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स्मार्ट मीटर लागू होते ही सोलर पैनल उपभोक्ताओं पर बढ़ा बिजली बिल का बोझ

गाजियाबाद  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासतौर पर सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर सोलर सिस्टम लगवाने के बावजूद अब उन्हें हजारों रुपये के बिजली बिल चुकाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति ने उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सोलर यूनिट का नहीं हो रहा समायोजन पहले की व्यवस्था में सोलर पैनल से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली यूनिट को अगले महीने के बिल में समायोजित कर दिया जाता था। यदि किसी उपभोक्ता ने रोजाना 5 यूनिट बिजली उत्पन्न की और खपत 3 यूनिट रही, तो बिल शून्य आता था और बची हुई 2 यूनिट अगले महीने में जोड़ दी जाती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। अब उपभोक्ताओं को पूरी खपत का बिल देना पड़ रहा है, चाहे उनके पास अतिरिक्त सोलर यूनिट ही क्यों न हो। तकनीकी खामियों ने बढ़ाई परेशानी जिले में अब तक 5820 से अधिक उपभोक्ताओं ने सोलर पैनल लगवाए हैं। इनमें से करीब 3000 उपभोक्ता स्मार्ट मीटर अपडेट न होने और यूनिट एडजस्टमेंट की समस्या से जूझ रहे हैं। वर्ष 2024 से अब तक सोलर योजना के तहत 25,703 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से हजारों उपभोक्ताओं ने 3 किलोवॉट से 5 किलोवॉट क्षमता तक के पैनल लगवाए हैं। सोलर पैनल लगाने में उपभोक्ताओं को डेढ़ लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक खर्च करना पड़ा है, लेकिन अब उन्हें इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। रिचार्ज न होने पर कट रही बिजली स्मार्ट मीटर के साथ लागू किए गए प्रीपेड सिस्टम ने उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ा दी है। अब उपभोक्ताओं को पहले से बिजली के लिए रिचार्ज कराना पड़ रहा है। कई मामलों में बैलेंस होने के बावजूद बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं जो उपभोक्ता समय पर रिचार्ज नहीं कर पा रहे हैं, उनके घरों की बिजली सप्लाई तुरंत बंद कर दी जा रही है। उपभोक्ताओं का छलका दर्द महेंद्र एन्क्लेव निवासी सुभाष चौधरी बताते हैं कि उन्होंने एक वर्ष पहले करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर 3 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया था। इससे रोजाना 18 से 20 यूनिट बिजली बनती थी और कम खपत होने पर अतिरिक्त यूनिट अगले महीने जुड़ जाती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद यह सुविधा समाप्त हो गई है। वहीं शास्त्री नगर निवासी रविंद्र गोयल का कहना है कि उन्होंने डेढ़ साल पहले 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगाया था, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 30 यूनिट का लाभ मिल रहा था। लेकिन पिछले डेढ़ महीने से मीटर की रीडिंग अपडेट नहीं हो रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। तकनीकी समस्या बता रहे अधिकारी स्मार्ट मीटर में उत्पन्न यह समस्या तकनीकी कारणों से सामने आई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सिस्टम को अपडेट किया जाएगा, जिससे सोलर यूनिट का समायोजन फिर से शुरू हो सकेगा। साथ ही अन्य तकनीकी समस्याओं की भी समीक्षा की जा रही है। अन्य समस्याएं भी बनीं मुसीबत स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ कई अन्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि सर्वर डाउन होने के कारण कई बार रिचार्ज नहीं हो पाता। ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। बिजली कटने के बाद सप्लाई बहाल होने में घंटों लग जाते हैं। कई उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की है कि उनके पोस्टपेड मीटर अपने आप प्रीपेड में बदल गए हैं। आज इन क्षेत्रों में रहेगी बिजली कटौती इधर, मरम्मत कार्य के चलते फ्राइडे मार्केट और भोवापुर क्षेत्र में आज सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। इससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

