samacharsecretary.com

CJI का गुस्सा उफन पड़ा, जमानत रोके जाने पर बोले—व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने सीबीआई से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा एक आरोपी की जमानत याचिका पर 43 बार रोक लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा का वक्त हिरासत में बिता चुका है, इसलिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में इस तरह बार-बार जमानत स्थगन स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने अभियुक्त रामनाथ मिश्रा को जमानत देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में अदालतों को अत्यंत शीघ्रता से विचार करना चाहिए। सीजेआई ने मामले में कहा, “हमने बार-बार यह टिप्पणी की है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों पर अदालतों द्वारा अत्यंत शीघ्रता से विचार किया जाना चाहिए… व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में, हाई कोर्ट्स से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वे मामले को इतने लंबे समय तक लंबित रखें और समय-समय पर सुनवाई स्थगित करने के अलावा कुछ न करें।” ऐसी प्रवृति हम पसंद नहीं करते: SC पीठ ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “मौजूदा मामले में 43 बार जमानत स्थगित किया जा चुका है। हम उच्च न्यायालय द्वारा किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामले को इतनी बड़ी संख्या में जमानत स्थगित करने की प्रवृत्ति को पसंद नहीं करते। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर तुरंत शीघ्रता से गौर किया जाना चाहिए।” CBI ने फिर किया जमानत का विरोध, SC ने नहीं मानी दलील सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि हाई कोर्ट में जमानत याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान शीर्ष अदालत द्वारा अगर जमानत दी गई तो इससे एक गलत मिसाल कायम होगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने CBI की इस दलील पर ध्यान नहीं दिया और कहा कि अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा समय हिरासत में बिता चुके हैं और उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 43 बार स्थगित हो चुकी है। ऐसे में जमानत नहीं देना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा। इसी मामले में पहले भी HC को फटकार लगा चुका है SC दिलचस्प बात यह है कि शीर्ष अदालत ने इसी मामले में एक सह-अभियुक्त को 22 मई, 2025 को ज़मानत दे दी थी, जब उसे पता चला था कि उच्च न्यायालय ने उसकी ज़मानत याचिका पर 27 बार सुनवाई स्थगित कर चुका है। शीर्ष अदालत ने कहा, "याचिकाकर्ता को निचली अदालत की संतुष्टि के लिए ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।"  

‘भारत के दम को दुनिया समझती है’, बाबा रामदेव ने राष्ट्रवाद और टैरिफ पर दिया संदेश

