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रथ यात्रा आज अपने अंतिम पड़ाव पर, पुरी में उमड़ी भीड़, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

पुरी  ओडिशा के पुरी में शनिवार को भगवान जगन्नाथ की ‘बहुदा यात्रा' के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इस यात्रा के साथ ही ‘रथ यात्रा उत्सव' का समापन हो जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस के कुल 6,000 अधिकारी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 800 जवान शहर में तैनात किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने बताया कि 29 जून को उत्सव के दौरान गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई थी। यात्रा के संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि मौसम अनुकूल होने के कारण ‘बहुदा यात्रा' में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद के साथ विशेष यातायात व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि भीड़ पर नजर रखने के लिए 275 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस महानिदेशक वाईबी खुरानिया के नेतृत्व में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पुरी में ‘बहुदा यात्रा' को सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए डेरा डाले हुए हैं। यात्रा के दौरान भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ अपने जन्मस्थान गुंडिचा मंदिर में एक सप्ताह बिताने के बाद अपने रथों पर सवार होकर 12वीं शताब्दी के मंदिर में लौटेंगे। खुरानिया ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “हमने उत्सव को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी संभव उपाय किए हैं।” श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, देवों की ‘पहांडी' या यात्रा शनिवार को दोपहर 12 बजे निकाली जाएगी। पुरी के ‘राजा' गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब अपराह्न ढाई बजे से साढ़े तीन बजे के बीच रथों की औपचारिक सफाई करेंगे, जिसे ‘छेरा पहनरा' के नाम से जाना जाता है। रथ खींचने की रस्म शाम चार बजे होगी।

आणंद में यूनिवर्सिटी शिलान्यास के मौके पर अमित शाह का तंज, कहा- कांग्रेस भूल गई देश के बाकी नेताओं को

अहमदाबाद  गुजरात के आणंद में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने ही नेता त्रिभुवनदास किशीभाई पटेल को भुला दिया, जिन्होंने अमूल की नींव रखी और देश में सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा दी। शाह ने साफ किया कि लोकसभा में पेश किए गए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 में इस यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवनदास पटेल के सम्मान में रखा गया है, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने कहा, “विपक्ष को शायद यह भी नहीं पता कि त्रिभुवनदास उनकी ही पार्टी से थे। लेकिन वे नेहरू-गांधी परिवार से नहीं थे, इसलिए कांग्रेस ने उन्हें भुला दिया।” अमूल और सहकारिता आंदोलन में त्रिभुवनदास का योगदान अमित शाह ने बताया कि त्रिभुवनदास पटेल ने सरदार पटेल के मार्गदर्शन में अमूल की स्थापना की और वर्गीज कुरियन को डेयरी साइंस पढ़ने के लिए विदेश भेजा। इसका नतीजा यह हुआ कि आज भारत विश्व में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है। शाह ने कुरियन के योगदान को भी सराहा, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि उस पूरी सोच की शुरुआत त्रिभुवनदास पटेल के विजन से हुई थी। शाह ने यह भी बताया कि जब त्रिभुवनदास अमूल से सेवानिवृत्त हुए, तो उन्होंने अपनी सेवामुक्ति पर मिले 6 लाख रुपये फाउंडेशन को दान में दे दिए, जो उनके समर्पण का प्रतीक है। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य और महत्व अमित शाह ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देगी। इसमें प्रबंधन, वित्त, कानून और ग्रामीण विकास से जुड़े कोर्स होंगे। यह यूनिवर्सिटी 200 से ज्यादा सहकारी संस्थाओं से जुड़कर पीएचडी, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कराएगी। साथ ही, यह 40 लाख सहकारी कर्मियों को प्रशिक्षित कर भाई-भतीजावाद को खत्म करने में मदद करेगी।   मोदी सरकार की पहल और सहकारिता की मजबूती शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद अब तक 60 नई पहलें शुरू की गई हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए हैं। पीएम मोदी ने 2 लाख नए पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां) बनाने की घोषणा की है, जिससे 17 लाख लोग जुड़ेंगे। CBSE ने भी 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में सहकारिता को शामिल किया है, जिससे युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र से जोड़ा जा सके।   अमूल: सहकारिता का मॉडल शाह ने कहा कि अमूल आज 80,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ देश का सबसे मूल्यवान ब्रांड है, जो 36 लाख ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वर्गीज कुरियन के जन्म शताब्दी वर्ष को अमूल और गुजरात सरकार ने मनाया, लेकिन कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक मौके को भी नजरअंदाज कर दिया। अंत में शाह ने कहा, “त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी न सिर्फ एक शैक्षिक संस्थान है, बल्कि यह सहकारिता के जननायकों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जो ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।”  

