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मकर संक्रांति दो दिन क्यों? जानें सही वजह

मकर संक्रांति को लेकर इस साल लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पर्व आज यानी 14 जनवरी 2026 को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी 2026 को. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति आज और कल दोनों दिन मनाई जा रही है. इसके पीछे ज्योतिष, पंचांग, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई कारण हैं. आइए आसान भाषा में पूरे मामले को समझते हैं. क्यों है तारीखों को लेकर कंफ्यूजन? मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. ज्योतिषियों के बीच मतभेद सूर्य के प्रवेश के समय को लेकर है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य आज यानी 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. वहीं, बनारस के कुछ पंचांगों का मानना है कि यह प्रवेश रात 9:19 बजे होगा. इसी समय के अंतर के कारण त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है. आज 14 जनवरी कहां-कहां है धूम? चूंकि अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य का गोचर आज दोपहर में हो रहा है, इसलिए देश के कुछ हिस्सों में ये उत्सव आज भी मनाया जा रहा है. गुजरात और राजस्थान: यहां उत्तरायण और पतंगबाजी का मुख्य जश्न आज ही मनाया जा रहा है. तमिलनाडु: दक्षिण भारत में थाई पोंगल का मुख्य दिन आज 14 जनवरी ही है. शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, संक्रांति का पुण्य काल आज दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक रहेगा. कल (15 जनवरी) क्यों मनाई जाएगी संक्रांति? उत्तर प्रदेश, बिहार और वाराणसी के विद्वान 15 जनवरी को त्योहार मनाना अधिक उचित मान रहे हैं. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं. उदया तिथि और स्थानीय परंपरा शास्त्रों में माना जाता है कि जो तिथि सूर्योदय के समय होती है, उसी का महत्व पूरे दिन रहता है. चूंकि आज सूर्य का प्रवेश दोपहर या रात में हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार कल 15 जनवरी को मुख्य स्नान और दान होगा. षटतिला एकादशी और चावल का धर्मसंकट इस बार 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है. मकर संक्रांति का मुख्य प्रसाद ‘खिचड़ी’ है, जो बिना चावल के नहीं बन सकती. ऐसे में व्रत रखने वाले लोग 14 जनवरी को खिचड़ी नहीं खा सकते, इसलिए वे 15 जनवरी को यह पर्व मनाएंगे. दोपहर के स्नान को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं? प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, शास्त्रों में दोपहर के स्नान को अच्छा नहीं माना गया है. धर्म सिंधु और नारद पुराण के अनुसार, संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन के मध्याह्न तक रहता है. इसलिए 15 जनवरी की सुबह स्नान और दान करना सबसे उत्तम है. आपके लिए क्या है सही? अगर आप परंपरा और पंचांग को मानते हैं, तो दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए 15 जनवरी की सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ है. वहीं, अगर आप केवल उत्सव और पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं, तो 14 जनवरी को इसकी शुरुआत हो चुकी है.