'ट्रंप राजनीतिक गुंडागर्दी करते हैं', बाबा रामदेव ने समझाया टैरिफ से मुकाबले का देसी मंत्र भारत के दम को दुनिया समझती है, राष्ट्रवाद के लिए उत्साह की जरूरत- बाबा रामदेव  नई दिल्ली स्वामी रामदेव ने अमेरिकी टैरिफ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अमेरिकी टैरिफ से मुकाबले का देसी मंत्र समझाया है. उन्होंने बातचीत करते हुए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राजनीतिक रूप से गुंडागर्दी कर रहे हैं. उन्हें ये पता होना चाहिए कि हम सब मिलकर ट्रंप की सबक सीखा सकते हैं.  जब बाबा रामदेव से पूछा कि क्या टैरिफ का बिल्कुल असर नहीं होगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'देखिए, अब भारत को खुलकर सामने आना होगा. हम अन्य देशों को साथ मिलकर अमेरिका का सबक सीखा देंगे, PM मोदी जी ने इस की तैयार कर ली है. उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब चीन की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन चीन ने लगातार काम से अपनी स्थिति बदल दी और पूरी दुनिया के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया.' 'विकासशील देशों को धमकाने है तरीका' एक सवाल के जवाब में बाबा रामदेव ने कहा कि देखिए, ट्रंप की ये नीति एक तरह से 'टैरिफ टेररिज्म' है. ये विकासशील देशों को धमकाने का एक तरीका है, लेकिन भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं है. चुनौती में होते हैं अवसर: बाबा रामदेव स्वदेशी के साथ धार्मिक चीजें जुड़ जाती है? उन्होंने कहा कि यहां किसी का विरोध नहीं है. यहां स्वदेशी नीति का मतलब है कि हमें अपने उत्पादों पर भरोसा करना चाहिए. हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहिए. गांधी जी ने भी स्वदेशी को बढ़ावा दिया था. हमें 'मेक इन इंडिया' को और मजबूत करना चाहिए. हमें अपनी अर्थनीति को दुरुस्त करना चाहिए. ट्रंप की नीतियां हमें और मजबूत करेंगी, क्योंकि इससे हमें अपनी ताकत को पहचानने का मौका मिलेगा. हर चुनौती में एक अवसर होता है. हमें इस अवसर को भुनाना चाहिए. हमें अपनी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पता नहीं क्या-क्या बोल रहे हैं कि हमारे प्रधानमंत्री उनके बयानों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं जो उनके बड़प्पन को दिखाता है. टैरिफ का प्रभाव बहुत कम टैरिफ पर बोलते हुए उन्‍होंने बताया कि भारत क्‍या करे तो इसका प्रभावि‍त कम हो सकता है. हालांकि उससे पहले उन्‍होंने कहा कि मुझे पूरी उम्‍मीद है कि टैरिफ का असर ज्‍यादा समय तक नहीं रहने वाला है. यह कुछ समय तक ही है, जिसके बहुत ज्‍यादा असर पड़ने वाला नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका रास्‍ता तलाश लेंगे. उन्‍होंने टैरिफ से निपटने के लिए कुछ मंत्र भी सुझाए.  भारत को क्‍या करना चाहिए?     स्‍वामी रामदेव ने कहा कि भारत को खुलकर आना होगा और टैरिफ की क्षतिपूर्ति, अमेरिका से व्‍यापार कम करके और दूसरे देशों से व्‍यापार को बढ़ाकर करनी चाहिए. यह भारत के लिए आपदा में अवसर की तरह है.      भारत में बहुत प्रतिभाएं हैं. भारत ऑटोमोबाइल से लेकर मैन्‍युफैक्‍चरिंग और टेक्‍नोलॉजी के मामले में ग्‍लोबल लीडर क्‍यों नहीं बन सकता है? हमे देसी प्रोडक्‍ट्स को प्रमोर्ट करना होगा और इसे अवसर के तौर पर देखना चाहिए.      पहले चीन में भी बहुत बूरी स्थिति आई थी. वहां कंगाली आ चुकी थी, लेकिन अपने आर्थिक नीतियों में बदलाव के कारण वह बहुत आगे निकल चुका है. हमारे देश में भी बड़ी क्षमताएं हैं. हम भी चीन की तरह आगे बढ़ सकते हैं.       स्‍वामी रामदेव ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ से डरने की बात नहीं है. समय के साथ सबकुछ ठीक हो जाएगा. अभी अपने सभी प्रोडक्‍ट्स को प्राथमिकता देने की जरूरत है. स्‍वदेशी का पूरा इस्‍तेमाल होना चाहिए.      उन्‍होंने कहा कि भारत सबसे बड़ा कंज्‍युमर है. ऐसे में हमे अपने शक्ति का इस्‍तेमाल करना चाहिए. हमारे अंदर बहुत सामर्थ्‍य है. रामदेव ने आगे कहा कि भारत को मजबूती से जमीन पर उतरकर काम करना होगा. हमारे पास वैश्‍वक अवसर है. हम बाकी देशों तक पहुंच बढ़ा सकते हैं. हमे पूरे दमखम के साथ काम करना होगा. 

हंगामा खत्म, सैयदा हमीद ने बदली अपनी राय, बांग्लादेशियों को वापस भेजने का फैसला टला