अवलोकितेश्वर का आशीर्वाद मिला, लंबी उम्र का दावा: दलाई लामा का बड़ा बयान

धर्मशाला  दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा को लेकर जारी अफवाहों पर एक प्रकार से विराम लगा दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह लोगों की सेवा के लिए 30-40 साल और जीवित रहेंगे। मैकलोडगंज में मुख्य दलाई लामा मंदिर त्सुगलागखांग में रविवार को जन्मदिवस कार्यक्रम आयोजित होगा। इससे पहले, दीर्घायु प्रार्थना समारोह में तेनजिन ग्यात्सो ने कहा कि उन्हें स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि अवलोकितेश्वर का आशीर्वाद उनके साथ है। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता ने कहा, ‘कई भविष्यवाणियों को देखते हुए मुझे लगता है कि मुझ पर अवलोकितेश्वर का आशीर्वाद है। मैंने अब तक अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। मुझे उम्मीद है कि मैं अभी 30-40 साल और जीवित रहूंगा। आपकी प्रार्थनाएं अब तक फलदायी रही हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि हमने अपना देश खो दिया है और हम भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। यहीं मैं जीवात्माओं को काफी लाभ पहुंचाने में सक्षम रहा हूं। वे यहां धर्मशाला में रह रहे हैं। मैं जितना संभव हो सके, जीवात्माओं को लाभ पहुंचाने और उनकी सेवा करने की इच्छा रखता हूं।’ भारत आस्था और धर्म के मामलों में पक्ष नहीं लेता: विदेश मंत्रालय दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़े मामलों में कोई पक्ष नहीं लेती है। मंत्रालय ने यह टिप्पणी दलाई लामा के इस बयान के दो दिन बाद की है जिसमें उन्होंने कहा था कि तिब्बती बौद्धों के एक ट्रस्ट को ही उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने भारत में सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता को हमेशा बरकरार रखा है और आगे भी ऐसा करती रहेगी। उन्होंने कहा, ‘हमने दलाई लामा संस्था की निरंतरता के बारे में माननीय दलाई लामा की ओर से दिए गए बयान से संबंधित रिपोर्ट देखी है। भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़े मामलों में कोई पक्ष नहीं लेती है और न ही बोलती है।’  

नए चैप्टर से सिलेबस में बदलाव: स्कूली किताबों में शामिल होंगे राज्यपाल के अधिकार और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स

