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बालाघाट पहुंचेंगे राहुल गांधी, पीड़ित आदिवासी परिवारों से करेंगे मुलाकात

बालाघाट. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर से मध्य प्रदेश के दौर पर रहेंगे। वह एक अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे और आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस नेता बैहर और बिरसा के प्रभावित आदिवासी इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से बातचीत करेंगे। बालाघाट में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 32 बच्चों की मौत हो चुकी है। इंदौर कार्यक्रम में हुए थे शामिल काग्रेस सांसद का 13 दिन में मध्य प्रदेश का यह दूसरा दौरा रहने वाला है। इससे पहले वह 19 सितंबर को इंदौर के कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' में शामिल हुए थे। कार्यक्रम से पहले उन्होंने लिखा था कि 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण से मौतें हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही। सरकार सोती रही। विक्रांत भूरिया ने की थी बातचीत आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विक्रांत भूरिया ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावितों के आंदोलन, बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से बैगा आदिवासी बच्चों की मौत, देवास सहित अन्य जिलों में आदिवासियों को भूमि से बेदखल करने, वनाधिकार पत्र अब तक प्राप्त न होने सहित अन्य मामलों के बारे में बताया था। कुपोषण और स्वास्थ्य बदहाली पर उठे सवाल सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों से बातचीत की और कहा कि वह एक अक्टूबर को बालाघाट आएंगे और प्रभावितों से मिलेंगे। इसके बहाने वे आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, कुपोषण और सरकारी सेवाओं की स्थिति पर सरकार को घेरने के साथ यह संदेश देने का प्रयास करेंगे कि भाजपा केवल आदिवासी हितैषी होने की बात करती है मगर वास्तविकता तो बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, सिंगरौली और देवास में दिखाई देती है।