नई दिल्ली  बांग्लादेशियों के पक्ष में बयान देकर विवादों में घिरीं सामाजिक कार्यकर्ता और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद ने अब अपनी ही बात पर यू-टर्न ले लिया है और कहा है कि अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए। हमीदा की ताजा टिप्पणी भारी विरोध और सियासी विवादों के बाद आई है। उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में अपने बयान पर यू-टर्न लिया। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हमीद ने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी से हलचल मच गई थी। सैयदा हमीद ने कहा, "असम का मेरा अनुभव बेहद खूबसूरत है… 1997 से महिला आयोग और योजना आयोग का हिस्सा रहते हुए, मैं असम के हर हिस्से में गई हूँ। लेकिन मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि मैं एक मुसलमान और एक महिला हूँ… अचानक, मेरा नाम पूरे भारत में गूंजने लगा… बांग्लादेशी अब एक अपशब्द बन गया है। यह अब एक भयावह शब्द बन गया है।" उन्होंने आगे कहा, “अगर कुछ बांग्लादेशी भी आ गए हैं, तो उनके साथ बैठिए, उनसे बातचीत कीजिए और उन्हें वापस भेजिए।” सैयदा हमीद ने पहले क्या कहा था? इससे पहले सैयदा हमीद ने रविवार को कहा था, "बांग्लादेशी भी इंसान हैं; धरती बहुत बड़ी है, बंगलादेशी भी यहाँ रह सकते हैं… अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, शैतान के लिए नहीं। किसी इंसान को इतनी बेरहमी से क्यों निकाला जाए।" इसके साथ ही उन्होंने असम की हिमंता विस्वा सरमा सरकार पर बेदखली अभियानों के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अमानवीय कृत्य करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि असम सरकार मुसलमानों को बंगलादेशी बता रही है। असम में मच गया था सियासी भूचाल हमीद के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि हमीद अवैध घुसपैठियों का समर्थन कर रही हैं और उनके बयान को इसका सबूत बताया था। सरमा ने कहा था कि ऐसे लोग ही ‘‘असम को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के जिन्ना के सपने को साकार करने’’ की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि हमीद जैसे लोगों के मौन समर्थन के कारण असमिया लोगों की पहचान विलुप्त होने के कगार पर है। मुख्यमंत्री सरमा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता हमीद को गांधी परिवार का करीबी और विश्वासपात्र भी बताया था। हिंदू सेना का विरोध-प्रदर्शन विवाद मचने के बाद हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने सैयदा हमीद की हालिया टिप्पणी के खिलाफ मगलवार को प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि वह असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों का बचाव कर रही हैं। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के ‘कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब’ में हुआ, जहां हमीद ने नागरिक मंच असम नागरिक सम्मेलन द्वारा आयोजित ‘असम के विशेष संदर्भ में राष्ट्र की स्थिति’ विषय पर एक संगोष्ठी में शिरकत की थी। संगोष्ठी में हमीद ने असम में मुसलमानों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कथित तौर पर कहा था कि उन्हें अक्सर बांग्लादेशी करार दिया जाता है।

मणिमहेश यात्रा संकट में, हिमाचल में बारिश और सिग्नल कटने से परिजन परेशान

शिमला हिमाचल प्रदेश में बीते 72 घंटे में मौसम ने जमकर कहर ढाया है. हालांकि, गनीमत रही कि फ्लेश फ्लड और लैंडस्लाइड (Himachal Landslide) में कहीं किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन संपति का काफी नुकसान हुआ है. चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे एक बार फिर से 2023 में आई आपदा की तरह टूट गया है और कुल्लू से मनाली के बीच में जगह जगह ब्यास नदी हाईवे को बहा ले गई है. ऐसे में इसे बनाने में लंबा वक्त लग सकता है. हालांकि राहत की बात है कि प्रदेश में बुधवार को धूप खिली है और कुल्लू मनाली में भी बारिश थम गई है. अब ब्यास नदी का जलस्तर धीरे धीरे कम होने लगा है. जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में कुल्लू और मनाली में ब्यास नदी की वजह से रेस्टोरेंट, दुकान और कई पुल बह गए. कुल्लू के अखाड़ा बाजार के पास एक दुकान नदी में समा गई. वहीं, ओल्ड मनाली को जोड़ने वाला पुल टूट गया. लेफ्ट बैंक में ट्रक और जीप नदी में बह गई. बुधवार को कुल्लू के मनाली, बंजार और सदर में स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे. चंबा में हजारों लोग फंस चंबा के भरमौर में मणिमहेश यात्रा पर गए हजारों लोग वहां फसें हैं. यहां पर मोबाइल नेटवर्क उड़ गए हैं. हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (HP LSA), दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक टेलीकॉम ने सूचित किया है कि चंबा शहर और भरमौर उप मंडल , जिला चंबा में इंट्रा-सर्कल रोमिंग (ICR) सुविधा7 दिनों के लिए, अर्थात 01 सितम्बर 2025 तक के लिए सक्रिय कर दी गई है/ यह पहल प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है. इस क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ता अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर किसी भी उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क का मैन्युअल रूप से चयन कर सकते हैं, चाहे वह उनके मूल सेवा प्रदाता का नेटवर्क न हो. ICR सुविधा की अवधि के दौरान उपभोक्ता किसी भी ऐसे टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क से जुड़कर सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे जिसकी उस क्षेत्र में कवरेज उपलब्ध है. इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के कारण उत्पन्न व्यवधान के दौरान निर्बाध मोबाइल संचार सुनिश्चित करके सहायता प्रदान करना है. 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं. राज्य भर में सड़क और मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हो गई हैं. कुल्लू–मनाली मार्ग पूरी तरह कट गया है. चंडीगढ़–मनाली नेशनल हाईवे–21 मंडी में कई स्थानों पर अवरुद्ध है. मंडी–पठानकोट एनएच–154 भी बंद पड़ा है. एनएच–305 कुल्लू के बंजार क्षेत्र में और एनएच–03 किन्नौर के बिगुलसरी में बाधित है. जिला वार स्थिति देखें तो बिलासपुर में 13, हमीरपुर में 5, कांगड़ा में 67, किन्नौर में 1, कुल्लू में 131, मंडी में 342, शिमला में 45, सिरमौर में 36, सोलन में 19 और ऊना में 18 सड़कें बंद हैं. वहीं चंबा और लाहौल–स्पीति से नेटवर्क बाधित होने के कारण रिपोर्ट नहीं मिल पाई है. भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और प्रशासन लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है. मंगलवार शाम को आपदा प्रबंधन ने यह जानकारी सांझा की है.

