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सूर्य का मकर राशि में गोचर आज रात 9:19 बजे, जानें संक्रांति की सही तिथि

इस साल मकर संक्रांति 2026 को लेकर कंफ्यूजन है क्योंकि कहा जा रहा है कि 14 की जगह 15 जनवरी को ये त्योहार मनाना ज्यादा शुभ रहेगा. इसको लेकर सबसे बड़े दो तर्क दिए जा रहे हैं कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते अन्न दान नहीं किया जा सकता है और दूसरा सूर्य देव मकर राशि में रात 9 बजकर 13 मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में उदया तिथि यानी 15 जनवरी को ही स्नान, ध्यान, दान करना उचित माना जा रहा है. इन सब के पीछे ज्योतिषाचार्यों ने तर्क दिए हैं. हालांकि द्रिक पंचांग के मुताबिक, मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. ये अवधि 2 घंटे 32 मिनट तक की है. इसके अलावा महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटा 45 मिनट है. पंचांग के अनुसार, ‘मकर संक्राति के शुरू होने के बाद 40 घटी तक का समय मकर संक्रांति से संबंधित शुभ कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. 1 घटी की अवधि 24 मिनट होती है, ऐसे में 40 घटी का समय 16 घंटे होते हैं. 40 घटी का समयपुण्य काल के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु व्रत रख पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को नैवेद्य अर्पण करते हैं. साथ ही साथ दान-दक्षिणा, श्राद्ध कर्म और व्रत का पारण करते हैं. ये सभी गतिविधियां पुण्यकाल के समय ही की जानी जरूरी होती हैं.’ कब मनाएं मकर संक्रांति? द्रिक पंचांग के मुताबिक, ‘यदि मकर संक्रांति सूर्यास्त के बात होती है, तो ऐसी स्थिति में पुण्यकाल की सभी गतिविधियां अगले दिन सूर्योदय काल तक स्थगित कर दी जाती हैं, ऐसे में पुण्य काल की सभी गतिविधियां दिन के समय ही संपन्न करनी चाहिए.’ अगर, द्रिक पंचांग की मानें तो मकर संक्रांति मनाने का सही दिन 14 जनवरी है. 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति मकर संक्रांति को लेकर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने TV9 डिजिटल से बात करते हुए कहा कि कोई भी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में कूदकर नहीं जाता है. वह संचरण करते हुए जाता है. सूर्य एक दिन में एक डिग्री प्रवेश करता है और उसे दूसरे ग्रह में जाने के लिए 30 दिन लग जाते हैं इसलिए संक्रांति की काल 12 से 16 घंटे माना गया है. हमें मकर की संक्रांति चाहिए न कि धनु की. संक्रांति धनु में भी रहेगी तो भी पुण्यकाल रहेगा क्योंकि इसे 12 घंटे पहले और 16 घंटे बाद तक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमें सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे उस समय मकर की संक्रांति चाहिए. काशी के पंचांगों के मुताबिक, रात में सूर्य 9 बजकर 19 पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. नारद पुराण के 123वें पेज में कहा गया है कि मकर की संक्रांति होने पर 30 घटी पहले और 40 घटी बाद तक पुण्यकाल होता है. इसी तरह धर्म सिंधु में जिक्र किया गया है. ये पुण्यकाल 15 जनवरी के मध्यान तक पड़ेगा इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी. मकर संक्रांति पर क्या करें दान? मकर संक्रांति पर दान देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. इस दिन कन्याओं और गरीबों को दान दिया जाता है. श्रद्धालु तिल-गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल, अनाज घी और शहद दान देते हैं. दरअसल, तिल का दान करने से पाप का विनाश होता है और गुड़ दान करने से सूर्य भगवान खुश होते हैं. खिचड़ी दान करने से शनि और चंद्रमा के पड़ने वाले अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं. वहीं, गर्म कपड़े दान करने से गरीबों का आशीर्वाद मिलता हैं और काले व नीले कंबल दान करने से शनि देव की कृपा बरसती है. इसके अलावा अनाज और घी-शहद भी जीवन में मधुरता लाते हैं.

