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लखनऊ में ‘रन फॉर यूनिटी’ के शुभारंभ पर बोले मुख्यमंत्री, सरदार पटेल के आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

राष्ट्र की अखंडता के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार्य नहींः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में ‘रन फॉर यूनिटी’ के शुभारंभ पर बोले मुख्यमंत्री, सरदार पटेल के आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान देने की परंपरा स्थापित हुईः मुख्यमंत्री सीएम बोले- सरदार पटेल ने 563 रियासतों को जोड़कर गढ़ा अखंड भारत का स्वरूप प्रधानमंत्री मोदी ने धारा 370 हटाकर पटेल के संकल्प को साकार कियाः सीएम योगी जातिवाद, परिवारवाद और छुआछूत के विरुद्ध एकता की मशाल जलाएंः मुख्यमंत्री सीएम योगी का आह्वान, जातिवाद, परिवारवाद या छुआछूत के आधार पर समाज को बांटने वालों का करें विरोध सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर हर उस शक्ति का विरोध करना चाहिए जो राष्ट्र की एकता को कमजोर करने का प्रयास करेः सीएम मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण भारत रत्न सरदार पटेल को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर प्रदेशवासियों को एकता दिवस की दी बधाई लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में ‘भारत रत्न’ सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और कहा कि भारत की अखंडता और एकता के लिए जिन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, उन लौह पुरुष सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन, समर्पण और त्याग आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। आइए, इस राष्ट्रीय एकता दिवस पर हम संकल्प लें कि जाति, भाषा, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर भारत की एकता और अखंडता को सुदृढ़ बनाएंगे। सरदार पटेल के आदर्शों को आचरण में लाना ही सच्ची श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से ही देश में उन महान सपूतों को सम्मान देने की परंपरा शुरू हुई है, जिन्होंने भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उन्होंने बताया कि आज पूरे देश में 600 से अधिक स्थानों पर ‘रन फॉर यूनिटी’ के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना को प्रबल करने का यह अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी भारतीय परंपरा में कहा गया है कि“शिवो भूत्वा शिवं यजेत”, अर्थात जिसे हम पूजते हैं, उसके अनुरूप हमें स्वयं को ढालना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल भाषणों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी एकता और अखंडता के मूल्यों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केवड़िया (गुजरात) में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के रूप में सरदार पटेल की स्मृति को जीवंत बनाया गया है, जो आज राष्ट्रीय प्रेरणास्थली बन चुकी है। 563 रियासतों को जोड़कर अखंड भारत की नींव रखी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश साजिशों को नाकाम करते हुए 563 रियासतों को भारत गणराज्य में शामिल कर अखंड भारत का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि जब हैदराबाद और जूनागढ़ की रियासतों ने भारत में विलय से इनकार किया, तब लौह पुरुष ने पहले संवाद का रास्ता अपनाया, लेकिन जब राष्ट्र की अखंडता पर संकट आया, तब उन्होंने कठोर निर्णय लेकर भारत की एकता को सुरक्षित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भारत की अखंडता के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर अखंड भारत के उस संकल्प को साकार किया, जो सरदार पटेल ने देखा था। यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उत्तर प्रदेश से केवड़िया जाएगा सांस्कृतिक दल मुख्यमंत्री ने बताया कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश से एक सांस्कृतिक दल और हस्तशिल्पियों का प्रतिनिधिमंडल केवड़िया जाएगा। राज्यपाल महोदया के नेतृत्व में 12 नवंबर को केवड़िया में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘स्वदेशी अभियान’ को मज़बूती देने के साथ उत्तर प्रदेश के कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने का यह अवसर भी है। 75 जिलों में गूंजी राष्ट्रीय एकता की भावना मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों में आज ‘रन फॉर यूनिटी’ के कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें लाखों युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। जातिवाद, परिवारवाद और छुआछूत से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करें मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हमें उन सभी कुत्सित प्रयासों का विरोध करना चाहिए जो जातिवाद, परिवारवाद या छुआछूत के आधार पर समाज को बांटने का काम करते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का यही संदेश है कि हम सब मिलकर भारत की अखंडता को सशक्त बनाएं और सामाजिक एकता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें हर उस शक्ति का विरोध करना चाहिए जो राष्ट्र की एकता को कमजोर करने का प्रयास करती है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद बृजलाल एवं विधायक गण उपस्थित रहे। एक्स पर भी मुख्यमंत्री ने दी लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर भी प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं दीं और भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल को विनम्र श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, "महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लौह पुरुष, 'भारत रत्न' सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं प्रदेश वासियों को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' की हार्दिक बधाई। भारत की आंतरिक सुरक्षा और अखण्डता हेतु 'सरदार साहब' द्वारा किए गए अथक प्रयास हमें 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना की सिद्धि हेतु सदैव प्रेरित करते रहेंगे।"

विशेष आर्टिकल: बदलता उत्तर प्रदेश: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ से सशक्त हो रही हैं नई पीढ़ी की बेटियाँ

