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संजय राउत ने याद दिलाया 2007 का मामला, NDA को उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग का डर

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा उपराष्ट्रपति चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घटक दलों से संपर्क कर रही है, क्योंकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के एनडीए सांसदों में बेचैनी है और उसे क्रॉस-वोटिंग का डर है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा की तत्कालीन सहयोगी शिवसेना ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था, क्योंकि वह महाराष्ट्र से थीं, उसी तरह एनडीए को भी डर है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सांसद विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी का समर्थन कर सकते हैं। राउत ने कहा, "क्या आप (एनडीए) इस बात से डरे हुए हैं कि क्रॉस-वोटिंग होगी?…. डुप्लीकेट शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का संदर्भ) क्रॉस-वोटिंग करेगी…. कागजों पर (एनडीए के लिए) बहुमत है, लेकिन (विपक्ष का) उम्मीदवार आंध्र प्रदेश से है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में (सांसदों में) बेचैनी है।" उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी द्वारा देश, बिहार और कई अन्य जगहों पर बनाए गए माहौल के कारण क्रॉस-वोटिंग की संभावना है।" रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हफ्ते की शुरुआत में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से बात की और 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में उनका समर्थन मांगा। इस पर टिप्पणी करते हुए, राउत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन्हीं पार्टियों से वोट मांग रही है "जिन्हें उसने तोड़ा"। राज्यसभा सांसद ने कहा कि ऐसे चुनावों में ठाकरे और पवार को फोन करना राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी उम्मीदवार को वोट देगी। उन्होंने कहा कि ठाकरे ने "तानाशाही" के खिलाफ लड़ाई का कड़ा रुख अपनाया है। राउत ने कहा, "आप (एनडीए) दावा करते हैं कि आपके पास बहुमत है… आप वोट क्यों मांग रहे हैं और आपको ऐसा करने का क्या अधिकार है।" एनडीए ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है, जबकि इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है।  

राहुल गांधी की सुरक्षा को और सख्त करने की मांग, कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली  उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया है। राय ने गुरुवार को लिखे गये पत्र में कहा है “जन प्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए जनता और समर्थकों से निरंतर संवाद करना पड़ता है। हालांकि, किसी भी गणमान्य राजनेता का जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और उनकी सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिये।'' उन्होंने आगे लिखा, ''लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की व्यक्तिगत सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी कांग्रेस और भारतीय राजनीति के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। वर्तमान में वह बिहार में जन अधिकार यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनके विचारों को सुनने और देखने के लिए लाखों लोग एकत्र हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में राहुल गांधी की उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी के परिजन अतीत में आतंकी हिंसा का शिकार हुए हैं, जिसमें सुरक्षा चूक एक प्रमुख कारक रही थी। राय ने आशा व्यक्त की कि गृह मंत्री राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए उनकी इस चिंता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।  

