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एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, चिटफंड फ्रॉड केस में देवेंद्र प्रकाश तिवारी दबोचा गया

 आगरा हरिद्वार में चिट फंड के नाम पर हजारों लोगों से धोखाधड़ी करके आठ वर्ष से फरार 50 हजार के इनामी देवेंद्र प्रकाश तिवारी को यूपी और उत्तराखंड एसटीएफ ने बुधवार की रात डौकी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित डौकी क्षेत्र के नदौता गांव में अपने एक परिचित से मिलने आया था। उसके विरुद्ध हरिद्वार के ज्वालापुर थाने में वर्ष 2018 में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोपित को बुधवार रात डौकी थाने में दाखिल किया गया। उत्तराखंड एसटीएफ उसे अपने साथ हरिद्वार लेकर जाएगी। कानपुर के थाना नौबस्ता की आवास विकास कालोनी स्थित हंसपुरम कालोनी देवेंद्र प्रकाश तिवारी की यूपी और उत्तराखंड एसटीएफ को आठ वर्ष से तलाश थी। एसटीएफ कानपुर इकाई को बुधवार रात देवेंद्र प्रकाश की लोकेशन लखनऊ एक्सप्रेसवे से लगे डौकी के गांव नदौता के पास मिली। जिसके बाद उत्तराखंड और यूपी एसटीएफ की कानपुर इकाई की संयुक्त टीम ने घेराबंदी करके आरोपित को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपित देवेंद्र प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2006 से 2009 तक जीसीए कंपनी में डिस्ट्रीब्यूटर व जीसीए कंपनी के आयुर्वेदिक उत्पाद बेचने का काम किया। परिचित अनिल कुमार तिवारी ने शिवम शीतगृह नाम से एक कंपनी बनाई थी। जिसमें अनिल तिवारी व उसकी पत्नी सरोज तिवारी निदेशक थे। वर्ष 2010 में शिवम शीतगृह का नाम बदल कर धेनू ग्रीन गार्डन मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कर दिया। जिसमें देवेंद्र तिवारी को भी निदेशक बनाया। कंपनी वर्ष 2011 तक चली। जिसके बाद धेनू ग्रीन इंडिया नाम से दूसरी कंपनी बनाई। इसमें उसे निदेशक बनाया गया। कंपनी का कार्यालय ज्वालापुर हरिद्वार मे बनाया था। आरोपित अनिल कुमार तिवारी द्वारा वर्ष 2012 में धेनू विज्ञान अनुसंधान संस्थान नाम से एक एनजीओ बनाया, जो 2017 तक चला।कंपनी में निवेश के नाम पर हजारों लोगो को लाभ का लालच देकर उनसे निवेश कराया गया। वर्ष 2018 में कंपनी द्वारा की गई धोखाधड़ी के चलते थाना ज्वालापुर हरिद्वार में मुकदमा दर्ज काया गया था। थानाध्यक्ष डौकी सुनीत शर्मा ने बताया कि आरोपित काे डौकी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।  

केजीएमयू की बड़ी सफलता: जटिल सर्जरी में मासूम बच्चे को मिली नई जिंदगी

लखनऊ  किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। विभाग के डॉक्टरों ने महज 10 किलोग्राम वजन के एक छोटे बच्चे के शरीर से डेढ़ किलोग्राम का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल और जोखिम भरा था, क्योंकि बच्चे के कुल वजन का लगभग पंद्रह प्रतिशत हिस्सा अकेले ट्यूमर का था। ऐसे में सर्जरी के दौरान हर पल सतर्कता बरतना अनिवार्य था। ऑपरेशन की टीम पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेडी रावत के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने यह सर्जरी बड़ी कुशलता और धैर्य के साथ संपन्न किया। ऑपरेशन में सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रेया श्रीवास्तव, डॉ. मानिष राजपूत तथा अन्य चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहायक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सुधा सिंह सहित पूरी टीम ने ऑपरेशन को सफल बनाने में अथक परिश्रम किया। बच्चे की सेहत सर्जरी के बाद बच्चे की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और वह खतरे से बाहर है। बच्चे की मां ने डॉक्टरों की टीम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है। केजीएमयू प्रशासन ने भी पीडियाट्रिक सर्जरी टीम की इस उपलब्धि की सराहना की है और इसे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया है।

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: अब नहीं होगी बार-बार रिचार्ज की झंझट

