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खरगे का तीखा हमला: मणिपुर नहीं जाना पीएम की प्राथमिकता में नहीं

नई दिल्ली  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम मोदी 42 देशों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन एक बार भी मणिपुर नहीं गए। मणिपुर हिंसा पर केंद्र सरकार को घेरा खरगे ने मणिपुर में एक साल से ज्यादा समय से चल रही हिंसा और अस्थिरता पर चिंता जताई और कहा कि प्रधानमंत्री ने कभी वहां जाकर लोगों का दुख साझा करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने सवाल किया, "42 देशों में घूम आए, मगर मणिपुर जाना जरूरी नहीं समझा। क्या मणिपुर भारत का हिस्सा नहीं है?" गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले वर्ष से लगातार जातीय हिंसा जारी है, जिस पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। संविधान बदलने की कोशिश का आरोप खरगे ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर संविधान को बदलने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "बीजेपी और आरएसएस संविधान बदलना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता उन्हें ऐसा करने नहीं देगी।" उन्होंने लोगों से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील भी की। कांग्रेस बनाम बीजेपी: काम बनाम बातें कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस और भाजपा की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी में लोग काम करते हैं, जबकि मोदी की बीजेपी में लोग सिर्फ बातें करते हैं।" उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देती है और विकास को केंद्र में रखती है।   कर्नाटक सरकार पर लगाए गए आरोपों का खंडन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर वित्तीय संकट के आरोपों को खारिज करते हुए खरगे ने कहा कि भाजपा का यह दावा पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा, "बीजेपी कहती है कि कर्नाटक सरकार कंगाल हो गई है, लेकिन यह सरासर झूठ है। सिद्धारमैया सरकार राज्य को बेहतर दिशा में ले जा रही है।"  

‘काली माँ ढोकला नहीं खाती’, महुआ का व्यंग्यबाण चला पीएम मोदी पर

दुर्गापुर  पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण मां काली और मां दुर्गा के जयघोष के साथ शुरू किया। उनके भाषण में पश्चिम बंगाल को लेकर आगे की रणनीति कि झलक साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने 33 मिनट के भाषण के दौरान एक बार भी सीएम ममता बनर्जी का नाम नहीं लिया। वहीं टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि बंगाली वोटर्स को लुभाने के लिए वह हथकंडा अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, पीएम मोदी जरा लेट हो गए हैं। मोइत्रा ने कहा, बंगाली वोटर्स को लुभाने के लिए मां काली के जयकारे लगवाने में पीएम मोदी जरा लेट हो गए। मां काली ढोकला ना तो खाती हैं और ना ही कभी खाएंगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात से आते हैं और ढोकला वहां की काफी लोकप्रिय डिश है। शुक्रवार को दुर्गापुर की रैली में प्रधानमंत्री ने सुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किस तरह से बंगाल को आजादी से पहले वाला सम्मान और गौरव मिल सकता है। बीजेपी ने इस बार रणनीति में परिवर्तन किया है। वह नहीं चाहती की उसकी वजह से ममता बनर्जी को और लोकप्रियता हासिल हो। ऐसे में बीजेपी ने टीएमसी की कमियों पर फोकस करने का फैसला किया है लेकिन वह ममता बनर्जी का नाम नहीं ले रही है। बीजेपी चाहती है कि इस बार विधानसभा में लड़ाई नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी ना बने बल्कि बदलाव बनाम टीएमसी बन जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल को 5 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि टीएमसी घुसपैठियों का खुलकर समर्थन कर रही है लेकिन जो लोग इस देश के नागरिक नहीं हैं, उनके खिलाफ ऐक्शन जरूर होगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहती है और ये सारी परियोजनाएं उसी दिशा में एक कदम है।  

कमजोर होती विपक्षी दीवार: AAP के बाहर जाने से INDIA ब्लॉक को कितना झटका?

