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भाजपा ने हिमाचल में भी चुन लिया अध्यक्ष, राजीव बिंदल को क्यों मिला फिर से मौका?

नई दिल्ली हिमाचल प्रदेश में डॉ राजीव बिंदल को एक बार फिर बीजेपी का अध्यक्ष चुना गया है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसकी घोषणा की है. ये तीसरी बार है जब बिंदल को ये बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. चुनाव अधिकारी राजीव भारद्वाज के मुताबिक विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायक दल के नेता जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सभी भाजपा सांसदों और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर और अन्य प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से बिंदल के नाम के तीन नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तेलंगाना, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अपने प्रदेश अध्यक्षों के नाम की घोषणा कर दी है. उत्तराखंड में महेंद्र भट्ट को लगातार दूसरी बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश में राजीव बिंदल को पार्टी की कमान सौंपी गई है तो एन. रामचंद्र राव को तेलंगाना बीजेपी प्रमुख घोषित किया गया है. वहीं, आज शाम तक मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी तो पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए 3 जुलाई को चुनाव होगा. राजीव बिंदल 2002 से 2022 के बीच सोलन से तीन और नाहन से दो विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक रहे. उन्होंने 2007 से 2012 तक प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में भी कार्य किया. उन्हें 10 जनवरी 2018 को सर्वसम्मति से 13वीं विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया था और वे जनवरी 2020 तक इस पद पर रहे और कुछ समय के लिए राज्य भाजपा प्रमुख का पदभार संभाला और अप्रैल 2023 में उन्हें फिर से पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. हिमाचल बीजेपी प्रमुख के रूप में उनका नया कार्यकाल मंगलवार (1 जुलाई) से शुरू होगा राजीव बिंदल को क्यों मिला फिर से मौका? राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसके पीछे की बड़ी वजह सामाजिक समीकरण साधना बताया है। राजीव बिंदल वैश्य समुदाय से आते हैं। उन्हें भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने के लिए फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। दरअसल नेता विपक्ष जयराम ठाकुर राजपूत बिरादरी के हैं। इसके अलावा ब्राह्मण समाज के जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री हैं। ऐसे में संतुलन बनाने के लिए बिंदल को मौका दिया गया है। जानिए बिंदल का राजनीतिक सफर राजीव बिंदल 2002 से 2022 तक पांच बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने सोलन से तीन और नाहन से दो विधानसभा चुनाव जीते हैं। उन्होंने 2007 से 2012 तक प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भी काम किया। उन्हें 10 जनवरी, 2018 को सर्वसम्मति से 13वीं विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे जनवरी 2020 तक इस पद पर रहे। अप्रैल 2023 में फिर से नियुक्त होने से पहले उन्होंने राज्य भाजपा प्रमुख के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल पूरा किया। राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और पदेन सदस्य पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर और पार्टी महासचिव बिहारी लाल शर्मा, त्रिलोक कपूर, पवन काजल, रश्मि धर सूद, पायल वैद्य, राजीव सैजल और संजीव कटवाल को राष्ट्रीय परिषद का सदस्य चुना गया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, लोकसभा सदस्य सुरेश कश्यप, कंगना रनौत और राजीव भारद्वाज और राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी, सिकंदर कुमार और हर्ष महाजन को राष्ट्रीय परिषद का पदेन सदस्य चुना गया।

डीके शिवकुमार के करीबी विधायक इकबाल हुसैन ने बड़ा दावा-हम सभी की मांग है कि अब बदलाव हो