लखनऊ यूपी के बिजली ग्राहकों को बड़ी सौगात देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट पेड में बदलने का ऐलान हुआ है। प्रीपेड से पोस्टपेड में करने की तारीख भी आ गई है। प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की पूरी प्रक्रिया एक रात में पूरी हो जाएगी। 9 मई की रात से प्रक्रिया शुरू होगी और 10 मई तक सभी मीटर पोस्टपेड हो जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड होने पर बिजली ग्राहकों की कई समस्याओं का हल हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मीटर तेज चलने, अधिक बिल आने और बिना बिजली उपयोग के बैलेंस कटने जैसी शिकायतों से मुक्ति मिल जाएगी। बचा बैलेंस बिजली बिल में जुड़ेगा लोगों को यह शंका है कि प्रीपेड में कराए गए रिचार्ज का क्या होगा? अधिकारियों के अनुसार प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जैसे ही प्रीपेड मीटर कन्वर्ट होंगे, वैसे ही उनका बचा बैलेंस महीने के अंतिम में बनने वाले बिल में स्वत: जुड़ जाएगा। इसका पूरा डिटेल बिजली बिल में अंकित होगा। पूर्वांचल में एमडी कर रहे निगरानी पूर्वांचल के जिलों में स्मार्ट मीटरों के मोड परिवर्तन की निगरानी पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार खुद करेंगे। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 30 लाख 17 हजार 147 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। वाराणसी जोन प्रथम के 11 डिविजनों में 2.20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों उपभोक्ता हैं। एमडी मीटर लगाने वाली कंपनी जीएमआर और जीनस के अफसरों के साथ मोड परिवर्तन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चार लाख उपभोक्ता नहीं कर रहे थे मीटर रिचार्ज पूर्वांचल के 4.11 लाख उपभोक्ता प्रीपेड मीटर रिजार्च नहीं कर रहे थे। बनारस में इनकी संख्या लगभग 12 हजार थी। जांच में सामने आया कि मीटर चार्ज न कराने वाले अनेक उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहे हैं तो कुछ खाली परिसर पर मीटर लगे थे। विभाग ने बिजली चोरी करने वालों पर केस कराया था। उपभोक्ताओं से वापस लेंगे सिक्योरिटी मनी मीटर पोस्टपेड होने के बाद उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी मनी ली जाएगी। यह राशि बिजली बिल में जोड़कर भेजी जाएगी। बड़े उपभोक्ताओं से सिक्योरिटी मनी किस्त में ली जाएगी। स्मार्ट मीटर की खामियां जस की तस : उपभोक्ता परिषद  वर्ष 2019 से 2022 के बीच लगे 12 लाख स्मार्ट मीटरों में जो खामियां केंद्र सरकार की टीम ने पाई थीं, वही कमियां मौजूदा समय में लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की पुरानी खामियों को नजरअंदाज कर के प्रदेश भर में नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों की जांच केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने की थी। सितंबर 2023 में टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जो कमियां गिनाई गई थीं, वे अब लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। अवधेश ने कहा कि अगर आरडीएसएस के तहत लग रहे इन स्मार्ट मीटरों में उपभोक्ता हितों के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया होता तो पूरी परियोजना सवालों के घेरे में नहीं आती। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि उपभोक्ताओं को तीन से छह महीने के विलंब से एसएमएस अलर्ट नहीं मिल रहे। चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता बरती गई थी। उपभोक्ताओं पर नियमविरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा था। मीटर नेटवर्क में बाधा थी, जिससे डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा था।

आगरा का पेठा से बनारस की लस्सी तक प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजन को ब्रांड बनाने की तैयारी