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) ने इंडिया गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है, जिससे विपक्षी गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है। यह घोषणा ठीक उस वक्त हुई जब गठबंधन के घटक दल 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के लिए अपनी संयुक्त रणनीति तय करने के लिए वर्चुअल बैठक करने वाले थे। क्या AAP का यह 'बाय-बाय' विपक्ष की एकता को झटका देगा। आइए समझते हैं। 'गठबंधन एकजुट, लेकिन AAP की राह अलग' कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक में AAP को छोड़कर सभी दल शामिल होंगे। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, 'शनिवार को कई कार्यक्रमों के कारण लोग दिल्ली नहीं आ पाएंगे, इसलिए हम संसद सत्र से पहले ऑनलाइन बैठक करेंगे। इसके बाद दिल्ली में मुलाकात होगी।' उन्होंने दावा किया कि गठबंधन एकजुट है, लेकिन AAP के इस कदम ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। TMC का साथ, बिहार और पहलगाम पर फोकस तृणमूल कांग्रेस (TMC), जिसके कांग्रेस के साथ पहले कुछ तनातनी रही है, ने कहा कि उनके राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में बिहार में मतदाता सूची के विशेष संशोधन, पहलगाम हमले पर चर्चा की मांग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान शांति समझौते के दावों जैसे मुद्दों पर मंथन होगा। 'AAP और कांग्रेस के बीच पहले से तनाव' CPI(M) के महासचिव एमए बेबी ने कहा, 'दिल्ली चुनावों के दौरान कांग्रेस और AAP के बीच तनाव शुरू हो गया था। CPI(M) का मानना है कि इंडिया गठबंधन को मजबूत और विस्तारित करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि दोनों दल अपने मतभेद सुलझा लेंगे।' लेकिन AAP का यह कदम 2024 में नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने के बाद सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। बिहार में AAP का दांव AAP ने ऐलान किया है कि वह बिहार विधानसभा चुनावों में अकेले उतरेगी। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'AAP का बाहर निकलना गठबंधन के लिए दो तरह से नुकसानदायक है। पहला, संसद, खासकर राज्यसभा में गठबंधन कमजोर होगा। दूसरा, AAP आगामी चुनावों में गैर-बीजेपी दलों की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए उम्मीदवार उतार सकती है।' 2026 के चुनावों पर नजर केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं। हालांकि दक्षिण भारत में AAP का प्रभाव कम है, लेकिन एक अन्य कांग्रेस नेता ने कहा कि असम और उन राज्यों में जहां कांग्रेस का बीजेपी से सीधा मुकाबला है, AAP उम्मीदवार उतार सकती है। 'AAP का जाना गठबंधन के लिए फायदेमंद' पंजाब के विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इसे सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, "AAP का बाहर जाना इंडिया गठबंधन को मजबूत करेगा, क्योंकि इससे अस्पष्टता खत्म होगी।" क्या AAP का यह फैसला गठबंधन की एकता को और कमजोर करेगा, या यह गैर-बीजेपी दलों के लिए नई रणनीति बनाने का मौका देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।  

‘अभी बहुत कुछ बाकी है’ — 63 की उम्र में भी चुनावी राजनीति में सक्रिय रहने का संकेत- उमा भारती

 भोपाल  मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने शुक्रवार को वह अभी 63 वर्ष ही हुई हैं, इसलिए आगे चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा से मुझे कोई अलग नहीं कर सकता। मेरे भाजपा से अलग होने की बातें बेबुनियाद हैं। राजनीति की मुख्य धारा में लंबे समय से अनुपस्थित दिख रहीं उमा भारती ने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा 75 वर्ष की उम्र में रिटायर हो जाने संबंधित बयान पर पत्रकारों द्वारा मांगी गई प्रतिक्रिया में कही। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह संघ प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती, लेकिन मेरा मानना है कि शिक्षक, अधिवक्ता, चिकित्सक, कलाकार, कवि, पत्रकार कभी रिटायर नहीं होते। उसी तरह नेता भी कभी रिटायर नहीं हो सकते, उन्हें तब तक जन सेवा करनी होती है जब तक इसकी आवश्यकता होती है। अभी 15-20 साल तक और राजनीति करना है उमा भारती भोपाल में अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अटल जी, आडवाणी जी के आंदोलन में मेरा नाम चला, इसलिए लोग मुझे 75 का समझते हैं पर ऐसा नहीं है, मैं उनसे बहुत छोटी हूं। अभी मुझे 15-20 साल तक और राजनीति करना है, हो सकता है आगे चुनाव भी लड़ूं। उमा ने यह भी कहा कि यह दुष्प्रचार किया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुझसे खफा रहते हैं। अमित शाह और मेरी बात हो गई है, कोई भी अब भ्रम न फैलाए। मैं और मेरे परिवार को सभी सरकारों ने प्रताड़ित किया उमा भारती ने कहा कि मैं किसी भी नेता का नाम नहीं लूंगी, लेकिन मुझे और मेरे परिवार को मध्य प्रदेश की सभी सरकारों में 1990 से 1992 और 2005 से 2013 तक प्रताड़ित किया गया। मेरे भाइयों पर लूट, डकैती के केस बने, जो डकैती हुई ही नहीं, उसका भी मुकदमा किया गया। दिग्विजय सिंह के समय में हत्या तक का केस दर्ज हुआ। आज तक मुझे यह पता नहीं चला कि व्यापम में मेरा नाम क्यों आया। कम से कम सीबीआइ यह जांच तो कर ले। ह्रदय में पीड़ा रहती ही है, मुझे कष्ट देने वालों को मैंने अपने सामने रोते देखा है। गंगा, गोमाता और शराबबंदी पर संघर्ष जारी रहेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशंसा करते हुए उमा भारती ने कहा कि वह अच्छा काम कर रहे हैं। निवेश और रोजगार ला रहे हैं। भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है। राजनीति में शुचिता आ गई है, अब ब्यूरोक्रेसी में लानी जरूरी है। केंद्र सरकार गंगा शुद्धिकरण के लिए काम कर रही है। मप्र सरकार भी गो-संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में सुधार आवश्यक है। प्रदेश में सही तरीके से शराब बंदी लागू की जानी चाहिए। गंगा, गोमाता और शराबबंदी के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।

