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प्रधानमंत्री आवास योजना से रामप्रकाश के पक्के घर का सपना हुआ साकार

प्रधानमंत्री आवास योजना से रामप्रकाश के पक्के घर का सपना हुआ साकार पक्का घर मिलने से बदली जीवन की तस्वीर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन से साकार हो रहे जरूरतमंदों के सपने रायपुर,   अपना घर हर परिवार के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। एक ऐसा घर, जिसकी मजबूत दीवारों के बीच परिवार सुरक्षित रहे, बच्चे बेहतर भविष्य के सपने देखें और जीवन सम्मान एवं सुकून के साथ आगे बढ़े। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सपना कई बार सीमित संसाधनों के कारण अधूरा रह जाता है। ऐसे परिवारों के सपनों को साकार करने में प्रधानमंत्री आवास योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गौरेला के लोहरा झोरकी निवासी रामप्रकाश की कहानी इसी बदलाव और उम्मीद की प्रेरक मिसाल है। रामप्रकाश का वर्षों से सपना था कि उनका भी अपना पक्का घर हो, जहां वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर सकें। आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण उनके लिए पक्का मकान बनाना आसान नहीं था। सीमित आय और घरेलू जरूरतों के बीच अपने घर के निर्माण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत प्राप्त सहायता से उनके आवास निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे निर्माण कार्य आगे बढ़ा और वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना आखिरकार हकीकत में बदल गया। आज रामप्रकाश का अपना पक्का मकान पूर्ण होकर तैयार है। पक्का घर मिलने के बाद रामप्रकाश और उनके परिवार के जीवन में खुशी और संतोष का नया अध्याय शुरू हुआ है। अब उनका परिवार एक सुरक्षित और मजबूत आवास में रह रहा है। बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की चुनौतियों से सुरक्षा के साथ उन्हें अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है। रामप्रकाश के लिए उनका नया घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के सपने, संघर्ष और उम्मीदों के पूरा होने का प्रतीक है। वे बताते हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बेहद खुशी और भावुकता का क्षण है। पक्का मकान उनके लिए सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने देशभर में अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के पीछे मूल भावना यही है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो तथा वह अपने परिवार के साथ बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सके। रामप्रकाश के जीवन में आया यह बदलाव इसी संकल्प की एक तस्वीर है। जिस पक्के घर का सपना कभी आर्थिक कठिनाइयों के कारण दूर दिखाई देता था, वही सपना आज उनके सामने एक मजबूत आशियाने के रूप में खड़ा है। उनका घर उनके परिवार के लिए वर्तमान की सुरक्षा और भविष्य की उम्मीद दोनों बन गया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से रामप्रकाश को मिला पक्का घर इसी दिशा में हो रहे कार्यों का उदाहरण है। पक्का आवास मिलने से रामप्रकाश के परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है। अपने स्वयं के घर में परिवार के साथ रहने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है। यह घर उनके लिए सामाजिक सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व की नई पहचान बन गया है। रामप्रकाश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि सरकार की सहायता से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है और अब उनका परिवार अपने घर में सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी रहा है। रामप्रकाश की कहानी यह बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचता है, तो सरकारी सहायता केवल एक सुविधा नहीं रहती, बल्कि वह किसी परिवार के जीवन की दिशा बदलने वाली ताकत बन जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला उनका पक्का घर उनके परिवार के लिए खुशियों का आशियाना, सम्मान की पहचान और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन गया है।

सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’

