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असम सीएम का आरोप – ममता बनर्जी को बाकी मुसलमानों से नहीं, सिर्फ बांग्ला भाषी मुसलमानों से लगाव

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी को केवल बांग्ला भाषी मुसलमानों की चिंता है। उन्होंने आगाह किया कि अगर ममता मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया और हिंदू-बंगाली उन्हें 'नहीं बख्शेंगे'। शर्मा ने भाजपा पर राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भाषाई पहचान को हथियार बनाने के तृणमल कांग्रेस अध्यक्ष के हालिया आरोप पर कहा, ‘सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी बंगालियों को पसंद करती हैं या केवल मुस्लिम-बंगालियों को। मेरा जवाब है केवल मुस्लिम-बंगालियों को।" उन्होंने कहा, ‘अगर वह मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया लोग और हिंदू-बंगाली उन्हें नहीं बख्शेंगे।" शर्मा ने सवाल किया कि अगर बनर्जी बांग्ला भाषी लोगों की सुरक्षा में रुचि रखती हैं, तो उन्होंने ‘अपने राज्य में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम क्यों नहीं लागू किया?’ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों – हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई – को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है। बनर्जी केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर बांग्ला भाषी प्रवासियों को 'अवैध बांग्लादेशी' या ‘रोहिंग्या’ बताकर व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाती रही हैं।  

राहुल गांधी का आरोप- रॉबर्ट वाड्रा को राजनीतिक कारणों से बनाया गया निशाना

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जारी कार्रवाई को लेकर पहली बार बोला है। उनके खिलाफ दाखिल की गई नई चार्जशीट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करार देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से रॉबर्ट वाड्रा को सरकार द्वारा लगातार निशाना बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने एक बयान में कहा, "मेरे बहनोई रॉबर्ट वाड्रा को इस सरकार ने पिछले दस वर्षों से लगातार प्रताड़ित किया है। अब जो नई चार्जशीट दायर की गई है, वह उसी राजनीतिक विद्वेष और बदले की भावना की अगली कड़ी है।" उन्होंने आगे कहा कि वे रॉबर्ट, प्रियंका गांधी और उनके बच्चों के साथ खड़े हैं और उन्हें इस तरह की मानहानिकारक और राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई से कोई भय नहीं है। राहुल गांधी ने कहा, “मैं जानता हूं कि वे सभी किसी भी तरह के उत्पीड़न को सहने के लिए पर्याप्त साहसी हैं और वे इसे गरिमा के साथ झेलते रहेंगे। अंततः सत्य की जीत होगी।” इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ धनशोधन के एक पुराने मामले में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है, जिसे कांग्रेस ने पहले ही राजनीति से प्रेरित बताया था। ईडी की चार्जशीट पर कोर्ट का संज्ञान रॉबर्ट वाड्रा और अन्य के खिलाफ ईडी द्वारा दाखिल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट पर शुक्रवार को राउस एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने मामले को दस्तावेजों की जांच के लिए 24 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है। विशेष न्यायाधीश सुषांत चंगोत्रा ने चार्जशीट को संज्ञान में लेते हुए अदालत के रिकॉर्ड कीपर को दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक एन. के. मट्टा ने अदालत में पेश होकर मामले की जल्द सुनवाई के लिए तारीख मांगी। क्या है मामला? प्रवर्तन निदेशालय ने 17 जुलाई को रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य व्यक्तियों/कंपनियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की थी। चार्जशीट में जिन लोगों/इकाइयों को आरोपी बनाया गया है उनमें रॉबर्ट वाड्रा, स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि., कारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि., सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क सहित अन्य शामिल हैं। ईडी की शिकायत के अनुसार, यह मामला गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। इसमें आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी के माध्यम से वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव, सेक्टर 83 में 3.53 एकड़ भूमि फर्जी घोषणाओं और प्रभाव का दुरुपयोग करके खरीदी थी। जांच के तहत ईडी ने 16 जुलाई 2025 को एक अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी करते हुए वाड्रा और उनकी कंपनियों से जुड़ी लगभग 37.64 करोड़ की कीमत की 43 अचल संपत्तियां जब्त कर लीं। इन संपत्तियों का संबंध स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी सहित अन्य संबद्ध संस्थाओं से बताया गया है। ईडी का आरोप है कि वाड्रा ने व्यक्तिगत प्रभाव का उपयोग कर उक्त जमीन के लिए कॉमर्शियल लाइसेंस हासिल किया और यह सौदा पूरी तरह से धोखाधड़ी पर आधारित था। कांग्रेस ने भी जताई नाराजगी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की इस नई कार्रवाई की कांग्रेस पार्टी ने भी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।  

