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अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: भारत में दिखाई नहीं देगा, सूतक नियमों का पालन आवश्यक

12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा इसलिए अनेक शुभ/अशुभ विधान उसी के अनुरूप होंगे। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं दे रही, इसलिए सूतक काल का पालन अनिवार्य नहीं माना जाता पर धार्मिक विचार से सावधानी बरतना शुभ माना जाता है। पूजन एवं मंगल कर्म ग्रहण समाप्ति के बाद सूर्यदेव, भगवान विष्णु व गणेश जी की आराधना करें। दीपक जलाएं, धूप दें और ॐ सूर्याय नमः, ॐ नमो भगवते विष्णवे जैसे मंत्रों का उच्चारण करें। दान करें जैसे गरीबों को भोजन देना, वस्त्र दान करना। स्वच्छता एवं पुनर्स्थापना ग्रहण के बाद घर एवं मंदिरों में सफाई एवं शुद्धिकरण करें। पूजा-मंडप, मंदिर परिसर या अपने पूजा स्थान को विशेष रूप से धोएं, धूप दें और गंगाजल से शुद्ध करें। अभीष्ट कार्यों की आरंभ ग्रहण समाप्ति के बाद शुभ कार्य जैसे ओरछना, नामकरण, गृह प्रवेश आदि आरंभ करना शुभ माना जाता है। नए व्यापार या निवेश के लिए समय अनुकूल हो सकता है पर ग्रहण समय में शुरू किये गए कार्यों से कुछ बाधा आ सकती है। गृह वास्तु और मनोदशा ग्रहण के समय घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें, भोजन न पकाएं। ग्रहण बाद घर की वातावरण को सकारात्मक बनाएं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को विश्रांति व आराधना में आवश्यक रूप से शामिल करें। 12 अगस्त 2026 को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल का प्रभाव भारतीय स्थिति में बहुत सीमित है। फिर भी धार्मिक दृष्टि से इस समय का शुद्धि-पुनर्स्थापना का अवसर माना जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद शुभ कार्य करें पूजन-दान, शुद्धि, शुभ आरंभ तो इसका सकारात्मक फल प्राप्त हो सकता है।