6 लाख 82 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 4.40 करोड़ रुपये की छूट

भोपाल. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई है। इस 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत कंपनी कार्यक्षेत्र में कुल 6 लाख 82 हजार 249 उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 4 करोड़ 40 लाख 44 हजार रुपये की छूट का सीधा लाभ मिला है, जिसमें से भोपाल जिले में 3 लाख 60 हजार 423 उपभोक्ताओं के बिलों में 2 करोड़ 41 लाख 85 हजार रुपये की छूट प्रदान कर उन्हें लाभान्वित किया गया है। प्रबंध संचालक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाएं और अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाने के लिये आगे आएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि यह उपभोक्ताओं को अपनी खपत के प्रति जागरूक कर आर्थिक लाभ दिला रहा है। 'टाइम ऑफ डे' टैरिफ जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर उपभोक्ता दिन के समय बिजली उपयोग कर अपने बिलों में भारी बचत कर सकते हैं। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्मार्ट मीटर के संबंध में उपभोक्ता किसी भी जानकारी अथवा समस्या के निराकरण के लिये कॉल सेन्टर 1912 अथवा नोडल अधिकारी कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से ई-मेल आईडी Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी, स्मार्ट मीटर समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश

लखनऊ  स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर आ रही समस्याएं अब खत्म होंगी। सीएम योगी ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया है। सीएम योगी ने शिकायतों को दुरुस्त करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद यूपी पावर कारपोरेशन लि. ने पूरे प्रदेश में व्यवस्था सुधारने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए वह जल्द ही 7 दिनों का विशेष अभियान चलाएगा। इस अभियान के तहत अधिकारी घर-घर जाकर उपभोक्ताओं की समस्याओं को जानेंगे और उसका यथाशीघ्र समाधान करेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उप्र. पावर कारपोरेशन लि. के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने बैठक कर जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों का प्रतिदिन निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में 7 दिन का विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से सीधे संपर्क कर उनकी समस्याओं के बारे में जानेगा और उसका यथाशीघ्र समाधान करेगा। हर अधिकारी को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी यूपी पावर कारपोरेशन लि. की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में सभी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। किसी अधिकारी को 10 से 20 उपभोक्ताओं की तो किसी अधिकारी इससे भी ज्यादा उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसमें कॉर्पोरेशन एवं डिस्कॉम के अधिकांश कार्मिकों की ड्यूटी लगाने के भी निर्देश दिए हैं। इस अभियान के जरिये अधिकारी स्मार्ट मीटर और हेल्प लाइन नम्बर 1912 पर मिलने वाली शिकायतों का निदान करेंगे। इसके बाद उस शिकायत का फीडबैक लेकर विभाग को अवगत कराएगा। स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी शिकायतों का रोजाना निस्तारण मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अध्यक्ष डॉ. गोयल ने लखनऊ स्थित शक्ति भवन में उप्र. पावर कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक पंकज कुमार, डिस्काम के प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी शिकायतों का रोजाना निस्तारण किया जाए। डिस्कॉम स्तर पर इसके लिए बनाए गये कंट्रोल रूम और मॉनिटरिंग सेल लगातार समीक्षा करें। गलत बिलिंग पर जिम्मेदारी तय कर होगी कार्रवाई इसके साथ ही डॉ. आशीष गोयल ने निर्देश दिया कि ओवर बिलिंग या गलत बिल नहीं बनने चाहिए। अगर उपभोक्ता गलत बिलिंग की शिकायत करता है तो तत्काल जांच करके जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। साथ ही गलत बिल तत्काल ठीक किया जाए। इसमें हर स्तर पर सावधानी बरती जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की समस्याओं को तत्काल हल कराया जाए। साथ ही हेल्पलाइन नम्बर 1912 की लगातार समीक्षा करें। साथ ही इस पर आने वाली शिकायतों खासकर स्मार्ट मीटर से संबंधित सूचना और शिकायतों का उसी दिन निस्तारण किया जाए। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. आशीष गोयल ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन निगेटिव बैलेंस के कारण स्वतः कट गए हैं, उनसे संपर्क कर यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि उन्होंने रिचार्ज क्यों नहीं कराया। यह भी समझा जाएगा कि उन्हें किस तरह की समस्या आ रही है। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के रिचार्ज कराने के बावजूद कनेक्शन नहीं जुड़ा है, उनके मामलों की भी गहन जांच कर तत्काल समाधान किया जाएगा।