तिरुवनंतपुरम केरल सामान्य शिक्षा विभाग द्वारा गठित एक पाठ्यक्रम समिति ने राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक में एक नया अध्याय जोड़ने को मंजूरी दे दी है, जिसमें राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में बताया गया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी की अध्यक्षता में समिति की बैठक में कक्षा दो, चार, छह, आठ और दसवीं की पाठ्यपुस्तकों में नई विषय-वस्तु को मंजूरी दी गई। बयान के मुताबिक इसके अलावा किताब में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स पर भी चर्चा की गई है। विस्तार से की गई है चर्चा भारत माता के चित्र के प्रदर्शन को लेकर केरल सरकार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बीच खींचतान जारी है। इन सबके बीच कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक में राज्यपाल की शक्तियों पर नया अध्याय शामिल करने को मंजूरी दी गई है। शुक्रवार को जारी बयान के अनुसार, कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के दूसरे खंड में ‘डेमोक्रेसी: इन इंडियन एक्सपीरियंस’ शीर्षक वाले अध्याय में राज्यपाल की शक्तियों और कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है। किताब में क्या-क्या खास बयान में कहा गया कि विशेष अध्याय में भारतीय लोकतंत्र में संकट, चुनावी बॉण्ड को समाप्त करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले और रिसॉर्ट राजनीति के बारे में भी बताया गया है। संशोधित पाठ्यपुस्तकें ओणम की छुट्टियों से पहले बच्चों तक पहुंच जाएंगी। राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने पिछले महीने घोषणा की थी कि स्कूली पाठ्यपुस्तकों में जल्द ही राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों और कर्तव्यों की व्याख्या करने वाली सामग्री शामिल की जाएगी।  

घर में बम बनाते समय जोरदार धमाका, एक की मौत, दूसरा अस्पताल में भर्ती

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में देशी बम में विस्फोट होने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह घटना शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे कटवा अनुमंडल के अंतर्गत राजोआ गांव में हुई। पुलिस ने बताया कि विस्फोट इतना भयानक था कि जिस घर में बम बनाया जा रहा था उसकी टीन की छत उड़ गई। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार यह विस्फोट खाली पड़े एक मकान में हुआ, जिसे असामाजिक तत्व अक्सर देशी बम बनाने के लिए इस्तेमाल करते थे। स्थानीय निवासी ने बताया, ‘दो तेज धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका हिल गया।' सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घर के अंदर से एक जला हुआ शव बरामद किया। विस्फोट में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की पहचान तूफान चौधरी के रूप में हुई है और उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब तक की जांच में क्या आया सामने प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एक स्थानीय असामाजिक तत्व ने कुछ लोगों को उस घर में देशी बम बनाने के लिए बुलाया था। उसी दौरान विस्फोट हो गया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम जांच कर रहे हैं कि क्या यह घर वाकई बम बनाने के अड्डे के रूप में इस्तेमाल हो रहा था और इसके पीछे और कौन लोग जुड़े हैं।’ शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर आएगी और जांच करेगी।  