आखिरी 60 दिन में न करें ये गलतियां, पैरेंट्स भी रहें सतर्क

बोर्ड एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। लगभग हर बोर्ड से जुड़े एग्जाम फरवरी महीने में शुरू हो जाएंगे। ऐसे में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स दोनों को ही एक अलग तरह का प्रेशर महसूस होने लगा है। समय कम है और सिलेबस इतना ज्यादा, ऐसे में घबराहट की वजह से कई स्टूडेंट्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनकी तैयारी को नुकसान पहुंचाती हैं। एक्सपर्ट मेघना मिश्रा का कहना है कि बोर्ड एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स के लिए आखिरी के लगभग तीन महीने बहुत कीमती होते हैं। अगर इस समय सही दिशा में मेहनत की जाए, तो अच्छे नंबर लाना पूरी तरह संभव है। वहीं इस दौरान की गई कुछ गलतियां काफी भारी भी साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट ने ऐसी ही गलतियां बताई हैं, जो आपको हर हाल में अवॉइड करनी चाहिए। नई किताबें शुरू करने की गलती कई छात्र परीक्षा के नजदीक आते ही नई-नई किताबें खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा किताबें पढ़ेंगे, उतना ज्यादा सीखेंगे। लेकिन मेघना के मुताबिक आपकी यह सोच गलत है। ज्यादा किताबें पढ़ने से अक्सर कन्फ्यूजन बढ़ती है। बेहतर यही है कि छात्र NCERT की किताबों पर पूरा ध्यान दें और साथ में सिर्फ एक अच्छी प्रैक्टिस बुक रखें। जो किताबें आपके पास पहले से हैं, उन्हीं को अच्छे से समझें और बार-बार रिवाइज करें। गहराई से पढ़ाई करना, ऊपर-ऊपर सब कुछ देखने से कहीं बेहतर होता है। पूरी रात जागकर पढ़ने से बचें कुछ बच्चे एग्जाम आते ही पूरी-पूरी रात जागकर पढ़ाई करने लगते हैं, उन्हें लगता है रात भर जागकर पढ़ने से ज्यादा सिलेबस पूरा हो जाएगा। लेकिन स्टूडेंट्स की ये आदत सही नहीं है। उनका कहना है कि नींद की कमी याददाश्त को कमजोर कर देती है। नींद दिमाग को मजबूत बनाती है और पढ़ी हुई चीजों को याद रखने में मदद करती है। दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद बहुत जरूरी है। इसे किसी भी हालत में नजरअंदाज ना करें। जब आप पूरी नींद लेते हैं, तो पढ़ाई में मन भी लगता है और समझ भी बेहतर होती है। सोशल मीडिया से दूरी बनाएं एक्सपर्ट का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। स्टूडेंट्स सिर्फ पंद्रह मिनट के लिए फोन उठाते हैं, वही कब दो घंटे बर्बाद कर देते हैं, उन्हें पता भी नहीं चलता। अगर सच में पढ़ाई पर ध्यान देना है, तो सोशल मीडिया एप्स को कुछ समय के लिए हटा देना ही बेहतर है। वेबसाइट ब्लॉकर का इस्तेमाल करें और खुद पर कंट्रोल रखें। याद रखें, यह समय दोबारा नहीं आएगा। टॉपर्स से तुलना करना छोड़ें अक्सर छात्र खुद की तुलना टॉपर्स से करने लगते हैं। इससे सिर्फ तनाव और डर बढ़ता है। मेघना मिश्रा के मुताबिक हर छात्र की क्षमता अलग होती है। किसी और की तैयारी देखकर खुद को कम आंकना सही नहीं है। आपको सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। जो आप कर सकते हैं, वही आपके लिए सबसे जरूरी है। तुलना से दूर रहकर शांत मन से पढ़ाई करना ही सफलता पाने का सही रास्ता है। कमजोर विषयों से भागने की आदत कई स्टूडेंट्स कमजोर विषयों को बाद के लिए छोड़ देते हैं, यह बहुत बड़ी गलती है। हर विषय को संतुलन के साथ पढ़ना जरूरी है। कमजोर विषयों पर थोड़ा-थोड़ा रोज ध्यान दें। 80-20 नियम को याद रखें और जहां कमी है, वहां अभ्यास बढ़ाएं। कमजोर विषय ही अक्सर अच्छे नंबरों का रास्ता बनते हैं। परफेक्ट समय का इंतजार ना करें कई स्टूडेंट्स सोचते हैं कि जब सब कुछ सही होगा, तभी पढ़ाई शुरू करेंगे। लेकिन सच ये है कि पढ़ाई के लिए कभी परफेक्ट हालात नहीं होते। आपको खुद की दिनचर्या बनानी होगी और उसी में पढ़ाई को जगह देनी होगी। शुरुआत करना सबसे जरूरी है, परफेक्ट होना नहीं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, चीज़ें अपने आप बेहतर होती जाएंगी।  

मकर संक्रांति: स्नान न करने पर मिलने वाले दंड क्या हैं?