राहुल गांधी के बयान से फिर छिड़ी एंटी-इनकंबेंसी की बहस

नई दिल्ली एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ताधारी के खिलाफ माहौल. जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा चुनाव से पहले या फिर चुनाव परिणामों के विश्लेषण में की जाती है. खासतौर पर तब, जब कोई पार्टी चुनाव में अपनी सत्ता न बचा पाई हो. लेकिन, जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा जिस शब्द के इर्द-गिर्द होती है, वह है- प्रो इनकंबेंसी. खासकर उत्तर भारत, और उसमें भी हिंदी पट्टी वाले राज्यों में. राहुल गांधी इसे असाधारण मानते हैं. कहते हैं यह स्वाभाविक नहीं है. ये साजिश है. चुनाव आयुक्तों के खुलासे के बाद यह साबित हो गया है।  राहुल गांधी कहते हैं कि देश के बड़े-बड़े राजनेता एंटी-इनकंबेंसी का शिकार बने हैं. चुनाव हारते रहे हैं. लेकिन, मोदी और शाह अपने भाषणों में 50 साल, 30 साल, 15 साल सरकार में बने रहने की बात करते हैं. ऐसा क्या है कि इनके मामले में एंटी-इनकंबेंसी काम नहीं करती. वे इसके पीछे चुनाव आयोग की कथित बेइमानी को दोष देते हैं।  DUSU का सबक लेकिन, उनका ये लॉजिक हफ्ताभर पहले आए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव नतीजों (DUSU election results) में धराशायी हो जाता है. जहां कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI चारों पदों पर चारों खाने चित्त हो जाती है. उस ABVP के सामने जो लंबे अरसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ पर काबिज है।  ये भी नहीं कहा जा सकता कि चुनाव में धांधली हुई है. क्योंकि, DUSU के चुनाव तो ज्ञानेश कुमार वाला चुनाव आयोग नहीं करवाता. यानी, तमाम Gen-Z आंदोलन, पेपर लीक के मुद्दे, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बावजूद बीजेपी समर्थित ABVP अपनी बात छात्रों तक पहुंचाने में कामयाब रहता है. और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों की झड़ी लगा देने वाले राहुल गांधी की पार्टी नाकाम. ऐसा इसलिए क्योंकि, सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी से चुनाव नहीं जीता जाता. चुनाव मैनेजमेंट से जीता जाता है. जिसमें उम्मीदवारों का चयन, सत्ता पक्ष के खिलाफ गठबंधन, और भी कई गुणा-भाग काम आता है।  दूसरों पर एंटी-इनकंबेंसी मढ़ना भी कला कोई जरूरी नहीं कि किसी सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी हो ही. या, उसने ऐसा कुछ बुरा किया हो जिसे एंटी-इनकंबेंसी कहा जा सके. लेकिन, यह विपक्ष की खूबी होती है कि वह सत्ता पक्ष के सिर पर कोई ऐसा ठप्पा मढ़ दे, जो उसे जनविरोधी साबित कर दे. जैसे, 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने काफी हद तक ये नैरेटिव चलाने में कामयाबी हासिल की कि यदि नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आई तो वह संविधान बदल देगी।  जहां एंटी-इनकंबेंसी ‘आउट ऑफ कोर्स’ है राहुल गांधी अपने भाषण में राजस्थान, हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु जैसे राज्यों का हवाला देते हैं, जहां पहले हर चुनाव में वोटर सत्ताधारी पार्टी को बदल देते थे. लेकिन, बार-बार सत्ता में पार्टियों को बदलना चुनाव की आदर्श स्थिति नहीं है. इसका मतलब यह है कि उनके पास एक स्थायी ऑप्शन नहीं है. वह जल्दी-जल्दी ऊब जाते हैं. ऐसा यूपी, बिहार ही नहीं, देश के कई राज्यों में होता रहा. फिर, वोटरों को जिस भी पार्टी या नेता में उन्हें स्थायी समाधान मिला, उन्होंने लंबे समय तक उन्हें सत्ता सौंप दी।  जैसे, गुजरात में नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह, बिहार में नीतीश कुमार, यूपी में योगी आदित्यनाथ, त्रिपुरा में माणिक सरकार, ओडिशा में नवीन पटनायक. ये भी अलग-अलग पार्टियों के नेता था, लेकिन इन्होंने एंटी-इनकंबेंसी को ‘आउट ऑफ कोर्स’ शब्द बना दिया. यूपी में योगी को अगर ‘बुल्डोजर बाबा’ कहा जाता है, तो उसका फायदा उन्हें प्रो-इनकंबेंसी के रूप में मिलता है।  कुल मिलाकर, एंटी-इनकंबेंसी एक पेड़ पर लगा हुआ फल है. जिसे नेताओं को चुनाव से पहले मेहनत करके डाली पर चढ़कर तोड़ना होता है. बहुत किस्मत वालों की झोली में ही यह सीधा आकर गिरता है. होशियार सत्ताधारी अपनी एंटी-इनकंबेंसी के इस फल को पेड़ पर ही या तो सड़ा देते हैं, या फिर अपने नैरेटिव के पत्तों में छुपा लेते हैं. राहुल गांधी को एंटी-इनकंबेंसी का फायदा चुनाव से पहले मेहनत और सियासी गणित से हासिल हो सकता है. चुनाव हार गए तो सिर्फ इनकंबेंसी के एंटी बातें ही रह जाती हैं. जो राहुल फिलहाल कर रहे। हैं।  हालांकि, बीजेपी ने संविधान बदलने की कोई मंशा जाहिर नहीं की थी, सिवाय उसके कुछेक नेताओं के बयान के. बीजेपी ने बहुत भरोसा दिलाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा. लेकिन, दलित वोटरों ने विपक्ष का नैरेटिव स्वीकार किया, और यूपी जैसे राज्य में बीजेपी को बड़ा नुकसान पहुंचाया।  ‘मिस्टर बंटाधार’, ‘जंगल-राज’, ‘माफिया-राज’ का ठप्पा अब आते हैं कि यूपी, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की ओर जहां बीजेपी या एनडीए दल लगातार सत्ता पर काबिज हैं. बेशक, इन सरकारों के कई पहलू एंटी-इनकंबेंसी का कारण बन सकते थे. लेकिन, यहां पर बीजेपी और एनडीए दल अपने विरोधियों की पुरानी सरकारों की एंटी-इनकंबेंसी वोटरों के मनमस्तिष्क में ऐसी बैठाई है कि हर चुनाव में सत्ता पक्ष पर हमलावर होने के बजाय विपक्ष अपने खिलाफ नैरेटिव की ही सफाई देता रह जाता है।  मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बहुत बुरी पराजय हुई. चुनाव जीतने वाली उमा भारती ने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम रख दिया- ‘मिस्टर बंटाधार’. दिग्विजय और कांग्रेस पर यह लेबल इतना बुरा चिपका, कि अगले कई चुनावों तक बीजेपी यही दोहराती रही कि यदि कांग्रेस जीती तो मिस्टर बंटाधार वाला दौर वापस आ जाएगा. ये बिल्कुल वैसा ही है, जैसे बिहार के हर चुनाव में बीजेपी और एनडीए के नेता राजद और लालू के दौर वाले ‘जंगल राज’ की याद दिलाते हैं और यूपी के हर चुनाव में मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी के दौर का ‘माफिया राज’ चर्चा में आ जाता है. और बीजेपी के इस नैरेटिव ने उसकी कांग्रेस, राजद और सपा जैसी पार्टियों को डिफेंसिव बना दिया।  चैलेंजर का सरेंडर अब आते हैं उस ट्रेंड पर, जहां एंटी-इनकंबेंसी को भुनाना तो छोड़िए, विपक्षी दल के रूप में पार्टियों ने सत्ता पक्ष के आगे सरेंडर ही कर दिया. तमिलनाडु में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार 1967 में बनी थी. उसके बाद वह न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, वह चैलेंजर भी नहीं रही. पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ. 1977 में वामपंथी दलों ने वहां की सत्ता पर ऐसा कब्जा जमाया … Read more

