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मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा

मुख्यमंत्री की चेतावनी, नगरीय अवस्थापना के कार्य समय पर और पारदर्शिता के साथ हों, अन्यथा महापौर के अधिकारों पर होगा पुनर्विचार उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर की रूपरेखा पर भी हुआ विमर्श, बोले मुख्यमंत्री, बेहतर होगी कनेक्टिविटी और आर्थिकी को भी मिलेगा बल सड़क नवीनीकरण में पीडब्ल्यूडी ने 84.82% प्रगति दर्ज की, अन्य विभागों को भी गति बढ़ाने के निर्देश रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश त्योहारों के दृष्टिगत 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए, मुख्यमंत्री ने तुरंत सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित करने को कहा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मॉनसून वर्षा के कारण खराब हुईं सड़कों की मरम्मत और आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण के लिए जारी कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हाई-वे हों या एक्सप्रेस-वे, ग्रामीण सड़कें हों या नगरीय क्षेत्र की सड़कें, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे आगामी प्रमुख पर्वों से पहले सभी महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि आमजन को असुविधा न झेलनी पड़े। मुख्यमंत्री, मंगलवार को विभिन्न विभागों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सड़कों की मररमत, गड्ढामुक्ति अभियान आदि की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अधिकारियों ने गड्ढा मुक्ति अभियान की कार्ययोजना के संबंध में अवगत कराया कि प्रदेश की कुल 6,78,301 सड़कों (लंबाई 4,32,989 किमी) में से 44,196 किमी को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में औसतन 21.67 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री ने एनएचएआई, मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी, ग्राम विकास, पंचायती राज, नगर विकास, सिंचाई, गन्ना एवं चीनी विकास सहित विभिन्न विभागों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि सभी विभाग लक्ष्य की प्राप्ति में समान गति बनाएं और कमजोर प्रगति वाले विभाग और बेहतर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों की मरम्मत में तेजी की अपेक्षा जताई।  नगर विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों में अवस्थापना संबंधी कार्यों की धनराशि का समय से और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कार्य का आवंटन पारदर्शिता के साथ हो और कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। अन्यथा की स्थिति में महापौरों के अधिकारों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिस भी नगर निगम में ईईएसएल का बकाया है, उसका तत्काल भुगतान करा दिया जाए।    सड़क नवीनीकरण कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि 31,514 किमी लंबाई की सड़कों को इसमें शामिल किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने इसमें 84.82 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा किया कि नवीनीकरण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है, इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बैठक में अवगत कराया गया कि रेस्टोरेशन एवं विशेष मरम्मत के अंतर्गत 2,750 किमी सड़कें चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास विभाग ने इसमें 62.99 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है, नगर विकास विभाग ने 35.50 प्रतिशत और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 48.77 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 30 सितम्बर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे पूरा कर कार्ययोजना शासन को प्रस्तुत की जाए। त्योहारों को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 649 मार्ग संतोषजनक स्थिति में हैं, जबकि 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन मार्गों को तत्काल सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय सड़कों की स्थिति प्रदेश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रदेशवासियों की सुविधा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कार्यों की प्रगति की दैनिक निगरानी हो तथा शासन स्तर पर नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अधिकांश राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व-पश्चिम दिशा में केंद्रित हैं, ऐसे में अब आवश्यकता है कि नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के दक्षिणी छोर तक फैले जिलों को जोड़ने वाला एक सुदृढ़ उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर तैयार किया जाए। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में एनएचएआई का सहयोग लिया जाए और शेष मार्गों का निर्माण, सुदृढ़ीकरण तथा चौड़ीकरण राज्य स्तर पर कराया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां ग्रीनफील्ड रोड परियोजनाएं प्रस्तावित की जाएं।