16 Nov Horoscope: आज किस राशि की चमकेगी किस्मत? मेष से मीन तक पढ़ें दिनभर का राशिफल

मिथुन: आपके लिए दिन बहुत सक्रिय रहने वाला है। कामकाज का दबाव बढ़ेगा, लेकिन आपकी दक्षता भी बढ़ेगी। बातचीत आपका मजबूत पक्ष है। आज आप अपनी बात अच्छे तरीके से रख पाएंगे और लोग आपकी राय को महत्व देंगे। आपको आज किसी नए काम की जिम्मेदारी मिल सकती है। छोटी यात्रा या मीटिंग आपके लिए अतिरिक्त फायदे लेकर आ सकती है। कर्क: आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। प्रेम संबंधों में मिठास आएगी और कोई अच्छी बातचीत रिश्ते को आगे बढ़ा सकती है। बच्चों से जुड़ी कोई खुशी मिल सकती है। किसी क्रिएटिव काम में आपका मन अच्छी तरह लगेगा। पुरानी यादें या पुराने फैसलों की समीक्षा मानसिक शांति दे सकती है। सिंह: आज का दिन आपके लिए सामान्य रहेगा। घर-परिवार के कामों में आपकी भूमिका मजबूत रहेगी। किसी घरेलू मामले का समाधान मिलेगा। संपत्ति, घर, जमीन-जायदाद से जुड़े किसी काम में आज प्रगति होगी। आत्मविश्वास अच्छा रहेगा, लेकिन इसका उपयोग संतुलन के साथ करना जरूरी है। पिता या किसी बड़े सदस्य का मार्गदर्शन मिलेगा। कन्या: दोस्ती, टीमवर्क और सामाजिक जुड़ाव के लिए बहुत अच्छा दिन है। किसी नए संपर्क या समूह से फायदा मिलेगा। करियर में किसी बड़े अवसर की नींव आज पड़ सकती है। लोग आपके विचारों को महत्व देंगे और सहयोग भी मिलेगा। आज टीम के साथ चलें।नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे। तुला: कम्युनिकेशन और संपर्क आज बेहद महत्वपूर्ण हैं। आपकी बात लोगों पर असर डालेगी और किसी जरूरी मुद्दे पर आपकी सलाह मददगार रहेगी। नई मीटिंग्स, छोटी यात्राएं या काम से संबंधित बातचीत आपके लिए अच्छा नतीजा दे सकती है। कुछ नया सीखने का मौका मिलेगा और कौशल बढ़ेगा। आज धैर्य से बात करें। दूसरों पर आपकी बातचीत का प्रभाव पड़ेगा। वृश्चिक: वृश्चिक राशि वालों के करियर में बड़ा उछाल आ सकता है। बॉस और उच्च अधिकारियों से तारीफ मिलेगी। किसी बड़े काम की जिम्मेदारी आपके हाथ आएगी और आप उसे अच्छे से निभाएंगे। प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ेगा। आज व्यवहार में नम्रता रखें। धनु: आर्थिक मामलों में आज का दिन स्थिरता और राहत लेकर आएगा। नया काम या पैसे का कोई रास्ता खुल सकता है। पुराना रुका पैसा आ सकता है। करियर में धीरे-धीरे सुधार दिखेगा। रिश्तों में संयम जरूरी है। बिना जरूरत विवाद से बचें। खर्च सोच-समझकर करें, फालतू खर्चा बाद में परेशानी दे सकता है। मकर: आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। आपका व्यक्तित्व दमदार रहेगा और लोग आपकी बात का सम्मान करेंगे। काम में नए अवसर मिलेंगे और अटके हुए काम तेजी से आगे बढ़ेंगे। कुछ लोगों को नई दिशा मिलेगी। कुंभ: यह दिन शांत चिंतन और आत्ममंथन का है। आप खुद को गहराई से समझेंगे। कोई पुराना काम पूरा हो सकता है या कोई पुरानी गलती सुधारने का मौका मिलेगा। ध्यान, योग और सुकून देने वाली चीजें आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाएंगी। आज बड़े फैसले जल्दबाजी में न लें। मीन: भाग्य आज आपका साथ देगा। पढ़ाई, यात्रा, विदेश, शोध या आध्यात्मिक कामों में प्रगति होगी। नई चीजें सीखने का अवसर मिलेगा और आपके विचारों में विस्तार आएगा। दिन उन्नति और सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है। आज जो मौका आए उसे हाथ से न जाने दें।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025: तिथि, मुहूर्त और लक्ष्मी पूजा का समय

सनातन धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या की तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है. इसमें भी मार्गशीर्ष पूर्णिमा अत्यधिक विशेष मानी जाती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत, स्नान, दान, लक्ष्मी पूजा और चंद्र को अर्घ्य दिया जाता है. हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है. पूर्णिमा पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी का पूजन करने से कभी भी धन की कमी नहीं होती. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और चंद्र को अर्घ्य देने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं और खुशहाली बनी रहती है. आइए जानते हैं कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है? साथ ही जानते हैं मार्गशीर्ष पूर्णिमा का मुहूर्त और लक्ष्मी पूजा का समय. मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा की तिथि की शुरूआत इस साल 04 दिसंबर, गुरुवार को सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 05 दिसंबर शुक्रवार को प्रात: 4 बजकर 43 मिनट पर हो जाएगा. ऐस में मार्गशीर्ष पूर्णिमा 04 दिसंबर को मनाई जाएगी. इसी दिन इसका का व्रत, स्नान और दान किया जाएगा. मार्गशीर्ष पूर्णिमा मुहूर्त मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान का मुहूर्त सुबह 8 बजकर 38 मिनट से है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर शुभ-उत्तम मुहूर्त 08 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 25 मिनट तक है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दान स्नान के बाद होगा. इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:10 से 06:04 बजे तक है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:32 बजे तक है. निशिता मुहूर्त देर रात 11:45 से 12:39 बजे तक है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजा का समय मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सूर्यास्त शाम को 05 बजकर 24 मिनट पर होगा. उसके बाद से प्रदोष काल शुरू होगा. इसमें माता लक्ष्मी का पूजन किया जा सकता है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से पुण्य प्राप्त होता है. व्रत रखकर लक्ष्मी पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने से घर में शांति और खुशियों का आगमन होता है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ना बहुत पुण्यदायी होता है.

