samacharsecretary.com

मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नए चेहरों की एंट्री तय, किसी मंत्री की छुट्टी नहीं होगी

 लखनऊ यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बिहार, बंगाल और असम के बाद यूपी की बारी है यानी 12 मई के बाद कभी भी टीम योगी का आकार बढ़ सकता है। खास बात यह है कि यह केवल विस्तार होगा, बदलाव नहीं। मतलब ये कि मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नये चेहरे शामिल होंगे। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते किसी बड़े बदलाव पर सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों की मानें तो किसी मंत्री को हटाए जाने की संभावना नहीं है। विभाग बदले जाने के आसार भी कम ही हैं। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका लगभग तैयार है। इस पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगना बाकी है। इसके लिए जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली जा सकते हैं। फिलहाल, जिन नामों को मंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है, उनमें पूजा पाल, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, भूपेंद्र चौधरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा, आशा मौर्य के नाम भी रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा संगठन से जुड़े ब्राह्मण चेहरे और ब्रज के एक विधायक का नाम इस फेहरिस्त में शुमार है। कई बुजुर्ग मंत्रियों ने ली राहत की सांस पूजा पाल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी इस दांव से कई निशाने साध सकती है। महिला और पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा करने के साथ ही भाजपा उन्हें सपा को घेरने के लिए सियासी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है। मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव न होने की संभावनाओं ने पार्टी के उम्रदराज मंत्रियों के साथ ही उनको भी राहत दे दी है, जिनके विभाग बदले जाने की चर्चाएं तेज थीं। बीते कुछ दिनों से इनमें से कई दिल्ली दरबार हो आए थे। चुनाव नजदीक होने के चलते बदलाव का फैसला नहीं कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है, तो कइयों से मुख्यमंत्री नाराज हैं। मगर चुनाव नजदीक होने के चलते इन्हें बदलने पर फैसला नहीं हो पा रहा। पार्टी का एक वर्ग यह समझाने में भी काफी हद तक सफल रहा है कि इस समय किसी मंत्री को हटाने का संदेश सही नहीं जाएगा।

तय समय में बिजली कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मिलेगा मुआवजा, नियामक आयोग सख्त

 लखनऊ यूपी के लखनऊ के मीटर रीचार्ज करने के बाद भी दो घंटे तक कनेक्शन न जुड़ने के मामले में नियामक आयोग पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। नेगेटिव बैलेंस की वजह से स्मार्ट मीटर के कनेक्शन कटने के बाद अगर उपभोक्ता मीटर रीचार्ज करवाता है तो उसके अधिकतम दो घंटे के भीतर कनेक्शन जुड़ने का प्रावधान है। अन्यथा उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है। स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदले जाने के बाद मार्च से पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके तहत नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट रहे थे। उसी दरम्यान तमाम उपभोक्ताओं ने मीटर रीचार्ज करने के बाद कई घंटे तक कनेक्शन दोबारा न जुड़ने की शिकायत की थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर करते हुए तय मियाद में कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। आयोग अब इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना अनिवार्य तौर पर लगाया जाएगा। अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी का फैसला वापस स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने के बाद उपभोक्ताओं से नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने का फैसला पावर कॉर्पोरेशन ने वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं की पहले से जमा सुरक्षा राशि ही मान्य होगी और उन्हें नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात अपना आदेश संशोधित किया। दरअसल, जब पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड खाते में एडजस्ट कर दिया गया था। बाद में दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर नई दरों के अनुसार अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी मांगी जा रही थी। इसका असर करीब 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ता। उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत और नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन को फैसला वापस लेना पड़ा। हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी उधर, उपभोक्ता अपना बिल प्राप्त करने और सहायता के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7859804803 का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, वे उसे तुरंत अपडेट करा लें जिससे समय पर बिल और सूचनाएं मिल सकें।