मेडिकल शिक्षा घोटाला उजागर, CBI ने दर्ज की FIR, पूर्व UGC चीफ भी घेरे में

नई दिल्ली  सीबीआई ने एक बड़े मेडिकल एजुकेशन घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस घोटाले में स्वास्थ्य मंत्रालय के कई बड़े अधिकारियों, यूजीसी के पूर्व चेयरमैन, धर्मगुरु के अलावा कई नाम शामिल हैं। सीबीआई की एफआईआर में कुल 34 लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें से आठ स्वासथ्य मंत्रालय, एक नेशनल हेल्थ अथॉरिटी, पांच डॉक्टर और एक स्वयंभू संत शामिल हैं। कौन-कौन से हाई प्रोफाइल नाम सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक यूजीसी के पूर्व चेयरमैन डीपी सिंह का नाम भी भी इस घोटाले में शामिल है। फिलहाल वर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के चांसलर हैं। दूसरा नाम रावतपुरा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ऐंड रिसर्च के चेयरमैन और स्वयंभू संत रविशंकर महाराज का है। इन्हें रावतपुरा सरकार के नाम से भी जाना जाता है अब तक आठ गिरफ्तारियां इसके अलावा इंडेक्स मेडिकल कॉलेज इंदौर के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। गीताांजलि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मयूर सरकार का नाम भी इस स्कैम से जुड़ा है। सीबीआई ने अब तक इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन डॉक्टरों पर 55 लाख रुपये घूस लेकर मनमानी जांच रिपोर्ट लगाने का आरोप है। एफआईआर के मुताबिक रवि शंकर महाराज ने जांच को लेकर एडवांस जानकारी लेने की कोशिश की। इसके बाद रावतपुर इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी ने मयूर रावल से संपर्क किया। रावल ने जानकारी देने के लिए 25 से 30 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद उन्होंने इंस्पेक्शन की तारीक और अधिकारियों के नाम बता दिए। एजेंसियों का दावा है कि रविशंकर महाराज ने डीपी सिंह से भी अपने पसंद की रिपोर्ट बनवाने के लिए संपर्क किया था। वहीं डीपी सिंह ने यह काम सुरेश को सौंप दिया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में डीपी सिंह से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय से ही लीक हो गईं फाइल जानकारी के मुताबिक यह घोटाला स्वास्थ्य मंत्रालय से ही शुरू हुआ था। बताया गया कि आठ अधिकारियों ने दलालों को गुप्त फाइलों की भी जानकारी दे दी। लंबी चौड़ी रिश्वत लेने के बाद कॉलेज के प्रतिनिधिोयों को सीक्रेट इन्फॉर्मेशन दे दी गई। अधिकारियों ने फाइल की फोटो खींचकर बिचौलियों को भेजी थी। सीबीआई ने इन अधिकारियों की पहचान पूनम मीना, धर्मवीर, पियूष मल्यान, अनूप जैसवाल, राहुल श्रीवास्तव, दीपक, मनीषा और चंदन कुमार के तौर पर की है। इस तरह की जानकारी मिलने से कॉलेज जांच से पहले ही तैयार हो गए । कॉलेजों में फर्जी फैकल्टी, फर्जी मरीजों का इंतजाम किया गया। इसके अलावा बायोमीट्रिक सिस्टम में भी बदलाव कर दिया गया। इस मामले में आरोपी इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश सिंह भदौरिया पर आरोप हैकि वह डॉक्टरों की बायोमीट्रिक अटेंडेंस बनाने के लिए आर्टिफिशियल फिंगर का इस्तेमाल करते थे। सीबीआई का कहना है कि बड़ी मात्रा में रिश्वत हवाला के जरिए दी जाती थी। कभी इसे मंदिर बनवाने के लिए दान के रूप में दिखाया जाता था तो कभी चैरिटी के लिए। एनएमसी की मेडिकल असेसमेंट ऐंड रेटिंग बोर्ड के सदस्य जीतू लाल मीना वाराणसी के इंद्र बली मिश्रा के साथ संपर्क में थे। इंद्र बली को गुरुजी के तौर पर जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने वीरेंद्र कुमार के लिए काम किया जा को दक्षिण भारत के कई कॉलेजों के लिए दलाली का काम करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घोटाले की जड़ें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण के अन्य राज्यों में फैली हैं। अनंतपुर का हरि प्रसाद यही काम करता है। वह एनएमसी की जांच से पहले डमी फैकल्टी की व्यवस्था भी कर देता है। हरी प्रसाद और कृष्ण किशोर पर दक्षिण के दो कॉलेजों से घूस लेने का आरोप है।

