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स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम को लेकर केंद्र की नई योजना, चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार

चंडीगढ़  उत्तर प्रदेश में लोगों द्वारा अपने घरों के बाहर लगाए जाने वाले स्मार्ट मीटरों का प्रबल विरोध करने के बाद केंद्र सरकार हरियाणा में नया प्रयोग करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने हरियाणा में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में सरकारी कार्यालयों, सरकारी भवनों और सरकारी कर्मचारियों के परिसरों में बिजली के प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसके पश्चात 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं तथा अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके पीछे केंद्र व राज्य सरकार की सोच है कि लोगों में इन स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के प्रति भरोसा जागेगा। सरकारी कार्यालयों में पहले प्रीपेड मीटर लगने से लोगों में यह संदेश जाएगा कि इन प्रीपेड मीटरों में किसी तरह की कोई खराबी नहीं है, क्योंकि सरकार स्वयं इन्हें अपने कार्यालयों में लगाने की पहल कर रही है। उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर लोगों ने इस व्यवस्थछा का विरोध किया था। चंडीगढ़ में हुई समीक्षा बैठक में क्या बोले केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने बिजली निगमों तथा केंद्र प्रायोजित विभिन्न योजनाओं की चंडीगढ़ में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि स्मार्ट मीटरों से बिजली हानियों को कम करने में सहायता मिलेगी। इस पर हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि भविष्य में प्रदेश के सभी नए उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराए जाएंगे। स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक से युक्त हैं तथा सौर ऊर्जा प्रणालियों के साथ एकीकृत होने की क्षमता रखते हैं। मनोहर लाल ने कहा कि बिजली निगमों को नई तकनीकों को अपनाते हुए लक्ष्य आधारित योजनाओं एवं परियोजनाओं पर तेजी से कार्य करना होगा, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा सके। बिजली बिलिंग और वास्तविक आपूर्ति के बीच के अंतर को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013-14 में बिजली निगमों का कुल लाइन लास लगभग 34 प्रतिशत था, जिसमें अब उल्लेखनीय कमी आई है। इस पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संतोष व्यक्त करते हुए सुधार की गति को और तेज करने के निर्देश दिए। राज्य में लाइन लास 10 प्रतिशत के आसपास है, जिसमें रिकार्ड कमी आई है। बिजली मंत्री अनिल विज ने ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 6,117 गांवों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे लंबित कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री रहते मनोहर लाल के पास बिजली मंत्रालय भी था, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत सुधार किए थे। हरियाणा में मांग से अधिक बिजली उपलब्ध हरियाणा के पास वर्तमान में 16,552 मेगावाट से अधिक अनुबंधित बिजली क्षमता उपलब्ध है। इसमें लगभग 9,929.92 मेगावाट क्षमता तापीय, परमाणु और गैस आधारित स्रोतों से तथा 6,622.58 मेगावाट क्षमता जलविद्युत, सौर, पवन, बायोमास और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हो रही है। चालू वर्ष में हरियाणा में अधिकतम बिजली मांग लगभग 16,454 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि राज्य के पास इससे अधिक बिजली उपलब्ध है। वर्ष 2029-30 तक प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग बढ़कर लगभग 19,481 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जिसके मद्देनजर दीर्घकालिक ऊर्जा योजना पर कार्य किया जा रहा है। हरियाणा में चालू वर्ष में 2.20 लाख रूफटाप सोलर सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य है। अब तक लगभग 86 हजार सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।

