samacharsecretary.com

यूपीआईटीएस-2026 का समापन, यूपीएसडीएम को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन स्टॉल’ का पुरस्कार

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश की कला, कौशल और कारीगरी को वैश्विक मंच देने वाले उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो-2026 (यूपीआईटीएस) का मंगलवार को सफल समापन हो गया। पांच दिनों तक चले इस शो में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) का पवेलियन आकर्षण का केंद्र बना रहा और अंतिम दिन उसे बड़ी उपलब्धि हासिल हुई। यूपीएसडीएम को हॉल नंबर-7 में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन स्टॉल’ के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया। मिशन के स्टॉल की भव्यता, संवादात्मक प्रस्तुति और 16 कौशलों के जीवंत प्रदर्शन ने निर्णायकों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मिशन की ओर से सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। इस उपलब्धि पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रदेश के युवाओं के हुनर और टीम की मेहनत का परिणाम है। व्यापार शो के अंतिम दिन भी यूपीएसडीएम पवेलियन में रौनक बरकरार रही। अंतिम दिन डॉ. मालविका हरिओम ने अपनी टीम के साथ लोक गायन की शानदार प्रस्तुति दी। जैसे ही उनकी प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, पूरा पवेलियन सुरों से गूंज उठा और यह दौर देर शाम तक चलता रहा। खासतौर पर युवाओं ने लोकगीतों को खूब सराहा और उनके साथ गुनगुनाते नजर आए। इसके अलावा ‘हुनर मंच’ पर भी दिनभर शानदार प्रस्तुतियों का दौर जारी रहा। व्यापार शो में आए आगंतुकों ने हुनर मंच की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। साथ ही यूपीएसडीएम के स्टॉल पर पहुंचकर विभिन्न कौशलों को नजदीक से जाना और समझा। पांच दिनों तक चले इस व्यापार शो में यूपीएसडीएम ने प्रदेश के युवाओं के कौशल, रचनात्मकता और हुनर को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। मिशन के पवेलियन में लाइव कौशल प्रदर्शन, संवादात्मक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आगंतुकों को आकर्षित किया। यूपीआईटीएस-2026 के माध्यम से प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और कौशल को वैश्विक मंच मिला।

यूपीआईटीएस में काशी के स्वाद का जलवा, 100 किलो से ज्यादा बिकी लौंगलता और तिरंगा बर्फी

ग्रेटर नोएडा/वाराणसी उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार यूपी के पारंपरिक स्वाद भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बने हुए हैं। देशी-विदेशी खरीदारों, निर्यातकों और आगंतुकों ने बनारस के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा तो उनकी खूब सराहना की। काशी की मशहूर लौंगलता और तिरंगा बर्फी की ऐसी मांग रही कि 100 किलो से अधिक लौंगलता की बिक्री हो गई। वहीं, बनारसी पान के लाइव काउंटर पर भी देशी-विदेशी कारोबारियों और पान के शौकीनों की भीड़ नजर आई। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती और चंदौली के काला चावल ने भी लोगों का स्वाद जीता। एक जनपद-एक व्यंजन के कारोबारियों ने ट्रेड शो में योगी सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को भी सराहा। काशी की लौंगलता-तिरंगा बर्फी का चला जादू, 100 किलो से ज्यादा मिठाई की बिक्री उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में वाराणसी की प्रसिद्ध लौंगलता, तिरंगा बर्फी और बनारसी पान से जुड़े कुल चार उद्यमी ट्रेड शो में पहुंचे हैं। लौंगलता के कारोबारी चंद्रबली यादव ने बताया कि लोगों ने लौंगलता के स्वाद को खूब पसंद किया और करीब एक क्विंटल लौंगलता की बिक्री हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से लोगों का रुझान देखने को मिल रहा है, उससे आने वाले समय में और ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। वहीं, तिरंगा बर्फी के कारोबारी राजीव सिंह ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ट्रेड शो में इतनी अधिक बिक्री होगी।  जौनपुर की इमरती भी बनी लोगों की पसंद, एक क्विंटल बिकी जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती ने भी यूपीआईटीएस में अपनी अलग पहचान बनाई है। इमरती व्यवसायी आशीष गुप्ता ने बताया कि अब तक लगभग 100 किलो इमरती की बिक्री हो चुकी है। मांग इतनी अधिक रही कि इमरती कम पड़ गई। उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में सभी व्यवस्थाएं काफी अच्छी हैं और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी पूरा सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने कारोबारियों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए अच्छा मंच दिया है। ट्रेड शो में नए ग्राहकों और कारोबारियों से मुलाकात हुई है, जिससे आने वाले समय में व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। चंदौली के काला चावल-खीर का चढ़ा खुमार, 75 किलो काला चावल की बिक्री चंदौली का काला चावल और इससे तैयार की गई पौष्टिक खीर का जायका भी ट्रेड शो में लोगों को खूब भा रहा है। कारोबारी रामाश्रय कुमार पाल ने बताया कि काला चावल की खेती गो-आधारित प्राकृतिक तरीके से की जाती है, जो इसे पौष्टिक और सेहतमंद बनाती है। उन्होंने बताया कि यूपीआईटीएस में अब तक करीब 75 किलो काला चावल की बिक्री हो चुकी है। लोगों का इस खास उत्पाद के प्रति अच्छा रुझान देखने को मिला है और आगे भी ऑर्डर मिलने की संभावना है। रामाश्रय कुमार पाल ने बताया कि सरकार किसानों की हर स्तर पर मदद और सहयोग कर रही है।  लाइव काउंटर पर बनारसी पान का दिखा अलग अंदाज ट्रेड शो में बनारसी पान का लाइव काउंटर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देशी-विदेशी कारोबारी और आगंतुक यहां बनारसी पान का स्वाद लेते नजर आ रहे हैं। काशी के खानपान की पारंपरिक पहचान को एक ही मंच पर अलग-अलग उत्पादों के जरिए पेश किया जा रहा है, जिससे कारोबारियों को नए बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। पहली बार एक जनपद-एक व्यंजन को मिला मंच उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार एक जनपद-एक व्यंजन के तहत विभिन्न जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को भी प्रदर्शित किया गया है। एक जनपद-एक व्यंजन के तहत उद्यमियों को निशुल्क काउंटर उपलब्ध कराया गया है।

