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पुलिस विभाग में तबादलों की लहर: रायपुर में 136 कर्मियों का हुआ ट्रांसफर, कई थानों में बदलाव

रायपुर. राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। रायपुर कमिश्नरेट में व्यापक स्तर पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई गति और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला द्वारा जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया है। इस आदेश के साथ ही सभी तबादलों की विस्तृत सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है। इस तबादला सूची में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि यह सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस बल में व्यापक पुनर्गठन है। कई पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान थानों से हटाकर नए थानों, चौकियों और विशेष इकाइयों में पदस्थ किया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से अहम कदम ऐसे बड़े पैमाने पर तबादले आमतौर पर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कार्यक्षमता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलने से न सिर्फ नई ऊर्जा आती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है। कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा असर रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में यह फेरबदल शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नए स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और कार्यशैली से संबंधित क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। विभागीय रणनीति का हिस्सा पुलिस विभाग समय-समय पर इस तरह के बदलाव करता रहता है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या स्थानीय प्रभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में अनुभवी पुलिसकर्मियों की तैनाती भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इससे अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा को मजबूती मिलती है। कर्मचारियों के लिए नई चुनौती तबादले के बाद पुलिसकर्मियों के सामने नए कार्यस्थल, नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें नए क्षेत्र की परिस्थितियों को समझते हुए तेजी से खुद को ढालना होगा। वहीं, आम जनता को भी नई तैनाती के बाद पुलिस से बेहतर सहयोग और सेवा की उम्मीद है। बता दें रायपुर कमिश्नरेट में हुआ यह बड़ा फेरबदल प्रशासन की सक्रियता और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह बदलाव शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में कितना कारगर साबित होता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , सबको और मेहनतकर अब करोड़पति बनने की राह पर चलने कहा