पांच राज्य संग्रहालयों का निर्माण पूरा, तीन परियोजनाएं अंतिम चरण में

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग के अधीन संचालित पांच राज्य संग्रहालयों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य पूरे कर जनता को समर्पित कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य परियोजनाओं के कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। इन संग्रहालयों में प्रदेश की गौरवशाली परंपरा, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं और दुर्लभ मूर्तियां संरक्षित की गईं हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकेंगी। प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय और नवाबी कला गैलरी बनी आकर्षण का केंद्र पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बीते पांच वर्षों में राज्य संग्रहालयों के विकास के लिए व्यापक कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ उसे आधुनिक स्वरूप देने का कार्य कर रही है। राज्य संग्रहालय लखनऊ में 2483.05 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन 4 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। यह संग्रहालय आम लोगों और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा अवधी गैलरी (नवाबी कला) के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण का कार्य भी 171.80 लाख रुपये की लागत से पूरा करा लिया गया है। यहां अवध की समृद्ध कला, संस्कृति और नवाबी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। वहीं विदेशी मूर्तिकला गैलरी की दुर्लभ मूर्तियों को भी स्थानांतरित कर सुरक्षित रूप से संग्रहालय परिसर में स्थापित कर दिया गया है। आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित हो रहा संग्रहालय परिसर संग्रहालय परिसर को आधुनिक सुविधाओं से भी लैस किया जा रहा है। चतुर्थ पार्श्व गैलरियों के पहुंच मार्ग, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे कराए जा चुके हैं। साथ ही संग्रहालय सभागार के सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद उसका उद्घाटन 27 अगस्त 2025 को किया गया। ओल्ड कोठी में कैफेटेरिया आदि का कार्य 459.12 लाख रुपये और 460.49 लाख रुपये की लागत से बेसमेंट कक्षों के सुदृढ़ीकरण तथा 174.66 लाख रुपये की लागत से सीवर लाइन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट और नलकूप बोरिंग से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं।

17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों पर पूरी हुईं तैयारियां, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी में होगी परीक्षा

प्रयागराज / लखनऊ उ०प्र० शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा प्रवक्ता संवर्ग के 18 विषयों के कुल 624 पदों हेतु लिखित परीक्षा का आयोजन 09 एवं 10 मई 2026 को किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित होगी, जिसमें कुल 4,64,605 पंजीकृत अभ्यर्थी प्रतिभाग करेंगे। योगी सरकार की पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा नीति के अनुकूल सभी तैयारियां की गई हैं।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार  ने 17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संबंधी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण स्थलों को एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित कर जिला कंट्रोल रूम तथा आयोग के अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग द्वारा सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है। आयोग की ओर से परीक्षा के सघन अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जनपद में एक-एक प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं निगरानी टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का भ्रमण करेंगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी तथा पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने वाले व्यक्तियों एवं नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  09 मई को प्रथम पाली में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र सहित 06 विषयों तथा द्वितीय पाली में अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र सहित 04 विषयों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं 10 मई को प्रथम पाली में नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत एवं मनोविज्ञान सहित 05 विषयों तथा द्वितीय पाली में रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित 04 विषयों की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन सहित किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही एआई तकनीक की सहायता से ऐसे संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई है, जिन्होंने एक ही नाम से अलग-अलग फोटो के साथ अथवा एक ही फोटो के साथ अलग-अलग नामों से आवेदन किया है। ऐसे परीक्षार्थियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोग द्वारा अभिनव प्रयोग के रूप में लखनऊ मंडल के 10 परीक्षा केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पाली की परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों द्वारा प्रयुक्त ओएमआर उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग परीक्षा कक्ष में ही कक्ष निरीक्षकों एवं परीक्षार्थियों की उपस्थिति में की जाएगी। स्कैन डाटा को तत्काल सुरक्षित किया जाएगा, जिसका आवश्यकता पड़ने पर मूल ओएमआर से मिलान किया जा सकेगा। आयोग अध्यक्ष ने सभी अभ्यर्थियों से समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने एवं प्रवेश पत्र में अंकित निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों से किसी भी अफवाह अथवा भ्रामक सूचना से बचने तथा आयोग की वेबसाइट यूपीईएसएससी एवं आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध सूचनाओं पर ही भरोसा करने को कहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने वाले अनुचित साधनों के प्रयोग पर उ०प्र० सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं ।

29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा पेंशन का लाभ, डीबीटी से पारदर्शिता

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना प्रदेश की लाखों बुजुर्ग महिलाओं के लिए जीवन का नया आधार बनकर उभरी है। वर्तमान में राज्य सरकार 29,23,364 बुजुर्ग महिलाओं को नियमित पेंशन का लाभ प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित महिलाओं के लिए यह योजना केवल एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी साबित हो रही है, जिससे उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान मिला है। पारदर्शिता और डीबीटी: बिचौलियों का खेल खत्म योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि अब बिचौलियों के बजाय सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रही है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के तहत हर तिमाही 3,000 रुपये सीधे बुजुर्ग महिलाओं के बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहल ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर दिया है और पात्र महिलाओं को समय पर आर्थिक संबल सुनिश्चित किया है। पूर्वांचल में सबसे अधिक लाभ: जौनपुर रहा नंबर वन आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पूर्वांचल के जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला है। जौनपुर जिला इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जहाँ 1,00,820 बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है। इसके बाद आजमगढ़ (86,166) और बलिया (79,160) का स्थान है। प्रशासन का विशेष जोर उन महिलाओं की पहचान करने पर है जो अब भी इस दायरे से बाहर हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला सामाजिक सुरक्षा के इस चक्र से वंचित न रहे। आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि नियमित आर्थिक सहायता ने बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक बदलाव लाया है। अब उन्हें दवा, राशन और छोटे-मोटे खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस आत्मनिर्भरता ने परिवारों के भीतर भी उनकी स्थिति को मजबूत किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य इस योजना का दायरा बढ़ाकर प्रदेश की हर निराश्रित बुजुर्ग महिला को सशक्त और स्वावलंबी बनाना है।  

