samacharsecretary.com

SC ने पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत, शर्त—पुलिस बुलाने पर थाने में हाजिर होना अनिवार्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. 30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता. अदालत ने निर्देश दिया है कि क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन केस नंबर 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।  कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि दोनों पक्षों (खेड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी) की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन किसी की आजादी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. दरअसल, खेड़ा के खिलाफ यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइंया से जुड़े बयान को लेकर दर्ज किया गया था. खेड़ा ने रिंकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाए थे कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं।  जमानत की शर्तें – खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा. – जब भी पुलिस स्टेशन में बुलाया जाए, उपस्थित होना पड़ेगा. – वह किसी भी तरह से सबूतों को प्रभावित या छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे. – अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. – साथ ही, ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें भी लागू कर सकता है. – अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है. – ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा. अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है.   निचली अदालत ने नहीं मिली थी राहत आपको बता दें कि पवन खेड़ा ने इससे पहले असम की निचली अदालत और गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी अग्रिम जमानत को लेकर याचिका दायर की थी. दोनों अदालतों से राहत ना मिलने की वजह से वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए खेड़ा को अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। 

‘पवन खेड़ा ने निर्दोष महिला को विवादों में घसीटा’, हाईकोर्ट जज ने कस्‍टडी में लेकर पूछताछ का दिया आदेश

गुवाहाटी गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी. मामला कथित तौर पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने और दस्तावेजों में गड़बड़ी से जुड़ा है. फैसला सुनाते वक्‍त कोर्ट ने पवन खेड़ा पर सख्‍त टिप्‍पणी करते हुए कहा कि उन्‍होंने एक निर्दोष महिला को राजनीतिक लाभ के लिए विवादों में घसीटा है. जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की सिंगल बेंच ने 21 अप्रैल को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल मानहानि का नहीं, बल्कि जालसाजी और फर्जी दस्तावेज रखने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है।  गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पवन खेड़ा पुलिस जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं और इस मामले में उनकी हिरासत में पूछताछ (कस्टोडियल इंटेरोगेशन) आवश्यक है. अदालत के अनुसार, यह जानना जरूरी है कि कथित रूप से फर्जी दस्तावेज किसने जुटाए और इस पूरे मामले में उनके साथ और कौन लोग शामिल हैं. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि रिंकी भुइयां शर्मा किसी राजनीतिक पद पर नहीं हैं, इसलिए इस मामले को राजनीतिक बयानबाजी के रूप में नहीं देखा जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यदि मामला सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ होता, तो इसे राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता था, लेकिन यहां एक निर्दोष महिला को राजनीतिक लाभ के लिए विवाद में घसीटा गया है।  पवन खेड़ा साबित नहीं कर सके अपना दावा अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा अब तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि शिकायतकर्ता के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं जैसा कि उन्होंने दावा किया था. अदालत ने यह भी पाया कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह लगे कि खेड़ा को अपमानित करने या नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आरोप लगाए गए हैं. सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की थी. उन्होंने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और उनके मुवक्किल के फरार होने की कोई आशंका नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।  एडवोकेट जनरल की जोरदार दलील असम सरकार की ओर से महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर आपराधिक धाराओं से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी शामिल हैं. उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। 

पवन खेड़ा की बढ़ी मुश्किलें, SC ने अग्रिम जमानत पर लगाई रोक, तुषार मेहता ने दी अहम दलील

नई दिल्ली कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगता दिख रहा है. पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट में मिली जमानत के खिलाफ दायर असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच के सामने असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘अपराध असम में हुआ, मामला भी वहीं दर्ज है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?’ उन्होंने यह भी पूछा कि पवन खेड़ा ने असम हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।  तुषार मेहता ने कोर्ट से तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद फिलहाल उस आदेश पर रोक लगा दी है।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की है, जिस पर अब अदालत विचार करेगी।  जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इन बातों को सुनने के बाद यह माना कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से मामला असम की अदालत का ही बनता है. अब पवन खेड़ा के पास कोई और रास्ता नहीं बचा है, उन्हें राहत के लिए असम की कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही पड़ेगा।  यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी के खिलाफ कुछ गंभीर बातें कही थीं. इसी को लेकर असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. अब मामला वापस वहीं पहुंच गया है जहां से शुरू हुआ था. आने वाले तीन हफ्ते पवन खेड़ा के लिए काफी भागदौड़ भरे हो सकते हैं क्योंकि उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने के साथ-साथ असम की कोर्ट में भी अपना पक्ष रखना होगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़ा है. असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।  तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को यह राहत इस आधार पर दी थी कि वे असम जाकर सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें. सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।  वहीं, असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट में ही इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया था और कहा था कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, ऐसे में असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।  यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया है. असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखा टकराव देखने को मिला था. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई को सही ठहराया।  अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि पवन खेड़ा को मिली राहत बरकरार रहती है या नहीं, और क्या उन्हें असम हाईकोर्ट का रुख करना होगा। 