रायपुर  मई की तपती गर्मी में आज लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय दूरस्थ गांवों के औचक दौरे पर रहे । कबीरधाम ज़िले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत में आज मुख्यमंत्री का आगमन हुआ । इस अवसर पर वे बैगा बाहुल्य कमराखोल में पीएम जनमन योजना के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किए और वहीं पास में आम के पेड़ों के नीचे अपनी चौपाल लगा लिए । अपने बीच मुख्यमंत्री को देख ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई । बीरनमाला, कमल के फूल से मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान महतारी शक्ति को सामने बैठा देख मुख्यमंत्री ने पूछ लिया कितनी महतारी यहाँ लखपति हो गई हैं ? एक साथ अनेक हाथ हवा में उठ गए । मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते सबको करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ने कहा । उन्होंने बारी- बारी से लखपति दीदियों से बातचीत की । यहाँ जंगल से बीन कर लाए  महुआ और चार को मुख्यमंत्री  साय को उपहार के रूप में देते हुए कुकदूर की लखपति दीदी मती कचरा तेलगाम ने मुख्यमंत्री से कहा कि महुआ का पौष्टिक लड्डू बनाकर खाइएगा , वरना मैं बना कर दूँगी । मुख्यमंत्री भी उनकी आत्मीयता देख भाव विभोर होकर मुस्कुराते हुए बोले कि घर जाकर बनवाकर खाऊँगा । मती कचरा तेलगाम दीदी आस पास के गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों में सेंट्रिग प्लेट लगाती हैं और इससे उन्हें एक साल में ८० हज़ार की आय हुई है । उन्होंने कहा कि आज चौपाल लगा देख वे साहस वहाँ पहुँची और मुख्यमंत्री  के लिए भेंट स्वरूप जंगल से बीने महुआ और चार दी हैं ।  वहीं डीलर दीदी मती रजमत बाई धुर्वे ने बताया कि वे प्रधानमंत्री आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई का काम करती हैं । उन्हें सालाना 2.50 – 3 लाख का मुनाफा हुआ है । लखपति पशु सखी मती शिवरानी पटेल का कहना है कि समूह से जुड़ सीआईएफ से उन्होंने व्यवसाय के लिए ऋण लिया और अपने खेत में सब्जी- भाजी लगायी । उन्हें सालाना डेढ़ लाख की आय हो रही । इस बिहान योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के लिए धन्यवाद स्वरूप उन्होंने अपने खेत की सब्जियां टोकरी में मुख्यमंत्री को भेंट की । मुख्यमंत्री ने भी सभी दीदियों से बात कर प्रोत्साहित किया कि इसी तरह मन लगाकर काम करिए और आर्थिक रूप से सशक्त होइए।  ज्ञात हो कि लोखन पंचायत में 58 लखपति दीदियां हैं जो विभिन्न व्यवसाय से जुड़ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं ।        चौपाल में हुआ नामकरण आज अपने नौनिहाल बच्चे के साथ मती ऋषि बघेल भी चौपाल पहुँची । यहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक ही गुहार लगायी कि उनके बच्चे का नामकरण कर दें मुख्यमंत्री । बच्चे को गोद में लेकर दुलारते हुए मुख्यमंत्री  साय ने पूछा कि कब हुआ है इसका जन्म ? तब माँ ने बताया कि रविवार के दिन । मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेह से देखते हुए नाम रविशंकर बघेल रखा और आशीर्वाद स्वरूप ५०० रुपए भी दिए । पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने भी बच्चे को ५०० रुपए अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप दिया ।मुख्यमंत्री के द्वारा नवजात का नाम रखते ही चौपाल में तालियाँ गूंज उठी । चौपाल में पहुंचे मेधावी विधार्थी आज कबीरधाम के पंडरिया के लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल को देख वहाँ से गुज़र रहे राजेंद्र मसराम और उनके पिता भी रुक गए । इस दौरान बातचीत में पता चला कि छिरहा के रहने वाले इस मेधावी बच्चे ने इस साल हाई स्कूल में 94.5 %  अंक के साथ ज़िले में नौवाँ स्थान प्राप्त किया है । मुख्यमंत्री ने उन्हें ख़ुश होकर पेन दिया और पूछा बड़ा होकर क्या बनना चाहते हैं ? इस पर उन्होंने बड़ा होकर आईएएस बनने के सपने को साझा किया । मुख्यमंत्री ने उन्हें खूब सारी शुभकामनाएँ दी ताकि वो अपना सपना पूरा कर सकें । यहाँ कमराखोल के बैगा बस्ती की कक्षा नवमी की बालिका भी चौपाल में मुख्यमंत्री से मिली और बताया कि आज पीएम जनमन से बने उनके आवास में मुख्यमंत्री पहुंचे थे । वहाँ मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पायी इस लिए वे चौपाल में पहुँचीं । इस साल यह बच्ची हेम कुमारी 75% अंक कक्षा नौवी में लायी । एचसीएम ने आगे भी मन लगाकर पढ़ने की सलाह और बधाई देते हुए पेन दिया ।  घोषणाएँ बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज चौपाल लगाकर शासकीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और प्रसन्न दिखे कि दूरस्थ अंचल तक हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर कमरखोल में  मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल के साथ), रामखिलावन के घर से ग्राम देवसरा तक मिट्टी मुरुम सड़क (६ किलोमीटर लगभग) , सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम शेड निर्माण तथा  महतारी सदन ( स्व सहायता समूह की महिलाओं की माँग पर ) की घोषणा की । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक  धर्मेंद्र सिंह , सीओ जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल और ग्रामीण चौपाल में उपस्थित रहे ।

मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से नर्सिंग के सपनों को मिला संबल