करोड़पति बनने का वास्तु मंत्र, बस ये एक बदलाव जरूरी

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य

हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस साल ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान भी किया जाता है. इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खचड़ी बनाई और खाई जाती है. साथ ही इसका दान भी किया जाता है. ये एक पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी याद आ जाती है, लेकिन इस परंपरा के पीछे सिर्फ स्वाद भर नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना है. इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी है. आइए जानते हैं. ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसे एक शुभ परिवर्तन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है, उससे शुभ फल प्राप्त होते हैं. खिचड़ी में पड़ने वाला चावल, दाल और घी सात्विक आहार है. ये सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. जीवन में स्थिरता आती है. यही वजह है कि इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है. ये भी है एक धार्मिक मान्यता धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जोड़ी जाती है. बताया जाता है कि एक समय कठिन हालातों और आक्रमणों की वजह से योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे. ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने सभी को सलाह दी कि दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाया जाए. यह भोजन कम समय में बन जाता था और लंबे समय तक उर्जा देता था. धीरे धीरे इस साधारण और पौष्टिक भोजन की चर्चा साधु संतों से समाज तक पहुंची. इसी के बाद इसे मकर संक्रांति के पर्व से जोड़ दिया गया. तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना शुभ कहा जाने लगा.

Pongal Date Confusion: 13 या 14 जनवरी, जानें सही तारीख एक क्लिक में

दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और उत्साहपूर्ण त्योहार पोंगल दस्तक देने वाला है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से प्रकृति और किसानों को समर्पित है. अक्सर लोगों के मन में तारीख को लेकर उलझन रहती है कि पोंगल 13 जनवरी को है या 14 जनवरी को.आइए, जानते हैं पोंगल की सही तिथि और उसके चार दिनों के महत्व के बारे में. कब मनाया जाएगा पोंगल? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पोंगल पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा. इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का क्षण यानी संक्रांति शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है. आमतौर पर उत्तर भारत में जब मकर संक्रांति मनाई जाती है, उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल की धूम रहती है. पोंगल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पोंगल शब्द का अर्थ होता है उबालना या लहराना. पारंपरिक रूप से, नए कटे हुए चावलों को दूध में उबालकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है. कृतज्ञता का पर्व: यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और मवेशियों (गाय-बैल) के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है, क्योंकि इनकी मदद से ही किसानों को अच्छी फसल प्राप्त होती है. समृद्धि का प्रतीक: माना जाता है कि पोंगल के दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. यह तमिल कैलेंडर के थाई महीने की शुरुआत भी है, जिसके बारे में कहावत है, थाई पिरंधाल वज़ी पिरक्कुम यानी थाई महीने की शुरुआत के साथ ही नए रास्ते खुलेंगे. 4 दिन तक चलने वाला उत्सव: क्या-क्या होता है? पोंगल का त्योहार चार दिनों तक चलता है, और हर दिन की अपनी एक विशेष कहानी और परंपरा है. पहला दिन: भोगी पोंगल (14 जनवरी) यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुराने, बेकार सामान को घर से बाहर निकाल कर जला देते हैं. यह बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक है. दूसरा दिन: सूर्य पोंगल (15 जनवरी) यह पोंगल का सबसे मुख्य दिन है. इस दिन आंगन में नए मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर पोंगल बनाया जाता है. जब बर्तन से उबलकर चावल बाहर गिरने लगता है, तो लोग खुशी से पोंगल-ओ-पोंगल का उद्घोष करते हैं. यह भोग सूर्य देव को लगाया जाता है. तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (16 जनवरी) यह दिन खेती में काम आने वाले मवेशियों, खासकर बैलों और गायों के लिए होता है. उन्हें नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें माला पहनाकर उनकी पूजा की जाती है. तमिलनाडु का प्रसिद्ध खेल जल्लीकट्टू भी इसी दिन आयोजित होता है. चौथा दिन: कानून पोंगल (17 जनवरी) उत्सव के आखिरी दिन परिवार के सभी लोग एक साथ मिलते हैं. महिलाएं अपने भाइयों और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं और खुशियां मनाते हैं.