बिजली चोरी पर सख्ती: ट्रांसफार्मर-स्तरीय डेटा से होगी खपत और बिलिंग की निगरानी

पटना  बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अब अगले एक दशक तक ऊर्जा लेखांकन (इनर्जी अकाउंटिंग) का कार्य भी करना होगा। इसके लिए कंपनियां क्षेत्रवार निगरानी करेंगी और बिजली वितरण तथा खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगी। बिजली कंपनियों ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तकनीकी माध्यमों से बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। कैसे होती है इनर्जी अकाउंटिंग? बिजली कंपनियों ने प्रत्येक क्षेत्र में स्थापित पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर सिम आधारित विशेष उपकरण लगाए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से ट्रांसफार्मर से वितरित होने वाली बिजली की जानकारी सीधे बिजली कंपनी के सर्वर तक पहुंचती है। किसी क्षेत्र में मौजूद सभी ट्रांसफार्मरों से आपूर्ति की जा रही बिजली का नियमित डाटा उपलब्ध रहता है। इसके बाद उपभोक्ताओं की वास्तविक बिजली खपत और बिलिंग के आंकड़ों का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया को इनर्जी अकाउंटिंग कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि वितरित बिजली और बिलिंग के बीच कितना अंतर है। स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों को मिली जिम्मेदारी जिस क्षेत्र में जिस कंपनी ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए हैं, उसी कंपनी को वहां इनर्जी अकाउंटिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। संबंधित कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी ट्रांसफार्मर से जितनी बिजली वितरित हो रही है, उसके अनुरूप बिलिंग क्यों नहीं हो रही है। कंपनी ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ता के बिल और बिजली खपत का सूक्ष्म विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर वह बिजली कंपनी को रिपोर्ट सौंपेगी कि बिलिंग में कमी या असंगति कहां से उत्पन्न हो रही है। इस प्रक्रिया के जरिए बिजली चोरी में संलिप्त उपभोक्ताओं की पहचान करना आसान होगा। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी उपभोक्ता के यहां स्वीकृत या वास्तविक लोड अधिक होने के बावजूद उसका बिजली बिल अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं है। बिहार में 90 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगे बिहार में वर्तमान में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.22 करोड़ है। इनमें से लगभग 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान लगातार जारी है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों के जिम्मे इनर्जी अकाउंटिंग का दायरा भी लगातार बढ़ता जाएगा। बिजली कंपनियों का मानना है कि इससे बिजली चोरी पर लगाम लगाने के साथ-साथ वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

बिना लाइसेंस स्मार्ट मीटर जांच? हाईटेक लैब पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ  स्मार्ट मीटर की जांच मामले में नियामक आयोग ने मध्यांचल एमडी को नोटिस जारी करके दस दिनों में जवाब मांगा है। यह नोटिस नियामक आयोग में दर्ज शिकायत पर जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि मध्यांचल की हाईटेक लैब के पास स्मार्ट मीटर जांचने का लाइसेंस नहीं है। आयोग ने इस पर मध्यांचल से स्पष्टीकरण मांगा है। स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर आ रहीं शिकायतों की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पावर कॉरपोरेशन ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। मीटरों की जांच मध्यांचल की हाईटेक लैब में हुई और मीटरों की गुणवत्ता पर अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को दे दी गई। इसके बाद सवाल उठे कि यह लैब तो स्मार्ट मीटर की जांच करने के लिए अधिकृत ही नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर नियामक आयोग में शिकायत की कि लैब के पास एनएबीएल द्वारा इंडियन स्टैंडर्ड 16444 (स्मार्ट मीटर) की जांच का लाइसेंस नहीं है। ऐसे में गंभीर सवाल है कि स्मार्ट मीटर की जांच कैसे की गई? उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सभी मीटरों में एक समान पैरामीटर तो लैब में जांचे जा सकते हैं, लेकिन स्मार्ट मीटर के संवेदनशील पैरामीटर की जांच नहीं हो सकती। स्मार्ट मीटर पर लगातार घेर रहा विपक्ष बता दें कि स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों पर उत्तर प्रदेश में विपक्ष भी लगातार सरकार को घेर रहा है। खासतौर से समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव इस पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश के फतेहपुर जिले में गुरुवार को समाजवादी पार्टी पार्टी लोहिया वाहिनी के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित नौ सूत्रीय ज्ञापन भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग की। सपा लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष मो.आजम खान की अगुवाई में अन्य फ्रंटल संगठनों के कई कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। पोस्टपेड किए गए स्मार्ट मीटर वहीं सरकार के आदेश के बाद अब प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को पोस्ट पेड किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अलीगढ़ में बिजली विभाग ने सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड मोड में अपडेट कर दिया है। अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह हर महीने बिजली का बिल मिलेगा और उसी आधार पर भुगतान करना होगा। जून के शुरुआती हफ्ते में स्मार्ट पोस्टपेड मीटर का पहला मासिक बिल जारी किया जाएगा जिसमें बिजली उपयोग का विवरण भी होगा। बिजली विभाग की ओर से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक शिविर लगाकर उपभोक्ताओं को नई व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

