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पुरनिया अग्निकांड: गेमिंग जोन वाली इमारत में आग से 14 की मौत, जांच के आदेश

लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को हुई भीषण आग की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है. घटना के समय इमारत में अचानक आग लगी और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं और लपटों से घिर गई. आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए. शुरुआत में इस घटना को कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इमारत में न तो कोई कोचिंग सेंटर संचालित था और न ही कोई लाइब्रेरी चल रही थी. अधिकारियों के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी मंजिल पर गेमिंग जोन संचालित था, जहां कर्मचारी गेमिंग सॉफ्टवेयर पर काम करते थे. आग लगने के बाद ऊपरी मंजिल पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई. कुछ लोगों के बाथरूम में फंसे होने की अपुष्ट सूचना भी सामने आई थी, लेकिन बाद में राहत और बचाव कार्य के दौरान सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में सहयोग किया. आग की भयावहता इतनी अधिक थी कि कई लोग इमारत से बाहर निकलने के लिए छज्जों और अन्य हिस्सों का सहारा लेते नजर आए. एक शख्स ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है. फिलहाल कूलिंग ऑपरेशन जारी है ताकि दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे. घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे. उन्होंने घायलों के समुचित उपचार और प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी घटनास्थल की जानकारी ली और राहत कार्यों की निगरानी की. उन्होंने बताया कि मृतकों की संख्या 12 तक पहुंच चुकी है और सभी की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब मामले में और सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव गृह (ACS Home) को तत्काल मौके पर जाकर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस पूरे मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दी जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों पर कार्रवाई कर पीड़ित परिवारों के प्रति न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और संवेदना व्यक्त की जाएगी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है. पीएमओ ने कहा है कि मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी. लखनऊ पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राहत एवं बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन हर पहलू पर नजर बनाए हुए है.

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर बड़ी कार्रवाई, लाइसेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक होगा रद्द

लखनऊ यूपी में वाहनों से हो रहे लगातार हादसों को रोकने के लिए यूपी सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ये कदम वाहन मालिकों की बेचैनी बढ़ा सकती है। जिन वाहनों से सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं उन्हें जब्त करके उन्हें कंडम घोषित किया जाएगा। शासन की सख्ती के बाद परिवहन अधिकारियों को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वाहन चालक का लाइसेंस निलंबित, निरस्त करने के साथ रजिस्ट्रेशन भी रद्द किए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन रद्द होने का मतलब वाहन को स्क्रैप कराना ही होगा। प्रदेश में सड़क हादसों और मौतों के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024 में 24118, 2025 में 27205 और जनवरी से मई 2026 तक 2782 मौतें हो चुकी हैं जबकि समान अवधि में वर्ष 2025 में 2773 मौतें हुई थी। बढ़ रहीं दुर्घटनाएं और मौतों को लेकर शासन चिंतित है। शासन ने निर्देश दिया है कि हर स्तर पर प्रयास किए जाएं। रोड सेफ्टी से जुड़े हर विभाग को काम करना होगा। सीएम योगी ने मीटिंग में हादसों पर चिताई थी चिंता पिछले दिनों सड़क सुरक्षा की बैठक में मुख्यमंत्री ने मौतों के आंकड़ों पर चिंता जताई और रोड सेफ्टी से जुड़े सभी विभागों को इसमें कमी लाने के निर्देश दिए थे। यह भी कहा गया है कि ऐसा लगता है कि सड़क सुरक्षा के स्टेक होल्डर्स विभाग अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं। एक ही वाहन के बार-बार दुर्घटना का कारण बनने पर चालकों के लाइसेंस निलंबित, निरस्त करने के आदेश दिए गए थे लेकिन अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि बार-बार दुर्घटना करने वाले वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित, निरस्त किया जाए। साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर उसे जब्त कर लिया जाए और नियमानुसार स्क्रैप करने की कार्रवाई की जाए। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना पड़ेगा भारी वैसे भी मोटर व्हीकल्स अधिनियम-1988 की धारा 53 व 54 के तहत परिवहन अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि ट्रैफिक नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का लाइसेंस निलंबित किया जाए, सुधार न होने पर निरस्त कर दिया जाए। इसी अधिनियम की धारा-55 में यह प्रावधान है कि वाहन के रिकार्ड चेक किए जाएं यदि कई दुर्घटनाओं में शामिल रहा और जानमाल के नुकसान की वजह बन रहा है तो आरसी निरस्त कर कंडम घोषित कर दिया जाए। कबाड़ घोषित करते ही वाहन स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा। इधर बीच परिवहन अधिकारियों ने धारा-19 का इस्तेमाल करते हुए बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए हैं लेकिन आरसी रद्द करने की कार्रवाई कम ही की गई।