पवन खेड़ा की मुसीबत बढ़ी, दिल्ली और असम पुलिस ने दी घर पर दस्तक

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी सरमा पर लगाए गए आरोपों को लेकर बड़ी मुसीबत में घिरते दिख रहे हैं. इस मामले में असम पुलिस की टीम आज सुबह दिल्ली पहुंची और खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर छापा मारा. दिल्ली पुलिस भी असम पुलिस की मदद के लिए इस कार्रवाई में शामिल रही. हालांकि खबर है कि पवन खेड़ा इस समय अपने आवास पर मौजूद नहीं थे. उधर असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने दावा किया कि पवन खेड़ा हैदराबाद भाग गए हैं।  वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सीएम हिमंत पर प्रहार किया है. उन्होंने कहा, ‘हिमंत बिस्व सरमा आप पर करप्शन के गंभीर आरोप हैं और आप साफ़ तौर पर घबरा गए हैं. आप नाम लेकर बुलाने और डराने-धमकाने के बजाय पवन खेड़ा के लगाए आरोपों का जवाब क्यों नहीं देते? अपनी नौटंकी बंद करो, क्योंकि अब आप अपना करप्शन नहीं छिपा सकते।  क्या है पूरा मामला? दरअसल पवन खेड़ा ने रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों यूएई, एंटीगुआ और बारबुडा, मिस्र का पासपोर्ट है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के नाम दुबई में दो संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया है।  वहीं रिनिकी सरमा ने पवन खेड़ा के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन पर ‘खराब तरीके से गढ़े गए’ दस्तावेज फैलाने का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, रिनिकी सरमा ने कहा था कि न सिर्फ किए गए दावों में, बल्कि शेयर किए जा रहे या कहे जा रहे डॉक्यूमेंट्स में भी बड़ी कमियां थीं।  खेड़ा पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा, ‘आपकी सिर्फ तपस्या में ही नहीं, एआई जेनरेशन और फोटोशॉपिंग में भी कमी रह गई. मुझे उम्मीद थी कि एक राष्ट्रीय पार्टी का प्रवक्ता बुनियादी उचित जांच करेगा, न कि मनगढ़ंत पासपोर्ट और डॉक्यूमेंट्स की खराब इमेज सर्कुलेट करेगा.’ उन्होंने कहा कि इस मामले को अब कानूनी तौर पर निपटाया जाएगा. उन्होंने खेड़ा और कांग्रेस पार्टी को टैग करते हुए कहा, ‘अब मैं कानून को अपना काम करने दूंगी. क्रिमिनल चार्ज लगाए जा रहे हैं. हम इसे कोर्ट में जारी रख सकते हैं।  वहीं मुख्‍यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने पवन खेड़ा के आरोपों पर कहा था कि वह और उनकी पत्नी अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों प्रकार के मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे. मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्‍ट में पलटवार करते हुए कहा कि पवन खेड़ा की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पार्टी के भीतर गहरे असंतोष और घबराहट को दर्शाती है. जैसे-जैसे असम एक ऐतिहासिक जनादेश की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है, इस तरह के हताश और बेबुनियाद हमले केवल उनके कमजोर होते जनाधार को ही उजागर करते हैं।  सीएम ने कहा कि मैं उनके द्वारा लगाए गए हर आरोप को पूरी तरह से खारिज करता हूं. ये दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित झूठ हैं, जिनका मकसद असम की जनता को गुमराह करना है. मेरी पत्नी और मैं अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों तरह के मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे. उनके इन गैर-जिम्मेदाराना और मानहानिकारक बयानों के लिए उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाएगा।   

