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राहुल गांधी का पंजाब कांग्रेस को कड़ा संदेश! गुटबाजी छोड़ने की नसीहत, 5 दिग्गज नेताओं संग बैठक

 चंडीगढ़ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले  पंजाब कांग्रेस के पांच नेताओं के साथ अहम बैठक की।  इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को समाप्त करना था। राहुल ने वरिष्ठ नेताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और विजय इंदर सिंगला समेत अन्य नेता शामिल थे। बाजवा ने बताया कि राहुल गांधी ने सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। संगठनात्मक बदलाव का फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया है। पंजाब की जनता कांग्रेस को एक और अवसर देने के लिए तैयार है।  उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला दिया। कांग्रेस ने तब 14 में से 8 संसदीय सीटें जीती थीं, जिनमें सात पंजाब की थीं। बाजवा के अनुसार, एकजुट होकर कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में 70 से 80 सीटें जीत सकती है। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां  पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बताया कि यह बैठक 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए थी। सभी नेताओं ने इसमें अपनी राय रखी। वड़िंग ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान नितिन नबीन के पंजाब दौरे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा का पंजाब में जबरदस्ती करने का सपना पूरा नहीं होगा। पंजाब के लोग ऐसी किसी भी जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं करेंगे। संगठनात्मक बदलाव पर मंथन  पार्टी में प्रधान पद में बदलाव को लेकर भी चर्चा चल रही है। सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम पर विचार हो रहा है। पार्टी आलाकमान इन दोनों नामों पर गहन मंथन कर रहा है। प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करना पार्टी आलाकमान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पार्टी ने गुटबाजी पर सख्त रुख अपनाया है। राहुल ने पहले भी पंजाब दौरे के दौरान चेतावनी दी थी कि जो नेता काम नहीं करेगा, उसे घर बैठा दिया जाएगा। नेताओं के साथ व्यक्तिगत बैठकें  बैठक से पहले पर्यवेक्षकों ने भी नेताओं के साथ व्यक्तिगत बैठकें की थीं। इन बैठकों में सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और जिला प्रधान शामिल थे। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले समय मांगा था। उन्होंने बैठक के दौरान अपनी बात विस्तार से रखी। ये बैठकें नेताओं की व्यक्तिगत राय जानने के लिए महत्वपूर्ण थीं।  

अल्मोड़ा नहीं पहुंच सके राहुल गांधी, हेलीकॉप्टर उतारना पड़ा; मोबाइल से किया संबोधन

पंतनगर  आज गुरुवार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा शुरू हुआ है. उत्तराखंड पहुंचते ही राहुल गांधी को मौसम के बिगड़े मूड से जूझना पड़ा. दिल्ली से उड़ा राहुल गांधी का विमान अल्मोड़ा पहुंचने वाला था कि वहां मौसम खराब हो गया. इसके बाद उनके विमान को वापस लौटकर पंतनगर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।  राहुल गांधी के विमान की पंतनगर में इमरजेंसी लैंडिग: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंच गए हैं. राहुल गांधी के दौरे पर थोड़ी देर के लिए मौसम ने अड़ंगा डाला. राहुल का विमान दिल्ली से अल्मोड़ा के लिए उड़ा था. अल्मोड़ा में मौसम खराब होने के कारण विमान को वापस लाया गया और पंतनगर एयरपोर्ट पर उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई. इसका फायदा स्थानीय नेताओं को हुआ।  राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर की खराब मौसम के कारण पंतनगर में लैंडिंग करानी पड़ी  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे राहुल गांधी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल के समर्थन में नारे लगाए: पंतनगर एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने राहुल गांधी को बुके भेंट कर उनका स्वागत किया. इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए और उनका अभिवादन किया।  पंतनगर से मोबाइल से किया संबोधन: स्वागत कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने अल्मोड़ा में आयोजित पूर्व सैनिकों के एक विशेष कार्यक्रम को मोबाइल से ही संबोधित किया. राहुल गांधी पूर्व सैनिकों से पंतनगर से ही मोबाइल पर संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना. माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस पूर्व सैनिक समुदाय के साथ अपने संवाद को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।  राहुल का दौरा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण: राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती के मद्देनजर कांग्रेस नेतृत्व लगातार राज्य में सक्रिय नजर आ रहा है. राहुल गांधी के इस दौरे को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  दो दिन का है राहुल का दौरा: दो दिन के इस प्रवास के दौरान राहुल गांधी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ-साथ पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं. उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और पार्टी इसे संगठन को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। 