‘मिशन से वापस नहीं लौटा अमेरिका का एक B-2 बॉम्बर लापता! वॉशिंगटन में सन्नाटा

वॉशिंगटन  अमेरिकी वायु सेना के ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए बमबारी अभियान ने एक आश्चर्यजनक मोड़ लिया है. दरअसल, अमेरिकी वायु सेना के ऑपरेशन में शामिल एक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर ऑपेशन के बाद अपने बेस पर वापस नहीं पहुंचा है. इसे लेकर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. 27 जून को यूरेशियन टाइम्स की छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 21 जून को मिसौरी स्थित व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से बी-2 बॉम्बर्स के दो अलग-अलग समूहों को रवाना किया था. बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स के एक समूह ने प्रशांत महासागर की ओर पश्चिम की दिशा में उड़ान भरी, जिसका मकसद ईरान के डिफेंस को चकमा देना था. वहीं बॉम्बर्स के दूसरे समूह में सात बी-2 स्पिरिट बॉम्बर शामिल थे. इन्होंने पूर्व दिशा में तेहरान के फोर्डो और नतांज स्थित अंडरग्राउंड परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए रवाना किया गया था. 37 घंटे के बाद मिशन पूरा कर लौटे थे बॉम्बर विमान ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने गई टीम 37 घंटे की बिना रुके की गई राउंड ट्रिप के बाद अपना मिशन पूरा कर बेस पर वापस सुरक्षित लैंड कर गई. वहीं प्रशांत महासागर की ओर से ईरानी डिफेंस को चकमा देने के लिए उड़ान भरने वाले बॉम्बर समूह के बारे में अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, बाद में इस बात का खुलासा हुआ कि अमेरिकी बी-2 बॉम्बर के समूह से लापता हुआ विमान हवाई में किसी कारण से इमरजेंसी लैंडिंग को मजबूर हो गया. उल्लेखनीय है कि यह स्टील्थ बॉम्बर डैनियल के. इनौये इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, यह एयरपोर्ट होनोलूलू में हिकम एयरफोर्स बेस के साथ रनवे शेयर करता हैं. जानिए क्या हुआ था उस दिन मिशन के तहत दो ग्रुप बनाए गए थे. दोनों ने उड़ान भरी मिसौरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से. एक ग्रुप पश्चिम की ओर गया, यानी प्रशांत महासागर की दिशा में. मकसद था – ईरान को गुमराह करना. दूसरा ग्रुप, जिसमें सात B-2 बॉम्बर थे, सीधे ईरान की ओर बढ़ा. उनका टारगेट था ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटी – फोर्डो और नतांज. साथ में फ्यूल टैंकर और फाइटर जेट्स भी थे. इन जेट्स ने अपनी-अपनी जगह से मिसाइलें दागीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन B-2 बॉम्बर्स ने कुल 14 GBU-57 बंकर बस्टर बम गिराए. सातों बॉम्बर 37 घंटे बाद सुरक्षित लौट आए. लेकिन इस बीच पश्चिम की ओर भेजे गए डिकॉय ग्रुप का एक B-2 बॉम्बर अब तक नहीं लौटा. लापता बॉम्बर को लेकर क्या पता चला है? खबर है कि यह बॉम्बर उड़ान के दौरान इमरजेंसी में फंस गया था. इसे हवाई के डेनियल K इनोए इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतारा गया. यही रनवे हिकम एयर फोर्स बेस के साथ साझा किया जाता है. इस बॉम्बर का कॉलसाइन था – ‘MYTEE’. लैंडिंग के बाद से यह वहीं खड़ा है. इसकी मरम्मत या वापसी को लेकर कोई अपडेट अब तक नहीं आया है. इस लैंडिंग का एक वीडियो भी वायरल है, जिसे पूर्व अमेरिकी एयरफोर्स पायलट डेविड मार्टिन ने शेयर किया है. हालांकि, अमेरिकी वायुसेना ने अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है. न कोई बयान, न कोई स्पष्टीकरण. पहले भी दिक्कत में रहे हैं B-2 बॉम्बर B-2 बॉम्बर टेक्नोलॉजी का चमत्कार माना जाता है. लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इन्हें तकनीकी संकट झेलना पड़ा हो. अप्रैल 2023 में भी एक B-2 को हवाई में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. 2022 में तो पूरे B-2 फ्लीट को ग्राउंड कर दिया गया था, जब एक बॉम्बर मिसौरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. 2008 में सबसे गंभीर हादसा हुआ था. ‘स्पिरिट ऑफ कंसास’ नाम का B-2 उड़ान भरते ही गुआम में क्रैश हो गया. हालांकि पायलट बच गए थे. B-2 बॉम्बर की खासियत क्या है? B-2 अमेरिका का सबसे महंगा और हाईटेक बॉम्बर है. एक यूनिट की कीमत है दो अरब डॉलर. इसका मुख्य रोल है – दुश्मन की परमाणु और अंडरग्राउंड फैसिलिटी को बर्बाद करना. अमेरिका के पास सिर्फ 19 B-2 बॉम्बर हैं. यानी, हर एक का नुकसान अमेरिका की ताकत में बड़ी सेंध है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या रही? ईरान ने दावा किया है कि उनके न्यूक्लियर साइट्स को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. वहीं अमेरिका कहता है कि यह हमला पूरी तरह सफल था और ईरान का परमाणु प्रोग्राम पीछे चला गया. लेकिन लापता बॉम्बर की गूंज अब वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक सुनाई दे रही है. क्या यह तकनीकी फेलियर था? क्या ईरान ने जवाबी हमला किया? या फिर अमेरिका कुछ छुपा रहा है?