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बयान से मचा राजनीतिक बवाल

रांची बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी बयानबाजी के बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि PM मोदी की कनपट्टी पर कट्टा रखिए और खुद को CM घोषित करवाइए। "कट्टा" वाली टिप्पणी पर बोलते हुए, खेड़ा ने कहा, "हम नीतीश बाबू को सलाह दे रहे हैं: बंदूक उठाओ और PM मोदी की कनपटी पर लगाओ और खुद को मुख्यमंत्री घोषित कर दो।" इससे पहले, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि बिहार चुनाव के पहले चरण में पीढ़ियों से वोट डालने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर हरियाणा में वोटों में हेराफेरी करने के लिए कथित तौर पर मिलकर काम करने का आरोप लगाया। पहले चरण में 72 सीटें जीतने का भरोसा जताया पवन खेड़ा ने  6 नवंबर को हुए बिहार चुनाव के पहले चरण में कुल 121 सीटों में से 72 सीटें जीतने का भरोसा जताया। उन्होंने इस बार स्ट्राइक रेट तोड़ने का भी दावा किया। उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि प्रधानमंत्री मोदी की कुछ रैलियों में कटौती की गई है। उन्हें डर है कि प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं है। चुनाव के पहले चरण के नतीजे सामने हैं। हम 121 में से 72 सीटें पूर्ण बहुमत से जीतेंगे।"

भाजपा के आरोप के बाद पवन खेड़ा पर कार्रवाई, EC के नोटिस पर कांग्रेस नेता का पलटवार

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने का आरोप लगाया, जिसके बाद दिल्ली निर्वाचन कार्यालय ने खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। उन्हें यह नोटिस एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण कराने के लिए जारी किया गया है और उनसे छह दिन के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया है। यह मामला तब चर्चा में आया जब भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने मंगलवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रवक्ता पर निशाना साधा और उनके पास दो वोटर आईडी होने व उनका नाम दो लोकसभा क्षेत्रों में होने का आरोप लगाया। उधर इस मामले में खेड़ा की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है और उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग की प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा, 'राहुल गांधी ने जोर-जोर से वोट चोरी चिल्लाया। लेकिन जैसे वो यह बताना भूल गए थे कि उनकी मां सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिक बनने से पहले ही भारत की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया था, वैसे ही अब ये बात सामने आई है कि गांधी परिवार से अपनी नजदीकी दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय EPIC नंबर हैं (जंगपुरा और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्रों में, जो क्रमशः पूर्वी दिल्ली और नई दिल्ली लोकसभा सीटों के अंतर्गत आते हैं)।' इसके आगे अपनी पोस्ट में अमित मालवीय ने चुनाव आयोग से इस बारे में जांच करने का अनुरोध करते हुए लिखा, 'अब चुनाव आयोग को यह जांच करनी है कि पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय EPIC नंबर कैसे हैं और क्या उन्होंने कई बार मतदान किया, जो चुनावी कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।' आगे उन्होंने लिखा, 'खेड़ा यह मानकर चल रहे हैं कि एक से ज्यादा वोट रखना अपराध नहीं है और बिहार में मतदाताओं को गुमराह करने, मतभेद पैदा करने और भारत की मज़बूत चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए दुर्भावनापूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।' आगे मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा, 'रिकॉर्ड के लिए बता रहा हूं, राहुल गांधी ने अभी तक बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के बारे में लगाए गए फर्जी आरोपों की जांच की मांग के लिए शपथ पत्र पर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है। यह तो बताने की जरूरत नहीं कि सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में गड़बड़ी के आरोपों वाले मामले को पहले ही खारिज कर चुका है।' भाजपा नेता ने आगे लिखा, 'सच तो साफ है: कांग्रेस पूरी तरह से वोट चोर है। इसलिए वे सबको एक ही ब्रश से कलंकित करना चाहते हैं। बहुत लंबे समय से, उन्होंने हमारी चुनावी व्यवस्था को विकृत किया है, अवैध घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैध बनाकर जनादेश चुराया है, और अब उन्हें चिंता है कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन समीक्षा (SIR) उन्हें और बेनकाब कर देगी। अब समय आ गया है कि भारत को यह एहसास हो कि राहुल गांधी हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।' पवन खेड़ा ने आरोप को लेकर आयोग को ही घेरा उधर अपने ऊपर लगे आरोपों पर कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कांग्रेस पार्टी भी तो यही बातें कर रही है, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हम यही सवाल तो उठा रहे हैं। यह सूची तमाम भाजपा नेताओं के साथ-साथ चुनाव आयोग के पास भी उपलब्ध है। कांग्रेस बार-बार सूची मांगती है, लेकिन उसे कभी नहीं मिलती। हमें बीजेपी से पता चलता है कि हमारे नाम कहां-कहां हैं। मैं चुनाव आयोग से जानना चाहता हूं कि मेरे नाम पर नई दिल्ली विधानसभा में किससे वोट करवा रहे हैं। मुझे सीसीटीवी फुटेज चाहिए वहां की, कि अबतक मेरा नाम वहां पर क्यों है। मैंने साल 2016 में उस इलाके को छोड़ दिया था, तब मैंने नाम कटवाने की जो भी प्रक्रिया थी, उसका पालन करते हुए आवेदन किया था, लेकिन मेरा नाम अभी भी वहां पर क्यों है? भारत के हर निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों-हजारों नाम हैं। इनका दुरुपयोग भी हो रहा है।' खेड़ा ने कहा कि सूची ठीक करना चुनाव आयोग का काम है और कई बार सूची ठीक करने की प्रक्रिया चलाई गई है इसके बावजूद उनका नाम नहीं हटाया जा रहा है तो इसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि यही आरोप कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में आयोग गड़बड़ी करता है। आयोग को बताना चाहिए कि वह जिस क्षेत्र में नौ साल से नहीं हैं उनके नाम पर वहां किससे मतदान कराया जा रहा है। आयोग के साथ मिलकर भाजपा इसी तरह के फर्जी मतदान करवा रही है और यही आरोप गांधी भी लगा रहे हैं।  