बेंगलुरु कर्नाटक में सीएम बदलने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है और इस बार तो मामला दिल्ली दरबार तक जा पहुंचा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को ही इसका संकेत दिया था। इस बीच दिल्ली से आए प्रतिनिधि के तौर पर रणदीप सुरजेवाला ने कर्नाटक के कई विधायकों से मुलाकात की है। फिलहाल सोनिया और राहुल गांधी चाहते हैं कि विधायक शांत हो जाएं और खींचतान सार्वजनिक तौर पर न दिखे। वहीं डीके शिवकुमार के समर्थक अब आर-पार के मूड में दिख रहे हैं। कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। इस इलेक्शन के बाद चर्चा थी कि डीके शिवकुमार सीएम होंगे, लेकिन सिद्धारमैया को मौका मिला। किसी ने खुलकर कुछ नहीं कहा था, लेकिन तब से ही डीके शिवकुमार के समर्थक दोहरा रहे हैं कि सिद्धारमैया को ढाई साल के लिए ही सीएम बनाया गया है। इसी के चलते अब वे बदलाव की मांग कर रहे हैं। इस बीच डीके शिवकुमार के करीबी विधायक इकबाल हुसैन ने बड़ा दावा किया है। हुसैन का कहना है कि करीब 100 कांग्रेस विधायक डीके शिवकुमार के साथ हैं और ये सभी लोग अब मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें देखना चाहते हैं। हम सभी की मांग है कि अब बदलाव हो जाए। यही नहीं उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिवकुमार को सत्ता नहीं सौंपी गई तो फिर कांग्रेस 2028 में वापसी नहीं कर पाएगी। शिवकुमार के करीबी ने कहा कि मैं इस बारे में दिल्ली से आए रणदीप सुरजेवाला से भी बात करूंगा। उन्होंने कहा कि यदि अभी बदलाव नहीं हुआ तो फिर देर हो जाएगी। पार्टी के हित में है कि शिवकुमार को अब सत्ता दी जाए। दरअसल मल्लिकार्जुन खरगे ने बढ़ते विवाद को लेकर सोमवार को कहा था कि इस बारे में कोई फैसला पार्टी हाईकमान ही ले सकता है। इस पर हुसैन ने कहा कि हमने तो हमेशय़ा ही हाईकमान का सम्मान किया है। पार्टी में अनुशासन भी है। लेकिन हम हर बात हाईकमान को बताएंगे। कर्नाटक के बारे में सारे तथ्य उनके आगे रखेंगे। अंदर सुलग रही आग, पर सब नॉर्मल दिखाने में जुटे सिद्धारमैया कर्नाटक में डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक ऐक्टिव हैं, लेकिन सीएम सिद्धारमैया सब नॉर्मल दिखाने की कोशिश में हैं। उन्होंने मीडिया के सवालों पर कहा कि सिद्धारमैया के साथ कोई मतभेद नहीं हैं। इसके सुरजेवाला ने भी कहा कि मैं संगठन मजबूत करने के लिए मीटिंग के लिए आया हूं। इसको किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं से न जोड़ा जाए।  

आज फाइनल होगा मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष का नाम!बैतूल का बढ़ सकता है कद