जिला अध्यक्षों पर पार्टी की नजर, कांग्रेस ने लॉन्च किया रिपोर्टिंग एप

भोपाल   मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी हैं, जिसके बाद अब कांग्रेस 'मिशन-2028' की तैयारियों में अभी से जुटती नजर आ रही है. एक तरफ कई जिलों में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों का विरोध देखा गया था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने विरोधों को दरकिनार करते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. खास बात यह है कि एमपी कांग्रेस अब टेक्नोलॉजी का सहारा लेती भी नजर आ रही है, जहां मप्र कांग्रेस जिलाध्यक्षों के कामकाज पर तकनीक से नजर रखेगी. कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए रिपोर्टिंग एप तैयार करवाया है, जिसमें सभी जिलाध्यक्षों को अपनी हर दिन की जानकारी अपलोड करनी होगी. इस तरह का प्रयोग मध्य प्रदेश कांग्रेस में पहली बार हो रहा है.  भोपाल से दिल्ली जाएगी रिपोर्ट  बताया जा रहा है कि कांग्रेस के सभी नए जिलाध्यक्षों को इस एप के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की तरफ से ट्रेनिंग भी दी जाएगी. बताया जा रहा है कि अगर यह एप सफल रहता है तो यह प्रयोग कांग्रेस देश के सभी राज्यों में लागू करेगी. इससे पहले 24 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग रखी गई है, जिसमें कांग्रेस के सीनियर नेता और जानकर उन्हें जिम्मेदारी और रणनीति के बारें में बताएंगे. इस बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे, वहीं यह भी बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्षों की पूरी रिपोर्ट जीतू पटवारी कांग्रेस आलाकमान के पास दिल्ली में भेजेंगे ताकि यहां से भी कांग्रेस जिलाध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखी जा सके.  कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद से मचे बवाल को लेकर अब संगठन डैमेज कंट्रोंल में जुट गया है। इसी कड़ी में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब मध्य प्रदेश कांग्रेस उनके कामकाज पर भी तकनीकी रूप से नजर रखने का काम करेगी। उनकी निगरानी के लिए पार्टी ने एक रिपोर्टिंग एप तैयार किया है। बताया जा रहा है कि, इस एप पर ये सभी जिला अध्यक्ष रोजाना अपने कामकाज का अपडेट अपलोड करेंगे। कांग्रेस संगठन में ये प्रयोग पहली बार मध्य प्रदेश से शुरू होने जा रहा है। एप सफल रहा तो एआईसीसी (ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी) इसे अन्य राज्यों में भी लागू करेगी। दिल्ली में सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग 24 अगस्त को इसी विषय को लेकर दिल्ली में सभी 71 नए जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग रखी गई है। सत्र में अध्यक्ष को जिम्मेदारियों और रणनीति की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे। नए जिला अध्यक्षों को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी संबोधित करेंगे। एमपी में पकड़ मजबूत करना चाहती है कांग्रेस  कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने में जुटी है. इसलिए पार्टी तकनीक का सहारा भी ले रही है, वहीं इस एप के जरिए जिलाध्यक्षों की सक्रियता, कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय पकड़ को भी बारीकी से पकड़ा जा सकेगा, कांग्रेस का यह प्रयास न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. जीतू पटवारी भी यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस जिलाध्यक्षों को मजबूती से काम करना होगा, अगर कोई जिलाध्यक्ष मजबूती से काम नहीं करता है तो फिर उसे जिम्मेदारी से हटाया जाएगा.  वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रहे हैं कांग्रेस जिलाध्यक्षों के विरोध पर पार्टी ने और सख्ती दिखा दी है. चेतावनी पत्र जारी करने के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग जिलाध्यक्षों का विरोध कर रहे हैं उनके खिलाफ अब नोटिस जारी किया जाएगा. बता दें कि भोपाल, देवास, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों से जिलाध्यक्षों के विरोध के स्वर उठे थे, जिस पर अब सख्ती से कार्रवाई के संकेत पीसीसी चीफ की तरफ से दिए गए हैं.  

जेल में बंद मंत्रियों की बर्खास्तगी पर विधेयक, चिदंबरम ने जताई आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया

नई दिल्ली  पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक को अजीब और असंवैधानिक बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर किसी को 30 दिनों तक जमानत नहीं मिलती तो क्या वह मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि जनता का फैसला किसी एक गिरफ्तारी की वजह से पलट दिया जा सकता है। दुनिया में इससे ज्यादा अजीब कोई भी बात नहीं सुनी जा सकती। पेशे से वकील पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस विधेयक के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा, "कोई आरोप नहीं, कोई मुकदमा नहीं, कोई दोष सिद्दी नहीं… लोकतांत्रिक देश में एक गिरफ्तारी (आम तौर पर फर्जी आरोपों के आधार पर) के आधार पर जनता के फैसले को पलट दिया जाएगा।" निचली अदालतें नहीं देती जमानत: चिदंबरम पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजकल निचली अदालतें शायद ही कभी जमानत देती हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट भी इसमें आनाकानी करता है। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा, “हर महीने सुप्रीम कोर्ट में हजारों जमानत याचिकाएं आती हैं। इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं। इसी बीच, जो 30 दिन की मोहलत सरकार दे रही है उसकी तारीख भी निकल जाएगी। परिणामस्वरूप गलत आरोपों के आधार पर एक सरकार अस्थिर हो जाएगी। क्या इससे ज्यादा गैर-कानूनी, असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी या संघीय विरोधी कुछ हो सकता है?” गौरतलब है कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा में यह बिल पेश किया था। इसके बाद विपक्ष के प्रदर्शन को देखते हुए इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया, इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्य सभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इस विधेयक के मुताबिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद पर रहते हुए अगर किसी पांच साल तक की सजा हो सकने वाले अपराध के तहत 30 दिन तक जेल में गुजारते हैं। तो ऐसे मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों या पीएम को पद से हटाया जा सकता है। फिर चाहें वह दोषी साबित हुए हों या फिर नहीं। इस विधेयक को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के कानून के जरिए राज्य सरकारें, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारें अस्थिर हो जाएंगी। विपक्ष ने दावा किया कि भाजपा शासित केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को फंसाने, उन्हें सलाखों के पीछे डालने और फिर उन्हें पद से हटाने की योजना बना रही है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए राजनीति में गिरते नैतिक मानकों को ऊपर उठाना और इसे ईमानदार बनाए रखने वाला बताया। आपको बता दें यह बिल ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री पद अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चला रहे थे। वहीं दूसरी ओर झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन ने भी जेल गए थे। हालांकि उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

राहुल गांधी की एंट्री पर सस्पेंस, तेजस्वी संभालेंगे कमान; इंडिया गठबंधन वर्कर करेंगे डोर-टू-डोर कैंपेन

पटना  बिहार में विधानसाभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन वोट अधिकार यात्रा कर रहा है। इंडिया गठबंधन ने मतदाता अधिकार यात्रा के साथ अपने वादों की पोटली भी खोल दी है। गठबंधन के कार्यकर्ता यात्रा के दौरान घर-घर अधिकार का पर्चा भी बांटेंगे। गुरुवार को 5वें दिन की यात्रा शेखपुरा से शुरू होगी। रात्रि विश्राम मुंगेर में होगा। वहीं राहुल गांधी दिल्ली में उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त रहने के चलते गुरुवार की शाम से यात्रा में शामिल होंगे। गुरुवार की सुबह शेखपुरा से यात्रा में तेजस्वी यादव और अन्य नेता मौजूद रहेंगे। बुधवार को यात्रा का विश्राम दिन रहा। वहीं, यात्रा में 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल होंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अखिलेश यादव का जुड़ना वोट चोरी के ख़िलाफ़ हमारे इस जन आंदोलन को और मज़बूत करेगा। घर-घर अधिकार का पर्चा में वादों का गुलदस्ता समाहित किया गया है। इस पर्चे में गठबंधन के सभी नेताओं को जगह दी गई है। राहुल-तेजस्वी संग माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, भाकपा के डी राजा को भी जगह दी गई है। इसमें कमाई, दवाई, पढ़ाई और सामाजिक न्याय के अधिकार से संबंधित वादे गिनाए गए हैं। गठबंधन ने इसी के इर्द-गिर्द चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने का मन बनाया है।  

महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, राज ठाकरे और फडणवीस की मीटिंग पर अजित पवार का बयान चर्चा में