योगी सरकार की ओडीओसी योजना में यूपी के 75 जिलों का स्वाद: हर जनपद का पारंपरिक व्यंजन बनेगा पहचान आगरा का पेठा से बनारस की लस्सी तक प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजन को ब्रांड बनाने की तैयारी योगी सरकार ने की 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की व्यापक मैपिंग, ब्रज से बुंदेलखंड और पूर्वांचल तक हर क्षेत्र के स्वाद को मिलेगा मंच स्थानीय खानपान से पर्यटन, रोजगार और छोटे कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार, ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ के रूप में देश-विदेश में पहचान बनाने की रणनीति लखनऊ उत्तर प्रदेश के विविध स्वाद और समृद्ध खानपान परंपरा को नई पहचान देने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ओडीओपी की तर्ज पर ‘एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी)’ के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों की व्यापक मैपिंग कर ली गई है, जिससे अब हर जिले की अपनी एक खास फूड आइडेंटिटी तय हो गई है। इस पहल में आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, वाराणसी की लस्सी, जौनपुर की इमरती, गोरखपुर के समोसे, मेरठ की रेवड़ी-गजक, लखनऊ का मलाई मक्खन, सहारनपुर का शहद और मुजफ्फरनगर का गुड़ जैसे प्रसिद्ध व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। इसके साथ ही अन्य जिलों के स्थानीय और पारंपरिक स्वाद जैसे कासगंज की सोन पापड़ी, अयोध्या की दही-जलेबी, बलिया का सत्तू, चित्रकूट का मावा और बागपत का घेवर भी इस सूची में शामिल किए गए हैं। हर क्षेत्र का अलग स्वाद, एक ही पहचान हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ओडीओसी को लागू करने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। योजना के तहत ब्रज क्षेत्र की मिठास, अवध की समृद्ध कचौड़ी-समोसा संस्कृति, पूर्वांचल का देसी स्वाद और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन, इन सभी को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ की अवधारणा को मजबूत किया जा रहा है। इससे प्रदेश के खानपान की विविधता को एकीकृत पहचान मिलेगी। इस पहल का सीधा फायदा स्थानीय कारीगरों, हलवाई, छोटे दुकानदारों और फूड उद्यमियों को मिलेगा। पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे कारोबार को मजबूती मिलेगी। पर्यटन में भी आएगा उछाल योगी सरकार ओडीओसी को पर्यटन से जोड़कर फूड टूरिज्म को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। अब पर्यटक किसी जिले में जाएंगे तो वहां के प्रसिद्ध व्यंजन का अनुभव लेना भी उनकी यात्रा का हिस्सा होगा। योगी सरकार की योजना है कि इन व्यंजनों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाए। इससे न सिर्फ यूपी के स्वाद को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक छवि भी और मजबूत होगी। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रमुख व्यंजन 1. आगरा: पेठा /नमकीन (दालमोठ)/गजक/ पराठा 2. फिरोजाबाद: आलू उत्पाद/ आलू टिक्की/कचौड़ी 3. मैनपुरी: सोहन पापड़ी/भुना हुआ आलू  4. मथुरा: पेड़ा/छप्पन भोग/माखन मिश्री/ रबड़ी 5. अलीगढ़: डेयरी उत्पाद/कचौड़ी/इमरती/इगलास के चमचम 6. हाथरस: रबड़ी 7. कासगंज: मूंग का दलमा/कलाकंद/सोन पपड़ी/सोरों की मोठ की चाट 8. एटा: चिकोरी/घेवर पूड़ी 9. अयोध्या: कचौरी/टिकिया/ पेड़ा/कुल्हड़ वाली दही जलेबी 10. सुलतानपुर: पेड़ा/समोसा/पूड़ी और कोहड़े की सब्जी/लाल पेड़ा 11. बाराबंकी: चंद्रकला मिठाई/लाल पेड़ा 12. अमेठी: समोसा/गुड़ की खीर/गुलगुला/बड़ी वाली पूड़ी 13. अंबेडकर नगर: बालूशाही/चाट/खजाना/लाल गन्ने की गोटी 14. आजमगढ़: तहरी (मूंग दाल की)/सफेद गाजर का हलवा/लौंगलता 15. बलिया: सत्तू आधारित उत्पाद/बाटी-चोखा 16. मऊ: लिट्टी-चोखा/गोंठा की भेली 17. बरेली: सेवइयां/बर्फी/ छोले-भटूरे/ चाट 18. बदायूं: खोआ आधारित मिठाई/पेड़ा/ पेड़े/लौंज 19. पीलीभीत: जलेबी/खोआ मिठाई/लस्सी/लौंज 20. शाहजहांपुर: लौंग बर्फी/गुड़/समोसे/खुरचन 21. बस्ती: ठेकुआ/पूरी-सब्जी/सिरका/गुड़ 22. संत कबीर नगर: खोआ आधारित मिठाई/समोसा/पेड़ा 23. सिद्धार्थनगर: खोआ आधारित मिठाई (राम-कचौरी)/मखाना/कालानमक चावल/रामकटोरी 24. बांदा: सोहन हलवा/बालूशाही 25. चित्रकूट: मावा 26. हमीरपुर: बुंदेली व्यंजन (दाल भरे/डुबरी फरा/महुआ बर्फी/माड़े/सन्नाटा) 27. महोबा: दाल बाफला/तिलकुट/देसावरी पान/खजूर का गुड़ 28. गोड़ा: इटियाथोक का दही बड़ा व कचौड़ी 29. बहराइच: चमचम 30. बलरामपुर: नारियल बर्फी/कलाकंद/ घमंजा/ चाट 31. श्रावस्ती: इमरती 32. गोरखपुर: लिट्टी-चोखा/लहसुन वाले छोले समोसे/ बर्फी 33. महाराजगंज: लिट्टी-चोखा/खोआ आधारित मिठाई (राम-कचौरी)/गुड़/मीठा समोसा 34. देवरिया: मालपूआ/लिट्टी-चोखा/दही/गुड़ की जलेबी 35. कुशीनगर: केला चिप्स/पेड़ा/लाल खोरमा 36. झांसी: दाल बाफला/बालूशाही 37. जालौन: रसगुल्ले/गुझिया 38. ललितपुर: दूध हलवा/बाजरे की रोटी 39. कानपुर: समोसा/लड्डू/मलाई मक्खन (मलइयो) 40. कानपुर देहात: खाद्य तेल/लस्सी 41. औरैया: शुद्ध देसी घी/दूध बर्फी मिठाई/बालूशाही/ गुड़ 42. इटावा: सरसों आधारित उत्पाद (सरसों की चटनी/सलाद) मट्ठा के आलू/खीर मोहन 43. फर्रुखाबाद: दालमोठ/भुने आलू 44. कन्नौज: गट्टा मिठाई/खोआ का पेड़ा 45. लखनऊ: रेवड़ी/आम उत्पाद/चाट/मलाई मक्खन 46. हरदोई: आलू पूरी/लड्डू/लाओझड़  47. लखीमपुर खीरी: केला/गुड़/खोआ पेड़ा/खीर मोहन/रसगुल्ले 48. रायबरेली: मसाले 49. सीतापुर: मक्खन मलाई/समोसा/मिर्ची पकौड़ा/पेड़ा 50. उन्नाव: काला जामुन/समोसा/कचौड़ी/त्रिलोक परी 51. मेरठ: रेवड़ी/गजक/नानखटाई 52. गाजियाबाद: सोया चाप/मिर्ची का अचार 53. गौतम बुद्ध नगर: केक/बेकरी उत्पाद 54. हापुड़: पापड़ 55. बुलंदशहर: कचौरी/खुरचन/पेड़ा 56. बागपत: बालूशाही/घेवर 57. मिर्जापुर: लाल पेड़ा/बालूशाही/रसगुल्ला/पेड़ा 58. भदोही (संत रविदास नगर): दाल पीठा/ठेकुआ/खोआ पेड़ा/गुझिया/रबड़ी 59. सोनभद्र: गुलाब जामुन 60. मुरादाबाद: दाल 61. रामपुर: हल्दी हलवा (हलवा) 62. अमरोहा: आम पन्ना/आम चटनी/सेव/लड्डू 63. संभल: सेवइया/गजक/सोनपापड़ी 64. बिजनौर: गजक/सिंघाड़ा कचौरी/सोनपापड़ी और बतीसा 65. प्रयागराज: सब्जी-कचौरी/समोसा/रसगुल्ला 66. फतेहपुर: बेड़मी पूरी-सब्जी/पेड़ा/सूतफेनी 67. कौशांबी: गुड़ से बनी मिठाई/चाट/बर्फी/मुंगौरा 68. प्रतापगढ़: आंवला आधारित उत्पाद/गुलाब जामुन 69. वाराणसी: तिरंगा बर्फी/ठंडाई-लस्सी/कचौरी/बनारसी पान/लौंग लत्ता/मलइयो  70. जौनपुर: इमरती/मिठाई एटमबम/जौनपुरी मूली 71. गाजीपुर: मिर्च का अचार/मटर चाट/रसगुल्ला/जलेबी 72. चंदौली: काले चावल के उत्पाद (जैसे खीर)/गुलाब जामुन/लस्सी 73. सहारनपुर: शहद आधारित उत्पाद/चाट/घेवर 74. मुजफ्फरनगर: गुड़/चाट (टिक्की)/पेड़ा 75. शामली: गुड़ आधारित उत्पाद/चाट/मिठाई