चुनावी झटके के बाद बदला राजनीतिक गणित, कांग्रेस के सहयोगी ही सरकार के लिए बने मददगार

नई दिल्ली लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर झटका लगने के बाद केंद्र सरकार ने अब नई रणनीति के साथ वापसी की तैयारी शुरू कर दी है. हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति का गणित बदल दिया है और इसी बदले हुए समीकरण के बीच सरकार अपने दो बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट परिसीमन (डिलिमिटेशन) और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ बिल को आगे बढ़ाने में जुट गई है।  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संसद में पहले विपक्षी एकता की वजह से अटक गए परिसीमन बिल को अब नए स्वरूप में लाने की तैयारी चल रही है. गृह मंत्रालय इस संबंध में नए विधेयक पर काम कर रहा है. माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पहले जैसी नहीं रही, जिसका फायदा सरकार उठाना चाहती है।  बदले राजनीतिक हालात के बाद नई रणनीति दरअसल, जिस विपक्षी मोर्चे ने संसद में एकजुट होकर सरकार की राह रोकी थी, अब उसी खेमे में दरार की चर्चाएं तेज हैं. बीजेपी की नजर खास तौर पर डीएमके और टीएमसी की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर है. पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय स्तर पर भले विपक्ष के साथ रहें, लेकिन विशेष मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं।  सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. इन चुनावों में विपक्षी दलों को लगे झटकों के बाद बीजेपी अब क्षेत्रीय दलों के साथ नए सिरे से बातचीत की कोशिश कर रही है. पार्टी का मानना है कि संसद में कुछ मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए नए राजनीतिक समीकरण बनाए जा सकते हैं।  बीजेपी की नजर खास तौर पर तमिलनाडु की राजनीति पर है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने डीएमके के साथ भी संपर्क साधा है और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक के मौजूदा मसौदे में बदलाव के संकेत दिए हैं, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके।  डीएमके ने रखी अपनी शर्तें डीएमके के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी का रुख हमेशा तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर तय होता है. पार्टी का मानना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी संसदीय हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए।  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार यह भरोसा दिलाती है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा और संसद में उनकी आवाज कमजोर नहीं पड़ेगी, तो प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने बीजेपी के साथ किसी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना को फिलहाल समय से पहले बताया।  वन नेशन-वन इलेक्शन पर भी काम जारी उधर, ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. फिलहाल यह प्रस्ताव 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है. समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी का कहना है कि रिपोर्ट पर तेजी से काम हो रहा है और निर्धारित समय के भीतर इसे संसद को सौंप दिया जाएगा।  बीजेपी नेताओं का मानना है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है. इसके तहत विभिन्न राज्यों की विधानसभा चुनाव समयसारिणी को धीरे-धीरे लोकसभा चुनावों के साथ समायोजित किया जा सकता है।  विपक्ष ने उठाए सवाल उधर कांग्रेस ने साफ किया है कि परिसीमन जैसे संवैधानिक महत्व के मुद्दे पर सरकार को सभी दलों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और अपने प्रस्ताव लिखित रूप में सामने रखने चाहिए।  कांग्रेस का आरोप है कि पिछली बार सरकार ने कुछ क्षेत्रीय दलों से अनौपचारिक बातचीत तो की, लेकिन मुख्य विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया. पार्टी का कहना है कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।  बंगाल की राजनीति पर भी नजर सूत्रों के अनुसार बीजेपी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी करीबी नजर बनाए हुए है. पार्टी नेताओं का मानना है कि बंगाल चुनाव रिजल्ट के बाद टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और आंतरिक मतभेद भविष्य में संसद के भीतर नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकते हैं।  हालांकि ममता बनर्जी लगातार बीजेपी पर राजनीतिक दबाव और प्रताड़ना के आरोप लगाती रही हैं. उनका कहना है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन टीएमसी इससे डरने वाली नहीं है।  बड़ा सियासी मुद्दा बन सकते हैं दोनों बिल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिसीमन और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ दोनों ही मुद्दे आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं. एक ओर केंद्र सरकार इन्हें प्रशासनिक सुधार और चुनावी खर्च कम करने से जोड़ रही है, वहीं विपक्षी दल इन्हें संघीय ढांचे और राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े संवेदनशील मुद्दे के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों प्रस्तावों पर देशभर में व्यापक राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।   