तय समय में बिजली कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मिलेगा मुआवजा, नियामक आयोग सख्त

 लखनऊ यूपी के लखनऊ के मीटर रीचार्ज करने के बाद भी दो घंटे तक कनेक्शन न जुड़ने के मामले में नियामक आयोग पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। नेगेटिव बैलेंस की वजह से स्मार्ट मीटर के कनेक्शन कटने के बाद अगर उपभोक्ता मीटर रीचार्ज करवाता है तो उसके अधिकतम दो घंटे के भीतर कनेक्शन जुड़ने का प्रावधान है। अन्यथा उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है। स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदले जाने के बाद मार्च से पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके तहत नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट रहे थे। उसी दरम्यान तमाम उपभोक्ताओं ने मीटर रीचार्ज करने के बाद कई घंटे तक कनेक्शन दोबारा न जुड़ने की शिकायत की थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर करते हुए तय मियाद में कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। आयोग अब इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना अनिवार्य तौर पर लगाया जाएगा। अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी का फैसला वापस स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने के बाद उपभोक्ताओं से नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने का फैसला पावर कॉर्पोरेशन ने वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं की पहले से जमा सुरक्षा राशि ही मान्य होगी और उन्हें नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात अपना आदेश संशोधित किया। दरअसल, जब पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड खाते में एडजस्ट कर दिया गया था। बाद में दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर नई दरों के अनुसार अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी मांगी जा रही थी। इसका असर करीब 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ता। उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत और नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन को फैसला वापस लेना पड़ा। हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी उधर, उपभोक्ता अपना बिल प्राप्त करने और सहायता के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7859804803 का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, वे उसे तुरंत अपडेट करा लें जिससे समय पर बिल और सूचनाएं मिल सकें।

स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड मोड में, संचालन के आदेश जारी

स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी प्रदेश में समाप्त हुई स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री   आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगे स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से होंगे पोस्टपेड उपभोक्ताओं को जून से मिलेगी पोस्टपेड बिलिंग सुविधा, स्मार्ट पोस्टपेड बिल हर माह 10 तारीख तक जारी होंगे अब सभी नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में होंगे जारी 15 मई से 30 जून तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर शिकायत निस्तारण कैंप उपभोक्ता हित में लगातार फैसले ले रही योगी सरकार: ए.के. शर्मा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में लगे सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में संचालित स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को कानपुर में लागू यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।  ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट पोस्टपेड बिल प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग प्राप्त नहीं होगी, वहां एएमआईएसपी एजेंसियों के माध्यम से मैनुअल रीडिंग लेकर समय से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर सिस्टम में पंजीकृत नहीं हैं या गलत दर्ज हैं, उनके लिए डिस्कॉम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ता संबंधित विद्युत वितरण निगम के व्हाट्सएप चैटबॉट एवं 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपना बिल प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में अब सभी नए विद्युत संयोजन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में ही जारी किए जाएंगे। पूर्व में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के दौरान समायोजित की गई सुरक्षा धनराशि को अब विद्युत प्रदाय संहिता-2005 एवं कॉस्ट डाटा बुक-2026 के प्रावधानों के अनुसार चार समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पोस्टपेड उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति बिल जारी होने की तारीख से 15 दिन का भुगतान समय और उसके बाद 7 दिन की डिस्कनेक्शन अवधि प्रदान की जाएगी। निर्धारित समय तक भुगतान न होने पर विद्युत प्रदाय संहिता एवं टैरिफ आदेश के अनुसार विलंब अधिभार लागू होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक के बकाया विद्युत बिल को 10 आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 40, 30 और 30 प्रतिशत की तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई 2026 से 30 जून 2026 तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: अब नहीं होगी बार-बार रिचार्ज की झंझट