यमुना एक्सप्रेसवे के पास पुलिस मुठभेड़ में 50-50 हजार के इनामी अपराधी मारे गए

 मथुरा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में पुलिस ने कारोबारी के घर डकैती डालने वाले बावरिया गिरोह के दो इनामी बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। दोनों अपराधियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वे 23 अप्रैल को एक कारोबारी के घर परिवार को बंधक बनाकर की गई सनसनीखेज डकैती में शामिल थे। गुरुवार सुबह यमुना एक्सप्रेसवे के पास हुई इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार दोनों बदमाश कई राज्यों में वांछित थे और उन पर डकैती, हत्या के प्रयास, चोरी और छिनैती जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। कारोबारी परिवार को बंधक बनाकर की थी लूट जानकारी के अनुसार, 23 अप्रैल की रात बावरिया गिरोह के बदमाश कारोबारी अजय अग्रवाल के घर छत के रास्ते घुसे थे। बदमाशों ने अजय अग्रवाल, उनके पिता, पत्नी और छह साल की बच्ची को रस्सियों से बांध दिया था। इसके बाद गन प्वाइंट पर लॉकर की चाबी लेकर करीब ढाई घंटे तक घर में खुलकर लूटपाट की गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। वारदात के बाद पुलिस ने डकैतों की तलाश तेज कर दी थी। 17 टीमों को लगाया गया था तलाश में डकैती की वारदात के बाद एसएसपी श्लोक कुमार ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 17 अलग-अलग टीमों का गठन किया था। पुलिस लगातार गिरोह की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। गुरुवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि डकैती में शामिल दो बदमाश यमुना एक्सप्रेसवे के पास मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वाट टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी। भागने की कोशिश में बाइक गिरी सुबह करीब 7 बजे दो संदिग्ध बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों ने यूटर्न लेकर भागने की कोशिश की। इसी दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने के डर से दोनों बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दोनों बदमाश घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। एनकाउंटर में दो पुलिसकर्मी भी घायल इस मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी अजय वर्मा और हेड कांस्टेबल दुर्ग विजय भी घायल हुए हैं। दोनों को गोली लगी है और उनका इलाज चल रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों की हालत खतरे से बाहर है। कई राज्यों में दर्ज थे गंभीर मुकदमे मारे गए बदमाशों की पहचान धर्मवीर उर्फ लंबू (35) और राजेंद्र उर्फ पप्पू (55) के रूप में हुई है। दोनों राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले थे और बाबरिया गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि बदमाश धर्मवीर पर मथुरा के अलावा हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में डकैती, हत्या के प्रयास, चोरी और छिनैती समेत 16 मुकदमे दर्ज थे। वहीं राजेंद्र उर्फ पप्पू पर मथुरा, मेरठ, फिरोजाबाद, हरियाणा और दिल्ली में डकैती समेत 11 मुकदमे दर्ज थे। साथ ही पप्पू और धर्मवीर पर 50-50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

किसानों और पशुपालकों के लिए योगी सरकार की पहल: हरे चारे के बीज और नेपियर घास रूट स्लिप का वितरण