विशेष आर्टिकल: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: उत्तर प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा और शिक्षा की अनुपम क्रांति लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति फेज-5.0 के अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP) अभियान ने बेटियों के जीवन को नई दिशा दी है। यह योजना न केवल कन्या भ्रूण हत्या और लिंग भेद को रोक रही है, बल्कि बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन का मजबूत आधार प्रदान कर रही है। मिशन शक्ति के सुरक्षा और सम्मान स्तंभ का यह अभियान अब तक 75 जिलों में 100% कवरेज हासिल कर चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2025 तक उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात 878 से बढ़कर 928 प्रति 1,000 हो गया है – जो राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है। योजना का उद्देश्य और कार्यप्रणाली: एक संरचित दृष्टिकोण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का मुख्य उद्देश्य है: • कन्या भ्रूण हत्या रोकना • लिंगानुपात में सुधार • बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा • सामाजिक जागरूकता और कानूनी कार्रवाई उत्तर प्रदेश में BBBP के प्रमुख कदम: कार्यक्रम प्रभाव PC-PNDT एक्ट का सख्ती से पालन 2025 में 1,200+ अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कन्या पूजन अभियान नवरात्रि में 5 लाख+ बालिकाओं का सम्मान स्कूल एनरोलमेंट ड्राइव 98% बेटियों का प्राथमिक स्कूल में दाखिला महिला सशक्तिकरण मेला 75 जिलों में 1,500+ आयोजन प्रेरणादायक कहानी: बहराइच की राधा – बेटी बचाओ की जीवंत मिसाल बहराइच जिले के एक छोटे से गांव की राधा यादव (16 वर्ष) की कहानी BBBP की सफलता का प्रतीक है। राधा के जन्म के समय (2009) उनके परिवार पर तीसरी बेटी होने के कारण सामाजिक दबाव था। लेकिन बेटी बचाओ अभियान के तहत गांव में आयोजित जागरूकता सभा ने उनके पिता को समझाया कि "बेटी बोझ नहीं, वरदान है"। राधा को मिले लाभ: 1. जन्म के समय सम्मान: गांव पंचायत ने कन्या जन्मोत्सव मनाया, परिवार को 5,000 रुपये का प्रोत्साहन दिया। 2. शिक्षा में सहायता: BBBP के तहत मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल प्रदान की गई। 3. सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग: मिशन शक्ति 5.0 में शामिल होकर कराटे सीखा, अब ब्लैक बेल्ट धारक। 4. स्कॉलरशिप: कक्षा 10 में 92% अंक लाने पर 25,000 रुपये की छात्रवृत्ति। 5. करियर गाइडेंस: अब NEET की तैयारी कर रही हैं, मेडिकल कॉलेज में दाखिला पक्का। राधा कहती हैं: “पहले गांव में लोग कहते थे – ‘बेटी पढ़ाओगी तो क्या डॉक्टर बनेगी?’ आज मैं उसी गांव की पहली लड़की हूँ जो मेडिकल की तैयारी कर रही हूँ। बेटी बचाओ ने मुझे बचाया, बेटी पढ़ाओ ने मुझे उड़ान दी।” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ऐतिहासिक योगदान: तारीफ के काबिल नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने BBBP को उत्तर प्रदेश में जन आंदोलन बना दिया। उनके नेतृत्व में: • हर पंचायत में ‘बेटी बचाओ समिति’ गठित। • महिला बीट ऑफिसर ने घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई। • PC-PNDT एक्ट के तहत 1,200+ क्लीनिक बंद, 800+ डॉक्टरों पर मुकदमा। • नवरात्रि 2025 में 5 लाख कन्या पूजन, योगी जी ने स्वयं 100 बालिकाओं को सम्मानित किया। सीएम योगी का ताजा बयान (गोरखपुर, 27 अक्टूबर 2025): “2017 से पहले बेटियां घर में कैद थीं। आज मिशन शक्ति और BBBP ने उन्हें आसमान दिया है। हमारा संकल्प है – हर बेटी पढ़ेगी, हर बेटी आगे बढ़ेगी।” योगी जी का यह संवेदनशील और सशक्त नेतृत्व उत्तर प्रदेश को ‘बेटी-मैत्री राज्य’ बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: राष्ट्रीय मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में शुरू बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने मिशन शक्ति के साथ जोड़कर क्रांतिकारी परिणाम दिए हैं। • डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से हर जिले का लाइव डेटा। • पिंक टॉयलेट, पिंक बसें, पिंक पेट्रोलिंग – बेटियों के लिए समर्पित। • 26 लाख+ बेटियों को कन्या सुमंगला योजना से जोड़ा। यह कदम न केवल सामाजिक सुधार है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है – क्योंकि सशक्त बेटी ही सशक्त भारत बनाएगी। निष्कर्ष: योगी सरकार की दूरदर्शिता से बेटियाँ बन रही हैं राष्ट्र की शान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति फेज-5.0 ने उत्तर प्रदेश को बेटियों का स्वर्ग बनाने की दिशा में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। राधा जैसी लाखों बेटियाँ आज डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी बनने की राह पर हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह पहल ऐतिहासिक है क्योंकि: • 2017 से पहले अराजकता थी – आज हर गांव में बेटी का जन्म उत्सव। • लिंगानुपात में 50 अंकों का सुधार – भाजपा शासन की देन। • PC-PNDT एक्ट का सख्त पालन – भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी शासन। • शिक्षा दर में बेटियों का 98% एनरोलमेंट – विश्व स्तर पर मिसाल। • महिला सशक्तिकरण मेला, कन्या पूजन, सेल्फ-डिफेंस – सांस्कृतिक और आधुनिक का सुंदर संगम। योगी सरकार ने साबित कर दिया है – जब इच्छाशक्ति हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कोई सरकारी योजना नहीं, उत्तर प्रदेश की बेटियों का भविष्य है। आइए, हम सब मिलकर इस क्रांति का हिस्सा बनें! 📞 हेल्पलाइन: 181 | 1090 🌐 वेबसाइट: upmissionshakti.in 🎯 #BetiBachaoBetiPadhao #MissionShakti5 #YogiHaiToBetiSafeHai

विशेष आर्टिकल: ODOP ने बदली तस्वीर: यूपी के कारीगरों ने स्थानीय हुनर को बनाया वैश्विक पहचान