गठबंधन में नेतृत्व को लेकर खींचतान, ममता बनर्जी ने फिर जताई अपनी अहमियत, शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई

नई दिल्ली INDIA ब्लॉक पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक संसद में एकजुट नजर आ सकता है. कांग्रेस नेतृत्व की कोशिशों से तो ऐसा ही लग रहा है. 19 जुलाई को इंडिया ब्लॉक की ऑनलाइन मीटिंग होने जा रही है. मुद्दा तो स्वाभाविक है,  ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बिहार में चल रहा SIR तक सब कुछ होगा, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मीटिंग में ममता बनर्जी भागीदारी मानी जा रही है.   कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि विपक्षी गठबंधन के करीब करीब सभी प्रमुख नेता मीटिंग में शामिल होने रहे हैं – और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ऐसे ही सकारात्मक संकेत मिले हैं.  2019 के आम चुनाव के समय से ही ममता बनर्जी अपनी अहमियत का एहसास कराती रही हैं. विशेष रूप से कांग्रेस को, जब मामला पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ा हो.  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद तो ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की मौजूदा लीडरशिप पर भी सवाल उठाने लगीं, और कहने लगीं कि वो विपक्ष के नेतृत्व के लिए तैयार हैं, लेकिन कोलकाता में रहकर ही. विपक्ष के कुछ नेताओं का समर्थन भी ममता बनर्जी को मिल गया.  सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व कांग्रेस के पास है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं. राज्यसभा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मोर्चा संभाले हुए हैं.  मॉनसून सत्र में साथ आया इंडिया ब्लॉक दिल्ली चुनाव के दौरान ही ये चर्चा होने लगी थी कि नतीजे आने के बाद इंडिया ब्लॉक का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ – और, मॉनसून सत्र से पहले विपक्षी गठबंधन के नेता एक बार फिर उस मीटिंग में हिस्सा लेने जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जाने वाली है.  पहले ये मीटिंग दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कराने की कोशिश हुई, लेकिन जब कुछ नेताओं ने कम समय में दिल्ली पहुंचने में असमर्थता जताई तो फॉर्मेट बदलना पड़ा. विपक्ष के ज्यादा से ज्यादा नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब ये मीटिंग ऑनलाइन होने जा रही है.  कांग्रेस सूत्रों की मानें, तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के लगभग सभी नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है – और उनमें तृणमूल कांग्रेस भी है.  शिवसेना-यूबीटी प्रवक्ता संजय राउत ने तो बताया है कि उद्धव ठाकरे दिल्ली भी जा सकते हैं, क्योंकि केसी वेणुगोपाल का फोन आया था. लेकिन समाजवादी  पार्टी के नेता अखिलेश यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही जुड़ने की बात कही गई है.  तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ममता बनर्जी या उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होने की संभावना जताई गई है.  ये साफ नहीं है कि अरविंद केजरीवाल के आम आदमी पार्टी शामिल होगी या नहीं. बीते घटनाक्रमों के हिसाब से देखें तो ऐसी कोई संभावना बनती नहीं है. और, शरद पवार की तरफ से भी दूरी बनाई जा सकती है.  असल में ऑपरेशन सिंदूर पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की कांग्रेस की मांग का शरद पवार ने विरोध किया था. विशेष सत्र को लेकर पहले तो समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी हाथ खींच लिये थे, लेकिन बाद में 16 राजनीतिक दलों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गये संयुक्त पत्र में शामिल हो गये थे. लेकिन शरद पवार और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों ने डिमांड वाले पत्र से दूरी बना ली थी. ममता बनर्जी का शामिल होना अहम क्यों खास बात ये है कि कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक सभी को अपनी हैसियत अच्छी तरह मालूम है. ये भी पता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ पाता, लेकिन ईगो भी तो कुछ होता है.  किसी को विचारधारा का गुरूर है, तो किसी को क्षेत्रीय राजनीति में अपने दबदबे का. कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने अखिल भारतीय नेटवर्क की बदौलत क्षेत्रीय दलों पर गुर्राते हैं, तो क्षेत्रीय दलों के ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेता अपने इलाके में धौंस दिखाने लगते हैं. जब केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी से टकराने की बात आती है तो मजबूरी में सब एक हो जाते हैं, नहीं तो पूरे वक्त आपस में झगड़ते रहते हैं.  साझा मुद्दों पर भी अलग अलग पसंद और नापसंदगी है. राहुल गांधी को अडानी का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण लगता है, तो ममता बनर्जी आंख दिखाने लगती हैं. ममता बनर्जी की अहमियत ऐसी है कि 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद जब लोकसभा स्पीकर के चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर दिया तो ममता बनर्जी नाराज हो गईं. लेकिन, फिर राहुल गांधी के फोन करके मनाने पर मान भी गईं – तब से लेकर अभी तक हर मुद्दे पर ममता बनर्जी तेवर दिखा ही देती हैं.  INDIA ब्लॉक का ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो ममता बनर्जी का इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होना, संसद की कार्यवाही के दौरान भी पूरे विपक्ष, खासकर कांग्रेस, के साथ बने रहने की कोई गारंटी नहीं है.