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के वीडियो पर BJP हमलावर, मां पर टिप्पणी को लेकर जताई आपत्ति

इंदौर/नई दिल्ली. शनिवार को इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में एक कॉमेडियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल करने को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच जुबानी जंग हुई. छात्रों पर केंद्रित इस कार्यक्रम में स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि मंच पर आए और मोदी के हाव-भाव और विदेशी नेताओं से बात करने के उनके अंदाज की नकल की. इस प्रस्तुति में मोदी की विदेश नीति, उनकी मां और बच्चों के साथ प्रधानमंत्री द्वारा किए गए सिक्के के एक ट्रिक का ज़िक्र किया गया. मणि ने मोदी के विदेशी नेताओं के साथ बातचीत की नकल करते हुए बार-बार “my friend” का इस्तेमाल किया. उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा, “My friend, how are you?” लोकसभा में विपक्ष के नेता ने जवाब दिया, “I am fine, how are you Modi ji?” मणि ने जवाब दिया, “Great harassment” और मोदी के हाव-भाव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हुए “my friend” का इस्तेमाल जारी रखा. इस प्रस्तुति में गलगोटियास यूनिवर्सिटी और इंडिया ग्लोबल AI समिट में यूनिवर्सिटी द्वारा दिखाई गई चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर हुए विवाद का भी ज़िक्र किया गया. इसके बाद गांधी ने कहा, “Very nice to meet you,” और मणि से कहा कि “tell me more”. इसके बाद कॉमेडियन ने प्रधानमंत्री की मां का ज़िक्र करते हुए हंसते हुए और मोदी की नकल करते हुए कहा, “मां को कुर्सी दो, मां.” इसके बाद उन्होंने कहा, “Setting, my friend.” मणि ने बच्चों के साथ बातचीत के दौरान मोदी द्वारा किए गए सिक्के के एक ट्रिक की भी नकल की. उन्होंने सिक्का अपने माथे पर रखा, जिस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां और आवाज़ें लगाईं. कांग्रेस ने इस बातचीत के वीडियो क्लिप एक्स पर बड़े पैमाने पर शेयर किए. इसके आधिकारिक हैंडल ने एक वीडियो को “Narendra Modi ki Foreign Policy” कैप्शन के साथ पोस्ट किया, जबकि दूसरे पर लिखा था, “My friend!! Great Harassment!!” कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी वीडियो शेयर किया और लिखा: “इंदौर में हंसने वाला स्मार्ट व्यक्ति आया, माथे पर सिक्का चिपकाया और ‘great harassment’ का शानदार शो किया.” इसके बाद BJP ने गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा, खासकर मोदी की दिवंगत मां के जिक्र को लेकर. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा: “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दिवंगत मां के बारे में आपत्तिजनक शब्द बोले जाना और राहुल गांधी का उस पर हंसना बेहद शर्मनाक और दुखद है.” उन्होंने कहा, “मां राजनीति का विषय नहीं है. किसी मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता.” धामी ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री जी की दिवंगत मां के बारे में की गई अभद्र टिप्पणियों पर हंसना आपकी अपनी राजनीतिक संस्कृति को उजागर करता है. राहुल गांधी जी, राजनीतिक विरोध में शालीनता की सभी सीमाएं पार करना न तो लोकतंत्र है, न सेवा है और न संस्कृति. देश की मातृशक्ति सब कुछ देख रही है. ऐसी संवेदनहीनता और मजाक किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका “गैर-जिम्मेदार रवैया बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अनुचित है”. यादव ने कहा, “हमारे देश की संस्कृति और माताओं के सम्मान का अपमान करके उन्होंने युवाओं के भविष्य को गलत दिशा में ले जाने को बढ़ावा दिया है.” CM ने कहा कि प्रधानमंत्री की मां का “अपमान” देश की सभी माताओं का “अपमान” है और उन्होंने गांधी से माफी मांगने की मांग की. यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की सार्वजनिक छवि का इस्तेमाल व्यंग्य के लिए किया है. अगस्त में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में गांधी ने मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए पार्टी नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया था. दीक्षित ने मज़ाक करते हुए कहा था, “आप मुझे गले लगाते समय यह तो नहीं सोच रहे थे कि मैं मेलोनी हूं?” गांधी ने जवाब दिया था, “मैं अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा हूं.” BJP ने इस बातचीत की आलोचना की थी. दोनों पार्टियों के बीच सोशल मीडिया पर भी व्यापक लड़ाई चल रही है, जिसमें AI से बनाई गई तस्वीरों को लेकर विवाद भी शामिल है. इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस की केरल इकाई ने BJP नेताओं को निशाना बनाते हुए AI से बनाई गई तस्वीरें शेयर की थीं. इनमें एक तस्वीर में अमित शाह जैसे दिखने वाले व्यक्ति को Maruti Omni में बैठे हुए दिखाया गया था और दूसरी में मोदी को रेलवे स्टेशन पर दिखाया गया था. इसके बाद गुजरात, केरल और तेलंगाना की BJP इकाइयों ने सोनिया गांधी को निशाना बनाते हुए AI से बनाई गई कई तस्वीरें शेयर कीं. तेलंगाना BJP की एक पोस्ट में एक महिला को बार में दिखाया गया था और कैप्शन था, “Lusiana, Italy. Circa-1970s”, जिसमें सोनिया गांधी के जन्मस्थान का जिक्र किया गया था. इसके बाद कांग्रेस ने कहा है कि वह कुछ पोस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है.