योगी सरकार ने नेपियर घास रूट स्लिप समेत हरे चारे के बीजों का किसानों-पशुपालकों को किया वितरण प्रदेश सरकार का पशुओं को साल भर हरा चारा उपलब्ध कराने का लक्ष्य: मुकेश मेश्राम हरे चारे की अच्छी पैदावार के लिए पशुपालकों-किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश में हरा चारा बढ़ाने की तैयारी में जुटा पशुपालन विभाग लखनऊ  उत्तर प्रदेश में किसानों, पशुपालकों और चारागाहों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पशुधन विभाग तेजी से प्रयास कर रहा है। इसके लिए नेपियर घास रूट स्लिप, बरसीम और ज्वार चारा बीज किसानों और पशुपालकों को वितरित किया जा रहा है। पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि पशुओं के लिए साल भर पोषक और सस्ता हरा चारा उपलब्ध कराया जाए, जिससे किसानों की लागत कम हो और दूध उत्पादन में वृद्धि हो। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि इस साल हजारों हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए प्रदेश के 75 जिलों में काम शुरू हो चुका है। इसी क्रम में करोड़ों रुपये विभाग खर्च कर रहा है। सबसे ज्यादा फोकस प्रदेश में नेपियर घास की पैदावार बढ़ाने पर किया जा रहा, जिसकी कटाई साल भर में 6 बार तक की जा सकती है। साथ ही हरा चारा उगाने के लिए हर जिले में दो मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं, जो कि जिलों में किसानों और पशुपालकों को हरा चारा उगाने की ट्रेनिंग भी देंगे। हरे चारे के लिए विभाग ने वितरित किए बीज प्रक्षेत्र एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार राय ने बताया कि अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों, पशुपालकों को बरसीम और ज्वार चारा बीज का वितरण किया गया है, जिससे 4,156 हेक्टेयर में हरे चारे की पैदावार होगी। इस पर 2 करोड़ रुपये विभाग ने खर्च किए हैं। वहीं नेपियर घास की पैदावार इस साल 230 हेक्टेयर में कराने का लक्ष्य है, जिसके तहत 60 लाख नेपियर रूट स्लिप का वितरण 75 जिलों में किया जा चुका है। इस पर विभाग ने 64 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं किसानों को प्रोत्साहन के लिए 4 हजार रुपये भी दिए गए। गो आश्रय स्थल से संबंद्ध एवं अन्य गोचर चारागाह की भूमि पर हरा चारा उत्पादन की योजना के तहत 2,815 हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए ज्वार, मक्का व बाजरा के बीज वितरित किए गए हैं। इस पर विभाग ने 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। किसानों को दिलाई जा रही ट्रेनिंग अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि हमारा लक्ष्य सिर्फ बीज वितरण तक ही सीमित नहीं है। इनकी पैदावार अच्छी हो, उस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में हर जिले से दो अधिकारियों (एक कृषि विभाग से, दूसरा पशुपालन विभाग से) को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी में ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। यही मास्टर ट्रेनर के रूप में विकास खंडों पर पशुपालकों को सही तरीके से चारा उगाने की ट्रेनिंग देंगे। इसके अलावा हर जिले से 15-15 किसानों और पशुपालकों को चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए तकीनीकी संस्थाओं एवं विभागीय प्रक्षेत्रों में एक्सपोजर विजिट कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पशुपालकों से लेकर, प्रदेशभर की गोशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इसका परिणाम इसी वर्ष से दिखने भी शुरू हो जाएंगे।