नीदरलैंड-जापान से टन में शहद की मांग, इटली ने ₹2 हजार प्रति किलो तक में मिलेट्स कुकीज का सौदा किया

ग्रेटर नोएडा/अमरोहा  ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' में अमरोहा के ग्रामीण हुनर और जैविक उत्पादों का डंका बज रहा है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल पर प्रदर्शित प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (ब्रांड नाम: किसान वेदा) के उत्पादों को विदेशी और घरेलू खरीदारों ने हाथों-हाथ लिया। कभी गांव की चौखट से शुरू हुआ यह सफर अब ट्रेड शो के मंच पर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गया है। इटली, ओमान और नीदरलैंड की कंपनियों ने बड़े निर्यात सौदों के लिए एमओयू किए हैं।  विदेशी खरीदारों को भाया नीम-मोरिंगा शहद, इटली ने ₹2,000 प्रति किलो के भाव में मांगी कुकीज ट्रेड शो में पहुंचे विदेशी खरीदारों के बीच हितेश चौधरी के एफपीओ द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक शहद और मिलेट्स कुकीज की सबसे अधिक मांग रही। ओमान, जापान और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडलों ने शहद के आयात के लिए आधिकारिक एमओयू किया है। नीदरलैंड के खरीदारों ने टन के हिसाब से बल्क सप्लाई की मांग रखी है, जबकि शुरुआत में 1,000 से 1,500 बोतलों के पहले बैच पर सहमति बनी है। वहीं, इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी से बनी कुकीज के लिए अनुबंध किया है, जिसके लिए ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो के भाव पर समझौता हुआ है। एफपीओ के सभी उत्पाद एपीडा और पीजीएस द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणित हैं। घरेलू कंपनियों और स्थानीय खरीदारों में भी उत्साह, बी2बी स्तर पर मिले अग्रिम ऑर्डर ट्रेड शो के बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) और बी2सी सत्रों में स्थानीय कारोबारियों ने भी खासा उत्साह दिखाया है। बागपत के प्रमुख एफपीओ और 'डॉक्टर मोरिंगा' सहित करीब 10 से 15 घरेलू कंपनियों और एफपीओ ने उत्पादों की आपूर्ति के लिए बातचीत पूरी कर ली है। इसके अलावा, नोएडा और दिल्ली-एनसीआर से पहुंचे परिवारों ने बड़ी संख्या में स्टॉल पर आकर खरीदारी की।  कमल ककड़ी का अचार और लेमनग्रास उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र प्रदर्शनी में आने वाले खरीदारों के लिए एफपीओ के नवाचारी उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सब्जी के रूप में खाई जाने वाली कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवले और लहसुन के पारंपरिक अचार को खरीदारों ने खूब पसंद किया। वहीं, दूध से 10 गुना अधिक कैल्शियम वाले मोरिंगा पाउडर, नीम शहद, मिलेट्स नमकीन, मल्टीग्रेन आटा तथा लेमनग्रास से तैयार टी, ऑयल, हैंड सैनिटाइजर और फिनाइल की भी जमकर बिक्री हुई। पूरी तरह हैंडमेड और केमिकल-मुक्त होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहरी उपभोक्ताओं ने इन उत्पादों को प्राथमिकता दी। 120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद और मल्टी क्रॉपिंग का मॉडल ट्रेड शो में पहुंचीं हितेश चौधरी ने बताया कि इन उत्पादों के पीछे 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत जुड़ी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में बदलाव लाते हुए उन्होंने कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे लाकर 120 हेक्टेयर में 'एडवांस ताइवान पिंक अमरूद' की खेती कराई। किसानों की आमदनी सुनिश्चित करने के लिए गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और मिलेट्स (रागी, ज्वार) की मल्टी क्रॉपिंग कराई जाती है। बाजार में बिचौलियों से बचाने के लिए एफपीओ खुद खरीदार बनता है। जैसे रागी का बाजार भाव यदि ₹60 प्रति किलो है, तो एफपीओ किसानों से ₹63 प्रति किलो की दर से खरीद करता है। शुरुआती दौर में पशुओं को खिलाना पड़ा तैयार माल, अब सालाना ₹50 लाख का कारोबार ट्रेड शो में मिली यह कामयाबी संघर्षों से निकलकर हासिल हुई है। एफपीओ शुरू करने से पहले हितेश एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका थीं और बच्चों को योग सिखाती थीं। वर्ष 2020 में उन्होंने एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी तथा गाय के गोबर के दीपक बनाने शुरू किए। 17 अप्रैल 2021 को उन्होंने निजी एफपीओ की स्थापना की। आज उनके एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर ₹50 लाख पहुंच चुका है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत आय ₹10 से 11 लाख है। इस वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ का टर्नओवर पार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी मंचों से मिला संबल, अब मोरिंगा बर्फी और हल्दी अचार की तैयारी कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत बने क्लस्टरों के माध्यम से हितेश किसानों और सखियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देती रही हैं। ट्रेड शो में मिली वैश्विक पहचान के बाद अब वह मोरिंगा के लड्डू, मोरिंगा की बर्फी और कस्तूरी, काली व सुगंधा हल्दी के साथ हल्दी का विशेष अचार लॉन्च करने जा रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा सराही जा चुकीं हितेश चौधरी का यह सफर ट्रेड शो के माध्यम से अब वैश्विक बाजार तक पहुंच रहा है। वर्जन “यह सब सरकार के सहयोग की ही देन है कि आज हम जैसे साधारण लोग इस अंतरराष्ट्रीय मुकाम पर पहुंचे हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हमारे एफपीओ के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। यहां कृषि विभाग के माध्यम से हमें स्टॉल मिला, जिसने सीधे विदेशी खरीदारों तक हमारी पहुंच बना दी। हैं।” — हितेश चौधरी, संस्थापक, प्रखंड बायो एनर्जी एफपीओ (किसान वेदा)