पब्लिक में इंटिमेसी पर सख्त कानून: इंडोनेशिया में 76 कोड़े की सजा

बांदा आचे इंडोनेशिया के बांदा आचे प्रांत में दो मर्दों को सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे को चूमने के लिए कोड़े मारे गए। शरिया अदालत ने उन्हें इस्लामी कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया था। मंगलवार को बांदा आचे के बुस्तानुस्सलातिन शहर के एक पार्क में मंच पर लगभग 100 लोगों की भीड़ ने यह सजा देखी। समलैंगिक यौन संबंध बनाने वालों को यहां 100 कोड़े की सजा दी जाती है। आचे में जुआ खेलने, शराब पीने, तंग कपड़े पहनने वाली महिलाओं और शुक्रवार की नमाज में शामिल न होने वाले पुरुषों को भी कोड़े मारे जाते हैं। दोनों को 80-80 कोड़े की सजा अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों व्यक्तियों को 80-80 कोड़े की सजा सुनाई गई थी। इस्लामी धार्मिक पुलिस ने बताया कि उन्हें एक सार्वजनिक पार्क के शौचालय में गले मिलते और चूमते हुए पाया गया था। इस सार्वजनिक पिटाई में प्रत्येक व्यक्ति को एक छड़ी से 76 कोड़े मारे गए। दोनों की 80 कोड़ों की सजा को कम किया गया, क्योंकि वे चार महीने तक हिरासत में थे। यह सजा प्रांतीय राजधानी बांदा आचे के एक पार्क में दी गई, जहां भीड़ ने बेंतों की सजा देखी। बताया जाता है कि ये दोनों 10 लोगों के उस समूह का हिस्सा थे, जिन्हें मंगलवार को बांदा आचे के एक पार्क में विभिन्न अपराधों के लिए कोड़े मारे गए। दोनों को भीड़ के सामने अलग-अलग छड़ी से पीटा गया। बांदा आचे शरिया पुलिस के कानून प्रवर्तन प्रमुख रोसलीना ए जलील ने बताया कि अप्रैल में स्थानीय शरिया पुलिस ने दोनों को उसी पार्क के सार्वजनिक शौचालय में एक साथ पाया था। रोसलीना ने कहा कि एक आम नागरिक ने संदिग्ध गतिविधि देखी और इसकी सूचना पुलिस को दी थी। अन्य लोगों को भी सजा इन दोनों के अलावा  तीन महिलाओं और पांच पुरुषों को विवाहेतर यौन संबंध, विपरीत लिंग के लोगों के साथ निकटता और ऑनलाइन जुआ खेलने के लिए दोषी ठहराकर कोड़े मारे गए। गौरतलब है कि शराब पीने जैसे अपराधों के लिए बेंत मारने की सजा को आचे में जनता का मजबूत समर्थन प्राप्त है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की निंदा दूसरी ओर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस सजा की निंदा की। एमनेस्टी के क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक मोंटसे फेरर ने कहा कि समान लिंगीय आचरण को अपराध घोषित करना न्यायपूर्ण और मानवीय समाज में स्वीकार्य नहीं है। गौरतलब है कि 2001 में विशेष स्वायत्तता मिलने के बाद इस क्षेत्र ने धार्मिक कानून लागू करना शुरू किया। जकार्ता ने लंबे समय से चले आ रहे अलगाववादी विद्रोह को दबाने की कोशिश की थी।

