samacharsecretary.com

यूट्यूबर्स की बढ़ीं मुश्किलें, दूसरी FIR दर्ज; महिला से उगाही और वीडियो हटाने के बदले ₹2 लाख मांगने का आरोप

दुर्ग-भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट विवाद में फंसे 2 यूट्यूबर्स सागर साहू और पुष्पराज सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और उगाही के आरोप में दूसरी FIR दर्ज की है। दरअसल, महिला ग्राहक सेवा केंद्र चलाती हैं। यूट्यूबर्स ने आरोप लगाया था कि वह ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर उनके अंगूठे का निशान लगवाकर खाते से पैसे निकाल लेती है। जबकि महिला का आरोप था कि यूट्यूबर्स ने बातचीत को तोड़-मरोड़कर वीडियो तैयार किया। पीड़िता का कहना है कि सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के बदले यूट्यूबर्स ने 50 हजार मांगे। 35 हजार रुपए देने के बाद वीडियो तो हटा दिया गया, लेकिन फिर से 2 लाख रुपए की डिमांड की, न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी यूट्यूबर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। हालांकि, दोनों ही आरोपी भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट मामले में जेल में हैं। ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी… जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता महिला नाम का नेहा मिश्रा है, जो उमदा की रहने वाली है और पिछले 5 सालों से वह गांव में ग्राहक सेवा केंद्र चलाती है। 25 जून को उसने पुरानी भिलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया है कि कुछ समय पहले सागर साहू अपने साथी पुष्पराज सिंह के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने के बहाने उनके दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बात को गलत तरीके से दिखाकर वीडियो बनाया और उसे खबर के रूप में वायरल किया। नेहा ने आरोप लगाया है कि 3 जून को वीडियो हटाने के बदले उनसे 50 हजार रुपए की मांग की गई। बदनामी के डर से उसने अपनी जमा पूंजी से 35 हजार रुपए आरोपियों को दे दिए। रकम मिलने के बाद वीडियो हटा दिया गया था। 2 लाख मांगे, नहीं देने पर नई वीडियो वायरल करने की धमकी यह भी आरोप है कि बाद में आरोपियों ने नेहा से फिर 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी गई। पैसे न देने पर आरोपियों ने 3 से अधिक अलग-अलग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इससे महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें अपने ग्राहक सेवा केंद्र जाने में भी शर्मिंदगी महसूस हो रही है। पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस बोली- जांच के बाद करेंगे आगे की कार्रवाई पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद शुरुआती तौर पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 9 दिन पहले भी मामला दर्ज हुआ था यह पहली बार नहीं है जब दोनों यूट्यूबर्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई है। करीब 9 दिन पहले भी उनके खिलाफ एक और मामले में केस दर्ज किया गया था। यह मामला महादेव सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट से संबंधित था। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से एक मैसेज दिखाया गया था, जिसमें लिखा था- “नंबर भेजो अपना, बात करना चाहते हैं।” इसी स्क्रीनशॉट के आधार पर दोनों यूट्यूबर्स ने खबरें वायरल की थीं। भूपेश बघेल ने बताया था फर्जी कंटेंट वायरल चैट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे थे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वायरल चैट और उससे जुड़े कंटेंट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लीगल टीम फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

तंगहाली से जीत तक का सफर, बिलाईगढ़ की राजकुमारी ने संघर्ष से लिखी सफलता की नई कहानी

