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मुंबई पर मराठाओं का दावा खारिज, जजों पर बरसे संजय राउत

मुंबई  मराठा आंदोलन को लेकर आए बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को शिवसेना (UBT) ने चुनौती दी है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि महाराष्ट्र को मुंबई हाईकोर्ट ने नहीं दी है। उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण पूरा शहर ठहर गया है और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं है तथा इसमें सभी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। राउत ने कहा, 'मुंबई खाली नहीं हो सकती। मुंबई जो है वो महाराष्ट्र और मराठी लोगों को हाईकोर्ट ने नहीं दी है। यह मुंबई 106 जो शहीद हो गए मराठी हमारे और हजारों लोग आंदोलन में आए थे लाखों लोग, इसके बाद यह मुंबई महाराष्ट्र को और मराठी मानुस को मिली है। तो महाराष्ट्र की सरकार तय कर सकती है। हाईकोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर आप गोली मारोगे, तो महाराष्ट्र में बड़ा संघर्ष हो जाएगा। जिस हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता बैठे हैं, उस न्यायालय से हम क्या अपेक्षा कर सकते हैं।' पैदल कोर्ट पहुंचे जज मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों के कारण न केवल आम लोगों को, बल्कि उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण मुंबई की सड़कों पर कब्जा कर लिया है और एक न्यायाधीश की कार को रोक दिया, जिसके कारण न्यायाधीश को उच्च न्यायालय भवन तक पहुंचने के लिए थोड़ी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम की पीठ ने कहा कि मुंबई शहर 'सचमुच पंगु हो गया है और उच्च न्यायालय वस्तुतः घेरेबंदी में है।' पीठ ने कहा कि हर सड़क विशेषकर आजाद मैदान, सीएसटी, मंत्रालय, फ्लोरा फाउंटेन, मरीन ड्राइव, पी'डेमेलो रोड का पूरा क्षेत्र प्रदर्शनकारियों से भरा पड़ा है जो सड़कों पर नाच रहे हैं, कबड्डी खेल रहे हैं, खाना बना रहे हैं, मुख्य सड़कों पर स्नान कर रहे हैं। क्या बोला हाईकोर्ट सोमवार को उच्च न्यायालय ने मुंबई में सामान्य स्थिति बहाल करने का आग्रह किया और जरांगे तथा उनके समर्थकों को हालात सुधारने तथा मंगलवार दोपहर तक सभी सड़कें खाली करने का अवसर दिया। जरांगे 29 अगस्त से दक्षिण मुंबई स्थित आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने दावा किया कि जरांगे ने सोमवार से पानी पीना बंद कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने विशेष सुनवाई में कहा कि प्रदर्शनकारी आंदोलन के लिए निर्धारित स्थान आजाद मैदान पर नहीं रुके हैं और उन्होंने दक्षिण मुंबई के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अवरुद्ध कर दिया है। अदालत ने कहा, 'स्थिति गंभीर है और मुंबई शहर लगभग ठहर सा गया है।' अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और चर्चगेट रेलवे स्टेशन, मरीन ड्राइव और उच्च न्यायालय भवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जमा हो गए हैं। अदालत ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं है और जरांगे तथा अन्य प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देते समय प्राधिकारों द्वारा निर्धारित प्रत्येक शर्त का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा, 'हम जरांगे और उनके समर्थकों को हालात को तुरंत सुधारने और यह सुनिश्चित करने का अवसर दे रहे हैं कि मंगलवार दोपहर तक सड़कें खाली हो जाएं।' पीठ ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि अगर तब तक जरांगे की तबीयत बिगड़ती है, तो सरकार उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान करेगी।  

