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योगी सरकार ने बदल दी बाढ़ प्रबंधन की रणनीति, नदियों से गाद निकालने पर जोर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

राजेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं

 आगरा आगरा के राजपुर चुंगी स्थित प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर में प्रदेश सरकार 1.42 करोड़ रुपये की लागत से काम कराएगी। इसमें मुख्य मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होने के साथ मंदिर परिसर में फ्लोरिंग और स्टोन क्लैडिंग का काम किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेंच, पानी की सुविधाएं होंगी तथा मंदिर परिसर में ड्रेनेज की व्यवस्था की जाएगी। राजेश्वर महादेव मंदिर शहर के चार प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। यहां सावन में और महाशिवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। सौंदर्यीकरण के तहत मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, दिशा-निर्देश के लिए साइनेज, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, विश्राम स्थल और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जा रही है, ताकि दर्शनार्थियों को कोई परेशानी न हो। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि राजेश्वर महादेव मंदिर का पर्यटन विकास क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगा। जो काम होंगे, उससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ना है। इससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग राजेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह मंगला आरती के दौरान सफेद रंग, दोपहर की आरती के दौरान हल्का नीला और शाम की आरती के दौरान गुलाबी नजर आता है। 900 साल पुराने मंदिर की स्थापना के बारे मेंं किंवदंती प्रचलित है, जिसके अनुसार राजाखेड़ा निवासी सेठ नर्मदा नदी के पास से बैलगाड़ी से शिवलिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहे थे। मंदिर के नजदीक ही एक कुआं था, आराम करने के दौरान सेठ को शिवजी ने स्वप्न दिया कि शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया जाए। सेठ ने इसकी अनदेखी की और शिवलिंग को ले जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन शिवलिंग वहीं स्थिर हो गया। तभी से यहां शिवलिंग स्थापित है।  

मोहनलालगंज में मादक पदार्थ गिरोह का भंडाफोड़, 1.4 किलो अफीम के साथ आरोपी पकड़ा गया

लखनऊ लखनऊ में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.426 किलोग्राम अफीम बरामद की है। आरोपी को मोहनलालगंज क्षेत्र में राधा स्वामी सत्संग आश्रम से लखनऊ की ओर माधवखेड़ा हनुमान मंदिर के पास पकड़ा गया। बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। एसटीएफ लखनऊ के पुलिस उपाधीक्षक धर्मेश कुमार शाही के निर्देशन में टीम लगातार मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही थी। बुधवार को इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तार तस्कर की पहचान बिहार के बेतिया निवासी शाहीम आलम के रूप में हुई है। आरोपी ने कई अहम खुलासे किए पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसका गिरोह लंबे समय से अफीम की खरीद-फरोख्त कर रहा था और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब तथा हरियाणा समेत कई राज्यों में इसकी सप्लाई करता था। आरोपी के अनुसार, गिरोह एक किलो अफीम की सप्लाई के बदले करीब 6 से 7 लाख रुपये तक लेता था। तस्करी के दौरान खरीदारों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती थी। तय स्थान पर पहुंचने के बाद संबंधित व्यक्ति खुद संपर्क कर भुगतान करता और माल लेकर चला जाता था। गिरोह सीमित संपर्क और गुप्त तरीकों से लेन-देन करता था ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। फिलहाल एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ मोहनलालगंज थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है।  