तंगहाली के काँटों को रौंदकर महकी बिलाईगढ़ की राजकुमारी पलायन की त्रासदी से 'लखपति दीदी' बनने की मुकम्मल दास्तान रायपुर     ​छत्तीसगढ़ की माटी में संघर्ष और स्वावलंबन की एक ऐसी अमिट इबारत लिखी है श्रीमती राजकुमारी साहू ने। कभी दो वक्त की सूखी रोटी और बच्चों के बेहतर भविष्य की तलाश में अपनी सरजमीं छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर राजकुमारी, आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम बिलासपुर में आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं। कल तक जो हाथ तंगहाली के आगे बेबस थे, आज वे 'बिहान' योजना की बदौलत न सिर्फ अपने परिवार की किस्मत बदल रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार दे रहे हैं। ​मजबूरी का वो दौर: जब रास्ते धुंधले थे        ​राजकुमारी साहू का शुरुआती जीवन किसी आम साधनहीन ग्रामीण महिला की तरह अभावों के साए में बीता। परिवार में आय का कोई स्थायी जरिया नहीं था। जब गाँव में उम्मीद की सारी खिड़कियाँ बंद नजर आने लगीं, तो पेट की आग बुझाने के लिए उन्हें अपने परिवार के साथ अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ा। दूसरे प्रदेशों की तंग गलियों और कठिन परिस्थितियों में मजदूरी करते हुए उनके मन में हमेशा एक ही कसक रहती थी— "क्या कभी अपनी माटी में रहकर, अपने बच्चों के सामने सिर उठाकर जीने का मौका मिलेगा?" ​'बिहान' का उजला सवेरा और 'जय मां संतोषी' का संकल्प      ​कहते हैं कि जब आपके भीतर कुछ कर गुजरने की तड़प हो, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। राजकुमारी के जीवन में यह रास्ता छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यानी 'बिहान' ने खोला। गाँव लौटने पर जब उन्हें महिला स्व-सहायता समूहों के बारे में पता चला, तो उनके भीतर सोया हुआ नेतृत्व गुण जाग उठा। उन्होंने ठान लिया कि वे अब खुद को और गाँव की दूसरी महिलाओं को लाचारी के दलदल से बाहर निकालेंगी।​शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण थी। गाँव की झिझकती और आशंकित महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाना आसान नहीं था। राजकुमारी ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार बैठकें कीं, महिलाओं की झिझक को तोड़ा और आखिरकार 10 कर्मठ महिलाओं को साथ लेकर 'जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह' की नींव रखी। प्रति माह 100 रुपए की मामूली बचत से शुरू हुआ यह सफर, दरअसल उनके बड़े सपनों की पहली किस्त थी। ​पलायन के दर्द को बनाया हुनर: ऐसे खड़ा हुआ आइसक्रीम का साम्राज्य       ​राजकुमारी की दूरदर्शिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पलायन के दौरान मिले कड़वे अनुभवों को भी अपनी ताकत बना लिया। बाहर मजदूरी करते समय उन्होंने आइसक्रीम और कुल्फी बनाने की प्रक्रिया को बड़े ध्यान से देखा था। उन्होंने सोचा कि क्यों न इस हुनर को अपने गाँव में ही रोजगार का जरिया बनाया जाए। 'बिहान' योजना ने उनके इस अभिनव आइडिया पर भरोसा जताया और समूह के माध्यम से उन्हें 1 लाख 50 हज़ार रुपए का बैंक लोन तथा 60 हज़ार रुपए की सामुदायिक निवेश राशि (CIF) स्वीकृत की गई। इस पूंजी से राजकुमारी ने स्थानीय बाजार से कच्चा माल खरीदा और अपने परिवार के सहयोग से घर पर ही मटका कुल्फी, तरह-तरह की आइसक्रीम और बादाम शेक जैसे लजीज उत्पाद तैयार करने लगीं। शुद्धता और बेजोड़ स्वाद के कारण देखते ही देखते उनके उत्पादों की मांग बिलाईगढ़ और उसके आसपास के बाजारों में तेजी से बढ़ गई। ​      ​राजकुमारी साहू की मेहनत ने आज उनके उद्यम को एक सफल मुकाम पर पहुँचा दिया है, जिसकी बानगी इन आँकड़ों में साफ देखी जा सकती है। आज यह समूह और राजकुमारी साहू 3 लाख रुपए से अधिक की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। कल तक जो महिला अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर थी, आज वह शान से 'लखपति दीदी' की कतार में खड़ी है। ​गृहिणी से 'सफल उद्यमी': एक रोल मॉडल का उदय      ​श्रीमती राजकुमारी साहू आज सिर्फ एक सफल व्यावसायिक नाम नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण छत्तीसगढ़ के बदलते परिदृश्य का एक जीवंत प्रतीक हैं। आज वे खुद प्रशिक्षित होकर एक पेशेवर उद्यमी की भूमिका निभा रही हैं। वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं, बल्कि अपने समूह की अन्य दीदियों को भी व्यवसाय के नए गुर सिखाकर उन्हें सशक्त बना रही हैं।      ​राजकुमारी साहू की यह प्रेरक दास्तान छत्तीसगढ़ की हर उस महिला को संबल देती है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपना आसमान खुद छूना चाहती है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर, प्रशासनिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम हो, तो ग्रामीण अंचल की एक साधारण गृहिणी भी अपने भाग्य की विधाता बन सकती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायत पर 3 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर वाहन जप्त,