MP में नेताओं के लगातार दौरे, राहुल गांधी से पहले मोहन भागवत करेंगे Gen-Z से संवाद?

भोपाल अगले तीन-चार दिनों तक पूरे देश की निगाहें मध्यप्रदेश पर रहने वाली हैं. दरअसल, 17 से 19 सितंबर तक संघ प्रमुख मोहन भागवत, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश दौरे पर होंगे. इसके साथ ही संघ महासचिव दत्तात्रेय होसबोले भी मध्यप्रदेश दौरे पर आ रहे हैं. निगाहें आज उज्जैन में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात पर लगी हैं. मोहन भागवत गुरुवार दोपहर तक उज्जैन पहुंचेंगे, जहां उनकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ संगठनात्मक विषयों पर चर्चा हो सकती है. दोनों की इस मुलाकात को मध्य प्रदेश की सियासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, आज पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर मालवा से निकलने वाले सियासी संदेश पर पूरे देश की नजर होगी।  नबीन का पहला मध्यप्रदेश दौरा, क्या होगा भागवत संवाद? मध्यप्रदेश का मालवा यूं भी बीजेपी का गढ़ रहा है लेकिन पीएम मोदी के जन्मदिन के साथ अगले कुछ दिनों तक मालवा देश के केन्द्र में रहने वाला है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने के बाद उनके पहले मध्यप्रदेश दौरे की शुरुआत आज इंदौर से हो रही है. शाम को वे उज्जैन में रामघाट पर पीएम मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. संघ प्रमुख 18 सितम्बर से होने जा रही धर्म संसद को संबोधित करने आज दोपहर तक उज्जैन पहुंच रहे हैं. इस लिहाज से इन दोनों ही नेताओं की मुलाकात की पूरी संभावना है. माना जा रहा है कि ये मुलाकात बीजेपी के संगठनात्मक विषयों को लेकर नई दिशा तय कर सकती है।  राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश भटनागर कहते हैं, '' इस तरह की मुलाकात के अमूमन कार्य्रक्रम जारी नहीं होते हैं. लेकिन स्वभाविक ही है कि जब संघ प्रमुख मोहन भागवत उज्जैन में हैं, तो नितिन नबीन उनसे मुलाकात करेंगे. लेकिन ये कोई एजेंडा मीटिंग होगी ये भी पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता. चूंकि संघ प्रमुख सें संवाद एक दिशा तो देता ही है, उस लिहाज से इस मुलाकात को देखा जा सकता है  राहुल से पहले नबीन और भागवत का दौरा उधर कांग्रेस राहुल गांधी के इंदौर में होने जा रहे छात्रों की गूंज कार्यक्रम के ठीक पहले नितिन नबीन के मध्यप्रदेश आगमन और उज्जैन में होने जा रही धर्म संसद जैसे आयोजन के कई मायने निकाले जा रहे हैं. वहीं, कांग्रेस इसे बीजेपी की घबराहट बता रही है. कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा कहती हैं, '' जैसे ही हमारे नेता राहुल गांधी जी का कार्यक्रम तय हुआ, उसके ठीक बाद नितिन नबीन का दौरा कार्यक्रम तय किया गया. बीजेपी ये भी तय नहीं कर पा रही थी कि वे आकर करेंगे क्या. ये सिर्फ राहुल गंधी जी की बढ़ती लोकप्रियता से हुई घबराहट का नतीजा है।  मालवा फिर बीजेपी की राजनीति का सेंटर पाइंट बना मालवा बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, इंदौर में नगर निगम से लेकर सारे विधायक और सांसदों तक यहां बीजेपी का कब्जा है. इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना का शुभारंभ करेंगे. उधर उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंस सेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत धर्म संसद में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं. धर्म संसद 18 सितम्बर से है। 