सपा सरकार में हर दिन होते थे 19 दंगे और 33 अपहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, जहां सपा सरकार में वर्ष 2012 से 2017 के बीच एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 19 दंगे होते थे, उसी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ। इस अवधि में कुछ अराजक तत्वों द्वारा जरूर दंगा भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे धकेला गया। इतना ही नहीं, जिस उत्तर प्रदेश में कभी व्यापारियों को आए दिन फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता था, उसी प्रदेश में वर्ष 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। प्रदेश में दो वर्षों में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन अपहरण की 33 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश की अपराध दर (क्राइम रेट) शून्य दर्ज की गई है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार नगालैंड में यह अपराध दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वर्ष 2023 में भी यूपी में इस श्रेणी में क्राइम रेट शून्य था। यह बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई से संभव हुआ है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट, माफिया की संपत्तियों की जब्ती और अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने जैसे सख्त कदमों का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है।  योगी सरकार ने दंगााइयों के मंसूबों पर फेरा पानी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 2.2 रही। यहां यूपी में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज होने का आधार वही मामले हैं, जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को योगी सरकार ने समय रहते विफल कर दिया और अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा भड़काने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।‘ एनसीआरबी रिपोर्ट में मणिपुर में बलवा की अपराध दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई है।  सपा सरकार के समय प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था जब दंगे, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम चर्चा का विषय बन चुकी थीं। विशेष रूप से वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस दौरान एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे हुए। उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे और अपहरण की 33 घटनाएं सामने आती थीं।

मोबाइल एप के जरिए होगा प्रतिदिन चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का कारोबार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। अवध क्षेत्र और आसपास के 10 जिलों में कार्यरत ‘सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी’ के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रह और भुगतान व्यवस्था को संचालित कर सकेंगी। इस पहल से प्रतिदिन चार लाख लीटर से अधिक दूध के व्यापार को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में गांव की महिलाओं के लिए तैयार किया गया पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनता जा रहा है। अवध और आसपास के जिलों में सवा लाख से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा चुका है, जिनके हाथों में अब केवल दुग्ध उत्पादन ही नहीं बल्कि तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी होगी। गांव-गांव बने दुग्ध संग्रह केंद्र सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी द्वारा गांव गांव दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों के यहां से दूध को उचित मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसे महिलाएं ही संचालित करती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है, वहीं पशुपालकों को भी बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिली है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। महिला किसानों को महीने में तीन बार, दस-दस दिन के अंतराल पर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इन जिलों में तैयार हुआ नेटवर्क लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, प्रतापगढ़ कानपुर नगर और फतेहपुर में ग्रामीण महिलाओं का विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। ‘सामर्थ्य साथी’ एप से मिलेगा हर दिन का हिसाब दुग्ध कारोबार को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए ‘सामर्थ्य साथी’ नाम से मोबाइल एप शुरू किया गया है। इस एप के जरिए दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, भुगतान, गुणवत्ता जांच और अन्य आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ना केवल सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा माध्यम है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर पर महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी जागरूकता भी की जा रही है। पारदर्शिता से बढ़ा महिलाओं का भरोसा दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर पैसे के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से दुग्ध उत्पादकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान देने के साथ ही ‘आत्मनिर्भर गांव’ मॉडल को भी मजबूत करती दिखाई दे रही है। दुग्ध क्रांति अब गांव की चौपाल से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच रही है।

मानसून से पहले नदियों और बड़े नालों का पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाया जा रहा

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा।  प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