दो-दो वोटर कार्ड मामले में अमित मालवीय ने शेयर किया सबूत

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला गर्माया हुआ है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए लगातार ही हमलावर है. उधर बीजेपी ने अब उल्टे कांग्रेस पार्टी पर ही गंभीर आरोप लगा दिए हैं. बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक्टिव वोटर आईडी कार्ड (EPIC नंबर) मौजूद हैं. अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वोटर लिस्ट शेयर करते हुए चुनाव आयोग से इसकी जांच की मांग की है. मालवीय के मुताबिक, पवन खेड़ा का नाम एक ओर जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में दर्ज है, तो दूसरी ओर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में भी एक्टिव है. दोनों कार्ड पर पिता का नाम एचएल खेड़ा दर्ज है, जिससे यह साफ हो जाता है कि कांग्रेस प्रवक्ता के पास दो वोटर आईडी हैं. अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि यह न केवल चुनावी कानून का उल्लंघन है, बल्कि इसमें दोहरी वोटिंग की आशंका भी पैदा होती है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले की तुरंत जांच करनी चाहिए. मालवीय का राहुल गांधी पर निशाना बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे बार-बार ‘वोट चोरी’ का शोर मचाते हैं, लेकिन खुद कांग्रेस नेताओं का इतिहास मतदाता सूची में गड़बड़ियों से भरा पड़ा है. मालवीय ने एक बार फिर अपना पुराना आरोप दोहराया कि सोनिया गांधी का नाम भी वोटर लिस्ट में उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले ही दर्ज हो गया था. मालवीय ने आगे कहा कि कांग्रेस लगातार झूठ फैलाकर और भ्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत की चुनावी प्रक्रिया को बदनाम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैधता देकर चुनावी तंत्र को कमजोर किया और अब उन्हें डर है कि चुनाव आयोग द्वारा की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया उनकी पोल खोल देगी. ‘कांग्रेस ही असली वोट चोर’ मालवीय ने कहा कि पवन खेड़ा न केवल दो वोटर आईडी रखने के अपराध में शामिल हैं, बल्कि बिहार में भ्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोटरों को गुमराह कर रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं और भारत की मजबूत चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. स्पष्ट रूप से कहें तो राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा में अपने झूठे आरोपों की जांच के लिए अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं की है. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में गलत काम के आरोपों को पहले ही खारिज कर दिया है. मालवीय ने आगे कहा कि सच यह है कि कांग्रेस ही असली ‘वोट चोर’ है. वे सभी को अपने जैसा बदनाम करना चाहते हैं. लंबे समय तक उन्होंने अवैध घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैधता देकर हमारी चुनावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया और जनादेश चुराया. अब उन्हें डर है कि चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया उनकी सच्चाई उजागर कर देगी. यह समय है कि भारत समझे कि राहुल गांधी हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं. खबर लिखे जाने तक मालवीय के इस आरोप पर कांग्रेस या पवन खेड़ा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.  

मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- भाजपा धीरे-धीरे लोकतंत्र को खत्म कर रही है

पटना  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को आरोप लगाया कि भाजपा जब से सत्ता में आई है, किस्तों में लोकतंत्र को समाप्त करती जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह रोज चोरी के नए-नए तरीके अपनाती है। पटना में 'वोटर अधिकार यात्रा' के समापन पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 15 दिन तक चली इस यात्रा ने पूरे देश को जगा दिया। इसमें भाजपा ने रुकावट डालने की कोशिशें की। हमारे कांग्रेस ऑफिस पर हमला हुआ। लेकिन, बिहार के लोगों ने यात्रा को पूरी तरह सफल बनाया। उन्होंने कहा कि देश में जब भी कमजोर तबकों के हुकूक पर खतरा पैदा होता है, राहुल गांधी उनकी आवाज बुलंद करते हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’, ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ और ‘जय बापू-जय भीम-जय संविधान’ और अब ये यात्रा इसी कड़ी का हिस्सा है। यहां हमें साफ दिख रहा है कि बिहार की जनता इस ‘डबल इंजन की भ्रष्ट सरकार’ को जड़ से उखाड़ फेंकने का काम करेगी। उन्होंने एसआईआर की चर्चा करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष सही था, ये सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना। हम लोग चाहते थे कि संसद में बिहार की 'वोट चोरी' पर चर्चा हो। सारा विपक्ष आंदोलन करता रहा, लेकिन ये लोग चुनाव आयोग को बचाते रहे, मगर चर्चा नहीं होने दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि वह खुद चलकर हम लोगों के पास आए थे। हालांकि, वे डरकर पलट गए। उनमें अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत नहीं थी। समाजवादी विचारधारा छोड़कर वे आरएसएस, भाजपा के पीछे चले गए। बिहार की जनता ने समझ लिया है कि ये ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ हैं। बिहार ही नहीं, कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश में इनकी असलियत लोगों ने जान ली है। लोगों को अधिक समय के लिए बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम नरेंद्र मोदी को 'चुनावी प्रधानमंत्री' बताते हुए कहा कि वे हमेशा चुनाव मोड में रहते हैं। बोगस वोटरों से लेकर झूठे प्रचार, झूठी घोषणाएं, झूठी योजनाएं और जुमलेबाजी करते हैं। उन्होंने जोर देकर लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि वोट का यह अधिकार गरीबों, एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं का बुनियादी हक है। संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आगे आना होगा।