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में होंगे शामिल

भोपाल  19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भाग लेंगे। इसे गैर राजनीतिक कार्यक्रम बताया जा रहा है। इस कार्यक्रम से पहले राहुल का रोड शो कराने की तैयारी कांग्रेस कर रही है। संभावना है कि रोड शो एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक कराया जा सकता है। क्यूआर कोड से प्रवेश और रोड शो की तैयारी इधर छात्रों की गूंज कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं को क्यूआर कोड से प्रवेश मिलेगा। चूंकि, कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रवेश निषेध है, इसलिए प्रदेश कांग्रेस रोड शो की तैयारी कर रही है। इसे राहुल गांधी की टीम से चर्चा के बाद बुधवार को अंतिम रूप दिया जा सकता है। जीतू पटवारी का बयान और कार्यकर्ताओं का उत्साह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ता उत्साहित हैं। प्रदेश भर के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इंदौर पहुंच रहे हैं। चूंकि, छात्रों की गूंज कार्यक्रम गैर राजनीतिक है, इसलिए वहां कार्यकर्ताओं को प्रवेश नहीं मिलेगा, लेकिन कार्यकर्ता उनसे मिलना चाहते हैं, इसलिए प्रयास कर रहे हैं कि विमानतल से कार्यक्रम स्थल के बीच दो-तीन जगह स्वागत कार्यक्रम हो जाएं, जहां कार्यकर्ता उनसे मिल लें। वैसे तैयारी ठीक उसी तरह से की जा रही है जैसे भारत जोड़ो यात्रा के समय थी। वरिष्ठ नेताओं को ही प्रवेश सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को ही प्रवेश मिलेगा। इनके बैठने का अलग स्थान रहेगा। बैठक व्यवस्था इस तरह से बनाई जाएगी किसी को असुविधा न हो।     

रायबरेली में कांग्रेस नेता के बयान पर योगी सरकार के मंत्री ने किया करारा पलटवार

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी पवित्र योजना पर राहुल गांधी का सवाल उठाना मातृशक्ति का अपमान : दिनेश प्रताप सिंह  रायबरेली में कांग्रेस नेता के बयान पर योगी सरकार के मंत्री ने किया करारा पलटवार रायबरेली की जनता और महिलाओं के साथ अन्यायपूर्ण राजनीति कर रहे राहुल गांधी : मंत्री योगी सरकार की प्राथमिकता जनता की सुरक्षा, सम्मान और विकास है, विपक्ष को निभानी चाहिए रचनात्मक भूमिका लखनऊ प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता एवं रायबरेली के सांसद राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी का जोर जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें गति देने के बजाय ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं में खामियां तलाश कर राजनीति करने पर अधिक रहा। मंत्री ने कहा कि बैठक में राहुल गांधी के रवैये से निराशा हुई। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर सवाल उठाने का आरोप राज्यमंत्री ने कहा कि दिशा बैठक में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने संबंधित अधिकारी से पूछा कि इस योजना में क्या होता है। यदि दिशा समिति के अध्यक्ष को ही योजना की जानकारी नहीं होगी तो उसका अनुश्रवण और समन्वय कैसे होगा। इसके बाद राहुल गांधी ने योजना के प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च को जानने पर अधिक जोर दिया। इससे ऐसा लगा कि योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के बजाय उसमें खामी तलाशना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बेटियों और मातृशक्ति के सम्मान से जुड़ा अभियान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।  ‘डरो मत’ कहने वाले राहुल गांधी जनता और मीडिया से क्यों बच रहे?   दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के ‘डरो मत’ संदेश पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि रायबरेली में उन्होंने सांसद निधि से कराए गए कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास अपने निजी आवास के भीतर से किया, जबकि बाहर के गेट पर ताला लगा रहा। मीडिया प्रतिनिधि सुबह से इंतजार करते रहे, लेकिन राहुल गांधी कैमरे के सामने आकर रायबरेली की जनता को शुभकामनाएं तक नहीं दे सके।  राहुल को तीन लोग पीछे बैठकर पर्चियों के माध्यम से निर्देश देते रहे राज्यमंत्री ने कटाक्ष किया कि रायबरेली की दिशा बैठक में भी राहुल गांधी सांसद और समिति अध्यक्ष से ज्यादा नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में नजर आए। उनके साथ दिल्ली से आए तीन लोग पीछे बैठकर पर्चियों के माध्यम से निर्देश देते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में भी राहुल गांधी दूसरे दलों के सहयोग पर निर्भर दिखाई देते हैं। योगी सरकार में सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में जनता की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना देश के साथ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भी की गई है।  अखिलेश के बुलंदशहर दौरे पर बोले- सरकार ने किसी को नहीं रोका अखिलेश यादव के बुलंदशहर दौरे में हेलीपैड की अनुमति से जुड़े सवाल पर दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलना किसी राजनीतिक भय का विषय नहीं है। योगी सरकार ने अखिलेश यादव को कभी कहीं जाने से नहीं रोका और न इसकी आवश्यकता है। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की राष्ट्रीय लोकदल नेतृत्व से जुड़ी टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