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच गुरुवार हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में संवाद बनाए रखना एक परंपरा रही है। इससे एक दिन पहले ही मनसे और शिवसेना (UBT) को BEST चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वर्धा में पत्रकारों से बातचीत में पवार ने कहा, 'कई नेता एक-दूसरे से और मुख्यमंत्री से मिलते हैं, चाहे वे नेता सत्ता में हों या नहीं। एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखना राज्य की परंपरा है। इस मुलाकात को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है।' इससे पहले राज ठाकरे ने फडणवीस से दक्षिण मुंबई में स्थित उनके आधिकारिक बंगले 'वर्षा' में मुलाकात की थी, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई थीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल 21 में से एक भी पद नहीं जीत पाया। फडणवीस ने दोनों पार्टियों पर ‘‘ठाकरे ब्रांड’’ के नाम पर क्रेडिट सोसायटी चुनाव का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। राज ठाकरे क्या बोले मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे ने कहा, 'महाराष्ट्र के शहरों में पुनर्विकास हो रहा है। जनसंख्या बढ़ रही है…, यातायात बढ़ रहा है… और यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। मुंबई में ट्रैफिक बड़ी समस्या है। लोगों को ट्रैफिक के नियम नहीं पता। वो कहीं भी गाड़ियां पार्क कर देते हैं और चले जाते हैं।' उन्होंने कहा, 'आज मैंने मुख्यमंत्री के साथ-साथ मुंबई पुलिस से चर्चा की।'  

BEST टेस्ट में फेल होकर फडणवीस से मिले राज, ठाकरे परिवार में फिर दरार के संकेत

मुंबई  महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल चुनाव में एक भी पद नहीं जीत पाया। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इसे लेकर किसी भी दल ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा था। हाल ही में मराठी भाषा को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में राज और उद्धव साथ नजर आए थे। हार पर फडणवीस ने कसा तंज फडणवीस ने बुधवार को कहा कि BEST चुनाव में शिवसेना (UBT) और मनसे की हार ‘ठाकरे ब्रांड’ की सार्वजनिक अस्वीकृति को दर्शाती है। उन्होंने ठाकरे भाइयों के नेतृत्व वाली दोनों पार्टियों पर इस चुनाव का राजनीतिकरण करने के लिए निशाना साधा। शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का संयुक्त पैनल सोमवार को चुनाव में सभी 21 सीट हार गया। फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह के चुनाव का राजनीतिकरण करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह केवल एक ऋण समिति का चुनाव था। लेकिन उन्होंने ठाकरे ब्रांड की जीत के बड़े-बड़े दावे करके इसका राजनीतिकरण कर दिया। लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों को यह पसंद नहीं आया। चुनाव के नतीजे लोगों की अस्वीकृति को दर्शाते हैं।' महाराष्ट्र में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि यह परिणाम ठाकरे भाइयों के घटते प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'उद्धव और राज ठाकरे ने बेस्ट चुनाव को लेकर एक साथ आकर खूब शोर मचाया। ऐसा दिखाया गया मानो उनकी जीत आसान हो, लेकिन मनसे के हाथ मिलाने के बावजूद यह सहकारी संस्था में एक भी सीट नहीं जीत पाए, जिस पर वर्षों से शिवसेना (UBT) का दबदबा रहा है।' BEST चुनाव बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी का चुनाव लड़ने के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे ने ‘उत्कर्ष’ नाम का एक पैनल गठित किया था। इस पैनल में 21 सदस्य थे, जिनमें से शिवसेना (UBT) से 18, मनसे से दो और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघ से एक सदस्य थे। शिवसेना (UBT) और मनसे के नेताओं ने कहा था कि बेस्ट में मनसे के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है, लेकिन यह चुनाव दोनों पार्टियों को राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एक साथ आने का मौका देगा।  

उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस की रणनीति तेज, राहुल गांधी ने किया सुदर्शन रेड्डी पर भरोसा