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में शुभ प्रवेश का प्रतीक है, जो उसकी उत्तर दिशा की यात्रा का संकेत देता है. हिंदू परंपरा में सूर्य की इस गति को बढ़ती रोशनी, गर्मी और नई ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसलिए इस त्योहार को शारीरिक शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक शक्तिशाली समय माना जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार को लेकर इस बार कंफ्यूजन की स्थिति हुई. कई जगह आज मनाया जा रहा और कई जगह कल मनाया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि इस त्योहार पर स्नान न करने पर श्रद्धालु के जीवन में किस तरह का प्रभाव पड़ता है? सबसे पहले बात करते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति क्यों हुई? दरअसल, कई पंचांगों में कहा गया है कि ये त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा, लेकिन काशी के पंचांग में दावा किया गया है कि सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रवेश करेंगे. यही कारण है कि अगले दिन उदया तिथि में त्योहार मनाया जाएगा. इसके अलावा एक तर्क ये भी दिया जा रहा था कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते चालव या अन्न दान नहीं किया जा सकता है. इसे अगले दिन ही मनाना शुभ रहेगा. आखिरकार 15 जनवरी को त्योहार को मनाना शुभ माना गया है. मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है. अगर कोई श्रद्धालु मकर संक्रांति पर स्नान नहीं करता है तो उसे सजा के तौर पर उसके जीवन में कई चीजें घटित हो सकती हैं. मान्यता है कि इस त्योहार पर पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. खासकर गंगा में स्नान करने का अपना एक महत्व है. इससे पिछले पापों का विनाश होता है, जो भी व्यक्ति घर पर और पवित्र नदी में स्नान नहीं करता है वो विशेष पुण्य लाभ से वंचित रह सकता है. मकर संक्रांति पर स्नान न करने से मनुष्य बनता है दरिद्र? मान्यता ये भी है कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने की वजह से प्रकृति में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है. कहा गया है कि स्नान न करने से शरीर में तामसिक ऊर्जा और आलस्य बना रहता है. इसकी वजह से सुबह का स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, जोकि नई ऊर्जा के संचार के लिए बहुत जरूरी होता है. कुछ पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति जैसे पर्व पर स्नान और दान नहीं करता, वह अगले जन्म में दरिद्र या रोगों से ग्रसित हो सकता है. शनिदेव हो जाते हैं नाराज! मान्यता के मुताबिक, मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा बरसती है क्योंकि सूर्य देव के बेटे शनि अपने पिता का स्वागत इस दिन करते हैं. स्नान की अनदेखी करने से इन ग्रहों के शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है. अगर कोई श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों या अन्य मजबूरी से नदी में पवित्र स्नान नहीं कर पार रहा है तो उसके लिए एक अलग तरह का विधान है. वह श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल डाले और काले तिल मिलाकर स्नान करे. इससे संक्रांति का पूरा पुण्य मिलेगा.

रसोई की काली मिर्च और भाग्य का अनोखा राज

भारतीय रसोई में मसालों के राजा के रूप में पहचानी जाने वाली काली मिर्च न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में भी इसे बहुत प्रभावशाली माना गया है। शनि और राहु के दोषों को दूर करने से लेकर धन आगमन के मार्ग खोलने तक काली मिर्च के उपाय रामबाण माने जाते हैं। यदि आपके जीवन में भी धन की तंगी है, व्यापार मंदा चल रहा है या बीमारियां पीछा नहीं छोड़ रहीं, तो काली मिर्च के ये उपाय आपके भाग्य की चाबी बन सकते हैं।  धन प्राप्ति और आर्थिक तंगी दूर करने के उपाय अक्सर कड़ी मेहनत के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता या कर्ज बढ़ता जाता है। ऐसे में काली मिर्च का यह तांत्रिक उपाय बहुत कारगर माना जाता है। काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर के ऊपर से 7 बार वार लें। इसके बाद किसी चौराहे पर जाकर 4 दानों को चारों दिशाओं में फेंक दें और 5वें दाने को आसमान की तरफ उछाल दें। इसके बाद बिना पीछे मुड़े घर वापस आ जाएं। यह उपाय अचानक धन लाभ के योग बनाता है। यदि पैसा आता है पर टिकता नहीं, तो एक छोटे लाल कपड़े में काली मिर्च के कुछ दाने और एक सिक्का बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन का संचय होने लगता है।  व्यापार में उन्नति और सफलता के लिए यदि आपका बिजनेस ठप पड़ गया है या कार्यक्षेत्र में शत्रु बाधा डाल रहे हैं, तो इन उपायों को आजमाएं- कार्य सिद्धि के लिए: किसी जरूरी काम या बिजनेस मीटिंग के लिए घर से निकलते समय, घर के मुख्य दरवाजे पर थोड़ी सी काली मिर्च रखें और उस पर पैर रखकर बाहर निकलें। ध्यान रहे, इसके बाद दोबारा घर के अंदर न आएं वरना प्रभाव खत्म हो जाएगा। व्यापार में यदि गुप्त शत्रु परेशान कर रहे हों, तो शनिवार के दिन दीपक में काली मिर्च के कुछ दाने डालकर जलाएं। इससे नजर दोष दूर होता है और कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमती है। रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ काली मिर्च में औषधीय गुणों के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। यदि घर का कोई सदस्य बार-बार बीमार पड़ रहा हो और दवाइयां असर न कर रही हों, तो काली मिर्च के 7-8 दानों को एक काले कपड़े में बांधकर रोगी के कमरे में किसी कोने में लटका दें। यह कमरे की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। यदि शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण स्वास्थ्य खराब है, तो शनिवार के दिन काली मिर्च का दान करना चाहिए। भोजन में भी काला नमक और काली मिर्च का प्रयोग करने से शनि देव शांत होते हैं। शनि और राहु दोष के निवारण हेतु काली मिर्च मुख्य रूप से शनि ग्रह से संबंधित मानी जाती है। इसके प्रयोग से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है। शनिवार के दिन एक काले कपड़े में थोड़ी सी काली मिर्च और कुछ सिक्के बांधकर किसी जरूरतमंद को दान करें। इससे शनि की पीड़ा कम होती है। यदि राहु के कारण भ्रम या अज्ञात भय बना रहता है, तो शाम के समय काली मिर्च के दाने जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का वास्तु दोष भी ठीक होता है।

