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लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

​"लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम ‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल रायपुर,         ​हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है। ​जब थम सी गई थी जिंदगी        ​पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।         ​दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा ​घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।        ​दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई। छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक        ​ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।       ​सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं। ​"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"        ​आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं। ​समाज के लिए नई मिसाल       ​सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।

आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक  सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी ​रायपुर      प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।       ​सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। ​लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।       ​अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।         ​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

​सेवा का संकल्प, विकास की धार नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली ​रायपुर        जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।         ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।         ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।       ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

CG में दशहरा-दिवाली से लेकर विंटर वेकेशन तक छुट्टियों की घोषणा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के स्कूलों में आगामी त्योहार और शीतकालीन छुट्टियों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने अवकाश की घोषणा कर दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश के लिए कुल 15 दिनों की छुट्टी निर्धारित की गई है। जारी आदेश के मुताबिक दशहरा अवकाश 17 अक्टूबर 2026 से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इस दौरान स्कूल पांच दिनों के लिए बंद रहेंगे। इसी तरह दीपावली अवकाश 6 नवंबर 2026 से 10 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। दीपावली के अवसर पर भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को पांच दिनों का अवकाश मिलेगा। वहीं, साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर 2026 से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। यह अवकाश भी पांच दिनों का होगा। इस तरह छत्तीसगढ़ के स्कूलों में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश को मिलाकर कुल 15 दिनों की छुट्टियां रहेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

भाई के कांग्रेस में शामिल होने पर बोले मंत्री खुशवंत साहेब, बताई अपनी राय

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सियासत में उस वक्त बड़ा उलटफेर हुआ, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े ढाल दास ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. उनके कांग्रेस प्रवेश के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई. इस पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर परिवार और समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है. मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेश से फूट डालो और राज करो की रही है. कांग्रेस आपस में लड़ाने का काम कर रही है. कांग्रेस एक परिवार, समाज और धर्म को एक-दूसरे से लड़ाने का काम कर रही है. लेकिन हम सभी दृढ़ संकल्पित हैं और राष्ट्र प्रथम, देश प्रथम की विचारधारा से जुड़े हुए हैं. हमारा लक्ष्य प्रदेश को विकसित बनाने का है. कांग्रेस में आपसी कलह पीसीसी चीफ बैज के कांग्रेस से सीएम उम्मीदवारों वाले बयान पर मंत्री खुशवंत साहेब ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आपसी कलह साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को पहले ही अपनी पसंद से हटा दिया है. कांग्रेस कितना भी प्रयास कर ले, जनता का विश्वास खो चुकी है. कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर पर तंज कसते हुए खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर से कुछ नहीं होने वाला. कांग्रेस ग्राउंड में कितना भी मेहनत कर ले, वहां पैसों का खेल और भ्रष्टाचार चलता है. 20 निष्कासित नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जितने भी अपराध होते हैं, उनमें कांग्रेस का नाम सामने आता है. कांग्रेस पहले निष्कासन का पत्र जारी करती है और फिर उसे वापस ले लेती है.

हर बच्चे के सपने को मिले पंख, सेवा संकल्प अभियान से विकसित भारत का संकल्प होगा साकार

रायपुर : विशेष लेख : सेवा संकल्प अभियान : 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प       रायपुर  किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे। विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं। इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है। वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखेगा। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करने की शक्ति देगी। आज का विद्यार्थी कल का केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं, बल्कि नया विचार देने वाला शोधकर्ता, नई तकनीक बनाने वाला नवाचारी, अपना व्यवसाय खड़ा करने वाला उद्यमी और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाला परिवर्तनकारी नागरिक बन सकता है। यही वह सोच है जो विकसित भारत के संकल्प को व्यापक अर्थ देती है। ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसलिए केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं करता, यह पूरे देश के भविष्य की बात करता है। आज किसी स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, किसी एकलव्य विद्यालय में पढ़ता जनजातीय विद्यार्थी, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा और अपने गांव में भविष्य का कोई नया रास्ता तलाशता विद्यार्थी-ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे। इन बच्चों के सपनों को अवसर देना ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। क्योंकि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, उसकी नई पीढ़ी की कल्पनाशक्ति और सामर्थ्य में होती है। जब करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, उनके भीतर सवाल पूछने की हिम्मत होगी, प्रयोग करने की स्वतंत्रता होगी और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी। वर्ष 2047 का विकसित भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है। उसकी नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है, उसकी उम्मीदें बच्चों की आंखों में पल रही हैं और उसकी दिशा युवाओं के सपनों से तय होगी। इसलिए जरूरी है कि देश का कोई बच्चा अवसर के अभाव में अपने सपने को छोटा न करे। उसके सपनों की उड़ान जितनी ऊंची हो, भारत का आकाश उतना ही खुला हो। क्योंकि … Read more