भाषा की आड़ में बंटवारे की साजिश? उद्धव ठाकरे बोले- नहीं सहेंगे मुंबई से छेड़छाड़

मुंबई  महाराष्ट्र में बढ़ते मराठी भाषा विवाद के बीच पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने केंद्र के ऊपर मुंबई के महत्व को कम करने का आरोप लगाया है। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख नेता ने कहा कि हम तोड़ने की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं लेकिन मुंबई धीरे-धीरे अपना महत्व खो रही है। यहां के उद्योग, धंधों को गुजरात ले जाया जा रहा है। यहां की फिल्म इंडस्ट्री को भी यहां से स्थानांतरित करने की बात चल रही है। ठाकरे ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि मैं यह बात साफ तौर पर कहता हूं कि अगर किसी ने मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की बात की तो हम उसके टुकड़े करेंगे। मीडिया से बात करते हुए ठाकरे ने कहा, "मुंबई के महत्व को कम किया जा रहा है, लेकिन हम ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे। मुंबई देश की वित्तीय राजधानी रही है। इसे देश की वित्तीय राजधानी ही माना जाता है और ऐसा ही रहेगा भी.. इसका बढ़ता महत्व कई लोगों की आंखों में खटकता है।" ठाकरे ने फिल्म इंडस्ट्री को नोएडा में शिफ्ट करने के योगी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर नाम लिए बिना हमला बोला। उन्होंने कहा, "वे मुंबई में स्थित फिल्म उद्योग को कहां स्थानांतरित कर रहे थे? इसे कौन यहां से हटा रहा था? क्या यह सच नहीं है कि इसे हटाने की कोशिश की जा रही है? मुंबई का डायमंड मार्केट किसने छीन लिया? क्या यह सच नहीं है? यहां एक वित्तीय केंद्र स्थापित किया जा रहा था लेकिन आखिर अहमदाबाद को बुलेट ट्रेन कौन दे रहा है? मुंबई के साथ जो भी किया जा रहा है उसे लोग खुले तौर पर देख सकतें हैं, इसमें मुझे कुछ भी अलग से जोड़ने की जरूरत नहीं है।" आपको बता दें उद्धव ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ समय पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया था क्योंकि फडणवीस ने एक दिन पहले ही खुले तौर पर उद्धव को भाजपा के साथ आ जाने का ऑफर दे दिया था। हालांकि बंद दरवाजों के पीछे दोनों नेताओं की क्या बात हुई है इसकी जानकारी बाहर नहीं आई है। इन दोनों नेताओं की इस मीटिंग से पहले मुंबई में ठाकरे बंधुओं का एक ऐतिहासिक सम्मेलन भी हुआ था, जिसमें राज और उद्धव ठाकरे ने दशकों के बाद एक साथ मंच को साझा किया था। उस वक्त दोनों नेताओं ने कहा था कि वह मराठी अस्मिता के लिए एक साथ आए हैं और अब एक साथ ही रहेंगे।  

असम सीएम का आरोप – ममता बनर्जी को बाकी मुसलमानों से नहीं, सिर्फ बांग्ला भाषी मुसलमानों से लगाव