विशेष आर्टिकल: एक जिला एक उत्पाद (ODOP): सफलता की अनगिनत कहानियां – उत्तर प्रदेश के कारीगरों की वैश्विक उड़ान लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने न केवल राज्य के पारंपरिक उद्योगों को नई जान फूंकी है, बल्कि हजारों कारीगरों, किसानों और छोटे उद्यमियों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया है। 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई यह योजना अब 75 जिलों में 74 उत्पादों को कवर कर रही है, और इसके तहत अब तक 40 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है। निर्यात में 76% की वृद्धि हो चुकी है, जो ₹2 लाख करोड़ को पार कर गया है। लेकिन ODOP की असली ताकत तो उसके लाभार्थियों की प्रेरणादायक कहानियों में छिपी है। आइए, विस्तार से जानें कैसे यह योजना साधारण लोगों को उद्यमी बना रही है, और कैसे योगी सरकार का यह कदम लाखों परिवारों का सहारा बन गया है। ODOP की सफलता: आंकड़ों से परे, जिंदगियों का बदलाव ODOP ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। योजना के तहत 80,000 से अधिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया, ₹50,000 से ₹5 लाख तक के बिना गारंटी ऋण वितरित किए गए, और GI टैग प्राप्त 15 उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान मिली। लेकिन ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं – ये उन कारीगरों की कहानियां हैं जो कभी बाजार की मार झेलते थे, आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चमक रहे हैं। योजना ने महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को विशेष रूप से सशक्त किया, जिससे पलायन रुक गया और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। अब ODOP उत्पाद अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर बिक रहे हैं, और G20 जैसे वैश्विक आयोजनों में उपहार के रूप में भेजे जा रहे हैं। सफलता की प्रेरक कहानियां: कारीगरों की यात्रा से प्रेरणा ODOP की सफलता लाखों कहानियों में बिखरी हुई है। यहां कुछ चुनिंदा उदाहरण हैं, जो दर्शाते हैं कि कैसे योजना ने लोगों की किस्मत पलट दी: 1. झांसी की सॉफ्ट टॉयज क्रांति: रानी लक्ष्मीबाई की धरती पर खिलौनों का साम्राज्य झांसी जिले का ODOP उत्पाद सॉफ्ट टॉयज है, जो भारतीय खिलौना उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय कारीगर शिवानी शर्मा (28 वर्ष) की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। एक साधारण सिलाई मशीन पर घर से काम करने वाली शिवानी को ODOP के तहत ₹2 लाख का ऋण और 45-दिवसीय डिजाइन ट्रेनिंग मिली। पहले उनकी मासिक आय ₹5,000 थी, लेकिन आज वे 'झांसी क्राफ्ट टॉयज' ब्रांड के तहत 20 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। मासिक टर्नओवर ₹3 लाख हो गया है, और उनके उत्पाद दिल्ली के क्राफ्ट म्यूजियम में बिक रहे हैं। "ODOP ने मुझे सिर्फ पैसा नहीं, आत्मविश्वास दिया। अब मेरी बेटी भी इसी व्यवसाय में हाथ बंटाएगी," शिवानी बताती हैं। योजना ने झांसी में 500+ कारीगरों को जोड़ा, जिससे जिले का खिलौना निर्यात 40% बढ़ा। 2. देवरिया की बांस उत्पाद: पूजा शाही की 'ग्रीन क्राफ्ट' कंपनी – पर्यावरण और रोजगार का संगम देवरिया का ODOP उत्पाद बांस से बने हस्तशिल्प (जैसे थ्रेड्स, कैरी बैग्स और ऑर्गेनिक कंपोस्ट) है। पूजा शाही (32 वर्ष), एक ग्रामीण महिला उद्यमी, ने ODOP के तहत ₹3 लाख सब्सिडी प्राप्त की और देवरिया डिजाइनर प्राइवेट लिमिटेड शुरू की। पहले वे खेतों में मजदूरी करती थीं, आय ₹4,000 मासिक। अब उनकी कंपनी 30 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर मासिक ₹8 लाख का कारोबार कर रही है। उत्पाद फ्लिपकार्ट पर बिकते हैं, और पर्यावरण-अनुकूल होने से अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर आ रहे हैं। पूजा कहती हैं, "ODOP ने बांस को कचरा से खजाने में बदल दिया। अब मेरा गांव आत्मनिर्भर है।" यह कहानी योजना की सस्टेनेबल डेवलपमेंट को दर्शाती है, जहां 200+ परिवार लाभान्वित हुए। 3. हार्दोई का हथकरघा जादू: इकबाल हुसैन – बुनकर से निर्यातक तक हार्दोई का ODOP उत्पाद हथकरघा वस्त्र (कुर्ता-पजामा) है। इकबाल हुसैन (45 वर्ष) एक पारंपरिक बुनकर थे, जिनकी दुकान बाजार की कमी से बंद होने को थी। ODOP ने उन्हें ₹10 लाख ऋण और मार्केटिंग सपोर्ट दिया। आज वे 50 बुनकरों की टीम के साथ मासिक ₹15 लाख का टर्नओवर कर रहे हैं। उनके उत्पाद ODOP मार्ट पोर्टल पर उपलब्ध हैं, और यूरोप में निर्यात हो रहा है। "पहले चीनी कपड़ों से हम हार जाते थे, अब ODOP ने हमें ब्रांड बना दिया," इकबाल कहते हैं। हार्दोई में योजना से 1,000+ नौकरियां पैदा हुईं। 4. मुरादाबाद का पीतल शिल्प: कारीगरों का वैश्विक बाजार मुरादाबाद का ODOP उत्पाद पीतल के हस्तशिल्प है। मोहम्मद शाहिद (38 वर्ष) ने ODOP के कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) से मशीनरी सब्सिडी ली। पहले उनकी आय ₹6,000 मासिक थी, अब 25 कारीगरों को रोजगार देकर ₹20 लाख वार्षिक कमाते हैं। उनके उत्पाद G20 समिट में उपहार बने। योजना ने मुरादाबाद के पीतल निर्यात को दोगुना कर दिया। 5. सिद्धार्थनगर का कलानामक चावल: किसानों की सुनहरी फसल सिद्धार्थनगर का ODOP उत्पाद कलानामक चावल (GI टैग प्राप्त) है। रामप्रसाद यादव (50 वर्ष), एक किसान, ने ODOP ट्रेनिंग से जैविक खेती सीखी और ₹1.5 लाख ऋण से प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। पहले फसल बर्बाद हो जाती थी, अब मासिक ₹2 लाख कमाते हैं। 100+ किसान जुड़े, और चावल राष्ट्रीय बाजार में बिक रहा है। 6. गोरखपुर की टेराकोटा: स्थानीय कला का पुनरुत्थान गोरखपुर का ODOP उत्पाद टेराकोटा है। सीता देवी (42 वर्ष) ने योजना से ₹75,000 टूलकिट प्राप्त की। अब वे 15 महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं, मासिक आय ₹1 लाख। उनके उत्पाद पर्यटन स्थलों पर बिकते हैं। 7. मुजफ्फरनगर का गुड़ पाउडर: माधुरमीठास ब्रांड की मिठास मुजफ्फरनगर का ODOP उत्पाद रासायनिक-मुक्त गुड़ पाउडर है। माधुरमीठास ब्रांड की संस्थापक अंजली वर्मा ने ODOP से मार्केटिंग सहायता ली। अब राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री हो रही है, और 50 किसानों को लाभ। ये कहानियां साबित करती हैं कि ODOP ने न केवल आय बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को सशक्त किया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक उद्गार: ODOP को आत्मनिर्भरता का आधार मुख्यमंत्री योगी ने ODOP को बार-बार 'आत्मनिर्भर भारत' का आधार बताया है। 24 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर अवध शिल्पग्राम में बोलते हुए उन्होंने कहा, "पहले निर्यात ₹86,000 करोड़ था, ODOP ने इसे ₹2 लाख करोड़ कर दिया। चीनी नकली उत्पादों की जगह अब ODOP … Read more