रायपुर कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिले, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरगुजा जिले के भिट्ठीकला की रहने वाली ममता ने। ममता, जो कि वर्तमान में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, आज अपनी पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हैं और इसका श्रेय वे छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। संघर्षों के बीच जागी उम्मीद की किरण ममता के जीवन का सफर आसान नहीं था। पिता स्व. मोटू राम के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी माता प्यारो बाई के कंधों पर आ गई। माँ ने हार नहीं मानी और एक पंजीकृत श्रमिक के रूप में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण किया। संसाधनों की कमी के बावजूद प्यारो बाई का सपना अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना था, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग ने साकार किया है। मेधावी शिक्षा सहायता ने आसान हुई राह ममता ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग के माध्यम से नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 45,000 रुपए की वार्षिक सहायता प्राप्त हुई है। इस राशि ने उनके शिक्षण शुल्क और पढ़ाई से संबंधित अन्य खर्चों के बोझ को कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि मेरी मम्मी एक मजदूर हैं, फिर भी उन्होंने हमें कभी पीछे मुड़ने नहीं दिया। श्रम विभाग से मिली इस आर्थिक सहायता की वजह से मैं आज अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर पा रही हूँ और अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना देख पा रही हूँ। योजना के लिए व्यक्त किया आभार अपनी सफलता का  श्रेय देते हुए ममता ने प्रदेश के  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और श्रम विभाग के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए सशक्त माध्यम बनी है। जिससे पढ़ने और आगे बढ़ने का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से ममता जैसी हजारों बेटियाँ अब न केवल शिक्षित हो रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ रही हैं।

माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल

रायपुर विकासखंड उसूर का अतिसंवेदनशील ग्राम तर्रेम, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर स्थित ग्राम तर्रेम में अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार की पहल से क्षेत्र में पहुंच आसान हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव हुआ। आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी, सुरक्षित प्रसव सेवाएं तथा लैब जांच की सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और 102 व 108 एम्बुलेंस सेवाओं के प्रभावी संचालन के साथ आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। कलेक्टर  संबित मिश्रा के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में आकांक्षी विकासखंड उसूर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक NQAS प्रमाणन प्राप्त हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 फरवरी 2026 से वर्चुअल मूल्यांकन किया गया जिसमें 12 सेवाओं के आधार पर कुल 88.19ः अंक प्राप्त हुए। मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ सीएचओ, आरएचओ महिला एवं पुरुष से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीणों को दी जा रही सेवाओं पर विस्तार से जानकारी ली गई, जिसमें सभी कर्मी सफल रहे। इस उपलब्धि में जिला कार्यक्रम प्रबंधक  वरुण साहू, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश ठाकुर, सेक्टर प्रभारी डॉ शिवा गौरी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक श्रवण नेताम, डाटा प्रबंधक निरंजन भोई सहित समस्त स्वास्थ्य स्टाफ, सीएचओ, आरएचओ, एएनएम एवं मितानिनों का विशेष योगदान रहा।

महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

रायपुर सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जीवंत तस्वीर भी बन गया।इसी चौपाल में सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसने सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को भावनात्मक रूप से उजागर किया। ग्राम सरोधी की निवासी मती केकती मरावी, अपने पति  राजेंद्र मेरावी और तीन बच्चों—चिंरजीव, किरण और विक्रांत के साथ एक साधारण किसान परिवार से जुड़ी हैं। खेती-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य आधार है, लेकिन सीमित आय के बीच परिवार का खर्च चलाना हमेशा एक चुनौती रहा है। केकती बाई बताती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। अब तक उन्हें योजना की 26 किश्तें मिल चुकी हैं, जिससे वे घर के छोटे-छोटे खर्चों में हाथ बंटा पा रही हैं। पहले जहां हर छोटी जरूरत के लिए सोच-विचार करना पड़ता था, वहीं अब उनके पास आत्मनिर्भरता का एक आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है और रसोई का काम आसान हुआ है। केकती बाई केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की अध्यक्ष भी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपए का अनुदान मिला है, जिससे वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भावुक होते हुए केकती बाई ने कहा कि आज उनका परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं सही हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं।

वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में

रायपुर  वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बजट में बस्तर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि देश की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ते भारत में बस्तर के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बस्तर के युवाओं को वन उत्पाद, पर्यटन, कला-संस्कृति और कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में नवाचार के साथ कार्य कर क्षेत्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा आर्थिक रूप से सशक्त बनकर समाज निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर आज नई आशा और नई दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में पूना मारगेम से जुड़े साथियों की भागीदारी का स्वागत करते हुए बस्तर के विकास में सहभागी बनने की बात कही। अपने संबोधन में उन्होंने कई प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए, जिनमें लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से निकलकर नवाचार के माध्यम से आर्थिक प्रगति हासिल की। चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं नौकरी छोड़कर कृषि व्यवसाय अपनाया और आत्मनिर्भरता हासिल की। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “माँ सरस्वती के उपासक बनेंगे तो माँ लक्ष्मी स्वयं साथ आएंगी”, आज का युग ज्ञान आधारित है, इसलिए युवाओं को अपनी क्षमता और कौशल का निरंतर विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि अनुशासन भी सिखाते हैं। अनुशासन के साथ ईमानदारी से प्रयास कर ही बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है। साथ ही उन्होंने युवाओं को उद्यमिता (इंटरप्रेन्योरशिप) में जोखिम लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बस्तर की पूर्व परिस्थितियों और दंतेवाड़ा जिले में कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभवों का भी उल्लेख किया, जिससे उपस्थित युवाओं को प्रेरणा मिली। विश्व विद्यालय द्वारा बस्तर के युवाओं हेतु नवाचार के लिए आयोजित इस कार्यक्रम की भी उन्होंने सराहना की। कार्यक्रम में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मनोज कुमार वास्तव सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे ।

श्रमिक के बिना कोई कार्य सफल नहीं: सांसद चिंतामणि महाराज

रायपुर जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन    सरगुजा जिले के श्रमिकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने और उनके पंजीयन की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से आज अंबिकापुर के पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने श्रमिकों के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन बिना श्रमिक के कोई कार्य सफल नहीं: सांसद  चिंतामणि महाराज      मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लोकसभा सांसद  चिंतामणि महाराज ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, आज समाज का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो श्रमिकों के बिना सफल हो सके। श्रमिकों के परिश्रम से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अंतिम पंक्ति के श्रमिक का भी पंजीयन सुनिश्चित हो सके। श्रम का सम्मान और आत्मनिर्भरता      कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि लुण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज ने कहा कि हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में श्रमिक है और परिश्रम ही परिवार के भरण-पोषण का आधार है। उन्होंने श्रमिक पंजीयन कर योजनाओं का लाभ लेने उपस्थित श्रमिक जनों को प्रोत्साहित किया। वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर ने विकासखंड से आए श्रमिकों से कहा कि शासन आपके हितों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है जिससे हर वर्ग के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ मिले। आप सभी श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी लेकर योजना का लाभ ले।       नगर निगम अंबिकापुर महापौर मती मंजूषा भगत ने कहा कि शासन द्वारा नारी शक्ति के सम्मान के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। महिलाएं आत्मनिर्भर बने शासन की मंशा है। उन्होंने श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने के लिए श्रमिकों को प्रेरित किया। जनप्रतिनिधियों ने हितग्राहियों को चेक का किया वितरण एवं परोसा भोजन      कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा चेक वितरण कर सम्मानित किया गया। जब उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्वयं अपने हाथों से श्रमिकों को भोजन परोसा। इस दौरान श्रमिकों ने अनुशासन का परिचय देते हुए कतारबद्ध होकर अपनी-अपनी बारी में शांतिपूर्वक भोजन लिया। पंजीयन ही योजनाओं का द्वार: श्रम पदाधिकारी      सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रम पदाधिकारी  नीतेश विश्वकर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ कर्मगार राज्य समाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना,मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना,मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल श्रमिकों को जोर देते हुए कहा कि इन हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ उठाने के लिए श्रमिक पंजीयन कराएं और योजनाओं का लाभ लें। सम्मेलन में पार्षद  आलोक दुबे एवं दीपक यादव एवं जनप्रतिनिधियों सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक, श्रम विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