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी ने नए प्रदेश अध्यक्ष (BJP State President in Madhya Pradesh) के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व की स्वीकृति के बाद प्रदेश चुनाव अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर ने सोमवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी कर राज्य निर्वाचन मंडल की सूची का प्रकाशन भी कर दिया है। मध्यप्रदेश भाजपा को मंगलवार को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। करीब 10 महीने से चल रही चर्चा और अंदरूनी मंथन के बाद यह फैसला अंतिम चरण में पहुंच गया है। भाजपा के केंद्रीय चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मंगलवार शाम 4 बजे भोपाल पहुंचेंगे और 4:30 बजे नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। दो जुलाई को नए अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी। बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम अब सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभरा है। उन्हें संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी के प्रमुख चेहरों का समर्थन मिल रहा है। हेमंत खंडेलवाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी मजबूत मानी जा रही है। उनके पिता विजय खंडेलवाल भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं, जिससे संगठन में उनका जुड़ाव और भरोसा काफी पुराना है। खंडेलवाल का संघ से जुड़ाव और उनका साफ-सुथरा राजनीतिक रिकॉर्ड उन्हें अन्य दावेदारों से आगे बढ़ा रहा है। हेमंत खंडेलवाल का नाम लगभग तय माना जा रहा हैं। खंडेलवाल वर्तमान में प्रदेश भाजपा के कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। हेमंत खंडेलवाल ने 2007 में पहली बार बैतूल लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल की थी। यह सीट उनके पिता विजय खंडेलवाल के निधन के बाद खाली हुई थी। 2009 में बैतूल लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई, लेकिन खंडेलवाल की भूमिका इसके बाद भी प्रभावशाली बनी रही। उन्होंने 2013 में विधायक के रूप में जीत दर्ज की, हालांकि 2018 में चुनाव हारे। 2023 में वह फिर से विधायक चुने गए। हेमंत खंडेलवाल बन सकते हैं भाजपा अध्यक्ष     पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैतूल के विधायक हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। वहीं, मंगलवार एवं बुधवार को प्रदेश कार्यालय में भाजपा की वृहद कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है। इसमें वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। मंगलवार को शाम 4.30 से 6.30 बजे तक नामांकन पत्र जमा कराए जाएंगे। 6.30 से 7.30 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 7.30 से आठ बजे तक नामांकन पत्र वापस लिए जा सकेंगे और रात आठ बजे नामांकन पत्रों की अंतिम सूची की घोषणा की जाएगी। हालांकि उससे पहले धर्मेंद्र प्रधान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करके किसी नाम पर सर्वसम्मति बनाएंगे। इसके बाद नया प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर ही बुधवार को प्रात: 11 बजे से दो बजे के बीच मतदान कराया जाएगा और मतों की गिनती के बाद परिणाम की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि इस चुनाव प्रक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय परिषद के 44 सदस्यों को भी चुना जाएगा। मतदान में प्रदेश परिषद के सदस्यों को मिलाकर कुल 379 मतदाता हिस्सा ले सकेंगे। प्रदेश परिषद के सदस्यों में चार सांसद एवं 17 विधायक भी शामिल हैं। सांसदों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीरेंद्र खटीक हैं। वहीं विधायकों में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, विजय शाह, तुलसी सिलावट, एदल सिंह कंषाना, अजय विश्नोई, संपतिया उइके, ओमप्रकाश सखलेचा, संजय पाठक, भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, नारायण सिंह कुशवाह और मालिनी गौड़ शामिल हैं। अधिकतर सर्वसम्मति से ही चुना गया है प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश में अधिकतर बार सर्वसम्मति से ही भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। अपवाद के रूप में केवल दो बार संगठन चुनाव में मतदान की स्थिति बनी है। पहली बार 1990 के दशक में पार्टी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष के लिए तय प्रत्याशी लखीराम अग्रवाल के विरुद्ध पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी संगठन चुनाव में खड़े हुए थे। दूसरी बार वर्ष 2000 में शिवराज सिंह चौहान और विक्रम वर्मा के बीच प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव हुआ था। इसमें विक्रम वर्मा ने शिवराज सिंह चौहान को हरा दिया था। हालांकि माना जा रहा है प्रदेश अध्यक्ष के लिए मतदान की स्थिति नहीं बनेगी।  हेमंत खंडेलवाल का प्रोफाइल हेमंत खंडेलवाल संघ पृष्ठभूमि से आते हैं। उनकी संघ के अलावा पार्टी संगठन में भी मजबूत पकड़ है। वह बैतूल के पूर्व सांसद एवं दो बार के विधायक हैं। उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल बैतूल लोकसभा से तीन बार सांसद रह चुके हैं, तब से ही वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा से जुड़े हुए हैं। पिता के निधन के बाद हेमंत ने बैतूल लोकसभा से उपचुनाव लड़ा और निर्वाचित होकर सांसद बने। इसके बाद वह बैतूल विधानसभा से दूसरी बार के विधायक हैं। माना जा रहा है मध्य प्रदेश में वर्तमान में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है, ऐसे में सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। संघ और संगठन में मजबूत पकड़ खंडेलवाल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी का करीबी माना जाता है। दिल्ली में हुए अंतिम दौर की चर्चा में सुरेश सोनी और डॉ. यादव दोनों ने ही हेमंत खंडेलवाल के नाम की जोरदार पैरवी की थी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके नाम पर सहमति जताई है। संघ और संगठन दोनों को भरोसा है कि हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बना रहेगा। अन्य नाम भी चर्चा में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, लता वानखेड़े, नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, बृजेंद्र प्रताप सिंह, अर्चना चिटनिस और गजेंद्र पटेल के नामों पर भी चर्चा में है। सूत्रों का कहना है कि अब औपचारिक एलान ही बाकी हैं।    

मध्य प्रदेश बीजेपी को 2 जुलाई को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा, दौड़ में हेमंत खंडेलवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में