न लाइन, न कार्ड: जेवर एयरपोर्ट पर चेहरा ही बनेगा आपका बोर्डिंग पास

नोएडा हवाई सफर करने वालों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी. सोचिए, आपको एयरपोर्ट पर न बार-बार बोर्डिंग पास दिखाना पड़े, न लंबी लाइन में धक्के खाने पड़े और न ही ID दिखाने की टेंशन हो? जी हां, ये सपना अब सच होने वाला है. क्योंकि देश का सबसे नया और मॉडर्न नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) एक ऐसी टेक्नोलॉजी ला रहा है, जो आपकी एंट्री बस आपके चेहरे की पहचान से कर देगी. अब आपका चेहरा ही आपका 'एंट्री पास' होगा. इस कमाल की सुविधा को 'डिजी यात्रा' नाम दिया गया है और यह एयरपोर्ट को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने वाला है. हाई-टेक होने जा रहा है नोएडा एयरपोर्ट जेवर में बन रहा नोएडा एयरपोर्ट अब अपने आखिरी चरण में है. यहां अंदरूनी फिनिशिंग का काम तेजी से चल रहा है. यह एयरपोर्ट सिर्फ बिल्डिंग नहीं है, बल्कि यह डिजिटल-1 (Digital-1) की सोच के साथ बनाया जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि यह एयरपोर्ट यात्रियों को एकदम आसान, तेज और आधुनिक सफर का अनुभव देगा. इस पूरे डिजिटल कामकाज में स्विस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी टेक्नोलॉजी एकदम वर्ल्ड क्लास होगी. ऐसे काम करेगी डिजी यात्रा अगर आप नोएडा एयरपोर्ट से सफर करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको बस एक छोटा सा काम करना होगा. ऐप डाउनलोड करने के बाद, आपको उसमें अपनी जरूरी जानकारी, खास तौर पर अपने आधार कार्ड की डिटेल और फ्लाइट टिकट की बुकिंग जानकारी डालकर अपडेट करनी होगी. यह सब करने के बाद, जब आप एयरपोर्ट पहुंचेंगे, तो आपको बार-बार किसी स्टाफ को टिकट या ID दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि एंट्री गेट पर लगी खास मशीन आपके चेहरे को स्कैन करके तुरंत पहचान लेगी. इस मशीन का नाम है 'फेस रिकग्निशन' टेक्नोलॉजी. जिसकी मदद से आप सिक्योरिटी चेक से लेकर बोर्डिंग गेट तक बिना किसी रुकावट के और तेजी से चेक-इन कर पाएंगे. यह सुविधा पहले से ही दिल्ली, बेंगलुरु, वाराणसी, रांची, पटना और मुंबई जैसे कुछ बड़े एयरपोर्ट पर है, लेकिन नोएडा एयरपोर्ट में इसे पूरे एयरपोर्ट संचालन का आधार बनाया जा रहा है. डिजिटल के साथ-साथ सुविधा भी शानदार नोएडा एयरपोर्ट सिर्फ एंट्री ही आसान नहीं कर रहा है, बल्कि पूरा सिस्टम स्मार्ट बना रहा है. यहां आपको अपने बैग जमा करने के लिए (सेल्फ-बैग ड्रॉप) और विमान में चढ़ने के लिए (सेल्फ-बोर्डिंग गेट) अत्याधुनिक मशीनें मिलेंगी. इससे वेटिंग टाइम बहुत कम हो जाएगा और काम जल्दी होगा. इतना ही नहीं एयरपोर्ट के सभी गेट 'डिजी यात्रा' से लैस होंगे. यानी हर कदम पर तेज, सुरक्षित और पेपरलेस यात्रा संभव होगी. इन सबके अलावा यात्रियों को टर्मिनल बिल्डिंग से सीधे विमान तक पहुंचाने के लिए 10 एयरोब्रिज बनाए गए हैं. इतनी ज्यादा संख्या होने से एक साथ कई विमान आने पर भी यात्रियों को भीड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस बड़े डिजिटल बदलाव का फायदा सिर्फ हवाई यात्रियों तक ही सीमित नहीं रहेगा. एयरपोर्ट पर सामान लाने-ले जाने (कार्गो ऑपरेशन), पूरी व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) और एयरपोर्ट का प्रबंधन जैसे सभी काम भी अब स्मार्ट हो जाएंगे. इस पहल के दम पर भारत उन गिने-चुने देशों की कतार में शामिल हो जाएगा, जहां एयरपोर्ट का पूरा अनुभव पूरी तरह से डिजिटल होगा.  सुरक्षा और स्वच्छता पर पूरा ध्यान नोएडा एयरपोर्ट के जल्द शुरू होने से पहले पूरे परिसर में सफाई, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है. सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. इसके लिए एयरपोर्ट क्षेत्र में दो नए पुलिस थाने बनाए जा रहे हैं और पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. इतना ही नहीं सड़क और कनेक्टिविटी का काम भी अंतिम चरण में है ताकि यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो.