साल 2027 का अंतिम चंद्र ग्रहण: इन राशियों के लिए रहेगा विशेष प्रभाव

साल 2027 में होने वाला खगोलीय घटनाक्रम ज्योतिष और आम लोगों दोनों के लिए खास महत्व रखता है। एक विशाल सूर्य ग्रहण के तुरंत बाद, वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण विशेष रूप से मकर और कुंभ  राशि के जातकों के जीवन पर गहरा असर डाल सकता है। यह ग्रहण मकर और कुंभ राशि वालों के लिए कुछ चुनौतियां और महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है, जिसके कारण उन्हें स्वास्थ्य, वित्त और व्यक्तिगत संबंधों के मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चंद्र ग्रहण 2027 कब है महा सूर्य ग्रहण के बाद चंद्र ग्रहण 17 अगस्त 2027 को लगेगा। ग्रहण की शुरुआत सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर होगी और समापन दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर होगा। भारत में ये ग्रहण नहीं दिखाई देगा। कहां दिखाई देगा 2027 का चंद्र ग्रहण? यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी अफ्रीका, मध्य प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। मकर और कुंभ राशि पर विशेष प्रभाव यह ग्रहण मकर और कुंभ  राशि के जातकों पर सबसे अधिक असर डालेगा। ग्रहण के शुरुआत में चंद्रमा मकर राशि में रहेगा, लेकिन दोपहर 1 बजे के बाद यह कुंभ राशि में गोचर कर जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, इस कारण मकर और कुंभ राशि वालों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।

आज का राशिफल: 15 नवंबर 2025—मकर के लिए बढ़िया दिन, बाकी राशियों की भी जानें भविष्यवाणी

मेष-मेष राशि वालों के लिए इस समय लाभ के संकेत हैं। इस समय आपको आत्मसयंत रहें। बेकार के क्रोध से बचें। नौकरी में असफसरों से सद्भाव बनाकर रखें। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग हैं। आज के दिन भागदौड़ अधिक रहेगी। वृषभ-आज तनाव हो सकता है, जिसके कारण मन परेशान हो सकता है। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी। कारोबार के लिए हो सकता है, आपको बदलाव करना पड़े। प्रोफेशनल लाइफ में आपको सावधानी बरतनी है। मित्रों का सहयोग भी मिलेगा। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन-इस समय मिथुन राशि वालों की पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। लेखनादि-बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ेगी। इस समय आपके लिए आय के साधन भी बन सकते हैं। लाइफ पार्टनक की सेहत का ध्यान रखें। मित्रों का साथ मिलेगा, जिससे आपका तनाव कम होगा। कर्क-इस राशि के लोगों को आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में उतार-चढ़ाव भी रहेंगे, लेकिन आपको परेशान नहीं होना है। आपके लिए यह समय खुशियां देने वाला रहेगा। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। संतान की सेहत में सुधार होगा। नौकरी में यात्रा पर जा सकते हैं। सिंह-इस राशि के लोगों को खुशखबरी मिलेगी। मन प्रसन्न रहेगा। संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। नौकरी में अफसरों से सद्भाव बनाकर रखें। कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। लवलाइफ में आज आपको कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। तुला-पैसों को लेकर परेशानी खत्म हो सकती है। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार की समस्याएं परेशान कर सकती हैं। सेहत का ध्यान रखें, कोई दिक्कत लगे तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। खर्चों की अधिकता रहेगी। किसी मित्र से धन मिल सकता है। धनु-आज नौकरी से जुड़े अच्छे अवसरों की प्राप्ति होगी। जिन लोगों का इंटरव्यू शेड्यूल है, उन्हें पॉजिटिव रिजल्ट मिल सकता है। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। मकर-आज अपने खान-पान में सावधानी बरतें। आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में कटु वचनों को कहने से बचें। प्रेमी-प्रेमिका की मुलाकात हो सकती है। आपके सहकर्मी किसी खास काम में आपकी मदद कर सकते हैं। कुम्भ-आज दिन की शुरुआत योग या ध्यान से करें। भाई-बहनों की मदद से आज आपको धन लाभ होगा। अपने भाई-बहनों से सलाह लें। परिवार की स्थिति सामान्य नहीं रहेगी। अपना हुनर ​​दिखाने के मौके आज आपके पास रहेंगे। कन्या-आपके परिवार का कोई सदस्य आज आपके साथ कुछ समय बिताने की जिद कर सकता है।धन संबंधी मामले आपके मन को परेशान कर सकते हैं।व्यापार करने वालों को नई पार्टनरशिप मिल सकती है। धन की स्थिति अच्छी होगी। वृश्चिक-आज आपकी सेहत पहले से अच्छी होगी। कार्यस्थल पर आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। यात्रा का योग है। चीजों को कंट्रोल में रखने के लिए हर किसी की परेशानी पर ध्यान दें। मीन-आज आपके जीवन में खुशियों का आगमन होगा, लेकिन धैर्यशीलता बनाए रखें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ स्थान परिवर्तन हो सकता है। संतान का साथ मिलेगा। माता-पिता की मदद से धन लाभ के संकेत हैं। बिजनेस करने वालों को व्यापारिक यात्रा करनी पड़ सकती है।