यूपी में उल्टा दांव, उपभोक्ता ने विभाग से मांगा मुआवजा, स्मार्ट मीटर और सर्वर की खराबी ने पहुंचाई आर्थिक चोट

महराजगंज महराजगंज जिले के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। बिजली विभाग को दुकानदार ने भेजा 1.69 लाख का नोटिस, अफसर दंग; जानें पूरा मामला  आपने अक्सर बिजली विभाग से उपभोक्ताओं को नोटिस जारी होते देखा-सुना होगा। लेकिन उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्मार्ट मीटर की बीलिंग व्यवस्था से परेशान एक कामर्शियल उपभोक्ता ने बिजली विभाग को 1.69 लाख रुपये के नुकसान का नोटिस भेज दिया है। नोटिस देखकर बिजली विभाग के अधिकारी दंग रह गए हैं। उपभोक्ता का आरोप है कि विभागीय तकनीकी खामी और बिल अपडेट में देरी के कारण उसे सात दिन में पांच बार बिल जमा करना पड़ा, बावजूद इसके बिजली आपूर्ति बाधित रही। महराजगंज जिले के धनेवा-धनेई चौराहे के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को वेबसाइट पर दिख रहे 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। शिकायत करने पर विभाग ने 5444 रुपये बकाया बताया, जिसे 29 मार्च को जमा किया गया। इसके बाद भी मीटर में बार-बार माइनस बकाया दिखता रहा।उपभोक्ता को 1500 रुपये और फिर 500 रुपये अतिरिक्त जमा करने पड़े। इसके बाद 30 मार्च को आपूर्ति बहाल हो सकी। दुकानदार का कहना है कि चार दिन बिजली गुल रहने से दुकान में रखा दूध, पनीर व खोया खराब हो गया, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उपभोक्ता ने कहा कि यदि पहली बार में सही बिल प्रदर्शित होता तो न तो बार-बार भुगतान करना पड़ता और न ही यह नुकसान होता। इस मामले में अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी के माध्यम से एक्सईएन को नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर 1.69 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर उपभोक्ता फोरम में वाद दाखिल किया जाएगा, जिसमें विभाग को नोटिस खर्च और अधिवक्ता फीस भी वहन करनी होगी।

मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर से बिजली बिल में तगड़ा झटका, लोड बढ़ने से हर महीने आएगा ज्यादा बिल