विदेशी छात्रों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर-SP की बैठक, दिए जरूरी निर्देश

रायपुर. कलेक्ट्रेट रायपुर में आज कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने जिले में संचालित विभिन्न विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों के साथ प्रतिनिधियों की बैठक ली। इस बैठक में विदेशी विद्यार्थियों के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवास, संस्थानों की जिम्मेदारी, स्थानीय प्रशासन के साथ पुलिस के साथ समन्वय को लेकर चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि विदेशी विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेशी विद्यार्थी भारत में अध्ययन के लिए आते हैं, इसलिए उनके लिए सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विदेशी विद्यार्थियों के आवास आवागमन की व्यवस्था के निर्देश बैठक में विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया गया कि विदेशी विद्यार्थियों के आवास के साथ आवागमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में जो विदेशी विद्यार्थी विश्वविद्यालय/कॉलेज के छात्रावास से बाहर निजी मकानों, पीजी या अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, उन्हें अगले 15 से 30 दिनों के अंदर संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए अथवा संस्थान से संबद्ध सुरक्षित छात्रावास में स्थानांतरित करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश इस संबंध में संस्थानों को विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा, स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आवासीय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। बैठक में कहा गया कि किसी भी अप्रिय घटना, दुर्घटना या कानून-विरोधी गतिविधि की स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारणों की पहचान कर आवश्यक निरोधात्मक कदम उठाए जाएं। प्रशासन और पुलिस को स्थानीय नागरिकों से समय-समय पर विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित शिकायतों के साथ सूचनाएं प्राप्त होती रही हैं। कुछ मामलों में विद्यार्थियों द्वारा अनुशासनहीनता या कानून-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका से संबंधित शिकायतें भी सामने आई हैं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए संस्थानों को अपने स्तर पर प्रभावी निगरानी, काउंसलिंग और अनुशासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कानून उल्लंघन की स्थिति में की जाएगी नियमानुसार कार्रवाई यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी विद्यार्थी के विरुद्ध केवल उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कानून का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थियों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भारत की स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों से अलग हो सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को चाहिए कि विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय कानून, स्थानीय सामाजिक व्यवहार, रीति-रिवाज, सार्वजनिक आचरण एवं स्थानीय संवेदनशीलताओं के संबंध में आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करें। विदेशी विद्यार्थियों के सहयोग की अपील साथ ही स्थानीय नागरिकों से भी अपील की गई कि विदेशी विद्यार्थियों के प्रति सहयोगात्मक और संवेदनशील व्यवहार रखें। किसी भी वास्तविक समस्या या कानून-विरोधी गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस या जिला प्रशासन को दें। सभी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया गया कि उनके संस्थान में अध्ययनरत विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित अद्यतन एवं सत्यापित जानकारी संस्थान स्तर पर व्यवस्थित रूप से संधारित करें और आवश्यकतानुसार जिला प्रशासन के साथ साझा करें। इसमें विद्यार्थियों की संख्या, देश, पाठ्यक्रम, संस्थान में प्रवेश की स्थिति, छात्रावास/आवास का विवरण और आवश्यक संपर्क जानकारी सहित प्रासंगिक अभिलेखों को अद्यतन रखने पर जोर दिया गया। संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि विदेशी विद्यार्थियों के भारत आगमन से लेकर अध्ययन अवधि एवं आवास संबंधी आवश्यक जानकारी का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध रहे तथा किसी भी महत्वपूर्ण परिवर्तन की जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर दी जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन को विदेशी विद्यार्थियों के लिए नियमित ओरिएंटेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा उन्हें आपातकालीन संपर्क नंबर, पुलिस सहायता, यातायात नियम, साइबर सुरक्षा, नशीले पदार्थों एवं अन्य कानून-विरोधी गतिविधियों से दूर रहने संबंधी जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विदेशी विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों से अपील की कि रायपुर को विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने में सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रबंधन, विद्यार्थी, अभिभावक एवं स्थानीय समाज के समन्वित प्रयास से ही सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