परेशानियों से घबराने की बजाए उनका सामना करना सीखें

समाज में कोई दुखी की भूमिका में है तो कोई सुखी की। कोई राजा की भूमिका में है और कोई प्रजा की भूमिका में काम कर रहा है। सभी अभिनय की भूमिकाएं हैं। कुछ भी स्थायी नहीं है। शाश्वत सत्य नहीं है। इसलिए मनुष्य याद रखे कि ईश्वर ने उसे जिस भूमिका में उतारा है, वह उसी भूमिका को यथोचित रूप में अभिव्यक्त करता जा रहा है, इससे अधिक कुछ नहीं। अगर कोई विपत्ति आती है, किसी भयावह परिस्थिति से ही गुजरना पड़े तो भी उसके मन में समानता का भाव नष्ट नहीं होना चाहिए। यदि वह समझेगा कि यह परमपुरुष के नाटक का खेल है तो इससे घबराएगा नहीं। मनुष्य घबराएगा नहीं तो वह अकेला पड़ने में दिक्कत महसूस नहीं करेगा। हमें नाटक का जो किरदार मिला है, वही सही ढंग से करते जाएंगे। इस मनोभाव को लेकर अगर मनुष्य चलता है तो वह मनुष्य सर्वजयी होगा। वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में ठोकर नहीं खाएगा, वह आगे ही बढ़ता जाएगा। मनुष्य कहां आगे बढ़ेगा? जहां से आया है, उसी ओर। आगे बढ़ने की यह क्रिया संघर्ष के माध्यम से ही होती है। जो मनुष्य संघर्ष विमुख है उसका स्थान समाज में नहीं है। कारण जीवन का धर्म, अस्तित्व का धर्म वह खो बैठा है। समाज में रहना अब उसके लिए उचित नहीं है। उसके विरुद्ध संग्राम करते हुए तुम लड़ते चल रहे हो, आगे बढ़ रहे हो। लेकिन यही काफी नहीं है। मानस भूमि में आगे बढ़ना चाहते हो। कितनी दुर्बलताएं, कितनी संकीर्णताएं, कितना मोह तुम्हें चारों ओर से घेरे हुए हैं। नागपाश की तरह वे तुमको मार देना चाहते हैं। तुम्हें इसके विरुद्ध संग्राम करते हुए आगे बढ़ना होगा। इस संग्राम से बचने की कोशिश व्यर्थ है। असंख्य भाव-जड़ताएं तुम्हें जकड़ना चाहती हैं। पूर्वजों ने गलती की है। कभी-कभी हम उसी को जकड़कर पकड़ना चाहते हैं। इन बाधाओं के सम्मुख हार मान लेने से कार्य संभव नहीं हो जाएगा। उसे तोड़कर अपना पथ बनाते चलो, यही जीवन का धर्म है। इस प्रकार मनुष्य अग्रसर हो रहा है और होता रहेगा। तुम्हें मानव शरीर मिला है। सर्वतोभाव से मानव की भूमिका निभाते चलो। यही तुम्हारा धर्म है। इस प्रकार मानसभूमि के विरुद्ध संग्राम करते हुए ही मनुष्य अग्रसर होता है। आगे चलते-चलते वह एक दिन मानसातीत लोक में प्रतिष्ठित हो पाएगा। वह मानसातीत सत्ता ही वास्तव में परमपुरुष है। अब परमपुरुष की ओर अग्रसर होने के लिए उसे वास्तव जगत में इस प्रकार के समाज का निर्माण करना होगा जहां वह किसी प्रकार की बाधा या विपत्ति के सम्मुख हार न माने। जो मानव-मानव में कोई भेद नहीं मानेगा अथवा अब तक समाज में जिन भेदों को स्थापित किया गया है, उन्हें दूर फेंक देगा। मानसिक भूमि पर मन को इस प्रकार तैयार करना पड़ेगा कि भाव जड़ता को कोई स्थान न मिले। हम भाव जड़ता को सहन नहीं करेंगे। हमारे पूर्व पुरुषों ने यदि कोई भूल की है तो उसे ही अंधरूप से स्वीकार करूंगा, मैं ऐसा मूढ़ नहीं हूं। पूर्व पुरुष भूल कर सकते हैं, वर्तमान पुरुष भी भूल कर सकते हैं, उत्तर पुरुष भी भूल कर सकते हैं। पूर्व पुरुष हमारे लिए श्रद्धेय हैं, पर भूलों की पुनरावृत्ति हो ऐसी बात नहीं होनी चाहिए। धर्म सबके लिए ही है और यह आनंद का पथ है।  