मेरिट आधारित चयन से होगी सीएम फेलो की तैनाती, हर जिले में नियुक्त होंगे युवा

लखनऊ प्रदेश के हर जिले में तैनात होने वाले सीएम फैलो को सरकारी नौकरियों में उम्र में छूट मिलेगी। इस पद के लिए योग्य युवाओं के चयन के लिए पूरी प्रक्रिया जारी की गई है। तैनाती से पहले दो हफ्ते का प्रशिक्षण कराया जाएगा। प्रयोग सफल होने पर ये संख्या बढ़ाई जाने का भी प्रस्ताव है। प्रक्रिया के तहत प्रदेश के सभी जिलों में तैनात किए जाने वाले सीएम फेलो को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान किया गया है। पिछले सप्ताह यूपी कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब चयन प्रक्रिया और तैनाती व्यवस्था पर तेजी से काम शुरू हो गया है। अपर मुख्य सचिव नियोजन आलोक कुमार के मुताबिक, इस पद के लिए चयन यूपी स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के तहत होगा जो मेरिट आधारित होगा। कुल 100 अंकों की चयन प्रणाली बनाई गई है, जिसमें 50 अंक लिखित परीक्षा, 30 अंक अधिमानी अर्हता और 20 अंक साक्षात्कार के निर्धारित किए गए हैं। इससे केवल अकादमिक योग्यता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक समझ, नेतृत्व क्षमता और क्षेत्रीय कार्य अनुभव वाले युवाओं को भी मौका मिलेगा। उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ लिखित परीक्षा में नीति निर्माण, प्रशासनिक समझ, समसामयिक घटनाक्रम, डेटा विश्लेषण, डिजिटल गवर्नेंस और समस्या समाधान से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। अधिमानी अर्हता के तहत नीति अनुसंधान, सामाजिक क्षेत्र में कार्य अनुभव, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डाटा मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को अतिरिक्त वेटेज दिया जाएगा। तैनाती से पहले चयनित फेलो को दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रयोग सफल रहने पर बढ़ाई जाएगी संख्या शुरुआती चरण में सीमित संख्या में फेलो की तैनाती की जाएगी, लेकिन शासन ने संकेत दिए हैं कि प्रयोग सफल रहने पर फेलो की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट का प्रावधान इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।    

राज्य कर विभाग की नई पहल, व्यापारियों की समस्याओं का मौके पर होगा समाधान

 लखनऊ  राज्य कर विभाग अब ‘व्यापारी संवाद’ कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक व्यापारियों तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इसके लिए संवाद कार्यक्रम अब सेक्टर स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। संवाद के माध्यम से विभागीय अधिकारी व्यापारियों को कर नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक करने के साथ ही उनकी समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान करने की कोशिश करेंगे। संवाद कार्यक्रम जून से शुरू होंगे। राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि व्यापारी संवाद कार्यक्रम में क्षेत्र के व्यापारी, चार्टर्ड एकाउंटेंट के साथ ही प्रतिष्ठित लोग बुलाए जाते हैं। अब तक यह कार्यक्रम विभाग के 20 जोन में ही आयोजित किए जाते थे, पहली बार इसका आयोजन विभाग के 364 सेक्टरों में करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से विभाग अधिक से अधिक व्यापारियों तक अपनी बात पहुंचा सकेगा। व्यापारी संवाद सम्मेलनों में मुख्यालय स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारी व्यापारियों के साथ ही उपस्थित अन्य लोगों को जीएसटी नियमों की जानकारी, रिटर्न फाइलिंग और विधिक व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करेंगे। मुख्यालय से जाने वाले अधिकारी व्यापारियों से संवाद के दौरान उनकी दिक्कतें सुनने के साथ ही साथ ही मौके पर ही समाधान करने की कोशिश करेंगे। नए व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में करदाताओं के अनुकूल माहौल तैयार करना है।