आम आदमी पार्टी की नई राह, INDIA गठबंधन से किया किनारा, AAP ने छोड़ा गठबंधन

 नई दिल्ली विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक की होने जा रही अगली महत्वपूर्ण बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुद को अलग कर लिया है. पार्टी की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगी. पार्टी ने खुद को इंडिया गठबंधन से अलग कर दिया है. आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इंडिया ब्लॉक से बाहर हो चुकी है. क्या बोले संजय सिंह? आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा, "इंडिया ब्लॉक लोकसभा चुनाव के लिए था. लोकसभा चुनाव के बाद हमने हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़े. इसके अलावा पंजाब और गुजरात में उपचुनाव भी हमने अकेले लड़े. आप अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है. हमारे पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम इंडिया ब्लॉक से बाहर हैं." संसद में रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, "संसदीय मुद्दों पर हम टीएमसी, डीएमके जैसी विपक्षी पार्टियों का समर्थन लेते हैं और वे भी हमारा समर्थन लेते हैं." बीजेपी पर कसा तंज आप नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच पर संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "बीजेपी कायरों की पार्टी है. वे केवल एजेंसियों का इस्तेमाल हमारे खिलाफ कर सकते हैं. हम झुकने वाले नहीं हैं." वहीं. रॉबर्ट वाड्रा के मुद्दे पर संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा, "पिछले 10 सालों से बीजेपी 'जीजाजी' चिल्ला रही है. अगर इतने सालों में वे कोई नतीजे पर नहीं पहुंचे, तो यह उनकी नाकामी है."