बाथरूम वास्तु दोष: सरल और असरदार समाधान

अगर आप अपने घर में वास्तु नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इससे आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है, जिससे धन की बर्बादी और लड़ाई-झगड़े जैसी कई समस्याओं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि बाथरूम से जुड़ी किन गलतियों को करने से बचना चाहिए, वरना इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस तरह लगता है वास्तु दोष वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बाथरूम को हमेशा घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए। इसे दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाने से बचें। अगर आपका बाथरूम किचन के ठीक सामने है, तो यह वास्तु दोष की वजह बन सकता है। इसके साथ ही अगर आपके बाथरूम में टपकता हुआ नल है, तो इसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। साथ ही बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए। इन नियमों की अनदेखी करने पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। रखें इन बातों का ध्यान वास्तु दोष को दूर करने के लिए, बाथरूम को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। साथ ही आप बाथरूम में एक नीली बाल्टी भी रख सकते हैं, जो वास्तु की दृष्टि से फायदेमंद माना गया है। बाथरूम में हल्के रंग की टाइल्स लगाएं। इसके साथ ही पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी का भी ध्यान रखना चाहिए। इस सभी बातों का ध्यान रखने से आपको वास्तु दोष से राहत देखने को मिल सकती है। जरूर करें ये काम वास्तु दोष से राहत पाने के लिए आप बाथरूम के कोनों में एक कांट की कटोरी में समुद्री नमक या फिटकरी भी रख सकते हैं, जिसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता ऊर्जा भी बढ़ती है। वास्तु दोष से छुटकारा पाने के लिए कपूर जलाना भी एक फायदेमंद उपाय है।  

मकर संक्रांति के तुरंत बाद महालक्ष्मी राजयोग 2026, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