कचहरी में हंगामा, पुलिस-वकील भिड़ंत में दरोगा समेत चार सिपाही घायल

वाराणसी वाराणसी जिले में अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस की पिटाई का मामला सामने आया है। यहां मंगलवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने बड़ागांव थाने पर तैनात दरोगा मिथिलेश समेत चार पुलिसकर्मियों को दौड़ा- दौड़ाकर बेरहमी से पीटा। मामले को लेकर मौके पर हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में दरोगा को बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया है। चिकित्सकों ने हालत नाजुक बताई है।    जानकारी के मुताबिक, शनिवार को बड़ागांव थाने में जमीन के प्रकरण में विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर मंगलवार को भी दरोगा और अधिवक्ताओं के बीच विवाद हुआ। इस दौरान अधिवक्ताओं ने दरोगा समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया। घटनास्थल पर डीएम सत्येंद्र कुमार और अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था शिवहरि मीणा बार के पदाधिकारियों के साथ वार्ता कर रहे हैं। पूरी कचहरी को छावनी में तब्दील किया गया है। कमिश्नरेट की पांच थानों की फोर्स मौके पर तैनात है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, कृषि, एआई आदि पर जनता दे रही सुझाव

ग्रामीण क्षेत्रों से 1.35 लाख और नगरीय क्षेत्रों से करीब 65 हजार सुझाव प्राप्त शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक राय हुई दर्ज, देवरिया, कानपुर देहात, हरदोई, जौनपुर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, प्रतापगढ़, गोरखपुर आदि जनपदों से सर्वाधिक फीडबैक जनता का कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर विशेष जोर लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान निरंतर जनभागीदारी और सुझावों के साथ आगे बढ़ रहा है। मंगलवार तक प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया और आम जनमानस से संवाद किया। इस संवाद में न केवल विगत आठ वर्षों की विकास यात्रा साझा की गई, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने हेतु रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया। करीब दो लाख से अधिक फीडबैक दर्ज सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब दो लाख फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.35 लाख और नगरीय क्षेत्रों में करीब 65 हजार फीडबैक प्राप्त हुए। आयु वर्ग के अनुसार करीब 75 हजार सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, करीब 1 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग से और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 25 हजार से अधिक सुझाव आए हैं। शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक राय जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। करीब 70 हजार से अधिक सुझाव शिक्षा से जुड़े मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े करीब 40हजार, स्वास्थ्य पर 15 हजार से अधिक, समाज कल्याण पर करीब 16 हजार और कृषि क्षेत्र से संबंधित 27 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए। इन जिलों से मिल रही भागीदारी देवरिया, कानपुर देहात, हरदोई,  जौनपुर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, प्रतापगढ़ और गोरखपुर जैसे जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से कुल69,670 से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए, जो दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है। समाज कल्य़ाण क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता आगरा की चित्रा पारिख, सचिन भारद्वाज ने समाज कल्याण क्षेत्र में सुधार का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि विधायकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कम से कम स्नातक अनिवार्य की जाए। गौशाला समितियों में 50% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। छात्रावासों में स्वच्छता, पौष्टिक भोजन, चिकित्सकीय सुविधा तथा खेल-कूद के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाएं। लखनऊ में फिनटेक एंड एनालिटिक्स सिटी विकसित की जानी चाहिए लखनऊ के कुंवर उर्जस्वित सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक वितरित डेटा सेंटर ग्रिड तथा लखनऊ में एक फिनटेक-एंड-एनालिटिक्स सिटी विकसित की जानी चाहिए, जिससे राज्य की वैश्विक सेवा-क्षमता और डेटा सुरक्षा सशक्त हो सके। स्थानीय शासन में एआई-को पायलट और एकीकृत नागरिक पोर्टल लागू कर वास्तविक समय में निर्णय प्रक्रिया और सेवाओं की दक्षता बढ़ाई जा सकती है। दूरगामी परिकल्पना के अंतर्गत स्पेस-टेक नीति तैयार की जाए तथा रक्षा-सम्बद्ध अंतरिक्ष तकनीक में स्वायत्ता प्राप्त करने हेतु उच्चस्तरीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव शामिल किया गया है। पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा, रोक लगाने के लिए स्कैनर ऐप विकसित किया जाए कृषि कार्य से जुड़े अधिकांश किसान पशुपालन भी करते हैं, किंतु बीते कुछ वर्षों में पशु आहार बनाने वाले फैक्ट्री संचालक महंगाई से बचने अथवा अधिक लाभ कमाने की दृष्टि से पशु आहार में मिलावट करने लगे हैं। इसके कारण पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए एक ऐसा स्कैनर ऐप विकसित किया जाए, जो न केवल पशु आहार की शुद्धता की पहचान कर सके, बल्कि पशु को स्कैन करते ही उसकी नस्ल, दूध उत्पादन क्षमता तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करा सके। साथ ही, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को बीमा के दायरे में लाया जाए, क्योंकि मधुमक्खी पालकों को बॉक्स चोरी होने तथा मछली पालकों को तालाब में अराजक तत्वों द्वारा विष डालकर मछलियों को मार देने या चोरी होने का खतरा बना रहता है।