ईडी की नजर में फिर AAP, आतिशी का दावा—यह सब गुजरात चुनाव से जुड़ा है

नई दिल्ली  दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आप सरकार के दौरान तीन मामलों में भ्रष्टाचार के आरापों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इन मामलों के मद्देनजर ई़डी पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन से जल्द पूछताछ शुरू कर सकती है। इस बीच आम आधमी पार्टी के नेता आतिशी ने इस जांच के पीछे फिर एक बार बीजेपी का हाथ बताया है। आतिशी का कहना है कि बीजेपी ने फिर एक बार जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया है और इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है। आतिशी ने दावा किया है कि बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ ये जांच इसलिए बैठाई है क्योंकि गुजरात के विसावदर उपचुानव में आप ने जबरदस्त जीत हासिल की है और इस जीत के बाद पार्टी की लोकप्रियता गुजरात में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, वहां बीजेपी ने आप को हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राई स्टेट में पुलिस के संरक्षण में शराब बांटी गई, आप के नेताओं को डराया धमकाया गया, उमसे सेटिंग की कोशिश भी की गई लेकिन इसके बावजूद पार्टी भारी वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब हुई। हम डरने वाले नहीं- आतिशी आतिशी ने दावा किया कि गुजरात में आप की बढ़ती लोकप्रियता से बीजेपी इस कदर बौखला गई है कि अब एक बार फिर फर्जी मामलो में केस दर्ज कराना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, हम डरने वाले नहीं है और ना ही हम दबेंगे। जितनी जांच करानी है करा लो लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं के घर से कुछ नहीं मिलेगा। इन तीन मामलों में दर्ज हुए केस जानकारी के मुताबिक ईडी ने अस्पताल निर्माण, सीसीटीवी लगाने जाने और शेल्टर होम के मामले में कथित घोटाले के मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की है। अस्पताल निर्माण में घोटाले के आरोप में सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन जांच के घेरे में हैं। वहीं सीसीटीवी वाले मामले में सत्येंद्र जैन के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।  

संघ भाजपा के लिए अगली नई पीढ़ी तैयार करना चाहता, रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व की तलाश

नईदिल्ली   कौन बनेगा भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? भगवा पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से लेकर सियासी पंडितों के मन में यह सवाल गूंज रहा है। अभी तक इस पद को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि हाल ही में दो-दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम भाजपा अध्यक्ष के पद के लिए आरएसएस को भेजे गए थे, लेकिन उनमें से किसी के नाम पर भी सहमति नहीं बन सकी है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भेजा गया था। दोनों ही नेताओं को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। आरएसएस का मानना है कि भाजपा को 2029 के बाद के युग के लिए तैयार करना जरूरी है। संघ भाजपा के लिए अगली और एक नई पीढ़ी तैयार करना चाहता है। आरएसएस चाहता है कि भाजपा को एक रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व मिले जिसे पार्टी के कार्यकर्ता भी पसंद करते हों। वह नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा को संभालने में सक्षम हो। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “आरएसएस और भाजपा के वर्तमान नेतृत्व के बीच तीन दौर की बैठकों के बाद भी सहमति नहीं बनी है। आगे और चर्चा होनी है।” चर्चा में और भी कई नाम इससे पहले खबर आई थी कि भाजपा अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला नेता के हाथों में पार्टी की कमान सौंप सकती है। उनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम प्रमुख था। इसके अलावा दो और केंद्रीय मंत्रियों के नाम इस रेस में थे, जनमें मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं। कौन बनेगा यूपी का अध्यक्ष? राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के चयन के साथ-साथ भाजपा के लिए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के अगले प्रदेश अध्यक्ष के नाम की भी चुनौती बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि यूपी में भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच सहमति नहीं बन सकी है। कौन बनेगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष?  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए तैयारी कर रही है। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में इसकी घोषणा बाकी है। इस सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने स्पष्ट कर दिया है कि भगवा पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसा होगा। आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से चूकने के बाद BJP एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। सत्ता में तो है पर पहले जैसा अजेय दबदबा नहीं है। अब जब पार्टी गठबंधन सरकार चला रही है, तो RSS का हस्तक्षेप अधिक स्पष्ट और मुखर हो गया है।  अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों को भाजपा के लिए मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने सत्ता में बढ़ती अहंकार की भावना और संवादहीनता की आलोचना की तो इसे सीधे तौर पर BJP नेतृत्व के व्यक्तित्व केंद्रित मॉडल पर कटाक्ष माना जाने लगा है। क्या चाहता है संघ? >> आरएसएस एक ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो अपेक्षाकृत युवा हो। जो संगठन के साथ जुड़ा हो। वह केवल रणनीतिकार न हो, बल्कि वैचारिक मार्गदर्शक भी हो। >> आरएसएस व्यक्तिगत प्रभुत्व नहीं बल्कि संगठन आधारित नेतृत्व की चाह रखता है। भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कैडर से संवाद, फीडबैक को स्वीकार करने वाला और अंदरूनी लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने वाला नेता हो। >> पार्टी में बढ़ते टेक्नोक्रेट्स और राजनीतिक प्रवासियों की भूमिका पर आरएसएस ने चिंता जताई है। संघ का कहना है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष तकनीक नहीं, तपष्या से बना नेता हो। >> भाजपा का नया अध्यक्ष उन लोगों से जुड़ा हो जो शाखा, प्रांत प्रचारक और बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। उसकी वैचारिक स्पष्टता को भी ध्यान में रखा जाए। समान नागरिक संहिता (UCC), जनसंख्या नीति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर उसके विचार स्पष्ट हों। 28 प्रदेश अध्यक्ष बदले गए BJP ने अब तक 36 में से 28 राज्यों में नए या फिर से नियुक्त अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी महत्वपूर्ण राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात की घोषणा बाकी है। इस जमीनी पुनर्गठन से पार्टी एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए मंच तैयार कर रही है। BJP या RSS में 75 की उम्र से रिटायरमेंट की कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन मोहन भागवत का हालिया बयान जिसमें उन्होंने 75 पार कर चुके लोगों के उत्तराधिकार तय करने की आवश्यकता पर बल दिया, ने हलचल मचा दी है।