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सख्ती का असर: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायत पर 3 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर वाहन जप्त,   खनिज संपदा की लूट नहीं होगी बर्दाश्त, अवैध उत्खनन करने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई-मुख्यमंत्री साय  रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 जेसीबी मशीन तथा 3 ट्रैक्टर वाहनों को जप्त किया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की शून्य सहिष्णुता की नीति को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किए जाने का प्रमाण है। जिले के देवराजपारा-सधवानी तथा बंधी-बचरवार क्षेत्र में खनिज मुरूम एवं मिट्टी के अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कराई गई। वहीं सिलपहरी क्षेत्र में खनिज रेत के अवैध परिवहन की सूचना पर भी खनिज विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों को जप्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान देवराजपारा-सधवानी क्षेत्र से दो जेसीबी, बंधी-बचरवार क्षेत्र से एक जेसीबी तथा सिलपहरी क्षेत्र से रेत परिवहन में लगे तीन ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर सुरक्षित रूप से पुलिस लाइन अमरपुर में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि सधवानी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1076 तथा कलेक्टर के समक्ष अवैध उत्खनन की शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री की जनहितकारी शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की सक्रियता और खनिज विभाग की तत्परता से शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे आमजन का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है। कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण जैसी किसी भी गतिविधि को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी, सतत निरीक्षण तथा शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सके और शासन को राजस्व की क्षति न पहुंचे। खनिज विभाग के अनुसार जप्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। नियमानुसार अर्थदंड एवं समझौता राशि निर्धारित खनिज मद में जमा कराने के बाद ही संबंधित वाहनों को मुक्त किया जाएगा। इस कार्रवाई में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू सहित जिला खनिज उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार अवैध खनन के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए जनशिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

नारायणपुर में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा

​नारायणपुर में खरीफ की तैयारियां तेज: 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा, वितरण में आई तेजी ​रायपुर     खरीफ सीजन 2026 को सफल बनाने और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग नारायणपुर द्वारा युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जिले में किसानों को समय पर खाद और उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण और वितरण के कार्य में तेजी आई है, ताकि मानसूनी बुवाई के दौरान अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।       ​कृषि विभाग द्वारा जारी ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले में खाद और बीज की उपलब्धता तथा वितरण की स्थिति काफी मजबूत है। जिले में लक्ष्य के मुकाबले अब तक आधे से अधिक खाद-बीज का वितरण पूरा किया जा चुका है।     जिले के खेतों को समृद्ध करने के लिए इस साल कुल 4,645 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के मुकाबले विभाग अब तक 2,187.80 मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित भंडारण कर चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 47 प्रतिशत है। राहत की बात यह है कि भंडारित की गई इस खाद में से 1,511.35 मीट्रिक टन यानी उपलब्ध खाद का 69 प्रतिशत किसानों के हाथों तक पहुंच चुका है, जिससे खेतों में शुरुआती पोषण की कमी नहीं होगी।       दूसरी ओर, खेतों में बेहतर अंकुरण और बंपर पैदावार के लिए प्रमाणित बीजों का वितरण भी बेहद संतोषजनक है। जिले को इस सीजन के लिए 2,303 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य मिला था, जिसके जवाब में विभाग ने रिकॉर्ड तेजी दिखाते हुए 2,011.80 क्विंटल बीजों का भंडारण कर लिया है। यह कुल लक्ष्य का शानदार 87 प्रतिशत है। इस उपलब्ध बीज में से 1,355.96 क्विंटल लगभग 67 प्रतिशत बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, और किसान अब अपने खेतों में बुवाई की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ​कालाबाजारी पर रोक और पारदर्शी वितरण प्राथमिकता         जिले की कृषि विभाग की उपसंचालक ने बताया कि इस बार रणनीति एडवांस प्लानिंग के तहत तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐन बुवाई के वक्त किसी भी किसान को कतारों में न लगना पड़े और न ही सामग्री की कमी हो। खाद और उन्नत बीजों का भंडारण व उठाव समानांतर रूप से जारी है ताकि अंदरूनी क्षेत्रों के अंतिम किसान तक इसकी समय पर पहुंच हो सके। ​कृषि विभाग ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या बिचौलियों के झांसे में न आएं।       ​किसान केवल प्राधिकृत (अधिकृत) विक्रेताओं और शासकीय सहकारी समितियों से ही खाद-बीज की खरीदी करें।​खरीदी के समय पावती/बिल अवश्य लें। किसी भी प्रकार की किल्लत, गुणवत्ता में कमी या अधिक दाम वसूलने की शिकायत पर तत्काल अपने नजदीकी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। ​