31 अक्टूबर को आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में प्रदेशभर के थानों और मुख्यालयों में आयोजित होगा कार्यक्रम

लखनऊ, देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एकता, अखंडता और राष्ट्रीय समरसता का संदेश गूंजेगा। 31 अक्टूबर को यूपी पुलिस प्रदेश के सभी जिलों और पुलिस कमिश्नरेट मुख्यालयों पर “Run for Unity” कार्यक्रम का भव्य आयोजन करेगी। पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत की एकता और अखंडता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी थानों, स्कूलों, कॉलेजों, एनसीसी, स्काउट्स और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता के साथ यह दौड़ आयोजित होगी, जिसमें तिरंगे झंडे और राष्ट्रीय नारों के साथ देशभक्ति का वातावरण बनेगा। उन्होंने बताया कि ‘रन फॉर यूनिटी’ सुबह 7 से 10 बजे के बीच आयोजित की जाएगी। प्रत्येक थाने या पुलिस मुख्यालय से 1 से 1.5 किलोमीटर की दूरी तक दौड़ का आयोजन होगा। मार्ग का चिन्हांकन, दिशा संकेतक, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में प्रशिक्षणरत महिला व पुरुष आरक्षी, विद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, एनसीसी कैडेट, स्काउट, पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी और प्रमुख खेल हस्तियां भी भाग लेंगी। इस अवसर पर प्रतिभागियों के हाथों में तिरंगा लहराएगा, जो एकता और सौहार्द का प्रतीक बनेगा।

जल्द होगा जेवर एयरपोर्ट का भव्य शुभारंभ, मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी की पूरी तैयारी

लखनऊ,  नोएडा के जेवर में बना नवनिर्मित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द ही शुरू होने जा रहा है। एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ और हरियाणा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए बहु-माध्यमीय (multi-modal) परिवहन व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसका मकसद यात्रियों, पर्यटकों और उद्योगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने का तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल साधन देना है। हर दिशा से आसान रोड कनेक्टिविटी एयरपोर्ट सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (बल्लभगढ़ लिंक) बनने से हरियाणा और पश्चिम भारत की दिशा से भी सुगमता बढ़ी है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट को जोड़ने का काम तेज़ी से चल रहा है, जिससे गाजियाबाद, मेरठ, पलवल और सोनीपत से भी सीधा रास्ता मिलेगा। वहीं, औद्योगिक और मालवाहक ट्रैफिक के लिए उत्तर और पूर्व एक्सेस रोड लगभग बनकर तैयार हैं। जबकि,  सेक्टर-28 की 60 मीटर चौड़ी सेवा सड़क को भी यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, ताकि स्थानीय यातायात सुचारू रहे। रेल और रैपिड रेल से भी पहुंचना होगा आसान दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक रीजनल रैपिड रेल (RRTS) परियोजना का डीपीआर राज्य सरकार ने मंज़ूर कर दिया है। रेल मंत्रालय भी एयरपोर्ट को चोला-रुंधी रेल लाइन से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में जेवर स्टेशन का प्रावधान किया गया है। इलेक्ट्रिक बसों से अंतिम माइल कनेक्टिविटी एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के लिए UPSRTC के साथ समझौता किया गया है। उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के साथ भी अंतरराज्यीय बस सेवा की सहमति बन चुकी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण मिलकर 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाएं गे, जो यात्रियों को एयरपोर्ट तक पर्यावरण-अनुकूल यात्रा सुविधा देंगी। कैब और कार रेंटल सेवाएं भी तैयार 1. NIA ब्रांडेड कैब (महिंद्रा लॉजिस्टिक्स): एयरपोर्ट पर महिंद्रा लॉजिस्टिक्स द्वारा NIA ब्रांडेड कैब सेवा शुरू की जा रही है। यह सेवा यात्रियों को समय पर, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव देगी। 2. ऐप-आधारित टैक्सियां: उबर, रैपिडो और मेक माई ट्रिप जैसी कंपनियां ऑन-डिमांड कैब सेवा देंगी। ओला के साथ अनुबंध भी अंतिम चरण में है। यात्री मोबाइल ऐप से कैब बुक कर सकेंगे, किराया देख सकेंगे और लाइव ट्रैकिंग कर पाएंगे। 3. कार रेंटल सेवाएं: यात्रियों को खुद चलाने वाली या ड्राइवर सहित कारें किराए पर लेने की सुविधा भी मिलेगी। कई कंपनियां इस सेवा के लिए तैयार हैं। उत्तर भारत का नया एविएशन हब बनने को तैयार इन सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) उत्तर भारत का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक विमानन केंद्र बनने जा रहा है। यह देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल होगा, जहाँ सड़क, रेल, रैपिड रेल और बस—चारों माध्यमों से एकीकृत कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।

भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता और सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक होगी यह परियोजना: मुख्यमंत्री