राहुल गांधी खुद चुनेंगे कांग्रेस की फ्यूचर टीम, 120 युवा नेता शॉर्टलिस्ट; संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन को नए सिरे से गढ़ने और युवाओं को फ्रंटफुट पर लाने की कवायद शुरू कर दी है. कांग्रेस को बुजुर्ग और 'ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स' करने वाले नेताओं के चंगुल से निकालकर अब एक युवा, आक्रामक और जमीन पर लड़ने वाले संगठन में तब्दील करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।  कांग्रेस में राष्ट्रीय संगठन के पदों पर नियुक्ति के लिए अब राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय काम के रिकॉर्ड और जमीनी सक्रियता को मुख्य कसौटी माना जा रहा है. संगठन को अधिक समावेशी और गतिशील बनाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने नए राष्ट्रीय सचिवों को शामिल करने हेतु इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की है।  राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए नेताओं के इंटरव्यू ले रहे हैं. देश के अलग-अलग राज्यों से चुनिंदा नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है, ताकि संगठन में एक नई, पेशेवर और वैचारिक रूप से मजबूत युवा लीडरशिप तैयार की जा सके।  राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ले रहे इंटरव्यू राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए 30 नेताओं का इंटरव्यू लिया. रायबरेली के दो दिवसीय दौरे से राहुल गांधी के लौटने के बाद फिर से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होगी. यह कदम केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी में नई ऊर्जा और मजबूत युवा लीडरशिप खड़ी करने का एक सुनियोजित प्रयास है।  कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव के लिए 10-10 के समूह में नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है. राहुल गांधी नेताओं से उनके पुराने कामकाज से लेकर प्रोफाइल तक के बारे में सवाल पूछ रहे हैं. जिन नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है, उनके कामकाज का पूरा रिपोर्ट कार्ड पहले से ही राहुल गांधी के पास मौजूद है।  राहुल गांधी बना रहे अपनी नई टीम कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है, जिसके लिए राहुल गांधी पार्टी में अपनी नई टीम तैयार कर रहे हैं. इसीलिए फाइनल इंटरव्यू राहुल गांधी खुद ले रहे हैं. राष्ट्रीय सचिव पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं के कामकाज की रिपोर्ट के साथ राहुल गांधी उनसे मिल रहे हैं।  राहुल गांधी का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि निर्णय केवल सिफारिशों या सिफारिशी पत्रों के आधार पर न हों, बल्कि जमीनी हकीकत, काम करने की क्षमता और दूरदृष्टि के बल पर युवाओं को जगह मिले. कांग्रेस अपने मौजूदा 60 प्रतिशत से ज़्यादा सचिवों को बदलने की तैयारी में है और संगठन में नए चेहरों को मौका देने की योजना बना रही है।  कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए 120 नेताओं का इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसके बाद पार्टी उनकी नियुक्ति करेगी. इस पद के लिए उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने पहले कांग्रेस के 'संगठन सृजन' कार्यक्रम के तहत ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया है।  नई लीडरशिप खड़ी करने का प्लान राहुल गांधी ने जब 2004 में राजनीति में कदम रखा था, तब से कांग्रेस पार्टी का कायाकल्प और 'जनरेशन चेंज' उनका सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है. उन्होंने कांग्रेस के भीतर युवाओं को आगे लाने और पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करने के लिए कई प्रयास किए हैं. कांग्रेस ने यूथ कांग्रेस और NSUI में भी नियुक्तियां करने के लिए इंटरव्यू-आधारित प्रक्रिया अपनाई थी. इसके जरिए प्रतिभा-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया, ताकि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवा भी नेतृत्व में आ सकें।  राहुल गांधी का यह सियासी प्रयोग पहले पुराने दिग्गजों (ओल्ड गार्ड) के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के चलते परवान नहीं चढ़ सका था. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के भीतर जो कदम उठाए जा रहे हैं और बदलाव दिख रहे हैं, उनसे स्थिति बदल रही है. कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों की ताजपोशी कर सियासी संदेश दिया है. संगठन में बदलाव शुरू हो चुके हैं और अब नए चेहरे नजर आने लगे हैं।  प्रदेश संगठन से लेकर जिला संगठन तक में युवा चेहरों की नियुक्तियां हो रही हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि राहुल गांधी का दो दशक पुराना सपना अब हकीकत में बदलने लगा है. इसी कड़ी में राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति का खाका खींचा जा रहा है. इसके जरिए उन कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं को तरजीह दी जा रही है जो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे हैं, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं का भरोसा राजनीति में बना रहे।  कांग्रेस का प्लान देश के हर कोने और समाज के हर वर्ग से आने वाले युवाओं को मौका देकर एक समावेशी टीम बनाने का है. राहुल गांधी का यह प्रयोग इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की राजनीति को वही दिशा दे सकते हैं जिनके पास नया दृष्टिकोण, ऊर्जा और जनसेवा का जज्बा हो. राष्ट्रीय सचिवों के इस चयन अभियान से न केवल संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश की जा रही है, बल्कि यह देश के हर उस युवा के लिए भी एक उम्मीद का संदेश है जो राजनीति को बदलाव का जरिया मानता है। 

इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम अब 19 सितंबर को, नेहरू स्टेडियम की जगह रीजनल पार्क तय