पीएम मोदी पर ट्रंप की तारीफ, चीन यात्रा से पहले बोले- शानदार इंसान हैं मोदी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान शांति स्थापित करने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि उनके दखल से ही दोनों देश युद्ध के कगार से पीछे हटने को मजबूर हुए. समाचार एजेंसी एएनआई की तरफ जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ के साथ बैठे दिख रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें फोन कर साफ शब्दों में कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका भारत पर ट्रेड बैन और भारी टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने क्या किया दावा? डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, ‘मैं एक बेहद शानदार व्यक्ति से बात रहा था… भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. मैंने पूछा कि आपका पाकिस्तान के साथ क्या चल रहा है? नफरत बहुत ज्यादा थी, यह बहुत लंबे समय से चल रहा रहा. सैकड़ों साल से अलग-अलग नामों के साथ यह जारी है.’ ट्रंप के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे कहा मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा. आप लोग परमाणु युद्ध में उलझ जाओगे. मैंने कहा, कल मुझे फिर फ़ोन करना. लेकिन मैं आपके साथ कोई डील नहीं करूंगा या इतना ज्यादा टैरिफ लगाऊंगा कि आपका सिर चकरा जाएगा.’ अमेरिका राष्ट्रपति के अनुसार, उनकी बातचीत के ‘पांच घंटे के भीतर’ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम हुआ और युद्ध जैसी स्थिति टल गई. इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि उस दौरान ‘सात विमान गिराए गए थे’. हालांकि पिछले महीने उन्होंने ‘पांच विमान’ गिराए जाने की बात कही थी. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि विमान किस देश के थे. ट्रंप के दावों पर क्या कह रहा भारत? भारत लगातार ट्रंप के इन दावों को खारिज करता आया है. नई दिल्ली का कहना है कि 10 मई को हुई संघर्षविराम घोषणा पूरी तरह द्विपक्षीय थी और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारत से संपर्क कर हालात सामान्य करने का आग्रह किया था. भारत ने साफ किया कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर नई टैरिफ पाबंदियां लागू की हैं. 27 अगस्त से लागू इन टैरिफ के बाद भारतीय उत्पादों पर कुल कर बोझ लगभग 50% तक पहुंच जाएगा. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप का मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ कहना एक तरह से व्यापारिक दबाव को संतुलित करने की रणनीति है. पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले बयान के क्या मायने? दिलचस्प यह है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अहम चीन दौरे की तैयारी में हैं. कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि ट्रंप के बयान के पीछे कई संदेश छिपे हैं. ट्रंप जानते हैं कि चीन यात्रा से पहले पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करना एशिया में शक्ति समीकरणों के लिहाज से अहम हो सकता है. डोनाल्ड ट्रंप का ‘मोदी शानदार व्यक्ति हैं’ वाला बयान महज व्यक्तिगत तारीफ नहीं, बल्कि इसमें भू-राजनीति, व्यापारिक दबाव और घरेलू अमेरिकी राजनीति तीनों की झलक मिलती है. अब देखना यह होगा कि पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले आए इस बयान के बाद आगे क्या होता है.