लखनऊ में शीघ्र तैयार होगा ‘नौसेना शौर्य संग्रहालय’ भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता और सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक होगी यह परियोजना: मुख्यमंत्री भारत की समुद्री आत्मा और सभ्यता की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाएगा यह संग्रहालय: मुख्यमंत्री जहाज के अमूर्त रूप में होगा संग्रहालय का स्वरूप, नौसैनिक वास्तुकला, समुद्री प्रतीकों और हरित निर्माण तकनीक से बनेगी विशिष्ट पहचान मुख्यमंत्री का निर्देश, संग्रहालय केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि ‘अनुभव का केंद्र’ बने, डिजिटल, इंटरएक्टिव और इमर्सिव तकनीकों से हो प्रस्तुति आईएनएस गोमती और ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ होंगे खास, फ्रिगेट, टीयू-142 विमान और सी किंग हेलीकॉप्टर होंगे मुख्य आकर्षण संग्रहालय परिसर में 7D थिएटर, एयरक्राफ्ट कैरियर लैंडिंग सिम्युलेटर, डिजिटल वाटर स्क्रीन शो और ‘ड्रेस लाइक योर हीरोज’ जैसी सहभागितापरक गतिविधियाँ होंगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित ‘नौसेना शौर्य संग्रहालय’ की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए इसके शीघ्र निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय भारतीय नौसेना की अदम्य शौर्यगाथाओं और हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की सामुद्रिक क्षमता का जीवंत प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्र भारत की सभ्यता का मंथन स्थल रहा है, और भारतीय नौसेना उस गौरवशाली परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। लखनऊ का यह संग्रहालय उसी परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा। बैठक में बताया गया कि संग्रहालय का स्वरूप एक जहाज के अमूर्त रूप में होगा। जहाज की रेलिंग, पोर्थोल जैसी खिड़कियाँ, नौसैनिक वास्तुकला और समुद्री प्रतीकों के साथ इसे विशिष्ट पहचान दी जाने की योजना है। परिसर में इंटरप्रिटेशन सेंटर, सेंट्रल डेक, ओपन एयर मेमोरियल, थीमैटिक वॉकवे, प्रदर्शनी गैलरी, फाउंटेन और लाइट-एंड-साउंड एरिना शामिल होंगे। डिज़ाइन को ऊर्जा-संवेदनशील रखा गया है, जिसमें प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन और हरित निर्माण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय को केवल देखने योग्य नहीं बल्कि 'अनुभव का केंद्र' बनाया जाए, जहाँ दर्शक इतिहास को महसूस कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि डिस्प्ले में डिजिटल, इंटरएक्टिव और इमर्सिव तकनीकों का प्रयोग हो, ताकि लोग नौसेना के अभियान, युद्ध और तकनीकी प्रगति को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि नौसेना संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में आवश्यक जानाकरी उपलब्ध कराई जाए। प्रस्तुति में बताया गया कि परियोजना दो प्रमुख हिस्सों में विकसित हो रही है। पहली-‘आईएनएस गोमती शौर्य स्मारक’ और दूसरी-‘नौसेना शौर्य वाटिका’। बताया गया कि ‘आईएनएस गोमती (F-21)’ गोदावरी श्रेणी का स्वदेशी मिसाइल फ्रिगेट है जिसने 34 वर्षों तक भारतीय नौसेना में सेवा दी और ‘ऑपरेशन कैक्टस’, ‘ऑपरेशन पराक्रम’ जैसे अभियानों में भाग लिया। इसे संरक्षित कर संग्रहालय परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि नागरिक और युवा उसकी बहादुरी की कहानी को प्रत्यक्ष देख सकें। मुख्यमंत्री ने ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ को परियोजना का विशेष आकर्षण बताते हुए इसके शीघ्र पूर्ण होने के निर्देश दिए। इस वाटिका में टीयू-142 विमान, जो 29 वर्षों तक नौसेना की समुद्री निगरानी और आपदा राहत अभियानों में सक्रिय रहा, स्थापित किया जा रहा है। साथ ही सी किंग एसके-42बी हेलीकॉप्टर की प्रदर्शनी भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वाटिका युवाओं को आधुनिक नौसैनिक अभियानों और प्रौद्योगिकी से जोड़ने वाला सजीव अनुभव स्थल बनेगी। बैठक में बताया गया कि संग्रहालय परिसर में 7D थिएटर, एयरक्राफ्ट कैरियर लैंडिंग सिम्युलेटर, वॉरशिप सिम्युलेटर, सबमर्ज्ड द्वारका मॉडल, डिजिटल वाटर स्क्रीन शो, मरीन लाइफ एक्वेरियम तथा ‘ड्रेस लाइक योर हीरोज़' जैसी सहभागितापरक गतिविधियाँ होंगी। इसके अतिरिक्त नौसेना के वीरता पुरस्कारों, ऐतिहासिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा नवाचारों से जुड़ी इंटरएक्टिव गैलरियाँ भी विकसित की जाएंगी। परियोजना की निगरानी हेतु महानिदेशक पर्यटन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें मेरिटाइम हेरिटेज सोसाइटी, यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन और नौसेना विशेषज्ञ सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में समुद्री गौरव की वह चेतना पुनः जागृत होगी जो कभी भारत के तटीय व्यापार और हिंद महासागर की सांस्कृतिक कड़ी रही है। उन्होंने कहा, लखनऊ का यह संग्रहालय भारतीय नौसेना की वीरता का ही नहीं, बल्कि भारत की समुद्री आत्मा का भी प्रतीक बनेगा। यह उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई, गौरवपूर्ण पहचान देगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की देव दीपावली तैयारियों की समीक्षा