बिहार में वोटर लिस्ट जांच: आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, लाखों वोटरों को लेकर जताई आशंका

नई दिल्ली एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। यह याचिका इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के एक फैसले के खिलाफ है। ECI बिहार में वोटर लिस्ट को फिर से जांचने का काम कर रही है। याचिका में कहा गया है कि ECI का यह आदेश ठीक नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इससे लाखों लोगों को वोट डालने से रोका जा सकता है, यानी उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है। LiveLaw ने एक्स पर पोस्ट किया है, 'सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई है, यह याचिका भारतीय चुनाव आयोग के एक फैसले के खिलाफ है, जिसमें बिहार में वोटर लिस्ट को दुबारा जांचने का आदेश दिया गया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स नाम की संस्था ने यह याचिका दायर की है। उनका कहना है कि ECI का यह आदेश मनमाना है। इससे लाखों लोगों को वोट डालने से रोका जा सकता है।' लगभग 1.5 करोड़ घरों तक पहुंचे बीएलओ इससे पहले चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने बिहार में लगभग 1.5 करोड़ घरों का दौरा किया है। यह दौरा शुक्रवार को पूरा हो गया। 24 जून, 2025 तक बिहार में 7,89,69,844 (लगभग 7.90 करोड़) मतदाता हैं। इनमें से 87 प्रतिशत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म यानी गणना प्रपत्र दिए जा चुके हैं। यह विशेष गहन पुनरीक्षण ( स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-SIR) के दौरान किया गया है। कुछ घर बंद थे, या उनमें रहने वाले लोग अब दुनिया में नहीं हैं। कुछ लोग दूसरे शहरों में चले गए थे, या कहीं घूमने गए थे। इसलिए उन घरों तक BLO नहीं पहुंच पाए। BLO इस काम के दौरान तीन बार घरों का दौरा करेंगे। इसलिए, यह संख्या और भी बढ़ सकती है। विशेष गहन पुनरीक्षण में पार्टियां कर रहीं मदद ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग पार्टियों के 1,54,977 बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी इस काम में मदद कर रहे हैं। 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी ने 52,689 BLA नियुक्त किए हैं। आरजेडी के 47,504, जेडीयू के 34,669 और कांग्रेस के 16,500 BLA हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के 1913, सीपीआई (एमएल)एल के 1271, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 1153, सीपीएम के 578 और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के 270 BLA भी हैं। बीएसपी के 74, एनपीपी के 3 और आम आदमी पार्टी का 1 BLA है। हर BLA एक दिन में 50 सर्टिफाइड फॉर्म जमा कर सकता है। फाइनल वोटर लिस्ट 30 सितंबर 2025 को वोटर लिस्ट की जांच 2 अगस्त 2025 से शुरू होगी। वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी होने के बाद 2 अगस्त 2025 से कोई भी पार्टी या आम नागरिक वोटर लिस्ट पर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। फाइनल वोटर लिस्ट 30 सितंबर 2025 को जारी की जाएगी। इसके बाद भी आप डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) और सीईओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) के पास अपील कर सकते हैं। वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना हुआ आसान चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए एक अच्छी खबर दी है। अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना और भी आसान हो गया है। आप ECI पोर्टल और ECINET App से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। ये फॉर्म पहले से ही थोड़े भरे हुए मिलेंगे। आप चाहें तो भरे हुए फॉर्म को ECINET App पर खुद ही अपलोड कर सकते हैं।