जम्मू-कटरा रूट पर बड़ा हादसा, भूस्खलन में 31 की जान गई, 22 ट्रेनें रद्द

कटरा जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से हालात बिगड़े हैं. कटरा स्थित माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बुधवार को हुए बड़े भूस्खलन में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और 23 लोग घायल हुए हैं. कई जगहों पर भूस्खलन के बाद मलबा जमा होने और पत्थर गिरने से जम्मू-कटरा राजमार्ग बंद हो गया है. भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. इनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. बीते दिन त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित मंदिर के मार्ग का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया था. बचाव अभियान जारी है और आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग फंसे हो सकते हैं. लगातार बारिश ने जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी है. जम्मू में पुल ढह गए, बिजली लाइनों और मोबाइल टावरों को भारी नुकसान पहुंचा. मंगलवार को सुबह 11.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच जम्मू में 6 घंटे में 22 सेंटीमीटर बारिश हुई. हालांकि आधी रात के बाद बारिश में कमी आई, जिससे जिले को थोड़ी राहत मिली. इस बीच, मंगलवार तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ और जलभराव से 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. राहत कार्य जिला प्रशासन, जेके पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय वॉलंटियर्स की संयुक्त टीमों द्वारा चलाया जा रहा है. प्रभावित लोगों को अस्थायी शेल्टर्स में खाना, साफ पानी और मेडिकल सहायता दी जा रही है. वैष्णो देवी धाम के रास्ते पर भूस्खलन की घटना में जान गंवाने वालों में 9 लोगों की पहचान नहीं हो पाई है हालांकि, केंद्रशासित प्रदेश के कई हिस्सों में टेलीकॉम ब्लैकआउट हो गया है, जिससे लाखों लोग संपर्क से बाहर हैं. प्रशासन का ध्यान हाई-रिस्क इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पर है. जम्मू और आसपास के इलाकों में आंधी-तूफान और बारिश वर्तमान में जम्मू और आसपास के इलाकों में तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश हो रही है. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं – जम्मू शहर, आरएसपुरा, सांबा, अखनूर, नगरोता, कोट भलवाल, बिश्नाह, विजयपुर, पुरमंडल, कठुआ और ऊधमपुर. वहीं रियासी, रामबन, डोडा, बिलावर, कटरा, रामनगर, हीरानगर, गूल और बनिहाल में हल्की बारिश हो रही है. जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादल 12 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच रहे हैं, जो बेहद सक्रिय तूफानों का संकेत है. सिस्टम ईस्ट-नॉर्थईस्ट की ओर बढ़ रहा है और पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश जारी रह सकती है. 22 ट्रेनें रद्द और 27 ट्रेनों को किया गया शॉर्ट-टर्मिनेट भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. कटरा, जम्मू और ऊधमपुर से चलने वाली कई सर्विस प्रभावित हुई हैं, जिनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. चक्की नदी में बाढ़ आने से पठानकोट–कंदरोरी (हिमाचल प्रदेश) के बीच रेल यातायात भी रोका गया है. हालांकि, कटरा–श्रीनगर मार्ग प्रभावित नहीं है.

ट्रम्प के भारी टैरिफ का भारत पर असर, भारत के उद्योगों पर दबाव; पीएम मोदी ने लिया रणनीतिक फैसला