काशी की सनातन परंपरा, गंगा आराधना और लोकआस्था का अद्वितीय संगम है देव दीपावली: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की देव दीपावली तैयारियों की समीक्षा 01 से 04 नवंबर तक आयोजित होगा गंगा महोत्सव, 05 नवंबर को गंगा तट पर भव्य देव दीपावली घाटों पर प्रकाश, सजावट, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी उच्च गुणवत्ता व समयबद्धता से पूरी करने के निर्देश गंगा तट पर दीपदान का दृश्य श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल बने, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहे: मुख्यमंत्री चेत सिंह घाट पर 25 मिनट की प्रोजेक्शन सहित प्रतिदिन 03 बार लेज़र शो होगा देव दीपावली में स्मार्ट लाइटिंग, थीम आधारित इंस्टालेशन, ड्रोन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु शौचालय, पेयजल, चिकित्सा, कंट्रोल रूम और सफाई कर्मियों की तैनाती 24×7 सक्रिय रखने का निर्देश नाविक समुदाय को देव दीपावली की गरिमा का हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, उन्हें सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट और पूर्ण सहयोग दिया जाए क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ के दर्शन से अभिभूत होंगे श्रद्धालु: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में 05 नवम्बर को वाराणसी में आयोजित होने वाली देव दीपावली 2025 की तैयारियों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देव दीपावली काशी की सनातन परंपरा, गंगा आराधना और लोकआस्था का अद्वितीय संगम है। यह पर्व भारत की उस अनादि परंपरा का सजीव प्रतीक है, जहाँ दीप केवल ज्योति नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रभाव का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की देव दीपावली का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा और आध्यात्मिक चेतना का विश्व संदेश बने। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि देव दीपावली से पूर्व आयोजित गंगा महोत्सव (01 से 04 नवम्बर) और मुख्य आयोजन देव दीपावली (05 नवम्बर) की सभी तैयारियाँ समयबद्ध, व्यवस्थित और उच्च गुणवत्ता की हों। घाटों की प्रकाश सज्जा, दीपदान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसहभागिता की तैयारियाँ इस प्रकार हों कि श्रद्धा, अनुशासन और सौंदर्य का संतुलन प्रदर्शित हो। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर दीपदान का दृश्य श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल बने। इसके लिए घाटों पर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या अवरोध न हो। मुख्यमंत्री ने पर्यटन, नगर निगम, पुलिस, जल पुलिस, संस्कृति, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, विद्युत व स्वास्थ्य विभागों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि देव दीपावली के अवसर पर घाटों पर स्मार्ट लाइटिंग, आकर्षक फ्लोरल डेकोरेशन, थीम-आधारित इंस्टालेशन तथा ड्रोन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि घाटों, गलियों और प्रमुख मार्गों की सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा प्रत्येक घाट पर पर्याप्त सफाई कर्मी तैनात रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे और कमांड सेंटर से सीसीटीवी फीड की निगरानी निरंतर की जाए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त शौचालय, पेयजल व्यवस्था, चिकित्सीय सहायता और प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएँ। घाटों के समीप आपातकालीन नौका एवं एम्बुलेंस सेवाएँ उपलब्ध रहें। नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें लाइफ जैकेट, पंजीकरण टैग और निर्धारित रूट की जानकारी दी जाए। मुख्यमंत्री ने नमो घाट, राजघाट, राजेन्द्र प्रसाद घटा, दशाश्वमेध घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर आयोजित होने वाले दीपोत्सव की तैयारियों की भी समीक्षा की और कहा कि वहाँ दीप सज्जा, पर्यटक सुविधाएँ और सुरक्षा उपाय उच्च स्तर पर किए जाएँ। उन्होंने कहा कि नाविक समुदाय काशी की परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, उनका उत्साह और योगदान देव दीपावली की गरिमा को और बढ़ाता है। प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि उन्हें पर्याप्त सहयोग मिले और श्रद्धालुओं को सुरक्षित नौका सेवाएँ प्राप्त हों। बैठक में बताया गया कि चेत सिंह घाट पर 25 मिनट की प्रोजेक्शन सहित प्रतिदिन 03 बार लेज़र शो का आयोजन करने की योजना है। इसी तरह, काशी विश्वनाथ घाट और चेत सिंह घाट के बीच रेत की सैंड आर्ट इंस्टॉलेशन लगाई जाएगी। ग्रीन आतिशबाजी, लेज़र शो और संगीत कार्यक्रम के साथ काशी विश्वनाथ धाम घाट के सामने 10 मिनट का ग्रीन फायरक्रैकर शो आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देव दीपावली का आयोजन ‘क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ के भाव को साकार करने वाला हो। घाटों से लेकर गलियों तक स्वच्छता, सुगमता और प्रकाश व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने यातायात प्रबंधन, पार्किंग, बैरिकेडिंग, शटल सेवाओं, विद्युत आपूर्ति और चिकित्सा सेवाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि किसी भी क्षेत्र में जाम या अव्यवस्था न हो। उन्होंने कहा कि गंगा तटों पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों और धर्माचार्यों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। यह आयोजन जनसहयोग, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी का यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आत्मबल का उत्सव है। काशी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ की पावनता, व्यवस्था और अनुशासन देखकर ‘अतिथि देवो भवः’ की भारतीय परंपरा को अनुभव करें।

मुख्यमंत्री ने की निर्माण कार्य की समीक्षा, जनवरी तक भवन निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश

भारत के शौर्य, स्वाभिमान और सांस्कृतिक वैभव का प्रेरणास्थल होगा छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने की निर्माण कार्य की समीक्षा, जनवरी तक भवन निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश संग्रहालय में केवल इतिहास का स्थिर प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की गौरवगाथा का जीवंत अनुभव हो: मुख्यमंत्री ‘शिवाजी एवं द ग्रेट एस्केप गैलरी’ में 7D तकनीक से आगरा किले से शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक मुक्ति का सजीव चित्रण होगा ‘अग्रदूतों की गैलरी’ में 1857 के अमर सेनानियों की गाथा आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित होगी, लक्ष्मीबाई, नाना साहेब, तात्या टोपे जैसी विभूतियों को मिलेगा स्थान ‘त्योहारों’ और ‘नदियों’ की गैलरियों में उत्तर प्रदेश की आस्था, लोकजीवन और उत्सव परंपराओं का इंटरएक्टिव चित्रण होगा मुख्यमंत्री का निर्देश, हर गैलरी और स्थापत्य तत्व उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में आगरा में बन रहे छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय भारत के स्वाभिमान, सांस्कृतिक वैभव और वीरता का प्रेरणास्थल बनेगा। मुख्यमंत्री ने अब तक की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि भवन का निर्माण कार्य जनवरी तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए, ताकि संग्रहालय का स्वरूप देने का काम तय समय पर पूरा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय केवल इतिहास का स्थिर प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव होना चाहिए, जहाँ आगंतुक भारत की गौरवगाथा को महसूस कर सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि संग्रहालय की प्रत्येक गैलरी को ऐसी थीमैटिक और इंटरएक्टिव प्रस्तुति दी जाए, जिससे आगंतुक केवल दर्शक न रहकर सहभागी बनें। मुख्यमंत्री ने ‘शिवाजी एवं द ग्रेट एस्केप गैलरी’ के संबंध में निर्देश दिए कि इसमें आगरा किले से छत्रपति शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक मुक्ति की घटना को 7D तकनीक, डिजिटल साउंड, लाइट और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए ताकि आगंतुक उस क्षण की वीरता और रणनीति को सजीव रूप में अनुभव कर सकें। उन्होंने कहा कि यह अनुभाग शिवाजी महाराज के स्वराज्य संकल्प का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने ‘अग्रदूतों की गैलरी’ में प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के अमर सेनानियों से जुड़ी वस्तुओं, स्मृतियों और दस्तावेजों को सुरक्षित प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह गैलरी उन अग्रदूतों की गाथा कहे जिन्होंने स्वतंत्रता की नींव रखी। यहाँ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहेब, तात्या टोपे और अनेक वीरों की स्मृतियाँ आधुनिक तकनीक के साथ प्रदर्शित हों। मुख्यमंत्री ने ‘त्योहारों की गैलरी’ के संबंध में कहा कि इसमें काशी की महाशिवरात्रि और देव दीपावली, ब्रज का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और रंगोत्सव, तथा प्रयागराज का महाकुंभ जैसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्वों का जीवंत चित्रण हो। उन्होंने निर्देश दिया कि यहाँ केवल तस्वीरें न लगाई जाएं, बल्कि प्रत्येक पर्व को इंटरएक्टिव अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाए, जहाँ प्रकाश, ध्वनि, संगीत और रंगों के माध्यम से आगंतुक उत्सव का अनुभव कर सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ‘नदियों की गैलरी’ में गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा जैसी नदियों से जुड़ी आस्था, संस्कृति और लोकजीवन का सजीव चित्रण हो। साथ ही ‘देवासुर संग्राम’ जैसे अनुभाग के माध्यम से सृष्टि, धर्म और मानव मूल्यों की भारतीय व्याख्या को भी दर्शाया जाए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय परिसर में स्थापित सभी कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ और स्थापत्य तत्व उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय की प्रत्येक दीवार, आंगन और कलाकृति बोलती हुई कहानी बने, जिसमें लोककला, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक कला का समन्वय झलके। मुख्यमंत्री ने ‘आगरा गैलरी’ में शहर की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए ताकि आगंतुकों को मुगलकालीन स्थापत्य, ब्रज संस्कृति और आधुनिक आगरा का समग्र परिदृश्य एक साथ देखने को मिले। उन्होंने ‘ओरिएंटेशन गैलरी’ को संग्रहालय की प्रस्तावना के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए, जहाँ आगंतुकों को संग्रहालय के उद्देश्य, छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उस कालखंड के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश का परिचय मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल अतीत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा केंद्र बनना है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी गैलरियों और अनुभव क्षेत्रों में इंटरएक्टिव तकनीक, वर्चुअल रियलिटी, साउंड-लाइट शो और डिजिटल आर्काइव्स का प्रयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय आगरा की पहचान को नई ऊँचाई देगा और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक बनेगा।