आर्म्स डीलर संजय भंडारी की बढ़ी मुश्किल, ED की याचिका पर दिल्ली की कोर्ट ने किया ‘भगोड़ा’ घोषित

नई दिल्‍ली दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शनिवार को ब्रिटेन में रह रहे और विवादों में घिरे हथियार डीलर संजय भंडारी (Sanjay Bhandari) को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' (Fugitive Economic Offender) घोषित कर दिया. यह कार्रवाई फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEO Act) के तहत की गई है, जो अघोषित विदेशी संपत्तियों से जुड़े आयकर मामले से संबंधित है. 100 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी सपत्तियां यह आदेश एडिशनल सेशंस जज संजीव अग्रवाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनाया. ED ने अदालत को बताया कि भंडारी ने भारतीय कानून से बचने की कोशिश की और ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी संपत्तियां बनाई हैं. ED का यह भी कहना है कि यूके अदालत द्वारा भंडारी के प्रत्यर्पण से इनकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि यह कार्यवाही भारतीय कानून के तहत स्वतंत्र रूप से की जा रही है. भंडारी ने किया प्रत्यर्पण से इंकार हालांकि, भंडारी ने ED की याचिका को चुनौती दी और कहा कि वह यूके में कानूनी रूप से रह रहा है. भंडारी के वकील सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि लंदन हाईकोर्ट ने उनके टीहार जेल में सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि ED की याचिका अस्पष्ट है, इसमें अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है और यह FEO कानून की वैधानिक शर्तों को पूरा नहीं करती. मनिंदर सिंह ने यह भी दावा किया कि आयकर विभाग ने 2020 में जो मूल्यांकन किया था, उसमें यह राशि ₹100 करोड़ से कम बताई गई थी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भंडारी के खिलाफ कोई नया गिरफ्तारी वारंट भी लंबित नहीं है. अदालत का फैसला और ED का पक्ष बावजूद इसके, अदालत ने ED के पक्ष में फैसला सुनाया. इस मामले में विशेष लोक अभियोजक जोहेब हुसैन ने ED की ओर से पक्ष रखा और बताया कि भंडारी लगातार भारतीय कानूनी प्रक्रिया से भाग रहा है और उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है. FEO घोषित होने के बाद अब भारतीय एजेंसियां संजय भंडारी की भारत और विदेश में स्थित संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं. इससे पहले भी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे कई हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों को FEO घोषित किया जा चुका है. क्या है FEO अधिनियम? FEO Act, 2018 के तहत, उन लोगों को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया जाता है जो ₹100 करोड़ या उससे अधिक के आर्थिक अपराधों में शामिल हैं और भारत की अदालतों में पेश होने से बचते हैं. यह कानून एजेंसियों को उनकी संपत्ति को जब्त करने की शक्तियां देता है. इस मामले से जुड़ी जांच अभी जारी है और संभावना है कि ED कुछ और अधिकारियों या फर्मों की भूमिका की भी जांच करेगी. रॉबर्ट वाड्रा जंग भी जुड़ा था नाम संजय भंडारी का नाम कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आया है. ईडी का दावा है कि भंडारी ने रक्षा सौदों में दलाली कर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति विदेशों में बनाई. 2016 में आयकर विभाग की छापेमारी में भंडारी के पास से गोपनीय रक्षा दस्तावेज और गैर-घोषित विदेशी संपत्तियों के सबूत मिले थे. जांच में भंडारी का संबंध कई विदेशी हथियार कंपनियों से सामने आया जो भारत सरकार से रक्षा खरीद के ठेके पाने की होड़ में थीं. कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद ईडी अब उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज करेगी. यह फैसला भारत के लिए ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की संभावित अपीलों में भी कानूनी आधार मजबूत करेगा. ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को भी किया था तलब इससे पहले जून में ईडी ने भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी से जुड़ी चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को तलब किया था. केंद्रीय एजेंसी को संदेह है कि भंडारी ने यूपीए शासन के दौरान रक्षा अनुबंधों के जरिये मिले अवैध धन का इस्तेमाल विदेशों में संपत्तियां खरीदने के लिए किया. विशेष रूप से लंदन में प्रमुख रियल एस्टेट संपत्तियों में से कुछ में कथित तौर पर रॉबर्ट वाड्रा को लाभकारी मालिक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. 2018 से ईडी की जांच के दायरे में रहे वाड्रा ने राजनीतिक प्रतिशोध का दावा करते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है. कर चोरी, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में भारत में लंबे समय से वांछित संजय भंडारी एक बड़ी कानूनी जीत के बाद लंदन में रह रहा है. फरवरी में लंदन के हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण के खिलाफ भंडारी की अपील को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि भारत की तिहाड़ जेल में कैदियों और जेल अधिकारियों दोनों की ओर से जबरन वसूली और हिंसा का असली खतरा है.  