दो-दो वोटर कार्ड मामले में अमित मालवीय ने शेयर किया सबूत

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला गर्माया हुआ है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए लगातार ही हमलावर है. उधर बीजेपी ने अब उल्टे कांग्रेस पार्टी पर ही गंभीर आरोप लगा दिए हैं. बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक्टिव वोटर आईडी कार्ड (EPIC नंबर) मौजूद हैं. अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वोटर लिस्ट शेयर करते हुए चुनाव आयोग से इसकी जांच की मांग की है. मालवीय के मुताबिक, पवन खेड़ा का नाम एक ओर जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में दर्ज है, तो दूसरी ओर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में भी एक्टिव है. दोनों कार्ड पर पिता का नाम एचएल खेड़ा दर्ज है, जिससे यह साफ हो जाता है कि कांग्रेस प्रवक्ता के पास दो वोटर आईडी हैं. अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि यह न केवल चुनावी कानून का उल्लंघन है, बल्कि इसमें दोहरी वोटिंग की आशंका भी पैदा होती है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले की तुरंत जांच करनी चाहिए. मालवीय का राहुल गांधी पर निशाना बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे बार-बार ‘वोट चोरी’ का शोर मचाते हैं, लेकिन खुद कांग्रेस नेताओं का इतिहास मतदाता सूची में गड़बड़ियों से भरा पड़ा है. मालवीय ने एक बार फिर अपना पुराना आरोप दोहराया कि सोनिया गांधी का नाम भी वोटर लिस्ट में उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले ही दर्ज हो गया था. मालवीय ने आगे कहा कि कांग्रेस लगातार झूठ फैलाकर और भ्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत की चुनावी प्रक्रिया को बदनाम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैधता देकर चुनावी तंत्र को कमजोर किया और अब उन्हें डर है कि चुनाव आयोग द्वारा की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया उनकी पोल खोल देगी. ‘कांग्रेस ही असली वोट चोर’ मालवीय ने कहा कि पवन खेड़ा न केवल दो वोटर आईडी रखने के अपराध में शामिल हैं, बल्कि बिहार में भ्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोटरों को गुमराह कर रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं और भारत की मजबूत चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. स्पष्ट रूप से कहें तो राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा में अपने झूठे आरोपों की जांच के लिए अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं की है. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में गलत काम के आरोपों को पहले ही खारिज कर दिया है. मालवीय ने आगे कहा कि सच यह है कि कांग्रेस ही असली ‘वोट चोर’ है. वे सभी को अपने जैसा बदनाम करना चाहते हैं. लंबे समय तक उन्होंने अवैध घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैधता देकर हमारी चुनावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया और जनादेश चुराया. अब उन्हें डर है कि चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया उनकी सच्चाई उजागर कर देगी. यह समय है कि भारत समझे कि राहुल गांधी हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं. खबर लिखे जाने तक मालवीय के इस आरोप पर कांग्रेस या पवन खेड़ा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.