अलीगंज के पुरनिया इलाके में आग से हड़कंप, कई लोगों के फंसे होने की आशंका

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक दुकान में अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरी इमारत धुएं और लपटों की चपेट में आ गई. दुकान के ऊपर एक कोचिंग सेंटर चल रहा था, जिसकी वजह से स्थिति काफी भयानक हो गई. आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों के बीच दहशत फैल गई. धुएं और आग की लपटों ने पूरी इमारत को घेर लिया, जिससे अंदर मौजूद लोगों के सामने बाहर निकलने की चुनौती खड़ी हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हालात इतने गंभीर हो गए कि कुछ लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इमारत के छज्जों और छत से छलांग लगानी पड़ी. आग और धुएं के बीच फंसे लोगों को देखकर आसपास मौजूद लोगों में भी चिंता बढ़ गई. घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए. स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी दौरान दमकल विभाग और पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई. सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. आग का धुआं बना खतरा, इमारत में मची चीख-पुकार दमकल कर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. वहीं पुलिस और अन्य बचाव दल इमारत के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे हुए हैं. पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों को इलाज उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रशासन को हर स्तर पर सतर्कता बरतने को कहा गया है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए. मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए हैं. सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास जारी है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है. अलीगंज के पुरनिया इलाके में हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल

भीषण गर्मी से बढ़ा बिजली का लोड, यूपी में मांग ने तोड़ा देश का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ यूपी में बिजली आपूर्ति की अधिकतम मांग ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। रविवार देर रात बिजली की अधिकतम मांग ने 32348 मेगावॉट का नया आंकड़ा छू लिया। यह देश में अब तक की अधिकतम मांग का रिकॉर्ड है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे लेकर पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की अधिकतम मांग इस साल 13 मई को 32317 मेगावॉट गई थी। यह अब तक देश की अधिकतम मांग थी। यूपी ने रविवार को इस मांग को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एके शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए जनता और बिजली विभाग के सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। चढ़ते पारे से एक बार फिर बिजली की मांग में बेतरतीब इजाफा दर्ज किया जा रहा है। तकरीबन 10 दिनों के बाद बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 31 हजार मेगवॉट के पार चली गई है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच चार पावर प्लांट ठप रहे, जिसकी वजह से बिजली के इंतजाम एक्सचेंज व अन्य स्रोतों से करना पड़ा। वहीं, बढ़ते लोड से बिजली फॉल्ट की संख्या भी बढ़ी है। बिजली की आवाजाही से जनता परेशान रही। बढ़ी हुई मांग की आपूर्ति बनाए रखना चुनौती जानकारों की मानें तो मौसम देखते हुए अभी बिजली की मांग में इजाफा दर्ज होगा। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बनाए रखना पावर कॉरपोरेशन के लिए चुनौती से कम नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं के संयोजित भार और ट्रांसफॉरमरों के भार में करीब 2 करोड़ किलोवॉट का अंतर है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे कहते हैंकि उमस भरे मौसम में बिजली की मांग और भी बढ़ती है। ऐसे में अभी दर्ज हो रही मांग से ज्यादा अधिकतम मांग वाला समय मॉनसून में आएगा। निर्बाध आपूर्ति के लिए बेहतर होगा कि छांटे गए संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाए। इससे बिजली फॉल्ट जल्दी ठीक किए जा सकेंगे। और लोग कम परेशान होंगे। शनिवार-रविवार रात 31509 मेगावॉट तक पहुंच गई थी मांग शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात को करीब 1.30 बजे बिजली की अधिकतम मांग 31509 मेगावॉट पहुंच गई। वहीं, न्यूनतम मांग का आंकड़ा भी 24369 मेगावॉट दर्ज किया गया। इसके पहले 10 जून को बिजली की अधिकतम मांग 31894 मेगावॉट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद से मौमस में नर्मी थी तो बिजली की मांग भी कम पड़ी थी। अब एक बार फिर मौसम तप रहा है और बिजली की मांग बढ़ रही है। मांग बढ़ने की वजह से ट्रांसफॉर्मरों पर लोड़ बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) जलने, केबल जल जाने और ट्रांसफॉर्मर फुंक जाने जैसी घटनाएं हो रही हैं। इस तरह के फॉल्ट की संख्या में बीते दो दिनों में इजाफा दर्ज किया गया है। ऐसे में बिजली की आवाजाही उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनी हुई है। गर्मी में फॉल्ट की वजह से आपूर्ति बाधित होने से लेाग आक्रोशित हैं। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही उत्पादन इकाइयों के ठप होने से बिजली की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन! 21 साल पुराने सपा कार्यालय पर चला बुलडोजर