कम समय में शहर को मिलेगी सघन हरियाली

रायपुर बिलासपुर की लाइफलाइन अरपा के तट पर उगेगा मियावाकी जंगल छत्तीसगढ़ के वन मंत्री  केदार कश्यप के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बिलासपुर शहर में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र  को विस्तार देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम (कोटा परियोजना मण्डल) द्वारा साउथ ईस्ट कोल फिल्ड लिमिटेड बिलासपुर के सहयोग से अरपा नदी के तट पर मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण किया जा रहा है। बिलासपुर की लाइफलाइन अरपा के तट पर उगेगा मियावाकी जंगल परियोजना की मुख्य विशेषताएं कमिश्नर कार्यालय (कोनी) के पीछे, अरपा नदी तट लगभग 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 15,000 पौधों का रोपण किया जाएगा। जमीन में एक मीटर गहरी खाई (ट्रेंच) खोदकर उपजाऊ मिट्टी के साथ पौधों का सघन रोपण। क्या है मियावाकी पद्धति? यह एक आधुनिक जापानी तकनीक है जो शहरी क्षेत्रों के लिए वरदान मानी जाती है। इसकी विशेषताएं हैं कि तीव्र विकास वाले पौधे सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। यह सामान्य वनों की तुलना में 30 गुना अधिक सघन होते हैं। कम स्थान में अधिक प्रजातियों के पौधे होने से जैव विविधता में कई गुना वृद्धि होती है। सफलता का पिछला रिकॉर्ड उल्लेखनीय है कि वन विकास निगम इससे पहले भी बिलासपुर में एन टी पी सी सीपत के सहयोग से 94 हजार पौधों का मियावाकी वन सफलतापूर्वक विकसित कर चुका है। अरपा तट पर हो रही यह नई पहल न केवल शहर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होगी, बल्कि निवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी प्रदान करेगी।

जनसमस्या निवारण शिविर बना आमजन के लिए राहत का माध्यम, मोहनलाल को मिला तत्काल लाभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत जनसमस्या निवारण शिविर आम नागरिकों के लिए भरोसे और राहत का सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं और सेवाओं को सीधे गांव-गांव तक पहुंचाते हुए समस्याओं का त्वरित एवं पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत नवागढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत सरखों में शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहकर नागरिकों की समस्याओं एवं मांगों से जुड़े आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर रहे हैं। शिविर में ग्राम बनारी निवासी  मोहनलाल अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उन्होंने किसान किताब से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया, जो उनके कृषि कार्यों के लिए आवश्यक था।  आवेदन प्राप्त होते ही राजस्व विभाग के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और मौके पर ही उन्हें नई किसान किताब प्रदान कर दी। समस्या का तत्काल समाधान मिलने से  मोहनलाल के चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि इस पहल से उनकी समस्या कुछ ही समय में हल हो गई। उन्होंने जनसमस्या निवारण शिविर को जनहितकारी पहल बताते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

वन विभाग की सख्ती: गौरेला क्षेत्र में अवैध सागौन कटाई पर कार्रवाई

रायपुर गौरेला क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ के गौरेला वन परिक्षेत्र में सागौन के अवैध दोहन को रोकने के लिए वन विभाग ने अपना शिकंजा कस दिया है। विभाग के संयुक्त दल द्वारा की जा रही लगातार निगरानी के फलस्वरूप हाल ही में अवैध रूप से काटी गई सागौन की लगभग 500 बल्लियां (5 घन मीटर से अधिक) बरामद की गई हैं। जब्त लकड़ियों को सुरक्षित रूप से मड़ना सरकारी काष्ठागार (डिपो) में स्थानांतरित कर दिया गया है। गौरेला क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई            पण्डरीपानी परिसर (सामाजिक वानिकी परियोजना 2009-10), जो लगभग 103 हेक्टेयर में फैला है। चार ग्राम पंचायतों (कोरजा, गांगपुर, डाहीबहरा और पण्डरीपानी) से घिरे होने के कारण इस क्षेत्र पर अत्यधिक जैविक दबाव है। प्राथमिक जांच के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा गृह निर्माण, कृषि कार्यों और अन्य व्यक्तिगत उपयोग के लिए अवैध कटाई की जा रही थी।           वनमण्डलाधिकारी मरवाही और उप वनमण्डलाधिकारी गौरेला के नेतृत्व में उड़नदस्ता दल और विभागीय कर्मचारी क्षेत्र का सघन सर्वेक्षण कर रहे हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण पूर्ण होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वन भूमि पर किए गए पुराने अतिक्रमणों को हटाने का अभियान भी तेज कर दिया गया है।