साढ़े पांच लाख आगंतुकों ने देखा पर्यटन पवेलियन, करीब 10 हजार यात्रा मार्गदर्शिकाओं और यात्रा कार्यक्रमों की रही मांग

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक संपदा और विविध पर्यटन अनुभवों ने यूपीआईटीएस-2026 में देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इस आयोजन में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का पवेलियन आगंतुकों के लिए महज पर्यटन स्थलों की जानकारी का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यात्रा की संभावनाओं, निवेश के अवसरों और पर्यटन क्षेत्र में सहयोग के नए द्वार खोलने वाला प्रभावी मंच बनकर उभरा। यूपीआईटीएस-2026 के दौरान करीब साढ़े पांच लाख आगंतुकों ने उत्तर प्रदेश पर्यटन के पवेलियन का भ्रमण किया। इस दौरान लगभग 10 हजार मुद्रित यात्रा मार्गदर्शिकाओं और यात्रा कार्यक्रमों की मांग रही। करीब 100 आगंतुकों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने निवेश और सहयोग से जुड़ी संभावनाओं में रुचि दिखाई, जबकि विभागीय अधिकारियों ने लगभग 20 टूर ऑपरेटरों के साथ उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों और विविध पर्यटन उत्पादों को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा की। प्रमुख गंतव्यों के साथ नए पर्यटन अनुभवों पर जोर पवेलियन में अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे देश-विदेश में प्रसिद्ध आध्यात्मिक एवं धार्मिक गंतव्यों के साथ-साथ नीब करौरी बाबा यात्रा मार्ग, कन्नौज की सदियों पुरानी इत्र विरासत, वन्यजीव एवं ईको-टूरिज्म को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से उत्तर प्रदेश की पर्यटन क्षमता को केवल चुनिंदा प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित न रखते हुए बहुआयामी और अनुभव आधारित पर्यटन के रूप में सामने रखा गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपनी पर्यटन विविधता को अनुभव आधारित यात्रा मार्गों के माध्यम से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है। यूपीआईटीएस में मिले रिस्पॉन्स से स्पष्ट है कि पर्यटक राज्य के प्रमुख गंतव्यों के साथ-साथ अन्य जिलों और नए पर्यटन अनुभवों को जानने तथा देखने में भी रुचि ले रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि इस रुचि को प्रदेश के अधिक से अधिक जिलों तक पहुंचाया जाए, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन मिले और पर्यटन के माध्यम से व्यापक आर्थिक अवसरों का सृजन हो। डिजिटल माध्यम से यात्रा योजना को मिला नया आयाम पर्यटन पवेलियन में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग ने भी आगंतुकों को आकर्षित किया। क्यूआर कोड आधारित डिजिटल सामग्री को करीब 500 लोगों ने एक्सेस किया। इसके माध्यम से आगंतुकों को विभिन्न पर्यटन स्थलों और यात्रा मार्गों से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध हुई। मुद्रित यात्रा मार्गदर्शिकाओं के साथ डिजिटल सामग्री ने संभावित पर्यटकों को भविष्य की यात्राओं की योजना बनाने के लिए उपयोगी और व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई। निवेशकों और पर्यटन उद्योग के लिए खुली संभावनाएं पवेलियन में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े निवेश और सहयोग के अवसरों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। हॉस्पिटैलिटी परियोजनाओं, गंतव्य विकास, पर्यटक सुविधाओं और अनुभव आधारित पर्यटन से संबंधित संभावनाओं पर निवेशकों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद हुआ। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से पर्यटन अवसंरचना और सेवाओं के विस्तार में संभावित सहयोगियों को उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी गई। आयोजन के दौरान प्राप्त निवेश एवं सहयोग संबंधी पूछताछ और प्रस्तावों को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित टीमों को भेजा गया है। इससे यूपीआईटीएस में उत्पन्न कारोबारी रुचि को प्रदेश में पर्यटन परियोजनाओं और नई साझेदारियों में परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि पर्यटन पवेलियन ने एक साथ आगंतुक सहभागिता केंद्र और पर्यटन व्यापार मंच की भूमिका निभाई। करीब 10 हजार यात्रा कार्यक्रमों का वितरण, डिजिटल माध्यमों से जुड़ाव, निवेश संबंधी पूछताछ तथा टूर ऑपरेटरों के साथ हुई चर्चाओं ने आगे की कार्ययोजना के लिए उपयोगी आधार तैयार किया है। विभाग का उद्देश्य यूपीआईटीएस के दौरान उत्पन्न रुचि को वास्तविक यात्राओं, नए पर्यटन उत्पादों और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक साझेदारियों में बदलना है। तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम उत्तर प्रदेश पर्यटन पवेलियन में भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज लीला पर आधारित आभासी वास्तविकता प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके माध्यम से आगंतुकों को ब्रज की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का ऐसा अनुभव कराया गया, जिसने तकनीक और विरासत के बीच सुंदर समन्वय स्थापित किया। संवर्धित एवं आभासी वास्तविकता आधारित अन्य प्रस्तुतियों ने भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों की जीवंत झलक आगंतुकों के सामने रखी। इंटरैक्टिव मैग्नेटिक फील्ड गेम, क्विज, सिनेमाई फोटो बूथ और थीम आधारित सेल्फी जोन ने भी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। बच्चों से लेकर विद्यार्थियों, युवाओं, परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों तक ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रकार पर्यटन जानकारी को केवल प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय उसे सहभागिता और अनुभव से जोड़ा गया। कला, शिल्प और स्वाद ने बढ़ाई पवेलियन की रौनक पवेलियन में लाइव जरदोजी कढ़ाई के प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक शिल्पकला की बारीकियों से आगंतुकों को रूबरू कराया। वहीं कन्नौज के इत्र ने प्रदेश की सुगंधित विरासत और सदियों पुरानी इत्र निर्माण परंपरा को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। मार्बल डस्ट से निर्मित उत्पादों ने भी आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। इस तरह स्थानीय शिल्प, कला और उत्पादों को प्रदेश के पर्यटन अनुभव से जोड़ने का प्रभावी प्रयास किया गया।  

ट्रेड शो में युवाओं ने विभिन्न पुस्तकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समझा

ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का पवेलियन पांच दिनों तक युवाओं के ज्ञान, करियर और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का केंद्र बना रहा। पुस्तकों की प्रदर्शनी से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सामग्री और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को डिजिटल माध्यम से देखने का अवसर युवाओं को मिला। यही वजह रही कि पवेलियन पर दिनभर युवाओं की आवाजाही बनी रही। किताबों में करियर की राह, ज्ञान में बढ़ा भरोसा पवेलियन में भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीतिक विज्ञान, उभरते भारत, उभरते उत्तर प्रदेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकों ने युवाओं का ध्यान खींचा। कई युवा किताबें लेकर वहीं बैठकर पढ़ते दिखाई दिए तो कुछ ने पसंद आई पुस्तकों के प्रकाशकों की जानकारी अपने मोबाइल में दर्ज की। उत्तर प्रदेश वार्षिकी जैसी पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खास आकर्षण रहीं। सिकंदराबाद से आईं पीसीएस अभ्यर्थी निधि यादव ने बताया कि उनकी क्लासमेट ने उन्हें ट्रेड शो में उपलब्ध उत्तर प्रदेश वार्षिकी के बारे में बताया था। इसी पुस्तक को देखने और लेने के लिए वह विशेष रूप से यहां पहुंचीं। उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उत्तर प्रदेश से जुड़े सामान्य ज्ञान की प्रमाणिक सामग्री उपयोगी रहती है। पवेलियन में बनारस तेरे रंग हजार, योगी का राम राज्य, लोक आराधना की अभिव्यक्ति, तीर्थनामा अयोध्या, न्यू यूपी फॉर ए न्यू इंडिया और विकसित यूपी विकसित भारत जैसी पुस्तकों में भी युवाओं ने रुचि दिखाई। सेल्फी से संस्कृति और विरासत से जुड़ा युवा युवाओं के बीच पवेलियन का सेल्फी जोन भी खास आकर्षण रहा। राम मंदिर अयोध्या, वाराणसी का नमो घाट, वृंदावन का प्रेम मंदिर और सारनाथ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को बैकग्राउंड में चुनकर युवाओं ने सेल्फी ली। इलेक्ट्रॉनिक ग्लोब के माध्यम से युवाओं और बच्चों को उभरते भारत और उभरते उत्तर प्रदेश की तस्वीर भी प्रस्तुत की गई। इलेक्ट्रॉनिक ग्लोब के साथ भी युवाओं और बच्चों में सेल्फी लेने का क्रेज रहा। भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई युवाओं को अपनी बारी के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। सेल्फी लेने के बाद सूचना विभाग की ओर से उन्हें उपहार भी दिए गए। इस तरह पांच दिनों में पवेलियन ने सूचना देने की पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर युवाओं को किताबों के जरिए ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सामग्री, प्रदेश की संस्कृति और डिजिटल माध्यम से अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर दिया। ट्रेड शो में युवाओं की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि मनोरंजन के साथ ज्ञान और करियर से जुड़ी सामग्री को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जाए तो युवा उसमें सक्रिय रुचि लेते हैं।

यूपी से मानसून की वापसी तेज, पूर्वी जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट

लखनऊ  भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आज जारी ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों से वापस लौट रहा है। मानसून की वापसी की रेखा वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के अनुसार, निचले क्षोभमंडल के स्तर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी हवा का साइक्लोन सर्कुलेशन बना हुआ है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से राज्य के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्वी यूपी में हल्की बारिश की संभावना 29 और 30 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मीरजापुर, सोनभद्र और आजमगढ़ समेत कुछ जिलों में हल्की या छिटपुट बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के दौरान मौसम के मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। पश्चिमी यूपी में ऐसा रहेगा मौसम का हाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कब होगी मानसून की विदाई देश में मानसून की विदाई अब शुरू हो चुकी है। मानसून के पीछे हटने के कारण आने वाले दिनों में राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बदलाव देखा जा सकता है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में मानसून के पूरी तरह खत्म होने के आसार हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम के शुष्क रहने के दौरान वे अपनी फसलों की देखभाल और कटाई का कार्य योजनाबद्ध तरीके से करें।  

दुनिया में यूपी की बढ़ती साख का प्रतीक बना इंटरनेशनल ट्रेड शो : भूपेंद्र चौधरी

ग्रेटर नोएडा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक और कारोबारी साख का प्रतीक बन गया है। देश-विदेश से आए उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और खरीदारों को एक मंच मिलने से उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो का समापन दरअसल प्रदेश के उद्यमियों के लिए नए अवसरों की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि ओडीओपी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान और मुख्यमंत्री युवा योजना जैसी योजनाएं प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति दे रही हैं। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, बेहतर कानून-व्यवस्था, सिंगल विंडो सिस्टम और उद्योगों के लिए प्रोत्साहन नीतियों से उत्तर प्रदेश को उद्यम प्रदेश के रूप में स्थापित करने में मदद मिली है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान में भी प्रदेश लगातार टॉप एचीवर' के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के प्रयास से यहां की योजनाएं रोल मॉडल बन गई हैं। आज दुनिया में योगी के कानून के मॉडल की चर्चा होती है। पिछले नौ वर्षों में झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ और आगरा में डिफेंस कॉरिडोर से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रेटर नोएडा डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत लाखों युवाओं को बिना गारंटी और बिना ब्याज के ऋण दिया गया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। भूपेंद्र चौधरी ने ट्रेड शो में शामिल पार्टनर देशों वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रेलिया और बेलारूस के प्रतिनिधियों, देश-विदेश से आए बिजनेस लीडरों, उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों का स्वागत कर आभार व्यक्त किया। यूपीआईटीएस बना यूपी के हुनर को ग्लोबल बाजार तक पहुंचाने का मंच : नंदी औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 प्रदेश की नई आर्थिक पहचान का उत्सव है। चार साल पहले शुरू हुआ यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और बुनकरों के उत्पादों को घरेलू बाजार से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस बार ट्रेड शो में 90 देशों के 600 से अधिक विदेशी बायर्स ने हिस्सा लिया। जापान, रूस, वियतनाम, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल हुए। इससे उत्तर प्रदेश की कारोबारी संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला। नंदी ने कहा कि यूपीआईटीएस में बनारस की साड़ी, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन और लखनऊ की चिकनकारी समेत प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प को आधुनिक बाजार, तकनीक और ब्रांडिंग से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल को ग्लोबल बनाने के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल वातावरण से उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, हस्तशिल्प और निर्यात की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूपीआईटीएस इस योगदान को और विस्तार देने का मजबूत मंच बन रहा है