13 जनवरी 2026 राशिफल: ग्रहों की चाल से जानें कैसा रहेगा आपका दिन

मेष आज का दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। ऑफिस में आपकी मेहनत नजर आएगी और सीनियर्स आपके काम से खुश रहेंगे। हो सकता है कि आज नई जिम्मेदारी मिले। आज परिवार में प्रॉपर्टी को लेकर बात हो सकती है। सेहत ठीक रहेगी, लेकिन जल्दबाजी से बचना जरूरी है। खानपान को लेकर थोड़ा बदलाव करें। वृषभ आज आपको आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। कोई पुराना खर्च सामने आ सकता है। प्रोफेशनल लाइफ में स्थिरता बनी रहेगी और कलीग्स का सपोर्ट मिलेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। पार्टनर को भी पूरा सहयोग मिलेगा। मिथुन आज बातचीत और कम्युनिकेशन ही आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेगी। अपनी बातों से आप लोगों का दिल जीत लेंगे। इंटरव्यू, मीटिंग या डील के लिए दिन अच्छा है। दोस्त या भाई-बहनों से आपको पूरा सपोर्ट मिलेगा। मन इधर-उधर भाग सकता है। ऐसे में आप दिन में ध्यान जरूर करें। कर्क आज आप इमोशनल तौर पर थोड़ा सेसेंटिव रह सकते हैं। प्रोफेशनल लाइफ में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं। आपका खर्चा बढ़ सकता है, इसलिए फिजूलखर्ची से बचें। परिवार में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। सेहत का ध्यान रखें। ज्यादा ऑयली और फैटी चीजें ना खाएं। सिंह आज आपके मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अब आपकी लीडरशिप क्वालिटी निखरेगी। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की के संकेत मिल सकते हैं। ऐसे में नए मौके लेने से ना कतराएं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। ईगो से बचें नहीं तो रिश्तों में दूरी आ सकती है। खाना देर रात ना खाएं। साथ ही देर रात स्नैक्स वगैरह भी अवॉइड करें। कन्या आज आपके ऊपर काम का दबाव ज्यादा रह सकता है, लेकिन आप अपनी सूझबूझ से चीजों को संभाल लेंगे। सेहत को नजरअंदाज ना करें। हेक्टिक शेड्यूल के बीच आराम भी जरूरी है। पैसों के लेन-देन में सावधानी रखें। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है और ऐसे में पुरानी यादें ताजा होंगी। तुला आज आपके रिश्तों के लिए दिन अच्छा है। लव लाइफ अच्छी जाएगी। पार्टनर के साथ प्यार भरे लम्हें बिताने का मौका मिलेगा। साझेदारी के काम में लाभ हो सकता है। कला, फैशन या क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। आज आपका मन खुश रहेगा। बस शाम में थोड़ी देर तनाव रह सकता है। ऐसे में भरोसेमंद दोस्त से बात करें। वृश्चिक आज आपको धैर्य और समझदारी से काम लेने की जरूरत है। किसी से फालतू में बहस करने से बचें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। जल्द ही नया मौका मिल सकता है। कुछ लोग आपका बुरा सोच सकते हैं। ऐसे में सतर्क रहें। ध्यान और मेडिटेशन करें। खाने में प्रोटीन जरूर एड करें। धनु आज भाग्य आपका पूरा साथ देगा। नई योजना शुरू करने के लिए दिन फेवर में है। कहीं पर ट्रैवल के योग बन सकते हैं। स्टूडेंट्स के लिए समय अच्छा है। धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। दिन में अपने लिए समय जरूर निकालें। कुछ देर मेडिटेशन जरूर करें। जंक फूड से दूर रहें। मकर आज आपको अपनी मेहनत का पूरा फल मिलने वाला है। करियर में ग्रोथ के संकेत हैं। सीनियर्स का अब पूरा-पूरा सपोर्ट मिलने वाला है और आगे चलकर नए मौके भी मिलेंगे। पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छी तरह निभाएंगे। अपनी सेहत का ध्यान रखें। पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहिए। कुंभ आज आपके दिमाग में नए विचार और योजनाएं आएंगी। दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा। आज आप सामाजिक कार्यों में भाग ले सकते हैं। साथ ही आज धन लाभ के भी योग हैं। आज बस ध्यान रखें कि आपको इन्वेस्टमेंट बहुत ही सोच-समझकर करना है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। मीन आज आपका मन शांत रहने वाला है। आप पॉजिटिव सोचेंगे। क्रिएटिव काम में सफलता मिलने के योग है। लव लाइफ में इमोशनल तौर पर चीजें और मजबूत होंगी। आज आपकी सेहत ठीक रहेगी। किसी जरूरतमंद की मदद करने से अच्छा महसूस होगा। खानपान ठीक रखें।