सरकार की 'बिजली बिल समाधान योजना' धमतरी के विशाल परिवार के लिए बनी नई सुबह, बकाया मुक्त जीवन की ओर बढ़ता कदम ​रायपुर ​राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियां किस प्रकार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल धमतरी जिले में देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत लागू ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ से राज्य भर के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर एवं बकाया बिजली बिल से परेशान परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ते विद्युत बकाया के बोझ से मुक्त कर उन्हें पुनः नियमित भुगतान की मुख्यधारा में जोड़ना है।        ​धमतरी निवासी श्री बी. एस. विशाल के परिवार के लिए भी बढ़ता हुआ बिजली बिल लंबे समय से एक बड़ी मानसिक और आर्थिक चिंता का कारण बना हुआ था। सीमित पारिवारिक आय के कारण समय पर बिल का भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे बकाया राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसी दौरान जब परिवार को राज्य सरकार की इस जनहितकारी समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उनके पुत्र श्री डेनियल विशाल ने तत्परता दिखाते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभागीय सहयोग और सरल व्यवस्था के चलते विशाल परिवार को शीघ्र ही योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिल गया।        ​योजना के तहत परिवार को बकाया मूल राशि में पर्याप्त छूट के साथ-साथ अधिभार यानी सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी मिली। इसके साथ ही शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलने से विशाल परिवार पर से आर्थिक तनाव का बोझ हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अब वे पुनः नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने की स्थिति में आ गए हैं। योजना का लाभ मिलने पर हितग्राही श्री डेनियल विशाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और इस योजना को आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।          ​धमतरी जिले में भी इस योजना की प्रगति काफी उल्लेखनीय रही है। जिले में अब तक 4,652 पात्र हितग्राहियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं और 537 उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बकाया मुक्ति का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना तेजी से आम जनता तक पहुंच रही है और लोगों को वास्तविक राहत प्रदान कर रही है।          ​इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू तथा कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत तक की राहत दी जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी पात्र श्रेणियों के लिए सरचार्ज पूरी तरह माफ किया जा रहा है। उपभोक्ता मात्र 10 प्रतिशत की न्यूनतम राशि जमा कर शेष बकाया को निर्धारित अवधि में आसान किस्तों में चुका सकते हैं।       ​उपभोक्ताओं के व्यापक हित और उत्साह को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने योजना की अवधि को बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया है। विद्युत विभाग द्वारा लगातार शिविरों और जागरूकता अभियानों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि लोगों को एक नई शुरुआत का अवसर देते हुए राज्य सरकार की पारदर्शी, सुगम और संवेदनशील सुशासन की प्रतिबद्धता को पूरी सार्थकता के साथ दर्शा रही है।

फर्जी दस्तावेज बनाकर CISF में नौकरी हासिल की, आरोपी राजस्थान से पकड़ा

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर CISF में भर्ती हुआ था। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। दरअसल, सिटी कोतवाली पुलिस ने पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूंटे (रा.पु.से.) के साथ एसडीओपी दंतेवाड़ा आकांक्षा ठाकुर (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी सत्यम दीक्षित को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर उसे CISF भर्ती में इस्तेमाल करने का आरोप है। जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर CISF में भर्ती हुआ था और वर्तमान में राजस्थान के देवली में नौकरी कर रहा था। मामले की विवेचना के दौरान दस्तावेजों को लेकर संदेह सामने आया, जिसके बाद राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए जाने संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। राजस्थान से पकड़ा गया आरोपी इसके बाद दंतेवाड़ा पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के राजस्थान में देवली में होने की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और सत्यम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अन्य लोगों की भूमिका की जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाण पत्र हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से पुलिस की अपील दंतेवाड़ा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी अथवा किसी शासकीय लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग न करें। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

सेवा का संकल्प, विकास की धार नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली ​रायपुर        जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।         ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।         ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।       ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत

सफलता की कहानी उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत अब सालाना कमाई 10 लाख रुपए पार रायपुर      सेवा, संकल्प और समर्पण जब शासकीय योजनाओं से जुड़ते हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जाती है। कुछ वर्ष पहले तक केवल 8 से 10 देशी गायों के सहारे प्रतिदिन महज 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना निवासी किसान परदेशी लाल चंद्रा आज एक सफल और समृद्ध डेयरी उद्यमी बनकर उभरे हैं। शुरुआती दिनों में कम दूध उत्पादन और पशुओं की अचानक होने वाली बीमारियों या मृत्यु से परिवार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी आमदनी भी बेहद सीमित थी। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार का राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार की शुरुआत की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आज उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ (Holstein Friesian) क्रॉसब्रीड गायें तैयार हो चुकी हैं।        ​वर्तमान में परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उन्नत एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह दूध बिक्री से उनकी मासिक आय 78,000 से 84,000 रुपए और वार्षिक आय बढ़कर 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुँच चुकी है। जो पशुपालन कभी परिवार के लिए केवल एक पूरक आय का जरिया था, आज वही उनकी मुख्य आजीविका और आर्थिक मजबूती का ठोस आधार बन गया है।       ​भविष्य की आय को सुरक्षित करने के लिए उनके पास वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस, 2 जर्सी क्रॉस और 2 साहीवाल क्रॉस की कुल 6 उन्नत बछिया तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और आय को और बढ़ाने का आधार बनेंगी। इसके साथ ही, पशुपालन के जोखिमों से सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अपने पशुओं का 60,000 रुपए प्रति पशु की दर से तीन वर्षों का बीमा कराया है, जिसके लिए मात्र 585 रुपए प्रति पशु का प्रीमियम निर्धारित है। उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी उनका चयन किया गया है, जिसके तहत बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें 19,500 रुपए मूल्य का संतुलित पशु आहार मिल रहा है, जिसमें हितग्राही अंशदान केवल 4,500 रुपए है।         ​परदेशी लाल ने अपनी आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद बनाकर स्थानीय किसानों को बेच रहे हैं। इससे उन्हें न केवल अतिरिक्त कमाई हो रही है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई परदेशी लाल चंद्रा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुँचता है, तो पारंपरिक व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकता है।

दीपक बैज के आरोपों पर स्वास्थ्य मंत्री का जवाब, अस्पताल चलने की दी चुनौती

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सियासत में नेताओं के बीच जुबानी जंग का सिलसिला जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हुई बहस के बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर निशाना साधते हुए उन्हें चुनौती दी है। बैज ने कहा है कि वे प्रदेश के किसी भी अस्पताल में जाकर जमीनी स्थिति देखने के लिए तैयार हैं। बैज की ओर से स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद मामला राजनीतिक बहस में बदल गया। श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार की चुनौती दीपक बैज की चुनौती पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी पलटवार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि दीपक बैज उनके पुराने मित्र हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। अस्पताल का चयन भी बैज अपनी पसंद से कर सकते हैं।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र या रायपुर का कोई भी अस्पताल चुन लिया जाए, वे वहां साथ चलने के लिए तैयार हैं। वे स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक मित्र के रूप में भी उनके साथ जाएंगे। जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे : स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि अगर दीपक बैज किसी अस्पताल का जायजा लेने जाना चाहते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी भेज दें। जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस को लेकर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस में चर्चा करने का कोई इंफेक्शन आ गया है।” अब दोनों नेताओं की चुनौती के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल का चयन कब और कहां होता है और क्या दोनों नेता साथ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचते हैं।

बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात

आयुष्मान भारत बना संबल बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात समय पर जांच और उपचार के साथ आयुष्मान भारत योजना से मिला पांच लाख रुपए तक के निःशुल्क उपचार का सहारा रायपुर, बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम करंजी निवासी 27 वर्षीय श्री नितेश कश्यप के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जीवन में नई उम्मीद लेकर आई। लंबे समय से पेट दर्द की असहनीय पीड़ा झेल रहे नितेश जब गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचे, तो उन्हें प्राथमिक उपचार और दवाइयां दी गईं। दवाइयों से अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर दोबारा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर वहां पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर श्रीमती प्रीति बघेल ने उनकी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल उन्हें महारानी जिला अस्पताल, जगदलपुर रेफर किया। समय पर जांच से सामने आई गंभीर बीमारी            महारानी जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने नितेश की आवश्यक जांचें कराईं। खून की जांच, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी विस्तृत जांचों में उनके लिवर कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। गंभीर बीमारी की जानकारी मिलने के बाद परिवार चिंतित हो गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें उपचार की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपलब्ध निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। पांच लाख रुपए तक के उपचार कवच से हुआ सफल ऑपरेशन          आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा ने नितेश और उनके परिवार को बड़ी आर्थिक चिंता से राहत दी। योजना के माध्यम से उनके जटिल उपचार और ऑपरेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। उपचार के बाद नितेश स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। आयुष्मान भारत ने मुझे नई जिंदगी दी           सफल उपचार के बाद नितेश कश्यप ने भावुक होकर कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने उन्हें वास्तव में नई जिंदगी दी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि पात्र हितग्राही इस जनहितकारी योजना का लाभ अवश्य लें। नितेश ने समय पर सही मार्गदर्शन देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों, उपचार करने वाले चिकित्सकों और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह बताती है कि समय पर स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता, उचित जांच और उपचार के साथ स्वास्थ्य योजना का आर्थिक संबल गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंदिरों में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति की प्रार्थना