पर्यटन मंत्री का बड़ा आदेश, निर्माण कार्यों में देरी पर होगी कठोर कार्रवाई

 लखनऊ  पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने वर्ष 2027 में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले पर्यटन विभाग की परियाेजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा है कि स्वीकृत परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया पूरा करते हुए 20 मई तक स्वीकृति पत्र जारी करें। निर्माणाधीन परियोजनाओं को 20 नवंबर तक हर हाल में पूरा कराया जाए। चेतावनी दी कि फाइलों को लटकाने की संस्कृति छोड़ दें, ऐसी शिकायत पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। पर्यटन भवन में आयोजित बैठक में मंत्री ने कहा कि चुनाव को देखते हुए निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा कर लोकार्पण के लिए तैयार करें। नवंबर तक परिणाम धरातल पर दिखना चाहिए। वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन और संस्कृति, दोनाें विभागों द्वारा कराए गए कार्य, लागत, स्वीकृति और व्यय धनराशि, योजनाओं की प्रगति आदि की रिपोर्ट तैयार की जाए। मंत्री ने कहा कि कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र में 16 अप्रैल को शिलान्यास के बाद अब तक काम शुरू नहीं हुआ है और इस संबंध में कार्यदायी संस्था एवं अधिकारियों द्वारा गलत सूचना दी गई। यह आपत्तिजनक है। निर्देश दिए कि समय-समय पर मुख्यालय से अधिकारियों की टीम फोटोग्राफर सहित मौके पर जाकर कार्य की प्रगति का भौतिक सत्यापन करे। परियोजनाओं में विलंब होने पर संबंधित कार्यदायी संस्था और अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट को संचालित किया जाए। जिलाें के स्थापना दिवस पर महोत्सव का आयोजन कराया जाए। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने निर्देश दिए कि जो कार्य शुरू किए गए हैं, उन्हें समय से पूरा किया जाए। भुगतान के लिए समय सारिणी निर्धारित की जाए। बैठक में विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक ईको पर्यटन पुष्प कुमार के., विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी, संयुक्त निदेशक प्रीति श्रीवास्तव, प्रचार अधिकारी कीर्ति आदि मौजूद थे।  

ड्यूटी से गायब और भ्रष्टाचार में लिप्त डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, डिप्टी सीएम का बड़ा हंटर

लखनऊ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है। ड्यूटी से गायब रहने, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और मरीजों के इलाज में कोताही बरतने वाले 5 डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा, एक सीएमओ समेत 16 अन्य चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। 5 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त लंबे समय से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें डॉ. अलकनन्दा (गोरखपुर), डॉ. रामजी भरद्वाज (कुशीनगर), डॉ. सौरभ सिंह (बलरामपुर), डॉ. विकलेश कुमार शर्मा (अमेठी) और डॉ. मोनिका वर्मा (औरैया) शामिल हैं। निजी अस्पतालों से साठगांठ पर गिरी गाज अम्बेडकर नगर के सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा को निजी नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण में अनियमितता का दोषी पाया गया है। व्यक्तिगत स्वार्थ और पद के दुरुपयोग के मामले में इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, हरदोई के संडीला अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर भी अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर गाज गिरी है। वसूली और अभद्रता पर भी कार्रवाई हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। उन पर प्रसूताओं से अवैध वसूली और अभद्रता के आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके साथ ही, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल के खिलाफ गाली-गलौज और अभद्रता के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अन्य प्रमुख कार्रवाइयां: प्रयागराज: मेजा अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर का प्रशासनिक लापरवाही के कारण तबादला और जांच। मथुरा: गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाने पर डॉ. देवेंद्र कुमार और डॉ. विकास मिश्रा पर एक्शन। झांसी: प्राइवेट प्रैक्टिस करने के दोषी ट्रामा सेंटर के आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू की 2 वेतनवृद्धियां रोकी गईं। प्रतिनियुक्ति समाप्त: अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने पर डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। सेवा से बर्खास्त किए गए डॉक्टर डॉ. अलकनन्दा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, गोरखपुर डॉ. रामजी भरद्वाज: चिकित्साधिकारी, कुशीनगर डॉ. सौरभ सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. विकलेश कुमार शर्मा: सी.एच.सी. जगदीशपुर, अमेठी डॉ. मोनिका वर्मा: सी.एच.सी. दिबियापुर, औरैया विभागीय कार्यवाही के दायरे में आए अधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल: मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), अम्बेडकर नगर डॉ. संजय वर्मा: डिप्टी सी.एम.ओ., अम्बेडकर नगर डॉ. मनोज कुमार सिंह: चिकित्सा अधीक्षक, सण्डीला, हरदोई डॉ. शमीम अख्तर: अधीक्षक, सी.एच.सी. मेजा, प्रयागराज डॉ. अनिल कुमार सिंह: तत्कालीन अधीक्षक, लम्भुआ (वर्तमान- कादीपुर), सुल्तानपुर डॉ. धर्मराज: चिकित्साधिकारी, सुल्तानपुर डॉ. देवेन्द्र कुमार: इमरजेंसी मेडिकल अफसर, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. विकास मिश्रा: सर्जन, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. अन्नू चन्द्रा: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. शिवेश जायसवाल: चिकित्साधिकारी, राजकीय चिकित्सालय, वाराणसी डॉ. राजेश कुमार वर्मा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. गणेश कुमार: चिकित्सा अधीक्षक, सी.एच.सी. गोला, लखीमपुर खीरी डॉ. अरूण कुमार: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव: संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर: चिकित्साधिकारी, जिला संयुक्त चिकित्सालय, सम्भल डॉ. रितुज अग्रवाल: सह-आचार्य (अस्थिरोग), राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूँ वेतनवृद्धि रोकने और अन्य दंड पाने वाले डॉक्टर डॉ. लालमणि: स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय, हमीरपुर (3 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. सन्तोष सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर (4 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. निशा बुन्देला: चिकित्साधिकारी, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. पवन साहू: आर्थोसर्जन, ट्रामा सेन्टर, मोठ, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. आदित्य पाण्डेय: स्टेट हेल्थ एजेंसी (वाराणसी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल पद पर भेजे गए) डॉ. प्रतिभा यादव: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. महसी, बहराइच (परिनिन्दा का दण्ड) डॉ. राकेश सिंह: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. राल, मथुरा (परिनिन्दा का दण्ड)