 नई दिल्ली उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। विपक्ष का दावा है कि यह चुनाव सिर्फ एक पद के लिए नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को रेड्डी के समर्थन में एकजुट होकर यह संदेश दिया कि विपक्ष अब संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह चुनाव संविधान को बचाने वालों और उस पर हमला करने वालों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने बताया कि रेड्डी ने तेलंगाना में जाति जनगणना पर काम किया और सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस दृष्टिकोण तैयार किया। राहुल ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने रेड्डी से बातचीत की, तो उनकी जेब में संविधान की प्रति थी। रेड्डी ने उन्हें बताया कि वे पिछले 52 वर्षों से संविधान अपने साथ रखते हैं क्योंकि किसी भी कानूनी बहस का अंतिम उत्तर संविधान ही होता है। राहुल ने कहा कि यही प्रतिबद्धता आज देश को चाहिए। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी लगए आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते 11 वर्षों में सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी संसदीय बहुमत का बार-बार दुरुपयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी स्वायत्त एजेंसियों को विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया है। खरगे ने कहा कि अब नए विधेयक भी विपक्षी सरकारों को कमजोर करने और उन्हें अस्थिर करने के औजार बना दिए गए हैं। उनके अनुसार, संसद में लगातार विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है और गंभीर जनहित के मुद्दों पर बहस तक नहीं होने दी जा रही। रेड्डी की उम्मीदवारी को विपक्ष ने बताया ऐतिहासिक खरगे ने जोर देकर कहा कि ऐसे समय में बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी विपक्ष की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रेड्डी का जीवन और काम संविधान की आत्मा को दर्शाता है न्याय, करुणा और हर नागरिक को सशक्त बनाने की भावना। विपक्ष का मानना है कि रेड्डी उपराष्ट्रपति पद पर बैठकर न केवल लोकतंत्र की रक्षा करेंगे बल्कि देश को न्याय और एकता की नई दिशा देंगे। इंडिया गठबंधन की बैठक और रणनीति इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन के केंद्रीय हॉल में रेड्डी से मुलाकात की और आगामी चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की। विपक्षी दलों ने दावा किया कि यह चुनाव भाजपा के लिए सत्ता का खेल हो सकता है, लेकिन उनके लिए यह संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का सवाल है। सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से रेड्डी को समर्थन देने का ऐलान किया और सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक प्रयास में साथ खड़े हों। विपक्ष का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब संसद में सत्ता के दुरुपयोग और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशों के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया जाए।

तमिलनाडु में बीजेपी का बड़ा आयोजन: 22 अगस्त को बूथ समिति सम्मेलन, अमित शाह देंगे संबोधन

चेन्नई,  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने घोषणा की है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अगस्त को तिरुनेलवेली में पार्टी के पहले बूथ समिति जोन सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें एक लाख से अधिक बूथ स्तर के कार्यकर्ता भाग लेंगे। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंथ्रन के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक को पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ मान रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद के अनुसार, इस बैठक में पांच लोकसभा क्षेत्रों और 28 विधानसभा क्षेत्रों की 8,595 बूथ समितियों के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे। उन्होंने इस आयोजन को एक ‘ऐतिहासिक आंदोलन’ बताया जिसका उद्देश्य द्रमुक के ‘भ्रष्ट और दमनकारी शासन’ को खत्म करना और एनडीए को 200 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में जीत के लिए तैयार करना है। यह सम्मेलन तिरुचेंदूर में आयोजित किया जाएगा, जिसे पार्टी ने ‘भगवान मुरुगन की पवित्र भूमि’ कहा है। ए.एन.एस. प्रसाद ने अमित शाह को ‘चुनावी विजय सम्राट’ और ‘कुशल रणनीतिकार’ कहा। उन्होंने बताया कि शाह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने और बूथों को पार्टी के प्रचार तंत्र के आधार के रूप में मजबूत करने के लिए डिजाइन किए गए एक विस्तृत चुनावी रोडमैप का अनावरण करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रशिक्षण सत्र डीएमके की वोट खरीदने की रणनीतियों और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मुकाबला करने पर केंद्रित होंगे। भाजपा नेताओं ने डीएमके सरकार की विफलताओं को उजागर करने का भी संकल्प लिया और उस पर ‘अराजकता, भ्रष्टाचार, बढ़ते अपराध, अवैध शराब से होने वाली मौतों और करों में भारी वृद्धि’ का आरोप लगाया। प्रसाद ने आगे कहा कि भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्याणकारी योजनाओं और केंद्र सरकार की परियोजनाओं को घर-घर तक पहुंचाया जाए, और केंद्र के खिलाफ डीएमके द्वारा किए जा रहे ‘निराधार प्रचार’ का मुकाबला किया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य बूथ-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से राज्य में 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना है। सम्मेलन में तमिलनाडु के वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में हाल ही में नामित किए जाने पर भी प्रकाश डाला जाएगा। पार्टी ने इसे राज्य के लिए ‘गर्व की बात’ और प्रधानमंत्री मोदी के ‘तमिलनाडु के प्रति विशेष स्नेह’ का प्रतिबिंब बताया। तिरुनेलवेली कार्यक्रम के बाद, भाजपा ने अगले कुछ महीनों में मदुरै, कोयंबटूर, सलेम, तंजावुर, तिरुवन्नामलाई और तिरुवल्लूर में इसी तरह के सम्मेलनों की योजना बनाई है, जिनमें राष्ट्रीय नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है। पोन राधाकृष्णन, डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन, के. अन्नामलाई, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, एच. राजा और अभिनेता से नेता बने सरथकुमार सहित वरिष्ठ नेता भी तिरुनेलवेली बैठक को संबोधित करने वाले हैं। अमित शाह की उपस्थिति से, भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरने, एनडीए को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने और पूरे तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके को चुनौती देने के अपने इरादे का संकेत देने की उम्मीद कर रही है।  