कैसरबाग मछली मंडी में घटनास्थल पर पहुंचे डिप्टी सीएम, अस्पताल में घायलों व परिजनों से मिले

लखनऊ  कैसरबाग मछली मंडी में पुराने पेड़ के गिरने से हुए हादसे में सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। घायलों का समुचित उपचार कराया जा रहा है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। जिला प्रशासन व संबंधित विभागों को जिले भर में पुराने पेड़ों को चिन्हित करने एवं नियमानुसार उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कहना है प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का।  मंगलवार को कैसरबाग मछली मंडी में हुए हादसे के तुरंत बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक घटनास्थल पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत की और घटना के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि इस हादसे में रामू नामक व्यक्ति हताहत और रिजवान, शोएब, अभिषेक व मोहम्मद अरमान रसूल घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज चल रहा है।  डिप्टी सीएम घायल को देखने के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों व उनके परिजनों से मुलाकात करते हुए, हर संभव मदद हेतु आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि चारों घायलों की हालत खतरे से बाहर है। उप मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जिला प्रशासन, नगर निगम एवं वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि पूरे जिले में पुराने पेड़ों को चिन्हित करें एवं उन्हें नियमानुसार हटवाने की प्रक्रिया शुरू करें ताकि इस तरह से हादसों को पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि घायलों का निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है।

योगी सरकार का फैसला: संत कबीर वस्त्र पार्क से बढ़ेगा उत्तर प्रदेश का टेक्सटाइल सेक्टर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र में निजी निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभिन्न जिलों में वस्त्र एवं परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है. मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उत्पादों की समृद्ध धरोहर वाला राज्य है, जिसकी क्षमता का सही उपयोग होने पर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में वस्त्र एवं परिधान का वैश्विक बाजार वर्ष 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इसमें 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते देशों में है. ऐसे परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की भागीदारी इस क्षेत्र में निर्णायक सिद्ध हो सकती है. प्रस्तावित योजना संत कबीर के नाम पर समर्पित मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा. संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि माना और यही भाव इस योजना का आधार बनेगा. मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के माध्यम से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा. बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष वस्त्र एवं परिधान निर्यातक राज्यों में शामिल है. वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है. इस क्षेत्र का प्रदेश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत योगदान है, जबकि राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लगभग 22 लाख लोग इससे जुड़े हैं. वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है. अधिकारियों ने बताया कि निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इन प्रस्तावों के लिए लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है. लगभग 1,01,768 रोजगार के अवसर की संभावना कुल निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपये आंका गया है और इसके फलस्वरूप लगभग 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है. प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी. साथ ही बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों के विकास की भी व्यवस्था की जाएगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र गति से क्रियान्वित करने हेतु भूमि की पहचान और विकास कार्य को तेज़ किया जाए. उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अथवा नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि निवेशकों को समयबद्ध और सुगम सुविधाएं प्राप्त हों. सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, विद्युत और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी. मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को इस योजना का मुख्य लक्ष्य बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना न केवल निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगी. बुनकरों के साथ संवाद स्थापित करने के निर्देश बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों की उत्पादन लागत कम करने, आय बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुनकरों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बुनकर, परिश्रम और परंपरा के प्रतीक हैं. उनके हाथों से बना कपड़ा पूरे विश्व में पहचान रखता है. सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है. बुनकरों से संवाद बनाकर उनकी अपेक्षाओं को जानने और समझने की आवश्यकता है. इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ की जाए. मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही के भी निर्देश दिए.  

मूसलाधार बारिश के बाद लखनऊ में बड़ा हादसा, पेड़ गिरने से एक की मौत, कई दबे

लखनऊ लखनऊ में सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक हुई बारिश के बाद बड़ा हादसा हुआ है। कैसरबाग में एक भारी भरकम पीपल पेड़ का पेड़ गिर गया। पेड़ मछली मंडी के साथ ही आसपास के कई मकानों पर गिरा है। इससे दस से ज्यादा लोग दब गए। सूचना पर नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल और फायर ब्रिगेड के जवान राहत में लगे हैं। जहां पेड़ गिरा है, वहां मछली मंडी लगती थी। घायलों को पेड़ की डालें काट-काटकर निकालने की कोशिश हो रही है। आला अधिकारी भी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कमिश्नर रौशन जैकब भी मौके पर हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि पेड़ करीब 150 साल पुराना था। सोमवार की पूरी रात बारिश होने के बाद यह घटना हुई है। पेड़ की टहनियों ने आसपास के घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है। पेड़ के नीचे कई गुमटियां भी दबी हुई हैं। दबे लोगों को निकाल-निकाल कर अस्पताल भेजा जा रहा है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि सभी का बेहतर इलाज कराया जाएगा। अधिकारियों को इस बारे में निर्देश भी दे दिया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। अन्य सभी घायलों को बलरामपुर अस्पताल और सिविल अस्पताल भेजा गया है। वहां सभी का इलाज चल रहा है। केजीएमयू को डॉक्टरों को भी अलर्ट कर दिया गया है। अगर जरूरत पड़ेगी तो वहां भी भेजकर तत्काल इलाज कराया जाएगा। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि एक की मौत हुई है और 4 लोग घायल भी हुए हैं। घायलों के पैर फ्रेक्चर होने के साथ सिर और हाथ में चोटें लगी हैं। कहा कि जिला प्रशासन नगर निगम के साथ मिलकर रिहायशी इलाकों में गिरने की आशंका वाले पेड़ों की छंटाई कराएगा और जर्जर मकानों को गिराया जाएगा।  

यूपी के वाहन मालिकों को बड़ी राहत… 5 साल के सभी ई-चालान होंगे माफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य में 2017 से 2021 तक बने लाखों ई-चालान अब कानून के तहत स्वतः समाप्त माने जाएंगे. यानी जिन चालानों पर अदालतों में कार्रवाई लंबित थी या जो समय-सीमा से बाहर हो चुके हैं, वे अब मान्य नहीं रहेंगे. इस कदम से प्रदेशभर के वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी. इस फैसले के साथ ही फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) जैसी सेवाओं पर लगे अवरोध हट जाएंगे. यानी अब पुराने ई-चालानों की वजह से वाहन मालिकों को इन सेवाओं में अड़चन नहीं होगी. कितने चालान थे लंबित? परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान काटे गए थे. इनमें से 17,59,077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं, जबकि 12,93,013 चालान अब तक लंबित हैं. इनमें से 10,84,732 चालान कोर्ट में पेंडिंग हैं जबकि 1,29,163 चालान ऑफिस स्तर पर पेंडिंग हैं. अब ये सभी चालान खुद खत्म हो जाएंगे. एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी और जनता आसानी से ई-चालान पोर्टल पर जाकर अपने वाहन/चालान का स्टेटस देख सकेगी. क्यों लिया गया ये फैसला? परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा आदेश में बताया गया कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और कानून के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय से कोर्ट में पड़े छोटे-मोटे चालानों से न्यायपालिका और प्रवर्तन तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा था. इनकी वसूली लगभग असंभव हो चुकी थी. हाई कोर्ट ने भी कई आदेशों में साफ कहा कि ऐसे ई-चालान “by operation of law” अब समाप्त माने जाएंगे. राज्य सरकार ने नए कानून और अदालत के निर्देशों के बाद इसे पोर्टल स्तर पर लागू करने का आदेश जारी किया है. किन पर लागू नहीं होगा यह आदेश? यह राहत टैक्स रिकवरी से जुड़े चालानों पर लागू नहीं होगी. यानी मोटर व्हीकल्स टैक्सेशन एक्ट के तहत बकाया टैक्स वाले मामलों पर कार्रवाई अलग से जारी रहेगी. इसी तरह, गंभीर दुर्घटनाओं, IPC से जुड़े मामलों या शराब पीकर वाहन चलाने जैसे प्रकरण इस दायरे से बाहर रखे गए हैं. इन धाराओं में शामिल चालानों को खत्म नहीं किया जाएगा. जनता को कैसे फायदा होगा? इसका सीधा लाभ वाहन मालिकों को मिल सकेगा क्योंकि इससे वाहन सेवाएं आसान हो जाएंगी. अब फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर या HSRP के लिए आवेदन करते समय पुराने ई-चालानों की वजह से रुकावट नहीं आएगी. इसके अलावा लाखों वाहन मालिकों पर से पुराने केस हट जाएंगे और उन्हें कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. खासकर ऑटो, ट्रांसपोर्ट और टैक्सी ऑपरेटरों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. आगे क्या होगा? 30 दिन के भीतर सभी जिलों के RTO/ARTO दफ्तर लंबित चालानों की स्थिति बदलकर पोर्टल पर “Disposed-Abated” या “Closed-Time Bar” कर देंगे. एक महीने बाद वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकेंगे कि उनका चालान खत्म हुआ या नहीं. हाई कोर्ट के जिन मामलों में खास तौर पर आदेश दिए गए हैं, वहां सात दिन के भीतर चालान पोर्टल से हटा दिए जाएंगे.

मौलाना शहाबुद्दीन का आरोप: वक्फ बोर्ड बन गया करप्शन का अड्डा, योगी सरकार करे कार्रवाई

बरेली ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि वक्फ बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए क्योंकि यह करप्शन का अड्डा बन चुका है। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है। यह फैसला देश, समाज और मुसलमानों के हित में है।मौलाना ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड का दफ्तर रिश्वतखोरी का गढ़ बन चुका है। छोटी-छोटी मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह की कमेटी गठित कराने के लिए वर्षों चक्कर लगाने पड़ते हैं और बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता। लखनऊ का जुमला याद कराया, लगाए आरोप मौलाना ने कहा है किलखनऊ में यह जुमला मशहूर है कि वक्फ बोर्ड की एक-एक ईंट पैसा मांगती है। भाजपा सरकार करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, इसलिए वक्फ बोर्ड से जुड़े सभी भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चहेते हैं और 18 साल से सत्ता बदलने के बावजूद पद पर जमे हुए हैं। सपा, बसपा और यहां तक कि भाजपा शासनकाल में भी उन्हें कुर्सी पर बनाए रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनमें ऐसी कौन-सी खूबियां हैं, जिसकी वजह से उन्हें लगातार अध्यक्ष बनाए रखा गया। मुस्लिम संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के कुछ अहम प्रावधानों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने का मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) समेत कई संगठनों और धर्मगुरुओं ने सोमवार को स्वागत किया। शीर्ष अदालत में इस विवादित अधिनियम को चुनौती देने वाली जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि उनका संगठन इस ‘काले कानून’ के ख़त्म होने तक ‘अपनी क़ानूनी और लोकतांत्रिक जद्दोजहद को जारी रखेगा।” वहीं, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि उसे अदालतों पर पूरा भरोसा है और इंसाफ मिलने की उम्मीद है।  

