'रेसिप्रोकल टैरिफ' कुछ देशों पर 70 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसे 1 अगस्त से अमल में लाया जाने की उम्मीद है। अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति ने देश में आने वाले अधिकांश सामानों पर 10 प्रतिशत का बेस टैरिफ घोषित किया था। इसके साथ ही कुछ देशों, जैसे चीन के लिए इससे भी ज्यादा दरें तय की गई थीं। हालांकि, इन बढ़े हुए टैरिफ को बाद में 9 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वाशिंगटन ने दो देशों (यूनाइटेड किंगडम और वियतनाम) के साथ 'ट्रेड एग्रीमेंट' किए हैं। इस बीच, भारत का हाई-लेवल ऑफिशियल डेलिगेशन, वाशिंगटन से बिना किसी अंतिम समझौते के लौट आया है। इसकी अगुवाई मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल कर रहे थे। यह समझौता अमेरिका की ओर से दबाव डाले जा रहे संवेदनशील मुद्दे एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स के व्यापार को लेकर होना था। हालांकि, अभी भी उम्मीद की एक किरण है। आशा है कि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले दोनों देशों में उच्चतम राजनीतिक स्तर पर एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता हो सकता है। भारतीय दल 26 जून से 2 जुलाई तक अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए वाशिंगटन में था। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत किसी डेडलाइन के दबाव में 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाजी नहीं करेगा। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत राष्ट्रीय हित में ट्रेड डील करने के लिए तैयार है, लेकिन वह "कभी भी डेडलाइन के साथ ट्रेड डील्स पर बातचीत नहीं करता है।" अमेरिका अपने एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए व्यापक बाजार की मांग कर रहा है, जो एक बड़ी चुनौती है। भारत के लिए, यह देश के छोटे किसानों की आजीविका का मुद्दा है, इसलिए इसे एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। भारत 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम समझौता करके राष्ट्रपति ट्रंप के 26 प्रतिशत टैरिफ से छूट पाने की कोशिश कर रहा है। वह टेक्सटाइल, लेदर और जूते जैसे अपने लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण टैरिफ कन्सेशन पर भी जोर दे रहा है।

भारत के खिलाफ फिर बोले पाक पीएम, पहलगाम हमले पर दिया आपत्तिजनक बयान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  शहबाज शरीफ ने एक बार फिर  कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर भारत पर झूठे और बेबुनियाद आरोप  लगाए हैं।  पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसे पाक समर्थित आतंकी संगठन TRF  ने अंजाम दिया था, को उन्होंने "दुर्भाग्यपूर्ण" कहकर  भारत की जवाबी कार्रवाई को ही दोषी ठहराने की कोशिश की है। अज़रबैजान में आयोजित  Economic Cooperation Organization (ECO) शिखर सम्मेलन में शरीफ ने कहा कि "भारत ने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को बहाना बनाकर पाकिस्तान के खिलाफ उकसावे वाली कार्रवाई की"। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत की कार्रवाई "क्षेत्रीय शांति को अस्थिर करने वाली" थी। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 25 पर्यटकों सहित 26 लोग मारे गए थे। इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन  लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह TRF (The Resistance Front)  ने ली थी। हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के अंदर छिपे 9 आतंकी ठिकानों  को सटीक हमलों से तबाह कर दिया था। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने ड्रोन हमलों का सहारा लिया, लेकिन भारत ने उन्हें भी मुंहतोड़ जवाब दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंततः  10 मई को पाकिस्तान को खुद ही युद्धविराम की अपील करनी पड़ी ।   शहबाज शरीफ ने भारत पर झूठे आरोप लगाने के साथ-साथ गाजा और ईरान में हुए हमलों  का हवाला देक इज़राइल पर भी परोक्ष हमला बोला जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान खुद दुनिया में आतंक का पनाहगाह बन चुका है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान उन सभी के खिलाफ खड़ा है जो निर्दोष लोगों पर बर्बरता करते हैं चाहे वो गाजा हो, कश्मीर या ईरान।”यह बात खुद में विडंबना है, क्योंकि पाकिस्तान के संरक्षण में पनप रहे आतंकी संगठनों ने ही कश्मीर में बार-बार निर्दोषों की जान ली है।भारत ने बार-बार कहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति पर कायम है। चाहे आतंक पाकिस्तान की जमीन से पनपे या कहीं और से  भारत हर साजिश का जवाब निर्णायक रूप से देगा।