भोपाल   प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही जोर का झटका लगेगा। केंद्र के इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2025 में बिजली बिल का लोड बढ़ाने के लिए स्मार्ट तरीका अपनाया गया है। इसके तहत उपभोक्ता ने यदि स्वीकृत लोड से तीन बार अधिक बिजली खर्च की तो अधिकतम खर्च होने वाली बिजली आधार पर ही लोड स्वतः अपडेट हो जाएगा। इस नए लोड को तय करने के लिए किसी कर्मचारी या आवेदन की जरूरत नहीं होगी। नए लग रहे स्मार्ट मीटर ही यह लोड अपडेट कर देगा। इससे हर माह उपभोक्ताओं की जेबें खाली होंगी। अभी घरेलू उपभोक्ता के टैरिफ में 150 यूनिट तक 129 रुपए का फिक्स्ड चार्ज तय है। इसके बाद प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) के बाद 28 रुपए तक फिक्स्ड चार्ज बढ़ेगा। संस्थाओं के 10 किलोवॉट स्वीकृत लोड तक अभी 161 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। नए टैरिफ में इसे 15% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। यानि बिना किसी सुनवाई, प्रस्ताव उपभोक्ता का बिजली बिल फिक्स्ड चार्ज हर साल चुपके से बढ़ा दिया जाएगा। नए नियम से घरेलू उपभोक्ताओं की जेब कैसे ढीली होंगी, समझें सवाल- मैं घरेलू उपभोक्ता हूं। मेरे घर में 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन है। मुझे कितना फिक्स्ड चार्ज देना होगा? जवाब- यदि आपने 51-150 यूनिट बिजली हर माह खर्च की तो 129 रु. प्रति कनेक्शन देने होंगे। सवाल- यदि मैंने स्वीकृत 1 किलोवॉट लोड कनेक्शन पर 151-300 यूनिट बिजली प्रति माह खर्च कर दी तो क्या होगा ? जवाब- आपको प्रति 0.1 किलोवॉट (15 यूनिट) भार पर 28 रुपए ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देने होंगे। यानी, हर 300 यूनिट बिजली खर्च करने पर 280 रुपए देने होंगे। यह 280 रुपए बेस फिक्स्ड चार्ज 129 के अलावा जुड़ेंगे। यूं कहें आपको हर माह 409 रुपए फिक्स्ड चार्ज देना होगा। सवाल- यदि मैंने 1 किलोवॉट लोड का कनेक्शन लिया और गर्मी में मैंने 2 किलोवॉट बिजली खपत कर ली तब ? जवाब– यदि आपने साल में तीन साल में 2 किलोवॉट बिजली खपत की तो आपका स्वीकृत लोड ऑटोमैटिक दो किलोवॉट हो जाएगा। फिर इसी भार पर आपको फिक्स्ड चार्ज देना होगा। चाजे का ऐसा खेल किसी घरेलू बिजली उपभोक्ता का स्वीकृत लोड दो किलोवॉट है। वह यदि एक साल में तीन बार दो की बजाय 5 किलोवॉट लोड इस्तेमाल करता है तो साल के अंत में लोड ऑटोमैटिक रूप से 5 किलोवॉट हो जाएगा। यानी, जो उपभोक्ता दो किलोवॉट लोड पर प्रति 0.1 किलोवॉट 15 यूनिट 28 रुपए की दर से 72 रुपए देता है। 5 किलोवॉट होने पर उसे 280 रुपए देने होंगे। क्या है फिक्स्ड चार्ज फिक्स्ड चार्ज कनेक्शन के स्वीकृत लोड पर आधारित है। इसे बिजली कंपनी हर माह उपभोक्ताओं से वसूलती है। फिर चाहे वह बिजली का उपयोग करे या न करे। यह यदि स्वीकृत लोड 2 किलोवॉट व फिक्स्ड चार्ज 100 रुपए/किलोवॉट है। इसमें एक माह में एक यूनिट भी बिजली जलाई तो ₹200 फिक्स्ड चार्ज देना पड़ेगा। यानी, लोड बढ़ेगा तो फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ेगा। यह भी जाने मैरिज गार्डन, सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अस्थायी कनेक्शन पर 1 किलोवॉट स्वीकृत लोड पर अभी 82 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज है। बड़े संस्थानों में 10 किलोवॉट तक लोड पर 162 रुपए/किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज लगेगा। यानी, कुल फिक्स्ड चार्ज ₹1620 होगा। लोड 10 से 11 किलोवॉट होने पर 281 रुपए प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज। कुल 1620 के अलावा 281 रुपए/किलोवॉट बढ़ेगा। आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा- सचिव केंद्रीय नियम तय प्रक्रियाओं से बनाए जाते हैं। पहले सुझाव आपत्ति ली जाती है। यहां नियामक आयोग इनके अनुसार प्रावधान करेगा।- उमाकांत पांडा, सचिव, एमपीइआरसी   