इंदौर  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित इंदौर दौरा अब 12 सितंबर को नहीं होगा। कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तारीख एक सप्ताह आगे बढ़ाकर 19 सितंबर कर दी है। कार्यक्रम का स्थल भी बदल दिया गया है। नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद अब आयोजन रीजनल पार्क के सामने प्रस्तावित है। लगातार बारिश को भी तारीख बदलने की एक वजह बताया जा रहा है। नेहरू स्टेडियम में नहीं मिली अनुमति कांग्रेस ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए इंदौर के नेहरू स्टेडियम को प्रस्तावित किया था। इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, प्रशासन ने कोर्ट से जुड़े मामले का हवाला देते हुए स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस ने कार्यक्रम का स्थल बदलने का फैसला किया। अब रीजनल पार्क में होगा कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम की जगह अब रीजनल पार्क के सामने कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। कांग्रेस की ओर से नए स्थल पर व्यवस्थाएं जुटाने का काम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के शामिल होने की संभावना है। नेहरू स्टेडियम पर प्रशासन ने नहीं दी अनुमति कांग्रेस ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की अनुमति मांगी थी। पार्टी की ओर से कार्यक्रम को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं, लेकिन जिला प्रशासन ने नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। प्रशासन की ओर से इसके लिए कोर्ट से जुड़े मामले का हवाला दिया गया। अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस के सामने कार्यक्रम का स्थान बदलने का विकल्प बचा। अब रीजनल पार्क में जुटेंगे छात्र नेहरू स्टेडियम की जगह अब रीजनल पार्क को कार्यक्रम स्थल बनाया गया है। कांग्रेस का फोकस छात्रों और युवाओं को कार्यक्रम से जोड़ने पर है। ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए राहुल गांधी छात्रों से सीधे संवाद करेंगे और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। बीजेपी की बयानबाजी के बीच बदला कार्यक्रम राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी भी शुरू हो गई थी। कार्यक्रम स्थल को लेकर प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने के बाद राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर चर्चा तेज हुई। कांग्रेस ने अब विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय कार्यक्रम का स्थल बदलकर रीजनल पार्क करने का निर्णय लिया है। एक सप्ताह आगे बढ़ा कार्यक्रम पहले राहुल गांधी का इंदौर दौरा 12 सितंबर को प्रस्तावित था। अब यह कार्यक्रम 19 सितंबर को होगा। यानी कार्यक्रम को एक सप्ताह आगे बढ़ाया गया है। नई तारीख और नए स्थल के साथ कांग्रेस अब छात्रों की भागीदारी बढ़ाने और कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारियों में जुटेगी। छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे राहुल ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का फोकस छात्रों और युवाओं पर रहेगा। कांग्रेस के मुताबिक, कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी युवाओं से सीधे संवाद करेंगे और शिक्षा, रोजगार समेत युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी में जुटी है। बारिश ने भी बढ़ाई मुश्किलें इंदौर में लगातार हो रही बारिश के कारण खुले स्थान पर कार्यक्रम की तैयारियों में भी दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में कांग्रेस ने कार्यक्रम की तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय लेने का फैसला किया। इसी के चलते 12 सितंबर की प्रस्तावित तारीख को आगे बढ़ाकर 19 सितंबर किया गया है।कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाने के पीछे लगातार हो रही बारिश भी एक वजह बताई जा रही है। इंदौर में बारिश के कारण खुले स्थान पर होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों में दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में कांग्रेस ने तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय लेते हुए कार्यक्रम को 12 सितंबर से बढ़ाकर 19 सितंबर करने का फैसला किया है। बीजेपी-कांग्रेस के बीच पहले से जारी है सियासी बयानबाजी राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से ही सियासी बयानबाजी चल रही थी। कार्यक्रम स्थल पर अनुमति नहीं मिलने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई। कांग्रेस ने अब स्थल बदलकर कार्यक्रम की तैयारियों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। एक सप्ताह आगे बढ़ा कार्यक्रम राहुल गांधी का इंदौर दौरा पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित था। अब वे 19 सितंबर को इंदौर पहुंचेंगे। नई तारीख और नए स्थल के साथ कांग्रेस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रही है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस में घमासान, राकेश सिंह यादव का इस्तीफा; राहुल गांधी और जीतू पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप

इंदौर  मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने कहा कि पार्टी में अब कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय सवाल पूछने वालों को नोटिस देकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है। राकेश सिंह यादव ने कहा कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से कांग्रेस में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करते रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग पदों पर संगठन की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन पहली बार उन्हें ऐसा माहौल देखने को मिला जहां अपनी बात रखने पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा की जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने के योग्य नहीं हैं और उनके नेतृत्व में संगठन लगातार कमजोर हुआ है। टीवी डिबेट में जाने पर मिला नोटिस यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें नेताओं को टीवी डिबेट में शामिल नहीं होने और मीडिया के सामने बयान देने से मना किया गया था। साथ ही तीन दिन के मौन सत्याग्रह का निर्देश भी दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी ने मुख्यमंत्री और वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था तब उसके समर्थन में क्या सबूत पेश किए गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से सिर्फ इतना पूछा था कि जिन आरोपों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई उनके दस्तावेज कहां हैं। लेकिन जवाब देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया कि उन्होंने टीवी डिबेट में हिस्सा क्यों लिया। यादव का कहना है कि अपनी बात रखना और सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है और कांग्रेस के संविधान में मीडिया के बहिष्कार जैसा कोई प्रावधान नहीं है। वीर भूमि न्यास मामले में उठाए सवाल राकेश सिंह यादव ने कहा कि वीर भूमि न्यास को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह सरकारी ट्रस्ट है और सरकार की जमीन एक विभाग से दूसरे विभाग को दी गई है। कांग्रेस सरकारों के समय भी कई अस्पतालों, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक ट्रस्टों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की गई थी। ऐसे मामलों को भ्रष्टाचार या घोटाला बताना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना दस्तावेजों के इतने बड़े आरोप लगाने से पार्टी खुद सवालों के घेरे में आ गई है। यदि वास्तव में सबूत होते तो उन्हें दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक किया जाता। जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर लगाए गंभीर आरोप राकेश सिंह यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर संगठन में मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान के दौरान पैसों के आधार पर नियुक्तियां की गईं जिससे संगठन को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए भी जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी जिम्मेदार हैं। यादव ने हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में टिकट बेचे और जीतू पटवारी ने उनका बचाव किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चौधरी एक डिफेंडर वाहन लेकर आए और उसके बदले कई पदों का बंटवारा किया गया। राहुल गांधी पर भी साधा निशाना राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में गलत लोगों को संरक्षण मिल रहा है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी वजह से कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं की भी बात नहीं सुनी जा रही है। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जताई चिंता यादव ने कहा कि यदि संगठन की कार्यशैली में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है। प्रदेश की 16 नगर निगमों में पार्टी किसी भी महापौर सीट पर मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रही है। बीजेपी में जाने के सवाल पर क्या बोले? बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर राकेश सिंह यादव ने साफ कहा कि फिलहाल उनकी किसी भी दल से कोई बातचीत नहीं हुई है। भविष्य में क्या होगा इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यादव ने यह भी कहा कि यदि राजनीति का उद्देश्य जनता के बीच काम करना है तो वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह न दलाली कर सकते हैं और न ही संगठन में पैसों के लेन-देन की राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।  

राहुल गांधी का पंजाब कांग्रेस को कड़ा संदेश! गुटबाजी छोड़ने की नसीहत, 5 दिग्गज नेताओं संग बैठक

 चंडीगढ़ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले  पंजाब कांग्रेस के पांच नेताओं के साथ अहम बैठक की।  इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को समाप्त करना था। राहुल ने वरिष्ठ नेताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और विजय इंदर सिंगला समेत अन्य नेता शामिल थे। बाजवा ने बताया कि राहुल गांधी ने सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। संगठनात्मक बदलाव का फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया है। पंजाब की जनता कांग्रेस को एक और अवसर देने के लिए तैयार है।  उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला दिया। कांग्रेस ने तब 14 में से 8 संसदीय सीटें जीती थीं, जिनमें सात पंजाब की थीं। बाजवा के अनुसार, एकजुट होकर कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में 70 से 80 सीटें जीत सकती है। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां  पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बताया कि यह बैठक 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए थी। सभी नेताओं ने इसमें अपनी राय रखी। वड़िंग ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान नितिन नबीन के पंजाब दौरे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा का पंजाब में जबरदस्ती करने का सपना पूरा नहीं होगा। पंजाब के लोग ऐसी किसी भी जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं करेंगे। संगठनात्मक बदलाव पर मंथन  पार्टी में प्रधान पद में बदलाव को लेकर भी चर्चा चल रही है। सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम पर विचार हो रहा है। पार्टी आलाकमान इन दोनों नामों पर गहन मंथन कर रहा है। प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करना पार्टी आलाकमान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पार्टी ने गुटबाजी पर सख्त रुख अपनाया है। राहुल ने पहले भी पंजाब दौरे के दौरान चेतावनी दी थी कि जो नेता काम नहीं करेगा, उसे घर बैठा दिया जाएगा। नेताओं के साथ व्यक्तिगत बैठकें  बैठक से पहले पर्यवेक्षकों ने भी नेताओं के साथ व्यक्तिगत बैठकें की थीं। इन बैठकों में सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और जिला प्रधान शामिल थे। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले समय मांगा था। उन्होंने बैठक के दौरान अपनी बात विस्तार से रखी। ये बैठकें नेताओं की व्यक्तिगत राय जानने के लिए महत्वपूर्ण थीं।