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी को केवल बांग्ला भाषी मुसलमानों की चिंता है। उन्होंने आगाह किया कि अगर ममता मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया और हिंदू-बंगाली उन्हें 'नहीं बख्शेंगे'। शर्मा ने भाजपा पर राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भाषाई पहचान को हथियार बनाने के तृणमल कांग्रेस अध्यक्ष के हालिया आरोप पर कहा, ‘सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी बंगालियों को पसंद करती हैं या केवल मुस्लिम-बंगालियों को। मेरा जवाब है केवल मुस्लिम-बंगालियों को।" उन्होंने कहा, ‘अगर वह मुस्लिम-बंगालियों के लिए असम आती हैं, तो असमिया लोग और हिंदू-बंगाली उन्हें नहीं बख्शेंगे।" शर्मा ने सवाल किया कि अगर बनर्जी बांग्ला भाषी लोगों की सुरक्षा में रुचि रखती हैं, तो उन्होंने ‘अपने राज्य में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम क्यों नहीं लागू किया?’ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों – हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई – को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है। बनर्जी केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर बांग्ला भाषी प्रवासियों को 'अवैध बांग्लादेशी' या ‘रोहिंग्या’ बताकर व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाती रही हैं।  

राहुल गांधी का आरोप- रॉबर्ट वाड्रा को राजनीतिक कारणों से बनाया गया निशाना

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जारी कार्रवाई को लेकर पहली बार बोला है। उनके खिलाफ दाखिल की गई नई चार्जशीट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करार देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से रॉबर्ट वाड्रा को सरकार द्वारा लगातार निशाना बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने एक बयान में कहा, "मेरे बहनोई रॉबर्ट वाड्रा को इस सरकार ने पिछले दस वर्षों से लगातार प्रताड़ित किया है। अब जो नई चार्जशीट दायर की गई है, वह उसी राजनीतिक विद्वेष और बदले की भावना की अगली कड़ी है।" उन्होंने आगे कहा कि वे रॉबर्ट, प्रियंका गांधी और उनके बच्चों के साथ खड़े हैं और उन्हें इस तरह की मानहानिकारक और राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई से कोई भय नहीं है। राहुल गांधी ने कहा, “मैं जानता हूं कि वे सभी किसी भी तरह के उत्पीड़न को सहने के लिए पर्याप्त साहसी हैं और वे इसे गरिमा के साथ झेलते रहेंगे। अंततः सत्य की जीत होगी।” इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ धनशोधन के एक पुराने मामले में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है, जिसे कांग्रेस ने पहले ही राजनीति से प्रेरित बताया था। ईडी की चार्जशीट पर कोर्ट का संज्ञान रॉबर्ट वाड्रा और अन्य के खिलाफ ईडी द्वारा दाखिल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट पर शुक्रवार को राउस एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने मामले को दस्तावेजों की जांच के लिए 24 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है। विशेष न्यायाधीश सुषांत चंगोत्रा ने चार्जशीट को संज्ञान में लेते हुए अदालत के रिकॉर्ड कीपर को दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक एन. के. मट्टा ने अदालत में पेश होकर मामले की जल्द सुनवाई के लिए तारीख मांगी। क्या है मामला? प्रवर्तन निदेशालय ने 17 जुलाई को रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य व्यक्तियों/कंपनियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की थी। चार्जशीट में जिन लोगों/इकाइयों को आरोपी बनाया गया है उनमें रॉबर्ट वाड्रा, स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि., कारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि., सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क सहित अन्य शामिल हैं। ईडी की शिकायत के अनुसार, यह मामला गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। इसमें आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी के माध्यम से वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव, सेक्टर 83 में 3.53 एकड़ भूमि फर्जी घोषणाओं और प्रभाव का दुरुपयोग करके खरीदी थी। जांच के तहत ईडी ने 16 जुलाई 2025 को एक अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी करते हुए वाड्रा और उनकी कंपनियों से जुड़ी लगभग 37.64 करोड़ की कीमत की 43 अचल संपत्तियां जब्त कर लीं। इन संपत्तियों का संबंध स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी सहित अन्य संबद्ध संस्थाओं से बताया गया है। ईडी का आरोप है कि वाड्रा ने व्यक्तिगत प्रभाव का उपयोग कर उक्त जमीन के लिए कॉमर्शियल लाइसेंस हासिल किया और यह सौदा पूरी तरह से धोखाधड़ी पर आधारित था। कांग्रेस ने भी जताई नाराजगी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की इस नई कार्रवाई की कांग्रेस पार्टी ने भी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।  