क्या कांग्रेस खुद कमजोर कर रही राहुल गांधी की राजनीति? सोनिया गांधी क्यों हैं खामोश

नई दिल्ली हर बच्चा अपने मां बाप के प्यार दुलार में बड़ा होता है. नेता हो आम आदमी. बड़ा राजनीतिक घराना हो या कॉरपोरेट पावर हाउस. गांधी फैमिली में भी यही होता आया. आयरन लेडी होते हुए भी इंदिरा गांधी ने अपने दोनों बेटों को प्यार से पाला. पर संजय गांधी और राजीव गांधी बिल्कुल अलग मिजाज के निकले. संजय गांधी की रुचि पॉलिटिक्स में थी और वो अंदर ही अंदर इतने पावरफुल हो गए कि बड़े से बड़े कैबिनेट मंत्री भी उनकी मर्जी के बिना इंदिरा से नहीं मिल सकते थे. आपातकाल में तो संजय पावर ने जो किया वो सबको पता है. अपनी जिद के आगे वो मां की भी नहीं सुनते थे. सीएम बदलने तक का फैसला संजय गांधी कर सकते थे. अकाल मृत्यु के साथ 23 जून 1980 को संजय का संक्षिप्त सक्रिय इतिहास खत्म हो गया।  इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव को बागडोर तो मिली लेकिन संजय गांधी वाली पकड़ नहीं थी. वो उन्हीं नेताओं की चौकड़ी में आगे बढ़े जो कभी उनकी मां के साथ हुआ करते थे. खुद का रॉयल मृदुभाषी अंदाज. जब 1991 में उनकी हत्या हो गई तो सोनिया गांधी को पार्टी संभालने में समय लगा. पीवी नरसिंह राव की पीएम पारी के बाद 1998 में सीताराम केसरी को धकिया कर वो अध्यक्ष बनीं. इटालियन बेबी पर बवाल न हुआ होता तो मनमोहन सिंह की जगह वही पीएम बनती लेकिन नेशनल एडवाइजरी काउंसिल बनाकर सोनिया ने पार्टी और सरकार दोनों को मुट्ठी में कर लिया।  पर राहुल गांधी कुछ नहीं सीख पाए. 2017 से 2019 तक दो साल अध्यक्ष तो रहे लेकिन न अपनी मां और न ही संजय गांधी वाली बात इनमें दिखाई दी. बल्कि हो इससे उलट रहा है. कहने को तो मल्लिकार्जुन खरगे अभी अध्यक्ष हैं और सोनिया बीमार हैं. इसलिए राहुल गांधी के पास ही पार्टी की चाबी है पर ये किसी काम का नहीं. राहुल लगातार पार्टी में बेइज्जत हो रहे हैं. और ये सिलसिला पिछले 9 साल से चल रहा है।  जब खरगे उनके सामने अड़ गए जब राहुल कोई फैसला करते हैं तो उसे स्टेट यूनिट नहीं मानती. और जब स्टेट यूनिट कोई फैसला करता है तो उसे राहुल गांधी नहीं मानते. इसी कन्फ्यूजन में कांग्रेस खत्म हो रही है. हरियाणा में हुड्डा को छूट दे दी तो जीता चुनाव हार गए. तमिलनाडु में एक्टर विजय से प्री पोल अलाएंस करना चाहते थे तो खरगे जी अड़ गए. सबसे दुखद बात ये रही कि बच्चे के फैसले में मां सोनिया कभी साथ नहीं रही. वो ओल्ड गार्ड के फेवर में रही. केरल में भी खरगे चला लेते लेकिन अंत में राहुल ने जमीनी नेता वीडी सतीशन को सीएम बना दिया. पर किस काम के सीएम. होम मिनिस्ट्री रमेश चेन्नीथला के पास चला गया।  अगर संजय गांधी वाला एक भी गुण राहुल में होता ते इन नेताओं की मजाल थी कि बकार भी निकल पाता. ऊपर से जो नैरेटिव सेट करते हैं राहुल उसी का नाश करते हैं उनके नेता. जब पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को चीफ सेक्रेटरी बना दिया तो राहुल ने जम कर हमला बोला. बीजेपी-चुनाव आयोग को चोर बाजार बता दिया. जो जितना बड़ा चोर उसे उतना बड़ा इनाम. ये उनका सोशल मीडिया पोस्ट था. पर केरल में उन्हीं के सीएम ने वही काम किया जो सुवेंदु ने किया. मुख्य चुनाव अधिकारी रतन केलकर को अपना ही सेक्रेटरी बनाकर राहुल गांधी के मुंह पर तमाचा जड़ दिया. अब बीजेपी सवाल पूछ रही है. क्या केरल में कांग्रेस की जीत चुनाव अधिकारी के कारण हुई है? यहां तो राहुल गांधी के एसआईआर के सारे नैरेटिव पर उन्हीं की पार्टी ने पानी फेर दिया. ऐसी बेइज्जती किसी शीर्ष नेता की हुई है क्या. संजय गांधी होते तो सतीशन नप गए होते। 