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कवर्धा में सिद्धेश्वर महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए की प्रार्थना रायपुर, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज कवर्धा के ऐतिहासिक रानी सागर तालाब परिसर स्थित आस्था के पावन केंद्र और कवर्धा राज परिवार न्यास द्वारा निर्मित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं संकट मोचन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान सिद्धेश्वर महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की। इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां की प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी है। भोरमदेव और कवर्धा क्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए इन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती आस्था और संस्कृति की विविध परंपराओं से समृद्ध है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। भोरमदेव कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा के लिए कवर्धा पहुंचे मंत्री पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए कवर्धा प्रवास पर हैं। इस दौरान परियोजना से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति तथा आगामी चरण की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा की जाएगी।  केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना से भोरमदेव को मिल रहा नया आयाम केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145.99 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भोरमदेव क्षेत्र छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। कॉरिडोर के विकास से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाला पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला, क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ अनुभव कर सकता है। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास इस समृद्ध विरासत को बेहतर ढंग से सामने लाने का अवसर है। स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर भोरमदेव कॉरिडोर के विकास से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिलेगा। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। स्थानीय संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएगें। आस्था और विकास का बनेगा सुंदर संगम रानी सागर तालाब परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। भोरमदेव जैसे स्थलों का विकास आस्था, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।

केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर

केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर   ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की संयुक्त कार्यशाला में किसानों को मिला वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन  रायपुर  छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ एवं ICAR-CIFRI, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 8 एवं 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान, रोकथाम और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों पर किसानों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में ICAR-CIFRI के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर एवं तालाबों में मछलियों में होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसानों, 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला में फील्ड स्तर पर रोगों की त्वरित जांच, डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार, मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था को राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन श्री एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्री आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान सुश्री बीना गड़पाले तथा सहायक मत्स्य अधिकारी श्री विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जलाशयों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण कार्यशाला के उपरांत 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने राज्य के जलाशयों का मैदानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थापित केज कल्चर की स्थिति का जायजा लिया तथा मौके पर ही मत्स्य पालक किसानों को मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन एवं बेहतर उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। राज्य में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार रायपुर,  कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है। छोटी बचत से बड़े सपनों तक ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया। नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया। छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं। कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है। मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना। समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है। मति बाई की कहानी बताती है कि आजीविका का एक छोटा अवसर भी यदि महिला की मेहनत और निरंतर प्रयास से जुड़ जाए तो वह परिवार की आर्थिक दिशा बदल सकता है। ‘लखपति दीदी’—आय के साथ बढ़ा आत्मसम्मान ‘लखपति दीदी’ की पहचान इन महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें उन्होंने निर्भरता से आत्मनिर्भरता, संकोच से आत्मविश्वास और अभाव से अवसर की ओर कदम बढ़ाए हैं। आज ये महिलाएं परिवार के खर्च में योगदान दे रही हैं, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आय अर्जित करने के साथ उनके निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे बैंक जा सकती हैं, ऋण संबंधी प्रक्रिया समझ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और अपनी मेहनत से अर्जित आय के उपयोग का निर्णय स्वयं ले सकती हैं। यह परिवर्तन महिला सशक्तिकरण का वह स्वरूप है, जिसका असर घर से लेकर समाज तक दिखाई देता है। बिहान ने खोले आजीविका के अनेक रास्ते बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। कृषि एवं सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, दुग्ध व्यवसाय, सिलाई और अन्य आयमूलक गतिविधियां उनके लिए आमदनी बढ़ाने के अवसर बन रही हैं। स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देते, बल्कि साथ चलने का भरोसा भी देते हैं। समूह की बैठकों में महिलाएं अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे से सीखती हैं। प्रशिक्षण से उन्हें नई जानकारी मिलती है, जबकि बैंक और बाजार से जुड़ाव उनके निर्णय लेने की क्षमता … Read more