सीपी राधाकृष्णन पर सुदर्शन रेड्डी का वार, बोले- विपक्षी कैंडिडेट तो बोलते ही नहीं

नई दिल्ली  विपक्षी INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट सुदर्शन रेड्डी ने सत्ता पक्ष के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन पर तंज कसा है। उन्होंने सोमवार को कहा कि मेरे प्रतिद्वंद्वी तो बोलते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों कैंडिडेट बोलें तो एक डिबेट हो सकती है। इस तरह हैदराबाद पहुंचे रेड्डी ने राधाकृष्णन को अपने साथ डिबेट करने का चैलेंज दे दिया। रेड्डी ने कहा कि मैं भले ही विपक्षी दलों का कैंडिडेट हूं, लेकिन मुझे INDIA ब्लॉक के बाहर के दलों जैसे आम आदमी पार्टी का भी समर्थन हासिल है। रेड्डी ने कहा कि मेरी लड़ाई संविधान को बचाने के लिए है और मैं शुरुआती दिनों से ही इसके लिए संघर्ष करता रहा हूं। यही दलील देते हुए सुदर्शन रेड्डी ने सभी दलों के सांसदों पत्र लिखा है और उपराष्ट्रपति चुनाव में खुद को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई भारत के बीते कुछ सालों के इतिहास में सबसे साफ-सुथरी और शानदार चुनावी लड़ाई होगी। रेड्डी ने पहले ही कहा था कि वह सभी दलों के सांसदों को चिट्ठी लिखेंगे और मांग करेंगे उन्हें ही वोट दें। रेड्डी ने मुंबई में एक आयोजन में कहा था कि यदि मुझे आप लोगों ने जिताया तो यह संविधान को बचाने के लिए दिया गया वोट होगा। यदि मुझे उपराष्ट्रपति के तौर पर काम करने का मौका मिला तो मैं संविधान की रक्षा करूंगा। रेड्डी ने कहा कि उनका संविधान के साथ सफर 1971 में शुरू हुआ था, जब वे आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के मेंबर बने और वकालत की शुरुआत की थी। इसके बाद वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मैं कभी किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन का सदस्य नहीं रहा हूं और भविष्य में भी बनने का इरादा नहीं है। इसी वजह से मैं ही एकमात्र उम्मीदवार हूं जो सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपने योग्यता के आधार पर समर्थन की अपील कर सकता हूं। विपक्षी उम्मीदवार ने कहा कि वे संसद के दोनों सदनों के प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत पत्र लिखेंगे और उनकी अंतरात्मा को संबोधित करते हुए अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौका मिला तो वे भाजपा नेतृत्व से मिलने को तैयार हैं। यह उपराष्ट्रपति चुनाव हाल ही में जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे की वजह से हो रहा है। विपक्ष ने इसे वैचारिक लड़ाई बताया है, लेकिन आंकड़े सत्तारूढ़ भाजपा और उसकी लीडरशिप वाले NDA गठबंधन के पक्ष में हैं, जिसने महाराष्ट्र राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को 9 सितंबर को होने वाले चुनाव हेतु अपना उम्मीदवार बनाया है।  