‘गद्दार’ टिप्पणी पर गरमाई राजनीति, राहुल गांधी के बयान से BJP नेताओं में नाराजगी

 नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंभी अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहिएगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है. आपका गृह मंत्री गद्दार है, आपका संगठन गद्दार है, आपने हिंदुस्तान को बेचने को काम किया.  आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया।  पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल का हमला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. इस तीखी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तब आपको उनके मुंह पर कहना होगा कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन (भाजपा) गद्दार हैं, आपने हमारे देश को बेचने का काम किया है. आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया. आपने गांधी जी पर आक्रमण किया है, ये बातें आप उनसे खुलकर कह दीजिए।  राहुल गांधी के बयान पर नितिन नवीन का पलटवार राहुल के इस बयान पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भारतीय राजनीति की शुचिता और आपसी सम्मान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही हार की निराशा अब राहुल के स्वभाव और चरित्र में साफ दिखने लगी है।  नितिन नवीन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के 'राहू'  हैं जो देश के माहौल को गंदा कर रहे हैं.  उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने हमेशा देश की जमीन को गिरवी रखने का काम किया और कभी सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रहती थी, जबकि मोदी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद पर पूर्ण लगाम लगी है और सेना स्वाभिमान से काम कर रही है।  राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि  क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई।  बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे हैं. भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। 

राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई, कहा- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर देश भर में मचा बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। लाखों छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखी है। राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि यह पेपर लीक कोई साधारण चूक या प्रशासनिक गलती नहीं है। यह भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से व्यवस्था में बिठाए गए अयोग्य प्रोफेसर के गठजोड़ का नतीजा है। विचारधारा के कारण सिस्टम हुआ खोखला: राहुल गांधी राहुल गांधी ने यह गंभीर आरोप ऐसे समय में लगाया है जब देश के कोने-कोने से छात्र और उनके अभिभावक चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतर कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। कांग्रेस नेता का कहना है कि वर्तमान सरकार ने देश के सभी प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर अपनी विचारधारा वाले लोगों को काबिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और योग्यता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जब सिर्फ निष्ठा के आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं, तो पूरा सिस्टम खोखला हो जाता है। एनटीए जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं का फेल होना इसी मिलीभगत का परिणाम है। इसी वजह से आज 24 लाख से अधिक होनहार युवाओं के सपनों को चकनाचूर होना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा मामला यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। अदालत के आदेश पर ग्रेस मार्क्स वाले छात्रों की परीक्षा रद्द कर दोबारा एग्जाम कराने का फैसला आ चुका है। इसके बावजूद असली बवाल मूल पेपर लीक को लेकर बना हुआ है। इस बीच देश के कई राज्यों में पुलिस ने पेपर लीक गैंग के गुर्गों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि परीक्षा सिस्टम में बहुत बड़ी सेंधमारी हुई थी।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हलचल तेज: राहुल गांधी जल्द करेंगे उज्जैन-रीवा दौरा

उज्जैन/रीवा  कांग्रेस एमपी में आगामी चुनावों को लेकर संगठन तैयार करने में अभी से जुट गई है। खास बात यह है कि खुद राहुल गांधी एमपी में संगठन की समीक्षा करेंगे। ताकि पार्टी को मजबूती से चुनाव में उतारा जा सके। सूत्रों के मुताबिक जून माह में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दो संभागों में कार्यों और संगठन की समीक्षा करेंगे।   उज्जैन-रीवा संभागों की समीक्षा कर सकते हैं राहुल गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी एमपी में संगठन की जमीनी हकीकत परखने के लिए उज्जैन और रीवा संभाग की समीक्षा कर सकते हैं। आगामी वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और कामकाज की समीक्षा करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित दौरा जून 2026 में हो सकता है। इस दौरान राहुल गांधी बीएलए (Booth Level Agents) से लेकर जिला अध्यक्षों तक के कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत और ट्रेनिंग कार्यक्रम करेंगे। नई नियुक्तियों के बाद यह पहला बड़ा संगठनात्मक दौरा होगा, जिसमें कार्यों की जांच और समीक्षा की जाएगी। जिले स्तर पर क्रॉस चेकिंग जारी एमपी कांग्रेस संगठन में अब तक जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं। उनकी क्रॉस चेकिंग और वेरिफिकेशन का काम तेजी से प्रत्येक जिले में किया जा रहा है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से लेकर हर स्तर के नेता बूथ समिति, पंचायत समिति, वार्ड समिति में शामिल किए गए सदस्यों का वेरिफिकेशन कर रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2025 में 3 जून को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान का शुभारंभ किया था। 16 इसके बाद 16 अगस्त को सभी 71 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा हुई थी।

दिल्ली में सियासत गरमाई: महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा का प्रदर्शन, राहुल गांधी पर निशाना