विवाह के बाद लोहड़ी मनाने जा रही हैं, तो न भूलें ये अहम बातें

लोहड़ी सिख धर्म का काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. हर साल ये त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 13 जनवरी यानी कल मनाया जाएगा. लोहड़ी का पर्व बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है. उत्तर भारत खासकर पंजाब और हरियाणा में ये पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. लोहड़ी प्रमुख रूप से कृषि से जुड़ा त्योहार माना जाता है. इस समय किसान अपनी रबी की फसल (खासकर गेहूं और सरसों) को काटने की खुशी मनाते हैं. लोहड़ी की अग्नि में नई फसल का भोग लगाते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं. जिस घर में नया विवाह हुआ हो वहां इस त्योहार का महत्व दोगुना हो जाता है. अगर आपकी भी विवाह के बाद यह पहली लोहड़ी है, तो इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें. लोहड़ी 2026 शुभ मुहूर्त हर साल की तरह इस साल भी लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी कल मंगलवार को मनाया जाना वाला है. वहीं, लोहड़ी संक्रांति के क्षण की शुरुआत 14 जनवरी, 2026 को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर होगी. अग्नि प्रज्वलन का शुभ समय शाम 06 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ समय रात 08 बजकर 30 मिनट तक रहने वाला है. लोहड़ी पर इन बातों का रखें ध्यान लोहड़ी के दिन ज्यादा सादे या काले और सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनें. शुभ अवसरों पर काला रंग पहनना वर्जित है. इस दिन पारंपरिक कपड़े जैसे फुलकारी दुपट्टा या भारी सूट पहनें. लोहड़ी की पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली डालें. कई बार लोग अनजाने में मूंगफली या रेवड़ी खाते-खाते उसी बर्तन से अग्नि में चीजें डाल देते हैं. जो चीजें अग्नि में डालनी हैं वो पहले अलग से निकालकर रख लें. उसे जूठा न करें. ऐसा करना अशुभ होता है. सभी से जो भी उपहार मिले, उसको मुस्कुराकर स्वीकार करें और बड़ों का आशीर्वाद लें. लोहड़ी की अग्नि की परिक्रमा करें. ऐसा करना सौभाग्य और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. लोहड़ी की शाम अग्नि प्रज्वलित करने का समय सबसे मुख्य होता है, उस समय पूजा और आहुति के समय जरूर मौजूद रहें.