गठबंधन में नेतृत्व को लेकर खींचतान, ममता बनर्जी ने फिर जताई अपनी अहमियत, शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई

नई दिल्ली INDIA ब्लॉक पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक संसद में एकजुट नजर आ सकता है. कांग्रेस नेतृत्व की कोशिशों से तो ऐसा ही लग रहा है. 19 जुलाई को इंडिया ब्लॉक की ऑनलाइन मीटिंग होने जा रही है. मुद्दा तो स्वाभाविक है,  ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बिहार में चल रहा SIR तक सब कुछ होगा, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मीटिंग में ममता बनर्जी भागीदारी मानी जा रही है.   कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि विपक्षी गठबंधन के करीब करीब सभी प्रमुख नेता मीटिंग में शामिल होने रहे हैं – और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ऐसे ही सकारात्मक संकेत मिले हैं.  2019 के आम चुनाव के समय से ही ममता बनर्जी अपनी अहमियत का एहसास कराती रही हैं. विशेष रूप से कांग्रेस को, जब मामला पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ा हो.  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद तो ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की मौजूदा लीडरशिप पर भी सवाल उठाने लगीं, और कहने लगीं कि वो विपक्ष के नेतृत्व के लिए तैयार हैं, लेकिन कोलकाता में रहकर ही. विपक्ष के कुछ नेताओं का समर्थन भी ममता बनर्जी को मिल गया.  सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व कांग्रेस के पास है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं. राज्यसभा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मोर्चा संभाले हुए हैं.  मॉनसून सत्र में साथ आया इंडिया ब्लॉक दिल्ली चुनाव के दौरान ही ये चर्चा होने लगी थी कि नतीजे आने के बाद इंडिया ब्लॉक का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ – और, मॉनसून सत्र से पहले विपक्षी गठबंधन के नेता एक बार फिर उस मीटिंग में हिस्सा लेने जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जाने वाली है.  पहले ये मीटिंग दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कराने की कोशिश हुई, लेकिन जब कुछ नेताओं ने कम समय में दिल्ली पहुंचने में असमर्थता जताई तो फॉर्मेट बदलना पड़ा. विपक्ष के ज्यादा से ज्यादा नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब ये मीटिंग ऑनलाइन होने जा रही है.  कांग्रेस सूत्रों की मानें, तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के लगभग सभी नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है – और उनमें तृणमूल कांग्रेस भी है.  शिवसेना-यूबीटी प्रवक्ता संजय राउत ने तो बताया है कि उद्धव ठाकरे दिल्ली भी जा सकते हैं, क्योंकि केसी वेणुगोपाल का फोन आया था. लेकिन समाजवादी  पार्टी के नेता अखिलेश यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही जुड़ने की बात कही गई है.  तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ममता बनर्जी या उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होने की संभावना जताई गई है.  ये साफ नहीं है कि अरविंद केजरीवाल के आम आदमी पार्टी शामिल होगी या नहीं. बीते घटनाक्रमों के हिसाब से देखें तो ऐसी कोई संभावना बनती नहीं है. और, शरद पवार की तरफ से भी दूरी बनाई जा सकती है.  असल में ऑपरेशन सिंदूर पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की कांग्रेस की मांग का शरद पवार ने विरोध किया था. विशेष सत्र को लेकर पहले तो समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी हाथ खींच लिये थे, लेकिन बाद में 16 राजनीतिक दलों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गये संयुक्त पत्र में शामिल हो गये थे. लेकिन शरद पवार और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों ने डिमांड वाले पत्र से दूरी बना ली थी. ममता बनर्जी का शामिल होना अहम क्यों खास बात ये है कि कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक सभी को अपनी हैसियत अच्छी तरह मालूम है. ये भी पता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ पाता, लेकिन ईगो भी तो कुछ होता है.  किसी को विचारधारा का गुरूर है, तो किसी को क्षेत्रीय राजनीति में अपने दबदबे का. कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने अखिल भारतीय नेटवर्क की बदौलत क्षेत्रीय दलों पर गुर्राते हैं, तो क्षेत्रीय दलों के ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेता अपने इलाके में धौंस दिखाने लगते हैं. जब केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी से टकराने की बात आती है तो मजबूरी में सब एक हो जाते हैं, नहीं तो पूरे वक्त आपस में झगड़ते रहते हैं.  साझा मुद्दों पर भी अलग अलग पसंद और नापसंदगी है. राहुल गांधी को अडानी का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण लगता है, तो ममता बनर्जी आंख दिखाने लगती हैं. ममता बनर्जी की अहमियत ऐसी है कि 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद जब लोकसभा स्पीकर के चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर दिया तो ममता बनर्जी नाराज हो गईं. लेकिन, फिर राहुल गांधी के फोन करके मनाने पर मान भी गईं – तब से लेकर अभी तक हर मुद्दे पर ममता बनर्जी तेवर दिखा ही देती हैं.  INDIA ब्लॉक का ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो ममता बनर्जी का इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होना, संसद की कार्यवाही के दौरान भी पूरे विपक्ष, खासकर कांग्रेस, के साथ बने रहने की कोई गारंटी नहीं है.