योगी सरकार के निवेश, निर्यात और ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक बाजार से जोड़ने का अहम मंच बनकर उभरा आईईएमएल

ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (आईईएमएल) में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण का मंगलवार शाम समापन हो गया। वर्ष 2023 में शुरू हुआ यह आयोजन अब उत्तर प्रदेश के उद्योग, उद्यमिता, निर्यात और वैश्विक कारोबार को एक मंच पर लाने वाले प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में अपनी पहचान बना चुका है। वर्ष 2003 में स्थापित इंडिया एक्सपो मार्ट पिछले चार वर्षों में यूपी के उत्पादों और उद्यमियों को देश-दुनिया के खरीदारों, निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर के बीच इंडिया एक्सपो मार्ट अब केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रेड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुआ है। प्रदेश में निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विकसित एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक ट्रेड इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ऐसे प्लेटफॉर्म उत्तर प्रदेश के उत्पादों और उद्यमियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2003 में रखी नींव, 2026 में बना वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड का गठन 12 अप्रैल 2001 को हुआ। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा स्थित परिसर की आधारशिला रखी गई और 2006 में इसका उद्घाटन हुआ। शुरुआत में स्थायी मार्ट और प्रदर्शनी अवसंरचना के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया। समय के साथ यहां स्थायी शो-रूम, बड़े प्रदर्शनी हॉल, बिजनेस मीटिंग स्पेस, हॉस्पिटैलिटी और आयोजन संबंधी सुविधाएं विकसित होती गईं। आज यह परिसर विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध कराता है। योगी सरकार के ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक मंच उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले वर्षों में ओडीओपी, निर्यात प्रोत्साहन, एमएसएमई, स्टार्टअप, निवेश और रोजगार को आर्थिक विकास के प्रमुख आधारों के रूप में आगे बढ़ाया है। इस पूरी रणनीति में ऐसे ट्रेड प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां यूपी के उत्पाद सीधे देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंच सकें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का बड़ा माध्यम बन गया है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश के ओडीओपी, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उत्पादों, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। यूपीआईटीएस ने बढ़ाया ग्लोबल कनेक्ट वर्ष 2025 के यूपीआईटीएस में 2,200 से अधिक प्रदर्शकों और 80 से अधिक देशों की भागीदारी दर्ज की गई। आयोजन के दौरान 288 एमओयू हुए, जिनका कुल घोषित मूल्य लगभग 89 करोड़ रुपये था। 2026 में यूपीआईटीएस का विस्तार और व्यापक हुआ। चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शक, 90 देशों की भागीदारी और 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने इसे प्रदेश के बढ़ते वैश्विक व्यापार संपर्क का बड़ा मंच बना दिया है। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के उत्पादों के साथ-साथ छह साझेदार देशों- वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस की भागीदारी भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते दायरे को दर्शाती है। ‘लोकल से ग्लोबल’ तक पहुंच रहा यूपी योगी सरकार की नीतियों में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहा है। यूपीआईटीएस इसी दिशा में एक व्यावहारिक प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया है। इंडिया एक्सपो मार्ट के स्थायी मार्ट में 31 जुलाई 2026 तक 1,800 शो-रूम और 774 निर्यातकों की मौजूदगी दर्ज की गई। इससे पूरे वर्ष खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है। मार्ट सोर्सिंग डेज जैसे आयोजनों के जरिए खरीदार प्रमुख प्रदर्शनियों के बाहर भी उत्पादों और आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ सकते हैं। इस प्रकार ट्रेड कनेक्ट केवल पांच-दिन के किसी आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सालभर चलने वाली व्यावसायिक गतिविधि में बदल जाता है। 16 प्रदर्शनी हॉल, 76 हजार वर्गमीटर से अधिक ऑपरेशनल एरिया इंडिया एक्सपो मार्ट ने मांग के अनुरूप लगातार अपनी क्षमता बढ़ाई है। 31 मार्च 2024 तक जहां 14 प्रदर्शनी हॉल संचालित थे, वहीं 31 मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 16 हो गई। इसी अवधि में ऑपरेशनल हॉल क्षेत्रफल 64,888 वर्गमीटर से बढ़कर 76,484 वर्गमीटर हो गया, लगभग 17.87 प्रतिशत की वृद्धि। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख निवेश और औद्योगिक केंद्रों में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। दुनिया के प्रमुख सेक्टर एक ही परिसर में इंडिया एक्सपो मार्ट का विस्तार केवल आकार में नहीं, बल्कि सेक्टरों की विविधता में भी हुआ है। यहां हस्तशिल्प और होम डेकोर से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, फूड, हॉस्पिटैलिटी, पैकेजिंग और औद्योगिक तकनीक तक के आयोजन होते हैं। आईएचजीएफ दिल्ली फेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया एक्सपो, बैटरी शो इंडिया, सीपीएचआई एंड पी – एमईसी इंडिया और इंडस फूड जैसे बड़े आयोजनों ने इसे विभिन्न उद्योगों के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मंच बनाया है। यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलने वाला बहुआयामी लाभ इंडिया एक्सपो मार्ट का प्रभाव केवल प्रदर्शनी में शामिल कंपनियों तक सीमित नहीं है। बड़े आयोजनों से होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्टॉल निर्माण, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं और अन्य स्थानीय व्यवसायों के लिए मांग पैदा होती है।  

2023 में शुरू उत्तर प्रदेश अंतरराषट्रीय व्यापार मेले ने यूपी को दिलाई नई पहचान: शशि भूषण लाल सुशील

ग्रेटर नोएडा  वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में शुरू हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक विरासत, निवेश, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। यूपीआईटीएस-2026 के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि “यूपी डिड इट”, यानी उत्तर प्रदेश ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में प्रदेश के कारीगरों को केवल उत्पादों की बिक्री का अवसर नहीं मिला, बल्कि देश-विदेश से आए खरीदारों से ग्राहक प्रतिक्रिया और बाजार का अनुभव भी मिला। इससे उन्हें डिजाइन और उत्पाद विकास को ग्राहक-केंद्रित बनाने तथा भविष्य में स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने में मदद मिलेगी। आयोजन में युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्हें स्वरोजगार योजनाओं के साथ मशीनों के उपयोग और व्यवसाय संचालन की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को उद्योग विस्तार तथा निर्यातकों को नए देशों और नए उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं से अवगत कराया। संबंधित विभागों के मंत्रियों ने भी इन सत्रों में समय देकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। ओडीओसी से सामने आई यूपी की समृद्ध पाक विरासत प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश को स्वयं को जानने और देश-दुनिया को उत्तर प्रदेश को जानने का अवसर दिया। एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से ऐसे पारंपरिक व्यंजन सामने आए, जिनके बारे में अनेक लोग पहली बार जान पाए। इससे प्रदेश की सदियों पुरानी पाक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के खरीदारों और प्रतिनिधिमंडलों तक पहुंचाने का अवसर मिला। एआई पर व्यावहारिक प्रयोग एआई पर अपने विचार रखते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि मानव ने पहले शारीरिक श्रम और फिर कई अन्य कार्य मशीनों को सौंपे और अब सोचने की प्रक्रिया भी एआई को सौंपने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने इसके संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताते हुए जानकारी दी कि उन्होंने सीएम युवा योजना के तहत मुजफ्फरनगर और बदायूं के तीन युवा उद्यमियों को एआई आधारित बिक्री सेवा से जोड़कर इसका व्यावहारिक परीक्षण शुरू कराया है। इससे पता चलेगा कि एआई उनकी बिक्री और कारोबार को बढ़ाने में कितनी मदद करता है। यूपीआईटीएस ने उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ा कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि यूपीआईटीएस के चार संस्करणों ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ प्रदेश के उद्यमियों और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने का काम किया है। इस आयोजन के माध्यम से उत्पादों की बिक्री के साथ उद्यमियों को ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग और उत्पादों में आवश्यक बदलाव की जानकारी भी मिली, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार कर सकेंगे। यूपीआईटीएस में युवाओं और नए उद्यमियों को स्वरोजगार, उद्योग संचालन और तकनीक के माध्यम से कारोबार विस्तार की जानकारी मिली। तकनीकी सत्रों और विशेषज्ञों के संवाद से निर्यात एवं कारोबार बढ़ाने के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। यूपीआईटीएस केवल व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के उत्पादों, उद्यमिता, कौशल और नवाचार को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला मंच बन चुका है। सीएम योगी ने लगातार की समीक्षा बैठकें: राकेश कुमार इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के चेयरमैन राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो अब प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को देश-दुनिया के खरीदारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण की सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर दिशा-निर्देशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति तथा प्रदेश के मंत्रियों भूपेंद्र चौधरी, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ और राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग की भी सराहना की। राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा प्रदेश की पहचान और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना ने स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में वस्त्र क्षेत्र में हो रहे प्रयासों तथा ‘भारत टेक्स’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ के विजन के अनुरूप भारत का वस्त्र उद्योग उत्पादन से निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, हस्तशिल्प और उद्यमिता क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