एकादशी व्रत पर तुलसी की विशेष महिमा: इन गलतियों से रहें दूर, वरना रुष्ठ हो सकती हैं मां लक्ष्मी

हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखा जाता है. हर माह में दो एकादशी व्रत पड़ते हैं. मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी उत्पन्ना एकादशी कहलाती है, क्योंकि मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर ही जगपालक भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी उत्पन्न हुईं थीं. इसके बाद उन्होंने मुर नाम के दैत्य का सिर काट दिया था. उत्पन्ना एकदशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन और व्रत का विधान है. इस दिन एकादशी देवी की भी पूजा होती है. इस दिन व्रत और पूजन से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. इस दिन तुलसी से जुड़े नियमों का पालन का पालन भी अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन अगर तुलसी से जुड़े इन नियमों का पालन नहीं किया जाता तो मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं. उत्पन्ना एकादशी कब है? इस साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 12 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 16 नवंबर को 02 बजकर 37 मिनट पर होगा. चूंकि 15 नवंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि की शुरुआत हो रही है, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत इस बार 15 नवंबर यानी कल रखा जाएगा. उत्पन्ना एकदशी पर तुलसी से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान तुलसी को जल न दें हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये कहा जाता है कि तुलसी माता एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. धर्म शास्त्रों में इस दिन तुलसी माता को जल देना वर्जित है, क्योंकि इस दिन जल देने से तुलसी माता का व्रत खंडित होता है. तुलसी के पत्ते न तोड़ें और सफाई का ध्यान दें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए भी मना किया जाता है. साथ ही एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखाना चाहिए. मान्यता है कि तुलसी के पास गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करतीं. तुलसी को गंदे या जूठे हाथ से न छुएं एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी को गंदे या जूठे हाथों से नहीं छूना चाहिए. माना जाता है कि गंदे या फिर जूठे हाथों से अगर तुलसी को छुआ जाता है, तो इससे अशुभ फलों की प्राप्ति होती है.