लखनऊ यूपी के बिजली ग्राहकों को बड़ी सौगात देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट पेड में बदलने का ऐलान हुआ है। प्रीपेड से पोस्टपेड में करने की तारीख भी आ गई है। प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की पूरी प्रक्रिया एक रात में पूरी हो जाएगी। 9 मई की रात से प्रक्रिया शुरू होगी और 10 मई तक सभी मीटर पोस्टपेड हो जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड होने पर बिजली ग्राहकों की कई समस्याओं का हल हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मीटर तेज चलने, अधिक बिल आने और बिना बिजली उपयोग के बैलेंस कटने जैसी शिकायतों से मुक्ति मिल जाएगी। बचा बैलेंस बिजली बिल में जुड़ेगा लोगों को यह शंका है कि प्रीपेड में कराए गए रिचार्ज का क्या होगा? अधिकारियों के अनुसार प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जैसे ही प्रीपेड मीटर कन्वर्ट होंगे, वैसे ही उनका बचा बैलेंस महीने के अंतिम में बनने वाले बिल में स्वत: जुड़ जाएगा। इसका पूरा डिटेल बिजली बिल में अंकित होगा। पूर्वांचल में एमडी कर रहे निगरानी पूर्वांचल के जिलों में स्मार्ट मीटरों के मोड परिवर्तन की निगरानी पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार खुद करेंगे। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 30 लाख 17 हजार 147 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। वाराणसी जोन प्रथम के 11 डिविजनों में 2.20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों उपभोक्ता हैं। एमडी मीटर लगाने वाली कंपनी जीएमआर और जीनस के अफसरों के साथ मोड परिवर्तन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चार लाख उपभोक्ता नहीं कर रहे थे मीटर रिचार्ज पूर्वांचल के 4.11 लाख उपभोक्ता प्रीपेड मीटर रिजार्च नहीं कर रहे थे। बनारस में इनकी संख्या लगभग 12 हजार थी। जांच में सामने आया कि मीटर चार्ज न कराने वाले अनेक उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहे हैं तो कुछ खाली परिसर पर मीटर लगे थे। विभाग ने बिजली चोरी करने वालों पर केस कराया था। उपभोक्ताओं से वापस लेंगे सिक्योरिटी मनी मीटर पोस्टपेड होने के बाद उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी मनी ली जाएगी। यह राशि बिजली बिल में जोड़कर भेजी जाएगी। बड़े उपभोक्ताओं से सिक्योरिटी मनी किस्त में ली जाएगी। स्मार्ट मीटर की खामियां जस की तस : उपभोक्ता परिषद  वर्ष 2019 से 2022 के बीच लगे 12 लाख स्मार्ट मीटरों में जो खामियां केंद्र सरकार की टीम ने पाई थीं, वही कमियां मौजूदा समय में लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की पुरानी खामियों को नजरअंदाज कर के प्रदेश भर में नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों की जांच केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने की थी। सितंबर 2023 में टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जो कमियां गिनाई गई थीं, वे अब लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। अवधेश ने कहा कि अगर आरडीएसएस के तहत लग रहे इन स्मार्ट मीटरों में उपभोक्ता हितों के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया होता तो पूरी परियोजना सवालों के घेरे में नहीं आती। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि उपभोक्ताओं को तीन से छह महीने के विलंब से एसएमएस अलर्ट नहीं मिल रहे। चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता बरती गई थी। उपभोक्ताओं पर नियमविरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा था। मीटर नेटवर्क में बाधा थी, जिससे डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा था।