CM सुक्खू ने विधायक पत्नी के विधानसभा क्षेत्र को दी राहत और विकास की सौगातें

शिमला  हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर भी विधायक हैं. ऐसे में सीएम सुक्खू की अपनी पत्नी कमलेश ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र पर खास मेहरबानी रहती है. ताजा मामले में अब देहरा में आरटीओ दफ्तर खोलने की नोटिफिकेशन जारी की गई है. दरअसल. इस रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के तहत, ज्वाली, ज्वालामुखी, इंदौरा और फतेहपुर को शामिल किया गया है. पत्नी के विधानसभा क्षेत्र के लिए नई दफ्तर खोलने की घोषणा करना नई बात नहीं है. सीएम सुक्खू ने इससे पहले भी कई ऐलान देहरा के लिए किए है. जानकारी के अनुसार, सुक्खू सरकार में सबसे पहले यहां पर एसपी दफ्तर खोला था और देहरा को 14वां पुलिस जिला बनाया गया. पांच नवंबर 2024 में यह दफ्तर शुरू हुआ था. वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर कार्यालय भी खोला गया है. इसके, अलावा, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर दफ्तर, जल शक्ति विभाग का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) दफ्तर भी देहरा को सीएम सुक्खू की पत्नी के विधायक बनने के बाद दिया गया. जून में देहरा आए थे सीएम हाल ही में जून महीने में सीएम सुक्खू ने देहरा का दौरा किया था और हरिपुर तहसील के बनखंडी में दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान में 47.62 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल प्रशासन, डायगनोस्टिक ब्लॉक, केन्द्रीकृत रसोईघर व क्वारंटीन केंद्र और 16.25 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ पेयजल योजना की आधारशिला रखी. गौरतलब है कि देहरा में अकेले टूरिज्म सेक्टर पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान सरकार का है. देहरा पर मेहरबानी क्यों गौरतलब है कि देहरा में 2024 में उपचुनाव हुए थे तो इसमें सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर की जीत हुई थी. वहीं, देहरा सीएम सुक्खू का ससुराल भी है. पत्नी के मायके देहरा के लिए सीएम सुक्खू अक्सर घोषणाएं करते रहते हैं. पत्नी के बहाने सीएम को घेरती रहती है भाजपा बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा और साथ ही कहा कि सरकार नई जॉब ट्रेनी पॉलिसी को रद्द करे. भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने तंज कसते हुए कहा महिलाओं को पेंशन का वादा पूरा न करने पर माफी सीएम को माफी मांगनी चाहिए. सत्ती ने कहा कि आपने भाभी जी को तो पेंशन लगा दी, क्या सभी महिलाओं को पेंशन देंगे. इस पर सीएम ने कहा कि पेंशन नहीं अभी सैलरी लगी है और वो भी भाजपा की वजह से लगी है.