50% पंजीयन छूट से रचना सोनी को मिली राहत, बचाए ₹35 हजार

सेवा की कहानी : पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से रचना सोनी ने बचाए 35 हजार रुपये अपने नाम संपत्ति होने से बढ़ा आत्मविश्वास, बची राशि से परिवार की आर्थिक योजना को मिली मजबूती ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत रचना सोनी ने साझा किया अनुभव, महिलाओं के लिए शुल्क रियायत को बताया उपयोगी पहल रायपुर शासन की जनहितकारी नीतियों का लाभ जब किसी परिवार की आर्थिक योजना को आसान बनाता है, तो उसका प्रभाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य में भी दिखाई देता है। बिलासपुर की श्रीमती रचना सोनी के लिए महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत ऐसा ही एक अवसर लेकर आई। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने पर उन्हें लगभग 35 हजार रुपये की बचत हुई। रचना सोनी ने बताया कि शुल्क में मिली इस राहत से संपत्ति पंजीयन का खर्च कम हुआ और परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी सहूलियत मिली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप, वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन पहलों के जमीनी प्रभाव, उनके अनुभव और सुझावों को जान रहा है। रजिस्ट्री का खर्च घटा, परिवार के लिए बनी आर्थिक राहत श्रीमती रचना सोनी ने बताया कि संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान पंजीयन शुल्क में मिली 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें 35 हजार रुपये की बचत हुई। उनके अनुसार, संपत्ति खरीदने या पंजीयन कराने में होने वाले खर्च के बीच यह बचत परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत है। इससे एक ओर पंजीयन का आर्थिक बोझ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर बची राशि का उपयोग परिवार की अन्य आवश्यकताओं और भविष्य की आर्थिक योजना में किया जा सकता है। रचना सोनी के लिए यह सुविधा केवल शुल्क में कमी तक सीमित नहीं रही। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन होने से उन्हें संपत्ति पर अपने स्वामित्व का अनुभव मिला और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी को भी मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व से जोड़ने वाली ऐसी पहल उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाने में सहायक होती है। 4 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस तरह महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिल रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करना और उन्हें सीधे आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना है। रचना सोनी की कहानी इसी पहल के जमीनी प्रभाव को सामने लाती है। 35 हजार रुपये की बचत उनके लिए पंजीयन प्रक्रिया में मिली आर्थिक राहत है, लेकिन इसके साथ अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास से भी जुड़ा है। ‘सेवा संकल्प’ से सामने आ रही बदलाव की कहानियां ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभाग द्वारा हितग्राहियों से किए जा रहे सीधे संवाद से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि शासन की सुविधाओं और सुधारों का नागरिकों के जीवन पर किस तरह प्रभाव पड़ रहा है। रचना सोनी का अनुभव बताता है कि जब किसी नीति का लाभ सीधे परिवार तक पहुंचता है, तो वह बचत, सुविधा और आत्मविश्वास के रूप में दिखाई देता है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन देने वाली यह पहल आर्थिक राहत के साथ महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। रचना सोनी ने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को संपत्ति पंजीयन में मिल रही यह रियायत उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उपयोगी कदम है।

नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों ठगे, CG में महिला समेत 2 गिरफ्तार