प्रयागराज में रक्षा त्रिवेणी संगम की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 के समापन समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

‘नेशन फर्स्ट’ हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत, क्योंकि राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं: मुख्यमंत्री प्रयागराज में "रक्षा त्रिवेणी संगम" की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 के समापन समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने कहा, युद्ध अब साइबर व स्पेस तक विस्तारित, डेटा, सिग्नल्स व नेटवर्क बने नए हथियार, टेक्नोलॉजी की बढ़ी भूमिका यूपी डिफेंस कॉरिडोर में किया जा रहा तोप के गोलों, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब लड़ाई सीमाओं से बढ़कर साइबर, स्पेस, डेटा नेटवर्क और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम तक फैल चुकी है। पारंपरिक युद्ध कौशल के साथ-साथ अब तकनीकी दक्षता, रणनीतिक सोच और मानसिक दृढ़ता भी अनिवार्य हो गई है। आज के युद्ध में कीबोर्ड, सेटेलाइट और डेटा उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने पारंपरिक हथियार। दुश्मन के संचार नेटवर्क को बाधित करना तथा अपने सिस्टम को सुरक्षित रखना नई युद्ध रणनीति का आधार बन रहा है। ऐसे परिदृश्य में वही राष्ट्र आगे रहेगा, जो साहस और तकनीक के बीच संतुलन स्थापित कर सके। “नेशन फर्स्ट” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय सैनिक के जीवन का संकल्प है। यह हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरि है और उससे बढ़कर कुछ भी नहीं। सीएम योगी बुधवार को प्रयागराज में "रक्षा त्रिवेणी संगम" की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम (एनटीएस) 2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। आधुनिक युद्ध में कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार मुख्यमंत्री ने कहा कि सियाचिन की जमाने वाली ठंड हो, रेगिस्तान की तपती रेत, घने जंगलों का अंधकार या समुद्र व आकाश की अनंत चुनौतियां, हमारे सैनिक हर परिस्थिति में तत्पर रहते हैं। उनकी सतर्क निगाहों के कारण ही पूरा देश सुरक्षित और निश्चिंत रह पाता है। आधुनिक युद्ध अब केवल जल, थल और नभ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के युग में प्रवेश कर चुका है। युद्ध में साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार बन चुका है। दुश्मन के पावर ग्रिड, राडार, जीपीएस, बैंकिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम को बाधित करना या अपने नेटवर्क को सुरक्षित व अभेद्य बनाना, नई सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। सेटेलाइट्स के माध्यम से निगरानी, खुफिया जानकारी और नेविगेशन अब युद्ध की ‘आंख’ और ‘दिमाग’ बन चुके हैं। अब लड़ाई सिग्नल्स और डेटा के माध्यम से भी लड़ी जा रही है। डिफेंस सेक्टर में यूपी ने की उल्लेखनीय प्रगति मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध जैसी स्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है। कुछ वर्ष पहले भारत का रक्षा निर्यात लगभग 600 करोड़ रुपये ही था, लेकिन निरंतर प्रयासों से आज हमारी सामर्थ्य 38 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये तक के रक्षा उत्पाद निर्यात करने की है। भारत अब मित्र देशों को रक्षा उत्पाद उपलब्ध करा रहा है। उत्तर प्रदेश ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह प्रमुख नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट पर तेजी से कार्य हो रहा है। इन नोड्स में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर रहे हैं। सरकार ने डिफेंस एवं एयरोस्पेस पॉलिसी के तहत बड़े लैंड बैंक का निर्माण किया है और निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अलीगढ़ छोटे हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जबकि कानपुर गोला-बारूद, मिसाइल, डिफेंस टेक्सटाइल और प्रोटेक्टिव गियर के उत्पादन का महत्वपूर्ण हब बन रहा है। लखनऊ और झांसी नोड्स में ब्रह्मोस मिसाइल और हैवी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की सैन्य क्षमता और मजबूत हो रही है। चित्रकूट और आगरा नोड्स में एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विकास जारी है, ताकि स्पेस डोमेन सहित रक्षा के सभी आयामों में देश की क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। यूपी डिफेंस कॉरिडोर सैनिकों की क्षमता और सुरक्षा में मददगार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत तोप के गोले, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उत्तर प्रदेश में उपलब्ध हैं। प्रदेश के पास 56 प्रतिशत युवा एवं स्किल्ड वर्कफोर्स और 96 लाख एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। सभी 6 स्ट्रेटेजिक नोड्स पर पर्याप्त लैंड बैंक भी उपलब्ध है। राज्य सरकार स्किल, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के माध्यम से मार्केट-रेडी और इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में आईआईटी कानपुर के साथ ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया गया है, जबकि स्टेट फॉरेंसिक संस्थान के माध्यम से भी विभिन्न क्षेत्रों में नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। सभी स्ट्रेटेजिक नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।  ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकारना हमारी परंपरा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सिम्पोजियम के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री के विजन को साकार होते देखना गर्व का विषय है। यह सिम्पोजियम ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकार करना हमारी परंपरा रही है और यह सिम्पोजियम उसी भावना को आगे बढ़ा रहा है।  हाईटेक क्षेत्रों में स्थापित हुए स्टार्टअप सीएम योगी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 21,000 से अधिक स्टार्टअप्स स्थापित हुए हैं, जो एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाईटेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। सेफ्टी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के समन्वय से प्रदेश ने बीमारू छवि को पीछे छोड़ते हुए देश के ग्रोथ इंजन के रूप में पहचान बनाई है। अपराध और अव्यवस्था के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति हमारा संकल्प रहा है। माफिया से कानून के राज और उपद्रव से उत्सव तक की यात्रा तय करते हुए यूपी इस मुकाम तक पहुंचा है। हमारी उदारता को कोई कमजोरी न समझे मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत को आत्मसात किया … Read more

योगी आदित्यनाथ ने किया बाबा विश्वनाथ व काल भैरव के मंदिर में दर्शन

बाबा विश्वनाथ व काल भैरव के दरबार में माथा टेका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठाधीश्वर ने लोकमंगल और प्रदेश की खुशहाली की कामना की  मंदिर में श्रद्धालुओं का किया अभिवादन, नन्हे-मुन्नों को भी दुलारा वाराणसी  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बुधवार सुबह काशी पहुंचे। उन्होंने यहां बाबा विश्वनाथ धाम व काशी कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में माथा टेक कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने लोकमंगल और प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।  बाबा काल भैरव मंदिर में मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। साथ ही आसपास के घरों में नन्हे-मुन्नों को दुलारा। काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन करने आए भक्तों ने मुख्यमंत्री को देखकर ‘हर-हर महादेव’ का जयकारा लगाया। मुख्यमंत्री ने भी श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।  इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु', विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अवधेश सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी में मांगलिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री बुधवार सुबह बड़ा लालपुर स्थित चांदमारी निवासी राजीव कृष्ण के आवास पर पहुंचे। उन्होंने यहां मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर परिवारजनों को शुभकामनाएं दीं।

तेज रफ्तार बस रेलिंग तोड़ रामगंगा नहर में पलटी, बचाव कार्य जारी

कानपूर उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद के बिधनू थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। सवारियों से खचाखच भरी एक तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर रेलिंग तोड़ते हुए रामगंगा नहर में पलट गई। हादसे के वक्त बस में 40 से ज्यादा यात्री सवार थे। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए हैं और राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस काफी तेज रफ्तार में थी। जैसे ही बस रामगंगा नहर के पुल के पास पहुंची, चालक अचानक नियंत्रण खो बैठा। बस पहले सड़क किनारे लगी लोहे की मजबूत रेलिंग से टकराई और उसे उखाड़ते हुए सीधे नहर में जा गिरी। अंदर बैठी सवारियां एक-दूसरे के ऊपर जा गिरीं। गनीमत यह रही कि बस पूरी तरह पानी में डूबने के बजाय किनारे पर अटक गई। कुछ लोग तत्काल शीशे तोड़कर बस के ऊपर आ गए। राहत और बचाव कार्य हादसे की जानकारी मिलते ही बिधनू थाना पुलिस और स्थानीय राहगीर बचाव कार्य में जुट गए। बस की खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करीब एक दर्जन से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और हैलट अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने क्रेन मंगवाई है ताकि बस को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई यात्री नीचे न दबा हो। हाईवे पर लगा भीषण जाम इस हादसे के कारण कानपुर-सागर हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं। एंबुलेंस को निकालने के लिए पुलिसकर्मी कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालना और घायलों को इलाज मुहैया कराना है। प्रशासनिक सतर्कता कानपुर के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को त्वरित राहत कार्य और घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, चालक की स्थिति स्पष्ट नहीं है कि उसे नींद की झपकी आई थी या बस में कोई तकनीकी खराबी हुई थी।

सामूहिक विवाह योजना से बेटियों को सम्मान, कमजोर परिवारों के लिए मुख्यमंत्री की पहल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: आर्थिक कमजोर परिवारों को बड़ा सहारा, बेटियों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन योगी सरकार की पहल से सुनिश्चित हुआ प्रदेश की बेटियों का रीति-रिवाज के मुताबिक विवाह  खाने से लेकर जरूरी सामान तक की पूरी व्यवस्था, पारदर्शी प्रक्रिया से मदद सीधे लाभार्थियों तक लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई है। योगी सरकार की इस पहल ने प्रदेश की लाखों बेटियों के विवाह को न केवल आसान बनाया है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक तरीके से नई जिंदगी शुरू करने का अवसर भी दिया है। शादी जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक आयोजन में होने वाले भारी खर्च से जूझ रहे परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 76,522 विवाह इस योजना के तहत सम्पन्न करा चुकी है। योगी सरकार की पहल से बढ़ा भरोसा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत वर्ष 2017-18 में की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों का सम्मानजनक विवाह सुनिश्चित करना है। योजना के तहत प्रति जोड़े 1 लाख की सहायता दी जाती है। इसमें 60,000 सीधे वधू के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं, जबकि 25,000 के उपहार और आवश्यक सामान तथा 15,000 विवाह आयोजन की व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है और लोगों का भरोसा इस योजना पर लगातार बढ़ा है। खाने से लेकर जरूरी सामान तक पूरी व्यवस्था इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि योगी सरकार विवाह की पूरी जिम्मेदारी अपने स्तर पर सुनिश्चित करती है। सामूहिक विवाह समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट और अन्य व्यवस्थाएं सरकारी स्तर पर की जाती हैं। इसके साथ ही नवविवाहित जोड़े को कपड़े, बर्तन, पायल, बिछिया सहित अन्य जरूरी घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी के चीजों लिए रुपये निर्धारित हैं। इससे गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिलती है और वह अपनी बेटियों की शादी बिना किसी तनाव के कर पाते हैं। पारदर्शी प्रक्रिया, सीधे खाते में सहायता योजना की पारदर्शिता इसकी सफलता का प्रमुख आधार है। लाभार्थियों का चयन निर्धारित पात्रता के आधार पर किया जाता है, जिसमें परिवार की वार्षिक आय 3 लाख से कम होना जरूरी है। आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, जिससे इच्छुक परिवार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सहायता राशि सीधे वधू के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और लाभ सीधे जरूरतमंद तक पहुंचता है। लाखों बेटियों का हुआ सम्मानजनक विवाह योजना की लोकप्रियता और प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025- 26 में करीब 76,522 विवाह इस योजना के तहत सम्पन्न कराए जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना ने प्रदेश के हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाई है और गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी है। इससे न केवल आर्थिक सहायता मिली है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है। सामाजिक समरसता को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा दे रही है। सामूहिक विवाह के माध्यम से समाज में समानता और एकता का संदेश दिया जा रहा है। अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग एक ही मंच पर विवाह कर एक सकारात्मक सामाजिक वातावरण का निर्माण कर रहे हैं। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया आसान समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 3 लाख से कम है। लाभार्थी शादी अनुदान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार योजना से जुड़ सकें।