​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा ​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात रायपुर        राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।      ​मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने। ​ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण   ​शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।      इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है। ​ आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति       ​सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।      ​सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।  "योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"     ​प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार’— छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई पहचान बना सेवा सेतु

​'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार': छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’ ​धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी रायपुर        आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।       ​इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है। ​चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक       ​अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।       ​पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। ​घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा      ​लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। ​नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी। ​डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'     ​सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।      लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। ​सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर     ​धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का संदेश, मुनगा अपनाएं, सुपोषण बढ़ाएं और पर्यावरण बचाएं

हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण : बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिया पोषण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’’ का संदेश देते हुए पौष्टिक आहार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों को मुनगा और पपीता के पोषण संबंधी महत्व, इनके स्वास्थ्य लाभ तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के हाथों से भी पौधे लगवाए और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुनगा को "सुपोषण वृक्ष" के रूप में पहचान मिल चुकी है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा कुपोषण की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पपीता भी विटामिन एवं खनिज तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के अभिभावकों से अपने घरों एवं आंगनों में मुनगा के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास पौष्टिक वृक्ष लगाए, तो घर के समीप ही पोषक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प भी है। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से शुरू हुआ यह संदेश प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी अभियान बनकर उभर रहा है।

शहीद ASI रामू राम नाग को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दी श्रद्धांजलि, परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

शहादत को नमन : मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर दी श्रद्धांजलि शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देश रायपुर   महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

नवविकास की राह पर बस्तर, जगरगुंडा पहुंचकर पहली महिला मंत्री बनीं लक्ष्मी राजवाड़े

नवविकास की राह पर अग्रसर बस्तर :जगरगुण्डा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनी  लक्ष्मी राजवाड़े कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत रायपुर बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर विकास, विश्वास और जनसहभागिता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे सुदूर अंचलों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसी परिवर्तनशील बस्तर की तस्वीर को और सशक्त करने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं। विशेष महत्व की बात यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका आगमन विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति का प्रतीक बनकर उभरा। दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया, ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण चर्चा में रहते थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और नई संभावनाओं का सृजन कर रही हैं। प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। ग्रामीण महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत करने वाली है तथा यह अनुभव कराती है कि विकास की मुख्यधारा अब वास्तव में उनके गांव तक पहुंच चुकी है। श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण निर्मित हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में आज बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं बदलते बस्तर की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।

147 बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेंगे निःशुल्क कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण

147 बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेंगे निःशुल्क कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण ​रायपुर,     जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में  जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्र में एक विशेष पहल की गई। कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु पंजीयन, चिन्हांकन एवं मापन शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन को सुगम बनाना है। ​एलिम्को के विशेषज्ञों ने किया परीक्षण      ​शिविर में भारत सरकार के मिनीरत्न उपक्रम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। जनपद पंचायत धमतरी, कुरूद सहित नगर पालिक निगम धमतरी और विभिन्न नगर पंचायतों (कुरूद, आमदी, भखारा) से बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंचे।     ​विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से किए गए परीक्षण और मापन के बाद कुल 147 हितग्राहियों को पात्र पाया गया, जिन्हें आने वाले दिनों में निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बांटे जाएंगे। इसके साथ ही मौके पर ही 16 दिव्यांगजनों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड भी बनाए गए। ​नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प      ​सहायक उपकरणों के मापन के साथ-साथ शिविर में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया। समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ने उपस्थित सभी लोगों को जीवनभर नशामुक्त रहने की शपथ दिलाई। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।     ​शिविर में एलिम्को की तकनीकी टीम, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व नागरिक उपस्थित थे।