लोहड़ी 2026: इन वास्तु उपायों से दूर होंगी नकारात्मकता, घर में बनेगा सुख-शांति का माहौल

उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाने वाला पर्व लोहड़ी हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। वर्ष 2026 में लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व नई फसल, ऋतु परिवर्तन और सूर्य देव की उपासना से जुड़ा हुआ है। लोहड़ी के दिन अग्नि पूजा, दान और वास्तु उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बढ़ती है। घर की सफाई और शुद्धिकरण है पहला और सबसे जरूरी कदम वास्तु शास्त्र के अनुसार लोहड़ी के दिन घर की पूरी सफाई करना अत्यंत शुभ माना गया है। स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है। वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन घर में गंगाजल और गुलाब जल मिलाकर छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध बनता है। विशेष रूप से मुख्य द्वार, पूजा स्थल और उत्तर-पूर्व दिशा पर ध्यान देना चाहिए। मुख्य द्वार पर करें ये शुभ उपाय, खुलेगा सौभाग्य का द्वार वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। लोहड़ी के दिन मुख्य दरवाजे पर सात गुलाब की अगरबत्तियां जलाना शुभ होता है। इसके साथ ही दरवाजे के ऊपर स्वास्तिक का चिन्ह लगाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। स्वास्तिक यदि तांबे या पीतल से बना हो तो और भी शुभ फल देता है। वैकल्पिक रूप से इसे नागकेसर, शहद और रोली के मिश्रण से भी बनाया जा सकता है। यह उपाय घर में सौभाग्य, शांति और आर्थिक स्थिरता बढ़ाता है। पानी के स्रोत से जुड़ा है धन और तरक्की का योग वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा को धन, ज्ञान और सकारात्मकता की दिशा माना जाता है। इस दिशा में फव्वारा, एक्वेरियम या पानी से भरा कलश रखना अत्यंत शुभ होता है। इसके साथ ही चांदी के कलश में चावल भरकर रखना भी धन वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। शुभ सामग्री से बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लोहड़ी के दिन घर में मिश्री वाला धागा या थोड़ी मात्रा में मिश्री रखना शुभ फल देता है। इसके अलावा फूलों वाले पौधे घर में लगाने से न केवल घर की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। खासतौर पर उत्तर या पूर्व दिशा में पौधे लगाना लाभकारी माना गया है। पश्चिम दिशा के उपाय से बनेगा पारिवारिक संतुलन वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा पारिवारिक स्थिरता और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी होती है। इस दिशा में परिवार की फोटो या किसी सुंदर प्राकृतिक अथवा ग्रामीण दृश्य की तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है। बच्चों के अध्ययन क्षेत्र को इस दिशा में साफ और व्यवस्थित रखना उनकी एकाग्रता बढ़ाता है। मंदिर और पूजा स्थल पर विशेष ध्यान दें लोहड़ी के दिन घर के मंदिर और पूजा स्थल की सफाई करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। यदि संभव हो तो दक्षिण दिशा में हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में लाल रंग का प्रकाश या लाल पर्दों का प्रयोग करने से नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है। अन्य महत्वपूर्ण वास्तु उपाय उत्तर दिशा में स्थित पानी के स्रोत की सफाई करें वहां तुलसी या बैंबू का पौधा लगाएं घर में टूटी-फूटी वस्तुएं न रखें वास्तु शास्त्र के अनुसार लोहड़ी के दिन किए गए ये सरल उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली को बढ़ाते हैं। यह पर्व केवल परंपराओं से जुड़ा नहीं, बल्कि नई शुरुआत और शुभ अवसरों का प्रतीक भी माना जाता है।

शुक्र का सूर्य नक्षत्र में गोचर, इन राशि वालों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को दैत्यों का गुरु कहा गया है. शुक्र को धन, वैभव, ऐश्वर्य, प्रेम, विवाह, सौंदर्य और भोग-विलास का कारक माना जाता है. जब भी शुक्र अपनी राशि या नक्षत्र बदलते हैं, तो उसका असर सिर्फ व्यक्ति की कुंडली पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश-दुनिया पर भी देखने को मिलता है. इस समय शुक्र ग्रह धनु राशि में विराजमान हैं और 10 जनवरी को नक्षत्र परिवर्तन कर सूर्य के नक्षत्र उत्तराषाढ़ा में प्रवेश कर चुके हैं. शुक्र इस नक्षत्र में 21 जनवरी तक रहेंगे, इसके बाद वे श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. आइए जानते हैं इस गोचर से किन राशि वालों की किस्मत चमकने वाली है. 21 जनवरी तक बरसेगी विशेष कृपा वर्तमान में शुक्र देव धनु राशि में गोचर कर रहे हैं. 10 जनवरी को नक्षत्र परिवर्तन करने के बाद वे 21 जनवरी तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इसके बाद वे श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को ज्योतिष में बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि इसके स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं और इसके देवता विश्वदेव हैं. इसे विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है. जब धन के देवता (शुक्र) और मान-सम्मान के देवता (सूर्य) के नक्षत्र का मिलन होता है, तो इसका सीधा सकारात्मक असर लोगों की आर्थिक स्थिति और करियर पर पड़ता है. इन 3 राशि वालों की खुलेगी किस्मत शुक्र के इस नक्षत्र परिवर्तन से वैसे तो सभी राशियां प्रभावित होंगी, लेकिन मेष, सिंह और मकर राशि वालों के लिए गोल्डन टाइम शुरू होने वाला है. मेष राशि     मेष राशि वालों के लिए यह समय भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा.     धन लाभ: लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है.     करियर: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है.     खुशखबरी: परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मान-सम्मान में वृद्धि होगी. सिंह राशि     सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और शुक्र उन्हीं के नक्षत्र में आए हैं, इसलिए यह समय आपके लिए बेहद शुभ है.     व्यापार: बिजनेस करने वालों को कोई बड़ी डील मिल सकती है.     जीवनशैली: आपकी सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा. आप नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना सकते हैं.     रिश्ते: प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं. मकर राशि     उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संबंध मकर राशि से भी है, इसलिए शुक्र का यह गोचर आपके लिए लाभकारी रहेगा.     सफलता: आप जो भी काम हाथ में लेंगे, उसमें विजय प्राप्त होगी.     आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं. निवेश से अच्छा मुनाफा मिल सकता है.     सेहत: पुरानी बीमारियों से राहत मिलेगी और आप ऊर्जावान महसूस करेंगे.  