राजनीति में नई करवट? उद्धव-फडणवीस मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चा गर्म

मुंबई  महाराष्ट्र में क्या एक बार फिर से सियासत नई करवट लेने वाली है? क्या शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी फिर से साथ आने वाले हैं? यह सब अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र की बीजेपीनीत एनडीए सरकार के साथ आने का ऑफर देने के एक दिन बाद गुरुवार को उद्धव ठाकरे की सीएम से मुलाकात हुई है। महाराष्ट्र सीएम और उद्धव ठाकरे के बीच यह मुलाकात लगभग 20 मिनट तक चली। बुधवार को विधान परिषद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा बनने का ऑफर दिया था। विधान परिषद में नेता विपक्ष अंबादास दानवे के विदाई समारोह में बोलते हुए फडणवीस ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि उद्धव जी, 2029 तक मेरी तो उस तरफ (विपक्ष) आने की संभावना नहीं है, लेकिन अगर आप इधर (सत्ता पक्षा की तरफ) आना चाहें तो रास्ता निकाला जा सकता है। कुछ अलग तरीके से सोचना पड़ेगा। इसके बाद अटकलें लगने लगी थीं कि क्या उद्धव और बीजेपी एक बार फिर से साथ आएंगे? हालांकि, पिछले कुछ सालों में शिवसेना (यूबीटी) चीफ ने इन अटकलों को खारिज किया है। हाल ही में दो दशक बाद मराठी भाषा के मुद्दे पर उद्धव और राज ठाकरे साथ दिखाई दिए थे। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच 20 मिनट तक चली यह मुलाकात किस मुद्दे पर हुई। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई, लेकिन सीएम द्वारा ऑफर दिए जाने के एक दिन बाद हुई इस मुलाकात के बाद तमाम तरह की अटकलें फिर से लगने लगी हैं। दोनों नेताओं के बीच यह मीटिंग विधान परिषद के सभापति राम शिंदे के कार्यालय में हुई और लगभग 20 मिनट तक दोनों बातचीत करते रहे। उल्लेखनीय है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और बीजेपी महाराष्ट्र में लंबे समय तक गठबंधन में रहे। लेकिन 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री के मुद्दे पर दोनों का गठबंधन टूट गया। इसके बाद, उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2022 के मध्य में शिवसेना में बड़ी फूट हुई और सरकार गिर गई। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के कई विधायक और सांसदों ने उद्धव से नाता तोड़ लिया और पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई।  