बिजली उपभोक्ताओं से वसूले गए 127 करोड़ वापस, यूपी सरकार का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए आदेश दिया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए। आयोग ने कहा है कि 1 अप्रैल के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे लिए गए हैं, उनकी कुल लगभग 127 करोड़ रुपये की राशि बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाई जाए।   यह आदेश आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है। उस दिन पाॅवर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) को व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले में बताया गया कि बिजली वितरण कंपनियों ने नए बिजली कनेक्शन देते समय सिंगल फेज कनेक्शन पर 6016 रुपये और थ्री फेज कनेक्शन पर 11341 रुपये वसूले। इसमें सिंगल फेज पर लगभग 3216 रुपये और थ्री फेज पर करीब 7241 रुपये अतिरिक्त वसूले गए थे। इस संबंध में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग में याचिका दाखिल कर इस वसूली को अवैध बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच बिजली विभाग ने 353357 नए कनेक्शन जारी किए थे, जिनसे यह अतिरिक्त राशि वसूली गई। आयोग के आदेश के बाद परिषद के अध्यक्ष ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की ओर से आयोग का आभार जताया।

भोपाल वृत्‍त के करीब 3 लाख उपभोक्ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से अधिक की छूट

भोपाल वृत्‍त के लगभग 3 लाख उपभोक्‍ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से अधिक की छूट स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिला सोलर ऑवर में 20 प्रतिशत छूट का लाभ भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्य क्षेत्र में 5 लाख 20  हजार 457 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ प्रदान करते हुए जनवरी 2026 में कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार की रियायत प्रदान की गई है। इसमें भोपाल शहरी एवं ग्रामीण वृत्‍त के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्‍ताओं को 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रूपए की दिन के टैरिफ में छूट मिली है। कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर टाइम ऑफ डे छूट के तहत यह रियायत प्रदान की गई है।   मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत माह जनवरी 2026 के दौरान यह छूट प्रदान की गई है। दिन के टैरिफ में स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में स्‍मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और स्‍मार्ट मीटर लगवाने से न घबराएं। स्‍मार्ट मीटर उनके लिए हर तरह से फायदेमंद है और स्‍मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग और बिलिंग के साथ ही कार्यप्रणाली में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद मिलती है। स्‍मार्ट मीटर बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप से मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाया जा सकता है। उपभोक्‍ता ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन मोबाइल एप के द्वारा किसी भी समय कहीं से भी देख सकते हैं। स्‍मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को कम करने में सहायक होकर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है।  

बिजली कंपनी का बड़ा ऐलान, एमपी के 15 जिलों को 1500 करोड़ की छूट और स्मार्ट मीटर के फायदे बताए जाएंगे

भोपाल   राज्य शासन के निर्देश पर पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी इंदौर सहित सभी 15 जिलों में 9 से 23 फरवरी तक स्मार्ट मीटर पखवाड़ा मनाएगी। इस दौरान उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे, त्रुटिरहित व त्वरित बिजली बिल सेवा, ऊर्जस ऐप पर स्मार्ट मीटर की लाइव जानकारी, गैर घरेलू उपभोक्ताओं को पॉवर फैक्टर की छूट, सौर ऊर्जा गणना के लिए स्मार्ट मीटर से मीटर राशि की बचत और दिन में बिजली खपत के लिए टीओडी गणना इत्यादि लाभों को बताया जाएगा। स्मार्ट मीटर के फायदे बताए जाएंगे उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाए गए चेक मीटर संबंधित रिपोर्ट की जानकारी दी जाएगी, जिसमें दोनों ही मीटरों में खपत का स्तर समान दर्ज हुआ है। पखवाड़े के दौरान पश्चिम क्षेत्र कंपनी की ओर से शिविर, कार्यशालाएं, शिकायत निवारण, तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष सत्र, प्रदर्शनी इत्यादि के आयोजन होंगे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य आम लोगों को स्मार्ट मीटर के फायदे बताने, भ्रम दूर करने एवं उपभोक्ताओं बिजली की संतुष्टि को लेकर रचनात्मक प्रयास है। 1500 करोड़ की छूट मिलेगी बिजली वितरण कंपनी औद्योगिक, उच्चदाब उपभोक्ताओं को नियमानुसार प्रति माह, प्रति बिल निर्धारित छूट (रिबेट) प्रदान कर रही है। पिछले बारह माह के दौरान नए कनेक्शनों पर छूट, कैप्टिव छूट, इंक्रीमेंटल छूट, टीओडी छूट, पॉवर फैक्टर छूट, सब्सिडी, प्रॉम्प्ट पैमेंट, ग्रीन फील्ड छूट मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए की छूट प्रदान की गई है ताकि उद्योगों को गति मिले, रोजगार, विकास के अवसर में पर्याप्त वृद्धि हो।