झारखंड में स्मार्ट मीटर योजना जारी, रांची में 100% लक्ष्य की तैयारी

 रांची  केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग को अनिवार्य नहीं रखा है। अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा। इस बीच उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के विरोध और बिलिंग संबंधी शिकायतों के कारण अप्रैल 2026 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। एक तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है (नए कनेक्शन को छोड़कर)। झारखंड में क्या है स्थिति? झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम, विश्व बैंक सहायता प्राप्त झारखंड पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और राज्य योजनाओं के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार आगे बढ़ा रहा है। राज्य में कुल 18.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें 13.41 लाख मीटर केंद्र की योजना के तहत शामिल हैं। जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में करीब 7.7 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके थे। रांची 100 फीसदी लक्ष्य की ओर JBVNL का लक्ष्य है कि राजधानी रांची को पूर्ण रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाला शहर बनाया जाए। अप्रैल 2026 के अंत तक यहां 100 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में शहर में 3.35 लाख से 3.65 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में चल रहे हैं। अभी करीब 12,000 मीटर पोस्टपेड मोड में हैं और 13,000 से 16,000 कनेक्शन बाकी हैं। एचईसी क्षेत्र समेत बचे इलाकों में काम तेज गति से चल रहा है। JBVNL अधिकारियों ने बताया कि मीटर लगाना पूरी तरह मुफ्त है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से अपनी बिजली खपत, बैलेंस की जांच और रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। बैलेंस बहुत कम होने पर स्वचालित कटौती का प्रावधान है, इसलिए उपभोक्ताओं को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी गई है। अनिवार्यता पर केंद्र की नई नीति केंद्र की नई लचीली नीति के बाद झारखंड में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह जबरदस्ती अनिवार्य नहीं है। फिर भी JBVNL नए कनेक्शन, खराब मीटर बदलने और संचार सुविधा वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को प्राथमिकता दे रहा है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। कुछ इलाकों में प्रीपेड मोड चुनने वालों को 3 प्रतिशत रिबेट जैसी छूट भी दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से लाभ और चुनौतियां स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होने, बिलिंग पारदर्शी बनने और सटीक खपत लेखांकन की उम्मीद है। रांची जैसे शहरों में बिल वसूली की दक्षता बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन चुनौतियां भी सामने आई हैं। कुछ उपभोक्ताओं को पुराना बकाया दिखने, बैलेंस संबंधी भ्रम और स्वचालित कटौती की आशंका से परेशानी हुई है। JBVNL इन शिकायतों को प्राथमिकता से सुलझा रहा है और जागरूकता शिविर लगा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे फर्जी लोगों से सावधान रहें और आधिकारिक सुविधा पोर्टल पर ही आवेदन करें। केंद्र की अप्रैल 2026 की नीति अब राज्यों को ज्यादा लचीलापन दे रही है। यूपी में लगी रोक झारखंड में नहीं है, लेकिन उपभोक्ता शिकायतों को गंभीरता से लेकर सहमति और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। JBVNL का मुख्य लक्ष्य बिजली घाटा कम करना और बिजली विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। केंद्र की योजना के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। कुछ जगह विरोध के बावजूद झारखंड में यह बदलाव बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: हर महीने 10 तारीख को आएगा बिजली बिल, 25 तक भुगतान की मोहलत