वैदिक पंचांग के अनुसार जनवरी के मध्य का समय ज्योतिषीय दृष्टि से काफी खास रहने वाला है. इस दौरान कई बड़े ग्रह अपनी राशि बदलेंगे, जिससे शुभ योग और राजयोग बनेंगे. इस दौरान बदली ग्रहों की चाल का असर सिर्फ व्यक्ति के जीवन पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया की गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति के ठीक अगले दिन यानी 16 जनवरी को साहस और ऊर्जा के कारक मंगल ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद, 18 जनवरी को चंद्रमा भी मकर राशि में पहुंच जाएंगे. जब ये दोनों ग्रह मकर राशि में मिलेंगे, तो महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष के अनुसार, यह योग कुछ राशियों के लिए खास तौर पर लाभ देने वाला माना जा रहा है. इस दौरान लकी राशियों को नौकरी, आय और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को भी मिल सकते हैं.  मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह राजयोग करियर और बिजनेस के लिहाज से शुभ संकेत दे रहा है.  यह योग आपकी कुंडली में कर्म भाव में बन रहा है, जिससे कार्यक्षेत्र में अच्छे मौके मिल सकते हैं.  जो लोग नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छा ऑफर मिल सकता है. आपकी मेहनत और रचनात्मक सोच आपको आगे बढ़ाएगी. व्यापार से जुड़े लोगों को मुनाफा हो सकता है. नया काम शुरू करने या किसी बड़े फैसले के लिए समय अनुकूल रहेगा. मानसिक रूप से भी आप खुद को मजबूत और संतुलित महसूस करेंगे.  कन्या राशि  कन्या राशि वालों के लिए महालक्ष्मी राजयोग कई तरह से लाभ लेकर आ सकता है. यह योग आपकी कुंडली के पंचम भाव में बन रहा है.  ऐसे में अचानक धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं. पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और रिश्तों में बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा.  छात्रों के लिए यह समय खास हो सकता है.  पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और किसी अच्छे संस्थान में दाखिले के योग भी बन रहे हैं.  प्रेम संबंधों में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है और रिश्ते मजबूत हो सकते हैं.  धनु राशि धनु राशि वालों के लिए महालक्ष्मी राजयोग आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है.  यह योग आपकी कुंडली में धन और वाणी से जुड़े क्षेत्र में बन रहा है. ऐसे में अचानक धन मिलने के योग बन सकते हैं. इस समय रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है या कोई नया आय का स्रोत बन सकता है. कामकाज में तेजी आएगी और लंबे समय से अटके किसी काम में सफलता मिलने की संभावना है. परिवार का माहौल भी शांत और सकारात्मक रहेगा.  आपकी बातों में असर बढ़ेगा, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे.

मकर संक्रांति की तारीख तय क्यों हो गई? अगले 54 वर्षों तक 15 जनवरी का ही संयोग

नई दिल्ली ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष संक्रांति का पुण्यकाल लगभग 16 घंटे तक रहेगा, जो अगले दिन सूर्योदय के बाद 15 जनवरी की दोपहर तक माना जाएगा। क्यों बदलती है मकर संक्रांति की तिथि? ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन में हर वर्ष लगभग 20 मिनट की देरी होती है। इस प्रकार 3 वर्षों में लगभग 1 घंटे का अंतर, 72 वर्षों में 24 घंटे यानी 1 दिन का अंतर हो जाता है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा अपने मार्ग में पीछे नहीं चलते, इसलिए हर 72 वर्षों में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है।   2080 तक 15 जनवरी को ही संक्रांति ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इस गणना के आधार पर वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद संक्रांति की तिथि बढ़कर 16 जनवरी हो जाएगी। हालांकि 72 वर्षों का यह चक्र वर्ष 2008 में ही पूरा हो गया था, लेकिन कुछ वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातः काल में होने के कारण पूर्वकाल मानकर मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। पहले कब-कब मनाई जाती थी मकर संक्रांति?     1936 से पहले: 14 जनवरी     1864 से 1936: 13 जनवरी     1792 से 1863: 12 जनवरी विशेष बात यह है कि 12 जनवरी 1863, जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व था। इस वर्ष का योग और धार्मिक महत्व इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र और गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन साधारण नदी में स्नान भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है। राशि के अनुसार करें दान मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। जातक अपनी राशि के अनुसार दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इस दिन किसी का अपमान न करें, पेड़ न काटें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।     मेषः लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल     वृषभः सफेद तिल के लड्डू, चावल, चीनी     मिथुनः हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग     कर्कः जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, घी     सिंहः गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली का दान     कन्याः मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं     तुलाः सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी     वृश्चिकः मूंगफली, गुड़, लाल रंग के गर्म कपड़े     धनुः पीले वस्त्र, केले, बेसन, चने की दाल     मकरः काले तिल के लड्डू, कंबल     कुंभः ऊनी कपड़े, सरसों तेल, जूता-चप्पल     मीनः पीली सरसों, चने की दाल, मौसमी फल