भोपाल और पूरे कंपनी क्षेत्र में 6.57 लाख स्मार्ट मीटर हुए स्थापित

भोपाल सहित पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में अब तक 06 लाख, 57 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित दिन के टैरिफ में मिल रही 20 प्रतिशत की छूट भोपाल  केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। जहां स्‍मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है तथा दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी मिल रही है। कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 6 लाख, 57 हजार 147 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 3 लाख, 30 हजार से अधिक स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। कंपनी ने कहा है कि स्‍मार्ट मीटर लगने से उपभोक्‍ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्‍मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्‍मार्ट मीटर के फायदे बताते हुए कहा है कि स्‍मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्‍त किया जा सकता है, जिससे उपभोक्‍ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। कंपनी ने बताया कि जहां-जहां भी स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं, वहां पर बिलिंग तथा रीडिंग निर्धारित समय पर हो रही है, इससे सभी उपभोक्‍ता संतुष्‍ट हैं। नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। दिसंबर माह का बिल जो कि जनवरी  माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है।  

भोपाल में स्मार्ट मीटर विरोध तेज, 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत कई मांगों को लेकर होगा प्रदर्शन

भोपाल स्मार्ट मीटर के विरोध में 6 अक्टूबर को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन होगा। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमईसीए) के बैनरतले प्रदेशभर से उपभोक्ता डॉ. अंबेडकर पार्क में जुटेंगे। वे 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने, बिजली के रेट कम करने जैसी 11 मांग भी सरकार के सामने रखेंगे। स्मार्ट मीटर के लगातार विरोध के बीच मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्यता का नियम तीन साल आगे बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस एक फैसले ने स्मार्ट मीटर अभियान की रफ्तार को फिलहाल के लिए रोक दिया है। दरअसल पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काम्स) ने आयोग से स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता की अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। कंपनियों का तर्क था कि स्मार्ट मीटर मात्र बिजली खपत मापने का एक यंत्र नहीं है, बल्कि एक वृहद विद्युत प्रणाली है। एसोसिएशन की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया, मध्यप्रदेश सहित देशभर में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बिजली के प्री-पेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। ये विरोध कोई औपचारिकता या कोई निहित स्वार्थ पर आधारित राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि हमारी दैनिक आय और जीवन मरण के प्रश्न से जुड़ा है। हाल ही में इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। बैठक में मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा आदि पदाधिकारी भी मौजूद थे। पदाधिकारी बोले-प्रदेश में स्मार्ट मीटर की स्थिति ठीक नहीं स्मार्ट मीटर से अत्यधिक बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या मध्यप्रदेश के सभी जिलों में है। भोपाल में ही उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका बिल हर महीने भरने के बावजूद एक उपभोक्ता का 10 हजार, दूसरे का 20 हजार, तीसरे का 29 हजार रुपए आया है। ग्वालियर में उपभोक्ता जिसका एक कमरे का घर है, के बिल 5 हजार रुपए तक आ रहे हैं। ग्वालियर के 3 उपभोक्ताओं ने बताया कि महीने में दो बार बिल आ गया है। दोनों 6-6 हजार का है। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर आदि जिलों में भी आम उपभोक्ता जिसके बिजली बिल 700-800 आते थे, वे हजारों में आ रहे हैं। गुना में एक किसान को 2 लाख से ज्यादा का बिजली बिल दिया गया। जहां-जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन सभी जिलों में उपभोक्ता बिजली बिलों से पीड़ित है। लोग अपने गहने और बर्तन बेचकर बिल भर रहे हैं। इसमें मीटर के साथ नेटवर्किंग, मीटर डेटा मैनेजमेंट, बिलिंग, सर्वर आदि का एकीकरण आवश्यक है। इसके लिए उनके के पास प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। इधर, स्मार्ट मीटर से अनाप-शनाप बिल की वजह से उपभोक्ताओं का विरोध लगातार बना हुआ था। कंपनियों ने आयोग के सामने तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन इस याचिका में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सर्वर का एकीकरण नहीं होने और अप्रशिक्षित कर्मियों की वजह से स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गलतियां हो रही हैं। अब तीनों कंपनियां पहले तकनीकी कमी दूर करेंगी। इस बीच नए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती होगी। उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में तेजी लाई जाएगी। कंपनी ने दिए हैं ये तर्क     फिलहाल पूरे देश में स्मार्ट मीटर की कमी बनी हुई है।     आरडीएसएस योजना के तहत मीटरिंग प्रोजेक्ट में कई समस्याएं हैं।     टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है।     अलग-अलग डिस्काम्स की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। उपभोक्ताओं को मिलेंगी ये राहत     बिजली कंपनियां शहरी क्षेत्र में नए कनेक्शन के तहत स्मार्ट मीटर न होने पर सामान्य मीटर भी लगा सकेंगी।     ग्रामीण क्षेत्र में नान-स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं।     पुराने खराब, जले, रुके हुए मीटर भी अब 31 मार्च 2028 तक बदले जा सकेंगे। फैक्ट फाइल     1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर मप्र में लगाए जाने हैं।     38.47 लाख पहले चरण में स्वीकृत।     99.22 लाख दूसरे चरण में स्वीकृत।     12.56 लाख मीटर तीनों डिस्काम ने अब तक लगाए। इसलिए विरोध     स्मार्ट मीटर मोबाइल रीचार्ज की तरह प्री-पेड क्षमता वाले डिवाइस के साथ है। जिसे कंपनी मोबाइल फोन की तरह कभी भी प्री-पेड कर सकती है।     इसकी मानीटरिंग व कमांड भी सेंट्रल सिस्टम के तहत है। इसमें कंपनी के लिए उपभोक्ता की यूनिट्स को भी बदलना असंभव नहीं है।     मीटर टाइम आफ डे (TOD) का आकलन करने की क्षमता रखता है। दिन-रात का अलग-अलग रेट है।     मीटर में कोई खराबी आ जाने की स्थिति में मीटर को बदलने पर फिर से यह रकम चुकानी होगी। यह जबरदस्त बोझ है, जो कि आम उपभोक्ता के ऊपर डाला जा रहा है।     स्मार्ट मीटर का बिल नहीं चुका पाने की स्थिति में बिजली तुरंत काट दी जा रही है। जुड़वाने के नाम पर 350 रुपए उपभोक्ता से लिए जा रहे हैं, जबकि हमारी सिक्योरिटी राशि बिजली विभाग के पास पहले से ही जमा है।     बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही है। जिससे अशिक्षित और तकनीकी रूप से अक्षम उपभोक्ताओं के लिए समस्या पैदा हो गई है।     हर उपभोक्ता के पास स्मार्ट फोन नहीं है। बिजली का बिल भरने के लिए ही लोगों को फिर मोबाइल खरीदना होगा।     बिजली कंपनी से हमारा अनुबंध पोस्टपेड मीटर के लिए है, न कि प्री-पेड मीटर के लिए। फिर इस प्रीपेड क्षमता वाले मीटर को क्यों लगाया गया है?