भोपाल  मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में आज एक जुलाई को केंद्रीय चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भोपाल आएंगे। वे शाम 4 बजे भोपाल आएंगे। 2 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर बैठक होगी। बैठक में अध्यक्ष पद के लिए नाम रखा जाएगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो आम सहमति से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। चुनाव प्रक्रिया के तहत चुनावी कार्यक्रम जारी । कार्यक्रम के साथ वोटर लिस्ट भी जारी हो सकती है। चुनाव के पहले कल शाम को पार्टी की अहम बैठक होगी। बैठक में वरिष्ठ नेता अध्यक्ष चयन प्रक्रिया को लेकर आपस में चर्चा करेंगे। पार्टी ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। वैसे तो अब तक नए अध्यक्ष की दौड़ में हेमंत खंडेलवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, लेकिन भाजपा आदिवासी और महिला वर्ग के बीच भी प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा टटोल रही है। वर्तमान में विष्णुदत्त शर्मा सामान्य वर्ग से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और साढ़े पांच वर्ष का लंबा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। डॉ. मोहन यादव ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग व ब्राह्मण वर्ग से दो उप मुख्यमंत्री हैं। यही वजह है कि भाजपा अब प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदिवासी या महिला के हाथों में सौंप सकती है। दावेदारों में कड़ा मुकाबला एमपी में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हेमंत खंडेलवाल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और आरएसएस दोनों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वहीं, दुर्गादास उईके जो बैतूल से सांसद और गोंड समाज से ताल्लुक रखते हैं को आदिवासी वर्ग का एक मजबूत चेहरा माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में 22% आदिवासी आबादी, जिसमें 13% गोंड समाज शामिल है, को देखते हुए पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है। वर्गवार दावेदारी पार्टी जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष का चयन कर रही है। विभिन्न वर्गों से प्रमुख दावेदार इस प्रकार हैं:     ब्राह्मण वर्ग: डॉ. नरोत्तम मिश्रा (पूर्व गृह मंत्री), राजेन्द्र शुक्ल (उपमुख्यमंत्री), रामेश्वर शर्मा (विधायक )     वैश्य वर्ग: हेमंत खंडेलवाल (विधायक, बैतूल), सुधीर गुप्ता (सांसद, मंदसौर)     क्षत्रिय वर्ग: अरविंद भदौरिया (पूर्व मंत्री), बृजेन्द्र प्रताप सिंह (विधायक व पूर्व मंत्री)     अनुसूचित जाति: प्रदीप लारिया (विधायक, नरयावली), लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा), हरिशंकर खटीक (विधायक व प्रदेश महामंत्री, बीजेपी)     अनुसूचित जनजाति: गजेन्द्र सिंह पटेल (सांसद, खरगोन), दुर्गादास उईके (केंद्रीय राज्य मंत्री), फग्गन सिंह कुलस्ते (सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री), सुमेर सिंह सोलंकी (राज्यसभा सांसद) आदिवासी और महिला नेतृत्व पर विचार सूत्रों के अनुसार, इस दौड़ में आदिवासी वर्ग को प्राथमिकता देने की संभावना है क्योंकि मध्य प्रदेश में 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा, 2028 के विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण और नए परिसीमन को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी महिला नेता को भी कमान सौंपने पर विचार कर रही है। धर्मेंद्र प्रधान की निगरानी में होगी प्रक्रिया बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठनात्मक चुनावों के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मध्य प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। वे 1 जुलाई को भोपाल पहुंचेंगे और पूरी नामांकन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इसके बाद 2 जुलाई को होने वाली कार्यसमिति की बैठक में नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा होने की संभावना है। जुलाई के पहले सप्ताह में ही पूरी होगी प्रक्रिया हालांकि यह केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा, लेकिन एक जुलाई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का मध्य प्रदेश में दौरा इस बात का संकेत है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। दो जुलाई को भी बैठक रखी गई है। दो दिन में नामांकन से लेकर चुनाव की सारी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। खंडेलवाल, उइके और पटेल के नाम पर भी मंथन तेज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में आदिवासी वर्ग के नेता बैतूल सीट से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और खरगोन सीट से सांसद गजेंद्र पटेल के नाम पर भी मंथन तेज हुआ है। इधर उइके की दावेदारी इसलिए भी प्रबल दिखाई दे रही है क्योंकि गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल हैं और वह केंद्रीय मंत्री भी है। ऐसे में यह प्रयोग पार्टी मध्य प्रदेश में उइके को लेकर कर सकती है। महिला वर्ग से भी कुछ नाम चर्चा में मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन काफी मजबूत है। यहां पार्टी जो भी प्रयोग करती है वे सफल रहे हैं। इसलिए पार्टी इस बार महिला प्रदेश अध्यक्ष बनाने का प्रयोग भी कर सकती है। महिला नेत्रियों में पूर्व मंत्री व बुरहानपुर से विधायक अर्चना चिटनीस, आदिवासी नेत्री पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम भी चर्चा में हैं। रंजना बघेल कई बार की विधायक रही हैं और संगठन में भी उपाध्यक्ष रही हैं। 1980 से अध्यक्षों का कार्यकाल अध्यक्ष – जिला – क्षेत्र – माह सुंदरलाल पटवा – नीमच- मालवा- 36 महीने कैलाश जोशी – देवास – मालवा – 16 महीने शिवप्रसाद – चैनपुरिया -जबलपुर – महाकौशल – 9 महीने सुंदरलाल पटवा- मालवा – 50 महीने लख्खीराम अग्रवाल – रायगढ़ – (छग) लक्ष्मीनारायण पांडे – रतलाम – मालवा – 41 महीने नंदकुमार साय – रायगढ़ (छ्ग) विक्रम वर्मा- धार- मालवा- 26 महीने कैलाश जोशी – देवास – मालवा – 32 महीने शिवराज सिंह चौहान – विदिशा – मध्य – 9 महीने सत्यनारायण जटिया – उज्जैन – मालवा – 9 महीने नरेंद्र सिंह तोमर – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 42 महीने प्रभात झा – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 20 महीने नरेंद्र सिंह तोमर – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 20 महीने नंद कुमार सिंह चौहान – खंडवा – मालवा – 17 महीने नंद कुमार सिंह चौहान – खंडवा – मालवा – 28 महीने राकेश सिंह – जबलपुर – महाकौशल – 21 महीने वीडी शर्मा – मुरैना – ग्वालियर-चंबल – 63 महीने