वास्तु के अनुसार बाथरूम का शीशा: ये 3 गलतियां बन सकती हैं गृह-क्लेश की वजह

आजकल हर घर के बाथरूम में शीशा लगा होता है। अपने होम डेकोर और इंटीयर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लोग घर में किसी भी जगह शीशा लगा देते हैं। उन्हें वास्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। लेकिन, वास्तु का लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ता है इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारी उन्नति और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। बाथरूम एक ऐसी जगह है, जहां सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना रहती है। अगर यहां वास्तु के नियमों का पालन न किया जाए, तो यह घर की सुख-शांति को बिगाड़ सकता है। बाथरूम में लगे आईने (शीशे) का इसमें बहुत बड़ा योगदान होता है। आइए जानते हैं बाथरूम में शीशा लगाने के सही वास्तु नियम: सही दिशा का चुनाव वास्तु के अनुसार, बाथरूम में आईना हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। इन दिशाओं को सकारात्मकता का केंद्र माना जाता है। उत्तर दिशा में लगा आईना धन और समृद्धि को आकर्षित करता है। वहीं, पूर्व दिशा स्वास्थ्य और मान-सम्मान में सुधार करती है। भूलकर भी दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर आईना न लगाएं। आईने का आकार अपने बाथरूम में हमेशा चौकोर या आयाताकार आईना ही लगाएं। वास्तु में इन आकारों को संतुलन का प्रतीक और बेहद शुभ माना गया है। गोल या अंडाकार आईने बाथरूम में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये ऊर्जा को अनियंत्रित तरीके से परावर्तित कर सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव भी पैदा हो सकता है। कितनी ऊंचाई पर लगाएं शीशा? आईना लगाते समय ध्यान रखें कि यह न तो बहुत ऊपर हो और न ही बहुत नीचे। जब आप शीशे में देखें, तो आपका चेहरा पूरी तरह और स्पष्ट दिखना चाहिए। आधा या कटा हुआ चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है और यह आत्मविश्वास में कमी ला सकता है। दरवाजे के ठीक सामने न लगा हो शीशा बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने कभी भी आईना नहीं लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, जब बाथरूम का दरवाजा खुलता है, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। अगर सामने आईना लगा होगा, तो वह उस नकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित कर वापस पूरे घर में फैला देगा। शीशे की सफाई और स्थिति आईने पर धुंधलापन, पानी के निशान या गंदगी नहीं होनी चाहिए। गंदा आईना न केवल नकारात्मकता बढ़ाता है, बल्कि आर्थिक तंगी का कारण भी बनता है। साथ ही, यदि आईना कहीं से चटका या टूटा हुआ हो, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि टूटा हुआ शीशा गंभीर वास्तु दोष पैदा करता है।  

मकर संक्रांति की तारीख में उलझन: 15 जनवरी, एकादशी और दो बड़े झोल

भारत में त्योहारों की तिथि को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है, और इस बार मकर संक्रांति 2026 को लेकर भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाना अधिक श्रेष्ठ बताया जा रहा है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे दो सबसे बड़े ज्योतिषीय कारण हैं और साथ ही एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जो पूरे 23 साल बाद आया है. आइए जानते हैं. सूर्य का गोचर और पुण्य काल का समय ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति मनाई जाती है. साल 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी की दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे. शास्त्रों का नियम है कि यदि संक्रांति दोपहर के बाद (सूर्यास्त के करीब) लगती है, तो उसका पूर्ण पुण्य काल और दान-स्नान अगले दिन के सूर्योदय पर करना सबसे उत्तम होता है. यही कारण है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. उदया तिथि की मान्यता हिंदू धर्म में उदया तिथि वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो का विशेष महत्व है. चूंकि 14 जनवरी को सूर्य का राशि परिवर्तन दोपहर में हो रहा है, इसलिए 15 जनवरी की सुबह जब सूर्योदय होगा, तब संक्रांति की तिथि प्रभावी रहेगी. इसी उदया तिथि के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में 15 जनवरी को ही पवित्र स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान के कार्य किए जाएंगे. 23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: षटतिला एकादशी की बाधा इस बार मकर संक्रांति की तिथि के साथ एक बड़ी दिलचस्प बात जुड़ी है. 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. ज्योतिषीय गणना बताती है कि ऐसा संयोग लगभग 23 साल पहले साल 2003 में बना था. खिचड़ी खाने को लेकर क्यों है उलझन? मकर संक्रांति पर मुख्य रूप से चावल और दाल की खिचड़ी खाई जाती है. लेकिन एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है. ऐसे में जो लोग एकादशी का उपवास रखते हैं, उनके लिए 14 जनवरी को संक्रांति मनाना कठिन होगा. इसी वजह से विद्वानों का मत है कि 14 जनवरी को आप तिल, गुड़ और फलाहार का सेवन करें. फिर अगले दिन यानी 15 जनवरी को संक्रांति का पारंपरिक भोजन यानी खिचड़ी खाएं और दान करें. आध्यात्मिक महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य का मकर राशि में आना और भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी तिथि का एक ही समय पर होना बेहद शुभ है. इसे विष्णु-भक्ति और सूर्य-तत्व का अद्भुत मिलन कहा जा रहा है. इसलिए इस दिन किया गया दान और पूजा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होगी.