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर सरकार का यू-टर्न, अब नहीं देना होगा नया सिक्योरिटी चार्ज

लखनऊ उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत की खबर है। स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने के बाद नई दरों पर सिक्योरिटी मनी वसूलने के फैसले को पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं से पुरानी जमा सिक्योरिटी ही मान्य होगी और नई कॉस्ट डेटा बुक के तहत अतिरिक्त पैसा नहीं वसूला जाएगा। देर रात बदला गया आदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के कड़े विरोध के बाद रात करीब 10:30 बजे पावर कॉर्पोरेशन ने अपना आदेश संशोधित किया। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए इसे 'कानून की ताकत' बताया है। कॉर्पोरेशन ने पहले आदेश दिया था कि पोस्टपेड होने पर उपभोक्ताओं को नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार बढ़ी हुई सिक्योरिटी मनी देनी होगी, जिसका सीधा बोझ लगभग 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था। क्या था विवाद? जब पावर कॉर्पोरेशन ने उपभोक्ताओं के पोस्टपेड कनेक्शन को प्रीपेड मोड में बदला था, तब उनकी जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड अकाउंट में रिचार्ज के रूप में डाल दिया गया था। अब दोबारा पोस्टपेड होने पर कॉर्पोरेशन नई दरों से सुरक्षा राशि मांग रहा था। अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, "प्रदेश के कई कनेक्शन 10 साल, 20 साल या उससे भी पुराने हैं। उस समय के नियमों के अनुसार सिक्योरिटी जमा की गई थी। अब वर्तमान की नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त पैसा मांगना पूरी तरह गलत और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था।" उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में विद्युत नियामक आयोग में लोकमत प्रस्ताव दाखिल करने की तैयारी भी कर ली थी। परिषद का तर्क था कि चूंकि उपभोक्ताओं ने पहले ही अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी, इसलिए सिस्टम के बार-बार बदलने का खामियाजा जनता क्यों भुगते। देर रात आए इस फैसले से उन मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें हजारों रुपये की अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी बिल में जुड़कर आने का डर था। जून से एसएमएस और व्हाट्सएप पर मिलेगा बिल सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। अगले महीने से उपभोक्ताओं को इस्तेमाल की गई बिजली का बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। यह बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से मिलेगा। हर महीने की 10 तारीख तक बिल जारी किए जाएंगे। 15 दिन के अंदर बिल जमा करना होगा। बिल न मिलने पर मैनुअल रीडिंग लेकर बिल लेकर पैसा जमा कर सकते हैं।

योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा

9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बना उत्तर प्रदेश योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा रोजगार क्रांति के जरिए नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं युवा महिलाओं और युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक मिल रहा खूब मौका लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किये हैं। योगी सरकार ने रोजगार के मामले को मिशन के रूप में लिया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार, सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर देने के साथ निजी क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए मौके उपलब्ध करा रही है।  उत्तर प्रदेश, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य बन चुका है। इसी क्रम में बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी पुलिस में ही इस दौरान 2.19 लाख भर्ती पूरी हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। शिक्षा विभाग में करीब 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक 53 हजार से ज्यादा,  उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा 47 हजार से ज्यादा भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की गईँ। उत्तर प्रदेश में आज कारखानों की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने ही पंजीकृत थे। नौजवानों के नए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हुईं। सरकारी नौकरी की जगह अपना रोजगार करने वाले नौजवान को एमएसएमई सेक्टर से बड़ा लाभ मिला है। केवल एमएसएमई सेक्टर से ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सपना भी साकार हुआ। खादी एंव ग्रामोद्योग क्षेत्र में विस्तार से 4.63 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। विगत 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। बीते 9 वर्षों में 4 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारा गया है, जिनसे 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।  मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को 1,09,710 लाख से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई। इस तरह योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्वरोजगार के भी मौके प्रदेशवासियों के हित में उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ शुरू किया गया। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं को इस योजना का लाभ दिया गया, जिससे 4.51 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उत्कष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर सेवायोजित करने की नीति घोषित की है। इसके तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है। प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले बीसी सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन किया और 116 करोड़ का लाभांश कमाया। खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लखपति दीदी के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच गईं हैं। एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों से 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा रहा है कि आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपने ही प्रदेश में रोजगार और व्यवसाय के अवसर प्राप्त कर रहा है। योगी सरकार की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज रोजगार, निवेश, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर

एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रहा। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या यूपी में निवास करती है। गौरतलब है कि किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (Crime Rate) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए प्रामाणिक संकेतक है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है। हत्या के मामलों में देश में यूपी का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार बलवे के मामलों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। लूट के मामलों में प्रदेश 28वें स्थान पर और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यूपी का स्थान 23वां है। महिलाओं के प्रति अपराधों में यूपी 17वें नंबर पर है, जबकि बच्चों के विरुद्द अपराध के मामले में प्रदेश का स्थान 27वां है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि योगी सरकार लगातार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, जिसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महिला न्याय (Conviction Rate): यूपी देश का शीर्ष राज्य अपराधियों को सजा दिलाने (दोषसिद्धि) में उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर चुका है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अदालतों द्वारा सजा सुनाने की दर इस प्रकार है- उत्तर प्रदेश: दोषसिद्धि दर 76.6% (शीर्ष) पश्चिम बंगाल: यहां दर मात्र 1.6% है। कर्नाटक: यहां मात्र 4.8% मामलों में सजा होती है। तेलंगाना: यहां दर 14.8% है। केरल: यहां दर मात्र 17.0% है। पंजाब: यहां दर 19.0% है। तमिलनाडु: यहां दर 23.4% है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिला अपराध करने वाले अपराधी के बचने की संभावना न्यूनतम है, जबकि अन्य राज्यों में अपराधियों के छूटने की दर 75% से 98% तक है। इसी प्रकार राज्य में मर्यादा भंग के अपराधों की दर मात्र 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5, केरल में यह 23.9 है। गंभीर अपराधों पर नियंत्रण यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति लाख जनसंख्या मात्र 1.3 है, जो तेलंगाना (2.7),  झारखण्ड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। यूपी के महानगर जांच पूरी करने में देश के अन्य बड़े मेट्रो शहरों से कहीं अधिक तेज हैं। कानपुर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दर 84.4%, लखनऊ में 83.7% है। जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी यूपी का प्रशासन अन्य राज्यों से बेहतर है। यूपी में महिला जेलों में अधिभोग दर (Occupancy Rate) मात्र 36.7% है, जो महिला कैदियों को सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है। यूपी की केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3% है, जो पंजाब (118.4%) और केरल (149.9%) की तुलना में बहुत बेहतर है। एनसीआरबी रिपोर्ट का सांख्यिकीय डेटा स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश न केवल महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को दंडित करने (76.6% दोषसिद्धि) में देश में अग्रणी है, बल्कि गंभीर अपराधों (हत्या, धोखाधड़ी) और महिला सुरक्षा के मानकों पर दक्षिण भारतीय राज्यों और पंजाब/पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है।