बिना वजह घर में होती है कलह? चाणक्य नीति से जानिए परिवार टूटने की 5 बड़ी वजहें

चाणक्य नीति के अनुसार परिवार में झगड़े सिर्फ शब्दों या घटनाओं की वजह से नहीं होते, बल्कि वहां रहने वाले लोगों की आदतों और विचारों के टकराव से उत्पन्न होते हैं। ऐसे में परिवार में प्रेम और संतुलन बनाए रखने के लिए आइए जानते हैं 5 ऐसे कारण, जो अकसर बनते हैं घर में झगड़े का कारण। एक परिवार पति पत्नी के अलावा कई पीढ़ियों के एक साथ रहने से बनता है। परिवार के सदस्य अगर एकसाथ प्यार से मिलकर रहते हैं तो बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी लगने लगती है। लेकिन परिवार में अगर आपसी झगड़े होने लगे तो जीवन बेहद कठिन लगने लगता है। क्या आप जानते हैं आखिर परिवारों में कलह की बड़ी वजह क्या होती है ? इस सवाल का जवाब चाणक्य नीति में दिया गया है। चाणक्य नीति के अनुसार परिवार में झगड़े सिर्फ शब्दों या घटनाओं की वजह से नहीं होते, बल्कि वहां रहने वाले लोगों की आदतों और विचारों के टकराव से उत्पन्न होते हैं। ऐसे में परिवार में प्रेम और संतुलन बनाए रखने के लिए आइए जानते हैं 5 ऐसे कारण, जो अकसर बनते हैं घर में झगड़े का कारण। एक-दूसरे की अनदेखी जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे की भावनाओं को अनदेखा करके सिर्फ अपना स्वार्थ देखते हैं, तो दिलों में दूरियां बढ़ने लगती हैं। चाणक्य कहते हैं कि सम्मान और संवाद हर रिश्ते की बुनियाद हैं। अगर परिवार में किसी की बात नहीं सुनी जाती, तो वह अकेलापन महसूस करता है। इससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। बाहरी लोगों का हस्तक्षेप चाणक्य नीति कहती है कि पारिवारिक मामलों में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप रिश्तों को बिगाड़ सकता है। जब दूसरों की बातें परिवार के सदस्यों को भड़काने लगती हैं, तो परिवार में कलह का वातावरण बढ़ जाता है। पारिवारिक निर्णय परिवार के भीतर ही लिए जाने चाहिए। बाहरी हस्तक्षेप से विश्वास टूट जाता है। झूठ बोलने और धोखा देने की आदत झूठ और छल रिश्तों की डोर को कमजोर बनाते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार जिस घर में सत्य का वास नहीं होता, वहां शांति कभी नहीं रुकती। एक झूठ कई रिश्तों को तोड़ सकता है। परिवार में पारदर्शिता और ईमानदारी आवश्यक है। अहंकार और क्रोध चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति का क्रोध और अहंकार घर के सबसे बड़े विनाशक हैं। जब परिवार का कोई सदस्य हमेशा खुद को सही समझता है और दूसरों को नीचा दिखाता रहता है, तो घर के सदस्यों के बीच कलह बढ़ती है। विनम्रता और धैर्य ही परिवार को एकजुट बनाए रख सकते हैं। व्यक्ति को अपनी हर बात का जवाब क्रोध से नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता से देना चाहिए। धन और संपत्ति का लोभ चाणक्य नीति कहती है कि धन का लोभ व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। जब परिवार में धन को लेकर मतभेद होते हैं, तो कलह बढ़ जाती है। पारिवारिक निर्णय आपसी समझ और विश्वास के साथ लिए जाने चाहिए। लोभ रिश्तों को खोखला कर देता है।

वास्तु के अनुसार यहां लगाएं मनी प्लांट, कुछ ही दिनों में दिखेगा चमत्कारी असर

वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिनको घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। साथ ही खुशियों का आगमन होता है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु शास्त्र के नियम का पालन कर पौधे को लगाने से ही शुभ परिणाम मिलते हैं। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में मनी प्लांट लगाने से धन-समृद्धि में वृद्धि होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। अगर आप भी घर में सुख-शांति का माहौल चाहते हैं, तो मनी प्लांट जरूर लगाएं। आइए आपको बताते हैं कि कब और किस दिशा में लगाना चाहिए मनी प्लांट। किस दिशा में लगाएं वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट को लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में इस प्लांट को लगाने से व्यक्ति को कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। वास्तु के अनुसार, सही दिशा में मनी प्लांट को लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। किस दिन लगाएं मनी प्लांट? अगर आप घर में मनी प्लांट लगाने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं, तो इसे लगाने के लिए शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है। क्योंकि यह दिन धन की मां लक्ष्मी को समर्पित है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, शुक्रवार के दिन मनी प्लांट लगाने से धन प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं। मिलते हैं ये लाभ     ऐसा माना जाता है कि मनी प्लांट लगाने से आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है और धन से हमेशा तिजोरी भरी रहती है।     इसके अलावा सही दिशा में मनी प्लांट को लगाने से कुंडली में शुक्र मजबूत होता है, जिससे जातक के सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है।     सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।     तनाव कम की समस्या दूर होती है। कहां न लगाएं मनी प्लांट आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मनी प्लांट को उत्तर-पूर्व दिशा में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में इस पौधे को लगाने से धन हानि और आर्थिक तंगी की समस्या आ सकती है, क्योंकि उत्तर-पूर्व दिशा जल तत्व से जुड़ी होती है।