नई दिल्ली लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शनिवार को भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के घर के बाहर विरोध जताया। प्रदर्शन में वरिष्ठ भाजपा सांसद हेमा मालिनी भी मौजूद रहीं। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का पुतला भी जलाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस पर नारी शक्ति का अपमान करने का आरोप लगाया और हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर मोतीलाल नेहरू मार्ग से सुनहरी बाग रोड स्थित राहुल गांधी के घर तक मार्च करते हुए पहुंचे। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अपने माथे पर काली पट्टियां बांधी हुई थीं। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उग्र प्रदर्शन को देखते हुए कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं को डिटेन किया, जिन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विपक्ष की मानसिकता महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति उनके असली इरादों को उजागर करती है। देश की महिलाएं सब कुछ देख रही हैं और समझ रही हैं। 'नारी शक्ति' के साथ हुए इस अन्याय का जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीस साल से इस देश की आधी आबादी लगातार अपमान सहती आ रही है। इस बिल को सदन में बार-बार लाया गया है। कभी इसे फाड़ दिया जाता है, कभी फेंक दिया जाता है और कभी इसका विरोध किया जाता है। इसके पीछे क्या वजह है। कभी वे कहते हैं कि उन्हें परिसीमन नहीं चाहिए, तो कभी कहते हैं कि उन्हें पुनर्गठन नहीं चाहिए। कभी वे कहते हैं कि इसे 543 सीटों के अंदर ही लागू करो, तो कभी कहते हैं कि सीटों की संख्या बढ़ाओ। कभी वे कुछ खास राज्यों की बात करते हैं, तो कभी आरक्षण के अंदर आरक्षण की और कभी मुस्लिम महिलाओं की। आज मैं विपक्ष के नेताओं से यह पूछना चाहती हूं, अगर वे मुस्लिम महिलाओं के इतने ही बड़े शुभचिंतक थे तो जब पीएम मोदी ने तीन तलाक कानून पेश किया था, तब उन्होंने उसका विरोध क्यों किया था। मथुरा लोकसभा सीट से सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि कि विपक्ष ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित कराने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। ऐसा लगता है कि विपक्ष को 'नारी शक्ति' पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को उनका हक दिलाने की पूरी कोशिश की। पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री महिलाओं को नई सुविधाएं और अधिकार देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हों, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं होने देना चाहता। हेमा मालिनी ने कहा कि संसद सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक संसद में अटक गया। यह उन महिलाओं के लिए एक दुखद दिन था, जो राष्ट्रीय मामलों में अपनी अधिक भागीदारी की उम्मीद कर रही थीं। व्यक्तिगत रूप से मैं काफी निराश थी, क्योंकि मतदान से ठीक पहले मैंने संसद में इस विधेयक के महत्व पर अपनी बात रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे और सभी महिलाओं के लिए इस विधेयक के महत्व के बारे में बात करेंगे। मैं आप सभी से अनुरोध करती हूं कि आप उनका संबोधन अवश्य सुनें। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह बड़े शर्म की बात है कि जिस दिन कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के सभी गठबंधन सहयोगियों ने इस देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया, वे उस दिन को ऐसे मना रहे हैं मानो यह कोई जीत हो। उन्होंने कहा कि कल राहुल गांधी और सभी विपक्षी दलों ने इस देश की मातृ शक्ति की पीठ में छुरा घोंपा है और उनके साथ विश्वासघात किया है। कल विपक्ष ने यह तय कर लिया है कि उनकी मंशा यह है कि वे महिलाओं की भूमिका को केवल मतदान केंद्र तक ही सीमित रखना चाहते हैं और जब सत्ता में भागीदारी की बात आती है तो वे अपने हाथ पीछे खींच लेते हैं। दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि महिलाओं में भारी गुस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को अधिकार देना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने उनको छीनने का काम किया है और यह गुस्सा कांग्रेस को भस्म कर देगा और उसे तबाह कर देगा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि मेरा दिल रो रहा है, लेकिन देश और दिल्ली की महिलाएं जाग चुकी हैं। उन्होंने कहा कि असली बात समझिए। जब ​​इसे पास होना था, तो सब एक साथ आ गए थे, लेकिन जिस दिन इसे लागू होना था, उन्होंने इसे गिरा दिया। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन की पार्टियों ने बहनों के साथ कभी न्याय नहीं किया। उन्होंने आरक्षण की बात तो की, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस विधेयक को पास कराने की कभी कोशिश नहीं की। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इसे 2029 तक लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोगों ने एक बार फिर इस विधेयक के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की है। भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने कहा कि इतिहास के पन्नों में इसे एक गौरवशाली अध्याय के तौर पर नहीं, बल्कि एक काले अध्याय के तौर पर याद किया जाएगा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए। यह मांग कोई नई नहीं है और पिछले चार दशकों से कांग्रेस किसी न किसी तरह से इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करती आ रही है।

राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता मामले में नया मोड़

लखनऊ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश आदेश दिया है। हाईकोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। राहुल गांधी पर भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता रखने का आरोप है। इसके खिलाफ विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि राहुल के पास दो देशों के पासपोर्ट हो सकते हैं, जोकि भारतीय कानून का उल्लंघन है। इसी को लेकर लंबे समय से हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सरकार से रिकॉर्ड पेश करने को कहा था। इससे पहले, लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ शिशिर फिर से कोर्ट पहुंचे थे। MP/MLA अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बीएनएस, सरकारी गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए हैं। इस मामले की पहले सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राहुल की ब्रिटिश नागरिकता के खिलाफ मिली शिकायत पर उसने क्या कार्रवाई की है। राहुल गांधी के मुकदमे में सुनवाई फिर टली वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जारी मानहानि केस की सुनवाई फिर टल गई है। याची के वकील सन्तोष पाण्डेय ने शुक्रवार को मौका लिया जिस पर एमपी – एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनवाई 22 अप्रैल को सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। राहुल की वायस रिकार्डिंग को विधि विज्ञान प्रयोगशाला से सत्यापित कराने की मांग पर सुनवाई में मुकदमा कई तारीखों से लम्बित है। कर्नाटक के बंगलूरू में आठ मई 2018 को एक जनसभा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। लखनऊ की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था. लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया था। 

राहुल गांधी को कांग्रेस से हटाने का माहौल, महाराष्ट्र CM का बड़ा बयान

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में उन्हें हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी को चुनाव में जीत नहीं दिला पा रहे हैं। फडणवीस ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि गांधी केवल अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं और अपने नेतृत्व को लगातार मिल रही हार से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। फडणवीस ने दावा किया, 'कांग्रेस में राहुल गांधी को हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी के लिए चुनावी जीत सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।' उन्होंने कहा कि गांधी ने अपनी पार्टी के भीतर जारी संघर्ष से ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान दिए हैं। राहुल गांधी का बयान राहुल ने आरोप लगाए थे कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उद्देश्य संविधान को खत्म करना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए। उन्होंने मंडी हाउस से 14 अप्रैल को भीमराव आंबेडकर की जयंती से पहले यहां 'रन फॉर आंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टीट्यूशन' मैराथन शुरू होने से पहले एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'आंबेडकर जी का मुख्य संदेश संविधान का था। संविधान के बिना जिसे हम भारत कहते हैं, वह नहीं होता। उन्होंने कहा था, 'आज जो लोग आरएसएस-भाजपा की सोच के हैं, वे संविधान को खत्म करना चाहते हैं। वे कुछ भी कहें, उनका असली उद्देश्य संविधान को मिटाना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए।' उन्होंने कहा, 'वे (आरएसएस-भाजपा) चाहे जो करें, वे आंबेडकर जी की प्रतिमा के सामने सिर भी झुकाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य संविधान को खत्म करना है। हमारा उद्देश्य संविधान की रक्षा करना और उसे मजबूत करना है।' PM मोदी से की थी बातचीत शनिवार को समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की स्मृति में आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात हुई थी। यह बातचीत इसलिए खास है क्योंकि सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों नेताओं को शिष्टाचार का आदान-प्रदान करने के अलावा शायद ही कभी एक-दूसरे से बात करते देखा जाता है। प्रधानमंत्री जब फुले की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी सहित कई गणमान्य व्यक्ति एक पंक्ति में खड़े थे। सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन करने के बाद पीएम, गांधी के पास रुके और उनसे बातचीत करने लगे। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि एक मिनट की इस बातचीत के दौरान उन्होंने किस बारे में बात की।