सीतापुर  यूपी के सीतापुर में सुबह-सुबह समाजवादी पार्टी के ऑफिस में योगी सरकार का बुलडोजर गरजा। टॉउन हॉल परिसर में 21 साल पहले नजूल भूमि पर बना कार्यालय चार बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होने पर दो दिन पहले सपा कार्यालय खाली कर दिया गया था। टाउन हॉल परिसर की नजूल भूमि को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल ने नियम विरुद्ध 15 जनवरी 2005 को समाजवादी पार्टी के कार्यालय संचालन के लिए आवंटित किया था। जिसका वार्षिक किराया केवल 100 रुपये था। आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध होने पर पूर्व में नगर पालिका ने उक्त आवंटन को निरस्त कर दिया था। आवंटन निरस्त होने के बाद भी सपा कार्यालय नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था। बीते आठ जून को जिलाधिकारी न्यायालय ने नोटिस जारी कर कार्यालय को 15 दिन के भीतर खाली करने का आदेश जारी किया गया था। प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। तय समय पूरा होने के पहले ही सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने लगभग दो दिन पहले ही कार्यालय खाली कर दिया। कार्यालय खाली होने के बाद सोमवार इसके बाद सोमवार सुबह ही प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर समाजवादी पार्टी कार्यालय पर पहुंच गए। समाजवादी पार्टी कार्यालय की बिल्डिंग को बुलडोजर की मदद से जमीदाज कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सपा कार्यालय को दिया गया था नोटिस नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह ने कहा कि नियमों के तहत संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद भूमि को खाली कराया गया, क्योंकि उस पर अवैध कब्जा था। यहां एक पार्टी कार्यालय संचालित हो रहा था। प्रशासन का उद्देश्य इस भूमि को कब्जामुक्त कराकर सरकारी महाविद्यालय के निर्माण के लिए सुरक्षित करना है। बागपत में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर उधर, बागपत के राजपुर खामपुर गांव में न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बनी करीब 40 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। राजपुर खामपुर गांव में तकिए वाली मस्जिद है। करीब पांच साल पहले गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है। शिकायत के अनुसार तालाब की जमीन पर करीब 40 साल पहले मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। अब न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस और राजस्व विभाग की टीम के साथ शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान गांव में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की जांच तेज, शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हो सकती है FIR

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अपनी अंतरिम रिपोर्ट आज देर शाम तक सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, अंतरिम रिपोर्ट पूरी हो चुकी है। इसे आज शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय को सौंपा जा सकता है। 15 दिन बाद फाइनल रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के चढ़ावे में धांधली की जांच के लिए गठित एसआईटी सोमवार को प्रारम्भिक रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। रिपोर्ट पूरी करने के लिए शासन से नामित वरिष्ठ जांच अधिकारी भले शनिवार शाम लखनऊ चले गए, लेकिन उनका स्टाफ देर रात तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर के पीएफसी में कार्यरत रहा। यह टीम रविवार को भी पूरी सक्रियता से काम करती रही। 15 दिनों के बाद फाइनल रिपोर्ट सौंपी जाएगी। द्वितीय चरण की जांच एसआईटी सोमवार से शुरू करेगी। एसआईटी की प्रारम्भिक रिपोर्ट पर होगा मुकदमा टीम ने रिपोर्ट में शामिल लोगों के बयान में हुई भूल-चूक दुरुस्त करने के लिए दोबारा बुलाकर बयान दर्ज किया। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह टीम या इनका कोई अधिकृत व्यक्ति लखनऊ जाएगा और सोमवार को जांच टीम के अधिकारी रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे। पुनः शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित होगी, जिसमें प्रथम दृष्टया दोषसिद्धि के आधार पर संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। नृपेन्द्र के बयानों से असहज हो रहे ट्रस्टी अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में धांधली के साथ दिन-प्रतिदिन हो रहे नए खुलासों के बीच मीडिया में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य और भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र के बयान ने कठघरे में खड़े ट्रस्टियों को असहज कर दिया है। किसी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा से वरिष्ठतम अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त होकर और मंदिर ट्रस्ट में शामिल होते हुए भी उनकी ओर से बयान जारी करना उचित नहीं प्रतीत होता है। इससे ट्रस्ट की छवि ही नहीं प्रभावित हो रही, बल्कि मीडिया को भी अनर्गल प्रलाप का मौका मिल गया है। कई लोगों ने लगाए संगीन आरोप एक सप्ताह के भीतर देखें तो एसआईटी की जांच के बीच कुछ लोगों ने निर्माण से लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाने वाले रुपए और धातुओं को गायब करने का आरोप लगाया है। सूत्र बताते हैं कि अब जांच के दूसरे चरण में सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से जिन लोगों ने विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए हैं अब उनसे भी पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि उनके दावे में कितनी सच्चाई थी। इसके बाद बड़ी कार्रवाई की चर्चा है।