तटबंध का कुछ हिस्सा टूटने से बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

कुशीनगर  नेपाल से अधिक पानी आने के चलते कुशीनगर जिले में सोमवार देर रात जवहीं दयाल (चैनपट्टी) के ततवा टोला के पास नारायणी नदी के एपी तटबंध का कुछ हिस्सा टूटने के बाद स्थिति का निरीक्षण करने और पानी से घिरे गांवों के प्रभावितों की मदद के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की, लंच पैकेट और राहत सामग्री का वितरण किया और सबको आश्वस्त किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ मुस्तैदी से खड़ी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जलशक्ति मंत्री और सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया कि स्थिति सामान्य होने के बाद नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन का कार्य कराया जाए ताकि तटबंध और इसके आसपास के गांव सुरक्षित रहें। सोमवार रात तटबंध टूटने की जानकारी होने के बाद से ही सीएम योगी, हालात पर नजर बनाए रखने के साथ ही अधिकारियों को दिशानिर्देश देते रहे। मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा समाप्त होते ही खुद भी मौके पर आ गए। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण कर तटबंध और इसके कुछ हिस्से के टूटने से प्रभावित हुए क्षेत्रों का जायजा लिया। तटबंध के गांवों में जाकर ग्रामीणों से मुलाकात की। ऊंचे स्थानों पर शरण लिए ग्रामीणों के बीच जाकर उन्होंने लंच पैकेट और बच्चों को चॉकलेट वितरित किए। इसके बाद वह सेवरही क्षेत्र के इंटर कॉलेज बेदुपार पहुंचे और बाढ़ प्रभावित लोगों का दुख दर्द साझा करते हुए राहत सामग्री का वितरण किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ हैं। राहत सामग्री का वितरण करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि चार दिनों तक मूसलाधार बारिश के बाद प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों में त्रासदी का सामना करना पड़ा है। जैसे-तैसे चार दिन व्यतीत हुए लेकिन नेपाल में अतिवृष्टि होने से भारी पैमाने पर जल नीचे आ गया। सामान्य दिनों में तीन से चार लाख क्यूसेक पानी नारायणी में आता है लेकिन कल अचानक यह साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी आ गया। इसके कारण एपी तटबंध से सटे कई गांवों में पानी आ गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जानकारी होते ही तत्काल ही बचाव और राहत कार्य बड़े पैमाने पर शुरू कर दिए गए। यहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमों के साथ ही पीएसी की फ्लड यूनिट को भी लगाया गया है। प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी कल से ही राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी रात में ही यहां आ गए। इसके साथ ही सांसद देवरिया शशांक मणि त्रिपाठी, सांसद कुशीनगर विजय दूबे, विधायक डॉ. असीम कुमार और सुरेंद्र कुशवाहा भी लगातार सहयोग करने में जुटे हुए हैं। सीएम योगी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार सभी पीड़ितों के साथ है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए 5000 पैकेट राहत सामग्री की व्यवस्था कर दी गई है। इस राहत सामग्री में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 2 किलो दाल, आलू, लाई, चना, तेल, मसाला, नमक, बाल्टी सहित कुल 35 आइटम हैं, जिनका वजन 50 किलो है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह तय किया है कि भरपूर सहायता देने के साथ ही जनहानि पर तत्काल चार लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। जिनके मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत तत्काल एक नया आवास उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। जिनके क्षतिग्रस्त मकान मरम्मत योग्य हैं, उन्हें भी मरम्मत के लिए धनराशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15-16 गांवों में बड़े पैमाने पर धान, गन्ना, सब्जी जैसी फसलों के नुकसान होने की आशंका है। इसे लेकर प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे कराकर 10 दिनों में मुआवजा उपलब्ध करा दिया जाए। बाढ़ के चलते जो सड़कें खराब हैं उनके भी मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने पर एपी तटबंध को मजबूत करने के लिए निर्देश दिए गए हैं ताकि यह फिर से न टूटने पाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को क्षेत्र में अगले 5-6 दिनों तक लगातार मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही यह निर्देश भी दिए गए हैं कि सभी पीएससी, सीएससी में एंटी स्नेक वेनम और एंटी रैबीज वैक्सीन देने की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति की जान हमारे लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जलशक्ति मंत्री और प्रमुख सचिव सिंचाई को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है कि स्थिति सामान्य होने के बाद नारायणी नदी की ड्रेसिंग कर उसे चैनेलाइज किया जाए। इससे नदी अपनी राह खुद बना लेगी और यह क्षेत्र सुरक्षित हो जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, कुशीनगर के सांसद विजय दूबे, विधायक डॉ. असीम कुमार, सुरेंद्र चौरसिया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।