लखनऊ यूपी में जिले-जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर मचे घमासान के बीच यूपी की योगी सरकार ने इस व्यवस्था को ही खत्म कर दिया है। अब स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। पहले से जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें पोस्ट पेड कर दिया जाएगा। सीएम योगी के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसे लेकर ऐलान किया और साथ ही नए नियमों के बारे में बताया है। अब हर महीने की 10 तारीख को बिजली का बिल आएगा। इसे जमा करने के लिए 15 दिनों यानी 25 तारीख तक का समय होगा। एक राहत यह भी है कि यदि एक महीने का बकाया होगा तो बिजली नहीं कटेगी। पुराने बिजली बिलों के बकाये के लिए भी व्यवस्था बना दी गई है। इसे अब किस्तों में जमा किया जा सकेगा। इसके साथ ही सिक्योरिटी मनी भी अब जमा करनी होगी। इसे भी किस्त में जमा करने की व्यवस्था कर दी गई है। हालांकि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ज्यादा बिल आने की शिकायतों का क्या होगा? इस पर अभी कुछ नहीं कहा गया है। समय से न मिले बिल तो यहां करें शिकायत ऊर्जा मंत्री न कहा कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिल हर महीने की 10 तारीख तक दिए जाएंगे। बिल मिलने की तारीख से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। जिन स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय से बिल न मिले वे वितरण कंपनियों के नंबर पर कनेक्शन नंबर बताकर बिल प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करके भी बिल प्राप्त किए जा सकेंगे। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को बिल संबंधी किसी भी समस्या के निपटारे के लिए खंड और उपखंड स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे। पूर्वांचल – 8010968292; मध्यांचल – 7669003409; पश्चिमांचल – 7859804803 दक्षिणांचल – 8010957826 केस्को – 8287835233 चार किस्तों में जमा करवाई जाएगी सिक्योरिटी पोस्टपेड मीटर में कनेक्शनधारकों से सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जाती है जबकि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि नहीं देनी होती है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड में बदले गए उनकी सिक्योरिटी राशि वापस कर दी गई थी। अब जब दोबारा प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदला जाएगा तो उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि सिक्योरिटी राशि एकमुश्त न जमा करवाकर चार किस्तों में जमा करवाई जाए ताकि उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न आए। अब लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग प्रीपेड मीटर की जबरिया लगाने के खिलाफ मुखर रहे अवधेश कुमार वर्मा ने प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने मीटर उखाड़कर फेंकने वाले उपभोक्ताओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर पावर कॉरपोरेशन ने पहले ही नियम के मुताबिक फैसला ले लिया होता तो ऐसी घटना नहीं होती। यूपी में जबरिया लगाए जा रहे थे प्रीपेड मीटर पिछले संसद सत्र के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया था कि मीटर प्रीपेड होगा या पोस्टपेड यह चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं का है। विद्युत अधिनियम – 2003 की धारा 47 (5) में यही व्यवस्था है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भी अधिसूचना जारी करके मीटरों के प्रीपेड मोड में होने की बाध्यता समाप्त कर दी थी।इसके बाद भी यूपी में लोगों के घरों पर जबरिया प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। अचानक रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे जिले-जिले आक्रोश फैल रहा था। इस आक्रोश के कारण ही चुनावी साल में सरकार किसी तरह का खतरा मोल लेना नहीं चाह रही थी। अंततः सोमवार को प्रीपेड की व्यस्था खत्म करने का ऐलान कर दिया गया।

यूपी में स्मार्ट मीटर परियोजना पर ब्रेक, UPPCL का बड़ा फैसला, टेक्निकल रिपोर्ट की होगी समीक्षा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विवाद और विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है. उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने प्रदेश में स्मार्ट मीटर बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है. यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक तकनीकी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती।  पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने इस संबंध में सभी डिस्कॉम (डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों) को निर्देश जारी कर दिए हैं. आदेश में साफ कहा गया है कि अगली सूचना तक पुराने मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरी तरह बंद रखा जाए।  दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रदेश के कई जिलों में बिजली उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था. उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के पुराने मीटर हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. कई जगहों पर लोगों ने इसे जबरन कार्रवाई बताते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया।  इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को एक तकनीकी कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी को स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों, तकनीकी खामियों और उपभोक्ताओं की समस्याओं की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. अब इस पूरे मामले में आगे की रणनीति कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।  प्रदेश में 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लग चुके आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें करीब 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं. हालांकि, मौजूदा फैसले के तहत पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है, लेकिन नए बिजली कनेक्शन केवल स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए ही दिए जाएंगे।  इसके अलावा बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन रोका नहीं जाएगा. यानी जो लोग नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें स्मार्ट मीटर के साथ ही बिजली मिलेगी, लेकिन पहले से लगे मीटरों को बदलने की कार्रवाई फिलहाल बंद रहेगी. यदि कमेटी की रिपोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो सरकार आगे इस पर फैसला लेगी।