मार्गी शनि का शुभ प्रभाव: 3 राशियों की किस्मत 28 नवंबर से चमकने को तैयार

शनि नवग्रहों में न्याय और कर्मफल के दाता माने जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शनि लोगों को उनके कर्म के अनुसार ही फल और दंड देते हैं. शनि अभी मीन राशि में गोचर कर रहे हैं. इस माह में 28 नवंबर को शनि मीन राशि में ही मार्गी हो जाएंगे. शनि की इस दिशा परिवर्तन से एक विपरीत राजयोग बनेगा. कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रह के आपस में संबंध स्थापित करने से विपरीत राजयोग बनता है. शनि के विपरीत राजयोग बनाने से कुछ राशियों जीवन में बड़ा परिवर्तन और अवसर आ सकता है. आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में. वृषभ राशि शनि के मार्गी होने और विपरीत राजयोग बनाने से वृषभ राशि के जातकों को बहुत शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. इस दौरान वृषभ राशि वाले के रुके और अटके हुए कामों में तेजी देखने को मिल सकती है. अब तक जो कोशिशें कर रहे थे, उसमें सफलता मिल सकती है. करियर में स्थिरता प्राप्त हो सकती है. निवेश से लाभ हो सकता है. सिंह राशि शनि का मार्गी होना और विपरीत राजयोग बनाना सिंह राशि के जातकों के लिए बहुत लाभदायक साबित हो सकता है. इस दौरान सिंह राशि वालों के रास्ते की रुकावटें खत्म हो सकती हैं. कारोबार या नई पार्टनरशिप के लिए समय अच्छा रहने वाला है. भाग्य का साथ मिल सकता है. योजनाएं सफल हो सकती हैं. मीन राशि शनि मीन राशि में ही विराजमान हैं. इसी राशि में मार्गी होंगे. ऐसे में शनि का मार्गी होने और विपरीत राजयोग बनाने का गहरा प्रभाव मीन राशि वालों के जीवन पर पड़ सकता है. जीवन में भ्रम और असमंजस की स्थिति खत्म हो सकती है. मानसिक शांति मल सकती है. समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ सकती है. ये समय अध्यात्मिक और भौतिक प्रगति के लिए अच्छा है.

चुनाव नतीजे: नगरोटा में दिव्यरानी राणा की धाक, डम्पा में डॉ. ललथंगलियाना ने मारी बाज़ी

नगरोटा बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ देश के 7 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की 8 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की गिनती भी आज परवान चढ़ रही है। भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की नगरोटा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की है। यहां भाजपा की दिव्यरानी राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के उम्मीदवार हर्ष देव सिंह को 24647 मतों से पराजित किया। श्रीमती राणा को कुल 42350 मिले, जबकि श्री सिंह ने कुल 17703 मत हासिल किये। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस यहां पर तीसरे नवंबर पर रही है और उसकी उम्मीदवार शमीम बेगम ने कुल 10872 मत प्राप्त किये। गौरतलब है कि 11 नवंबर को नगरोटा में शांतिपूर्ण ढंग तरीके से मतदान हुआ था। पिछले साल 31 अक्टूबर को भाजपा विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद नगरोटा में उपचुनाव कराया गया है। मिजोरम – डम्पा से डॉ. ललथंगलियाना बड़ी बढ़त से जीते डम्पा में सबसे अधिक उत्साह देखने को मिला, जहां 82.34% मतदान दर्ज किया गया। डॉ. आर. ललथंगलियाना ने 6,981 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उनके पिछले प्रदर्शन से 562 वोट अधिक है। वे मिज़ो नेशनल फ्रंट (MNF) के प्रत्याशी थे। इनके नतीजे आना अभी बाकी है:- झारखंड उपचुनाव : घाटशिला सीट पर झामुमो के सोमेश सोरेन आगे  : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को मतगणना के रुझानों में झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बाबूलाल सोरेन से 20,807 मतों से आगे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दसवें चरण की मतगणना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) उम्मीदवार को 53,096 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 32,289 वोट मिले। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू 7,811 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।   पंजाब – तरनतारन से AAP के हरमीत संधू जीते तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने धमाकेदार जीत दर्ज की। AAP के हरमीत सिंह संधू ने शिरोमणि अकाली दल की सुखविंदर कौर रंधावा को शिकस्त दी, जबकि सांसद अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब के उम्मीदवार मनदीप सिंह तीसरे स्थान पर रहे। राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर कांग्रेस विजयी राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत हासिल की है। कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,612 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में प्रमोद जैन भाया को कुल 69,571 वोट मिले, जबकि मोरपाल सुमन ने 53,959 वोट प्राप्त किए। ओडिशा – नुआपाड़ा नुआपाड़ा में  बीजेपी के जय ढोलकिया 93 हज़ार से ज्यादा वोट हासिल कर रहे है और 62 हज़ार वोटों से लीड बनाए हुए। तेलंगाना – जुबली हिल्स  जुबली हिल्स से कांग्रेस के नवीन यादव 24 हज़ार वोटों से लीड कर रहे है। जम्मू-कश्मीर –   बड़गाम बडगाम विधानसभा क्षेत्र में पीडीपी उम्मीदवार आगा मेहदी 5200 वोटों से आगे चल रहे है।  