पिछली बार मामूली अंतर से जीती गई 36 सीटें, विधानसभा चुनाव में फिर छिड़ेगी जंग

पटना पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीती गई तीन दर्जन से अधिक सीटों पर इसबार भी घमासान के आसार हैं। ये ऐसी सीटें हैं, जिन पर हार जीत का फैसला तीन हजार के करीब या उससे भी कम वोटों के अंतर से हुआ। इस श्रेणी में महागठबंधन के हिस्से की 17 सीटें हैं। एक निर्दलीय और 19 एनडीए के पास हैं। सबसे कम 12 वोटों के अंतर से हिलसा में जदयू उम्मीदवार कृष्ण मुरारी शरण की जीत हुई थी। उन्होंने राजद के शक्ति सिंह यादव को पराजित किया था। राजद ने उस समय भी धांधली का आरोप लगाया था। दो चुनावों के बीच गठबंधनों के पार्टनरों के बदलाव से भी अगला चुनाव प्रभावित होगा। सिमरी बख्तियारपुर में विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी केवल 1759 वोटों के अंतर से चुनाव हारे। राजद के चौधरी युसूफ सलाउद्दीन ने उन्हें पराजित किया था। इसी तरह सुगौली में राजद के शशिभूषण सिंह ने विकासशील इंसान पार्टी के रामचंद्र सहनी को 3447 वोटों के अंतर से पराजित किया।अब विकासशील इंसान पार्टी और राजद में दोस्ती है। दूसरे नम्बर की इन सीटों के लिए मुकेश सहनी राजद पर निर्भर हो गए हैं। कम वोटों के अंतर से जीतने वाली महागठबंधन की अन्य सीटें हैं:     सिकटा- वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता- भाकपा माले- 2302     कल्याणपुर- मनोज कुमार यादव- राजद -1197     बाजपट्टी, मुकेश यादव- राजद- 2704     किशनगंज- इजरारूल हक- कांग्रेस-1381     बखरी- सूर्यकांत पासवान-भाकपा -777     खगड़िया- छत्रपति सिंह यादव- कांग्रेस- 3000     राजापाकर- प्रतिमा दास-कांग्रेस 1746     भागलपुर- अजित शर्मा- कांग्रेस-1113     डेहरी आन सोन- फतेह बहादुर कुशवाहा- राजद -464     औरंगाबाद- आनंद शंकर सिंह- कांग्रेस-2243     अलौली- रामवृक्ष सदा- राजद- 2773     महाराजगंज- विजय शंकर दुबे- कांग्रेस-1976     सिवान- अवध बिहारी चौधरी- राजद-1973 दरभंगा ग्रामीण से राजद के ललित कुमार यादव की जीत 2141 वोटों के अंतर से हुई थी। उस समय के जदयू उम्मीदवार डॉ. फराज फातमी अब राजद में हैं। राजद उन्हें दरभंगा जिले की किसी अन्य सीट से उम्मीदवार बनाएगा। रामगढ़ का हिसाब हो गया है। वहां राजद के सुधाकर सिंह 189 वोटों के अंतर से जीते थे। वे लोकसभा के लिए चुन लिए गए। उप चुनाव में भाजपा के हिस्से में यह सीट आ गई। रामगढ़ की तरह कुड़हनी विधानसभा की सीट भी उप चुनाव में राजद के हाथ से निकल गई। 2020 में राजद के डा. अनिल सहनी 712 वोटों से जीते थे। कानूनी प्रक्रिया में उनकी सदस्यता समाप्त हुई। उप चुनाव हुआ तो भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता जीत गए। एनडीए की सीटें और वोटों का अंतर     परिहार- गायत्री देवी- भाजपा-1569     रानीगंज- अचमित सदा- जदयू-2304     प्राणपुर- निशा सिंह- भाजपा-2972     अलीनगर- मिश्रीलाल यादव- भाजपा-3101     बहादुरपुर- मदन सहनी- जदयू-2629     सकरा- अशोक चौधरी- जदयू-1537     भोरे- सुनील कुमार-जदयू-462     हाजीपुर- अवधेश सिंह-भाजपा-2990     बछवाड़ा- सुरेश मेहता-भाजपा-484     परवत्ता- संजीव कुमार- जदयू-951     मुंगेर- प्रणव कुमार दास-भाजपा-1244     बरबीघा-सुदर्शन कुमार-जदयू-113     आरा-अमरेंद्र प्रताप सिंह-भाजपा-3002     टिकारी-अनिल कुमार-हम-2630      झाझा-दामोदर राऊत-जदयू-1679। मटिहानी से लोजपा राजकुमार सिंह-333 वोटों के अंतर से जीते थे। दूसरे नम्बर पर जदयू के नरेंद्र कुमार सिंह थे। राज कुमार सिंह अभी जदयू में हैं।नरेंद्र कुमार सिंह राजद में शामिल हो गए। चकाई से सुमित कुमार सिंह ने निर्दलीय की हैसियत से राजद की सावित्री देवी को 581 वोटों के अंतर से पराजित किया था। सुमित ने नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन किया। अभी मंत्री हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भारी संख्या में आवेदन, चुनाव आयोग 30 सितंबर को लाएगा अंतिम लिस्ट