भगोड़े नीरव मोदी का भाई नेहल मोदी वाशिंगटन में गिरफ्तार, CBI-ED ने करवाया अरेस्ट

 वाशिंगटन भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के भाई नेहल मोदी को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई और ईडी के प्रत्यर्पण के अनुरोध के बाद उन पर शिकंजा कसा गया है। यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भगोड़े आर्थिक अपराधी नीरव मोदी के भाई को 4 जुलाई को अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से संयुक्त रूप से किए गए प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद हुई।  प्रत्यर्पण की कार्यवाही दो मामलों में की जा रही अमेरिकी अभियोजन पक्ष की ओर से दर्ज की गई शिकायत के मुताबिक, प्रत्यर्पण की कार्यवाही दो मामलों में की जा रही है- एक मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन का और दूसरा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी और 201 के तहत आपराधिक साजिश का।  पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में वांछित नेहल मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में वांछित है। यह देश के इतिहास में सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से की गई जांच में नेहल मोदी को नीरव मोदी की आपराधिक आय को वैध बनाने के लिए काम करने वाले अहम शख्स पाया गया था, जो ब्रिटेन से प्रत्यर्पण का भी सामना कर रहा है। अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई नेहल पर आरोप है कि उसने भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए शेल कंपनियों और विदेशी लेनदेन के नेटवर्क के जरिए भारी मात्रा में अवैध धन को छिपाने और स्थानांतरित करने में सहायता की। प्रत्यर्पण कार्यवाही के लिए अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। वह इस दौरान जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, जिसका अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने विरोध करने की बात कही है। इस सेक्शन के तहत की गई गिरफ्तारी प्रत्यर्पण का अनुरोध क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी सेक्शन 120 बी, 201 इंडियन पीनल कोड और 3 प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के तहत किया गया था। नीरव मोदी के साथ ही नेहाल मोदी पर भी पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप हैं। सीबीआई और ईडी की जांच के मुताबिक नीरव मोदी के इस स्कैम को अंजाम देने में उसके भाई नेहाल मोदी ने अहम रोल निभाया था। नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की कोशिश भी जांच एजेंसियां यूके से कर रही हैं। सुनवाई की अगली तारीख 17 जुलाई की है। इसमें नेहाल मोदी जमानत के लिए भी अपील कर सकता है और यूएस अथॉरिटी भारतीय एजेंसियों के तर्क पर इसका विरोध करेंगी। किस मामले में है वांटेड नेहल मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी घोटाले में वांछित है, जो देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला कहा जाता है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि उसने अपने भाई नीरव मोदी की मदद करते हुए हजारों करोड़ रुपये की काली कमाई को विदेशों में शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किया। ED और CBI की जांच में ये साफ हुआ है कि नेहल मोदी ने न सिर्फ घोटाले की रकम को इधर-उधर किया, बल्कि कई दस्तावेजी सबूतों को भी मिटाने की कोशिश की।