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। यह वही टैरिफ है जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कर चुके हैं।अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर इसकी रूपरेखा पेश की। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की कोशिशें ठप पड़ती नजर आ रही हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि यह बढ़ा हुआ टैरिफ भारत के उन उत्पादों पर लागू होगा, जो 27 अगस्त, 2025 को सुबह 12:01 बजे (पूर्वी डेलाइट समय) के बाद खपत के लिए आयात किए जाएंगे या गोदाम से निकाले जाएंगे।ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया जा रहा है। अमेरिका की यह समयसीमा 27 अगस्त को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने चल दी गजब की चाल,  ट्रंप के टैरिफ की नहीं गलेगी दाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। भारत पर पहले से ही 25% टैरिफ लगाया गया है और 27 अगस्त से अतिरिक्त टैरिफ लागू हो जाएगा। इस तरह भारत से आने वाले सामान पर कुल 50% टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दूसरे देशों से प्रतिस्पर्द्धा करना मुश्किल होगा। लेकिन ट्रंप के टैरिफ के असर को कम से कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमर कस ली है। मोदी ने 15 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। जीएसटी में अभी चार स्लैब हैं जिनमें से दो स्लैब खत्म करने का प्लान है। इससे खासकर खाने-पीने की चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी और ग्राहकों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से कई सरकारी अधिकारी भी हैरान थे। पिछले एक साल से सरकारी अफसर जीएसटी में बदलाव करने की बात कर रहे थे। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ था। पुतिन पर दवाब बनाने के लिए ट्रंप का प्लान अमेरिका का मकसद इस टैरिफ के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना है, ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ चल रही जंग को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर आएं। अमेरिका रूस के तेल व्यापार को रोकने की कोशिश में है और भारत पर यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन भारत ने इन तथाकथित सेकेंडरी टैरिफ को अन्यायपूर्ण ठहराया है और अपने हितों की मजबूती से हिफाजत करने का ऐलान किया है। भारतीय सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत के ऊर्जा विकल्पों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों जैसे बड़े आयातकों पर ऐसी कोई आलोचना नहीं की गई। जयशंकर ने इसे "तेल विवाद" के रूप में गलत तरीके से पेश करने की बात कही और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। मांग बढ़ाने की जुगत ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में बातचीत चल रही थी पर घोषणा करने में कुछ महीने और लगते। लेकिन अमेरिकी टैरिफ के कारण मोदी सरकार जीएसटी में बदलाव जैसी नीतियों को जल्दी से लागू कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और ग्रोथ में तेजी आएगी। कई साल से ट्रेडर्स और अर्थशास्त्री कह रहे थे कि कुछ सुधारों की वजह से निवेश रुका हुआ है। मोदी ने नीतियों में बदलाव करने के लिए दो बड़ी कमेटियां बनाई हैं। एक कमेटी की अगुवाई कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं। यह कमेटी राज्यों में नियमों को आसान बनाने पर ध्यान देगी। दूसरी कमेटी के प्रमुख राजीव गाबा हैं जो नीति आयोग के सदस्य हैं। यह कमेटी अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए सुझाव देगी। हाल ही में मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक की। इसमें अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुझाव लिए गए। बैठक में कई अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मार्च 2026 तक 6.5% विकास दर हासिल की जा सकती है। कम महंगाई और ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव जरूरी हैं। अमेरिका को एक्सपोर्ट भारत की इकॉनमी अभी स्थिर है। इसलिए, सरकार के पास मुश्किल सुधार करने का मौका है। महंगाई 8 साल के सबसे निचले स्तर पर है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 साल में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई है। मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी आंकड़े अच्छे हैं। इससे सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, ताकि हम विकास की अगली सीढ़ी पर चढ़ सकें। नोमुरा होल्डिंग्स लिमिटेड की सोनल वर्मा ने कई सुधारों की बात की। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना, श्रम और भूमि कानूनों में ढील देना जरूरी है। सरकार निर्यातकों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है। इससे उन्हें टैक्स से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। कपड़ा, गहने और जूते जैसे उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। भारत की इकॉनमी ज्यादातर घरेलू मांग पर चलती है, न कि निर्यात पर। इसलिए लोगों और व्यापारियों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है, ताकि विकास तेजी से हो। निजी खपत भारत की जीडीपी का लगभग 60% है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। साल 2024 में भारत से अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान भेजा गया था जो भारत की कुल जीडीपी का सिर्फ 2% है। कितनी बढ़ेगी इकॉनमी सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी में कटौती से लोग ज्यादा खर्च करेंगे। खासकर खाने-पीने और कपड़ों जैसी जरूरी चीजों पर ज्यादा खर्च होगा। अभी इन चीजों पर 12% टैक्स लगता है। माना जा रहा है कि अधिकांश चीजों को 5% वाले स्लैब में लाया जाएगा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक … Read more

सेना अधिकारी पर कार्रवाई, स्पाइसजेट कर्मचारियों पर हमले के बाद नो-फ्लाई लिस्ट में डाला गया