नई दिल्ली बिहार में चुनाव आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 1.98 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। आयोग ने शनिवार को बताया कि इस दौरान नाम शामिल करने के लिए लगभग 30,000 आवेदन भी आए हैं। मतदाता सूची का मसौदा एक अगस्त को प्रकाशित किया गया था और यह एक सितंबर तक व्यक्तियों तथा राजनीतिक दलों की ओर से दावों और आपत्तियों के लिए खुला रहेगा। चुनाव कानूनों के अनुसार, लोगों और दलों को उन नामों को चुनौती देने का अधिकार है, जिन्हें वे मसौदा सूची में अपात्र मानते हैं। कौन-कौन नाम शामिल करवा सकता है? इसी प्रकार, जो लोग खुद को पात्र समझते हैं लेकिन सूची से बाहर रह गए हैं, वे भी नाम शामिल करने की मांग कर सकते हैं। बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंटों(बीएलए) ने अब तक बिहार के मतदाताओं की मसौदा सूची में शामिल करने के लिए 25 और बाहर करने के लिए 103 दावे दायर किए हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य के 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 प्रतिशत ने अब तक सत्यापन के लिए अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। SC का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के इच्छुक लोगों से आधार कार्ड या सूचीबद्ध 11 दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज स्वीकार करे। निर्वाचन आयोग ने शीर्ष कोर्ट से कहा है कि वह चुनावी राज्य बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर भरोसा जताए।  

उमा भारती ने पटवारी को कहा ‘बेचारा’, राजनीति में उम्र कोई बाधा नहीं—उन्होंने बोला

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र जीतू पटवारी के बयान पर भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाटवारी खुद नहीं जानते कि वे क्या बोल रहे हैं। वे बिना सोचे-समझे बयान देते हैं। उमा भारती ने उन्हें “बेचारा” बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब मध्य प्रदेश में समाप्त हो चुकी है और पटवारी ही उसके इकलौते नेता बचे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के कई दिग्गज नेता अब राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, जबकि नई पीढ़ी के नेता भाजपा से जुड़ रहे हैं। जो कांग्रेस नेता भाजपा में जगह नहीं पा रहे वे कांग्रेस में ही छूट गए हैं। राजनीति में योगदान की कोई उम्र तय नहीं  सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर चल रही बहस पर भी उमा भारती ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कोई भी संगठन, राजनीतिक दल या संस्था सेवानिवृत्ति की आयु तय कर सकती है, लेकिन योगदान की उम्र तय नहीं की जा सकती। उनके अनुसार राजनीति एक ऐसा मंच है, जहां योगदान देने की क्षमता ही असली पहचान है। उमा ने कहा कि डॉक्टर, टीचर, वकील की योगदान की क्षमता कभी खत्म नहीं होती। बता दें हाल ही में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि 75 साल की उम्र में पद छोड़ देंगे या किसी को इस उम्र में रिटायर्ड हो जाना चाहिए। संघ प्रमुख की इस टिप्पणी ने उनकी कुछ दिनों पहले दी उनकी टिप्पणी पर चल रही अटकलों पर उम्र विराम लगा दिया। 

न उमर, न महबूबा… जम्मू-कश्मीर में हर जगह दिख रहे एकनाथ शिंदे के पोस्टर

श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हों यो पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, इन दिनों जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर इनकी तस्वीर जितनी नहीं दिखती है उससे कहीं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की दिख रही है। सीमावर्ती राज्य में शिवसेना अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास एक होटल में आयोजित बैठक में करीब 700 लोग शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता खुद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने की। शिवसेना के स्थानीय नेता याक़ूब कुलगाम के रहने वाले हैं और पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) में थे। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि बैठक से पहले एक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा, “हमने बहुत सारे होर्डिंग्स लगाए ताकि लोग जान सकें कि शिवसेना कश्मीर में आ गई है। इन होर्डिंग्स के लिए हमने कोई भुगतान नहीं किया। हमारा मकसद था कि लोग इन्हें देखें और चर्चा करें।” कश्मीर में शिंदे की सक्रियता याक़ूब ने कहा कि एकनाथ शिंदे अक्सर घाटी का दौरा करते रहते हैं और यहां पार्टी को मजबूत करने के लिए गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि, “पहले शिवसेना को लेकर कश्मीर में कई भ्रांतियां थीं, लेकिन शिंदे जी के लगातार दौरों के कारण लोग अब पार्टी को सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।” जून 2023 में शिंदे ने श्रीनगर में शिवसेना के 15 राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। यह महाराष्ट्र से बाहर शिवसेना की पहली बड़ी बैठक थी। नवंबर 2023 में शिंदे ने LoC के नजदीक कुपवाड़ा में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया था। शिवसेना कश्मीर के अध्यक्ष मोहम्मद शफी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि शिंदे अगले महीने एक बार फिर कश्मीर दौरे पर आएंगे। उन्होंने बताया, “आदिल शाह के परिवार का घर लगभग पूरा हो गया है। शिंदे जी उसे देखना चाहेंगे।” गौरतलब है कि आदिल शाह पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों में शामिल थे।