आम आदमी पार्टी की नई राह, INDIA गठबंधन से किया किनारा, AAP ने छोड़ा गठबंधन

 नई दिल्ली विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक की होने जा रही अगली महत्वपूर्ण बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुद को अलग कर लिया है. पार्टी की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगी. पार्टी ने खुद को इंडिया गठबंधन से अलग कर दिया है. आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इंडिया ब्लॉक से बाहर हो चुकी है. क्या बोले संजय सिंह? आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा, "इंडिया ब्लॉक लोकसभा चुनाव के लिए था. लोकसभा चुनाव के बाद हमने हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़े. इसके अलावा पंजाब और गुजरात में उपचुनाव भी हमने अकेले लड़े. आप अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है. हमारे पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम इंडिया ब्लॉक से बाहर हैं." संसद में रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, "संसदीय मुद्दों पर हम टीएमसी, डीएमके जैसी विपक्षी पार्टियों का समर्थन लेते हैं और वे भी हमारा समर्थन लेते हैं." बीजेपी पर कसा तंज आप नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच पर संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "बीजेपी कायरों की पार्टी है. वे केवल एजेंसियों का इस्तेमाल हमारे खिलाफ कर सकते हैं. हम झुकने वाले नहीं हैं." वहीं. रॉबर्ट वाड्रा के मुद्दे पर संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा, "पिछले 10 सालों से बीजेपी 'जीजाजी' चिल्ला रही है. अगर इतने सालों में वे कोई नतीजे पर नहीं पहुंचे, तो यह उनकी नाकामी है."

ईडी की नजर में फिर AAP, आतिशी का दावा—यह सब गुजरात चुनाव से जुड़ा है

नई दिल्ली  दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आप सरकार के दौरान तीन मामलों में भ्रष्टाचार के आरापों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इन मामलों के मद्देनजर ई़डी पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन से जल्द पूछताछ शुरू कर सकती है। इस बीच आम आधमी पार्टी के नेता आतिशी ने इस जांच के पीछे फिर एक बार बीजेपी का हाथ बताया है। आतिशी का कहना है कि बीजेपी ने फिर एक बार जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया है और इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है। आतिशी ने दावा किया है कि बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ ये जांच इसलिए बैठाई है क्योंकि गुजरात के विसावदर उपचुानव में आप ने जबरदस्त जीत हासिल की है और इस जीत के बाद पार्टी की लोकप्रियता गुजरात में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, वहां बीजेपी ने आप को हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राई स्टेट में पुलिस के संरक्षण में शराब बांटी गई, आप के नेताओं को डराया धमकाया गया, उमसे सेटिंग की कोशिश भी की गई लेकिन इसके बावजूद पार्टी भारी वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब हुई। हम डरने वाले नहीं- आतिशी आतिशी ने दावा किया कि गुजरात में आप की बढ़ती लोकप्रियता से बीजेपी इस कदर बौखला गई है कि अब एक बार फिर फर्जी मामलो में केस दर्ज कराना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, हम डरने वाले नहीं है और ना ही हम दबेंगे। जितनी जांच करानी है करा लो लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं के घर से कुछ नहीं मिलेगा। इन तीन मामलों में दर्ज हुए केस जानकारी के मुताबिक ईडी ने अस्पताल निर्माण, सीसीटीवी लगाने जाने और शेल्टर होम के मामले में कथित घोटाले के मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की है। अस्पताल निर्माण में घोटाले के आरोप में सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन जांच के घेरे में हैं। वहीं सीसीटीवी वाले मामले में सत्येंद्र जैन के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।