नकारात्मक ऊर्जा हटाने का आसान उपाय: नमक के डिब्बे में रखें यह खास पीला तत्व

वास्तु शास्त्र में नमक को नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मकता तथा समृद्धि को आकर्षित करने का एक बहुत ही शक्तिशाली माध्यम माना जाता है। जब घर की सुख-समृद्धि अचानक घटने लगती है, तो माना जाता है कि घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ गया है या किसी तरह का नजर दोष लग गया है। इसी नकारात्मकता को दूर करने और घर में खुशियां, धन-संपत्ति वापस लाने के लिए नमक के डिब्बे से जुड़ा एक बहुत ही प्रभावी और सरल उपाय बताया गया है, जिसमें एक पीली चीज का इस्तेमाल किया जाता है। पीली सरसों पीली सरसों के दानों को नमक के साथ मिलाकर रखने से घर में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। नमक की तरह ही, पीली सरसों के दाने भी बुरी नज़र और नकारात्मक ऊर्जा को तुरंत खींच लेने की क्षमता रखते हैं। ये दोनों मिलकर इस प्रक्रिया को और भी शक्तिशाली बना देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में पीली सरसों को देव गुरु बृहस्पति का प्रतिनिधि माना जाता है। बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, समृद्धि, भाग्य और विवाह का कारक माना जाता है। जब घर में बृहस्पति की कृपा होती है, तो धन आगमन के नए रास्ते खुलते हैं, आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और घर में बरकत बनी रहती है। यह उपाय घर में पैसे के अनावश्यक खर्च को रोकने और बचत को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। डिब्बा कैसा हो? नमक रखने के लिए हमेशा कांच या प्लास्टिक के डिब्बे का उपयोग करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, लोहे  के बर्तन में नमक कभी नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसे राहु का कारक माना जाता है और यह नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। डिब्बे को रसोई घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना सबसे शुभ माना जाता है। उपाय करने का तरीका सबसे पहले, नमक के डिब्बे में साबुत सेंधा नमक या खड़ा नमक डालें। पिसे हुए बारीक नमक की जगह सेंधा नमक या समुद्री खड़ा नमक का उपयोग अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह ऊर्जा को बेहतर तरीके से अवशोषित करता है। आप इन दानों को या तो किसी साफ, पीले कपड़े की छोटी पोटली बनाकर नमक के बीच में दबाकर रख सकते हैं, या फिर उन्हें सीधे ही नमक के अंदर मिला सकते हैं। यह उपाय आप गुरुवार के दिन या शुक्रवार के दिन करना शुरू कर सकते हैं, जिसे धन और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। नमक के डिब्बे को हमेशा भरकर रखें। नमक का डिब्बा खाली होना अशुभ माना जाता है। कब बदलें ? हर 15 दिन या महीने में एक बार पुराने नमक और सरसों को किसी बहते हुए पानी में या घर से बाहर मिट्टी में विसर्जित कर दें। फिर से नया नमक और पीली सरसों के दाने डालकर डिब्बे को भरकर रखें।