आदिवासी प्रतिनिधियों से बोले राहुल गांधी – हमारी मेहनत, उनकी माइक पर कहानी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज (गुरुवार, 17 जुलाई को) अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस द्वारा आयोजित एक बैठक में देश भर से आए आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनके प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा समेत अन्य इलाकों से आए आदिवासी नेताओं ने कहा कि उनके जल, जंगल जमीन पर हमले हो रहे हैं और भाजपा शासित राज्यों में उनकी जमीनें छीनकर अडाणी-अंबानी को दी जा रही हैं। एक आदिवासी नेता की शिकायत पर राहुल गांधी ने कहा कि काम हम करते हैं लेकिन लाउडस्पीकर वो (भाजपा वाले) चला रहे हैं क्योंकि उनके पास प्रचार तंत्र है। इस दौरान महाराष्ट्र से आए एक अन्य आदिवासी नेता ने कहा कि कांग्रेस हमारे साथ है, संविधान हमारे साथ है, कानून हमारे साथ है लेकिन जमीन पर उसे अमल में नहीं लाया गया, खासकर महाराष्ट्र में आदिवासी समुदाय उपेक्षित है। उन्होंने कहा कि अगर हमें आदिवासियों के हितों की रक्षा करनी है तो हमें एससी,एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी को भी साथ लेकर चलना होगा, तभी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे और विकास कर सकेंगे। अन्यथा हम बंटकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज में सद्भाव के बिना विकास नहीं हो सकता। आदिवासियों का फंड लैप्स हो रहा उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय के विकास के लिए आया फंड लैप्स हो जाता है या दूसरे मद में खर्च कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के लिए अनिवार्य मुफ्त शिक्षा का कानून लागू कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही आदिवासी समुदाय के अंदर व्याप्त घोर गरीबी को दूर किया जा सकता है। एक अन्य नेता ने कहा कि आदिवासी इलाकों में करीब 10 हजार स्कूलों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूल बंद होने के बाद बच्चों को जबरन सरस्वती शिशु मंदिर भेजा जा रहे है। हमारे जंगल को हमसे छीना जा रहा छत्तीसगढ़ से आई एक महिला नेता ने कहा कि उनके यहां छोटी-बड़ी 153 कंपनियां हैं। वहां के लोगों की यही मांग है कि हम जल, जंगल, जमीन को बचाना चाहते हैं लेकिन जनप्रतिनिधि या राज्य सरकार आदिवासियों की मदद नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि उनके गांव के बगल में अडाणी के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया है और जंगलों की कटाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासियों को खत्म करना चाहती है। हमारे जंगल को हमसे छीनना चाहती है। आदिवासी समुदाय सीधा-सादा है, इसलिए आवाज नहीं उठा पाता है। हमारे हाथ में प्रचार तंत्र नहीं: राहुल एक अन्य नेता ने जैसे ही कहा कि जब तक कांग्रेस की सरकार रही है, तब तक 100 फीसदी आदिवासी समुदाय कांग्रेस के साथ रहा है लेकिन अब वे सभी हमारी पहुंच से बाहर निकल रहे हैं। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे हाथ में प्रचार तंत्र नहीं है। उसका सिस्टम हमारे पास नहीं है। राहुल ने कहा, "प्रचार करने का सिस्टम बीजेपी और आरएसएस के हाथ में है। काम हम करते हैं, लाउडस्पीकर वो चलाते हैं।"  