9 वर्षों में 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ाया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। योगी सरकार ने कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रदेश के लाखों युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। प्रदेश सरकार की नीतियों का परिणाम है कि पिछले 9 वर्षों में लगभग 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैशन डिजाइनिंग, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, कृषि आधारित उद्योगों समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं में से 7.50 लाख से अधिक को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली। “प्रोजेक्ट प्रवीण” के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख को कौशल प्रशिक्षण योगी सरकार ने युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग से जोड़ा है। इसी क्रम में संचालित “प्रोजेक्ट प्रवीण” योजना युवाओं के बीच काफी प्रभावी साबित हुई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न आधुनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है, ताकि वे डिग्री के साथ रोजगार के लिए भी पूरी तरह तैयार हों। 188 रोजगार मेलों से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्रदेश सरकार ने रोजगार के अवसरों को युवाओं तक सीधे पहुंचाने के लिए मंडल और जनपद स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया। पिछले 9 वर्षों में आयोजित 188 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इन मेलों में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों, औद्योगिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भाग लिया। इससे युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए और पलायन में भी कमी आई। “स्किल कैपिटल” के रूप में पहचान मजबूत कर रहा यूपी योगी सरकार का फोकस केवल नौकरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और मार्केट लिंकिंग उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राज्य है और यदि इस युवा शक्ति को कौशल और रोजगार से जोड़ा जाए तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। योगी सरकार की नीतियों ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का कार्य किया है। कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्योगों के विस्तार के समन्वय से उत्तर प्रदेश तेजी से “स्किल कैपिटल” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

खाते में 551 करोड़ दिखते ही मचा हड़कंप, यूपी में ऐप ग्लिच या साइबर साजिश की जांच शुरू

सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक साधारण परिवार के साथ ऐसा वाकया हुआ कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। मछरेहटा इलाके में परिवार के लोग उस वक्त खुशी से झूम उठे जब उन्होंने अपने 'जियो पेमेंट बैंक ऐप' (Jio Payment Bank App) के खाते में 5.5 अरब (551 करोड़) रुपये से अधिक की राशि देखी। पहले तो उन्हें लगा कि उनकी किस्मत खुल गई है, लेकिन जल्द ही यह खुशी भारी चिंता और घबराहट में बदल गई। इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसने भेजी और क्यों, इन सवालों ने उन्हें परेशान कर दिया। अंततः, उन्होंने पुलिस से संपर्क कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। साइबर क्राइम पुलिस जांच में जुट गई है। ऐप में अरबों की रकम, पर खाते में नहीं मछरेहटा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुरुआती पड़ताल की। थाना प्रभारी (एसओ) ने बताया कि जांच में एक बेहद अजीब बात सामने आई है। पीड़ितों के बैंक खाते में वास्तव में एक रुपया भी नहीं आया है; अरबों की यह भारी-भरकम राशि सिर्फ मोबाइल ऐप पर ही दिखाई दे रही है। यह ऐप की कोई तकनीकी खराबी (Glitch) है या कोई साइबर धोखाधड़ी की साजिश, इसकी जांच अब साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) को सौंपी गई है। दस्तावेज लेने वाले युवक पर संदेह पीड़ितों ने पुलिस को दी गई तहरीर में एक स्थानीय युवक, सर्वेश, पर संदेह जाहिर करते हुए शिकायत की है। बारेपारा गांव की रूपा और उनके भतीजे गजराज ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले सर्वेश नाम के युवक को अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए थे। गजराज के मुताबिक, पत्नी की मृत्यु के बाद 'मृतक आश्रित लाभ', पिता मेढ़ई की 'पेंशन' और 'किसान सम्मान निधि' के आवेदन के लिए ये दस्तावेज दिए गए थे। पेंशन की जगह दिखा अरबों का बैलेंस सर्वेश ने हाल ही में उन्हें बताया था कि पेंशन का काम हो गया है। इसके बाद जब गजराज ने अपना जियो पेमेंट बैंक ऐप चेक किया, तो वह सन्न रह गया। खाते में ₹5,51,00,00,000/- (5.51 अरब) रुपये से अधिक का बैलेंस दिखा रहा था। गजराज ने बताया कि पहले वह बहुत खुश हुआ, लेकिन बाद में इतनी बड़ी रकम देखकर घबरा गया। उसे अनहोनी की आशंका सताने लगी। उसने सर्वेश से अपना खाता बंद कराने को भी कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की भूमिका 5.5 अरब रुपये आने की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी । पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि मोबाइल ऐप में अरबों की राशि कैसे दिख रही थी और क्या सर्वेश नाम के युवक ने दस्तावेजों का कोई गलत इस्तेमाल किया है। साइबर एक्सपर्ट्स इस मामले के डिजिटल पहलुओं को खंगाल रहे हैं ताकि इस रहस्य से पर्दा उठ सके।