नई दिल्ली श्रीनगर हवाई अड्डे पर 26 जुलाई को स्पाइसजेट कर्मचारियों पर हमला करने के आरोपी एक वरिष्ठ भारतीय सेना अधिकारी को एयरलाइन ने पांच साल के लिए अपनी 'नो-फ्लाई' सूची में डाल दिया है। इस घटना से जुड़े दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया, "एयरलाइन कर्मचारियों पर हमला करने वाले यात्री को अशांत घोषित किया गया है और उसे स्पाइसजेट की नो-फ्लाई सूची में शामिल करने का फैसला लिया गया है। वह अगले पांच साल तक स्पाइसजेट की किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ान में यात्रा नहीं कर पाएंगे।" दूसरे अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय नागरिक उड्डयन नियमों (सीएआर) के तहत गठित समिति ने लिया, जिसने यात्री पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। कश्मीर में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के इस अधिकारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। स्पाइसजेट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में इस घटना को "हत्यारा हमला" करार दिया था। क्या है पूरा मामला? यह घटना 26 जुलाई को श्रीनगर से दिल्ली जाने वाली स्पाइसजेट की उड़ान एसजी 386 के बोर्डिंग गेट पर हुई। विवाद तब शुरू हुआ जब बोर्डिंग के दौरान अतिरिक्त सामान शुल्क के भुगतान को लेकर असहमति हुई। एयरलाइन के अनुसार, अधिकारी के पास दो केबिन बैग थे, जिनका कुल वजन 16 किलोग्राम था, जो कि अनुमति सीमा 7 किलोग्राम से दोगुना था। एयरलाइन ने बताया कि यात्री ने नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया और बिना बोर्डिंग प्रक्रिया पूरी किए जबरन एयरोब्रिज में प्रवेश कर गया, जो कि विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। इसके बाद, एक सीआईएसएफ अधिकारी ने उसे वापस गेट पर लाया। एयरलाइन के बयान के अनुसार, "गेट पर, यात्री तेजी से आक्रामक हो गया और उसने स्पाइसजेट के चार ग्राउंड स्टाफ सदस्यों पर शारीरिक हमला किया।" इस हमले में कर्मचारियों को रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और जबड़े की चोटें आईं। 3 अगस्त को इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें अधिकारी को कतार स्टैंड से कर्मचारियों पर हमला करते देखा गया। नागरिक उड्डयन नियम विमानन नियमों के अनुसार, अशांत व्यवहार करने वाले यात्रियों पर तीन महीने, छह महीने या गंभीर मामलों में न्यूनतम दो साल या उससे अधिक समय के लिए नो-फ्लाई प्रतिबंध लगाया जा सकता है। नियमों के तहत, प्रभावित यात्री 60 दिनों के भीतर एक अपीलीय समिति के समक्ष अपील कर सकते हैं, जिसमें एक सेवानिवृत्त जिला या सत्र न्यायाधीश, दूसरी एयरलाइन का प्रतिनिधि और एक यात्री या उपभोक्ता वकालत समूह का सदस्य शामिल होता है। समिति को 30 दिनों के भीतर मामले का फैसला करना होता है, और उसका निर्णय एयरलाइन पर बाध्यकारी होता है। नो-फ्लाई सूची के आंकड़े 5 अगस्त को राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारत ने 379 यात्रियों को नो-फ्लाई सूची में डाला है, जिसमें इस साल 30 जुलाई तक 48 लोग शामिल किए गए। 2020 में केवल 10 लोग इस सूची में थे, जबकि 2021 में 66, 2022 में 63, और 2023 में 110 लोग इस सूची में शामिल किए गए, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। 2024 में यह संख्या घटकर 82 रही। स्पाइसजेट की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।  

बाढ़ से पहले भारत ने किया शानदार बचाव, पाकिस्तान में अलर्ट जारी

लाहौर  भारत ने एक बार फिर मानवीयता का परिचय देते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को बाढ़ के खतरे से आगाह किया, जिसके बाद पाकिस्तानी प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह कदम जम्मू-कश्मीर में तवी नदी में संभावित बाढ़ की चेतावनी के बाद उठाया गया, जिसका असर सीमा पार पाकिस्तान में भी हो सकता है। भारत की इस पहल को दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद मानवीयता का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। भारत ने दी समय पर चेतावनी भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान को सूचित किया कि जम्मू में तवी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह चेतावनी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहली आधिकारिक बातचीत के रूप में सामने आई है। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद, भारत ने मानवीय आधार पर यह कदम उठाया। बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को यह अलर्ट केवल मानवीय आधार पर दिया है और इसका सिंधु जल संधि से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारत की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने तत्काल प्रभाव से बाढ़ का अलर्ट जारी किया। पाकिस्तान का पंजाब प्रांत पहले से ही मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित है। वहां राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। पंजाब आपातकालीन बचाव सेवा 1122 के प्रवक्ता फारूक अहमद ने बताया कि कसूर, ओकारा, पाकपट्टन, बहावलनगर और वेहारी जैसे जिलों में सिंधु, चिनाब, रावी, सतलुज और झेलम नदियों के किनारे बसे गांवों से पिछले 24 घंटों में करीब 20,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा जारी बाढ़ की चेतावनी के मद्देनजर ये कदम उठाए गए हैं। पाकिस्तानी प्रशासन ने निचले इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए हैं और बचाव अभियान के लिए मशीनरी के साथ टीमें तैनात की हैं। एनडीएमए ने अगले 48 घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिसके चलते इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और गुजरांवाला जैसे शहरों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित निकाला पाकिस्तान में इस साल जून से शुरू हुए मॉनसूनी मौसम ने भारी तबाही मचाई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, हाल के दिनों में बाढ़ और भारी बारिश के कारण लगभग 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 190 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमों ने 512 अभियानों में 25,644 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि, कुछ अनुमानों के अनुसार, अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। बच्चों की स्थिति भी चिंताजनक है, क्योंकि विस्थापन, शिक्षा में बाधा और स्वच्छ जल की कमी उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। यूनिसेफ के अनुसार, 15 अगस्त के बाद खैबर पख्तूनख्वा में 21 बच्चे मारे गए हैं।