लखनऊ, कानपुर, आगरा समेत छह जिलों में होगा स्पेशल प्रोजेक्ट, CM के निर्देश जारी

लखनऊ  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के औद्योगिक और अवसंरचनात्मक विकास को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में बन रहे एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़कों का नेटवर्क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ हैं, जो आने वाले वर्षों में उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे. मुख्यमंत्री ने यह बातें उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहीं. बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसंबर तक हर हाल में पूरा कराया जाए. सीएम ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ेगा और उत्तर प्रदेश के विकास का नया मार्ग बनेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्य की गति के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी कोई समझौता न हो. हर परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जाए और समय-सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल किया जाए. एक्सप्रेसवे नेटवर्क को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विकसित किए जा रहे नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स पर भी विस्तृत चर्चा की. इनमें मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे, और विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क को ध्यान में रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए एक संतुलित, समन्वित और एकीकृत सड़क तंत्र विकसित किया जा सके. उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश का भविष्य ऐसे ही प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है, जो सुविधा, सुरक्षा और निवेश तीनों पहलुओं को साथ लेकर चलें. छह जिलों में विशेष काम, डिफेंस कॉरिडोर पर सीएम का जोर मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में विशेष काम की रूपरेखा तय करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इन छह जिलों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ा जा सके. इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि प्रदेश की आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा. सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवा प्रतिभाशाली हैं. अगर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण मिले, तो वे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश की ताकत बन सकते हैं. हमारे डिफेंस कॉरिडोर का उद्देश्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि युवाओं के हाथों में हुनर देना भी है. बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक 30,819 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. कुल 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है, और कई कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू कर दिया है.  भूमि आवंटन पर सख्त निर्देश न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी ने भूमि आवंटन नीति पर भी सख्ती दिखाई. उन्होंने कहा कि अगर किसी निवेशक को भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर परियोजना पर काम शुरू नहीं किया गया, तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाए. उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि भूमि उपयोग की पारदर्शी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि हर निवेशक अपनी प्रगति की रिपोर्ट समय-समय पर साझा करे. उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेशकों का स्वागत है, लेकिन भूमि उन्हीं को मिलेगी जो प्रदेश के विकास के प्रति गंभीर हैं. जो केवल जमीन लेकर बैठे रहेंगे, उन्हें कोई रियायत नहीं दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निवेशकों को आगे की सुविधाएं और प्रोत्साहन केवल तभी दिए जाएं, जब उनके प्रोजेक्ट्स जमीन पर वास्तविक प्रगति दिखाएं. एक्सप्रेसवे के किनारे बनेगा औद्योगिक तंत्र बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं. यूपीडा ने इन क्षेत्रों में बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल, हेल्थ-इमरजेंसी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए समयबद्ध योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे केवल यात्रा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये भविष्य में उद्योग, व्यापार और रोजगार के मुख्य केंद्र बनने जा रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले क्लस्टरों में एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि छोटे उद्योगों को भी बड़ी परियोजनाओं से लाभ मिल सके. निवेश के लिए आकर्षक माहौल बनाने पर फोकस बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए कई नीतियों को और सरल और पारदर्शी बनाया गया है. यूपीडा ने हाल ही में भूमि आवंटन, पंजीकरण और परियोजना अनुमोदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन और सिंगल विंडो सिस्टम के तहत लागू किया है. सीएम योगी ने कहा कि निवेशकों को भरोसा और सुविधा दोनों मिले, यही हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे सुरक्षित और स्थिर निवेश केंद्र बन चुका है. एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और डिफेंस कॉरिडोर इस परिवर्तन के सशक्त प्रतीक हैं.  नई परियोजनाओं पर आगे बढ़ेगा यूपी बैठक में यह भी तय हुआ कि आने वाले समय में प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में नए लिंक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्रों को जोड़ने वाला विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे विकास के नए द्वार खोलेगा. इसके अलावा, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे मध्य भारत के औद्योगिक गलियारों से उत्तर प्रदेश की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना केवल सड़क निर्माण का काम नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और सामाजिक विकास का माध्यम है.