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उद्धव ठाकरे का आरोप: सरकार ने हमले के बाद भी सुरक्षा से ज़्यादा राजनीति को तवज्जो दी

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सुरक्षा की विफलता पर सवाल उठाए और सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा की बजाय राजनीति और कूटनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। 'सामना' को दिए एक साक्षात्कार में ठाकरे ने कहा, "पहलगाम हमला चौंकाने और आक्रोशित करने वाला था। हमें बताया गया था कि कश्मीर में सामान्य स्थिति लौट आई है। फिर यह हमला कैसे हुआ?" धारा 370 को निरस्त करने का समर्थन करने वाले ठाकरे ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद कश्मीर में जमीनी हालात अभी भी अस्थिर हैं। उन्होंने कहा, "पर्यटन फिर से शुरू हो गया है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी की गई है। आप किसी पूर्व अशांत क्षेत्र के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते जैसे सब कुछ 'ठीक' हो और अपनी सुरक्षा कम कर दें।" हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा, "छब्बीस महिलाओं ने अपना सिंदूर खो दिया। हमारी माताओं और बहनों की इज्जत को तार-तार करने के लिए कौन जिम्मेदार है?" उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि आतंकवादी भारतीय क्षेत्र में इतनी अंदर तक कैसे घुसपैठ करने में कामयाब रहे। उन्होंने "हमले के तीन महीने बाद भी, आतंकवादियों का पता नहीं चल पाया है। पहले उनकी तस्वीरें जारी की गईं, फिर उन्हें खारिज कर दिया गया। वे आए, हमला किया और गायब हो गए। वे कहां गए?" ठाकरे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार किए गए दावे को लेकर भी सरकार को घेरा। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने संभावित भारत-पाकिस्तान युद्ध को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया था। इस पर ठाकरे ने पूछा, "ट्रंप 27 बार कह चुके हैं कि उन्होंने युद्ध रोका। हमारे '56 इंच के सीने' वाले प्रधानमंत्री इस पर चुप क्यों हैं?" हमले के बाद शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' अभियान पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि सेना के पराक्रम का राजनीतिकरण किया गया। हमारी सेना सीमा पार कर गई, लेकिन उन्हें वापस क्यों बुलाया गया? सरकार को पीछे हटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? यह अभी भी एक रहस्य है।" उन्होंने भाजपा की आंतरिक आयु नीति पर भी कटाक्ष किया और सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं को 75 साल की उम्र में पद छोड़ने के लिए मजबूर किया था। क्या पीएम मोदी अपने ही बनाए नियमों का पालन करेंगे?" ठाकरे ने भाजपा पर शिवसेना को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में बैठे लोग अब संविधान का सम्मान करने को भी तैयार नहीं हैं।

चुनावी धांधली से हारी कांग्रेस? महाराष्ट्र चुनाव पर उदित राज का बयान

नई दिल्ली शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के लिए उस गलती को जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें सीट बंटवारे के दौरान देरी हुई और लोगों में गलत संदेश गया। ठाकरे ने माना है कि यह एक गलती थी, जिसे सुधारना होगा। अगर भविष्य में ऐसी गलतियां होती रहीं तो गठबंधन में रहने का कोई मतलब नहीं है। ठाकरे के इस बयान के बाद से महाराष्ट्र और राजधानी दिल्ली की सियासत तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी की हार का मुख्य कारण फर्जीवाड़ा था। रविवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देखिए, उद्धव ठाकरे के हिसाब से जो वो कारण बता रहे हैं, वह कारण भी हो सकता है। लेकिन, वह बहुत छोटा कारण होगा। चुनाव में हार की असली वजह फर्जीवाड़ा ही है। शाम 5 बजे के बाद लगभग 70 लाख वोट कैसे डाले जा सकते हैं? क्या यह संभव भी है? और, विपक्ष के वोट जानबूझकर कम किए गए। जब मतदान हो रहा था तब बाहर से मतदाताओं को लाया गया था। कुछ जगहों पर, एक ही पते पर हजारों मतदाता पंजीकृत हैं। कांग्रेस नेता उदित राज के मुताबिक, महाराष्ट्र के चुनावों में धोखाधड़ी की गई है। हमारे नेता राहुल गांधी ने तथ्यों के आधार पर चुनाव आयोग से सवाल किए। इतने महीने बीतने के बावजूद भी आयोग राहुल गांधी के सवालों के जवाब नहीं दे पाया है। इसे क्या समझा जाए? कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदान के दौरान सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है। लेकिन, चुनाव आयोग ने एक नियम बना दिया है कि 45 दिनों के बाद सीसीटीवी फुटेज को नष्ट कर दिया जाता है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें कुछ ऐसी सीटें भी गठबंधन के सहयोगियों को देनी पड़ी, जिस पर उनके उम्मीदवार जीतते रहे थे। उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर अंतिम क्षणों तक हुई बातचीत से जनता के बीच हमारे बारे में गलत संदेश गया। भविष्य में ऐसा होता है तो साथ में रहने का क्या मतलब रह जाएगा?

राजनीति बनाम क्रिकेट: केंद्रीय मंत्री ने भारत-पाक मैच रद्द होने पर जताई नाराज़गी

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने रविवार को वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लिजेंड्स (WCL) में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले क्रिकेट मैच के देशभर में विरोध होने के बाद रद्द किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि खेलों में राजनीति का घालमेल नहीं होना चाहिए। अठावले ने 'एएनआई' से कहा, "खेलों में राजनीति घसीटने की कोई जरूरत नहीं है। अगर मैच भारत में होता, तो मामला गंभीर होता। लेकिन मैच इंग्लैंड में है। हमने पाकिस्तान को युद्ध में हराया है। हमने उनकी क्रिकेट टीम को भी हराया है। इसलिए विपक्ष को इसमें राजनीति नहीं घसीटनी चाहिए।" जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए, अठावले ने राष्ट्रीय भावना को स्वीकार किया, लेकिन आतंकी गतिविधियों और खेल आयोजनों के बीच अंतर बताया। उन्होंने आगे कहा, "भारत बनाम पाकिस्तान मैच इंग्लैंड (डब्ल्यूसीएल) में होना था। यह सच है कि आतंकवादियों ने पहलगाम में हमला किया और उसके बाद आतंकी शिविरों को निष्क्रिय कर दिया गया… लेकिन मैच का मामला अलग है।" इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (डब्ल्यूसीएल) द्वारा भारत-पाकिस्तान मैच रद्द करने के फैसले का स्वागत किया और इसे हाल ही में हुई आतंकी घटनाओं के मद्देनजर देश की सामूहिक भावनाओं की जीत बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, चतुर्वेदी ने लिखा, "देश की सामूहिक आवाज पहाड़ों को हिला सकती है। उन सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने भारत-पाक क्रिकेट संबंधों के खिलाफ, खासकर पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, कड़ा रुख अपनाया और मैच रद्द करने के मेरे आह्वान का समर्थन किया। ऐसा हुआ है। डब्ल्यूसीएल ने भारत-पाकिस्तान मैच रद्द कर दिया है। जय हिंद।" आज सुबह, डब्ल्यूसीएल ने इस हाई-प्रोफाइल मैच के रद्द होने की पुष्टि की और जनता और भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी मांगी।  

‘स्कूल नहीं, मदरसे बंद कराओ’: नितेश राणे ने फिर साधा राज ठाकरे पर निशाना

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने 'हिंदी' विवाद पर मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) प्रमुख राज ठाकरे को फिर चुनौती दी है। मनसे प्रमुख ने कथित तौर पर एक बयान में कहा कि अगर सरकार फिर हिंदी को स्कूलों में अनिवार्य करेगी तो हम स्कूल बंद कराएंगे। इस पर पलटवार करते हुए नितेश राणे ने कहा कि स्कूल बंद करने की बजाय वो मदरसों को बंद कराएं। मंत्री नितेश राणे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं राज ठाकरे से कहूंगा कि स्कूल बंद कराने की बजाय उन्हें मदरसे बंद कराने चाहिए, क्योंकि मदरसों में असली शिक्षा नहीं होती। वहां मराठी नहीं पढ़ाई जाती, उसकी जगह उर्दू पर जोर दिया जाता है। मदरसों में असल में यही सिखाया जाता है कि आतंकवादी कैसे बनें?" उदाहरण देते हुए नितेश राणे ने कहा, "कुछ महीने पहले बुलढाणा के एक मदरसे में यमन के नागरिक मिले थे। कई मदरसों में तलवारें और जिलेटिन मिलीं। इसलिए उन्हें (राज ठाकरे) हिंदुओं के स्कूल बंद करने के बजाय जिहादियों के मदरसों को बंद करना चाहिए।" उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए आगे कहा, "मदरसों में कोई भी मराठी नहीं सिखाता है। वहां यह पढ़ाया जाता है कि हिंदुओं को कैसे खत्म करना है।" इस दौरान नितेश राणे ने राज ठाकरे की 'कान के नीचे मारो' टिप्पणी पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "कान के नीचे बजाने की आवाज नयानगर से आनी चाहिए, क्योंकि नयानगर में कोई मराठी नहीं बोलता है। वहां बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान मानने वाले लोग भी नहीं हैं। वहां शरिया कानून लागू होता है। कोरोना के समय वहां कोई मास्क नहीं पहनता था। किसी ने वैक्सीन नहीं ली। नयानगर लव जिहाद और लैंड जिहाद का अड्डा है।" पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए नितेश राणे ने यह भी कहा कि भारत को इस्लाम राष्ट्र बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने सभी हिंदुओं से एक साथ आने की अपील की। साथ ही नितेश राणे ने 'एक हैं तो सेफ हैं' का नारा दोहराया। उन्होंने कहा, "अगर मुंबई का महापौर कल कोई अब्दुल या शेख बनता है तो यहां के हिंदू सुरक्षित होंगे क्या? इस बारे में हमें सोचना चाहिए।" उन्होंने राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी और कहा कि राज्य में हमारी सरकार है। कानून व्यवस्था पूरी तरह कंट्रोल में है। कोई भी किसी को मारेगा तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस्लामपुर का नाम बदलने के फैसले पर भी नितेश राणे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "सांगली के इस्लामपुर का नाम ईश्वरपुर करने का फैसला हुआ है। मेरा मानना है कि इस्लामिक कोई भी नाम महाराष्ट्र में नहीं रहना चाहिए।"

विशेष समुदाय को बढ़ावा देने का आरोप, ममता के खिलाफ बोले सरमा

नई दिल्ली  'बांग्ला' भाषा विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारा जवाब दिया है। ममता बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए असम की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए थे। इस पर हिमंता बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए कहा है कि ममता बनर्जी ने सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए बंगाल के भविष्य के साथ समझौता किया है। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "दीदी मैं आपको याद दिला दूं, असम में हम अपने लोगों से नहीं लड़ रहे हैं। हम निर्भीक होकर उस निरंतर और बेलगाम मुस्लिम घुसपैठ का विरोध कर रहे हैं, जो सीमा पार से हो रही है और जिसकी वजह से राज्य की डेमोग्राफी में भयावह बदलाव आया है।" मुख्यमंत्री ने दावा किया कि असम के कई जिलों में अब हिंदू अपनी ही जमीन पर अल्पसंख्यक बनने की कगार पर हैं। यह कोई राजनीतिक नैरेटिव नहीं है, यह एक सच्चाई है। यहां तक कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसी घुसपैठ को बाहरी आक्रमण कहा है। हिमंता ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब हम अपनी जमीन, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए खड़े होते हैं, तो आप इसे राजनीति का रंग देने लगती हैं। उन्होंने कहा, "हम लोगों को भाषा या धर्म के आधार पर नहीं बांटते। असमिया, बांग्ला, बोडो और हिंदी सभी भाषाएं और समुदाय यहां सदियों से साथ रहते आए हैं। लेकिन कोई भी सभ्यता तब तक जीवित नहीं रह सकती जब तक वह अपनी सीमाओं और सांस्कृतिक नींव की रक्षा नहीं करती।" असम के मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, "जहां हम असम की पहचान को बचाए रखने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं, वहीं दीदी आपने बंगाल के भविष्य के साथ समझौता कर लिया है।" हिमंता बिस्वा सरमा ने ममता बनर्जी पर एक खास समुदाय की ओर से अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा देने और वोट बैंक के लिए एक धार्मिक समुदाय का तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर घुसपैठ के बावजूद राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने पर चुप्पी साधने के भी आरोप लगाए। इससे पहले, ममता बनर्जी ने आरोप लगाए कि असम में 'बांग्ला' बोलने वालों को उत्पीड़न की धमकी दी जा रही है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, "सभी भाषाओं और धर्मों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहने वाले नागरिकों को उनकी अपनी मातृभाषा को बनाए रखने के लिए उत्पीड़न की धमकी देना भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। असम में भाजपा का यह विभाजनकारी एजेंडा सारी हदें पार कर चुका है और असम के लोग इसका डटकर मुकाबला करेंगे।"

खरगे का तीखा हमला: मणिपुर नहीं जाना पीएम की प्राथमिकता में नहीं

नई दिल्ली  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम मोदी 42 देशों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन एक बार भी मणिपुर नहीं गए। मणिपुर हिंसा पर केंद्र सरकार को घेरा खरगे ने मणिपुर में एक साल से ज्यादा समय से चल रही हिंसा और अस्थिरता पर चिंता जताई और कहा कि प्रधानमंत्री ने कभी वहां जाकर लोगों का दुख साझा करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने सवाल किया, "42 देशों में घूम आए, मगर मणिपुर जाना जरूरी नहीं समझा। क्या मणिपुर भारत का हिस्सा नहीं है?" गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले वर्ष से लगातार जातीय हिंसा जारी है, जिस पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। संविधान बदलने की कोशिश का आरोप खरगे ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर संविधान को बदलने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "बीजेपी और आरएसएस संविधान बदलना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता उन्हें ऐसा करने नहीं देगी।" उन्होंने लोगों से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील भी की। कांग्रेस बनाम बीजेपी: काम बनाम बातें कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस और भाजपा की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी में लोग काम करते हैं, जबकि मोदी की बीजेपी में लोग सिर्फ बातें करते हैं।" उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देती है और विकास को केंद्र में रखती है।   कर्नाटक सरकार पर लगाए गए आरोपों का खंडन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर वित्तीय संकट के आरोपों को खारिज करते हुए खरगे ने कहा कि भाजपा का यह दावा पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा, "बीजेपी कहती है कि कर्नाटक सरकार कंगाल हो गई है, लेकिन यह सरासर झूठ है। सिद्धारमैया सरकार राज्य को बेहतर दिशा में ले जा रही है।"  

‘काली माँ ढोकला नहीं खाती’, महुआ का व्यंग्यबाण चला पीएम मोदी पर

दुर्गापुर  पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण मां काली और मां दुर्गा के जयघोष के साथ शुरू किया। उनके भाषण में पश्चिम बंगाल को लेकर आगे की रणनीति कि झलक साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने 33 मिनट के भाषण के दौरान एक बार भी सीएम ममता बनर्जी का नाम नहीं लिया। वहीं टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि बंगाली वोटर्स को लुभाने के लिए वह हथकंडा अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, पीएम मोदी जरा लेट हो गए हैं। मोइत्रा ने कहा, बंगाली वोटर्स को लुभाने के लिए मां काली के जयकारे लगवाने में पीएम मोदी जरा लेट हो गए। मां काली ढोकला ना तो खाती हैं और ना ही कभी खाएंगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात से आते हैं और ढोकला वहां की काफी लोकप्रिय डिश है। शुक्रवार को दुर्गापुर की रैली में प्रधानमंत्री ने सुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किस तरह से बंगाल को आजादी से पहले वाला सम्मान और गौरव मिल सकता है। बीजेपी ने इस बार रणनीति में परिवर्तन किया है। वह नहीं चाहती की उसकी वजह से ममता बनर्जी को और लोकप्रियता हासिल हो। ऐसे में बीजेपी ने टीएमसी की कमियों पर फोकस करने का फैसला किया है लेकिन वह ममता बनर्जी का नाम नहीं ले रही है। बीजेपी चाहती है कि इस बार विधानसभा में लड़ाई नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी ना बने बल्कि बदलाव बनाम टीएमसी बन जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल को 5 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि टीएमसी घुसपैठियों का खुलकर समर्थन कर रही है लेकिन जो लोग इस देश के नागरिक नहीं हैं, उनके खिलाफ ऐक्शन जरूर होगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहती है और ये सारी परियोजनाएं उसी दिशा में एक कदम है।  

कमजोर होती विपक्षी दीवार: AAP के बाहर जाने से INDIA ब्लॉक को कितना झटका?

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) ने इंडिया गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है, जिससे विपक्षी गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है। यह घोषणा ठीक उस वक्त हुई जब गठबंधन के घटक दल 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के लिए अपनी संयुक्त रणनीति तय करने के लिए वर्चुअल बैठक करने वाले थे। क्या AAP का यह 'बाय-बाय' विपक्ष की एकता को झटका देगा। आइए समझते हैं। 'गठबंधन एकजुट, लेकिन AAP की राह अलग' कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक में AAP को छोड़कर सभी दल शामिल होंगे। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, 'शनिवार को कई कार्यक्रमों के कारण लोग दिल्ली नहीं आ पाएंगे, इसलिए हम संसद सत्र से पहले ऑनलाइन बैठक करेंगे। इसके बाद दिल्ली में मुलाकात होगी।' उन्होंने दावा किया कि गठबंधन एकजुट है, लेकिन AAP के इस कदम ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। TMC का साथ, बिहार और पहलगाम पर फोकस तृणमूल कांग्रेस (TMC), जिसके कांग्रेस के साथ पहले कुछ तनातनी रही है, ने कहा कि उनके राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में बिहार में मतदाता सूची के विशेष संशोधन, पहलगाम हमले पर चर्चा की मांग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान शांति समझौते के दावों जैसे मुद्दों पर मंथन होगा। 'AAP और कांग्रेस के बीच पहले से तनाव' CPI(M) के महासचिव एमए बेबी ने कहा, 'दिल्ली चुनावों के दौरान कांग्रेस और AAP के बीच तनाव शुरू हो गया था। CPI(M) का मानना है कि इंडिया गठबंधन को मजबूत और विस्तारित करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि दोनों दल अपने मतभेद सुलझा लेंगे।' लेकिन AAP का यह कदम 2024 में नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने के बाद सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। बिहार में AAP का दांव AAP ने ऐलान किया है कि वह बिहार विधानसभा चुनावों में अकेले उतरेगी। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'AAP का बाहर निकलना गठबंधन के लिए दो तरह से नुकसानदायक है। पहला, संसद, खासकर राज्यसभा में गठबंधन कमजोर होगा। दूसरा, AAP आगामी चुनावों में गैर-बीजेपी दलों की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए उम्मीदवार उतार सकती है।' 2026 के चुनावों पर नजर केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं। हालांकि दक्षिण भारत में AAP का प्रभाव कम है, लेकिन एक अन्य कांग्रेस नेता ने कहा कि असम और उन राज्यों में जहां कांग्रेस का बीजेपी से सीधा मुकाबला है, AAP उम्मीदवार उतार सकती है। 'AAP का जाना गठबंधन के लिए फायदेमंद' पंजाब के विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इसे सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, "AAP का बाहर जाना इंडिया गठबंधन को मजबूत करेगा, क्योंकि इससे अस्पष्टता खत्म होगी।" क्या AAP का यह फैसला गठबंधन की एकता को और कमजोर करेगा, या यह गैर-बीजेपी दलों के लिए नई रणनीति बनाने का मौका देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।  

‘अभी बहुत कुछ बाकी है’ — 63 की उम्र में भी चुनावी राजनीति में सक्रिय रहने का संकेत- उमा भारती

 भोपाल  मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने शुक्रवार को वह अभी 63 वर्ष ही हुई हैं, इसलिए आगे चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा से मुझे कोई अलग नहीं कर सकता। मेरे भाजपा से अलग होने की बातें बेबुनियाद हैं। राजनीति की मुख्य धारा में लंबे समय से अनुपस्थित दिख रहीं उमा भारती ने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा 75 वर्ष की उम्र में रिटायर हो जाने संबंधित बयान पर पत्रकारों द्वारा मांगी गई प्रतिक्रिया में कही। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह संघ प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती, लेकिन मेरा मानना है कि शिक्षक, अधिवक्ता, चिकित्सक, कलाकार, कवि, पत्रकार कभी रिटायर नहीं होते। उसी तरह नेता भी कभी रिटायर नहीं हो सकते, उन्हें तब तक जन सेवा करनी होती है जब तक इसकी आवश्यकता होती है। अभी 15-20 साल तक और राजनीति करना है उमा भारती भोपाल में अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अटल जी, आडवाणी जी के आंदोलन में मेरा नाम चला, इसलिए लोग मुझे 75 का समझते हैं पर ऐसा नहीं है, मैं उनसे बहुत छोटी हूं। अभी मुझे 15-20 साल तक और राजनीति करना है, हो सकता है आगे चुनाव भी लड़ूं। उमा ने यह भी कहा कि यह दुष्प्रचार किया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुझसे खफा रहते हैं। अमित शाह और मेरी बात हो गई है, कोई भी अब भ्रम न फैलाए। मैं और मेरे परिवार को सभी सरकारों ने प्रताड़ित किया उमा भारती ने कहा कि मैं किसी भी नेता का नाम नहीं लूंगी, लेकिन मुझे और मेरे परिवार को मध्य प्रदेश की सभी सरकारों में 1990 से 1992 और 2005 से 2013 तक प्रताड़ित किया गया। मेरे भाइयों पर लूट, डकैती के केस बने, जो डकैती हुई ही नहीं, उसका भी मुकदमा किया गया। दिग्विजय सिंह के समय में हत्या तक का केस दर्ज हुआ। आज तक मुझे यह पता नहीं चला कि व्यापम में मेरा नाम क्यों आया। कम से कम सीबीआइ यह जांच तो कर ले। ह्रदय में पीड़ा रहती ही है, मुझे कष्ट देने वालों को मैंने अपने सामने रोते देखा है। गंगा, गोमाता और शराबबंदी पर संघर्ष जारी रहेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशंसा करते हुए उमा भारती ने कहा कि वह अच्छा काम कर रहे हैं। निवेश और रोजगार ला रहे हैं। भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है। राजनीति में शुचिता आ गई है, अब ब्यूरोक्रेसी में लानी जरूरी है। केंद्र सरकार गंगा शुद्धिकरण के लिए काम कर रही है। मप्र सरकार भी गो-संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में सुधार आवश्यक है। प्रदेश में सही तरीके से शराब बंदी लागू की जानी चाहिए। गंगा, गोमाता और शराबबंदी के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।

भाषा की आड़ में बंटवारे की साजिश? उद्धव ठाकरे बोले- नहीं सहेंगे मुंबई से छेड़छाड़

मुंबई  महाराष्ट्र में बढ़ते मराठी भाषा विवाद के बीच पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने केंद्र के ऊपर मुंबई के महत्व को कम करने का आरोप लगाया है। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख नेता ने कहा कि हम तोड़ने की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं लेकिन मुंबई धीरे-धीरे अपना महत्व खो रही है। यहां के उद्योग, धंधों को गुजरात ले जाया जा रहा है। यहां की फिल्म इंडस्ट्री को भी यहां से स्थानांतरित करने की बात चल रही है। ठाकरे ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि मैं यह बात साफ तौर पर कहता हूं कि अगर किसी ने मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की बात की तो हम उसके टुकड़े करेंगे। मीडिया से बात करते हुए ठाकरे ने कहा, "मुंबई के महत्व को कम किया जा रहा है, लेकिन हम ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे। मुंबई देश की वित्तीय राजधानी रही है। इसे देश की वित्तीय राजधानी ही माना जाता है और ऐसा ही रहेगा भी.. इसका बढ़ता महत्व कई लोगों की आंखों में खटकता है।" ठाकरे ने फिल्म इंडस्ट्री को नोएडा में शिफ्ट करने के योगी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर नाम लिए बिना हमला बोला। उन्होंने कहा, "वे मुंबई में स्थित फिल्म उद्योग को कहां स्थानांतरित कर रहे थे? इसे कौन यहां से हटा रहा था? क्या यह सच नहीं है कि इसे हटाने की कोशिश की जा रही है? मुंबई का डायमंड मार्केट किसने छीन लिया? क्या यह सच नहीं है? यहां एक वित्तीय केंद्र स्थापित किया जा रहा था लेकिन आखिर अहमदाबाद को बुलेट ट्रेन कौन दे रहा है? मुंबई के साथ जो भी किया जा रहा है उसे लोग खुले तौर पर देख सकतें हैं, इसमें मुझे कुछ भी अलग से जोड़ने की जरूरत नहीं है।" आपको बता दें उद्धव ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ समय पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया था क्योंकि फडणवीस ने एक दिन पहले ही खुले तौर पर उद्धव को भाजपा के साथ आ जाने का ऑफर दे दिया था। हालांकि बंद दरवाजों के पीछे दोनों नेताओं की क्या बात हुई है इसकी जानकारी बाहर नहीं आई है। इन दोनों नेताओं की इस मीटिंग से पहले मुंबई में ठाकरे बंधुओं का एक ऐतिहासिक सम्मेलन भी हुआ था, जिसमें राज और उद्धव ठाकरे ने दशकों के बाद एक साथ मंच को साझा किया था। उस वक्त दोनों नेताओं ने कहा था कि वह मराठी अस्मिता के लिए एक साथ आए हैं और अब एक साथ ही रहेंगे।