वोटिंग लिस्ट से नाम हटाएं तो क्या बदलाव होगा? यूपी चुनाव आयोग का ताजा आदेश

लखनऊ  यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग वोटिंग लिस्ट को दुरुस्त करने में जुट गया है। वोटर लिस्ट में सभी का नाम जोड़ने और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर प्रदेशभर से जुटे अधिकारियों की ट्रेनिंग कराई गई। ट्रेनिंग में 8 जिला निर्वाचन अधिकारियों और 137 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूची से नाम हटाने की कार्यवाही नियमों के अनुसार हो और सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि ट्रेनिंग का उद्देश्य अधिकारियों को निर्वाचक नामावली से संबंधित कानूनी प्रावधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, एनजीएसपी पोर्टल और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षित करना था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और समावेशी बनाना बेहद ज़रूरी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि प्रशिक्षण प्राप्त ईआरओ अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में छोटे-छोटे समूहों में बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी प्रशिक्षित करें। उन्होंने उन मतदान केंद्रों की पहचान कर कार्ययोजना बनाने के लिए कहा जहां लिंगानुपात (gender ratio) असंतुलित है, ताकि जागरूकता अभियान चलाकर सुधार किया जा सके। 18-19 आयु वर्ग के युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल करने पर विशेष बल दिया गया। मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्रों में नए अनुभाग बनाने के निर्देश भी दिए गए। प्रशिक्षण में 2003 की मतदाता सूची को 2025 की सूची के साथ मैप करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया। बीएलओ को घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र (Enumeration Form) वितरित करने और मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों को दी गई इसकी जानकारी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960 के तहत उनके कानूनी दायित्व बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ बेहतर समन्वय दावे और आपत्तियों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप जैसे तकनीकी पहलुओं का उपयोग आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण में मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका  

युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री

संत कबीर के नाम पर उत्तर प्रदेश में स्थापित होंगे वस्त्र एवं परिधान पार्क: मुख्यमंत्री युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री बुनकरों की अपेक्षाओं को जानने-समझने के लिए हर जिले में हो संवाद, सस्ती बिजली और पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के की जरूरत: मुख्यमंत्री निवेश सारथी पोर्टल पर मिले हैं 659 प्रस्ताव, 15,431 करोड़ निवेश और 1 लाख से अधिक रोजगार अवसर का अनुमान प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित होगा, सहायक इकाइयों व सीईटीपी की होगी अनिवार्यता युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा: मुख्यमंत्री प्रदेश से 2023-24 में 3.5 अरब डॉलर का वस्त्र और परिधान निर्यात, देश के कुल निर्यात में 9.6% योगदान प्रदेश में वस्त्र क्षेत्र से 22 लाख लोगों को रोजगार, जीडीपी में 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र में निजी निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभिन्न जिलों में वस्त्र एवं परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उत्पादों की समृद्ध धरोहर वाला राज्य है, जिसकी क्षमता का सही उपयोग होने पर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वस्त्र एवं परिधान का वैश्विक बाजार वर्ष 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इसमें 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते देशों में है। ऐसे परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की भागीदारी इस क्षेत्र में निर्णायक सिद्ध हो सकती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि माना और यही भाव इस योजना का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के माध्यम से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष वस्त्र एवं परिधान निर्यातक राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है। इस क्षेत्र का प्रदेश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत योगदान है, जबकि राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लगभग 22 लाख लोग इससे जुड़े हैं। वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। अधिकारियों ने बताया कि निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के लिए लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। कुल निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपये आंका गया है और इसके फलस्वरूप लगभग 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी। साथ ही बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों के विकास की भी व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र गति से क्रियान्वित करने हेतु भूमि की पहचान और विकास कार्य को तेज़ किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अथवा नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि निवेशकों को समयबद्ध और सुगम सुविधाएं प्राप्त हों। सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, विद्युत और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को इस योजना का मुख्य लक्ष्य बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना न केवल निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगी। बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों की उत्पादन लागत कम करने, आय बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुनकरों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुनकर, परिश्रम और परंपरा के प्रतीक हैं। उनके हाथों से बना कपड़ा पूरे विश्व में पहचान रखता है। सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है। बुनकरों से संवाद बनाकर उनकी अपेक्षाओं को जानने और समझने की आवश्यकता है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही के भी निर्देश दिए।