अमित अमित चावड़ा? जिन्हें दी गई गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी

अहमदाबाद गुजरात कांग्रेस से जुडी बड़ी खबर सामने आई है। अमित चावड़ा को गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे शक्ति सिंह गोहिल का स्थान लेंगे। साथ ही डॉ. तुषार चौधरी को गुजरात में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना एक बार फिर विवादों में, दुकानदार को WhatsApp स्टेटस के कारण पीटा

मुंबई  राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) एक बार फिर विवादों में है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के विक्रोली इलाके में एक राजस्थानी दुकानदार की पिटाई कर दी। दुकानदार के एक व्हाट्सऐप स्टेटस को एमएनएस कार्यकर्ताओं ने मराठी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक मानते हुए उसकी पिटाई कर दी। घटना विक्रोली के टैगोर नगर क्षेत्र की है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। एमएनएस कार्यकर्ताओं ने दुकानदार से जबरन माफी मंगवाई, थप्पड़ मारे और मराठी मानुष के खिलाफ कुछ भी लिखने से बचने की चेतावनी भी दी। पीड़ित दुकानदार मारवाड़ी समुदाय से है। उसने अपने व्हाट्सऐप पर लिखा था, "देख लिया राजस्थानी का पावर। हम मारवाड़ी, हमारे सामने किसी की नहीं चलती।" इस स्टेटस को एमएनएस कार्यकर्ताओं ने मराठी लोगों का अपमान मानते हुए हमला कर दिया। वीडियो में दुकानदार कानों को पकड़कर माफी मांगते हुए कहता है, “ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।” वीडियो बना कर खुद ही किया वायरल एमएनएस कार्यकर्ताओं ने इस पूरी घटना का वीडियो खुद बनाया और एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाया। इसमें मराठी गीत और संदेश लिखा है, “जो मराठी लोगों के खिलाफ बोलेगा, उसके साथ ऐसा ही होगा।” इस वीडियो में एमएनएस का लोगो भी स्पष्ट रूप से दिखता है। राज ठाकरे खुद कार्यकर्ताओं को ऐसी रिकॉर्डिंग से मना कर चुके हैं ताकि कानूनी रूप से फंसने से बचा जा सके। इसके बावजूद एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने ऐसा किया है। मारपीट के बाद दुकानदार को पुलिस स्टेशन ले जाया गया और शिकायत दर्ज की गई। स्थानीय एमएनएस नेता विश्वजीत ढोलम ने दुकानदार के कारोबार के बहिष्कार की अपील की और कहा, “ऐसे व्यापारियों से सामान न खरीदें जो मराठी लोगों का अपमान करते हैं।” आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल के कुछ समय में मराठी भाषा और पहचान के नाम पर हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। एक जुलाई को ठाणे में एक स्ट्रीट फूड वेंडर की इसलिए पिटाई हुई क्योंकि उसने मराठी बोलने से इनकार कर दिया। इस घटना में शामिल एमएनएस के सात कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। बीते 8 जुलाई के मीरा-भायंदर में एमएनएस, शिवसेना (उद्धव) और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने मराठी अस्मिता के समर्थन में मार्च निकाला। वहीं, विरार स्टेशन के पास उत्तर प्रदेश के ऑटो चालक ने "मैं हिंदी बोलूंगा" कहा, तो एमएनएस और शिवसेना (उद्धव गुट) के कार्यकर्ताओं ने उसे पीटकर सार्वजनिक माफी मंगवाई। शिवसेना (UBT) के स्थानीय प्रमुख उदय जाधव ने कहा, “जो महाराष्ट्र और मराठी भाषा का अपमान करेगा, उसे शिवसेना स्टाइल में जवाब मिलेगा।” इन घटनाओं ने एक बार फिर मराठी बनाम बाहरी बहस को हवा दी है।