धमतरी. मंत्रालय में नौकरी और आवास दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले दो शातिर आरोपियों को धमतरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने गृह मंडल का पारिजात भवन दिलाने का झांसा देकर पीड़ित से 9 लाख से अधिक रुपए के अधिक की रकम ली थी. मामले में शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी शशि प्रभा साहू और अमित देवांगन गिरफ्तार किया है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भानपुरी, थाना गुरूर, जिला बालोद निवासी प्रार्थी मनीष साहू (27 वर्ष) ने धमतरी सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. प्रार्थी के अनुसार, फरवरी 2024 में उसकी मुलाकात रुद्री रोड स्थित एक होटल में शशि प्रभा साहू एवं अमित कुमार देवांगन से हुई थी. दोनों ने उसे अपने झांसे में लेते हुए स्वयं को मंत्रालय में कार्यरत बताया और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा पारिजात भवन (आवास) का आबंटन कराने का प्रलोभन दिया. आरोपियों ने प्रार्थी को विश्वास में लेने के लिए बाकायदा मंत्रालय (महानदी भवन) में ले जाकर बाहर खड़ा किया और भवन की कुल कीमत 14,12,000 रुपये बताई. प्रार्थी से विभिन्न बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और नकद माध्यमों से किश्तों में कुल 9,08,000 रुपये ऐंठ लिए. इसके अलावा प्रार्थी से बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक के दो खाली हस्ताक्षरित चेक भी ले लिए गए. जब प्रार्थी को अपने साथ ठगी का अहसास हुआ और उसने रकम वापस मांगी, तो केवल 2,98,999 रुपये लौटाए गए तथा शेष रकम हड़प ली. प्रार्थी की रिपोर्ट पर धमतरी सिटी कोतवाली में धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया. मामले में धमतरी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करते हुए तकनीकी साक्ष्यों और सूचना के आधार पर शशि प्रभा साहू पति प्रीतम साहू, (50 वर्ष) और अमित कुमार देवांगन पिता स्व. सुखराम देवांगन (38 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की. आरोपियों के जुर्म स्वीकार करने पर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. 

हुनर से स्वावलंबन तक, छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए बदल रही उच्च शिक्षा की तस्वीर

"सेवा_संकल्प_अभियान" छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई भोर: हुनर, शोध और स्वावलंबन से गढ़ा जा रहा युवाओं का भविष्य  रायपुर  ​छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं के पारंपरिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है। ​सेवा का संकल्प: गुणवत्ता और समावेशी विकास का 'मिशन मोड'       ​राज्य सरकार ने 'सेवा का संकल्प' निभाते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 'छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन' की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय संबल दिया जा रहा है। पारदर्शी और सख्त मॉनिटरिंग तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।       ​शैक्षणिक गुणवत्ता को शीर्ष पर ले जाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अध्यापन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उद्योग जगत के व्यावहारिक विशेषज्ञों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में परिसरों से जोड़ा जा रहा है। ​सेवा आपके द्वार: वनांचल से शहरों तक उच्च शिक्षा की आसान पहुँच        ​'सेवा आपके द्वार' की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है। चार वर्षीय बी.एड. (ITEP) और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। ​कहानी बदलाव की: आधुनिक तकनीक और स्वावलंबन से युवाओं का सशक्तीकरण         ​यह बदलाव केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि हर उस युवा की 'कहानी बदलाव की' है जो कल तक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित था। स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत अब स्थानीय और वैश्विक मांग के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा रहा है। ​   भविष्य में उपयोगी विभिन्न तकनीकों और कौशल को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग जैसे विषयों को प्रमुखता से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह ​स्थानीय व कृषि-आधारित उद्योग के तहत रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन की शिक्षा युवाओ को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे।        ​इन व्यावहारिक विषयों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ MoU किए गए हैं, जिससे युवाओं को सीधी इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा मिल रही है।         रिसर्च, कौशल विकास, उद्योग समन्वय और वनांचल तक शिक्षा के विस्तार के इस संगम से छत्तीसगढ़ तेजी से देश के अग्रणी 'एजुकेशन हब' के रूप में स्थापित हो रहा है। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक