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बस्तर की पद्मा के घर लौटी रोशनी साय सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’ बनी अनाथ बेटी का संबल

रायपुर  बस्तर के घने जंगलों के बीच बसे छोटे से गांव बालेंगा में रहने वाली पद्मा कश्यप के लिए बीते कुछ साल अंधेरे और अनिश्चितता से भरे थे। लेकिन आज पद्मा के चेहरे पर मुस्कान है और उसके छोटे से घर में उम्मीदों का उजाला है। यह बदलाव आया है मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की ‘बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ से। संघर्षों के बीच अंधेरे का साया            पद्मा की कहानी संघर्ष और धैर्य की दास्तां है। कम उम्र में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद पद्मा घर में अकेली रह गईं। आय का कोई स्थायी जरिया नहीं था और जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही एक बड़ी चुनौती थी। इसी तंगहाली के बीच घर का बिजली बिल बकाया होते-होते 9,000 रुपये तक जा पहुँचा। एक अनाथ बेटी के लिए, जिसे दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा हो, इतनी बड़ी राशि चुकाना नामुमकिन था। बिल न पटा पाने के कारण घर की बिजली कटने की कगार पर थी और पद्मा का भविष्य अंधेरे की ओर बढ़ रहा था। योजना ने दिया नया जीवन            जब पद्मा को राज्य सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के बारे में पता चला, तो उसे उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। योजना के तहत पद्मा के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें बकाया बिल पर 4,000 रुपये की सीधी राहत प्रदान की गई। यह केवल पैसों की छूट नहीं थी, बल्कि एक अनाथ बेटी को यह अहसास कराना था कि उसकी सरकार उसके साथ खड़ी है। इस सहायता के बाद पद्मा अपना शेष बकाया चुकाने में सक्षम हुईं और उनके घर की बिजली कटने से बच गई। "मुख्यमंत्री का आभार, मेरे घर का अंधेरा दूर हुआ"           अपनी खुशी साझा करते हुए पद्मा कहती हैं— "जब बिल 9 हजार हो गया था, तो मुझे लगा अब कभी घर में उजाला नहीं होगा। लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की योजना ने मुझे सहारा दिया। 4 हजार की छूट मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। आज मेरा घर फिर से रोशन है और इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी को दिल से धन्यवाद देती हूँ।" भरोसे की नई इबारत           पद्मा कश्यप की यह कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है, जो आर्थिक तंगी के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की यह नीति दर्शाती है कि शासन का लक्ष्य केवल विकास नहीं, बल्कि 'अंत्योदय' यानी अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा है। बस्तर के सुदूर वनांचल में जलता पद्मा के घर का वह बल्ब आज केवल बिजली से नहीं, बल्कि सरकार के प्रति अटूट विश्वास से चमक रहा है।

लेखा प्रशिक्षण के लिए आवेदन 01 मई से आमंत्रित आवेदन की अंतिम तिथि 29 मई तक

रायपुर संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन के आदेशानुसार आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिये 01 मई 2026 से 29 मई 2026 के मध्य की अवधि में आवेदन पत्र स्वीकार किये जायेंगें।  इस तिथि के पूर्व एवं पश्चात प्राप्त आवेदन- पत्रों पर विचार नही किया जाएगा। निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र ही मान्य होगा। प्राचार्य शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला से मिली जानकारी के अनुसार लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिए 3 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके लिपिक वर्गीय कर्मचारी अपने कार्यालय प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में के आवेदन पत्र भेज सकते है। यह आवेदन शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला,नगर घड़ी चौक रायपुर को 29 मई  2026 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त हो जाना चाहिए।  मानक आवेदन पत्र पर ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगें। आवेदन जिस सत्र के प्रशिक्षण हेतु किया गया है, उस सत्र के लिये ही मान्य होगा। पूर्व प्रचलित आवदेन पत्र स्वीकार नही किये जायेगें। आवेदन पत्र के साथ अन्य आवश्यक सुसंगत दस्तावेज संलग्न होना चाहिए। आवेदन का निर्धारित प्रारूप एवं निर्देश रायपुर संभाग के समस्त जिला कोषालयों के सूचना पटल पर अवलोकन किये जा सकते हैं।

‘सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चिप्स के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के उन्नत संस्करण 'सेवा सेतु' का किया शुभारंभ 'सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आधुनिक तकनीक और AI से सशक्त हुआ सुशासन: ‘सेवा सेतु’ से 441 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर अब सेवाएं नागरिकों के हाथ में: ‘सेवा सेतु’ से घर बैठे मिलेगी 441 सरकारी सुविधाएं ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी नागरिक सेवाओं की डिजिटल सुविधा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा आमजन तक प्रभावशाली, पारदर्शी और डिजिटल नागरिक सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत संचालित ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के उन्नत संस्करण ‘सेवा सेतु’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से डिजिटल नागरिक सेवाएं और अधिक सशक्त और प्रभावी होंगी। वर्ष 2003 में प्रारंभ हुए चॉइस (CHOICE) मॉडल से लेकर वर्ष 2015 के ई-डिस्ट्रिक्ट और अब ‘सेवा सेतु’ तक छत्तीसगढ़ ने डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक लंबी और उल्लेखनीय यात्रा तय की है तथा यह प्लेटफॉर्म अब नागरिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन चुका है, जिससे लाखों नागरिकों को लाभ मिला है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से अब एक ही पोर्टल पर 441 शासकीय सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 54 नई सेवाएं और 329 री-डायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी सेवाओं की जानकारी सहज रूप से प्राप्त की जा सकेगी। आय, जाति, निवास, राशन कार्ड और विवाह पंजीयन जैसे प्रमुख प्रमाण-पत्रों सहित अब तक 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं और इतने ही प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 30 से अधिक विभागों के एकीकरण के साथ यह प्लेटफॉर्म एक सशक्त “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘सेवा सेतु’ राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का संचालन राज्य स्तर पर चिप्स (CHiPS) द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसाइटी (DeGS) के माध्यम से इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार, व्हाट्सएप और ‘भाषिणी’ जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकृत उपयोग किया गया है, जिससे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, सेवा की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजी लॉकर, ई-प्रमाण और उमंग जैसे प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण कर सेवाओं को और अधिक सरल, सुरक्षित और सुलभ बनाया गया है।  ‘सेवा सेतु’ में ट्रेजरी और ई-चालान का एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन भुगतान कर तत्काल डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे तथा डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, जिसकी रीयल-टाइम ट्रैकिंग एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से संभव होगी। पोर्टल में क्यूआर कोड आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल सिग्नेचर, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं तथा यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा समाप्त हो गई है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत सेवाओं की समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन, समय-सीमा संकेतक और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी। राज्य में सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं, जहां से नागरिक आसानी से सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।  ‘सेवा सेतु’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जनसेवा के केंद्र में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया को सरल और तकनीकी रूप से बाधारहित बनाया गया है, जिससे शासन और नागरिकों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और सेवाएं सीधे नागरिकों के हाथों तक पहुंच रही हैं।व्हाट्सएप इंटरफेस के माध्यम से नागरिक विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे, पावती रसीद और दस्तावेजों के लिंक तुरंत प्राप्त कर सकेंगे तथा अनुमोदन के पश्चात डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र सीधे व्हाट्सएप पर प्राप्त कर सकेंगे।  वर्तमान में यह सुविधा 25 सेवाओं के लिए उपलब्ध है, जिसे शीघ्र ही सभी सेवाओं तक विस्तारित किया जाएगा। प्रत्येक प्रमाण-पत्र में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन की सुविधा दी गई है, जबकि कैप्चा, ओटीपी और ईमेल आधारित प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। नागरिकों की पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा सुरक्षित लॉगिन हेतु डिजिलॉकर और ई-प्रमाण जैसी प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।  ‘भाषिणी’ के सहयोग से यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे हर नागरिक अपनी भाषा में सेवाओं का लाभ ले सकेगा। नागरिक ‘सेवा सेतु’ में उपलब्ध सेवाओं का लाभ वेब पोर्टल, लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे तथा फीडबैक सुविधा के माध्यम से अपने सुझाव भी दे सकेंगे, जिनके आधार पर इस परियोजना को निरंतर बेहतर बनाया जाएगा।  इस अवसर पर मुख्यसचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,  मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बदलाव, नन्हे कदम बनेंगे सशक्त भारत के भविष्य की नींव

रायपुर देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है। भवन ही बन गया शिक्षक : ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है। धमतरी का ‘बाला मॉडल’ : सीखने का नया अनुभव धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं। शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है। इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है। खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं। कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सशक्त भारत की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। * डॉ. दानेश्वरी संभाकर उप संचालक (जनसंपर्क)

छत्तीसगढ़ टॉपर्स में चमकी कवर्धा की रिया, 98.83% अंक लेकर बनीं सेकंड टॉपर

कवर्धा आज कक्षा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए। कक्षा दसवीं की मेरिट लिस्ट में कवर्धा के स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी मीडियम स्कूल कवर्धा की छात्रा रिया केशरवानी ने पूरे प्रदेश की मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल किया है। प्रदेश की मेरिट सूची में रिया ने लहराया परचम उन्होंने 600 अंकों में 593 अंक प्राप्त किए हैं, और 98.83 प्रतिशत के साथ पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रही हैं। रिया की इस ऐतिहासिक सफलता से स्कूल और जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन हुआ है। कलेक्टर ने दी बधाई और शुभकामनाएं कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने जिला प्रशासन की ओर से छात्रा रिया केशरवानी, उनके माता-पिता और परिजनों एवं स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि रिया की यह सफलता दूसरे छात्रों को प्रेरणा देगी।  

मंत्रालय की कैंटीन में बड़ा बदलाव तय, 26 साल बाद कर्मचारी संघ ने उठाई मांग

रायपुर. नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) की कैंटीन व्यवस्था बदलने जा रही है. लंबे समय से कैंटीन संचालन इंडियन कॉफी हाउस (ICH) के माध्यम से बिना निविदा के किया जा रहा था. अब निविदा के जरिए एक एजेंसी का चयन कर कैंटीन संचालन की नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, इस बीच मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से कैंटीन संचालित करने की मांग रखी है. मंत्रालय याने महानदी भवन में अब तक इंडियन कॉफी हाउस (ICH) के माध्यम से बिना निविदा के कैंटीन का संचालन किया जा रहा था. आईसीएच को कैंटीन संचालन के लिए राज्य शासन द्वारा लगभग 12 लाख रुपए प्रतिमाह की सब्सिडी प्रदान की जाती थी, वह भी बिक्री आय के अतिरिक्त. इसी कारण से कैंटीन में खाद्य पदार्थों की दरें बाजार दरों की तुलना में काफी कम बनी रहती थीं. कर्मचारी संघ ने चुनाव के दौरान इस व्यवस्था को समाप्त कर टेंडर आधारित, पारदर्शी प्रणाली लागू करने को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था. सामान्य प्रशासन विभाग इसी आधार पर खुली निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की गई. प्रारंभिक चरणों में अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिली, परंतु प्रयासों के बाद अंततः एक एजेंसी का चयन कर नई व्यवस्था लागू की जा रही है. बताया जा रहा है कि कैंटीन पूर्णतः लागत-आधारित मॉडल पर संचालित होगी, जहां दरों का निर्धारण वास्तविक लागत के अनुरूप किया जाएगा. नई व्यवस्था में खाद्य पदार्थों के महंगे होने की आशंका जताते हुए मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सुझाव दिया है. जिसमें कैंटीन का संचालन निजी हाथों में सौंपने की बजाए महिला स्व-सहायता समूह को देने की मांग की है. इसके लिए प्रदेश के अन्य शासकीय कार्योलयों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित किए जा रहे कैंटीन का हवाला देते हुए मंत्रालय कैंटीन की भी जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूह को देने की मांग की है.

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का जलवा, 10वीं-12वीं में पास प्रतिशत शानदार

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने वर्ष 2026 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। दोनों कक्षाओं में पास प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष हाईस्कूल में 77.15% और हायर सेकेंडरी में 83.04% परीक्षार्थी सफल रहे। साथ ही दोनों ही परीक्षाओं में बालिकाओं का प्रदर्शन बालकों से बेहतर रहा है। हाईस्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 3,21,677 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए। इनमें से 3,16,730 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 1,40,402 बालक तथा 1,76,328 बालिकाएं शामिल थीं। इनमें से 3,14,953 परीक्षार्थियों के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें 2,43,016 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार कुल 77.15 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 81.03% बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 72.27% श्रेणीवार परिणाम इस प्रकार है- प्रथम श्रेणी: 1,40,108 (44.48%) द्वितीय श्रेणी: 96,721 (30.71%) तृतीय श्रेणी: 6,187 (1.96%) एक या दो विषयों में 19,347 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण रहे। कुल 161 परीक्षार्थियों के परिणाम विभिन्न कारणों से रोके गए हैं, जिनमें 15 नकल प्रकरण और 143 जांच श्रेणी में शामिल हैं। वहीं 1,616 परीक्षार्थियों के आवेदन पात्रता के अभाव में निरस्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 3 परीक्षार्थियों के परिणाम बाद में घोषित किए जाएंगे। पिछले वर्ष से सुधार हायर सेकेंडरी (12वीं) का परिणाम, 83.04% छात्र सफल हायर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 2,46,166 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए। इनमें से 2,44,453 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 1,02,259 बालक तथा 1,42,194 बालिकाएं शामिल थीं। इनमें से 2,43,898 परीक्षार्थियों के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें 2,02,549 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार कुल 83.04 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 86.04% बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 78.86% श्रेणीवार परिणाम इस प्रकार है- प्रथम श्रेणी: 1,27,334 (52.2%) द्वितीय श्रेणी: 72,402 (29.68%) तृतीय श्रेणी: 2,806 (1.15%) पास श्रेणी: 7 परीक्षार्थी एक या दो विषयों में 23,866 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण रहे। कुल 63 परीक्षार्थियों के परिणाम विभिन्न कारणों से रोके गए हैं, जिनमें 5 नकल प्रकरण और 56 जांच श्रेणी में हैं। वहीं 492 परीक्षार्थियों के आवेदन पात्रता के अभाव में निरस्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2 परीक्षार्थियों के परिणाम बाद में घोषित किए जाएंगे। पिछले वर्ष से बेहतर प्रदर्शन वर्ष 2025 में पास प्रतिशत 81.87% था, जबकि इस वर्ष इसमें लगभग 1.17% की वृद्धि हुई है।

दूरस्थ बिनागुंडा गांव से मरीज को कठिन हालात में पहुंचाया गया अस्पताल

दूरस्थ बिनागुंडा गांव से मरीज को कठिन हालात में पहुंचाया गया अस्पताल पैदल और हाथों से उठाकर नेटवर्क क्षेत्र तक लाया गया, 108 एम्बुलेंस से पखांजूर, फिर जीएमसी कांकेर रेफर रायपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कांकेर की रिपोर्ट के अनुसार, एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को अत्यंत दुर्गम क्षेत्र बिनागुंडा से कठिन परिस्थितियों में निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बिनागुंडा गांव अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, जहां न तो सड़क संपर्क उपलब्ध है और न ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा। यह इलाका हाल ही में कैंप स्थापित होने के बाद पहुंच में आया है और कांकेर जिले की सीमा से लगा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मरीज की तबीयत अचानक 22 अप्रैल 2026 को बिगड़ गई थी। प्रारंभ में परिजनों ने स्थानीय बैगा (पारंपरिक वैद्य) से उपचार कराया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर मरीज को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। गांव में सड़क और संचार सुविधा के अभाव के चलते परिजनों ने मरीज को पैदल और हाथों से उठाकर उस स्थान तक पहुंचाया, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध था। वहां से 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी गई। इसके बाद मरीज को पहले नजदीकी कैंप तक लाया गया और फिर 108 एम्बुलेंस के माध्यम से पाखांजूर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर जांच एवं इलाज के लिए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMC) कांकेर रेफर किया है। स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।

Helmet Rule Confusion: कार ड्राइवर का कटा चालान, XUV700 केस ने उठाए सवाल

डोंगरगढ़. ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए लागू किया गया ई-चालान सिस्टम अब खुद अपनी विश्वसनीयता खोता नजर आ रहा है. ताजा मामला उस गंभीर तकनीकी खामी को उजागर करता है. एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर CG 04 QM 9295 दो अलग-अलग वाहन, जिनमें एक टू-व्हीलर और एक SUV कार पर दर्ज पाया गया. इस गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ा राजनांदगांव निवासी पीड़ित अमित गौतम को, जिनकी कार पर बिना हेलमेट के वाहन चलाने का चालान जारी कर दिया गया. अमित गौतम के पास XUV 700 कार है, लेकिन उनके मोबाइल पर जो ई-चालान पहुंचा, वह एक ऐसे उल्लंघन का था जो केवल दोपहिया वाहन से संबंधित होता है. पहले तो वे इस नोटिस को देखकर हैरान रह गए, लेकिन जब उन्होंने मामले की गहराई से जांच की, तब पूरा खेल सामने आया. पता चला कि इसी नंबर से एक बाइक भी सड़कों पर चल रही है, जो नियमों की अनदेखी कर रही है, जबकि चालान SUV मालिक के नाम पर फट रहा है. यह घटना RTO के डेटा मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है. वाहन पंजीयन जैसे संवेदनशील रिकॉर्ड में एक ही नंबर का दो बार दर्ज होना न सिर्फ तकनीकी चूक है, बल्कि यह सिस्टम की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. इसके साथ ही नंबर प्लेट पहचान (ANPR) तकनीक और ई-चालान जनरेशन प्रक्रिया की सटीकता भी संदेह के घेरे में आ गई है. पीड़ित अमित गौतम ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी गलती के उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि यदि वे समय रहते सच्चाई तक नहीं पहुंचते, तो उन्हें बेवजह जुर्माना भरना पड़ता. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “सिस्टम सुधारने की बजाय अगर ऐसे ही फर्जी चालान भेजे जाएंगे, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?” अमित गौतम अब इस मामले की शिकायत RTO के वरिष्ठ अधिकारियों से करने जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभाग इस गलती को स्वीकार कर सुधार और माफी नहीं देता, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. यह पूरा मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है, तकनीक पर आंख बंद कर भरोसा करना. जब सिस्टम में ही खामियां हों और उनकी समय पर जांच न हो, तो उसका सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है. जरूरत इस बात की है कि RTO अपने डेटा सिस्टम की व्यापक जांच करे, दोहराव और त्रुटियों को तुरंत दुरुस्त करे, और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शी व भरोसेमंद बनाए, ताकि ‘स्मार्ट सिस्टम’ वाकई स्मार्ट साबित हो, न कि आम लोगों के लिए मुसीबत.

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट आउट, टॉपर लिस्ट जारी—जिज्ञासु वर्मा और संध्या नायक ने मारी बाजी

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं बोर्ड के परिणाम घोषित कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की मौजूदगी में रिजल्ट जारी किया। इस दौरान टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की गई है। 10वीं की परीक्षा में टॉप 3 में महासमुंद जिले की 2 लड़कियों ने 594 नंबर के साथ बाजी मारी है। इनमें एकलव्य इंग्लिश स्कूल अर्जुंदा की संध्या नायक और एकलव्य स्कूल बलोदा की परीरानी प्रधान शामिल हैं। वहीं तीसरे स्थान पर मुंगेली के अंशुल शर्मा रहे। इन तीनों ने ही 99.00% अंक प्राप्त किए हैं। 42 स्टूडेंट्स ने टॉप-10 में जगह बनाई है। बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी, लेकिन 12वीं हिंदी का पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई। लाखों छात्रों को था रिजल्ट का इंतजार गौरतलब है कि हाई स्कूल परीक्षा की मुख्य परीक्षा 21 फरवरी 2026 से 13 मार्च 2026 तक आयोजित की गई थी, जिसमें कुल 3,20,535 छात्र शामिल हुए। इनमें 1,42,881 बालक और 1,77,654 बालिकाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में 2,510 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। वहीं हायर सेकेंडरी परीक्षा की मुख्य परीक्षा 20 फरवरी 2026 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित हुई, जिसमें कुल 2,45,785 छात्र शामिल हुए। इनमें 1,02,975 बालक और 1,42,810 बालिकाएं शामिल हैं। इस परीक्षा के लिए 2,395 परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए थे। रिजल्ट देखने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो स्टूडेंट्स इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना रिजल्ट चेक और डाउनलोड कर सकते हैं— ऑफिशियल वेबसाइट cgbse.nic.in या results.cg.nic.in पर जाएं। होमपेज पर जाकर CGBSE Class 10 Result 2026 या CGBSE Class 12 Result 2026 के लिंक पर क्लिक करें। यहां अपना रोल नंबर, डेट ऑफ बर्थ और कैप्चा कोड एंटर करें। आपकी मार्कशीट कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देगी। इसे चेक करें और भविष्य में इस्तेमाल के लिए इसका प्रिंटआउट लेना न भूलें। ऑफिशियल वेबसाइट के अलावा स्टूडेंट्स SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। 10वीं का रिजल्ट देखने के लिए CG10 के साथ अपना रोल नंबर टाइप करें और 56263 पर भेज दें। 12वीं कक्षा के टॉपर रैंक     नाम     प्रतिशत     प्राप्तांक 1     जिज्ञासु वर्मा     98.60%     493 2     ओमनी     98.20%     491 3     कृष महंत     97.80%     489 4     रिया साहू     97.60%     488 4     शहनाज परवीन     97.60%     488 4     ताहिर खान     97.60%     488 5     कुसुमलता बिप्रे     97.40%     487 5     हेमलता साहू     97.40%     487 5     ओमकार कैव्रत     97.40%     487 5     आशा यादव     97.40%     487 ये हैं 10वीं के टॉपर्स के नाम  स्थान     विद्यार्थी का नाम     अंक     प्रतिशत 1st     संध्या नायक     594     99.00% 1st     परी रानी प्रधान     594     99.00% 1st     अंशुल शर्मा     594     99.00% 2nd     रिया केशवानी     593     98.83% 2nd     रानु सिद्धमयी साहू     593     98.83% 2nd     रेणुका प्रधान     593     98.83% 2nd     दीपांशी बौद्ध     593     98.83% 2nd     नंदिता देवगन     593     98.83%