1991 फ्रॉड वाले बयान पर कांग्रेस बैकफुट, BJP को मिला बड़ा मौका

बेंगलुरु  एक तरफ कांग्रेस यह आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरी है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर वोट चोरी कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने ऐसा बयान दिया है, जिससे उनकी पार्टी पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार कहा कि 1991 के लोकसभा चुनाव में फ्रॉड के चलते हार का सामना करना पड़ा था। अब उनके इस बयान पर विवाद हो रहा है क्योंकि तब कांग्रेस की ही सरकार थी और सिद्धारमैया तब जनता दल सेक्युलर के कैंडिडेट थे। वह कोप्पल सीट से चुनाव में उतरे थे। लेकिन उन्हें बसवराज पाटिल के मुकाबले 11,200 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जो कांग्रेस के कैंडिडेट थे। बसवराज पाटिल को कुल 2.41 लाख वोट मिले थे, जबकि सिद्धारमैया को 2 लाख 30 हजार मत ही मिले थे। उस चुनाव के नतीजे के बाद सिद्धारमैया ने हाई कोर्ट में केस भी दाखिल किया था और आयोग की तरफ से 22,243 वोट खारिज करने पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि यदि इन वोटों को अवैध न घोषित किया जाता तो वह खुद बड़े अंतर से जीत हासिल करते। उनका यह भी कहना था कि बसवराज पाटिल की उम्मीदवारी ही अवैध थी क्योंकि उन्हें लोकसभा स्पीकर ने दलबदल के चलते अयोग्य घोषित किया था। उनका कहना था कि बसवराज पाटिल को हमेशा के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। ऐसे में वह फिर से चुनाव कैसे लड़ सकते हैं। उन्होंने कर्नाटक के पूर्व एडवोकेट जनरल रवि वर्मा कुमार के सम्मान समारोह में कहा, 'मैं रवि वर्मा से उस समय लीगल सलाह मांगी थी, जब मुझे कानूनी समस्याएं झेलनी पड़ी थीं। मैंने 1991 का चुनाव लड़ा था और फ्रॉड से हरा दिया गया। तब रवि वर्मा कुमार ने मुझे मदद की थी।' उनके इस बयान को भाजपा ने हाथोंहाथ लिया है और इसके बहाने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने कहा कि यह वीडियो प्रूफ है कि कैसे कांग्रेस वोट चोरी करती रही है। आज यही लोग वोट अधिकार रैली निकाल रहे हैं। आखिर यह कितनी बड़ी विडंबना है। यही नहीं उन्होंने लिखा कि सिद्धारमैया तो तब बैलेट पेपर से हुई वोट चोरी में हार गए थे। इसी बैलेट पेपर की व्यवस्था को लाने की बात राहुल गांधी करते हैं। कर्नाटक के नेता विपक्ष आर. अशोक ने भी इस बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इसी पार्टी ने सिद्धारमैया को 1991 में चुनाव हरवा दिया था।  

आम आदमी पार्टी को गुजरात में बड़ा झटका, रावल ने छोड़ी पार्टी

अहमदाबाद गुजरात में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता चेतन रावल ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। रावल ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, लेकिन वास्तविक वजहों को लेकर अटकलों को दौर शुरू हो गया है। गुजरात में पार्टी के मुखिया इशुदान गढ़वी को भेजे इस्तीफे में रावल ने कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों की वजह से तत्काल प्रभाव से आम आदमी पार्टी से से इस्तीफा दे दिया है। चेतन रावल पूर्व टीवी एक्टर हैं और गुजरात के अहमदाबाद में प्रमुख राजनीतिक शख्सियत हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर 'आप' का दामन थाम लिया था। वह अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य महासचिव भी रह चुके हैं। वह असारवा और खाडिया सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। गौरतलब है कि रावल के पिता प्रबोध रावल भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और गुजरात गृह मंत्री भी रह चुके हैं। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह कांग्रेस में सक्रिय हुए और अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष बने। बाद में खुद को दरकिनार बताते हुए वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अब तीन साल बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली पार्टी छोड़ दी है। रावल का अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है।