14 जनवरी का राशिफल: इस दिन के ग्रहों का आपके लिए क्या संदेश है, जानें यहां

मेष 14 जनवरी के दिन आज आप समृद्ध हैं। बातचीत में खुलापन लाने पर विचार करें। निजी और पेशेवर जीवन, दोनों में समझदार और संवेदनशील रहें। आपका दिन प्रोडक्टिव रहेगा। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी। आर्थिक स्थिति भी आपके पक्ष में रहेगी। वृषभ 14 जनवरी के दिन ऑफिस की गॉसिप से बचें। ऑफिस के काम पर ध्यान केंद्रित करें। आपका प्रेम जीवन खुशनुमा रहेगा और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आज का दिन समझदारी भरे निवेश के लिए भी अच्छा साबित हो सकता है। मिथुन 14 जनवरी के दिन अनुशासन और मेहनत के जरिए करियर जीवन को प्रोडक्टिव बनाए रखें। आज प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाएं। सुरक्षित वित्तीय निवेश को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य आपका अच्छा रहेगा। आज रिश्ते में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कर्क 14 जनवरी के दिन लव के मामले में अहंकार को दूर रखें। भविष्य के लिए प्लान करें। अपनी क्षमता साबित करने के लिए ऑफिस में नए काम हाथ में लें। पैसों से जुड़ी कोई समस्या नहीं आएगी। आज आप स्वस्थ भी हैं। सिंह 14 जनवरी के दिन प्यार से साथ रहें और पेशेवर जोखिम उठाने की इच्छा भी दिखाएं। धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे, और कुछ महिलाओं को संपत्ति भी विरासत में मिलेगी। आपको अपने हाव-भावों को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। कन्या 14 जनवरी के दिन प्यार में खुशी के पलों की तलाश करें और ऑफिस में नई भूमिकाएं निभाना सुनिश्चित करें। आंख मूंदकर निवेश न करें, बल्कि एक उचित निवेश योजना बनाएं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुला 14 जनवरी के दिन लव लाइफ में बेहतरीन पल देखने को मिलेंगे। प्रोफेशनल मुद्दों को सुलझाएं। आर्थिक निवेश पर विचार करें, जो सुरक्षित हों। आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी। आप वर्क-लाइफ के बीच जरूरी बैलेंस बनाए रखें। वृश्चिक 14 जनवरी के दिन अपनी लव लाइफ में निष्पक्ष रहें। करियर में जोखिम उठाने पर विचार करें। समृद्धि के बावजूद, आपको खर्चों को लेकर सावधान रहना चाहिए। स्वास्थ्य भी आपके पक्ष में है। धनु 14 जनवरी के दिन रिश्तों की समस्याओं के समाधान के लिए फोकस बनए रखें। बेहतर विकास के लिए पेशेवर अवसरों का लाभ उठाएं। आज समृद्धि बनी रहेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। बैलेंस पर फोकस रखें। मकर 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पलों की तलाश करें। लव लाइफ को अगले लेवल पर ले जाने पर विचार करें। अहंकार को दफ्तर की जिंदगी से दूर रखें। आज आप हेल्दी महसूस करेंगे। धन मिलने पर सुरक्षित वित्तीय फैसले लें। कुंभ 14 जनवरी के दिन प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाए रखें। धन का आगमन होगा। इस बात का ध्यान रखें कि आप प्रोफेशनल एक्सपेक्टेशन पर भी खरे उतरें। आज आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे। मीन 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पल आएंगे। अपनी लगन और मेहनत का परिचय देने के लिए कार्यस्थल पर नई चुनौतियों का सामना करें। सुरक्षित वित्तीय निर्णय लेने को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।