यूपी में नया सिस्टम: देर से रजिस्ट्रेशन पर शुल्क और SDM की अनुमति जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु (Birth and Death) पंजीकरण को लेकर नई नियमावली लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्रेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली-2026 लागू कर दी गई है। चिकित्सा अनुभाग-7 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जन्म, मृत्यु अथवा मृत-जन्म की सूचना अब घटना के 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य होगा। नई नियमावली के तहत जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए 21 दिन के अंदर सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। जन्म के लिए 21 दिन बाद लेकिन 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर 20 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। 30 दिन से एक वर्ष तक की देरी होने पर संबंधित अधिकारी की अनुमति के साथ 50 रुपये शुल्क लगेगा, जबकि एक वर्ष से अधिक विलंब होने पर एसडीएम, जिला मजिस्ट्रेट अथवा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 100 रुपये शुल्क देकर पंजीकरण कराया जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र में किसी प्रकार के संक्षिप्त नाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था में ऑनलाइन पंजीकरण, रिकॉर्ड के स्थायी संरक्षण, त्रुटि संशोधन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। क्यों जरूरी है जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र शिशु के जन्म पर उसका पंजीकरण कराकर जन्म प्रमाण लेना और किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसका पंजीकरण कराकर मृत्यु प्रमाण पत्र लेना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, ये पंजीकरण ही परिवार में किसी नए सदस्य के आगमन या किसी सदस्य के प्रस्थान की अधिकारिक सूचना होते है। ये दोनों प्रमाण पत्र बुनियादी कानूनी दस्तावेज हैं। जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) किसी व्यक्ति की पहचान, उम्र और नागरिकता पहला प्रमाण है। स्कूल में एडमिशन से लेकर नौकरी तक हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) कानूनी रूप से मृत्यु प्रमाणित करने, संपत्ति, बीमा या पेंशन आदि के दावों के लिए अनिवार्य होता है।

गोरखपुर ने मारी बाजी, नगर निगमों की आय 5850 करोड़ रुपये के पार

 लखनऊ यूपी के नगर निगमों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। नगर निगमों ने पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक कमाई की है। नगर निकाय निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल राजस्व संग्रह 4439.32 करोड़ रुपये (2024-25) से बढ़कर 5850.05 करोड़ रुपये (2025-26) तक पहुंच गया। अब इसी हिसाब से नगर निगमों को विकास का पैसा भी जारी होगा। इसमें गोरखपुर ने बाजी मार ली है। ​राजस्व वृद्धि के मामले में गोरखपुर नगर निगम ने पूरे प्रदेश में अव्वल स्थान हासिल किया है। गोरखपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में 109% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद मथुरा-वृंदावन (66%) और वाराणसी (64%) का स्थान है। मेरठ नगर निगम 30 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ प्रदेश के 17 नगर निगमों में आठवें स्थान पर आया है। मेरठ में वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कुल राजस्व वसूली 205.44 करोड़ की हुई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 158.08 करोड़ की हुई थी। हालांकि ओवरऑल राजस्व वसूली में लखनऊ नगर निगम प्रदेश में सबसे आगे रहा, जहां 1663.02 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई है। शाहजहांपुर और सहारनपुर में हुई सबसे कम वृद्धि 17 नगर निगमों में सबसे कम राजस्व वृद्धि शाहजहांपुर और सहारनपुर जैसे नगर निगमों में हुई। शाहजहांपुर में मात्र तीन प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 30.14 करोड़ की हुई। सहारनपुर में 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 70.62 करोड़ रुपये की हुई। मुरादाबाद नगर निगम में लंबित पड़े जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 आवेदन सीएसआर पोर्टल की सुस्ती से नगर निगम में 800 से अधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र अटके हैं। पोर्टल न चलने के कारण आवेदकों की भीड़ नगर निगम कार्यालय में जमा हो रही है मगर उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, एक जोन में रजिस्ट्रार के न होने से आवेदकों की परेशानी और बढ़ गई है। आवेदनों का समय से सत्यापन नहीं हो पा रहा है और प्रमाणपत्रों पर रजिस्ट्रार की मुहर नहीं लग पा रही है। नगर निगम के कार्यालय में करीब 35 आवेदक पहुंचे, जिनको जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराना था मगर पोर्टल न चलने से वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि साइट न चलने से यह दिक्कत आ रही है, वहीं महानगर में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 से अधिक आवेदन नगर निगम के सीएसआर पोर्टल पर लंबित हैं। इनका प्रमाण पत्र पोर्टल चालू नहीं होने से जारी नहीं हो पा रहा है। कुछ मामलों में पोर्टल की वजह से दिक्कत आ रही है तो वहीं कुछ मामलों में रजिस्ट्रार के न होने से लोग परेशान हैं।

उसायनी में मुख्यमंत्री योगी का दौरा, 650 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

 फिरोजाबाद  टूंडला के गांव उसायनी में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के 568 आवासों की चाबी सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ सोमवार को सुबह 11.15 बजे लाभार्थियों को सौंपेगे। इस दौरान वह 650 करोड़ से अधिक के कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। उनके आगमन को लेकर हेलीपैड के साथ ही पंडाल बनाने का काम देर शाम तक चलता रहा। डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं। केंद्र सरकार ने शहरी बेघर लोगों के लिए मार्च-2019 पीएम शहरी आवास योजना का शुभारंभ किया था। इसके तहत फिरोजाबाद-शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण (विप्रा) ने उसायनी के निकट आवासीय कॉलोनी बनाई गई है। काम पूरा होने के बाद भी लोकार्पण न होने से लाभार्थियों को अब तक कब्जा मिलने की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले में विप्रा उपाध्यक्ष की ओर शासन को निरंतर पत्राचार किए जा रहे थे। उसायनी में होगा कार्यक्रम, 568 पीएम आवासों की लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव उसायनी पहुंचकर इसका लोकार्पण करने के साथ पात्र लाभार्थियों को आवासों की चाबी सौंपेगे। इसके साथ टूंडला और शिकोहाबाद विधानसभा क्षेत्रों के अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण, शिलान्यास कर जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर शनिवार से ही हेलीपैड के साथ वाटर प्रूफ पंडाल तैयार कराने काम शुरू हो गया है। वाहनों की पार्किंग के साथ ही आवासों की रंगाई पुताई का काम भी किया जा रहा है। अधूरे पड़े पार्क को भी ठीक कराया जा रहा है। नगर निगम के 54.12 करोड़ के प्रोजेक्ट का होगा लोकार्पण और शिलान्यास मेयर कामिनी राठौर ने बताया कि मुख्यमंत्री के हाथों नगर निगम के 54.12 करोड़ की प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास कराया जाएगा। इसमें स्मार्ट जोनल कार्यालय, सीनियर सिटीजन केयर सेंटर, ब्रज थीम और एबीसी सेंटर, गैस संचालित शवदाह गृह, डिजिटल लाइब्रेरी, वेस्ट टू वंडर पार्क, 18 पार्कों में ओपन जिम, स्मार्ट क्लासेज, वर्कशाप का निर्माण व मलिन बस्तियों में विकास कार्य शामिल हैं। एसआईआर में 100 से अधिक फॉर्म भरवाने वाले कार्यकर्ताओं से मिलेंगे मुख्यमंत्री जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में एसआईआर कार्य में 100 से अधिक फार्म भरवाने वाले कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री ने मिलने की घोषणा की थी। सभी को कार्यक्रम स्थल पर ही मुख्यमंत्री से मिलवाया जाएगा। इसके लिए अलग से पंडाल बनाया जाएगा।  

राम मंदिर ट्रस्ट पर फंड हेराफेरी के आरोप, SIT रोजाना भेज रही जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को

अयोध्या अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले फंड में कथित हेराफेरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. मंदिर से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि रोजाना की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट को डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा गया है. इसमें ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से की गई पूछताछ की डिटेल्स भी शामिल हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश करने से पहले इस रिपोर्ट को फाइनल रूप दिया जाएगा. इसके साथ ही, एसआईटी अपनी जांच से जुड़ीं जानकारियां रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेज रही है. सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की जांच सिर्फ फंड की कथित हेराफेरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग फेज में मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीन और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरोप लगाए जा रहे हैं कि मंदिर ट्रस्ट ने मार्केट रेट से ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदी थीं. इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उठाया था. अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद, मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.